- प्रस्तावना
- ऐसे करदाता द्वारा अर्जित आय की करदेयता निर्धारित करने के लिए करदाता की आवासीय स्थिति निर्धारित करना आवश्यक है।
- निवासी करदाता की स्थिति में उसकी समस्त आय इस तथ्य के बावजूद भारत में करयोग्य होगी कि करदाता हेतु आय को भारत से बाहर अर्जित अथवा उपार्जित किया गया है। हालांकि, गैर-निवासी की स्थिति में समस्त आय जो भारत से बाहर उपार्जित अथवा अर्जित होती है, भारत में करयोग्य नहीं होगी।
- गैर-निवासी का अर्थ
- धारा 2(30) व्यक्ति, जो निवासी नहीं है, के तौर पर-गैर-निवासी को परिभाषित करती है
- धारा 6 विभिन्न करदाताओं के लिए निवास के परीक्षण को निर्धारित करती है
- गैर-निवासियों की स्थिति में कर विस्तार
प्रस्तावना
गैर-निवासी का अर्थ
गैर-निवासियों की स्थिति में कर विस्तार
| गैर-निवासी के हाथों आय | करदेयता का रूप |
| आय, जो भारत में अर्जित अथवा उपार्जित होती है, का | कराधान |
| आय, जो भारत में अर्जित अथवा उपार्जित होना समझी जाती है, का | कराधान |
| आय, जो भारत में प्राप्त होती है, का | कराधान |
| आय, जो भारत में प्राप्त होनी समझी जाती हैं, का कराधान | |
| भारत से नियंत्रित व्यापार अथवा भारत में स्थापित पेशे से भारत के बाहर उपार्जित | आय करारोपित नहीं है |
| उक्त को छोड़कर आय (अर्थात् आय जिसका भारत के साथ कोई संबंध नहीं है) | करारोपित नहीं है |
- गैर-निवासी भारतीय/भारतीय मूल का व्यक्ति
- धारा - 115ग : परिभाषाएं
- धारा - 115घ : गैर-निवासियों की कुल आय की गणना के लिए विशेष प्रावधान
- धारा - 115ड़ : निवेशगत आय तथा दीर्घ-कालीन पूंजीगत प्राप्ति पर कर
- धारा - 115च : विदेशी विनिमय के स्थानांतरण पर पूंजीगत प्राप्ति कुछ मामलों में प्रभारित होने के लिए नहीं है
- धारा - 115छ : आय की विवरणी कुछ मामलों में दाखिल नहीं की जानी है
- धारा - 115ज : अध्याय के अंतर्गत लाभ कुछ मामलों में उपलब्ध होने के लिए है निर्धारिती के निवासी बनने के पश्चात् भी
- धारा -115-झ : अध्याय लागू होने के लिए नहीं है यदि निर्धारिती ऐसा चुनता है
- 1) केंद्र सरकार द्वारा 01-06-2002 से पूर्व जारी अधिसूचित बचत प्रमाणपत्र पर ब्याज यदि यह भारत से बाहर के देश से प्रेषित परिवर्तनीय विदेशी विनिमय में अभिदा होता है [धारा 10(4ख)]
-
2) विदेशी विनिमय में खरीदे गए अधिसूचित बांड (01-06-2002 से पूर्व अधिसूचित) पर ब्याज (कुछ शर्तों केअनुसार) [धारा 10(15)(iiकघ)]
-
केंद्र सरकार द्वारा 01.06.2002 से पहले अधिसूचित किए गए बांड या प्रतिभूतियों पर ब्याज जिसमें ऐसे बांड [(धारा 10(4)(i)]का लाभ लेने पर प्रीमियम शामिल है। भारत में अनिवासी (बाहरी) खाते में जमा राशि पर ब्याज [(धारा 10(4)(ii)] भारतीय कंपनी/व्यापारिक न्यास द्वारा 17.09.2018 से 31.03.2019 के बीच भारत के बाहर जारी रूपए डोमीनेटिड बांड (जैसा धारा 194ठग में संदर्भित है) पर ब्याज [(धारा 10(4ग)] निर्दिष्ट फंड जो एक अनिवासी (भारत में पीई के तौर पर नही) द्वारा रखी गई यूनिट से संबंधित है या विदेशी बैंकिग यूनिट से संबंधित है (कुछ शर्तों के अनुसार )द्वारा अर्जित या उपार्जित या प्राप्त आय [(धारा 10(4घ)]नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स, ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट, ओवर-द-काउंटर डेरिवेटिव या ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स पर वितरित आय या ओवर द काउंटर डेरेवेटिव्स के हस्तांतरण से एक अनिवासी की आय [(धारा 10(4ड़)]एक आईएफएससी ईकाई की एक ईकाई द्वारा दिए गए पिछले वर्ष में एक वायुयान या समुद्री जहाज के पट्टेदारी के कारण आय जैसा धारा 80ठ(1क) में निर्दिष्ट है, यदि ईकाई ने 31 मार्च 2030 को या उससे पहले संचालन शुरू किया [(धारा 10(4च)]
- टिप्पणी : धारा 10 के प्रावधान देखें
- विदेशी कंपनी
- आयकर दर का प्रकार
- (क) 31 मार्च, 1961 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त रॉयल्टी अथवा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व तथा जहां ऐसा समझौता, किसी भी स्थिति में, केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया हो, समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा प्रतिपादन के लिए शुल्क 50 प्रतिशत
- अन्य कोई आय 35 प्रतिशत
- क) अधिभार : आयकर राशि को ऐसे कर के 2 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तथा ऐसे कर के 5 प्रतिशत की दर पर जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है। हालांकि अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा जो निम्नानुसार होगी :
- (i) जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
- (ii) जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो दस करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले दस करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
- ख) स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर : आयकर और लागू होने वाल अधिभार की राशि को ऐसे आयकर और अधिभार के चार प्रतिशत की दर पर गिने गए स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर द्वारा और बढ़ाया जाएगा।
- प्रतिभूति के स्थानांतरण से उत्पन्न पूंजीगत प्राप्ति
- ब्याज
- रॉयल्टी तथा
- तकनीकी सेवा के लिए शुल्क
- धारा 4 आयकर मूल्य
- धारा 5 कुल आय कार्यक्षेत्र
- धारा 6 भारत में निवासी
- धारा 7 प्राप्त समझी जाने वाली आय
- धारा 172 के साथ पठित धारा 44ख नौपरिवहन की लाभ तथा प्राप्ति गणना के लिए विशेष प्रावधान
- धारा 44खखग अनिवासियों के मामले में क्रूज जहाज के संचालन के व्यापार से लाभ और प्राप्ति की गणना के लिए विशेष प्रावधान
- धारा 44खखघ इलैक्ट्रानिक उत्पाद के विनिर्माण/उत्पादन या इलैक्ट्रानिक विनिर्माण सुविधा को स्थापित करने के लिए भारत में घरेलू कंपनी को सेवा या तकनीक देने वाले अनिवासी हेतु अनुमानित कर योजना
-
वर्ष 2025 के लिए नियत तिथि
15 मार्च, 2025
आगे देखें
निर्धारण वर्ष 2025-26 के लिए अग्रिम कर की चौथी किश्त
31 मार्च, 2025
अंतर्राष्ट्रीय समूह, जिसका ऐसा समूह का घटक है, के संदर्भ में एक मूल उद्यम, वैकल्पिक प्रतिवेदन ईकाई जो भारत में घरेलू है, द्वारा पिछले वर्ष 2023-24 में प्रपत्र सं. 3गङकघ में राष्ट्र-दर-राष्ट्र रिपोर्ट - अनिवासी के प्रकार
गैर-निवासी भारतीय/भारतीय मूल का व्यक्ति
गैर निवासी भारतीय की कुछ आय से संबंधित विशेष प्रावधान
स्थाई खाता संख्या आवेदन के लिए दिशा-निर्देश
एक गैर-निवासी भारतीय (एनआरआई) यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड के पैन आवेदन केंद्र पर आपेक्षित दस्तावेज तथा निर्धारित शुल्क के साथ प्रपत्र सं. 49क को जमा करके पैन के लिए आवेदन कर सकता है। वह यूटीआर्ई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन भी कर सकता है।
कैसे निर्धारित करें कि व्यक्ति एनआरआई है ?
'गैर-निवासी भारतीय' एक व्यक्ति है जो भारतीय नागरिक अथवा भाारतीय मूल का नागरिक है तथा जो भारत में निवासी नहीं है। इसलिए, निर्धारित करने के लिए कि व्यक्ति एक गैर-निवासी है.................
कर से छूट प्राप्त आय
निम्नलिखित आय गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) के हाथों कर से छूट प्राप्त है
विदेशी कंपनी
अर्थ
धारा 2(23क) के अनुसार "विदेशी कंपनी" का अर्थ जो घरेलू कंपनी नहीं है
कर की दर
क. आयकर
निर्धारण वर्ष 2025-26 तथा निर्धारण वर्ष 2026-27
जोड़ें :
ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर
एक कंपनी बही लाभ के 15 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 15 प्रतिशत से कम है। हालांकि एक विदेशी कंपनी आगामी आय पर मैट देने के लिए उत्तरदायी नहीं है यदि सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत उस पर देययोग्य आयकर 15 प्रतिशत से कम की दर पर होता है।
आगे, एमएटी प्रावधान एक विदेशी कंपनी के लिए प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2001 से प्रभावी नही होंगे, यदि -
i) निर्धारिती एक राष्ट्र या एक निर्दिष्ट क्षेत्र का निवासी है जिसके साथ भारत का दोहरा कराधान परिहार समझौता (डीटीएए) है या केंद्र सरकार ने धारा 90क की उप-धारा (1) के अंतर्गत कोई समझौता किया है और निर्धारिती के पास भारत में कोई स्थाई प्रतिष्ठान नही है या
ii) निर्धारिती एक राष्ट्र या एक निर्दिष्ट क्षेत्र का निवासी है जिसके साथ भारत का दोहरा कराधान परिहार समझौता है और निर्धारिती को कंपनियों के संबंध में फिलहाल के लिए प्रभावी किसी कानून के अंतर्गत पंजीकरण लेने की आवश्यकता नही है।
विदेशी कंपनियों हेतु प्रयोज्य विशेष प्रावधान
अनिवासी के प्रकार
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण
- वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल ( https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर लॉग आन करें।).
- ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान " पर क्लिक करें
- फिर "नए भुगतान " पर क्लिक करें
- 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
- पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
- विक्रेता की आवासीय स्थिति
- विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्या
- विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
- संपत्ति का विवरण
- भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
- जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी :
- नेट बैंकिंग ;
- डेबिट कार्ड;
- बैंक काउंटर पर भुगतान;
- आरटीजीएस/एनईएफटी या
- भुगतान गेटवे
- उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
- सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (https://contents.tdscpc.gov.in/) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
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