- अर्थ
- कर दरें
- जहां पिछले वर्ष 2023-24 के दौरान इसका कुल कारोबार या कुल प्राप्तियां रू. 400 करोड़ से अधिक नही है
- धारा 115खक के लिए चुना गया हो जहां इसे
- धारा 115खकक के लिए चुना गया हो जहां इसे
- धारा 115खकख के लिए चुना गया हो
- अन्य कोई घरेलू कंपनी
- न्यूनतम वैकल्पिक कर
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
- (i) वह भारतीय कंपनी हो; अथवा
- (ii) उसके प्रभावी प्रबंधन का स्थान, उस वर्ष में किसी भी समय, भारत में हो
घरेलू कंपनी
अर्थ
धारा 2(22क) के अनुसार, "घरेलू कंपनी" अर्थात् भारतीय कंपनी अथवा अन्य कोई कंपनी जिसकी आय इस अधिनियम के अंतर्गत कर के लिए उत्तरदायी है, के संबंध में ऐसी आय में से देययोग्य लाभांश (वरीय शेयरों पर लाभांश सहित) लाभांश का भारत में घोषित तथा भुगतान करने के लिए निर्धारित व्यवस्था की है
कर दरें
क. आय कर
निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए घरेलू कंपनियों के मामले में लागू होने वाली आयकर दरें निम्नानुसार है :
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25% |
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25% |
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22% |
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15% |
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30% |
आंकी गई आयकर की राशि को अधिभार द्वारा बढ़ाया जाएगा -
(क) कंपनी की स्थिति में एक करोड़ से अधिक की कुल आय वाला हो किंतु ऐसे आयकर के 7 प्रतिशत की दर पर दस करोड़ से अधिक न हो तथा
(ख) कंपनी की स्थिति में ऐसे आयकर के 12 प्रतिशत की दर पर दस करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाले
बशर्ते कि एक करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली प्रत्येक कंपनी की स्थिति में लेकिन दस करोड़ रूपए से अधिक न हो, ऐसी आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल आय, आय, जो एक करोड़ से अधिक है, की राशि की तुलना में एक करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगी :
बशर्ते आगे प्रदान किया जाए कि दस करोड़ रूपए से अधिक की कुल आय वाली प्रत्येक कंपनी की स्थिति में, ऐसी आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि आय, दस करोड़ से अधिक है, की राशि की तुलना में दस करोड़ रूपए की कुल आय पर आयकर तथा अधिभार के तौर पर देययोग्य कुल राशि से अधिक नहीं होगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर
आयकर की राशि जिसे लागू होने वाले अधिभार द्वारा बढ़ाया गया हो उसे आयकर पर स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर द्वारा और बढ़ाया जाएगा जिसे ऐसे आयकर और अधिभार के चार प्रतिशत की दर पर गिना जाएगा।
ख. न्यूनतम वैकल्पिक कर
एक कंपनी बही लाभ के 15 प्रतिशत का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है (साथ अधिभार तथा शिक्षा उपकर जैसा लागू हो) जहां कंपनी की सामान्य कर देयता बही लाभ के 15प्रतिशत से कम है
कंपनी जिसमें जनता वस्तुत: हितार्थी नहीं है, की स्थिति में हानि को पृथक करना तथा अग्रेषित करने की स्थिति में कोई विशेष प्रावधान है ?
आयकर अधिनियम की धारा 79 के अनुसार, जहां हिस्सेदारी में परिवर्तन कंपनी की स्थिति में, उस कंपनी की स्थिति में नहीं जहां जनता का वस्तुत: हित है, पिछले वर्ष में हुआ है तो पिछले वर्ष से पूर्व किसी वर्ष में कोई हानि पिछले वर्ष की आय के समक्ष अग्रेषित तथा पृथक नहीं की जाएगी जबतक -
पिछले वर्ष की अंतिम दिन पर कंपनी के धारित शेयर वोटिंग अधिकार का कम से कम इक्यावन प्रतिशत हो जिसे उस व्यक्ति द्वारा लाभदायक तरीके से संघटित किया गया हो जो शेयर रखने वाली कंपनी के वर्ष अथवा वर्षों जिसमें हानि हुई, के अंतिम दिन पर वोटिंग अधिकार का कम से कम इक्यावन प्रतिशत रखता हो
धारा 79 पर प्रतिबंध केवल हानि की स्थिति में लागू है नाकि अनवशोषित मूल्यह्रास, वैज्ञानिक अनुसंधान अथवा परिवार नियोजन व्यय पर अनवशोषित पूंजीगत व्यय पर।
आगे, धारा 79 के प्रावधान भारतीय कंपनी जो विदेशी कंपनी की सहायक कंपनी है, की स्थिति में हिस्सेदारी में परिवर्तन अथवा शेयरधारक के किसी परिचित को उपहार के रूप में शेयरों के स्थानांतरण पर अथवा शेयरधारक की मृत्यु पर शेयर संघटन में परिवर्तन की स्थिति में लागू नहीं है, जब ऐसी विदेशी कंपनी अन्य विदेशी कंपनी के साथ समामेलित/विघटित होती है तो समामेलित/विघटित विदेशी कंपनी के 51 प्रतिशत अथवा उससे अधिक हिस्सेदार समामेलित/परिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक होने जारी रहता है
कंपनी की आवासीय स्थिति को कैसे निर्धारित करें ?
