परिपत्र सं. 14/2015 : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत छूट का दावा तथा स्वीकृति अनुदान से संबंधित कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण
परिपत्र सं.
परिपत्र सं. 14/2015
परिपत्र की तिथि
17/08/2015
दस्तावेज़ अपलोड की तिथि
17/08/2015
परिपत्र सं. 14/2015
एफ नं. 197/38/2015-आर्इटीए-I
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नार्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली
17 अगस्त, 2015
विषय : आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत छूट का दावा तथा स्वीकृति अनुदान से संबंधित कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण
आयकर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') की धारा 10 के वाक्यांश (23ग) का उप-वाक्यांश (vi) निर्धारित करता हैं कि किसी विश्वविद्यालय अथवा अन्य शैक्षणिक संस्थान, केवल शैक्षणिक प्रयोजन के लिए ना कि लाभ के उद्देश्य से मौजूद हो, कर से छूट प्राप्त कर सकेगा यदि ऐसा उद्यम निर्धारित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित हो। सरकार [उप-वाक्यांश (iiiकख)] द्वारा पूर्णता अथवा आंशिक रूप से वित्त पोषित विश्वविद्यालयों अथवा शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति में अथवा यदि उनकी कुल वार्षिक प्राप्तियां रू. 1 करोड़ से अधिक नही हैं [उप-वाक्यांश (iiiकघ) आर. डब्ल्यू. नियम 2खग] तो ऐसे अनुमोदन की आवश्यकता नही हैं। इसलिए, उप-वाक्यांश (vi) के अंतर्गत आने वाले उद्यमों के अनुमोदन की स्वीकृति देने के दौरान, निर्धारित प्राधिकारी को सुनिश्चित करना होगा कि आवेदक संस्थान "केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए हो नाकि लाभ के उद्देश्य से"। यहां धारा 10 के वाक्यांश (23ग) के विभिन्न परंतुक हैं तथा निर्धारित करती है कि, अन्य विषयों में, विभिन्न निरीक्षण शर्तें केवल जिसकी परिपूर्णता के अनुसार, छूट का लाभ लिया जा सकता है।
इन निरीक्षण शर्तों में कुछ स्थितियों आदि में बही खातों का अनुरक्षण, अंकेक्षण, कोष के प्रयोग की विधि तथा तरीका शामिल हैं। कुछ अन्य परंतुक धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत आवेदन करने की विधि को निर्धारित करती है तथा परिस्थिति जब अनुमोदन पूर्व स्वीकृत किया गया था, को वापस लिया जा सकता है।
प्रतिनिधि धारा 10(23ग)(vi) के संचालन से संबंधित कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण की मांग प्राप्त कर सकते हैं। इसकी बोर्ड द्वारा जांच की जाएगी तथा निम्नलिखित स्पष्टीकरण किए गए हैं—
1. अनुमोदन स्वीकृति के दौरान पूछताछ गुंजाइश—
1.1 पूछताछ गुंजाइश पर स्पष्टीकरण की मांग की गर्इ है जिसे धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत अनुमोदन स्वीकृति के दौरान निर्धारित प्राधिकारी द्वारा दिया जा सकता है अर्थात् यदि यह निर्धारण प्राधिकारी के लिए उपयुक्त होगा कि वह गैर-लाभ उद्देश्य तथा आवेदक संस्थान की वास्तविकता के लिए प्रकार, मौजूदगी पर विचार करें अथवा विभिन्न परंतुकों के अंतर्गत निर्धारित शर्तों पर भी स्वीकृति अनुमोदन के समय विचार करना आपेक्षित हैं।
1.2 इस संबंध में, अमेरिकन होटल तथा लॉजिंग एसोसिएशन एज्यूकेशनल इंस्टीट्यूट बनाम केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड [301 आर्इटीआर 86] (2008) के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने ध्यान खींचा है जिसमें यह कहा गया है कि धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत अनुमोदन स्वीकृति के समय, निर्धारण अधिकारी को संतुष्ट करना है कि प्रासंगिक वर्ष के दौरान मौजूदा संस्थान केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है ना कि लाभ के लिए। एक बार निर्धारण प्राधिकारी इस पात्रता अर्थात् धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत शैक्षणिक संस्थान की वास्तविक मौजूदगी के बारे में संतुष्ट हो जाए तो अन्य किसी आधार पर अनुमोदन को अस्वीकार करना न्यायसंगत नही होगा विशेषकर वहां जहां अनुपालन उस वृत्तांत पर निर्भर हो जो उस तिथि पर जब अनुमोदन की स्वीकृति अनुमोदित की गर्इ है, पर न किया गया हो
1.3 हालांकि, निर्धारित प्राधिकारी ऐसे नियम तथा शर्तों के अनुसार धारा 10(23ग)(vi) की स्वीकृति प्रदान करने के लिए पात्र है जिसे धारा 10 के कथित वाक्यांश के विभिन्न परंतुक के ढ़ांचे के भीतर आने वाले के लिए आवश्यक समझा गया हो। कथित निर्णय में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्धारित शर्तों के अनुपालन को, मामले के निरीक्षण के दौरान आंका जा सकता है तथा उसकी किसी उल्लंघन की स्थिति में, अनुमोदन निरस्त किया जा सकता है। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाता हैं कि अमेरिकन होटल मामले (पूर्व) में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांत धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत छूट के लिए अनुमोदन की मांग वाले दाखिल आवेदनों पर विचार के दौरान अनुसरित होने चाहिए।
2. धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत छूट अनुमोदन/दावा की मांग के दौरान धारा 12कक के अंतर्गत पंजीकरण के लिए अनिवार्यता
2.1 धारा 10(23ग)(vi) किसी ऐसी शर्त को निर्धारित नही करती जो शर्त से पूर्व अथवा पश्चात् धारा 12कक के अंतर्गत पंजीकरण को अनिवार्य बनाती है। वास्तव में, धारा 11 तथा 10(23ग) के परंतुक दो समानांतर व्यवस्था हैं तथा अपने संबंधित क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से संचालित होती है हालांकि कुछ अनुपालन मापदंड दोनों के लिए समान हो सकते हैं। इसलिए धारा 10(23ग) के अंतर्गत अनुमोदन स्वीकृति से पूर्व अग्रिम पंजीकरण प्राप्त करने पर जोर नही दिया जा सकता।
2.2 हालांकि धारा 12कक के अंतर्गत पंजीकरण प्राप्त करने वाले न्यास अथवा एक संस्थान साथ ही साथ धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत अनुमोदन की स्थिति में यदि पंजीकरण कुछ प्रतिकूल परिणामों के कारण किसी समय निरस्त होता हैं तो धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत अनुमोदन की स्वीकृति स्वत: ही नही होगी किंतु इसपर निर्भर करेगी कि धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत अनुमोदन को क्रियाशील रखने हेतु आवश्यक शर्तों पर भी प्रतिकूल निर्णय का प्रभाव पडे़गा
3. सकल प्राप्ति में से अधिशेष उत्पत्ति
एक संदेह उत्पन्न हुआ हैं कि सकल प्राप्ति में से अधिशेष उत्पत्ति प्रारंभिक शर्त का आवश्यक 'उल्लंघन' करेगी कि शैक्षणिक संस्थान 'केवल शैक्षणिक उद्देश्य के लिए होना चाहिए नाकि लाभ के उद्देश्य के लिए'। निर्धारित प्रावधानों का अवलोकन स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है कि केवल अतिरिक्त उत्पत्ति का इस आधार पर धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत आवेदन को अस्वीकार करने के लिए आधार नही हो सकता कि यह लाभ कमाने के रूप की गतिविधि के फलस्वरूप है। वास्तव में, कथित वाक्यांश का तीसरा परंतुक स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराता है कि आय का संचय उस प्रयोजन के लिए "पूर्णता तथा विशेषरूप से" लागू होना है "जिसके लिए यह स्थापित किया गया है"। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि केवल वर्ष दर वर्ष शैक्षणिक संस्थान की अतिरिक्त कमार्इ धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत आवेदन को अस्वीकार करने का आधार नही हो सकती यदि इसे शैक्षणिक उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है जब तक संचय कानून के अंतर्गत निर्धारित तरीके के विपरीत न हो।
