आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 115ञख

कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

115ञख

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII-ख - कुछ कंपनियों के संबंध में विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध

कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध

55[कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध56

115 ञ ख. (1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहां किसी निर्धारिती की दशा में जो कंपनी है 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष की बाबत इस अधिनियम के अधीन संगणित कुल आय पर संदेय आय-कर उसके बही लाभ के साढ़े सात प्रतिशत से कम है, 57[वहां ऐसा बही लाभ निर्धारिती की कुल आय माना जाएगा और ऐसी कुल आय पर निर्धारिती द्वारा संदेय कर साढ़े सात प्रतिशत की दर से आय कर की राशि होगा।]

(2) प्रत्येक निर्धारिती जो एक कंपनी है, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की छठी अनुसूची के भाग 2 और 358 के उपबंधों के अनुसार पूर्ववर्ष के लिए अपना लाभ और हानि लेखा तैयार करेगा :

परन्तु लाभ और हानि लेखा सहित वार्षिक लेखा तैयार करते समय,–

(i) लेखाकर्म नीतियां;

(ii) लाभ और हानि लेखा तैयार करने के लिए अपनाए जाने वाले लेखा मानक;

(iii) अवक्षयण की संगणना के लिए अपनार्इ गर्इ पद्धति और दरें,

वही होंगी जिन्हें कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 210 के उपबंधों के अनुसार ऐसे लेखे, जिनके अंतर्गत लाभ-हानि लेखा भी है, तैयार करने के प्रयोजनों के लिए अंगीकार किया गया है, और उन्हें कंपनी के समक्ष उसके वार्षिक अधिवेशन में रखा जाएगा :

परन्तु यह और कि जहां किसी कंपनी ने कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन वित्तीय वर्ष को अंगीकार किया है या वह अंगीकार करती है जो इस अधिनियम के अधीन पूर्ववर्ष से भिन्न है, वहां–

(i) लेखाकर्म नीतियां;

(ii) ऐसे लेखा, जिसके अंतर्गत लाभ-हानि लेखा भी है लेखा तैयार करने के लिए अपनाए गए लेखा-मानक;

(iii) अवक्षयण के परिकलन के लिए अपनार्इ गर्इ रीति और दरें,

उन लेखाकर्म नीतियों, लेखाकर्म मानकों और अवक्षयण के परिकलन की रीति और दरों के अनुरूप होंगी, जिन्हें सुसंगत पूर्ववर्ष के अंतर्गत आने वाले ऐसे वित्तीय वर्ष या वित्तीय वर्ष के भाग के लिए ऐसे लेखे, जिसके अंतर्गत लाभ-हानि लेखा भी है; तैयार करने के लिए अंगीकार किया गया है।

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''बही लाभ'' से अभिप्रेत है, उपधारा (2) के अधीन तैयार किए गए सुसंगत पूर्ववर्ष के लिये लाभ-हानि लेखा में दिखाया गया शुद्ध, लाभ जिसमें निम्नलिखित जोड़ दिए गए हैं–

() संदत्त या संदेय आय-कर की रकम और उसके लिए व्यवस्था; या

() किन्हीं आरक्षितियों में ले जार्इ गर्इ रकमें, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों 59[जो धारा 33कग के अधीन विनिर्दिष्ट किसी आरक्षिती से भिन्न हो]; या

() अभिनिश्चित दायित्वों से भिन्न दायित्वों को चुकाने के लिए व्यवस्था के रूप में अलग रखी गर्इ रकम या रकमें; या

() समनुषंगी कंपनियों की हानियों के लिए व्यवस्था के रूप में रकम; या

() संदत्त या प्रस्तावित लाभांश की रकम या रकमें; या

() किसी ऐसी आय से, जिसको धारा 10 59क[(उसके खंड (23छ) में अंतर्विष्ट उपबंधों को छोड़कर)] या धारा 10क या धारा 10ख या धारा 11 लागू होती हों, संबंधित व्यय की रकम या रकमें; या

यदि खंड () से खंड () में निर्दिष्ट रकम लाभ-हानि लेखा में डेबिट की जाती है, और उनमें निम्नलिखित घटा दिए गए हैं,–

60[(i) किसी आरक्षिती या व्यवस्था में से वापस ली गर्इ रकम (लाभ-हानि लेखे में डेबिट रूप से भिé रूप में, 1 अप्रैल, 1997 से पूर्व सृजित किसी आरक्षिती को छोड़कर) यदि ऐसी कोर्इ रकम लाभ हानि लेखे में जमा की जाती है :

परंतु जहां यह धारा किसी पूर्ववर्ष में किसी निर्धारिती को लागू होती है वहां 1 अप्रैल, 1997 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में सृजित आरक्षितियों में से या की गर्इ व्यवस्थाओं में से वापस ली गर्इ रकम को बही लाभ में से तभी घटाया जाएगा जब उन आरक्षितियों या व्यवस्थाओं को (जिनमें से उक्त रकम वापस ली गर्इ थी), यथास्थिति, इस स्पष्टीकरण या धारा 115ञक के दूसरे परंतुक के नीचे के स्पष्टीकरण के अधीन ऐसे वर्ष के बही लाभ में जोड़ा गया हो; या]