कंपनी की आवासीय स्थिति को कैसे निर्धारित करें ?
प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से, एक कंपनी को किसी पिछले वर्ष में भारत में निवासी कहा जाता है, यदि;
इस उद्देश्य के लिए, "प्रभावी प्रबंधन का स्थान" का अर्थ स्थान जहां प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय जो पूर्ण रूप से उद्यम के व्यापार करने के लिए आवश्यक है, अर्थ में किए जाते है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने पीओईएम के निर्धारण हेतु अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों की एक विशेष बात “एबीओआई“ की परीक्षा है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी कंपनी को ‘भारत के बाहर सक्रिय व्यवसाय में संलग्न’ तब माना जाएगा जब उसकी निष्क्रिय आय उसकी कुल आय के 50 प्रतिशत से अधिक न हो। इसके अतिरिक्त, कुल परिसंपत्तियों, कर्मचारियों तथा वेतन व्यय के स्थान से संबंधित कुछ अन्य समग्र शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
ऐसी कंपनियों के मामले में जो भारत के बाहर सक्रिय व्यवसाय में संलग्न हैं, यदि कंपनी के निदेशक मंडल की अधिकांश बैठकें भारत के बाहर होती हैं, तो यह अनुमान लगाया जाएगा कि कंपनी का प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत के बाहर है।
उन कंपनियों के मामलों में, जो भारत के बाहर सक्रिय व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं, पीओईएम का निर्धारण दो चरणों में किया जाएगाः
पहला चरणः उस व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करना या पता लगाना, जो कंपनी के व्यवसाय संचालन के लिए मुख्य प्रबंधकीय और व्यावसायिक निर्णय लेते हैं।
दूसरा चरणः यह निर्धारित करना कि वे निर्णय वास्तव में कहां लिए जा रहे हैं।
हालाँकि, यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी कंपनी का टर्नओवर या सकल प्राप्तियाँ किसी वित्तीय वर्ष में रू. 50 करोड़ या उससे कम हैं, तो उस पर पीओईएम दिशा-निर्देश लागू नहीं होंगे, जैसा कि परिपत्र संख्या 8, दिनांक 23-2-2017 के माध्यम से स्पष्ट किया गया है।
क्या कंपनियों की शाखाओं/बैंकों के पास पृथक कर कटौती खाता संख्या हो सकती है ?
हां, ऐसी स्थिति में, शाखा का नाम तथा स्थिति अथवा कर कटौती/संग्रहण, जो भी लागू हो, के लिए उत्तरदायी व्यक्ति का पद कर कटौती खाता संख्या के आवंटन के लिए आवेदन में स्पष्ट रूप से दिया जाना चाहिए
व्यापार के संस्थापन में परिवर्तन की स्थिति में, प्राधिकृत उद्यम द्वारा हानि को अग्रेषित किया जा सकता है ?
सामान्यत, हानि सहने वाला व्यक्ति केवल उत्तरगामी वर्ष में अग्रेषित हानि को समायोजित करने के लिए पात्र होता है। हालांकि, कंपनी में मालिकाना फर्म का रूपांतरण, विघटन, समामेलन जैसे व्यापार के संस्थापन की स्थिति में अथवा सहभागी फर्म के कंपनी आदि में रूपांतरण की स्थिति में पुनर्गठित उद्यम पूर्ववर्ती उद्यम की समायोजित हानि को अग्रेषित करने हेतु पात्र है (बशर्ते इस संबंध में निर्दिष्ट शर्तें पूरी की जाती है)
- स्थाई खाता संख्या के लिए कैसे आवेदन करें ?
- स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज
- स्थिति को जानें
- संपर्क सहायता
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
स्थाई खाता संख्या
स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कैसे करें?
