कर कटौतीकर्ता
प्रस्तावना
करों के त्वरित तथा दक्ष संग्रहण के लिए, आयकर अधिनियम में आय के उत्सर्जन के बिंदु पर कर की कटौती की प्रणाली को अनिगमित किया गया है। इस प्रणाली को "स्रोत पर कर कटौती" कहा जाता है जिसे टीडीएस के तौर पर जाना जाता है। इस प्रणाली के अंतर्गत, कर आय के उद्गम के बिंदु पर काटा जाता है। कर दाता द्वारा काटा जाता है तथा इसे अदाता की ओर से दाता द्वारा सरकार को प्रत्यक्ष रूप से प्रेषित किया जाता है।
वर्तमान में स्रोत पर कर कटौती का प्रावधान विभिन्न भुगतान जैसे वेतन, ब्याज, कमीशन, दलाली, पेशेवर शुल्क, रायल्टी आदि हेतु लागू होता है।
- कर कटौती खाता संख्या का अर्थ
- टैन के लिए आवदेन करने वाला उत्तरदायी व्यक्ति
- टैन की प्रासंगिकता
- (क) टीडीएस विवरण अर्थात् विवरणी
- (ख) टीडीएस के भुगतान के लिए चालान
- (ग) टीडीएस प्रमाणपत्र
- (घ) अन्य दस्तावेज जिसे निर्धारित किया जा सके
- जुर्माना
- टैन को प्राप्त करने की प्रक्रिया
- टैन को प्राप्त करने के लिए शुल्क
कर कटौती खाता संख्या का अर्थ
कर कटौती खाता संख्या आयकर विभाग (तत्पश्चात् "टैन" के रूप में संदर्भित) द्वारा जारी 10 अंकीय अक्षरांकीय संख्या है। टैन को समस्त व्यक्तियों, जो स्रोत पर कर कटौती ('टीडीएस') के लिए उत्तरदायी है, द्वारा प्राप्त करना आपेक्षित है केवल उन व्यक्ति की स्थिति को छोड़कर जो धारा 194-झक/धारा 194-झख/धारा 194ड/धारा 194ध के अंतर्गत स्रोत पर कर कटौती के लिए उत्तरदायी है।
निम्नलिखित एक उदाहरणात्मक कर कटौती खाता संख्या है :
DELM12345L
टैन के प्रथम 3 अक्षर क्षेत्राधिकार कोड का प्रतिनिधित्व करते है, चौथा अक्षर टैन धारक के नाम का प्रारंभिक शब्द है। टैन के अगले 5 अंक 00001 से 99999 के बीच सिस्टम उत्सर्जित संख्या है तथा अंतिम अक्षर अर्थात् दसवां अक्षर वर्णमाला जांच अंक है।
टैन के लिए आवदेन करने वाला उत्तरदायी व्यक्ति
प्रत्येक व्यक्ति जो स्रोत पर कर कटौती करने के लिए उत्तरदायी है को टैन प्राप्त करना आपेक्षित है। हालांकि, एक व्यक्ति जिसे धारा 194-झक/धारा 194-झख/धारा 194ड/धारा 194ध के अंतर्गत कर कटौती करना आपेक्षित है
टैन के स्थान पर पैन का प्रयोग कर सकता है क्योंकि उसे टैन प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है।
टैन की प्रासंगिकता
निम्नलिखित दस्तावेजों में टैन को उद्धृत करना अनिवार्य है :
जुर्माना
यदि एक व्यक्ति टैन के लिए आवेदन करने में अथवा उद्धृत करने में विफल होता है अथवा उक्त निर्दिष्ट दस्तावेजों में गलत टैन उद्धृत करता है तो रू. 10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
टैन को प्राप्त करने की प्रक्रिया
टैन के आवंटन के लिए आवेदन किसी भी टिन सुविधा केंद्र (टिन-एफसी) पर प्रपत्र 49 ख में प्रतिलिपि में किया जाएगा। टिन-एफसी का पता राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड-टिन वेबसाइट पर उपलब्ध है। वैकल्पिक रूप से कोई व्यक्ति एनएसडीएल-टिन वेबसाइट पर ऑनलाइन टैन के लिए आवेदन कर सकता है।
टैन को प्राप्त करने के लिए शुल्क
रू. 65 का शुल्क (रू. 55 आवेदन शुल्क + 18 प्रतिशत जीएसटी) टैन के लिए आवेदन जमा करते समय प्रसंस्करण शुल्क के तौर पर दिया जाना चाहिए।
- केंद्र सरकार के खाते में जमा कराने हेतु स्रोत पर कर कटौती को जमा करने के लिए नियत तिथि:
- स्रोत पर कर कटौती जमा करने की विधि :
- (1) ई-भुगतान : ई-भुगतान निम्न हेतु अनिवार्य है :
- (क) समस्त निगमित निर्धारिती