(ii) ऐसी आय की रकम, जिसको धारा 10 60क[(उसके खंड (23छ) में अंतर्विष्ट उपबंधों को छोड़कर)] या धारा 10क या धारा 10ख या धारा 11 या धारा 12 के कोर्इ उपबंध लागू होते हैं, यदि ऐसी रकम लाभ हानि लेखे में जमा की जाती है; या

61[(iii) अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की राशि, लेखा बहियों के अनुसार इनमें से जो भी कम हो;

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए–

() हानि के अंतर्गत अवक्षयण नहीं आएगा;

() इस खंड के उपबंध तब लागू नहीं होंगे यदि अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की राशि शून्य हो; या]

(iv) धारा 80जजग के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ की रकम, जो उस धारा की, यथास्थिति, उपधारा (3) के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) या उपधारा (3क) के अधीन संगणित की गर्इ है, और उस धारा में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन है; या

(v) धारा 80जजड़ के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ की उस धारा की, यथास्थिति, उपधारा (3) या उपधारा (3क) के अधीन संगणित रकम, जो उस धारा में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन है; या

(vi) धारा 80 जजच के अधीन कटौती के लिए पात्र लाभ की उस धारा की उपधारा (3) के अधीन संगणित रकम, जो उस धारा में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन है; या

(vii) रुग्ण औद्योगिक कंपनी के, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उक्त कंपनी, रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 1762 की उपधारा (1) के अधीन रुग्ण औद्योगिक कंपनी हो गर्इ है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ही आरंभ होने वाले और उस निर्धारण वर्ष को, जिसके दौरान ऐसी कंपनी का समस्त शुद्ध मूल्य संचित हानियों के बराबर या उनसे अधिक हो जाता है, समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए लाभ की रकम।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''शुद्ध मूल्य'' का वही अर्थ है जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक)63 में है।

(3) उपधारा (1) की कोर्इ बात किसी सुसंगत पूर्ववर्ष के संबंध में पश्चात्वर्ती वर्ष या वर्षों को धारा 32 की उपधारा (2) या धारा 32क की उपधारा (3) या धारा 72 की उपधारा (1) के खंड (ii) या धारा 73 या धारा 74 या धारा 74क की उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन अग्रनीत की जाने वाली रकमों के अवधारण पर प्रभाव नहीं डालेगी।

(4) ऐसी प्रत्येक कंपनी, जिसे यह धारा लागू होती है, धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापात्र की विहित प्ररूप64 में एक रिपोर्ट, यह प्रमाणित करते हुए कि बही लाभ इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगणित किया गया है, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन फाइल की गर्इ आय की विवरणी के साथ या धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन सूचना के उत्तर में प्रस्तुत की गर्इ आय की विवरणी के साथ प्रस्तुत करेगी।

(5) इस धारा में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के सभी अन्य उपबंध इस धारा में उल्लिखित ऐसे प्रत्येक निर्धारिती को जो कंपनी है, लागू होंगे।]

64क[(6) इस धारा के उपबंध किसी उद्यमकर्ता या विकासकर्ता द्वारा, यथास्थिति, किसी यूनिट या किसी विशेष आर्थिक जोन में किए गए किसी कारबार या प्रदान की गर्इ सेवाओं से 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् या उद्भूत होने वाली आय को लागू नहीं होंगे।]

 

55. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।

56. परिपत्र सं. 13/2001, तारीख 9.11.2001 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

57. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से "वहां सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए संदेय कर ऐसे बही लाभ का साढ़े सात प्रतिशत समझा जाएगा" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

58. कंपनी अधिनियम, 1956 की छठी अनुसूची के भाग 2 और 3 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट एक।

59. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।

59क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

60. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2001 से, भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (i) और परन्तुक इस प्रकार थे :

''(i) किसी आरक्षिती या व्यवस्था में से वापस की गर्इ रकम, यदि ऐसी कोर्इ रकम लाभ-हानि लेखे में जमा की जाती है :

परन्तु जहां यह धारा किसी पूर्ववर्ष में (जिसके अंतर्गत सुसंगत पूर्ववर्ष है) किसी निर्धारिती को लागू होती है वहां 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में सृजित आरक्षितियों में से या की गर्इ व्यवस्थाओं में से वापस ली गर्इ रकम को बही लाभ में से तभी कम की जाएगी जब उन आरक्षितियों या व्यवस्थाओं को (जिनमें से उक्त रकम निकाली गर्इ थी) इस स्पष्टीकरण के अधीन ऐसे वर्ष के बही लाभ में जोड़ा गया हो; या''

60क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

61. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2001 से, भूतलक्षी प्रभाव से खंड (iii) के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (iii) इस प्रकार था :

"(iii) अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की राशि, लेखा बहियों के अनुसार इनमें से जो भी कम हो।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए हानि के अंतर्गत अवक्षयण नहीं आएगा; या"

62. रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 17 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट एक

63. रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 की धारा 3(1) के खंड (छक) में ''शुद्ध मूल्य'' की परिभाषा दी गर्इ है। धारा 3(1)(छक) के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट एक

64. देखिए नियम 40ख और प्ररूप सं. 29ख.

64क. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा, इसके अधिसूचित किये जाने की तारीख से, अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

फ़ुटनोट