आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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उपहार, ईच्छा, आदि के माध्यम से संपत्ति के अंतरण के मामले में पूंजीगत लाभ की गणना करने के लिए क्या संबंधित प्रावधान हैं?

विषय

पूंजीगत लाभ पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर

​​​​​पूंजी लाभ उत्पन्न होते हैं अगर कोई व्यक्ति किसी पूंजी परिसंपत्ति का अंतरण करता है। धारा 47 विभिन्न लेन-देनों को 'अंतरण' की परिभाषा में शामिल नहीं करती। इस प्रकार, धारा 47 के तहत आने वाले लेनदेन 'अंतरण' नहीं माने जाते और, इसलिए ये लेन-देन कोई भी पूंजीगत लाभ उत्पन्न नहीं करेंगे। उपहार, वसीयत, आदि के माध्यम से पूंजी परिसंपत्ति के अंतरण, कुछ प्रमुख लेनदेन हैं जो धारा 47 में शामिल हैं। इस प्रकार, यदि कोई व्यक्ति अपनी पूंजी परिसंपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को उपहारस्वरूप देता है, तो उपहार देने वाले व्यक्ति के हाथों में कोई भी पूंजीगत लाभ उत्पन्न नहीं होगा (*)

यदि वह व्यक्ति जिसे उपहार, वसीयत, आदि के माध्यम से पूंजी परिसंपत्ति प्राप्त हो रही है, बाद में ऐसी संपत्ति अंतरित करता है, तो पूंजी लाभ हाथ में उत्पन्न होगा। उपहार, वसीयत, आदि के माध्यम से परिसंपत्ति प्राप्त करने वाले व्यक्ति के हाथ में पूंजीगत लाभ की गणना हेतु विशेष प्रावधान बनाए गए हैं। ऐसे किसी मामले में, पूंजी परिसंपत्ति के अधिग्रहण की लागत, पिछले स्वामी के लिए अधिग्रहण की लागत होगी और पूंजी परिसंपत्ति को धारण करने वाली अवधि, पिछले स्वामी द्वारा पूंजी परिसंपत्ति को अधिग्रहित करने की तारीख से गणित की जायेगी।

(*) उपहार प्राप्त व्यक्ति के हाथों में उपहार की कर देयता के संबंध में, धारा 56​ के तहत अलग प्रावधान तैयार किये गए हैं।​