- (ख) समस्त निर्धारिती (कंपनी के अलावा) जिनपर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कख के प्रावधान लागू होते हैं
- (2) भौतिक विधि : : प्राधिकृत बैंक शाखा में चालान सं. 281 की प्रस्तुति द्वारा
- परिणाम यदि स्रोत पर कर कटौती के भुगतान में चूक हो
- (क) व्यय की अस्वीकार्यता : धारा 40(क)(i) के अनुसार भारत से बाहर अथवा गैर-निवासी को जो प्राप्तकर्ता के हाथों भारत में कर हेतु वसूलनीय है, देययोग्य कोई राशि (वेतन को छोड़कर) कटौती हेतु स्वीकार्य नहीं होगी यदि इसका स्रोत पर कर कटौती के बिना भुगतान होता है अथवा यदि कर कटौती होती है लेकिन विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि तक केंद्र सरकार के साथ जमा नही की जाती।
हालांकि यदि कर उत्तरगामी वर्ष में काटी अथवा जमा की जाती हैं, जो भी स्थिति हो तो व्यय उस वर्ष में कटौती के रूप में स्वीकार्य होगा।
उसी प्रकार, धारा 40(क)(iक) के अनुसार निवासी को देययोग्य कोई राशि, जो स्रोत पर कर कटौती का विषय है, 30 प्रतिशत अस्वीकार्यता को आकृष्ट करेगी यदि यह स्रोत पर कर कटौती के बिना भुगतान किया जाता है अथवा यदि कर काटा जाता है लेकिन विवरणी को दाखिल करने की देय तिथि तक केंद्र सरकार को जमा नही की जाती।
हालांकि ऐसी राशि के संबंध में कर उत्तरगामी वर्ष में काटी अथवा जमा की जाती है, जो भी स्थिति हो, तो ऐसा अस्वीकार्य व्यय उस वर्ष में कटौती के रूप में स्वीकार्य होगा।
- (ख) ब्याज का उदग्रहण : आयकर अधिनियम की धारा 201 के अनुसार यदि एक कटौतीदाता स्रोत पर कर कटौती करने में विफल रहता है अथवा इसे काटने के पश्चात् केंद्र सरकार के खाते में जमा करने में विफल रहता है तो उसे चूककर्ता निर्धारिती के तौर पर समझा जाएगा तथा निम्नानुसार साधारण ब्याज देने के लिए उत्तरदायी होगा।
- (i) तिथि जिस पर कर की कटौती की गई थी, हेतु तिथि जिस पर कर कटौतीयोग्य था, से ऐसे कर की राशि पर एक प्रतिशत प्रति माह अथवा उसके भाग की दर से ;
- (ii) तिथि जिस पर कर की वास्तविक कटौती की गई, हेतु तिथि जिस पर कर कटौती की गई, से ऐसे कर की राशि पर एक प्रतिशत तथा एक आधा प्रति माह अथवा उसके भाग की दर से।
- (ग) जुर्माने का उदग्रहण : काटे न गए कर के समान राशि का जुर्माना धारा 271ग के अंतर्गत लगाया जाएगा। जुर्माना धारा 221 के अंतर्गत लगाया जाएगा यदि कटौतीदाता कटौती हेतु विफल रहता है तथा केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु कर का भुगतान करता हैं। जुर्माना निर्धारण अधिकारी के निर्देश की सीमा तक लगाए जाऐंगे, हालांकि जुर्माने की कुल राशि बकाए में कर राशि से अधिक नही होगी।
- (घ) अभियोजन : यदि एक व्यक्ति उसके द्वारा स्रोत पर कर कटौती को केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु भुगतान करने में विफल रहता है तो वह अवधि जो कम से कम तीन माह की लेकिन जिसे जुर्माने सहित सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, के कठोर करावास सहित दंडनीय होगा हालांकि, अभियोजन लागू नही होगा यदि टीडीएस के संदर्भ में भुगतान ऐसे भुगतान के संदर्भ में टीडीएस विवरण को दाखिल करने के लिए निर्धारित समय को या उससे पहले किसी भी समय केंद्र सरकार को करता है (प्रभावी तिथि 01.10.2024 से लागू)
केंद्र सरकार के खाते में जमा कराने हेतु स्रोत पर कर कटौती को जमा करने के लिए नियत तिथि:
स्रोत पर कर कटौती निम्नलिखित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार के खाते में जमा की जाएगी
(1) यदि कटौतीदाता सरकारी कार्यालय है :
| विवरण | नियत तिथि |
