प्रकल्पित कराधान योजना के मायने क्या हैं?
विषय
प्रकल्पित कराधान योजना पर कर पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
etds-answer
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44कक के अनुसार, व्यापार या पेशा करने वाले एक व्यक्ति को कुछ परिस्थतियों के अंतर्गत नियमित बही खाता सुरक्षित रखना आवश्यक है। इस जटिल कार्य से छोटे करदाताओं को सुविधा देने के लिए आयकर अधि्िनयम के माध्यम से धारा 44कघ, धारा 44कघक, धारा 44कङ, धारा 44खख और धारा 44खखख के अंतर्गत प्राकल्पित कराधान योजना बनाई है।
प्रकल्पित कराधान योजना अपनाने वाला एक व्यक्ति निर्धारित दर पर आय की घोषणा कर सकता है और बदले में बही खातों को सुरक्षित रखने के जटिल कार्य से राहत मिल सकती है।
- धारा 44कघ : कुछ शर्तों के अनुसार कुछ व्यापार करने वाले करदाताओं (एक निवासी व्यक्ति के तौर पर), हिंदु अविभाजित परिवार या सांझेदार निवासियों (सीमित देयता सांझेदारी फर्म के तौर पर) के मामले में अनुमानित आधार पर आय की गणना
- धारा 44कघक : भारत में एक निवासी के तौर पर और कुछ शर्तों के अनुसार धारा 44कक(1) में संदर्भित पेशा करने वाले निर्धारिती के रूप में अनुमानित आधार पर पेशेवर आय की गणना
- धारा 44कङ : कुछ शर्तों के अनुसार मालवाहक वाहनों को किराये, पटटे या काम में लेने के कुछ व्यापार करने वाले करदाताओं (व्यक्ति, एचयूएफ, बीओआई, फर्म, कंपनी, सहकारी संस्था या किसी अन्य व्यक्ति जो निवासी या अनिवासी हो सकता है, के तौर पर) के मामलें में अनुमानित आधार पर गणना
- धारा 44ख : कुछ शर्तों के अनुसार भारत में अनिवासी के तौर पर एक व्यक्ति द्वारा शिपिंग लाभ का कराधान
- धारा 44खख : कुछ शर्तों के अनुसार खनिज तेल, के खनन से संबंधित गतिविधियों से अनिवासी (एक भारतीय नागरिक या विदेशी नागरिक हो सकता है) के तौर पर एक व्यक्ति की कराधान आय की गणना
- धारा 44खखक : कुछ शर्तों के अनुसार विदेशी वायुसेवा के संबंध में आय की गणना
- धारा 44खखख : कुछ शर्तों के अनुसार सिविल निर्मा का व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों के लाभ और प्राप्त्यिं की गणना।

