- अर्थ
- कर की दर
- आयकर दर का प्रकार
- (क) 31 मार्च, 1961 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त रॉयल्टी अथवा 29 फरवरी, 1964 के पश्चात् लेकिन 1 अप्रैल, 1976 से पूर्व तथा जहां ऐसा समझौता, किसी भी स्थिति में, केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया हो, सरकार अथवा भारतीय कंपनी के साथ किए गए समझौते के अनुसार सरकार अथवा भारतीय कंपनी से प्राप्त तकनीकी सेवा प्रतिपादन के लिए शुल्क 50 प्रतिशत
- अन्य कोई आय 40 प्रतिशत
- क) अधिभार : आयकर राशि को ऐसे कर के 2 प्रतिशत की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तथा ऐसे कर के 5 प्रतिशत की दर पर जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है। हालांकि अधिभार सीमांत राहत के अनुसार होगा जो निम्नानुसार होगी :
- (i) जहां कुल आय एक करोड़ से अधिक होती है लेकिन दस करोड़ से कम तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
- (ii) जहां कुल आय दस करोड़ से अधिक होती है तो आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय जो दस करोड़ से अधिक है, की राशि के मुकाबले दस करोड़ की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल आय से अधिक नहीं होगी।
- ख) स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर : आयकर और लागू होने वाल अधिभार की राशि को ऐसे आयकर और अधिभार के चार प्रतिशत की दर पर गिने गए स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर द्वारा और बढ़ाया जाएगा।
- ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर
- प्रतिभूति के स्थानांतरण से उत्पन्न पूंजीगत प्राप्ति
- ब्याज
- रॉयल्टी तथा
- तकनीकी सेवा के लिए शुल्क
- विदेशी कंपनियों हेतु प्रयोज्य विशेष प्रावधान
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
- यह एक भारतीय कंपनी हो ;
- इसका प्रभावी प्रबंधन का स्थान उस वर्ष में भारत में हो
इसके लिए, “प्रभावी प्रबंधन का स्थान" का अर्थ एक स्थान जहां प्रमुख प्रबंधन और वाणिज्यिक निर्णय जो पूर्ण रूप से एक उद्यम के व्यापार करने के लिए आवश्यक है, लिए जाते हैं।
सीबीडीटी ने पीओईएम के निर्धारण के लिए अंतिम दिशानिर्देशों को हाल ही में जारी किया है। पीओईएम के अंतिम दिशानिर्देश में कुछ विशेष पहलू शामिल है। एक विशेष पहलू भारत से बाहर सक्रिय तौर पर व्यापार (एबीओआई) का परीक्षण करना है। दिशानिर्देश निर्धारित करते है कि एक कंपनी भारत से बाहर सक्रिय व्यापार करने वाली कही जाएगी यदि इसकी कुल आय का 50 प्रतिशत निष्क्रिय आय न हो। आगे, कुल परिसंपत्तियों, कर्मचारियों और पेरोल व्यय के स्थान के संबंध में कुछ अतिरिक्त संचित शर्तों को पूरा किया जाना है
सक्रिय तौर पर व्यापार करने वाली कंपनी के मामले में प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत से बाहर होना समझा जाएगा यदि कंपनी के निदेशक मंडल की अधिकतर बैठकें भारत से बाहर होती हो।
उन कंपनियों जो भारत से बाहर सक्रिय तौर पर व्यापार करती है, को छोड़कर अन्य कंपनियों के मामले में पीओईएम का निर्धारण दो स्तरीय होगा, अर्थात् :- - प्रथम स्तर पर व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करना या सुनिश्चित करना जो पूर्ण तौर पर कंपनी का व्यापार करने के लिए प्रमुख प्रबंधन और वाणिज्यिक निर्णय लेते है।
- दूसरे स्तर पर स्थान का निर्धारण होगा जहां यह निर्णय वस्ताव में लिए जा रहे हैं।
हालांकि, यह बताया गया है कि पीओईएम दिशानिर्देश उस कंपनी पर लागू नही होगी जिसका एक वित्त वर्ष में कुल कारोबार या कुल प्राप्तियां परिपत्र सं. 8, दिनांक 23.02. 2017 के द्वारा रू. 50 करोड़ या उससे कम हो ।
विदेशी कंपनी
अर्थ
धारा 2(23क) के अनुसार "विदेशी कंपनी" का अर्थ जो घरेलू कंपनी नहीं है
कर की दर
क. आयकर
निर्धारण वर्ष 2025-26 तथा निर्धारण वर्ष 2024-25
जोड़ें :
ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर
एक कंपनी बही लाभ के 15 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 15 प्रतिशत से कम है। हालांकि एक विदेशी कंपनी आगामी आय पर मैट देने के लिए उत्तरदायी नहीं है यदि सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत उस पर देययोग्य आयकर 15 प्रतिशत से कम की दर पर होता है।
आगे, एमएटी प्रावधान एक विदेशी कंपनी के लिए प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2001 से प्रभावी नही होंगे, यदि -
i) निर्धारिती एक राष्ट्र या एक निर्दिष्ट क्षेत्र का निवासी है जिसके साथ भारत का दोहरा कराधान परिहार समझौता (डीटीएए) है या केंद्र सरकार ने धारा 90क की उप-धारा (1) के अंतर्गत कोई समझौता किया है और निर्धारिती के पास भारत में कोई स्थाई प्रतिष्ठान नही है या
ii) निर्धारिती एक राष्ट्र या एक निर्दिष्ट क्षेत्र का निवासी है जिसके साथ भारत का दोहरा कराधान परिहार समझौता है और निर्धारिती को कंपनियों के संबंध में फिलहाल के लिए प्रभावी किसी कानून के अंतर्गत पंजीकरण लेने की आवश्यकता नही है।
एक ऐसी कम्पनी जिसमें जनता का पर्याप्त मात्रा में हित न जुड़ा हो तो क्या इस मामले में हानि के अग्रेषण या समायोजन के सम्बन्ध में कोई विशेष प्रावधान है?
As per धारा 79 के अनुसार, जहां एकं कंपनी, ऐसी कंपनी के तौर पर नही जिसमें जनता का वास्तविक हित है, के मामलें में पिछले वर्ष में शेयरधारित में कोई परिवर्तन हुआ हो तो पिछले वर्ष से पहले के किसी भी वर्ष में हुई हानि को पिछले वर्ष की आय के समक्ष अगे्रेषित या समायोजित नही किया जाएगा जबतक -
पिछले वर्ष के अंतिम तिथि पर वोटिंग अधिकार का कम से कम 51 प्रतिशत रखने वाली कंपनी के शेयर उस व्यक्ति द्वारा लाभार्थी तौर पर न रखे गए हो जो उन वर्ष या वर्षों के अंतिम दिन वोटिंग अधिकार के कम से कम 51 प्रतिशत रखने वाली कंपनी के शेयरों का लाभार्थी मालिक न हो जिसमें हानि हुई।
Restriction of धारा 79 का प्रतिबंध केवल हानि के मामले में ही लागू है नाकि वैज्ञानिक अनुसंधान या पारिवारिक योजना व्यय पर किए गए अनवशोषित पूंजीगत व्यय या अनवशोषित मूल्यहस के समायोजन के मामले में।
Further, the provisions of धारा 79 के प्रावधान शेयरधारक की मृत्यु के कारण या शेयरधारक के किसी रिश्तेदार को उपहार के रूप में शेयरों के स्थानांतरण के कारण या एक ऐसी भारतीय कपंनी के मामले में शेयरधारित में परिवर्तन की स्थिति में लागू नही है जो एक विदेशी कंपनी की सहायक कंपनी है, जब ऐसी विदेशी कंपनी अन्य विदेशी कंपनी के साथ एकीकृत/समेकित होती है और एकीकृत/समेकित विदेशी कंपनी के 51% या उससे अधिक प्रतिशत शेयरधारक एकीकृत/परिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक रहते हैं।
एक कंपनी की आवासीय स्थिति को कैसे निर्धारित करें?
प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से, एक कंपनी को किसी पिछले वर्ष में भारत में निवासी कहा जा सकता है यदि
क्या कंपनियों/बैंकों की शाखाओं के अलग टैन हो सकत हैं ?
हां। ऐसे मामले में, कर कटौती/एकत्रित, जो भी लागू हो, करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की शाखा या पद का नाम और स्थान टैन के आवंटन के लिए आवेदन पर स्पष्ट तौर पर दिया जाना चाहिए।
व्यापार की संरचना में परिवर्तन की स्थिति में, क्या पुर्नसंरचित उद्यम द्वारा हानि को अग्रेषित किया जा सकता है?
