पूंजी आस्ति के अर्जन पर प्रतिकर का संदाय
पूंजी आस्ति के अर्जन पर प्रतिकर का संदाय
194ठ. 59[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से लोप किया गया।]
59. लोप किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से संशोधित, धारा 194ठ इस प्रकार थी :
"194ठ. पूंजी आस्ति के अर्जन पर प्रतिकर का संदाय–ऐसा कोर्इ व्यक्ति, जो किसी पूंजी आस्ति के, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन, अनिवार्य अर्जन के मद्दे प्रतिकर या वर्धित प्रतिकर या प्रतिफल या वर्धित प्रतिफल के रूप में किसी राशि का किसी निवासी को संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, ऐसी राशि का नकद रूप में या चेक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से, इनमें से जो भी पहले से, संदाय करते समय उस राशि के दस प्रतिशत के बराबर रकम की उसमें सम्मिलित आय पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा :
परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती उस दशा में नहीं की जाएगी जहां कि वित्तीय वर्ष के दौरान किसी निवासी को, यथौस्थिति, ऐसे संदाय की रकम या ऐसे संदायों की कुल रकम एक लाख रुपये से अधिक नहीं होती है:
परन्तु यह और कि इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती 1 जून, 2000 को या उसके पश्चात् किए गए किसी संदाय में से नहीं की जाएगी।"
[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