1) ऑनलाइन आवेदन - ऑनलाइन आवेदन यूटीआईआईटीएसएल या प्रोटेन (पहले NSDL eGov के तौर पर ज्ञात) की वेबसाइट से किया जा सकता है
ऑनलाइन आवेदन के लिए क्लिक करें
2) स्थाई खाता संख्या आवेदन केंद्र के माध्यम से - पैन के लिए आवेदन निम्न जगह पर जमा किया जा सकता है
(क) प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई-गर्वे के तौर पर ज्ञात)(ख) UTITSL
स्थाई खाता संख्या आवेदन के साथ जमा किए जाने वाले दस्तावेज
| भारत में पंजीकृत कंपनी, | भारत से बाहर पंजीकृत कंपनी | |
| प्रयोज्नीय प्रपत्र | 49क, | 49कक |
| आपेक्षित दस्तावेज | कंपनी के पंजीयक द्वारा जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति देश, जहां आवेदक स्थित है, में जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति, | "सुधारक" (उस देश के संबंध में जो हेग अपोस्टिल सम्मेलन 1961 के हस्ताक्षरकर्ता है) अथवा भारतीय दूतावास अथवा उच्चायोग अथवा देश जहां आवेदक स्थित है में वाणिज्यि दूतावास अथवा भारत में पंजीकृत अनुसूचित बैंक की विदेशी शाखा के प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत सत्यापित। भारत में निगर्मित पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रति अथवा भारतीय प्राधिकरण द्वारा भारत में स्थापित कार्यालय हेतु दिया गया अनुमोदन। |
स्थिति को जानें
आवेदक आवेदन प्रपत्र की स्वीकृति पर विशिष्ट संख्या सन्निहित पावती प्राप्त करेगा। इस पावती संख्या का उक्त वेबसाइट पर उपलब्ध स्थिति जाने सुविधा का प्रयोग करते हुए आवेदन की स्थिति ( राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड/यूटीआई अवसंरचना प्रौद्योगिकी एवं सेवा लिमिटेड ) को जानने के लिए किया जा सकता है।
संपर्क सहायता
आयकर विभाग अथवा राष्ट्रीय प्रतिभूति निक्षेपागार लिमिटेड को किसी भी निम्नलिखित तरीकों से संपर्क किया जा सकता है
| विधि आयकर विभाग प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) यूटीआईटीएसएल | |||
| वेबसाइट | www.incometaxindia.gov.in | https://www.protean-tinpan.com/ | www.utiitsl.com |
| कॉल सेंटर | 08069708080 | ||
| ई-मेल आईडी | tininfo@proteantech.in | ||
| पता |
प्रोटेन (पहले एनएसडीएल ई.गर्वे के तौर पर ज्ञात) |
यूटीआई इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्नालॉजी एंड सर्विस लिमिटेड, |
|
यदि आपकी स्थाई खाता संख्या खो जाती है ?
यदि आपकी स्थाई खाता संख्या खो जाती है तो आप "नए पैनकार्ड के लिए अनुरोध अथवा/ तथा पैन आंकड़ों में बदलाव या सुधार" के लिए प्रपत्र को जमा करके प्रतिलिपि पैनकार्ड के लिए आवेदन कर सकते है तथा प्रपत्र के साथ एफआईआर की प्रति सलंग्न की जा सकती है।
अगर पैनकार्ड खो जाए और आपको पैन याद नहीं है तो आयकर विभाग द्वारा दी गई "अपना पैन जानें" सुविधा से पैन का पता लगाया जा सकता है। यह सुविधा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in से मिल सकती है।
आप पैन की अॉनलाइन जानकारी नाम, पिता का नाम और जन्म तिथि जैसे मूल विवरण देने के पश्चात् प्राप्त कर सकते है। पैन जानने के बाद पश्चात् प्रतिरूपी पैन के लिए "नए पैनकार्ड के लिए अनुरोध अथवा/तथा पैनकार्ड के आंकड़ों में बदलाव या सुधार" प्रपत्र भरकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
पैन कार्ड प्राप्त करने के क्या लाभ है ?
पैन आयकर विभाग से हर लेन-देन के लिए अनिवार्य किया गया है। यह अनेक वित्तीय लेन-देन के लिए भी अनिवार्य है, जैसे बैंक में खाता खोलने, संस्थागत वित्तीय ऋण लेना, उच्चतम उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद, विदेशी यात्रा, अचल संपत्ति का लेन-देन, प्रतिभूतियों के व्यवसाय इत्यादि। पैन एक महत्पूर्ण फोटो पहचान है जो देश की सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा स्वीकृत हैं।
प्रपत्र 49क/49कक में निर्धारण अधिकारी कोड को उपलब्ध कराना आपेक्षित है ?
हाँ, प्रपत्र 49क/49कक में निर्धारण अधिकारी (एओ) को मुहैया कराना अनिवार्य है। क्षेत्राधिकार निर्धारण अधिकारी का एओ कोड (अर्थात् क्षेत्र कोड, एओ प्रकार, श्रेणी कोड तथा एओ संख्या) आवेदक द्वारा भरी जानी चाहिए। इसका विवरण आयकर विभाग के दफ्तर या पैन केंद्र से या पैन सेवा प्रदाता की वेबसाइट www.utiitsl.com or https://www.protean-tinpan.com/ से प्राप्त की जा सकती है।
पैन से संबंधित प्रावधानों का अनुपालन न करने पर क्या जुर्माना है ?
धारा 272ख करदाता द्वारा पैन से संबधित प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने पर दंड का प्रावधान मुहैया कराती है, अर्थात् पैन लेने का उत्तरदायी होते हुए भी पैन नहीं प्राप्त करना, या किसी निर्धारित दस्तावेज पर, जिसमें पैन उद्धृत करना अनिवार्य है, उसमें जानबूझ कर गलत पैन देना, या कर की कटौती करने वाले को या कर लेने वाले को गलत पैन देने पर धारा 272खके अंतर्गत रु.10,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या एक व्यक्ति एक से अधिक पैन रख सकता है ?
एक व्यक्ति एक से अधिक पैन नहीं रख सकता। यदि एक व्यक्ति को पैन आवंटित हो गया है, तो वह दूसरे पैन की प्राप्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता। 1961 के आयकर अधिनियम की धारा 272ख के अंतर्गत एक से अधिक पैन रखने पर रु. 10,000 के जुर्माने का प्रावधान है।
यदि एक व्यक्ति को एक से अधिक पैन आवंटित हो गया है तो उसे तुरंत अतिरिक्त पैन कार्ड या कार्डों को वापस कर देना चाहिए।
क्या पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है?
हर उस व्यक्ति को पैन आवेदन पत्र में आधार नंबर देना आवश्यक है जो आधार नंबर प्राप्त करने के योग्य है। यदि व्यक्ति के पास आधार नंबर न हो तो आधार नामांकन आईडी दी जा सकती है।
टिप्पणी : प्रभावी तिथि 01.10.2024 से आधार प्रपत्र की नामांकन संख्या को उद्धृत नहीं किया जा सकेगा। करदाता को पैन आवेदन पत्र में अपने आधार नंबर को उद्धृत करना आवश्यक है।
- गृह संपत्ति से आय
- गृह संपत्ति में उसका कोई भवन अथवा भूमि सन्निहित होनी चाहिए;
- करदाता संपत्ति का मालिक होना चाहिए;
- गृह संपत्ति करदाता द्वारा निष्पादित व्यापार अथवा पेशे के प्रयोजन के लिए प्रयुक्त नही किया जाना चाहिए।
- व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- पिछले वर्ष के दौरान किसी समय निर्धारिती द्वारा निष्पादित किसी व्यापार अथवा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
- किसी निर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त अथवा शेष कोई मुआवजा अथवा अन्य भुगतान
- पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
- पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए। अन्य शब्दों में, स्थानांतरित परिसंपत्ति स्थानांतरण की तिथि पर पूंजीगत परिसंपत्ति होनी चाहिए;
- यह पिछले वर्ष के दौरान करदाता द्वारा हस्तांतरित होना चाहिए;
- स्थानांतरण के परिणामस्वरूप लाभ अथवा प्राप्ति होनी चाहिए
- अन्य स्त्रोतों से आय
शीर्ष आय
गृह संपत्ति से आय
कराधान के लिए शर्तें
व्यापार तथा पेशे से लाभ तथा प्राप्ति
निम्नलिखित आय व्यापार तथा पेशे से शीर्ष लाभ तथा प्राप्ति के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय हैं :
पूंजीगत प्राप्ति के अंतर्गत आय
प्रभार्यता के लिए शर्तें:
अन्य स्त्रोतों से आय
अन्य आय जो किसी अन्य शीर्ष आय के अंतर्गत वसूलनीय नही है तथा जो कुल आय से बाहर नही है, विषय "अन्य स्रोतों से आय" के अंतर्गत शेष आय हेतु वसूलनीय होगी।
- प्रपत्र 26थख भरने के चरण
- प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण
- स्थाई खाता संख्या का प्रयोग करते हुए करदाता के तौर पर पंजीकृत हो व ट्रेसेज पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) पर लॉगिन करें।
- ''डाउनलोड'' मेनू के तहत ''प्रपत्र 16ख (क्रेता के लिए)'' का चयन करें।
- संपत्ति लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज करें जिसके लिए प्रपत्र 16ख का अनुरोध किया जा रहा है। निर्धारण वर्ष, अभिस्वीकृति संख्या, विक्रेता की स्थाई खाता संख्या दर्ज करें और ''आगे बढ़ें'' पर क्लिक करें।
- एक संपुष्टि स्क्रीन दिखाई देगी। आगे बढ़ने के लिए ''अनुरोध सबमिट करें'' पर क्लिक करें।
- डाउनलोड अनुरोध प्रस्तुत करने पर एक सफलता संदेश दिखाई देगा। डाउनलोड अनुरोध के लिए खोज करने के लिए कृपया अनुरोध संख्या नोट करें।
- अनुरोध फाइलों को डाउनलोड करने के लिए ''अनुरोध डाउनलोड'' पर क्लिक करें।
- अनुरोध संख्या के साथ अनुरोध खोजें। अनुरोध पंक्ति का चयन करें और ''एचटीटीपी डाउनलोड'' बटन पर क्लिक करें।
I. प्रपत्र 26थख भरने के चरण:
1. वेबसाइट-फाइलिंग पोर्टल ( https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ ) पर लॉग आन करें।
2. ई-फाइल टैब के अंतर्गत, "ई-कर भुगतान " पर क्लिक करें
3. फिर "नए भुगतान " पर क्लिक करें
4. 26थख (संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस) फील्ड के अंतर्गत 'आगे बढ़ें' को चुने
पूरा प्रपत्र भरें जैसा लागू हो ।
(प्रपत्र 26थख भरते समय उपयोगकर्ता को निम्न जानकारी के साथ तैयार रहना चाहिए) :
क. विक्रेता की आवासीय स्थिति
ख विक्रेता और खरीदार की स्थाई खाता संख्या
ग विक्रेता और खरीदार के पते का विवरण
घ संपत्ति का विवरण
ड़ भुगतान/जमा की गई राशि और जमा कर का विवरण
6. जमा करने के बाद, अगला पेज आपसे भुगतान की विधि को चुनने को पूछेगा यानी
क. नेट बैंकिंग
ख़ डेबिट कार्ड
ग बैंक काउंटर पर भुगतान
घ आरटीजीएस/एनईएफटी या
ड़ भुगतान गेटवे
7. उपयुक्त भुगतान विधि को चुनें और भुगतान को जारी रखें
सफल भुगतान पर सीआईएन, भुगतान विवरण और बैंक का नाम जिसके माध्यम से ई-भुगतान किया गया है, शामिल करते हुए चालान प्रतिपर्ण प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रतिपर्ण किए गए भुगतान का प्रमाण है।
प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के 5 दिन बाद ट्रेसेज (TRACES) पोर्टल (www.tdscpc.gov.in) के लिए आगे बढ़ें।II. प्रपत्र 16ख डाउनलोड करने के चरण :
ट्रेसेज वेबसाइट पर 'संपत्ति की बिक्री पर स्रोत पर कर कटौती' के पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
- कंपनियों पर आयकर
- अग्रिम कर की गणना तथा भुगतान कैसे किया जाता है ?
- कर की गणना कैसे करें ?
- कर का भुगतान कैसे करें ?
कर भुगतान
कंपनियों पर आयकर
कर जो कंपनियों द्वारा अपनी आय पर दिया जाता है उसे निगमित कर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह कंपनियों पर आयकर (निगमित कर) के तौर पर निर्दिष्ट है।
गैर-निगमित निर्धारिती द्वारा कर भुगतान को आयकर के तौर पर कहते हैं तथा चालान में इसके भुगतान के लिए यह आयकर (कंपनी को छोड़कर) के तौर पर निर्दिष्ट होना हैं।
अग्रिम कर की गणना तथा भुगतान कैसे किया जाता है ?
अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर का भुगतान किश्तों में किया जाना है।
अग्रिम कर वर्ष की संभावित कर देयता के आधार पर आंका जाना है। अग्रिम कर किश्तों में दिया जाना है। आगे देखें
| स्थिति | 15 जून तक | 15 सितम्बर तक | 15 दिसंबर तक | 15 मार्च तक |
| निर्धारिती | 15 % | 45 % | 75 % | 100 % |
31 मार्च तक दिया गया कोई कर अग्रिम कर के तौर पर समझा जाता है
अग्रिम कर को जमा करना प्रासंगिक कॉलम अर्थात् अग्रिम कर का चयन कर चालान आईटीएनएस 280 के माध्यम से किया जाता है
कर की गणना कैसे करें ?
कुल आय, अर्थात् कर हेतु देययोग्य आय, का पता लगाने के पश्चात् अगला कदम वर्ष के लिए कर देयता की गणना है। कर देयता इस संबंध में निर्धारित दरों को लागू करके आंकी जानी है। कर की दरों के लिए, "कर दर" अनुभाग को संदर्भित करें। निम्नलिखित तालिका करदाता की कुल कर देयता की गणना के तरीके को समझने में मददगार होगी आगे देखें
कर गणक
कर का भुगतान कैसे करें ?
कंपनियों की स्थिति में ई-भुगतान अनिवार्य है
- लाभांश वितरित कर
- प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22 से, घरेलू कंपनी को लाभांश के रूप में ऐसी कंपनी द्वारा किसी घोषित, वितरित अथवा भुगतित राशि पर वितरित लाभांश का भुगतान करना होगा। घरेलू कंपनी से प्राप्त लाभांश शेयरधारकों के हाथों करयोग्य हैं।
- वितरित आय पर कर से संबंधित विशेष प्रावधान
- धारा-115-ण : घरेलू कंपनियों के वितरित लाभ पर कर
- धारा - 115त : घरेलू कंपनियों द्वारा कर के गैर-भुगतान के लिए देययोग्य ब्याज
- धारा - 115थ : जब कंपनी चूककर्ता के तौर पर समझी जाती है
लाभांश वितरित कर
वितरित आय पर कर से संबंधित विशेष प्रावधान
- टन भार कर
- कंपनी की स्थिति में, अर्हकारी जहाज संचालन के व्यापार से आय, अपने विकल्प पर अध्याय XII-छ के प्रावधानों के अनुसार आंका जाना है।
- इसलिए, टन भार कर प्रकल्पित कराधान की योजना है जिसमें जहाज के संचालन द्वारा उत्पन्न काल्पनिक आय जहाज के टन भार के आधार पर निर्धारित होती है
- जहाज कंपनियों की आय से संबंधित विशेष प्रावधान
- धारा - 115फ : परिभाषाएं
- धारा - 115फक : अर्हकारी जहाज संचालन के व्यापार द्वारा लाभ तथा प्राप्ति की गणना
- धारा - 115फख : जहाज संचालन
- धारा - 115फग : अर्हकारी कम्पनी
- धारा - 115फघ : अर्हकारी जहाज
- धारा - 115फड़ : टन भार कर योजना के अंतर्गत आय की गणना का तरीका
- धारा - 115फच : टनभार आय
- धारा - 115फछ : टनभार आय की गणना
- धारा - 115फज : संयुक्त संचालन आदि की स्थिति में गणना
- धारा - 115फझ : प्रासंगिक नौ परिवहन से आय
- धारा - 115फञ : सामान्य लागत का उपचार
- धारा - 115फट : मूल्यह्रास
- धारा - 115फठ : कटौती तथा पृथकीकरण आदि का सामान्य अपवर्जन
- धारा - 115फड : हानि का अपवर्जन
- धारा - 115फढ : टन भार परिसंपत्ति के स्थानांतरण से वसूलनीय प्राप्ति
- धारा - 115फण : धारा 115ञख के प्रावधानों द्वारा अपवर्जन
- धारा - 115फत : टन भार योजना के लिए चुनी गई विधि तथा समय
- धारा - 115फथ : अवधि जिसके लिए टन भार कर विकल्प प्रभावी रहता है
- धारा - 115फद : टन भार कर योजना का नवीकरण
- धारा - 115फध : कुछ मामलों में टन भार कर योजना को चुनने पर निषेध
- धारा - 115फन : टन भार कर आरक्षित खाते हेतु लाभ का स्थानांतरण
- धारा - 115फप : टन भार कर कंपनी के लिए आपेक्षित न्यूनतम प्रशिक्षण
- धारा - 115फफ : टन भार में अधिकार की सीमा
- धारा - 115फब : खातो का अनुरक्षण तथा अंकेक्षण
- धारा - 115फभ : टन भार का निर्धारण
- धारा - 115फम : एकीकरण
- धारा - 115फय : विघटन
- धारा - 115फयक : अर्हकारी जहाज संचालन हेतु अस्थाई स्थगन का प्रभाव
- धारा - 115फयख : कर परिहार
- धारा - 115फयग : टन भार कर योजना का अपवर्जन
टन भार कर
जहाज कंपनियों की आय से संबंधित विशेष प्रावधान
(अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) काले धन और टैक्स अधिनियम, 2015 का अधिरोपण
प्रासंगिक अधिनियम के प्रावधानों के काले धन को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
- (अज्ञात विदेशी आय और संपत्ति) काले धन और टैक्स अधिनियम के अधिरोपण, 2015 ('काला धन अधिनियम') मई 26, 2015 पर माननीय राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त किया।
- अप्रकटीकृत विदेशी आय या तो अभिकलन तीन बार टैक्स के बराबर करने के लिए एक दंड के साथ संपत्ति के मूल्य पर 30% टैक्स के लिए अधिनियम प्रदान करता है। यह आगे इरादतन विदेशी आय या भारत से बाहर आयोजित की संपत्ति पर टैक्स से बच निकलने की कोशिश के मामले में 10 साल ऊपर का मुकदमा चलाने के लिए प्रदान करता है।
- अधिनियम के काले धन को प्रवृत्त 1 जुलाई 2015 से आता है।
- किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?
- आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज
- आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?
- आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि
- क्या एक निर्धारिती पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल कर सकता है
- बहुधा पूछे जाने प्रश्न
विवरणी दाखिलीकरण
किसे आय की विवरणी दाखिल करनी चाहिए ?
प्रत्येक कंपनी को, निर्धारित प्रपत्र में तथा निर्धारित प्रणाली में तथा उल्लखित ऐसे अन्य विवरण जिसे निर्धारित किया जा सके में पिछले वर्ष के दौरान अपनी आय की विवरणी को नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व दाखिल करना चाहिए।
आय की विवरणी के साथ संलग्न किए जाने वाले आपेक्षित दस्तावेज
आईटीआर विवरणी प्रपत्र कम प्रपत्र संलग्नता हैं तथा इसलिए, करदाता को आय की विवरणी (चाहे व्यक्तिगत रूप से हो अथवा इलैक्ट्रानिक रूप से दाखिल की गई हो) के साथ किसी दस्तावेज (जैसे निवेश, स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्र आदि के प्रमाण) को संलग्न करना आपेक्षित नही हैं। हालांकि यह दस्तावेज करदाता द्वारा रखे जाने चाहिए तथा निर्धारण, पूछताछ आदि जैसी परिस्थितियों में मांगे जाने पर कर प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
हालांकि, करदाता जिसे धारा 10(23ग)(v),10(23ग) (vi), 10(23ग) (viक), 10क,10कक, 12क(1)(ख), 44कख, 44घक, 50ख, 80-झक,80-झख,80-झग,80-झघ, 80ञञकक, 80ठक,92ड़,115ञख अथवा 115फब के अंतर्गत अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है वह आय की विवरणी को दाखिल करने की तिथि को अथवा इससे पूर्व इलैक्ट्रानिक रूप से इसे प्रस्तुत करेंगे।
आय की विवरणी को कैसे दाखिल करें ?
एक कंपनी के लिए यह आवश्यक है कि वह डिजिटल हस्ताक्षर के तहत इलैक्ट्रानिक तौर पर अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करे।
| आयकर | विवरणी | विवरण |
| आईटीआर 6 | धारा 11 के अधीन छूट का दावा करने वाली कम्पनियों से भिन्न कंपनियों के लिए | पीडीएफ |
| आईटीआर 7 | उन व्यक्तियों के लिए, जिनके अंतर्गत कंपनियां भी है, जिनसे केवल धारा 139 (4क) या धारा 139 (4ख) या धारा 139 (4ग) या धारा 139 (4घ) के अधीन विवरणी प्रस्तुत करना अपेक्षित है | पीडीएफ पिछले वर्ष के विवरणी प्रपत्र देखें |
आय/हानि की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि
कंपनी द्वारा आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए नियत तिथि 31 अक्टूबर है
अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन जिन्हें प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, करने वाले निर्धारिती की स्थिति में नियत तिथि 30 नवंबर है
क्या एक निर्धारिती पूर्व दाखिल की गई विवरणी में त्रुटि को सही करने के लिए संशोधित विवरणी को दाखिल कर सकता है
हां, विवरणी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 3 महीनों के अंदर या निर्धारण पूरा होने से पहले, जो पहले हो, किसी भी समय संशोधित की जा सकती है।
क्या नियत तिथि के पश्चात् विवरणी को दाखिल किया जा सकता हैं ?
हां, यदि व्यक्ति नियत तिथि को अथवा उससे पूर्व आय की विवरणी को दाखिल नहीं कर पाता तो वह लंबित विवरणी दाखिल कर सकता है। एक लंबित विवरणी को निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले 3 महीनों के अंदर अथवा निर्धारण की समाप्ति से पूर्व, जो भी पहले हो, के भीतर दाखिल किया जा सकता है। निर्धारित नियत तिथि के पश्चात् दाखिल विवरणी को लंबित विवरणी कहा जाता है।
उदाहरण, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अर्जित आय की स्थिति में, लंबित विवरणी 31 दिसंबर, 2025 तक दाखिल की जा सकती है।
क्या विलंबित विवरणी को दाखिल करने हेतु एक आयकर विवरणी को अंतिम तिथि की समाप्ति के बाद प्रस्तुत किया जा सकता है?
अद्यतित विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए धारा 139(8क) को शामिल किया गया है । धारा बताती है कि एक अद्यतित विवरणी इस तथ्य के बाजवूद किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत की जा सकती है कि क्या ऐसे व्यक्ति ने पहले ही मूल , विलंबित या संशोधित विवरणी प्रासंकिगत निर्धारण वर्ष के लिए प्रस्तुत की है या नही ( कुछ शर्तों के अनुसार )। एक अद्यतित विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों के अंदर किसी भी समय प्रस्तुत किया जा सकता है ।
मुझे प्रमाण के तौर पर दाखिल विवरणी की प्रति को रखना अनिवार्य है तथा कितने समय के लिए ?
हां, चूंकि आयकर अधिनियम के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही वर्तमान वित्त वर्ष से पूर्व तीन/पाँच वर्षों (जो भी स्थिति हो) तक आंरभ की जा सकती हैं, आपको कम से कम इस अवधि के लिए ऐसे दस्तावेजों को अनुरक्षित रखना चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में कार्यवाही 10 वर्षों के पश्चात् भी आरंभ की जा सकती है।
आय की विवरणी को दाखिल करने पर समस्त अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें
- प्रतिदाय/मांग स्थिति देखें
- प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
- यूजर आईडी, पासवर्ड के साथ ई-दाखिलीकरण वेबसाइट पर लॉगिन करें
- सेवाओं पर जाएं और “प्रतिदाय पुनः जारी करें” पर क्लिक करें
- प्रतिदाय पुनःनिर्गम अनुरोध करें
प्रतिदाय
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध कैसे करें (प्रतिदाय असफलता की स्थिति में)
प्रतिदाय पुन: निगर्मन के लिए अनुरोध हेतु, कृपया निम्न चरणों का अनुसरण करें:
अपील
आयकर देयता पहले निर्धारण अधिकारी द्वारा निर्धारित होती है। निर्धारण अधिकारी की विभिन्न कार्यवाहियों द्वारा असंतुष्ट करदाता आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकता है। इसके अतिरिक्त अपील को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अधिमत किया जा सकता है। पर्याप्त कानूनी प्रश्न पर, आगे की अपील उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा सकती है चाहें तो उच्चतम न्यायालय के समक्ष भी की जा सकती है। अपीलीय प्राधिकरण के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अपील संबंधी प्रक्रियाएं निम्नानुसार परिभाषित है:
- शेयरों की पुन: खरीद
- "पुन: खरीद" का अर्थ कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 77क के प्रावधानों के अनुसार कंपनी द्वारा स्वयं के शेयरों को खरीदना है
- शेयर धारक द्वारा शेयरों (प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचीबद्ध शेयर के तौर पर नही) की पुन: खरीद पर कंपनी द्वारा आय की वितरित कोई आय वितरित आय पर 20 प्रतिशत पर प्रभारित होगा
- वितरित आय अर्थात् राशि जो ऐसे शेयरों के निगर्मन के लिए कंपनी द्वारा प्राप्त की गई थी, द्वारा सीमितानुसार शेयरों की पुन: खरीद पर कंपनी द्वारा किया गया भुगतान प्रतिफल है
- हालांकि, कंपनी द्वारा ऐसी पुन: खरीद के संबंध में शेयरधारकों हेतु उत्पन्न आय कर से छूटप्राप्त होगी
- शेयरों की पुन: खरीद के लिए घरेलू कंपनी की वितरित आय पर कर से संबंधित विशेष प्रावधान
- धारा - 115थक : शेयरधारकों हेतु वितरित आय पर कर (शेयरों की पुन: खरीद जो 01.10.2024 को या उसके बाद की जाती है, के संदर्भ में लागू नही)
- धारा - 115थख : कंपनी द्वारा कर के गैर-भुगतान के लिए देययोग्य ब्याज
- धारा - 115थग : जब कंपनी चूक निर्धारिती के तौर पर समझी जाती है
शेयरों की पुन: खरीद
शेयरों की पुन: खरीद के लिए घरेलू कंपनी की वितरित आय पर कर से संबंधित विशेष प्रावधान