सामान्य तौर पर, हानि उठाने वाला व्यक्ति ही बाद के वर्षों में हानि को समायोजित करने के लिए अग्रेषित करने का हकदार होता है हालांकि, व्यापार की पुर्नसंरचना के कुछ मामले जैसे एकीकरण, डिमर्जर, स्वामित्व फर्म का कंपनी में या सांझेदार फर्म का कंपनी में रूपांतरण आदि, पुर्नसंरचना उद्यम बाद के उद्यम की समायोजित हानि को अग्रेषित करने का हकदार है (बशर्ते कि इस संबंध में निर्दिष्ट शर्ते पूरी होती हो)
- स्थाई खाता संख्या के लिए कैसे आवेदन करें ?
- स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज
- स्थिति को जानें
- संपर्क सहायता
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
स्थाई खाता संख्या
स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें?
1) ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआईआईटीएसएल या प्रोटेन (पहले NSDL eGov के तौर पर ज्ञात) की वेबसाइट से किया जा सकता है
ऑनलाइन आवेदन के लिए क्लिक करें
2) स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन निम्न जगह पर जमा किया जा सकता है
(क) प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई-गर्वे के तौर पर ज्ञात)(ख) UTITSL
स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज
| भारत से बाहर पंजीकृत कंपनी | |
| प्रयोज्नीय प्रपत्र | 49कक |
| आपेक्षित दस्तावेज : | कंपनी के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता हैं) अथवा भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में वाणिज्यि दूतावास अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित। भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन |
स्थिति को जानें
आवेदक आवेदन प्रपत्र की स्वीकृति पर विशिष्ट संख्या सन्निहित पावती प्राप्त करेगा। इस पावती संख्या का उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति जानें सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) को जानने के लिए किया जा सकता है।
संपर्क सहायता
आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीकों से संपर्क किया जा सकता हैं
| विधि आयकर विभाग प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) यूटीआईटीएसएल | |||
| वेबसाइट | www.incometaxindia.gov.in | https://www.protean-tinpan.com/ | www.utiitsl.com |
| कॉल सेंटर | 08069708080 | ||
| ई-मेल आईडी | tininfo@proteantech.in | ||
| पता |
प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) |
यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्नालॉजी एंड सर्विस लिमिटेड, |
|
यदि आपकी स्थाई खाता संख्या खो जाती है ?
यदि आपकी स्थाई खाता संख्या खो जाती है तो आप "नए पैनकार्ड के लिए अनुरोध अथवा/ तथा पैन आंकड़ों में बदलाव या सुधार" के लिए प्रपत्र को जमा करके प्रतिलिपि पैनकार्ड के लिए आवेदन कर सकते है तथा प्रपत्र के साथ एफआईआर की प्रति सलंग्न की जा सकती है।
अगर पैनकार्ड खो जाए और आपको पैन याद नहीं है तो आयकर विभाग द्वारा दी गई "अपना पैन जानें" सुविधा से पैन का पता लगाया जा सकता है। यह सुविधा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in से मिल सकती है।
आप पैन की ऑनलाइन जानकारी नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि जैसे मूल विवरण देने के पश्चात् प्राप्त कर सकते हैं। पैन जानने के पश्चात् प्रतिरूपी पैन के लिए "नए पैनकार्ड के लिए अनुरोध अथवा/तथा पैनकार्ड के आंकड़ों में बदलाव या सुधार" प्रपत्र भरकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
पैन कार्ड प्राप्त करने के क्या लाभ हैं ?
पैन आयकर विभाग से हर लेन-देन के लिए अनिवार्य किया गया है। यह अनेक वित्तीय लेन-देन के लिए भी अनिवार्य है, जैसे बैंक में खाता खोलने, संस्थागत वित्तीय ऋण लेना, उच्चतम उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद, विदेशी यात्रा, अचल संपत्ति का लेन-देन, प्रतिभूतियों के व्यवसाय इत्यादि। पैन एक महत्पूर्ण फोटो पहचान है जो देश की सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा स्वीकृत है।
प्रपत्र 49क/49कक में निर्धारण अधिकारी कोड को उपलब्ध कराना आपेक्षित है ?
हाँ, प्रपत्र 49क/49कक में आंकलन अधिकारी (एओ) कोड देना (अर्थात् क्षेत्र एरिया प्रकार, सीमा कोड और आंकलन अधिकारी संख्या) अनिवार्य है आवेदक को भरनी चाहिए। इसका विवरण आयकर विभाग के दफ्तर या पैन केंद्र से या पैन सेवा प्रदाता की वेबसाइट www.utiitsl.com or https://www.protean-tinpan.com/ से प्राप्त की जा सकती है।
पैन से संबंधित प्रावधानों का अनुपालन न करने पर क्या जुर्माना हैं ?
धारा 2 72ख करदाता द्वारा पैन से संबधित प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान मुहैया कराती है, अर्थात् पैन लेने का उत्तरदायी होते हुए भी पैन नहीं प्राप्त करना, या किसी निर्धारित दस्तावेज पर, जिसमें पैन उद्धृत करना अनिवार्य है, उसमें जानबूझ कर गलत पैन देना, या कर की कटौती करने वाले को या कर लेने वाले को गलत पैन देने पर धारा 272ख के अंतर्गत रु.10,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या एक व्यक्ति एक से अधिक पैन रख सकता है ?
एक व्यक्ति एक से अधिक पैन नहीं रख सकता। यदि एक व्यक्ति को पैन आवंटित हो गया है, तो वह दूसरे पैन की प्राप्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता। 1961 के आयकर अधिनियम धारा 272ख के अंतर्गत एक से अधिक पैन रखने पर रु. 10,000 के जुर्माने का प्रावधान है।
यदि एक व्यक्ति को एक से अधिक पैन आवंटित हो गया है तो उसे तुरंत अतिरिक्त पैन कार्ड या कार्डों को वापस कर देना चाहिए।
क्या पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है?
हर उस व्यक्ति को पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है जो आधार नंबर प्राप्त करने के योग्य है। यदि व्यक्ति के पास आधार नंबर न हो तो आधार नामांकन आईडी दी जा सकती है।
टिप्पणी : प्रभावी तिथि 01.10.2024 से आधार प्रपत्र की नामांकन संख्या को उद्धृत नहीं किया जा सकेगा। करदाता को पैन आवेदन पत्र में अपने आधार नंबर को उद्धृत करना आवश्यक है।
- गृह संपत्ति से आय
- गृह संपत्ति में उसका कोई भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए;
- करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए;
- गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए।
- व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोई मुआवजा अथवा अन्य भुगतान
- पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
- पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
- यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए;
- स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए
- अन्य स्त्रोतों से आय
शीर्ष आय
गृह संपत्ति से आय
कराधान के लिए शर्तें
व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
निम्नलिखित आय व्यापार तथा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :
पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
प्रभार्यता के लिए शर्तें:
अन्य स्त्रोतों से आय
अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी।
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
1. वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/) पर लॉग आन करें।
2. ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान" पर क्लिक करें
3. फिर "नए भुगतान" पर क्लिक करें
4. 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
क. विक्रेता की आवासीय स्थिति
ख. विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्
ग. विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
घ. संपत्ति का विवरण
ड़. भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
6. जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी
क. नेट बैंकिंग
ख़ डेबिट कार्ड
ग बैंक काउंटर पर भुगतान
घ आरटीजीएस/एनईएफटी या
ड़ भुगतान गेटवे
7. उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
- कंपनियों पर आयकर
- अग्रिम कर की गणना तथा भुगतान कैसे किया जाता है ?
- कर की गणना कैसे करें ?
- कर का भुगतान कैसे करें ?
कर भुगतान
कंपनियों पर आयकर
कर जो कंपनियों द्वारा अपनी आय पर दिया जाता है उसे निगमित कर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह कंपनियों पर आयकर (निगमित कर) के तौर पर निर्दिष्ट है।
गैर-निगमित निर्धारिती द्वारा कर भुगतान को आयकर के तौर पर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह आयकर (कंपनी को छोड़कर) के तौर पर निर्दिष्ट होना हैं।
अग्रिम कर की गणना तथा भुगतान कैसे किया जाता है ?
अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का भुगतान किश्तों में किया जाना है। आगे देखें
अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर किश्तों में दिया जाना है। आगे देखें
| स्थिति | 15 जून तक | 15 सितम्बर तक | 15 दिसंबर तक | 15 मार्च तक |
| निर्धारिती | 15 % | 45 % | 75 % | 100 % |
31 मार्च तक दिया गया कोई कर अग्रिम कर के तौर पर समझा जाता है
अग्रिम कर को जमा करना प्रासंगिक कॉलम अर्थात् अग्रिम कर का चयन कर चालान आईटीएनएस 280 के माध्यम से किया जाता है
कर की गणना कैसे करें ?
कुल आय, अर्थात् कर हेतु देययोग्य आय, का पता लगाने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी आगे देखें
कर गणक
कर का भुगतान कैसे करें ?
कंपनियों की स्थिति में ई-भुगतान अनिवार्य है
- किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?
- आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज
- आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?
- आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि
- क्या एक निर्धारिती पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल कर सकता है
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
विवरणी दाखिलीकरण
किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?
प्रत्येक कंपनी को, निर्धारित प्रपत्र में तथा निर्धारित प्रणाली में तथा उल्लखित ऐसे अन्य विवरण जिसे निर्धारित किया जा सके में पिछले वर्ष के दौरान अपनी आय की विवरणी को नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व दाखिल करना चाहिए।
आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज
आईटीआर विवरणी प्रपत्र कम प्रपत्र संलग्नता हैं तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नही हैं। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जाने चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जाने पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक,80-झख,80-झग,80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115ञख अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे।
आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?
एक कंपनी के लिए यह आवश्यक है कि वह डिजिटल हस्ताक्षर के तहत इलैक्ट्रानिक तौर पर अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करे।
| आयकर | विवरणी | विवरण |
| आईटीआर 6 | धारा 11 के अधीन छूट का दावा करने वाली कंपनियों से भिन्न कंपनियों के लिए | पीडीएफ |
| आईटीआर 7 | उन व्यक्तियों के लिए, जिनके अंतर्गत कंपनियां भी है, जिनसे धारा 139 (4क) या धारा 139 (4ख) या धारा 139 (4ग) या धारा 139 (4घ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित है | पीडीएफ |
आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि
कंपनी द्वारा आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि 31 अक्टूबर है
अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन जिन्हें प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, करने वाले निर्धारिती की स्थिति में नियत तिथि 30 नवंबर है
क्या एक निर्धारिती पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल कर सकता है
हां, विवरणी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 3 महीनों के अंदर या निर्धारण पूरा होने से पहले, जो पहले हो, किसी भी समय संशोधित की जा सकती है।
क्या नियत तिथि के पश्चात् विवरणी को दाखिल किया जा सकता हैं ?
हां, यदि व्यक्ति नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व आय की विवरणी को दाखिल नहीं कर पाता तो वह लंबित विवरणी दाखिल कर सकता है। एक लंबित विवरणी को निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले 3 महीनों के अंदर अथवा निर्धारण की समाप्ति से पूर्व, जो भी पहले हो, के भीतर दाखिल किया जा सकता है। निर्धारित नियत तिथि के पश्चात् दाखिल विवरणी को लंबित विवरणी कहा जाता है।
उदाहरण, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अर्जित आय की स्थिति में, लंबित विवरणी 31 दिसंबर, 2025 तक दाखिल की जा सकती है।
क्या विलंबित विवरणी को दाखिल करने हेतु एक आयकर विवरणी को अंतिम तिथि की समाप्ति के बाद प्रस्तुत किया जा सकता है?
अद्यतित विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए धारा 139(8क) को शामिल किया गया है। धारा बताती है कि एक अद्यतित विवरणी इस तथ्य के बाजवूद किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की जा सकती है कि क्या ऐसे व्यक्ति ने पहले ही मूल, विलंबित या संशोधित विवरणी प्रासंकिगत निर्धारण वर्ष के लिए प्रस्तुत की है या नही (कुछ शर्तों के अनुसार)। एक अद्यतित विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों के अंदर किसी भी समय प्रस्तुत किया जा सकता है।
मुझे प्रमाण के तौर पर दाखिल विवरणी की प्रति को रखना अनिवार्य है तथा कितने समय के लिए ?
हां, चूंकि आयकर अधिनियम के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही वर्तमान वित्त वर्ष से पूर्व तीन/पाँच वर्षों (जो भी स्थिति हो) तक आंरभ की जा सकती हैं, आपको कम से कम इस अवधि के लिए ऐसे दस्तावेजों को अनुरक्षित रखना चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में कार्यवाही 10 वर्षों के पश्चात् भी आरंभ की जा सकती है।
आय की विवरणी को दाखिल करने पर समस्त अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें
- प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
- प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- सेवाओं पर जाएं और “प्रतिदाय पुनः जारी करें” पर क्लिक करें
- प्रतिदाय पुनःनिर्गम अनुरोध करें
प्रतिदाय
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें:
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:

