प्रस्तावना
व्यक्तियों का संघ (एओपी) अथवा व्यक्तियों की निकाय (बीओआई), चाहे निगमित हो अथवा नहीं, को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(31) के अंतर्गत "व्यक्ति" के तौर पर समझा जाता है। इसलिए, एओपी अथवा बीओआई को आयकर अधिनियम के अंतर्गत मूल्यांकन के उद्देश्य के लिए पृथक उद्यम के तौर पर समझा जाता है।
यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक एओपी अथवा बीओआई को व्यक्ति के तौर पर होना समझा जाएगा, चाहे हो अथवा नहीं कि उन्होंने आय, लाभ अथवा प्राप्ति की व्युत्पत्ति के उद्देश्य से संस्थापित अथवा सुस्थित अथवा निगमित किया गया था।
- स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?
- स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?
- प्रत्येक व्यक्ति जो किसी व्यापार अथवा पेशे का निष्पादन करता है जिसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति किसी भी पिछले वर्ष में पांच लाख से अधिक है अथवा अधिक होने की संभावना हैं
- प्रत्येक व्यक्ति जो निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन को करने का इच्छुक हैं जहां पैन को उद्धृत करना अनिवार्य हैं
- प्रत्येक व्यक्ति यदि उसकी कुल आय या किसी अन्य व्यक्ति की कुल आय जिसके संबंध में वह पिछले वर्ष के दौरान निर्धारणीय है, उस अधिकतम राशि से अधिक हो जिसे कर में प्रभार्य नहीं किया गया हो।
- एक चैरिटेबल ट्रस्ट जिसे धारा 139(4क) के तहत रिटर्न प्रस्तुत करना आवश्यक है
- प्रत्येक आयातक/निर्यातक को पांच लाख रुपए से अधिक होने की संभावना है या इसकी संभावना है
- प्रत्येक आयातक/निर्यातक जिसे आयात निर्यात कोड प्राप्त करना आवश्यक है
- हर व्यक्ति के लिए आयात निर्यात कोड प्राप्त करना चाहता है जिसमें पैन को उद्धृत करना अनिवार्य है।
- उपर्युक्त में से किसी में शामिल नहीं किया गया कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पैन के लिए आवेदन कर सकता है।
- प्रत्येक गैर-व्यक्तिगत निवासी व्यक्ति और उनसे संबद्ध व्यक्ति उस स्थिति में पैन के लिए आवेदन कर सकता है, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा किए गए वित्तीय लेन-देन में रु. 2,50,000 से अधिक हो।
- स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?
- ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआईआईटीएसएल या प्रोटेन (पहले NSDL eGov के तौर पर ज्ञात) की वेबसाइट से किया जा सकता है
- स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन स्थाई खाता संख्या केंद्र पर जमा किया जा सकता है
(क) प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई-गर्वे के तौर पर ज्ञात)(ख) UTITSL
- स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क है ?
- स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना
- किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करने हैं ?
- स्थिति का पता लगाएं
- संपर्क सहायता
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
स्थाई खाता संख्या (पैन) क्या है ?
पैन का अर्थ है स्थाई खाता संख्या। स्थाई खाता संख्या आयकर विभाग द्वारा जारी दस अंकों की अक्षरांकीय संख्या है। पैन को लैमिनेटिड प्लास्टिक कार्ड (सामान्य तौर पर पैन कार्ड के तौर पर ज्ञात) के प्रारूप में जारी किया जाता है
स्थाई खाता संख्या का चतुर्थ अक्षर स्थाई खाता संख्या धारक की स्थिति को दर्शाता है। एक एओपी को शब्द "ए" से प्रदर्शित किया जाता है (अर्थात् एएलडब्ल्यूएजी5809एल) तथा एक बीओआई को शब्द 'बी' से प्रदर्शित किया जाता है (अर्थात् एएलडब्ल्यूबीजी5809एल)
स्थाई खाता संख्या किसे प्राप्त करनी है ?
स्थाई खाता संख्या निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा प्राप्त किया जाना है :
पैन नीचे दिए व्यक्तियों को प्राप्त करना पड़ता है:
स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें ?
वैसे ही जैसे व्यक्ति के मामले में किया है (तब तक पैन आवेदन पत्र डाउनलोड करें)
स्थाई खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए क्या शुल्क है ?
