खाते का अॉडिट, धारा 44कखके द्वारा आवश्यकता के रूप में न करवाने पर क्या दंड है?
विषय
कर लेखापरीक्षा पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर
धारा 271ख के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति, जिसे धारा 44कख के तहत अपने खातों को ऑडिट करवाना था और उसने नहीं करवाया है, तो सम्बंधित अधिकारी उस व्यक्ति पर दंड लगा सकता है। लगाया गया दंड निम्मलिखित राशि में होगा:
(क) कुल ब्रिकी, टर्नओवर या सकल प्राप्ति का 0.5 प्रतिशत, इस वर्ष या वर्षो में, व्यवसाय में सकल प्राप्तियों के या व्यापार में, किसी मामले में यह दंड निर्धारित है।
(ख) 1,50,000 रूपए,
हालांकि, धारा 273ख के अनुसार, अगर देरी का कोई कारण है और उसे व्यक्ति के द्वारा साबित कर दिया जाता है तो किसी भी प्रकार का दंड नहीं दिया जाएगा। इस प्रकार के दंड को करदाता को एक उचित अवसर प्रदान करने के लिए लगाया जाता है।