| (क) जहां कर आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना दिया जाता है | उसी दिन जब कर की कटौती की जाती है |
| (ख) जहां कर का भुगतान आयकर चालान सहित किया जाता है | माह, जिसमें धारा 192(1क) के अंतर्गत कटौती की जाती हैं अथवा आयकर देय होता है, की समाप्ति से 7 दिन पर अथवा इससे पूर्व |
(2) अन्य कटौतीदाता की स्थिति में
(1) यदि कटौतीदाता सरकारी कार्यालय है :
| विवरण | नियत तिथि |
| (क) जहां राशि मार्च के महीने में खाते में जमा अथवा भुगतान किया जाता है | 30 अप्रैल को अथवा इससे पूर्व |
| (ख) अन्य किसी मामले में | माह, जिसमें धारा 192 की उप-धारा (1क) के अंतर्गत कटौती की जाती है अथवा आयकर देय होता है, की समाप्ति से 7 दिन पर अथवा इससे पूर्व |
194-झक के अंतर्गत काटी गई कोई राशि माह जिसमें कटौती हुई है, की समाप्ति से 30 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार के खाते में ऋण का भुगतान किया जाएगा तथा प्रपत्र सं. 26थख में चालान-सह-विवरण सहित होगा।
इसी प्रकार, धारा 194-झख के अंतर्गत काटी गई कोई राशि महीने जिसमें कटौती की गई की समाप्ति से 30 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार को जमा की जाएगी और प्रपत्र सं. 26थख में चालान-सह-विवरण संलग्न होगा।
आगे, धारा 194ड के अंतर्गत काटी गई कोई राशि महीने जिसमें कटौती की गई की समाप्ति से 30 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार को जमा की जाएगी और प्रपत्र सं. 26थख में चालान-सह-विवरण संलग्न होगा।
इसके अलावा, धारा 194ध के तहत कटौती की गई कोई भी राशि (निर्दिष्ट व्यक्तियों द्वारा) उस महीने के अंत से 30 दिनों की अवधि के भीतर केंद्र सरकार के खाते में भुगतान की जाएगी जिसमें कटौती की गई है और प्रपत्र 26थड़ सहित चालान-सह-विवरण के साथ दिया जाएगा।
स्रोत पर कर कटौती जमा करने की विधि :
स्रोत पर कर कटौती निम्नलिखित विधियों में केंद्र सरकार के खाते में जमा की जाएगी
टिप्पणी :
जब कर सरकारी कार्यालय द्वारा काटा/एकत्रित किया जाता है तो यह आयकर चालान की प्रस्तुति के बिना तथा केवल खाता समायोजन करके राशि केंद्र सरकार को प्रेषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को प्रपत्र सं. 24छ प्रस्तुत करना होता है।
परिणाम यदि स्रोत पर कर कटौती के भुगतान में चूक हो
एक कटौतीदाता को निम्नलिखित परिणामों को भुगतना होगा यदि वह स्रोत पर कर कटौती करने में विफल रहता है अथवा कटौती करने के पश्चात् उसे केंद्र सरकार के खाते में ऋण हेतु जमा कराने में विफल रहता है।
- स्रोत पर कर कटौती विवरण की प्रस्तुति हेतु उत्तरदायी व्यक्ति
- स्रोत पर कर कटौती विवरण को दाखिल करने के लिए प्रपत्र
- (1) प्रपत्र 24थ - धारा 192 के अंतर्गत वेतन से कर कटौती का विवरण
- (2) प्रपत्र 27थ - कटौती के संबंध में धारा 193 से 196घ के अंतर्गत कर कटौती का विवरण जो एक गैर-निवासी है (कंपनी के तौर पर नही) अथवा एक विदेशी कंपनी अथवा निवासी लेकिन सामान्य तौर पर निवासी नही है
- (3) प्रपत्र 26थ - किसी अन्य मामले में धारा 193 से 196घ के अंतर्गत कर की कटौती का विवरण
- त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार हैं
- स्रोत पर कर कटौती विवरण की इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुति
- (क) डिजिटल हस्ताक्षर के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक रूप से विवरण की प्रस्तुति अथवा;
