आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 23

धारा 115ञख का संशोधन

धारा

धारा संख्या

23

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - प्रत्यक्ष कर

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2008

धारा 115ञख का संशोधन

धारा 115ञख का संशोधन

धारा 115ञख का संशोधन

23. आय-कर अधिनियम की धारा 115ञख में, उपधारा (2) के पश्चात्, -

() स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यांकित किया जाएगा और इस प्रकार संख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के खंड () के पश्चात्, "यदि खंड () से" शब्दों से आरंभ होने वाले और "घटा दिए गए हैं, -" शब्दों पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाएगा और 1 अप्रैल, 2001 से रखा गया समझा जाएगा, अर्थात् :-

"() आस्थगित कर की रकम और उसके लिए व्यवस्था ;

यदि खंड () से खंड () में निर्दिष्ट कोई रकम लाभ-हानि लेखा में डेबिट की जाती है और उसमें से निम्नलिखित को घटा दिया जाता है ,";

(कक) इस प्रकार संख्यांकित स्पष्टीकरण 1 में, खंड (vii) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा और 1 अप्रैल, 2001 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् :-

"(viii) आस्थगित कर की रकम, यदि ऐसी कोई रकम लाभ-हानि खाते में क्रेडिट की गई हो । ";

() इस प्रकार संख्यांकित स्पष्टीकरण 1 के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण 2 अंतःस्थापित किया जाएगा और 1 अप्रैल, 2001 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् :-

"स्पष्टीकरण 2 - स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, आय-कर की रकम में निम्नलिखित सम्मिलित होगा -

(i) धारा 115ण के अधीन वितरित लाभों या धारा 115द के अधीन वितरित आय पर कोई कर ;

(ii) इस अधिनियम के अधीन प्रभारित कोई ब्याज ;

(iii) केंद्रीय अधिनियमों द्वारा समय-समय पर यथा उद्गृहीत अधिभार, यदि कोई हो ;

(iv) केंद्रीय अधिनियमों द्वारा समय-समय पर आय-कर पर यथा उद्गृहीत शिक्षा उपकर, यदि कोई हो ; और

(v) केंद्रीय अधिनियमों द्वारा समय-समय पर आय-कर पर यथा उद्गृहीत सेकेंडरी और उच्चतर शिक्षा उपकर, यदि कोई हो ।"।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2008]

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