आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 269 ञ

क्षतिपूर्ति

धारा

धारा संख्या

269 ञ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXक - कर चोरी रोकने के लिए हस्तांतरण के कुछ मामलों में अचल संपत्तियों का अधिग्रहण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2007

क्षतिपूर्ति

क्षतिपूर्ति

प्रतिकर

269ञ. (1) जहां कोर्इ स्थावर सम्पत्ति इस अध्याय के अधीन अर्जित की जाए वहां, केन्द्रीय सरकार ऐसे अर्जन के लिए ऐसा प्रतिकर देगी जो उसके अन्तरण के प्रकट प्रतिफल की रकम और उक्त रकम के पंद्रह प्रतिशत के योग के बराबर राशि होगी :

75[परन्तु उस दशा में जहां संबंधित पक्षकारों के बीच करार के अधीन ऐसी स्थावर सम्पत्ति के अन्तरण के लिए सम्पूर्ण प्रतिफल या उसका कोर्इ भाग, उस तारीख के पश्चात् पड़ने वाली किसी तारीख या तारीखों को संदेय है, जिसको ऐसी सम्पत्ति अर्जित की जाती है, वहां केन्द्रीय सरकार द्वारा संदेय प्रतिफल निम्नलिखित रकमों का योग होगा, अर्थात् :–

(i) प्रकट प्रतिफल के पन्द्रह प्रतिशत के बराबर रकम;

(ii) वह रकम, यदि कोर्इ हो, जो ऐसे करार के अनुसार उसी तारीख को या उसके पहले संदेय हो गर्इ है, जिसको ऐसी सम्पत्ति का इस अध्याय के अधीन अर्जन किया जाता है; और

(iii) वह रकम, जो उसी तारीख के पश्चात् संदेय है, जिसको ऐसी सम्पत्ति का इस अध्याय के अधीन अर्जन किया जाता है।]

(2) उपधारा (1) की किसी बात के होते हुए भी,–

() जहां उस उपधारा में उल्लिखित सम्पत्ति के अन्तरिती को अन्तरण के पश्चात् किंतु सम्पत्ति के केन्द्रीय सरकार में निहित होने के पूर्व, सम्पत्ति का नुकसान हो जाता है (सामान्य खर्चों के परिणामस्वरूप जो होता है उससे भिन्न) वहां उस उपधारा के अधीन संदेय प्रतिकर से ऐसी रकम घटा दी जाएगी, जो सक्षम प्राधिकारी और प्रतिकर के लिए हकदार व्यक्ति, केन्द्रीय सरकार में सम्पत्ति के निहित होने के पंद्रह दिन के अन्दर करार करें या ऐसे करार के अभाव में, जो न्यायालय, सक्षम प्राधिकारी द्वारा या सक्षम प्राधिकारी इस प्रयोजन के लिए सम्यक्त: प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस निमित्त किए गए निर्देश पर वह रकम अवधारित करे, जो संपत्ति को उस दशा में वापस लाने के लिए जिसमें वह ऐसे अंतरण के समय थी, खर्च करनी पड़े;

() जहां अन्तरिती को ऐसी सम्पत्ति के अन्तरण के पश्चात् किंतु धारा 269घ की उपधारा (1) के अधीन ऐसी संपत्ति की बाबत सूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से पूर्व ऐसी संपत्ति में कोर्इ सुधार किए गए हैं चाहे परिवर्धन के रूप में या परिवर्तन के रूप में या किसी अन्य रीति में वहां, उपधारा (1) के अधीन ऐसी सम्पत्ति की बाबत संदेय प्रतिकर में ऐसी रकम बढ़ा दी जाएगी जो सक्षम प्राधिकारी और प्रतिकर के हकदार व्यक्ति केन्द्रीय सरकार में सम्पत्ति के निहित होने के पंद्रह दिन के अन्दर तय करे या ऐसे करार के अभाव में, न्यायालय, सक्षम प्राधिकारी द्वारा या सक्षम प्राधिकारी इस प्रयोजन के लिए सम्यक्त: प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा इस निमित्त किए गए निर्देश पर रकम के रूप में अवधारित करें, जो ऐसी वृद्धि करने में खर्च की गर्इ है।

(3) उपधारा (2) के खंड () या खंड () के अधीन प्रत्येक निर्देश उस तारीख से तीस दिन के अन्दर किया जाएगा जिसको वह स्थावर सम्पत्ति, जिसके बारे में वह है, केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाती है या ऐसी अतिरिक्त अवधि के अन्दर किया जाएगा जो न्यायालय उक्त अवधि की समाप्ति के पूर्व इस निमित्त किए गए आवेदन पर और यह समाधान हो जाने पर कि ऐसा करने के लिए पर्याप्त कारण है, अनुज्ञात करें और ऐसे निर्देश में, स्थावर सम्पत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन संदेय प्रतिकर और वह रकम जो, सक्षम प्राधिकारी के प्राक्कलन के अनुसार उपधारा (2) के, यथास्थिति, खण्ड () के अधीन प्रतिकर में से घटार्इ जानी है या खण्ड () के अधीन बढ़ार्इ जानी है, स्पष्ट विनिर्दिष्ट होगी।

(4) इस अध्याय के अधीन अर्जित किसी स्थावर सम्पत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन संदेय प्रतिकर उस रकम से कम है, जो प्रतिकर के रूप में संदेय होती यदि वह संपत्ति धारा 269घ की उपधारा (1) के अधीन उस सम्पत्ति की बाबत राजपत्र में सूचना के प्रकाशन की तारीख को भूमि अर्जन अधिनियम, 1894 (1894 का 1) की धारा 4 के अधीन प्रारम्भिक सूचना जारी किए जाने के पश्चात् उस अधिनियम के अधीन अर्जित की जाती, तो उस रकम के बारे में यह समझा जाएगा कि वह धारा 269ग की उपधारा (1) के खंड () या खंड () में उल्लिखित उद्देश्य के लिए अंतरण के पक्षकार होने के कारण अन्तरिती से शास्ति के रूप में केन्द्रीय सरकार ने वसूल कर ली है और अन्तरिती पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए निम्नलिखित के अधीन कोर्इ शास्ति नहीं लगार्इ जाएगी–

() धारा 271 की उपधारा (1) के उपखंड (iii) के अधीन अपनी आय के उतने भाग के विवरणी छिपाने या गलत विवरण देने के लिए, जिसका उसके द्वारा संपत्ति के प्रकट प्रतिफल से अधिक किसी रकम का, संपत्ति के प्रतिफल के रूप में अंतरक को, इस बात के होते हुए भी कि ऐसी रकम अंतरिती की आय में सम्मिलित है, संदाय करने में प्रयुक्त की गर्इ है;

() धन-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27) की धारा 18 की उपधारा (1) के खण्ड (iii) के अधीन अपनी आस्तियों के उतने भाग के विवरण छिपाने के लिए या गलत विवरण देने के लिए, जो उसके द्वारा अन्तरक को सम्पत्ति के प्रतिफल के रूप में कोर्इ रकम, जो संपत्ति के प्रकट के प्रतिफल से अधिक है देने में प्रयुक्त की गर्इ है इस बात के होते हुए भी कि ऐसी रकम अन्तरिती के शुद्ध धन में सम्मिलित है।

 

75. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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