अनुषंगी फायदों की विवरणी
ग.–अनुषंगी फायदों की बाबत विवरणी फाइल करने संबंधी प्रक्रिया और उसकी बाबत कर का निर्धारण तथा संदाय
अनुषंगी फायदों की विवरणी
115बघ. (1) धारा 139 में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, प्रत्येक ऐसा नियोजक, जिसने किसी पूर्ववर्ष के दौरान अपने कर्मचारियों को ऐसे अनुषंगी फायदों का संदाय किया है या संदाय के लिए उपबंध किया है, नियत तारीख को या उससे पूर्व, निर्धारण अधिकारी को पूर्ववर्ष की बाबत विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित तथा ऐसी अन्य विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, अनुषंगी फायदों की एक विवरणी प्रस्तुत करेगा या प्रस्तुत कराएगा ।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में, "नियत तारीख" से अभिप्रेत है,–
(क) जहां नियोजक,–
(i) कोर्इ कंपनी है ; या
(ii) (कंपनी से भिन्न) ऐसा कोर्इ व्यक्ति है, जिसके लेखाओं की इस अधिनियम के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन संपरीक्षा कराना अपेक्षित है,
निर्धारण वर्ष की 30 सितम्बर ;
(ख) किसी अन्य नियोजक की दशा में, निर्धारण वर्ष की 31 जुलार्इ।
(2) ऐसे किसी नियोजक की दशा में, जो निर्धारण अधिकारी की राय में, इस अधिनियम के अधीन अनुषंगी फायदा कर का संदाय करने के लिए उत्तरदायी है और जिसने उपधारा (1) के अधीन विवरणी प्रस्तुत नहीं की है, निर्धारण अधिकारी, नियत तारीख के पश्चात,् उसे एक सूचना जारी कर सकेगा और उसकी उस पर तामील करा सकेगा जिसमें उससे सूचना की तामील की तारीख से तीस दिन के भीतर विहित प्ररूप में और विहित रीति में सत्यापित ऐसे अन्य विशिष्टियां देते हुए, जो विहित की जाएं, विवरणी प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी।
(3) अनुषंगी फायदा कर का संदाय करने के लिए उत्तरदायी ऐसा कोर्इ नियोजक, जिसने उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर या उपधारा (2) के अधीन जारी की गर्इ सूचना के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर कोर्इ विवरणी प्रस्तुत नहीं की है, सुसंगत निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व या निर्धारण पूरा होने से पूर्व, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी भी समय, किसी पूर्ववर्ष के लिए विवरणी प्रस्तुत कर सकेगा।
(4) यदि किसी नियोजक को, उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (2) के अधीन जारी की गर्इ किसी सूचना के अनुसरण में विवरणी प्रस्तुत कर दिए जाने पर, उसमें किसी लेप या किसी गलत कथन का पता चलता है तो वह सुसंगत निर्धारण वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व या निर्धारण पूरा होने से पूर्व, इसमें से जो भी पूर्वतर हो, किसी भी समय, पुनरीक्षित विवरणी प्रस्तुत कर सकेगा।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