आवेदक रू. 110 (रू. 93 का आवेदन शुल्क + 18 प्रतिशत जीएसटी) के शुल्क का भुगतान करेगा। यदि पैन कार्ड विदेशी पते पर संप्रेषण करना हो तो आवेदक को रू. 1020 का अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
स्थाई खाता संख्या के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज तथा सूचना
भारत में संस्थापित अथवा पंजीकृत व्यक्तियों की निकाय अथवा व्यक्तियों के संघ (न्यास को छोड़कर) को पैन आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा:
क) अनुबंध की प्रति; अथवा
ख) सहकारी संस्था के दान आयुक्त अथवा पंजीयक अथवा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी पंजीकरण संख्या के प्रमाणपत्र की प्रति; अथवा
ग) ऐसे व्यक्ति की पहचान तथा पते के संस्थापन के लिए किसी केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार के विभाग से व्युत्पत्त अन्य कोई दस्तावेज।
व्यक्तियों के संघ (न्यास को छोड़कर) अथवा व्यक्तियों की निकाय के भारत से बाहर गठित होने की स्थिति में, उसे पैन आवेदन प्रपत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को जमा करना होगा :
क) देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, "सुधारक"(उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता हैं) अथवा भारतीय दूतावाास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में वाणिज्यि दूतावास अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित।
ख) भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन।
किसे स्थाई खाता संख्या अर्थात् प्रपत्र 49क/49कक पर हस्ताक्षर करने हैं ?
पैन के लिए आवेदन पर एओपी अथवा बीओई, जैसी भी स्थिति हो, के किसी प्राधिकृत हस्ताक्षरी द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा (हस्ताक्षर न कर पाने की स्थिति में बाएं अंगूठे का निशान)
स्थिति का पता लगाएं
आवेदक आवेदन पत्र की स्वीकृति पर उत्कृष्ट संख्या सन्निहित पावती संख्या को प्राप्त करेगा। यह पावती संख्या उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति का पता लगाए सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड / यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) पर नजर रखने के लिए प्रयुक्त की जा सकती हैं।
संपर्क सहायता
आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीके से संपर्क किया जा सकता है
| विधि आयकर विभाग प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) यूटीआईटीएसएल | |||
| वेबसाइट | www.incometaxindia.gov.in | https://www.protean-tinpan.com/ | www.utiitsl.com |
| कॉल सेंटर | 08069708080 | ||
| ई-मेल आईडी | tininfo@proteantech.in | ||
| पता |
प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) |
यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्नालॉजी एंड सर्विस लिमिटेड, |
|
यदि आपका स्थाई खाता संख्या (पैन) कार्ड खो जाए ?
अगर पैनकार्ड खो जाए तो आप डुप्लीकेट पैनकार्ड के लिए"नए पैनकार्ड के लिए प्रार्थना या/ और पैनकार्ड के डेटा में बदलाव या सुधार"फॉर्म भरकर प्रस्तुत कर सकते हैं, और उसके साथ एफ आई आर की कॉपी लगायी जा सकती है। अगर पैनकार्ड खो गया और आपको पैन याद नहीं है तो आयकर विभाग द्वारा दी गयी"अपना पैन जानो" की सुविधा से पैन का पता लगाया जा सकता है। यह सुविधा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in से मिल सकती है।
पैन की ऑनलाइन जानकारी नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि जैसे कोर विवरण देने से मिल सकती है। पैन जानने के बाद आप डुप्लीकेट पैन के लिए "नए पैनकार्ड के लिए प्रार्थना या/और पैनकार्ड के डेटा में बदलाव या सुधार"फॉर्म भरकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
स्थाई खाता संख्या (पैन) कार्ड को प्राप्त करने के क्या लाभ हैं ?
पैन आयकर विभाग से हर लेन-देन के लिए अनिवार्य किया गया है। यह अनेक वित्तीय लेन-देन के लिए भी अनिवार्य है, जैसे बैंक में खाता खोलने, संस्थागत वित्तीय ऋण लेना, उच्चतम उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद, विदेशी यात्रा, अचल संपत्ति का लेन-देन, प्रतिभूतियों के व्यवसाय इत्यादि। पैन एक महत्पूर्ण फोटो पहचान है जिसे देश की सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं मानती हैं।
क्या प्रपत्र 49क/49कक में निर्धारण अधिकारी को उपबंधित करना अनिवार्य हैं ?
हाँ, फॉर्म 49क/49कक में आकलन अधिकारी (एओ ) कोड देना आवश्यक है आकलन अधिकारी के क्षेत्राधिकर के एओ कोड को (यानि एरिया कोड, एओ टाईप, सीमा(रेंज) कोड और (एओ) संख्या) आवेदक को भरनी चाहिए। इसका विवरण आयकर विभाग के दफ्तर या पैन केंद्र से या पैन सेवा प्रदाता की वेबसाइट www.utiitsl.com or https://www.protean-tinpan.com/ से प्राप्त करी जा सकती है।
स्थाई खाता संख्या से संबंधित प्रावधानों के साथ अनुपालन न करने के लिए क्या जुर्माना हैं ?
धारा 272ख में करदाता द्वारा पैन से संबधित प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान है, यानि पैन लेने का उत्तरदायी होते हुए भी पैन नहीं प्राप्त करना, या किसी निर्धारित दस्तावेज पर, जिसमे पैन उद्धृत करना अनिवार्य है, उसमे जानबूझ कर गलत पैन देना, या कर की कटौती करने वाले को या कर लेने वाले को गलत पैन देने पर धारा 272ख के अंतर्गत रु.10,000 का जुरमाना लगाया जा सकता है।
क्या एक व्यक्ति एक से अधिक स्थाई खाता संख्या (पैन) रख सकता है ?
एक व्यक्ति एक से अधिक पैन नहीं रख सकता। यदि एक व्यक्ति को पैन आवंटित हो गया है, तो वह दूसरे पैन की प्राप्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता। 1961 के आयकर अधिनियम धारा 272ख के अंतर्गत एक से अधिक पैन रखने पर रु. 10,000 के जुर्माने का प्रावधान है।
अगर एक व्यक्ति को एक से अधिक पैन आवंटित हो गया है तो उसे तुरंत अतिरिक्त पैन कार्ड या कार्डों को तुरंत वापिस कर देना चाहिए।
क्या पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है?
हर उस व्यक्ति को पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है जो आधार नंबर प्राप्त करने के योग्य है। यदि व्यक्ति के पास आधार नंबर न हो तो आधार नामांकन आईडी दी जा सकती है।
टिप्पणी : प्रभावी तिथि 01.10.2024 से आधार प्रपत्र की नामांकन संख्या को उद्धृत नहीं किया जा सकेगा। करदाता को पैन आवेदन पत्र में अपने आधार नंबर को उद्धृत करना आवश्यक है।
- गृह संपत्ति से आय
- गृह संपत्ति में उसका कोई भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए;
- करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए;
- गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए।
- व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोई मुआवजा अथवा अन्य भुगतान
- पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
- पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
- यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए;
- स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए
- अन्य स्त्रोतों से आय
शीर्ष आय
गृह संपत्ति से आय
कराधान के लिए शर्तें
व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
निम्नलिखित आय व्यापार तथा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :
पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
प्रभार्यता के लिए शर्तें:
अन्य स्त्रोतों से आय
अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी।
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
1. वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/) पर लॉग आन करें।
2. ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान" पर क्लिक करें
3. फिर "नए भुगतान" पर क्लिक करें
4. 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
क. विक्रेता की आवासीय स्थिति
ख. विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्या
ग. विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
घ. संपत्ति का विवरण
ड़. भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
6. जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी
क. नेट बैंकिंग
ख़ डेबिट कार्ड
ग बैंक काउंटर पर भुगतान
घ आरटीजीएस/एनईएफटी या
ड़ भुगतान गेटवे
7. उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
- कर की दर क्या है
- नई कर व्यवस्था
- वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी)
- अधिभार
- स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर
- कर का भुगतान कैसे करें ?
-
वास्तविक विधि - नामित बैंक पर चालान की हार्ड प्रति की प्रस्तुति द्वारा भुगतान
-
ई-भुगतान विधि अर्थात् इलैक्ट्रानिक विधि का प्रयोग करते हुए भुगतान करना
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
कर की दर क्या है
मूल छूट संबंधी सीमा और एओपी या बीओआई के मामले में कर की दरें को नीचे तालिका में दर्शाई गई हैं
| शुद्ध आय श्रेणी |
कर की दर |
| रू. 2,50,000 तक | शून्य |
| रू. 2,50,001 से रू. 5,00,000 तक | 5% |
| रू. 5,00,001 से रू. 10,00,000 तक | 20% |
| रू. 10,00,000 से अधिक | 30% |
नई कर व्यवस्था
वित्त अधिनियम, 2023 के माध्यम से धारा 115खकग में एक नई उप-धारा (1क) को शामिल किया गया है जो एओपी/बीओआई के लिए भी नई कर व्यवस्था के प्रावधानों का दायरे को बढ़ाता है। नई कर व्यवस्था के तहत, आय आकलन वर्ष 2026-27 और उसके बाद के लिए निम्नलिखित दर पर कर योग्य होगी
| कुल आय (रू.) |
दर |
| रू. 4,00,000 तक | शून्य |
| रू. 4,00,001 से रू. 8,00,000 तक | 5% |
| रू. 8,00,001 से रू. 12,00,000 तक | 10% |
| रू. 12,00,001 से रू. 16,00,000 तक | 15% |
| रू. 16,00,001 से रू. 20,00,000 तक | 20% |
| रू. 20,00,001 से रू. 24,00,000 तक | 25% |
| रू. 24,00,000 से अधिक | 30% |
वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी)
एक एओपी या बीओआर्इ वैकल्पिक न्यूनतम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, जहां अधिनियम के सामान्य प्रावधानों के अनुसार गणना की गर्इ कुल आय पर उसके द्वारा देय कर, 'समायोजित कुल आय' के 18.5 प्रतिशत से कम है। ऐसे मामले में 'समायोजित कुल आय' को एओपी/बीओआर्इ की आय के रूप में लिया जाता है और यह ऐसी 'समायोजित कुल आय' के 18.5 प्रतिशत की दर से कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
यदि किसी निर्धारिती ने नर्इ कर व्यवस्था का विकल्प चुना है, तो एएमटी के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
अधिभार
कुल आय पर गिने गए कर को अधिभार द्वारा और बढ़ाया जाएगा
निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए, अधिभार की चार दरें हैं - 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत, 25 प्रतिशत और 37 प्रतिशत जहां कर निम्नानुसार गिना जाता है
| आय का रूप | कुल आय की श्रेणी | ||||
| रू. 50 लाख तक | रू. 50 लाख से अधिक लेकिन रू. 1 करोड़ तक | रू. 1 करोड़ से अधिक लेकिन रू. 2 करोड़ तक | रू. 2 करोड़ से अधिक लेकिन रू. 5 करोड़ तक | रू. 5 करोड़ से अधिक | |
| धारा 111क या धारा 115कघ के अंतर्गत शामिल अल्पावधि पूंजीगत प्राप्ति | शून्य | 10% | 15% | 15% | 15% |
| धारा 112क या धारा 115कघ के अंतर्गत या धारा 112 के अंतर्गत शामिल दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्ति | शून्य | 10% | 15% | 15% | 15% |
| लाभांश आय (धारा 115क, 115कख, 115कग, 115कगक के अंतर्गत विशेष दर पर कर हेतु वसूलनीय लभांश आय के तौर पर नही) | शून्य | 10% | 15% | 15% | 15% |
| धारा 115खखड़ के अंतर्गत कर हेतु वसूले जाने वाली अस्पष्टीकृत आय | 25% | 25% | 25% | 25% | 25% |
| **अन्य कोई आय | शून्य | 10% | 15% | 25% | 37%*** |
*वित्त अधिनियम, 2022 के माध्यम से एक ऐसे एओपी के मामले में 15 प्रतिशत पर अधिभार की दर की सीमा निर्धारित कर दी है जिसमें केवल कंपनी और उसके सदस्य शामिल हैं। ऐसे एओपी के मामले में अधिभार की दर निम्नानुसार होगी :
- 10 प्रतिशत जहां कुल आय रू. 50 लाख से अधिक हो लेकिन रू. 1 करोड़ से कम हो
- 15 प्रतिशत जहां कुल आय रू. 1 करोड़ से अधिक हो
इसके अलावा, वित्त अधिनियम, 2023 बताती है कि जहां एक निर्दिष्ट फंड की कुल आय, जैसा धारा 10(4घ) में संदर्भित है, में धारा 115कघ के अंतर्गत करयोग्य प्रतिभूति के संदर्भ में प्राप्त की गई आय शामिल है तो ऐसी आय पर कर पर कोई अधिभार नही लगाया जाएगा।
** धारा 111क, धारा 112, धारा 112क या धारा 115कघ में संदर्भित लाभांश आय या पूंजीगत प्राप्तियों पर देययोग्य कर पर अधिभार की अधिकतम दर 15 प्रतिशत होगी। हालांकि, जहां एक व्यक्ति की अन्य आय रू. 2 करोड़ से अधिक न हो लेकिन लाभांश आय या पूंजीगत प्राप्ति को शामिल करने के बाद जैसा उक्त प्रावधानों में संदर्भित है, कुल आय 2 करोड़ रुपये से अधिक है तो अन्य आय की राशि होने के बावजूद कुल अन्य आय, लाभांश आय और पूंजीगत प्राप्ति पर देययोग्य कर की राशि पर 15 प्रतिशत की दर से अधिभार लगाया जाएगा जैसा उक्त प्रावधानों में बताया गया है।
*** धारा 115खकग की नई कर व्यवस्था के अंतर्गत कर देने का विकल्प चुनने वाले एओपी/बीओआई के लिए अन्य आय पर अधिभार की दर 25 प्रतिशत से अधिक नही होगी। इसलिए, रू. 5 करोड़ से अधिक की आय 25 प्रतिशत के अधिभार दर का विषय होगी यदि एओपी/बीओआई धारा 115खकग की नई कर व्यवस्था को चुनता है।
इसके अलावा, अधिभार की दर एओपी के मामले में 15 प्रतिशत तक सीमित है जिसमें केवल कंपनियां और उसके सदस्य शामिल है।
स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर
आयकर की राशि और लागू अधिभार, ऐसे आयकर और अधिभार के 4 प्रतिशत की दर से गिने गए स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर द्वारा और बढ़ाया जाएगा।
जहां धारा 10(4घ) में निर्दिष्ट फंड की कुल आय में धारा 115कघ के तहत कर योग्य प्रतिभूतियों के संबंध में प्राप्त आय (पूंजीगत लाभ के अलावा) शामिल है तो ऐसी आय पर कर पर कोर्इ स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर नहीं लगाया जाएगा।
कर का भुगतान कैसे करें ?
करों को निम्नलिखित विधियों में से किसी में भी दिया जा सकता है :
किसे अग्रिम कर का भुगतान करना है ?
प्रत्येक व्यक्ति जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक है अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। हालांकि निम्नलिखित व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं भले ही उनकी कर देयता रू. 10,000 अथवा अधिक हो :
व्यक्ति अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं
अग्रिम कर को वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का निम्नानुसार किश्तों में भुगतान किया जाना है :
| स्थिति | 15 जून तक | 15 सितम्बर तक | 15 दिसंबर तक | 15 मार्च तक |
| करदाता (उनको छोड़कर जिन्होंने धारा 44कघ की काल्पनिक कराधान योजना को चुना है) | अग्रिम कर के 15 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 45 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 75 प्रतिशत तक | अग्रिम कर के 100 प्रतिशत तक |
| करदाता (जिन्होंने धारा 44कघ की काल्पनिक कराधान योजना को चुना है) | शून्य | शून्य | शून्य | अग्रिम कर के 100 प्रतिशत तक |
31 मार्च तक दिए गए किसी भी कर को अग्रिम कर के तौर पर समझा जाएगा।
अग्रिम कर को प्रासंगिक कॉलम, अर्थात् अग्रिम कर पर चिन्ह लगाकर आईटीएनएस 280 चालान के माध्यम जमा किया जाना है।
टिप्पणी :
धारा 44कख के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित कराने के लिए जिम्मेदार है।
- क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?
- क) लाभार्थी मालिक या अन्यथा के तौर पर भारत से बाहर स्थित कोई परिसंपत्ति (किसी उद्यम में किसी वित्तीय हित सहित) हो
- ख) भारत के बाहर स्थित किसी खाते में हस्ताक्षरी प्राधिकारी हो
- ग) भारत के बाहर स्थित किसी परिसंपत्ति (किसी उद्यम में किसी वित्तीय हित सहित) का लाभार्थी हो
- क्या रिटर्न की ई-फाइलिंग अनिवार्य है?
- विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि ?
विवरणी दाखिलीकरण
क्या आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है ?
प्रत्येक एओपी/बीओआई चाहे निगमित हो अथवा नहीं, को आय की विवरणी दाखिल करना होगा यदि उनकी कुल आय (किसी अन्य व्यक्ति की आय सहित जिसके संबंध में वह निर्धारणीय है) धारा 10क, 10ख या 54 या 54ख या 54घ या 54ड़ग या 54च या 54छ या 54छक या 54छख अथवा अध्याय VIक (अर्थात् धारा 80ग से 80प के अन्तर्गत कटौती) के प्रावधानों को प्रभावी किए बिना अधिकतम राशि जो कर हेतु वसूलनीय नही है, से अधिक है अर्थात् छूट सीमा से अधिक है
आय की विवरणी को निम्नलिखित मामलों में दाखिल करना अनिवार्य है :
(1) यदि एक व्यक्ति की भारत से बाहर परिसंपत्ति हो : एक व्यक्ति, एक निवासी और भारत में साधारण निवासी के तौर पर, अपनी आय की विवरणी को दाखिल करेगा, भले ही उसकी आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो यदि उसके पास(2) यदि वह बैंक खाते में रू. 1 करोड़ से अधिक जमा करता हो।
एक व्यक्ति या एचयूएफ अपनी आय की विवरणी दाखिल करेगा भले ही आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो, यदि उसने बैंकिंग कंपनी या एक सहकारी बैंक में एक या एक से अधिक चालू खाते में रू. 1 करोड़ से अधिक की राशि (या कुल राशि) जमा की हो.
(3) यदि विदेशी यात्रा व्यय रू. 2 लाख से अधिक हो।
एक व्यक्ति या एचयूएफ अपनी आय की विवरणी दाखिल करेगा भले ही आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो, यदि उसने अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति पर एक विदेशी यात्रा पर रू. 2 लाख से अधिक व्यय किया हो .
(4) यदि विद्युत की खपत रू. 1 लाख से अधिक हो.
एक व्यक्ति या एचयूएफ अपनी आय की विवरणी को दाखिल करेगा भले ही आय अधिकतम छूट की सीमा से अधिक न हो, यदि उसने विद्युत की खपत पर रू. 1 लाख से अधिक का व्यय किया हो।.
(5) यदि व्यापार की कुल बिक्री, कारोबार या कुल प्राप्तियां पिछले वर्ष के दौरान रू. 60 लाख से अधिक होती है
(6) यदि पेशे की कुल प्राप्ति पिछले वर्ष के दौरान रू. 10 लाख से अधिक होती है.
(7) यदि पिछले वर्ष के दौरान एक व्यक्ति के मामले में काटा गया या एकत्रित किया गया कुल कर रू. 25,000 या उससे अधिक (रू. निवासी वरिष्ठ नागरिक के मामले में रू. 50,000) होता है.
(8) यदि व्यक्ति के एक या एक से अधिक बैंक खाते में कुल जमा पिछले वर्ष के दौरान रू. 50 लाख या उससे अधिक होता है।.
क्या रिटर्न की ई-फाइलिंग अनिवार्य है?
एओपी/बीओआई के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के साथ या उसके बिना इलेक्ट्रॉनिक रूप से आय का रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। एओपी/बीओआई इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन संहिता के तहत आय का रिटर्न भी दाखिल कर सकता है। हालांकि, एओपी /बीओआई अपने खातों का ऑडिट कराने के लिए उत्तरदायी है धारा 44कख डिजिटल हस्ताक्षर के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप से रिटर्न प्रस्तुत करेगी।
विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि ?
एओपी/बीओआई द्वारा विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि निम्नानुसार हैं :
| नियत | तिथि का ब्यौरा |
| एक एओपी/बीओआई जिसे आयकर अधिनियम अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत अपने खातों को अंकेक्षित करना आपेक्षित है, के लिए | निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर |
| एक एओपी/बीओआई जिसे धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, के लिए | निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर |
| किसी अन्य मामले में | निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई |
- प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
- प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- सेवाओं पर जाएं और “प्रतिदाय पुनः जारी करें” पर क्लिक करें
- प्रतिदाय पुनःनिर्गम अनुरोध करें
प्रतिदाय
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें:
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:

