Hindu Undivided Family (HUF)
Hindu Undivided Family (‘HUF’) is treated as a ‘person’ under Section 2(31) of the Income-tax Act, 1961 (hereinafter referred to as ‘the Act’). HUF is a separate entity for the purpose of assessment under the Act.
Under Hindu Law, an HUF is a family which consists of all persons lineally descended from a common ancestor and includes their wives and unmarried daughters. An HUF cannot be created under a contract; it is created automatically in a Hindu family.
Jain and Sikh families, even though they are not governed by Hindu Law, are treated as HUFs under the Act.
Assessment of HUF:
An HUF is recognised as a separate assessable entity under the Act. Its income may be assessed if the following two conditions are satisfied:
There should be a coparcenary. Once joint family income is assessed as the income of an HUF, it continues to be assessed as such in subsequent assessment years until partition is claimed by the coparceners.
There should be joint family property consisting of ancestral property, property acquired with the aid of ancestral property and property transferred by its members.
Ancestral Property: Ancestral property may be defined as property inherited by a person from any of his three immediate male ancestors, namely, his father, grandfather and great-grandfather. Therefore, property inherited from any other relation is not treated as ancestral property. Income from ancestral property held by the following families is taxable as the income of an HUF:
a) A family consisting of a widowed mother and sons, whether minor or major;
b) A family consisting of a husband and wife having no child;
c) A family consisting of two widows of deceased brothers;
d) A family consisting of two or more brothers;
e) A family consisting of an uncle and nephew;
f) A family consisting of a mother, son and son's wife;
g) A family consisting of a male member and his late brother's wife.
Note
Property obtained by a daughter from joint family property would be her absolute property. Any income therefrom is chargeable to tax in her hands in the individual status only. This also applies to any legal heir obtaining property in the capacity of a descendant.
Taxability of HUF
In order to compute the income of an HUF, one has to first ascertain its income under the different heads of income, ignoring income exempted under Section 10 to Section 13A of the Act. The following points should be kept in mind while computing income:
- किसे स्थाई खाता संख्या प्राप्त करनी है ?
- स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?
- स्थिति का पता लगाएं
- संपर्क सहायता
स्थाई खाता संख्या
किसे स्थाई खाता संख्या प्राप्त करनी है ?
पैन निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :
प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या उसके संबंध में किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान मूल्यांकन किया जाना है उस राशि से अधिक है जो कर के लिए नही वसूली जानी है। एक धर्मांर्थ न्यास जिसे धारा 139(4क) के अंतर्गत विवरणी को प्रस्तुत करना आवश्यक है। वह प्रत्येक व्यक्ति जो किसी प्रकार का व्यापार या पेशा करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार या कुल प्राप्तियां पिछले वर्ष के दौरान पांच लाख से अधिक है या उससे अधिक होने की संभावना है। प्रत्येक आयातक/निर्यातक जिसे आयात निर्यात कोड प्राप्त करना आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति जो ऐसा निर्दिष्ट लेनदेन करता है जिसमें पैन को उद्धृत करना आवश्यक है। एक व्यक्ति जो उक्त में से किसी में भी शामिल नही है वह स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है। प्रत्येक अनिवासी व्यक्ति और उनसे संबंधित व्यक्ति पैन के लिए आवेदन करेगा यदि वित्त वर्ष के दौरान उनके द्वारा किया गया वित्तीय लेनदेन रू. 2,50,000 से अधिक होता है।
स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें?
1) ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआईआईटीएसएल या प्रोटेन (पहले NSDL eGov के तौर पर ज्ञात) की वेबसाइट से किया जा सकता है
ऑनलाइन आवेदन के लिए क्लिक करें
2) स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन निम्न जगह पर जमा किया जा सकता है
(क) प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई-गर्वे के तौर पर ज्ञात)(ख) UTITSL
स्थाई खाता संख्या आवेदन पत्र डाउनलोड करें
पैन डेटा में परिवर्तन या संशोधन के लिए प्रपत्र
पैन आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज
| लागू होने वाला प्रपत्र | 49क | |
| आवेदन के लिए आपेक्षित दस्तावेज | (क) आवेदन की तिथि पर समस्त सहदायकों का नाम, पिता का नाम, पता निर्दिष्ट करते हुए हिन्दू अविभाजित परिवार के कर्ता द्वारा शपथपत्र तथा (ख) पहचान, पता तथा जन्म तिथि के प्रमाण के तौर पर हिन्दू अविभाजित परिवार के कर्ता के संबंध में व्यक्ति की स्थिति में प्रयोज्नीय किसी दस्तावेज की प्रति |
स्थिति का पता लगाएं
आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती है।
संपर्क सहायता
आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है
| विधि आयकर विभाग प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) यूटीआईटीएसएल | |||
| वेबसाइट | www.incometaxindia.gov.in | https://www.protean-tinpan.com/ | www.utiitsl.com |
| कॉल सेंटर | 08069708080 | ||
| ई-मेल | tininfo@proteantech.in | ||
| पता | प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) आयकर पैन सेवा यूनिट (प्रोटेन ई-गर्वे टैक्नलॉजी लिमिटेड द्वारा प्रंबंधित) चौथा तल, सफायर चैंबर्स, बानेर रोड़, बानेर, पुणे-411045 |
यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्नालॉजी एंड सर्विस लिमिटेड, प्लॉट नं. 3, सेक्टर 11, सीबीडी बेलापुर नवी मुंबई पिन - 400614 |
|
- गृह संपत्ति से आय
- गृह संपत्ति में उसका कोई भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए;
- करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए;
- गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए।
- व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोई मुआवजा अथवा अन्य भुगतान
- पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
- पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
- यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए;
- स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए
- अन्य स्त्रोतों से आय
शीर्ष आय
गृह संपत्ति से आय
कराधान के लिए शर्तें
व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
निम्नलिखित आय व्यापार तथा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :
पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
प्रभार्यता के लिए शर्तें:
अन्य स्त्रोतों से आय
अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी।
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
1. वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर लॉग आन करें।
2. ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान " पर क्लिक करें
3. फिर "नए भुगतान " पर क्लिक करें
4. 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
क. विक्रेता की आवासीय स्थिति
ख विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्या
ग विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
घ संपत्ति का विवरण
ड़ भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
6. जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी
क. नेट बैंकिंग
ख़ डेबिट कार्ड
ग बैंक काउंटर पर भुगतान
घ आरटीजीएस/एनईएफटी या
ड़ भुगतान गेटवे
7. उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
- आयकर का भुगतान किसे करना चाहिए ?
- कर की गणना कैसे करें ?
- कर भुगतान कैसे करें ?
- वास्तविक विधि - नामित बैंक में चालान की हार्ड प्रति की प्रस्तुति द्वारा भुगतान
- ई-भुगतान विधि अर्थात् इलैक्ट्रानिक विधि का प्रयोग करके भुगतान करना
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
कर भुगतान
आयकर का भुगतान किसे करना चाहिए ?
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, यदि आप रू. 2,50,000 से अधिक की आय कमाने वाले हिन्दू अविभाजित परिवार है तो आपको आयकर का भुगतान करने की आवश्यकता है।
कर की गणना कैसे करें ?
कुल आय अर्थात् कर हेतु देय राशि, को सुनिश्चित करने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना करना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी। आगे देखें
कर गणक
कर दरें
कर भुगतान कैसे करें ?
आयकर भुगतान करने के दो तरीके है तथा व्यक्ति कर का भुगतान करने के लिए किसी भी एक विधि को चुन सकते है
किसे अग्रिम कर का भुगतान करना है ?
प्रत्येक व्यक्ति जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक है अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि, एक घरेलू निवासी व्यक्ति (यानी प्रांसगिक वित्त वर्ष के दौरान 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु का व्यक्ति) जिसकी व्यापार या पेशे से आय नही है वह अग्रिम कर देने के लिए जिम्मेदार नही है।
अग्रिम कर को वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का निम्नानुसार किश्तों में भुगतान किया जाना है :
| स्थिति | 15 जून तक | 15 सितम्बर तक | 15 दिसंबर तक | 15 मार्च तक |
| करदाता (उनको छोड़कर जिन्होंने धारा 44कघ की काल्पनिक कराधान योजना को चुना है) | अग्रिम कर के 15 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 45 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 75 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 100 प्रतिशत तक |
| करदाता (जिन्होंने धारा 44कघ की काल्पनिक कराधान योजना को चुना है) | शून्य | शून्य | शून्य | अग्रिम कर के 100 प्रतिशत तक |
31 मार्च तक दिए गए किसी भी कर को अग्रिम कर के तौर पर समझा जाएगा।
अग्रिम कर को प्रासंगिक कॉलम, अर्थात् अग्रिम कर पर चिन्ह लगाकर आईटीएनएस 280 चालान के माध्यम जमा किया जाना है।
- किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?
- यदि एक व्यक्ति की भारत से बाहर परिसंपत्ति हो :
- एक व्यक्ति, एक निवासी और भारत में साधारण निवासी के तौर पर, अपनी आय की विवरणी को दाखिल करेगा, भले ही उसकी आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो यदि उसके पास
- क) लाभार्थी मालिक या अन्यथा के तौर पर भारत से बाहर स्थित कोई परिसंपत्ति (किसी उद्यम में किसी वित्तीय हित सहित) हो
- ख) भारत के बाहर स्थित किसी खाते में हस्ताक्षरी प्राधिकारी हो
- ग) भारत के बाहर स्थित किसी परिसंपत्ति (किसी उद्यम में किसी वित्तीय हित सहित) का लाभार्थी हो
- यदि वह बैंक खाते में रू. 1 करोड़ से अधिक जमा करता हो।
- एक व्यक्ति या एचयूएफ अपनी आय की विवरणी दाखिल करेगा भले ही आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो, यदि उसने बैंकिंग कंपनी या एक सहकारी बैंक में एक या एक से अधिक चालू खाते में रू. 1 करोड़ से अधिक की राशि (या कुल राशि) जमा की हो.
- यदि विदेशी यात्रा व्यय रू. 2 लाख से अधिक हो।
- एक व्यक्ति या एचयूएफ अपनी आय की विवरणी दाखिल करेगा भले ही आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो, यदि उसने अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति पर एक विदेशी यात्रा पर रू. 2 लाख से अधिक व्यय किया हो .
- यदि विद्युत की खपत रू. 1 लाख से अधिक हो.
- एक व्यक्ति या एचयूएफ अपनी आय की विवरणी को दाखिल करेगा भले ही आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो, यदि उसने विद्युत की खपत पर रू. 1 लाख से अधिक का व्यय किया हो।.
- यदि व्यापार की कुल बिक्री, कारोबार या कुल प्राप्तियां पिछले वर्ष के दौरान रू. 60 लाख से अधिक होती है
- यदि पेशे की कुल प्राप्ति पिछले वर्ष के दौरान रू. 10 लाख से अधिक होती है.
- यदि पिछले वर्ष के दौरान एक व्यक्ति के मामले में काटा गया या एकत्रित किया गया कुल कर रू. 25,000 या उससे अधिक (रू. निवासी वरिष्ठ नागरिक के मामले में रू. 50,000) होता है..
- यदि व्यक्ति के एक या एक से अधिक बैंक खाते में कुल जमा पिछले वर्ष के दौरान रू. 50 लाख या उससे अधिक होता है।.
- आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज
- आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?
- आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
विवरणी दाखिलीकरण
किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?
प्रत्येक व्यक्ति को आय की विवरणी दाखिल करनी है यदि उसकी कुल आय (किसी अन्य व्यक्ति की आय सहित जिसके संदर्भ में वह निर्धारणीय है) धारा 10(38), 10क, 10ख या 10खक या 54 या 54ख या 54घ या 54ड़ग या 54च या 54छ या 54छक या 54छख या अध्याय VIक (यानी धारा 80ग से धारा 80प के अंतर्गत कटौती) के प्रावधानों को प्रभावी किए बिना अधिकतम राशि से अधिक हो जो कर हेतु वसूलनीय नही है यानी छूट की सीमा से अधिक है।
आय की विवरणी को निम्नलिखित मामलों में दाखिल करना अनिवार्य है :
आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज
आईटीआर विवरणी प्रपत्र कम प्रपत्र संलग्नता हैं तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नही हैं। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जानें चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जानें पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक,80-झख,80-झग,80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115ञख अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे।
आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?
आय की विवरणी को या तो आयकर विभाग के स्थानीय कार्यालय में हार्ड प्रति के रूप में अथवा https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल किया जा सकता है।
| आयकर | विवरणी | संबंधी ब्यौरा |
| आईटीआर 2 | व्यष्टिको और हि.अ.कु. के लिए, जिनकी कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ से आय नहीं है | पीडीएफ |
| आईटीआर 3 | कारबार या वृत्ति से लाभ या अभिलाभ से आय प्राप्त करने वाले व्यष्टियो और हिन्दू अविभक्त कुटुम्बों के लिए | पीडीएफ |
| आईटीआर 4 उन निवासी व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ), और फर्मों (एलएलपी के अलावा) के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी व्यावसायिक आय या पेशे से आय है जो धारा 44कघ, 44कघक या 44कङ के तहत संगणित की जाती है और जिनकी धारा 112क के तहत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ है, बशर्ते यह लाभ 1.25 लाख रुपये तक हो। | पीडीएफ | |
| पिछले वर्ष का विवरणी प्रपत्र देखें | ||
आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि
आय की विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार है :
| व्यक्ति/अविभाजित हिंदु परिवार या फर्म के सांझेदार जिनके खाते अंकेक्षित होने हैं या ऐसे सांझेदार का जीवनसाथी यदि धारा 5क के प्रावधान लागू होते हैं, | - के लिए निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर |
| विवरणी का दाखिलीकरण जहां एक करदाता (फर्म के सांझेदार सहित कार्पोरेट/गैर-कार्पोरेट) जिसे धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है | - निर्धारण वर्ष का 30 नवंब |
| अन्य समस्त मामलों में | निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई |
क्या नियत तिथि के पश्चात् विवरणी को दाखिल किया जा सकता है ?
हां, यदि कोई निर्धारित नियत तारीख को या उससे पहले आयकर विवरणी दाखिल नहीं कर सका है तो वह विलम्बित विवरणी दाखिल कर सकता हैं। विलम्बित विवरणी निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 3 महीने पहले या निर्धारण पूरा होने से पहले, जो भी पहले, दाखिल की जा सकती है। निर्धारित नियत तिथि के बाद दाखिल की गई विवरणी को विलम्बित विवरणी कहा जाता है।
E.g., उदाहरण के लिए, वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अर्जित आय के मामले में, विलम्बित विवरणी 31 दिसंबर, 2025 तक दाखिल की जा सकती है।
मुझे प्रमाण के तौर पर दाखिल विवरणी की प्रति को रखना अनिवार्य हैं तथा कितने समय के लिए ?
हां, चूंकि आयकर अधिनियम के अंतर्गत कानूनी कार्यवाहियां चालू वित्त वर्ष से पहले के तीन या दस वर्षों (जो भी मामला हो) तक प्रारंभ की जा सकती है, आपको कम से कम इस अवधि के लिए ऐसे दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में कार्यवाहियां 10 वर्षों के बाद भी की जा सकती है, इसलिए, जब तक संभी हो प्रति को सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है। आगे, ई-दाखिलीकरण सुविधा के प्रारंभ होने के बाद, आय की विवरणी की प्रति को सुरक्षिर रखना बेहद आसान और सरल है।
विभिन्न कटौतियां हैं जो नियोक्ता द्वारा जारी प्रपत्र 16 में प्रतिबिंबित नहीं होतीं . क्या मैं मेरी विवरणी में उनका दावा कर सकता हूं ?
हां, इसका दावा किया जा सकता है यदि आप अन्यथा इसका दावा करने योग्य हो।
क्या विलंबित विवरणी को दाखिल करने हेतु एक आयकर विवरणी को अंतिम तिथि की समाप्ति के बाद प्रस्तुत किया जा सकता है?
अद्यतित विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए धारा 139 को शामिल किया गया है । धारा बताती है कि एक अद्यतित विवरणी इस तथ्य के बाजवूद किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की जा सकती है कि क्या ऐसे व्यक्ति ने पहले ही मूल , विलंबित या संशोधित विवरणी प्रासंकिगत निर्धारण वर्ष के लिए प्रस्तुत की है या नही ( कुछ शर्तों के अनुसार )। एक अद्यतित विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों के अंदर किसी भी समय प्रस्तुत किया जा सकता है ।
आय की विवरणी को दाखिल करने पर समस्त अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें
- प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- लंबित कार्यवाही पर जाएं और निम्न पर क्लिक करें
- शेष मांग का प्रतिउत्तर
- प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- सेवाओं पर जाएं और “प्रतिदाय पुनः जारी करें” पर क्लिक करें
- प्रतिदाय पुनःनिर्गम अनुरोध करें
प्रतिदाय
प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
प्रतिदाय/मांग स्थिति देखनें के लिए, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें :
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें:
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:

