धारा 143(3) के अंतर्गत निर्धारण की स्थिति में, एक संवीक्षा आय की विवरणी में करदाता द्वारा संवीक्षा विभिन्न दावों, कटौतियों आदि की सत्यता और वास्तविकता को पुष्ट करने के लिए है। इस संबंध में अन्य प्रक्रिया निम्नानुसार है : यदि निर्धारण अधिकारी या निर्धारित आयकर प्राधिकारी समझता है कि यह यह आवश्यक है या सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र किया जाना है कि करदाता ने आय को कम नहीं बताया है या अतिरिक्त हानि की गणना नहीं की है या किसी भी तरीके से कर का कम भुगतान किया है तो उसे वह करदाता को अपने कार्यालय में उपस्थित होने का नोटिस दे सकता है या ऐसे प्रमाण को प्रस्तुत करने को कह सकता है जिस पर करदाता विवरणी के समर्थन पर निर्भर करता है। नोटिस के प्रावधान
धारा 143(2) द्वारा नियंत्रित होते हैं। अन्य शब्दों में,
धारा 143(3) के अंतर्गत मूल्यांकन करने के लिए, निर्धारण अधिकारी को
धारा 143(2) के अंतर्गत नोटिस तामील करना चाहिए।
धारा 143(2) के अंतर्गत नोटिस वित्त वर्ष, जिसमें विवरणी दाखिल की गई, की समाप्ति से छह महीनों की अवधि के अंदर करदाता को नोटिस देगा। करदाता या उसका प्रतिनिधि (जो भी मामला हो) निर्धारण अधिकारी के समक्ष उपस्थित होगा और विभिन्न मामलों/मुद्दों जो निर्धारण अधिकारी द्वारा आवश्यक है, अपने तर्क, समर्थन आदि को देगा। ऐसी सुनवाई/प्रमाणों के सत्यापन बे बाद और ऐसे ब्यौरे पर विचार करने के बाद जो करदाता प्रस्तुत कर सकता है और ऐसे अन्य प्रमाण जिसकी निर्धारण अधिकारी निर्दिष्ट समय के बाद मांग कर सकता है औश्र सभी प्रासंगिक सामग्री, जिसे इकट्ठा किया गया है, पर विचार करने के बाद, निर्धारण अधिकारी लिखित में आदेश द्वारा, करदाता की कुल आय या हानि के मूल्यांकन कर सकता है और ऐसे मूल्यांकन के आधार पर उसकी किसी देय राशि के प्रतिदाय या उसके द्वारा देय राशि को निर्धारित कर सकता है।