आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 194छ

लाटरी टिकटों के विक्रय पर कमीशन आदि

धारा

धारा संख्या

194छ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2007

लाटरी टिकटों के विक्रय पर कमीशन आदि

लाटरी टिकटों के विक्रय पर कमीशन आदि

28[लाटरी टिकटों के विक्रय पर कमीशन आदि29

194छ. 30[(1)] कोर्इ व्यक्ति, जो किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लाटरी टिकटों का स्टाक, वितरण, क्रय या विक्रय करता है या जिसने लाटरी टिकटों का स्टाक, वितरण, क्रय या विक्रय किया है, ऐसे टिकटों पर कमीशन, पारिश्रमिक या इनाम के रूप में (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) एक हजार रुपए से अधिक रकम की कोर्इ आय, 1 अक्तूबर, 1991 को या उसके पश्चात्, संदत्त करने के लिए दायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय को जमा करते समय या नकद या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से उसका भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, उस पर दस प्रतिशत की दर से आय-कर की कटौती करेगा।

(2) 31[***]

(3) 31[***]

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है, वहां ऐसी राशि को जमा किया जाना, पाने वाले के खाते में, ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तद्नुसार लागू होंगे।]

 

28. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।

29. नियम 28, 28कक, 28कख, 30, 31, 31क, 31कख और 37 तथा प्ररूप सं. 13, 16क, 26, 26कध और 26थ देखिए।

30. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से पुन:संख्यांकित।

31. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.6.2003 से उपधारा (2) और (3) का लोप किया गया। लोप से पूर्व उपधारा (2) और (3), जो वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से अंत:स्थापित की गर्इ थीं, इस प्रकार थीं :

"(2) जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि किसी ऐसे व्यक्ति की, जो लाटरी टिकटों का स्टाक, वितरण, क्रय या विक्रय करता है या जिसने लाटरी टिकटों का स्टाक, वितरण, क्रय या विक्रय किया है, कुल आय पर, यथास्थिति, निम्नतर दर पर आय-कर की कटौती करना या आय-कर की कटौती न करना न्यायोचित है, वहां निर्धारण अधिकारी, ऐसे व्यक्ति द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर उसे ऐसा प्रमाणपत्र देगा, जो उचित हो।

(3) जहां ऐसा कोर्इ प्रमाणपत्र दिया गया है, वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, जब तक ऐसा प्रमाणपत्र निर्धारण अधिकारी द्वारा रद्द न कर दिया जाए, ऐसे प्रमाणपत्र में निर्दिष्ट दरों पर यथास्थिति, आय-कर की कटौती करेगा या किसी कर की कटौती नहीं करेगा।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

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