4. छात्रों से शुल्क के विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत राशि का संग्रहण
यह ध्यान में लाया जाता है कि छात्रों से आवेदन के द्वारा संग्रह लघुराशि शुल्क, परीक्षा शुल्क, स्थानांतरण प्रमाणपत्र निगर्मन के लिए शुल्क, लार्इब्रेरी के लिए अंशदान शुल्क आदि कुछ निर्धारण अधिकारियों द्वारा लाभ कमाने वाली गतिविधि के तौर पर समझा जा रहा है जिसका परिणाम धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत आवेदन निरस्त करने के तौर पर सामने आ रहा है। शुल्क के विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत लघु तथा उपयुक्त राशि का संग्रहण जो प्रदान की जा रही शिक्षा के संबंध में शुल्क के रूप में आवश्यक है तथा सामान्य रूप से किसी केंद्रीय अथवा राज्य नियम का उल्लंघन नही करता, लाभ कमाने वाली गतिविधि का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए, लाभ कमाने वाली गतिविधि के तौर पर विभिन्न प्रमुख शुल्कों के अंतर्गत छोटी राशि की वसूली को समझने के लिए कोर्इ क्षेत्राधिकार नही है जबतक 'प्रति व्यक्ति शुल्क' के रूप में राशि प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से वसूली नही जाती।
5. अन्य न्यासियों को नियुक्त, हटाने अथवा मनोनीत करने के लिए प्रबंधक न्यासी के असाधारण अधिकारों का प्रभाव
5.1 संदेह अभिव्यक्त किया गया है कि, यदि अन्य न्यासियों को नियुक्त अथवा हटाने अथवा साथ ही अपने उत्तराधिकारी को मनोनीत करने के लिए प्रबंधन न्यासी के असाधारण अधिकार न्यास की धर्मार्थ गतिविधि की प्रकृति को तथा अन्तत: प्रभावित करता है, छूट को निरस्त किया जा सकता है।
5.2 अधिनियम के अंतर्गत कोर्इ प्रावधान नही है जो केवल न्यासियों की नियुक्त अथवा हटाने के कारण छूट को अस्वीकृत करने का कारण बने। यद्यपि ऐसी परिस्थिति हेतु उत्तर सामान्यत: ऐसी व्यवस्था के तथ्यात्मक क्रियान्वयन पर निर्भर करता है, यह सामान्यत: छूट अस्वीकृत करने का आधार नही होता जबतक 'एकमात्र' उद्देश्य शैक्षणिक हो नाकि लाभ के प्रयोजन के लिए, न्यास अथवा संस्थान की गतिविधि का रूप परिवर्तित अथवा संशोधित अथवा लंबे समय तक न बना रहा हो। इसलिए छूट को अस्वीकार करना नए न्यासियों का आगमन अथवा मौजूदा न्यासियों को हटाने के आधार पर न्यायसंगत नही होगा।
6. क्षेत्रीय प्राधिकारियों को सलाह दी जाती है कि धारा 10(23ग)(vi) के अंतर्गत अनुमोदन/छूट के मामलों के साथ व्यवहार करने के दौरान उक्त स्थितियों को ध्यान में रखें। समान सिद्धांत अधिनियम की धारा 10(23ग)(viक) के अंतर्गत आने वाले मामलों पर भी लागू होगी।
(दीपशिखा शर्मा)
निदेशक भारत सरकार
निम्न को प्रति :—
1. अध्यक्ष, सदस्य तथा अवर सचिव तथा उससे ऊपर के पद के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में अन्य समस्त अधिकारी
2. समस्त प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त/प्रधान आयकर महानिदेशक/मुख्य आयकर आयुक्त (छूट) अपने क्षेत्रों/प्रभारों में समस्त अधिकारियों के बीच वितरित करने के उद्देश्य के निवेदन के साथ
3. प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति)/प्रधान आयकर महानिदेशक (सर्तकता)/ प्रधान आयकर महानिदेशक (प्रशा.)/ प्रधान आयकर महानिदेशक (एनएडीटी)/ प्रधान आयकर महानिदेशक (एलआर)
4. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के मीडिया समन्वयक तथा आधिकारिक प्रवक्ता
5. अतिरिक्त महानिदेशक (पीआर, पीपी व ओएल), मयूर भवन, नर्इ दिल्ली सामान्य डाक सूची के अनुसार वितरित करने के लिए तथा त्रैमासिक कर बुलिटेन में मुद्रण के लिए (100 प्रतियां)
6. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का आर्इटीसीसी प्रभाग (3 प्रतियां)
7. डाटा बेस प्रकोष्ठ - www.irsofficersonline.gov.in पर चस्पा करने के लिए
8. डीआर्इटी (एस)-4/वेब मैनेजर www.incometaxindia.gov.in पर चस्पा करने के लिए

