प्रस्तावना
धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए बनाया गया न्यास जो वाणिज्यिक गतिविधि करने का इच्छुक नहीं है, को आयकर अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न लाभ अन्य विषयों के साथ-साथ, धारा 11 के अंतर्गत छूट की स्वीकृति हैं।
शब्द धार्मिक उद्देश्य आयकर अधिनियम के अंतर्गत परिभाषित नहीं है। हालांकि, अधिनियम की धारा 2(15) गरीबों को राहत, शिक्षा, चिकित्सा सुविधा, पर्यावरण संरक्षण (जलोत्सारण क्षेत्र, वन तथा वन्य जीव सहित) तथा स्मारकों अथवा स्थानों का संरक्षण अथवा कलात्मक अथवा ऐतिहासिक हित तथा सामान्य जन उपयोगिता के अन्य किसी उद्देश्य की उन्नति को शामिल करने हेतु "धर्मार्थ उद्देश्य" को परिभाषित करता है।
बशर्ते कि सामान्य जन उपयोगिता के अन्य किसी उद्देश्य की उन्नति धर्मार्थ उद्देश्य नहीं होगा यदि इसमें ऐसी गतिविधि से आय के उपकर अथवा शुल्क अथवा अन्य किसी प्रतिफल, अवधारण अथवा प्रयोग की प्रकृति बावजूद, के लिए किसी व्यापार, वाणिज्य अथवा व्यवसाय के संबंध में किसी सेवा के प्रतिपादन की किसी गतिविधि अथवा व्यापार, वाणिज्य अथवा व्यवसाय के रूप में किसी गतिविधि का निवर्हन शामिल है जबतक -
(i) ऐसी गतिविधि जनसाधारण के किसी अन्य उद्देश्य की ऐसी उन्नित में से वास्तविक गतिविधि करने के दौरान की जाती है और
(ii) पिछले वर्ष के दौरान ऐसी गतिविधि या गतिविधियां उस पिछले वर्ष की ऐसी गतिविधि या गतिविधियों को करने वाले न्यास या संस्ािान की कुल प्राप्ति के 20 प्रतिशत से अधिक नही है
- स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?
- स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?
- एक धर्मार्थ न्यास जिसे धारा 139(4क) के अंतर्गत विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है
- प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक है जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है
- स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?
- स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क हैं ?
- स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?
- ‘‘सुधारक’’ (उस देश के संबंध में जो देश अपोस्टिल सम्मेलन के हस्ताक्षरकर्ता हैं) द्वारा देश, जहां आवेदक स्थित है, में भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा वाणिज्य दूतावास द्वारा अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंकों की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित पंजीकरण के प्रमाणपत्र की प्रति उस देश में जारी की गई हो जहां आवेदक स्थित है।
- भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन
- किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करना हैं ?
- संपर्क सहायता
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?
पैन का अर्थ हैं स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या हैं। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड के प्रारूप में जारी किया जाता है (साधारण पैन के तौर पर प्रसिद्ध)। नीचे दिया गया पैन का वर्णन है : एएलडब्ल्यूटीजी5809एल
स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता हैं। एक न्यास (ट्रस्ट) को शब्द ‘‘टी’’ से प्रदर्शित किया जाता है। (e.g. एएलडब्ल्यूटीजी5809एल)
स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?
स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :
पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है=--
• प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।
• एक धर्मार्थ न्यास जिसे प्रत्येक व्यक्ति जो कोई भी व्यवसाय या कारोबार कर रहा हो जिसका कुल बिक्री हो, के तहत 139(4क) के तहत विवरणी प्रस्तुत करना होता है.टर्नओवर.या सकल प्राप्तियां पूर्व वर्ष में प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है जो हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।
• उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।
स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें?
1) ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआईआईटीएसएल या प्रोटेन (पहले NSDL eGov के तौर पर ज्ञात) की वेबसाइट से किया जा सकता है
ऑनलाइन आवेदन के लिए क्लिक करें
2) स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन निम्न जगह पर जमा किया जा सकता है
(क) प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई-गर्वे के तौर पर ज्ञात)(ख) UTITSL
स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क हैं ?
भारतीय पते पर संप्रेषण के लिए पैन के आवेदन के लिए शुल्क रू. 110 (रू. 93 का आवेदन शुल्क + 18 प्रतिशत जीएसटी) है और विदेशी पते पर संप्रेषण के लिए रू. 1020 (जीएसटी) है
स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना ?
भारत में पंजीकृत न्यास को स्थाई खाता संख्या के साथ पूर्त्त आयुक्त द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा न्वास विलेख की प्रति को जमा करना होगा।
न्यास के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :
किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करना हैं ?
पैन के लिए आवेदन पर न्यासी द्वारा हस्ताक्षर किया जाएगा (हस्ताक्षर न कर पाने की स्थिति में बाएं अंगूठे का निशान)
संपर्क सहायता
आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है
| विधि आयकर विभाग प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) यूटीआईटीएसएल | |||
| वेबसाइट | www.incometaxindia.gov.in | https://www.protean-tinpan.com/ | www.utiitsl.com |
| कॉल सेंटर | 08069708080 | ||
| ई-मेल आईडी | tininfo@proteantech.in | ||
| पता |
प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) |
यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्नालॉजी एंड सर्विस लिमिटेड, |
|
यदि आपका स्थाई खाता संख्या (पैन) कार्ड खो जाए ?
अगर पैनकार्ड खो जाए तो आप डुप्लीकेट पैनकार्ड के लिए"नए पैनकार्ड के लिए प्रार्थना या/ और पैनकार्ड के डेटा में बदलाव या सुधार"फॉर्म भरकर प्रस्तुत कर सकते हैं, और उसके साथ एफ आई आर की कॉपी लगायी जा सकती है। अगर पैनकार्ड खो गया और आपको पैन याद नहीं है तो आयकर विभाग द्वारा दी गयी"अपना पैन जानो" की सुविधा से पैन का पता लगाया जा सकता है। यह सुविधा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in से मिल सकती है।
पैन की ऑनलाइन जानकारी नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि जैसे कोर विवरण देने से मिल सकती है। पैन जानने के बाद आप डुप्लीकेट पैन के लिए "नए पैनकार्ड के लिए प्रार्थना या/ और पैनकार्ड के डेटा में बदलाव या सुधार"फॉर्म भरकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
स्थाई खाता संख्या (पैन) कार्ड को प्राप्त करने के क्या लाभ हैं ?
पैन आयकर विभाग से हर लेन-देन के लिए अनिवार्य किया गया है। यह अनेक वित्तीय लेन-देन के लिए भी अनिवार्य है, जैसे बैंक में खाता खोलने, संस्थागत वित्तीय ऋण लेना, उच्चतम उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद, विदेशी यात्रा, अचल संपत्ति का लेन-देन, प्रतिभूतियों के व्यवसाय इत्यादि। पैन एक महत्पूर्ण फोटो पहचान है जिसे देश की सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं मानती हैं।
क्या प्रपत्र 49क/49कक में निर्धारण अधिकारी को उपबंधित करना अनिवार्य हैं ?
हाँ, फॉर्म 49क/49कक में आकलन अधिकारी (एओ ) कोड देना आवश्यक है आकलन अधिकारी के क्षेत्राधिकर के एओ कोड को (यानि एरिया कोड, एओ टाईप, सीमा(रेंज) कोड और (एओ) संख्या) आवेदक को भरनी चाहिए। इसका विवरण आयकर विभाग के दफ्तर या पैन केंद्र से या पैन सेवा प्रदाता की वेबसाइट www.utiitsl.com or https://www.protean-tinpan.com/ से प्राप्त करी जा सकती है।
स्थाई खाता संख्या से संबंधित प्रावधानों के साथ अनुपालन न करने के लिए क्या जुर्माना हैं ?
धारा 272ख में करदाता द्वारा पैन से संबधित प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान है, यानि पैन लेने का उत्तरदायी होते हुए भी पैन नहीं प्राप्त करना, या किसी निर्धारित दस्तावेज पर, जिसमे पैन उद्धृत करना अनिवार्य है, उसमे जानबूझ कर गलत पैन देना, या कर की कटौती करने वाले को या कर लेने वाले को गलत पैन देने पर धारा 272ख के अंतर्गत रु.10,000 का जुरमाना लगाया जा सकता है।
क्या एक व्यक्ति एक से अधिक स्थाई खाता संख्या (पैन) रख सकता है ?
एक व्यक्ति एक से अधिक पैन नहीं रख सकता। यदि एक व्यक्ति को पैन आवंटित हो गया है, तो वह दूसरे पैन की प्राप्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता। 1961 के आयकर अधिनियम धारा 272ख के अंतर्गत एक से अधिक पैन रखने पर रु. 10,000 के जुर्माने का प्रावधान है।
अगर एक व्यक्ति को एक से अधिक पैन आवंटित हो गया है तो उसे तुरंत अतिरिक्त पैन कार्ड या कार्डों को तुरंत वापिस कर देना चाहिए।
क्या पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है?
हर उस व्यक्ति को पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है जो आधार नंबर प्राप्त करने के योग्य है। यदि व्यक्ति के पास आधार नंबर न हो तो आधार नामांकन आईडी दी जा सकती है।
टिप्पणी प्रभावी तिथि 01.10.2024 से आधार प्रपत्र की नामांकन संख्या को उद्धृत नहीं किया जा सकेगा। करदाता को पैन आवेदन पत्र में अपने आधार नंबर को उद्धृत करना आवश्यक है।
- गृह संपत्ति से आय
- गृह संपत्ति में उसका कोई भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए
- करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए
- गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए
- व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोई मुआवजा अथवा अन्य भुगतान
- पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
- पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
- यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए
- स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए
- अन्य स्रोतों से आय
शीर्ष आय
गृह संपत्ति से आय
कराधान के लिए शर्तें
व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
निम्नलिखित आय व्यापार अथवा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :
पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
प्रभार्यता के लिए शर्तें
अन्य स्रोतों से आय
अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
1. वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ )पर लॉग आन करें।
2. ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान" पर क्लिक करें
3. फिर "नए भुगतान " पर क्लिक करें
4. 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
क. विक्रेता की आवासीय स्थिति
ख. विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्या
ग. विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
घ. संपत्ति का विवरण
ड़. भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
6. जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी
क. नेट बैंकिंग
ख़ डेबिट कार्ड
ग बैंक काउंटर पर भुगतान
घ आरटीजीएस/एनईएफटी या
ड़ भुगतान गेटवे
7. उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
- कर की दरें क्या हैं ?
- कर का भुगतान कैसे करें ?
- भौतिक विधि : नामित बैंक में चालान की हार्ड प्रति की प्रस्तुति द्वारा भुगतान
- ई-भुगतान : करों का भुगतान इलैक्ट्रानिक रूप से भी किया जा सकता है
कर की दरें क्या हैं ?
एक न्यास स्लैब दर के अनुसार कर हेतु वसूलनीय है जो व्यक्ति (वरिष्ठ नागरिक अथवा अति वरिष्ठ नागरिक के तौर पर नहीं) हेतु प्रयोज्नीय हैं।
कर का भुगतान कैसे करें ?
आयकर का भुगतान करने की दो विधियां हैं :
- क्या न्यास के लिए आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?
- आय की विवरणी दाखिल करने के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?
- क्या न्यास के लिए विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?
- विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि ?
विवरणी दाखिलीकरण
क्या न्यास के लिए आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?
धारा 139(4क), 139(4ग), 139(4घ) तथा 139(4ड़) में संदर्भित न्यास के लिए आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है।
इसके अतिरिक्त, एक न्यास (उक्त प्रावधान में न आने वाले) को आय की विवरणी दाखिल करना आवश्यक है यदि इसकी सकल कुल आय अधिकतम राशि जो कि कर हेतु वसूलनीय नही है, से अधिक हो।
आय की विवरणी दाखिल करने के लिए कौनसा प्रपत्र प्रयोग किया जाएगा ?
एक न्यास जिसे धारा 139(4क), 139(4ग) अथवा 139(4घ), 139(4ड़) के प्रावधानों के अनुसार आय की विवरणी दाखिल करना आवश्यक हो उसे आयकर विवरणी 7 अन्यथा आयकर विवरणी 5 में विवरणी दाखिल करनी होगी।
| आईटीआर | ब्यौरा | |
| आईटीआर 5 | (i) व्यष्टि (ii) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब (iii) कंपनी और (iv) प्ररूप आईटीआर-7 फाईल करने वाले व्यक्ति से भिन्न व्यक्ति | पीडीएफ |
| आईटीआर-7 | उन व्यक्तियों के लिए, जिनके अंतर्गत कंपनियां भी है, जिनसे केवल धारा 139 (4क) या धारा 139 (4ख) या धारा 139 (4ग) या धारा 139 (4घ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित है | पीडीएफ |
क्या न्यास के लिए विवरणी का ई-दाखिलीकरण अनिवार्य है ?
एक न्यास के लिए डिजीटल हस्ताक्षर के साथ अथवा उसके बिना इलैक्ट्रानिक रूप से आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है। एक न्यास इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के अंतर्गत आय की विवरणी को भी दाखिल कर सकती है। हालांकि धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों का अंकेक्षण कराने के लिए उत्तरदायी एक न्यास को डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरणी दाखिल करना होगा।
विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि ?
न्यास द्वारा विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार है :
| विवरण | नियत तिथि |
| एक न्यास जिसे आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराना आपेक्षित है | निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर |
| एक न्यास जिसे धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट करना आपेक्षित हैं | निर्धारण वर्ष का 30 नवंबर |
| अन्य किसी मामले में | निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई |
- प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
- प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- सेवाओं पर जाएं और “प्रतिदाय पुनः जारी करें” पर क्लिक करें
- प्रतिदाय पुनःनिर्गम अनुरोध करें
प्रतिदाय
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें:
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:
- क्या न्याय का पंजीकरण अनिवार्य है ?
- पंजीकरण के लिए आवेदन हेतु प्रयोग किए जाने वाला प्रपत्र ?
- आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज ?
पंजीकरण के लिए आवेदन हेतु प्रयोग किए जाने वाला प्रपत्र ?
एक न्यास को प्रपत्र सं. 10क में पंजीकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है
आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज ?
दस्तावेज जिसे आवेदन प्रपत्र सं. 10क सहित प्रस्तुत करना आपेक्षित हो, निम्नानुसार है :
(ख) जहां एक न्यास या संस्थान को न्यास बनाने या संस्थान को गठित करने के दस्तावेजी प्रमाण की स्व-प्रमाणित प्रति, दस्तावेज को छोड़कर बनाया या संस्थापित किया जाता है।
(ग) कंपनी रजिस्ट्रार या फर्म और सोसाइटी के रजिस्ट्रार और सार्वजिनक न्यास के रजिस्ट्रार, जो भी मामला हो, के पंजीकरण की स्व-प्रमाणित प्रति
(घ) लक्ष्यों, यदि हो को अपनाने या संशोधन को दर्शाते हुए दस्तावेज की स्व-प्रमाणित प्रति
(ड़) जहां न्यास या संस्थान उस वित्त से पहले के किसी वर्ष या वर्षों के दौरान मौजूदगी में रहा हो जिसमें पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया हो, ऐसे पूर्व वर्ष या वर्षों (वर्ष जिसमें कथित आवेदन किया गया के तुरंत पहले के तीन वर्षों से अधिक नही) जिसके लिए ऐसे खातों को बनाया गया हो, से संबंधित न्यास या संस्थान के वार्षिक खातों की स्व-सत्यापित प्रति, न्यास या संस्थान की गतिविधियों पर टिप्पणी
(च) धारा 12क या धारा 12कख, जो भी मामला हो, के अंतर्गत मौजूदा आदेश प्रदान करने वाले पंजीकरण की स्व-प्रमाणित प्रति और
(छ) धारा 12क या धारा 12कख, जो भी मामला हो, के अंतर्गत पंजीकरण देने के लिए आवेदन को निरस्त करने के आदेश की स्व-प्रमाणित प्रति, यदि हो
न्यास हेतु छूट
धर्मार्थ तथा धार्मिक न्यास की आय कुछ शर्तों के अनुसार कर से छूट प्राप्त है। छूट विभिन्न प्रावधान अन्य विषयों के साथ धारा 10, धारा 11 आदि के अंतर्गत न्यास हेतु उपलब्ध हैं। न्यास हेतु उपलब्ध कुछ छूट निम्नानुसार हैं :
- 1) धारा 11 उस सीमा तक जहां ऐसी आय भारत में धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए लागू होती है, पूर्णता धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्य के लिए न्यास के अंतर्गत धारित संपत्ति से व्युत्पन्न आय के लिए छूट उपलब्ध कराती है। हालांकि, यह छूट कुछ शर्तों के अनुसार दी जाएगी।
- 2) धारा 12 को देखते हुए, पूर्णता धर्मार्थ अथवा धार्मिक उद्देश्यों के लिए बनाए गए न्यास द्वारा अथवा पूर्णता ऐसे उद्देश्यों के लिए संस्थापित संस्थान द्वारा प्राप्त स्वैच्छिक अंशदान के रूप में आय कर से भी छूट प्राप्त होगी (कुछ शर्तों के अनुसार)
- 3) चुनिंदा न्यास द्वारा प्राप्त कोई स्वैच्छिक अंशदान उसकी कुल आय में शामिल नहीं होगी (कुछ शर्तों के अनुसार)
- 4) शैक्षणिक संस्थान की आय धारा 10(23ग) (iiiकख)/(iiiकघ)/(vi) के अंतर्गत छूट का विषय है
- 5) अस्पताल अथवा अन्य संस्थान की आय छूट प्राप्त करने के लिए पात्र होगा यदि वह धारा 10(23ग)(iiiकग)(iiiकड़)(viक) के अंतर्गत निर्धारित शर्तों को पूरा करता है।