- (ख) प्रपत्र 27क में अथवा इलैक्ट्रानिक प्रक्रिया के माध्यम से विवरण के सत्यापन सहित इलैक्ट्रानिक रूप से विवरण की प्रस्तुति।
स्रोत पर कर कटौती विवरण की प्रस्तुति हेतु उत्तरदायी व्यक्ति
कर की कटौती के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति को उसके संबंध में तिमाही विवरण प्रस्तुत करना आपेक्षित है
स्रोत पर कर कटौती विवरण को दाखिल करने के लिए प्रपत्र
त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण निम्नलिखित प्रपत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा
हालांकि यदि कर धारा 194-झक के अंतर्गत काटा जाता है तो कटौतीदाता को माह जिसमें कटौती की गई हैं, की समाप्ति से 30 दिनों की अवधि के भीतर प्रपत्र 26थख में चालान-सह-विवरण प्रस्तुत करना होगा
इसी प्रकार, धारा 194-झख के अंतर्गत कर कटौती होने पर, डिडक्टर को उस महीने की समाप्ति से 30 दिनों की अवधि के अंदर प्रपत्र 26थग में चालान-सह-ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा जिसमें कटौती की गई। इस मामले में, अलग से कोई विवरण प्रस्तुत नही किया जाएगा।
आगे, धारा 194ड के अंतर्गत कर कटौती होने के मामले में, डिडक्टर को उस महीने की समाप्ति से 30 दिनों की अवधि के अंदर प्रपत्र 26थघ में चालान-सह-ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा जिसमें कटौती की गई। इस मामले में, अलग से कोई विवरण प्रस्तुत नही किया जाएगा।
इसके अलावा, यदि धारा 194ध (निर्दिष्ट लोगों द्वारा) के अंतर्गत कर दिया गया है, तो कटौतीकर्ता को उस महीने के अंत से 30 दिनों की अवधि के अंदर प्रपत्र 26 थड़ में एक प्रमाणित-सह-विवरण प्रस्तुत करना होगा जिसमें कटौती की गई हैं। इस मामले में कोई भी बयान अलग से नहीं दिया जाएगा।
त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण दाखिल करने की नियत तिथि निम्नानुसार हैं :—
| वित्तीय वर्ष की त्रैमासिक समाप्ति | यदि कटौतीदाता सरकारी कार्यालय है | गैर-सरकारी कटौतीदाता की स्थिति में |
| 30 जून | वित्तीय वर्ष की 31 जुलाई | वित्तीय वर्ष की 15 जुलाई |
| 30 सितम्बर | वित्तीय वर्ष का 31 अक्टूबर | वित्तीय वर्ष का 15 अक्टूबर |
| 31 दिसंबर | वित्तीय वर्ष की 31 जनवरी | वित्तीय वर्ष की 15 जनवरी |
| 31 मार्च | वित्त वर्ष जिसमें कटौती की गई है, के ठीक आगामी वित्त वर्ष की 15 मई | वित्त वर्ष जिसमें कटौती की गई है के ठीक आगामी वित्त वर्ष की 15 मई |
स्रोत पर कर कटौती विवरण की इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुति
त्रैमासिक स्रोत पर कर कटौती विवरण निम्नलिखित किसी भी विधि में इलैक्ट्रानिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा :
- स्रोत पर कर कटौती दर
- शुरूआती सीमा
कर कटौती
स्रोत पर कर कटौती दर
एक कटौतीदाता को वित्त अधिनियम की प्रथम अनुसूची के साथ पठित आयकर अधिनियम ('अधिनियम') के प्रासंगिक प्रावधान में निर्दिष्टानुसार दरों के अनुसार स्रोत पर कर कटौती कराना आपेक्षित है। हालांकि, यदि प्राप्तकर्ता का पैन धारा 206कक के अनुसार कटौतीदाता को सूचित नहीं किया जाता तो कर को निम्नलिखित उच्च दरों पर स्रोत पर कर कटौती होगी :
क) इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान में निर्दिष्ट दर पर; अथवा
ख) प्रभावी दर अथवा दरों पर; अथवा
ग) 20 प्रतिशत की दर पर
आगे जहां अधिसूचित क्षेत्राधिकार में स्थित कोई व्यक्ति कोई राशि अथवा आय प्राप्त करने के लिए पात्र है जिस पर कर टीडीएस के अनुसार है तो कर निम्नलिखित उच्चतम दर पर काटी जाएगी :
विवरणी दाखिल न करने वालों के लिए उच्च दर पर कर की कटौती**
क) प्रभावी दर अथवा दरों पर;
ख) इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों में निर्दिष्ट दर पर;
ग) 30 प्रतिशत की दर पर।
वित्त अधिनियम, 2021 के माध्यम से उच्च दर पर कर की कटौती के लिए एक नई धारा 206कख को शामिल किया गया है यदि डिडक्टी निर्दिष्ट अवधि के लिए विवरणी को प्रस्तुत करने में विफल रहता है। यह प्रावधान लागू होंगे और कर इस प्रावधान के अंतर्गत निर्धारित उच्च दरों पर काटा जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं :
क) डिडक्टी ने पिछले वर्ष जिसमें कर काटा जाना आवश्यक है के तुरंत पहले के पिछले वर्ष के प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए आयर की विवरणी प्रस्तुत न की हो
ख) आय की ऐसी विवरणी को दाखिल करने की नियत तिथि जैसा धारा 139(1) में निर्धारित किया गया है, को समाप्त किया जा चुका हो और
ग) स्त्रोत पर काटा गया या एकत्रित कर की कुल राशि कथित पिछले वर्ष में रू. 50,000 या उससे अधिक हो
कर निम्नलिखित अधिकतम दरों पर वसूला जाएगा
क) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान में निदिष्ट दरों का दोगुना
ख) प्रभावी दर या दरों का दोगुना या
ग) 5 प्रतिशत
**धारा 206कख के प्रावधान प्रभावी तिथि 01.04.2025 से हटा दिए गए हैं
टिप्पणी 1 : धारा 206कख के प्रावधान उन अनिवासी के लिए लागू नही होगा जिसके पास भारत में स्थाई प्रतिष्ठान नही है
क) एक अनिवासी जिसके पास भारत में पीई नहीं है।
ख) एक व्यक्ति जिसे उक्त पिछले वर्ष से संबंधित मूल्यांकन वर्ष के लिए आय की विवरणी प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है।
टिप्पणी 2 : यदि धारा 206कक और धारा 206कख के प्रावधान लागू होते हैं जोकि डिडक्टी ने डिडक्टर को अपने पैन में न तो प्रस्तुत न किया हो ना ही निर्दिष्ट अवधि के लिए आय की अपनी विवरणी में, तो धारा 206कक या धारा 206कख, जो भी अधिक हो, में दी गई दरों पर कर काटा जाएगा।
टिप्पणी 3 : कर प्रत्येक राशि या आय या राशि जिससे कर अध्याय XVII-ख के किसी प्रावधान में कटौतीयोग्य है केवल उस कर पर राशि या आय को छोड़कर जो निम्नलिखित प्रावधानों में से किसी के अंतर्गत कटौतीपूर्ण है, के संदर्भ में धारा 206कख के अंतर्गत उच्च दरों पर काटा जाना आवश्यक है :
(क) धारा 192 : वेतन पर टीडीएस
(ख) धारा 192क : ईपीएफ से पैसे निकालने पर टीडीएस
(ग) धारा 194ख : लॉटरी, क्रासवर्ड पहेली आदि से जीत पर टीडीएस
(घ) धारा 194खक : किसी भी ऑनलाइन गेम से जीत के माध्यम से आय
(ड़) धारा 194खख : घुड़दौड़ से जीत पर टीडीएस
(च) धारा 194झक : कृषि भूमि से भिन्न कतिपय स्थावर संपत्ति के अंतरण पर संदाय
(छ) धारा 194झख : कतिपय व्यष्टियों या हिन्दू अविभक्त कुटुंब द्वारा किराए का संदाय
(ज) धारा 194ठखग : प्रतिभूतिकरण न्यास में निवेश के संदर्भ में आय पर टीडीएस
(झ)धारा 194ड : कतिपय व्यष्टियों या हिंदू अविभक्त कुटुंब द्वारा कतिपय राशियों का संदाय
(ञ) धारा 194ढ : नगद पैसे निकालने पर टीडीएस
(ट) धारा 194ध : आभासी आस्तियों के अंतरण पर संदाय (यदि भुगतानकर्ता एक निर्दिष्ट व्यक्ति है
(ठ)धारा 194ट : फर्म के भागीदार को भुगतान
शुरूआती सीमा
विभिन्न भुगतानों के संबंध में, अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं स्रोत पर कर कटौती के लिए प्रारंभिक सीमा को निर्धारित करता है। उस प्रारंभिक सीमा से कम कोई भुगतान टीडीएस के अनुसार नहीं होगा।
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:

