आयकर कानून के तहत विभिन्न आकलन
प्रत्येक करदाता को आयकर विभाग को उसकी आय का विवरण प्रस्तुत करना होगा। ये विवरण उसकी आय की विवरणी दाखिल करने से प्रस्तुत होता है एक बार करदाता द्वारा आप की विवरणी दाखिल करने पर, अगला कदम आयकर विभाग द्वारा आय की विवरणी की प्रक्रिया है। आयकर विभाग इसकी शुद्धता के लिये आप की विवरणी की जांच करता है आय कर विभाग द्वारा आय की विवरणी की जाँच की प्रक्रिया को ‘‘मूल्यांकन’’ कहा जाता है। इस भाग में आप आयकर कानून के तहत विभिन्न मूल्यांकनों से सम्बन्धित प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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आयकर कानून के तहत विभिन्न मूल्यांकन
प्रत्येक करदाता को अपनी आय का विवरण आयकर विभाग को प्रस्तुत करना होता है। ये विवरण अपनी आय की विवरणी करने से प्रस्तुत होती है। एक बार करदाता द्वारा आपकी विवरणी दाखिल करने के बाद अगला कदम आयकर विभाग द्वारा आय की विवरणी की प्रक्रिया है। आयकर विभाग इसकी सत्यता की पुष्टि के लिए आय की विवरणी की जांच करता है। आयकर विभाग द्वारा आय की विवरणी की जांच की प्रक्रिया को "मूल्यांकन" कहा जाता है। मूल्यांकन में धारा 144 के अंतर्गत पुर्न-मूल्यांकन और सर्वोतम निर्णय मूल्यांकन भी शामिल है।
आयकर कानून के तहत, चार बड़े मूल्यांकन नीचे दिये गये हैं
• धारा 143(1) के तहत मूल्यांकन, अर्थात, निर्धारिती अर्थात करदाता को बिना बुलाये संक्षिप्त मूल्यांकन।
• धारा 143(3) के तहत मूल्यांकन, अर्थात संवीक्षा मूल्यांकन।
• धारा 144 के तहत, अर्थात, सबसे अच्छा निर्णय मूल्यांकन।
• धारा 147 के तहत, अर्थात, आय राहत मूल्यांकन।
धारा 143(1) के तहत मूल्यांकन
यह एक प्रारंभिक मूल्यांकन है तथा निर्धारिती (अर्थात् करदाता) को बुलाए बिना संक्षेप मूल्यांकन के तौर पर संदर्भित किया जाता है
धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन का कार्य क्षेत्र
धारा 143(1) के तहत मूल्यांकन आय की वापसी की प्रारंभिक जाँच की तरह है। इस स्तर पर, आय की वापसी की कोई विस्तृत जांच की जाती है। इस चरण में कुल आय या नुकसान अर्थात् निम्नलिखित समायोजन (यदि हो तो), करने के बाद गणना की जाती है: -
(i) विवरणी में कोई अंकगणितीय त्रुटि; या
(ii) एक गलत दावा, (*) यदि इस प्रकार को गलत दावा विवरणी की किसी सूचना से स्पष्ट है
(iii) पिछले वर्ष किसी भी पूर्ववर्ती की वापसी में जानकारी के संबंध में वापसी में ऐसी कोई भी असंगतता, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(iv) दावा की गई हानि की अस्वीकृति, यदि पिछले वर्ष जिसके लिए समायोजित हानि का दावा किया जाता है, की विवरणी को धारा 139(1) के अंतर्गत निर्दिष्ट देय तिथि के बाद प्रस्तुत किए जाने पर दावा किया जाता है।
(v) अंकेक्षण रिपोर्ट में इंगित व्यय की अस्वीकृति लेकिन विवरणी में कुल आय की गणना में विचारनीय न हो या
(vi) धारा 10कक, 80झक से 80-झड़ के अंतर्गत दावा की गई कटौती की अस्वीकृति यदि विवरणी धारा 139(1) के अंतर्गत निर्दिष्ट नियत तिथि के बाद प्रस्तुत की जाती है
हालांकि, कोई समायोजन नहीं किया जाएगा जबतक ऐसे समायोजन के बारे में लिखित या इलैक्ट्रानिक रूप से निर्धारिती को कोई सूचना नहीं दी जाती। आगे, निर्धारिती द्वारा प्राप्त कोई प्रतिउत्तर, यदि हो, किसी समायोजन को करने से पहले विचारा जाएगा और यदि जहां कोई प्रतिउत्तर ऐसी सूचना को जारी करने से 30 दिनों के अंदर प्रापत होता है तो ऐसा समायोजन किया जाएगा।
उपरोक्त उद्देश्य के लिए "एक गलत दावा विवरणी को किसी सूचना से स्पष्ट" एक असत्य दावा है मतलब विवरणी में, एक प्रविष्टि के आधार पर एक दावा है:-
(i) किसी मद का जो इसी तरह की दूसरी प्रविष्टि का इस प्रकार की विवरणी में कोई दूसरे मद के साथ असंगत है;
(ii) जिसके सम्बन्ध में अधिनियम के तहत इस तरह की प्रविष्टि को सही साबित करने के लिए आवश्यक प्रस्तुत की जाने वाली सूचना को प्रस्तुत नहीं की गई; या
(iii) कटौती के सम्बन्ध में, जहां इस प्रकार की कटौती निर्दिष्ट संवैधानिक सीमा से अधिक है जिसको मुद्रा राशि या प्रतिशत या अनुपात या अंश की तरह व्यक्त किया जा सकता है।
धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन की प्रक्रिया
• अंकगणितीय त्रुटि या गलत दावा (यदि कोई है) के सुधार के पश्चात जैसा कि पूर्व चर्चा की गयी, कर और ब्याज यदि है, की गणना समायोजित आय के आधार पर की जायेगी।
• करदाता द्वारा देय राशि या करदाता के कारण वापिस कोई राशि उसे सूचित किया जायेगा।
• करदाता को, उसके द्वारा निर्धारित देय राशि निर्दिष्ट करते हुए, या उसको वापिस की जाने वाली राशि की एक सूचना तैयार या उत्पादित कर और भेजी जायेगी।
• जहां करदाता द्वारा आय की विवरणी में घोषित नुकसान समायोजित है लेकिन कोई कर या ब्याज उसके द्वारा देय या उसको वापिस नहीं है, के एक मामले में एक सूचना करदाता को भी भेजी जायेगी।
• आय की रिटर्न की पावती सूचना के तौर पर समझी जाएगी जहां निर्धारक को कोई राशि देय अथवा वापस देने नही है तथा जहां रिटर्न आय हेतु कोई समायोजन नही किया गया हो
धारा 234च के अनुसार (जैसा वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा शामिल है प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 के साथ), एक शुल्क वहां लगाया जाएगा जहां आय की विवरणी धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारित देय तिथियों के अंदर दाखिल नहीं की जाती। शुल्क की राशि निम्नानुसार है :-
(क) रू. 5,000 यदि विवरणी निर्धारण वर्ष के 31 दिसंबर को या उससे पहले प्रस्तुत की जाती है
(ख) अन्य किसी मामले में रू. 10,000
बशर्ते कि यदि व्यक्ति की कुल आय रू. 5,00,000 से अधिक न हो, शुल्क की राशि रू. 1000 से अधिक नहीं होगी।
समय सीमा
धारा 143(1) के तहत मूल्यांकन वित्तीय वर्ष के अंत जिसमें आय की विवरणी दाखिल है, से एक वर्ष की अवधि में किया जा सकता है।
धारा 143(3) के अंतर्गत मूल्यांकन
यह विस्तृत मूल्यांकन और संवीक्षा मूल्यांकन की तरह संदर्भित है। इस स्तर पर, आय की विवरणी की ब्योरेवार संवीक्षा की जाएगी। इस स्तर पर एक संवीक्षा को आय की विवरणी में करदाता द्वारा की गयी सत्यता और विभिन्न दावों के खरापन, कटौतियों, इत्यादि की पुष्टि के लिए लाया गया।
धारा 143(3) के तहत मूल्यांकन का कार्य क्षेत्र
सूक्ष्म परीक्षण मूल्यांकन का उद्देश्य इस बात की पुष्टि करने के लिये है कि करदाता ने आय को नहीं समझा या अत्यधिक नुकसान की गणना नहीं की या किसी भी ढंग से कर भुगतान करने के अधीन नहीं है।
उपरोक्त की पुष्टि के लिये, मूल्यांकन अधिकारी आय की विवरणी की एक विस्तृत सूक्ष्म परीक्षण लाता है और आय की विवरण में करदाता द्वारा लिये गये दावों, कटौतियों इत्यादि के सम्बन्ध में स्वंय को सन्तुष्ट करेगा।
धारा 143(3) के तहत मूल्यांकन की प्रक्रिया
• यदि मूल्यांकन अधिकारी निर्धारित करता है यह आवश्यक या सुनिश्चित करने के लिए समीचीन है कि करदाता आय के महत्व को नहीं समझा है या अत्यधिक नुकसान की गणना नहीं हुई है या किसी भी ढंग से कर पर्याप्त नहीं है, तो यह करदाता पर उसके दफ्तर में भाग लेने के लिए या उत्पादन करने के लिए या किसी भी सबूत का उत्पादन करने के लिए जिस पर कर दाता विवरणी के समर्थन में भरोसा कर सकते हैं, एक आवश्यक नोटिस की सेवा प्रदान करेंगे।
• धारा 143(3) के तहत मूल्यांकन करने के लिये, मूल्यांकन अधिकारी को धारा 143(2) के प्रावधानों के अनुसार ऐसा नोटिस देना चाहिए।
• धारा 143(2) के तहत नोटिस वित्तीय वर्ष जिसमें विवरणी दाखिल की, के अंत से 6 माह की अवधि में प्रस्तुत करना चाहिए।
• करदाता और उसका प्रस्तोता (जैसा भी मामला हो) आकलन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होंगे और मूल्यांकन अधिकारी द्वारा आपेक्षितानुसार विभिन्न मामलों/मुद्दों पर अपने तर्क, समर्थित प्रमाण, इत्यादि की जगह लेगा।
• इस प्रकार के साक्ष्य की सुनवाई/सत्यापन के बाद और जैसा करदाता प्रस्तुत कर सकता है के रूप में ऐसे विवरणों को खाते में लेते हुए और निर्दिष्ट बिन्दुओं पर आकलन अधिकारी को आवश्यक ऐसे अन्य साक्ष्यों के रूप में और सम्बन्धित सामग्री जो उसने एकत्रित की है को खाते में लेने के बाद, आकलन अधिकारी एक लिखित आदेश के द्वारा करदाता की कुल आय या नुकसान का एक मूल्यांकन बनायेगा और उसके द्वारा भुगतान करने योग्य राशि निर्धारित करेगा या इस प्रकार के मूल्यांकन के आधार पर उसके कारण किसी भी राशि की वापसी करेगा।
चेहरा रहित मूल्यांकन (धारा 144ख)
चेहरा रहित मूल्यांकन का अर्थ है निर्दिष्ट पोर्टल में निर्धारिती के पंजीकृत खाते के माध्यम से "ई-कार्यवाही" सुविधा में इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित मूल्यांकन कार्यवाही। नामित पोर्टल का अर्थ राष्ट्रीय पहचान रहित मूल्यांकन केंद्र के प्रभारी प्रधान मुख्य आयुक्त या प्रधान महानिदेशक द्वारा नामित वेब पोर्टल है।
सीबीडीटी ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्क्रूटनी आकलन करने के लिए निर्देश, दिशानिर्देश और नोटिस प्रारूप जारी किए थे।
चेहरारहित मूल्यांकन का दायरा
प्रावधान प्रदान करता है कि धारा 143(3), धारा 144, या धारा 147 के तहत मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना निर्दिष्ट क्षेत्रीय क्षेत्रों, व्यक्तियों, आय या मामलों के वर्ग के संबंध में चेहरा रहित तरीके से की जाएगी।
चेहराराहित मूल्यांकन करने वाले प्राधिकारी
चेहराराहित मूल्यांकन के लिए, सीबीडीटी को निम्नलिखित केंद्रों और उनके क्षेत्राधिकर को निर्दिश्ट करते हुए यूनिटों को स्थापित करने के लिए सषक्त किया गया है
(क) राष्ट्रीय चेहरारहित निर्धारण केंद्र (एनएफएसी)
(ख) निर्धारण ईकाई (एयू)
(ग) सत्यापन ईकाई (यूवी)
(घ) तकनीकी ईकाई (टीयू) और
(ङ) मूल्यांकन ईकाई (आयू)
राष्ट्रीय चेहरारहित निर्धारण केंद्र
इस केंद्र का उद्देश्य केंद्रीकृत तरीके से चेहरारहितमूल्यांकन कार्यवाही के संचालन की सुविधा प्रदान करना है।
मूल्यांकन इकाइयां
यह मूल्यांकन करने का कार्य करेगा, जिसमें बिंदुओं की पहचान या अधिनियम के तहत किसी भी दायित्व (धनवापसी सहित) के निर्धारण के लिए सामग्री जारी करना, पहचान किए गए बिंदुओं या मुद्दों पर जानकारी या स्पष्टीकरण मांगना, प्रस्तुत सामग्री का विश्लेषण शामिल है। निर्धारिती या कोई अन्य व्यक्ति, और ऐसे अन्य कार्य जो चेहरारहित मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक हो सकते हैं।
शब्द "मूल्यांकन इकाई", जहां भी इस प्रावधान में उपयोग किया जाता है, एक मूल्यांकन अधिकारी को संदर्भित करेगा जिसके पास बोर्ड द्वारा सौंपी गई शक्तियाँ हैं
सत्यापन इकाइयां
यह सत्यापन का कार्य करेगा, जिसमें पूछताछ, क्रॉस सत्यापन, खातों की पुस्तकों की जांच, गवाहों की जांच और बयानों की रिकॉर्डिंग, और ऐसे अन्य कार्य शामिल हैं जो सत्यापन के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हो सकते हैं।
इस धारा के तहत सत्यापन इकाई का कार्य इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत या इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत अधिसूचित किसी भी योजना के तहत स्थापित किसी अन्य चेहरारहितकेंद्र में स्थित सत्यापन इकाई द्वारा भी किया जा सकता है। सत्यापन के लिए अनुरोध एनएफएसी द्वारा ऐसी सत्यापन इकाई को भी सौंपा जा सकता है।
तकनीकी इकाइयां
यह तकनीकी सहायता प्रदान करने का कार्य करेगा, जिसमें कानूनी, लेखा, फोरेंसिक, सूचना प्रौद्योगिकी, मूल्यांकन, स्थानांतरण मूल्य निर्धारण, डेटा विश्लेषण, प्रबंधन, किसी अन्य तकनीकी मामले या धारा 90 या 90क धारा के तहत किए गए समझौते पर कोई सहायता या सलाह शामिल है। जो इस धारा के तहत किसी विशेष मामले या मामलों की श्रेणी में आवश्यक हो सकता है।
मूल्यांकन ईकाई
यह आय निर्धारण प्रस्ताव की समीक्षा का कार्य करेगा, जिसमें निम्नलिखित की जाँच करना शामिल हैः
(क) क्या प्रासंगिक और भौतिक साक्ष्य को रिकॉर्ड पर लाया गया है;
(ख) क्या तथ्य और कानून के प्रासंगिक बिंदुओं को प्रस्ताव में विधिवत शामिल किया गया है;
(ग) क्या प्रस्ताव में जोड़ने या नामंज़ूरी की आवश्यकता वाले मुद्दों को शामिल किया गया है;
(घ) प्रस्तावित संशोधनों की अंकगणितीय शुद्धता, यदि कोई हो; और
(ङ) समीक्षा के प्रयोजनों के लिए आवश्यक कोई अन्य कार्य।
शब्द 'समीक्षा इकाई', जहां भी इस प्रावधान में उपयोग किया जाता है, एक मूल्यांकन अधिकारी को संदर्भित करेगा जिसके पास बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट शक्तियां हैं
समय सीमा
धारा 153 के अनुसार धारा 143(3) के तहत मूल्यांकन करने की समय सीमा।
1) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 21 महीनों के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2017-18 को या उससे पहले के लिए)
2) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 18 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2018-19 के लिए)
3) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 12 महीनें के अंदर(मूल्यांकन वर्ष 2019-20 के लिए लागू)
4) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 18 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए लागू)
5) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 9 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2021-22 के लिए लागू)
6) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 12 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2022-23 और उसके बाद के लिए लागू)
टिप्पणी : यदि संदर्भ टीपीओ को किया जाता है तो मूल्यांकन की उपलब्ध अवधि 12 महीनें तक बढ़ाई जाएगी
• यदि विवरणी धारा 139(8क) के तहत प्रस्तुत किया गया है, तो मूल्यांकन का आदेश वित्तीय वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर पारित किया जाएगा जिसमें इस तरह की विवरणी प्रस्तुत की गई थी।
धारा 144 के तहत मूल्यांकन
मूल्यांकन आकलन अधिकारी द्वारा एकत्रित सभी प्रासंगिक सामग्री के आधार पर सबसे अच्छे निर्णय के अनुसार लाया गया एक मूल्यांकन है यह मूल्यांकन उन मामलों में किया जाता है जहां करदाता धारा 144 में विर्दिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार विफल रहता है।
धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन का कार्यक्षेत्र
धारा 144 के अनुसार, निर्धारण अधिकारी निम्नलिखित मामलों में अपने सर्वोत्तम निर्णय हेतु मूल्यांकन करने के लिए बाध्य है:
• यदि करदाता धारा 139(1) के तहत निर्धारित देय तिथि या धारा 139(4) के तहत एक विलम्बित विवरणी धारा 139(5) के तहत एक संशोधित विवरणी जैसा भी आवश्यक हो, आय की विवरणी दाखिल करने में असफल होता है।
• यदि करदाता धारा 142(1) के तहत जारी एक नोटिस की सभी शर्तों का पालन करने में असफल होता है।
टिप्पणी : धारा 142(1) के तहत आंकलन अधिकारी आय की विवरणी दाखिल करने के लिए करदाता को पूछने के लिए नोटिस जारी कर सकता है यदि उसने आय की विवरण या उत्पादन या ऐसे खातों के उत्पादों के कारण या उसको आवश्यक दस्तावेजों और लिखित में प्रस्तुत करने के लिये और इस प्रकार में निर्धारित ढंग की सूचना में सत्यापित और ऐसे बिन्दुओं पर उसको आवश्यक मामले (करदाता की सभी परिसम्पत्तियों और जिम्मेदारियों के एक विवरण की सभी परिसम्पत्तियों और जिम्मेदारियों के एक विवरण को शामिल करते हुए जबकि खातों में शामिल हो या नहीं) दाखिल नहीं की।
• यदि करदाता धारा 142(2क) के तहत जारी निर्देशों का पालन करने में असफल होता है।
टिप्पणी : धारा 142(2क) विशेष लेखापरीक्षा से संबंधित है। धारा 142(2क) के अनुसार, यदि धारा 142(2क) में दी गई विशेष लेखापरीक्षा को न्यायोचित ठहराने वाली शर्तें पूरी होती हैं, तो मूल्यांकन अधिकारी करदाता को निम्नलिखित प्राप्त करने का निर्देश देगाः
क) चार्टर्ड एकाउंटेंट से लेखा परीक्षित खाते;
ख) एक लागत लेखाकार द्वारा माल का मूल्यांकन। (वित्त अधिनियम 2023 द्वारा सम्मिलित)
प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा नामित और निर्धारित प्रपत्र में इस तरह के लेखापरीक्षा की एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए।
• यदि आय की विवरणी दाखिल करने के बाद, करदाता धारा 143(2) के तहत जारी एक नोटिस अर्थात सूक्ष्म परीक्षण आकलन का नोटिस की सभी शर्तों का अनुपालन करने में असफल होता है।
• यदि आंकलन अधिकारी करदाता के लेखा के सही अथवा पूर्ण होने के बारे में संतुष्ट नही होता अथवा लेखा की कोई विधि करदाता द्वारा नियमित तौर पर प्रयुक्त नही होती
उपरोक्त चर्चा की गयी मापदण्ड से, यह देखा जा सकता है कि सबसे अच्छा निर्णय मूल्यांकन ऐसे मामलों में जहां आय के विवरणी करदाता द्वारा दाखिल नहीं की गयी या विभिन्न मामलों पर करदाता द्वारा अपने कर आंकलन से संबंधित सूचना। विवरण की प्रस्तुति के रूप में कोई सहयोग नहीं किया गया है। अथवा यदि करदाता का बहीखाता विश्वसनीय अथवा अपूर्ण है
धारा 144 के तहत मूल्यांकन की प्रक्रिया
• यदि उक्त दी गई परिस्थितियां सबसे अच्छे निर्णय मूल्यांकन को न्यायोचित ठहराते हुए सन्तुष्ट है तो आंकलन अधिकारी करदाता को एक नोटिस जारी करेगा कारण बताने के लिये की उसके सबसे अच्छे निर्णय के लिये मूल्यांकन क्यों नहीं पूर्ण करना चाहिए।
• जहाँ धारा 144 के तहत एक आंकलन करने के लिये धारा 142(1) के तहत एक नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है, के मामले में जैसा की ऊपर दिया गया है कोई नोटिस की आवश्यकता नहीं होगी
• यदि आंकलन अधिकारी करदाता के तर्कों से संतुष्ट नहीं है और उसके पास विश्वास करने का कारण है कि मामला सबसे अच्छे निर्णय की मांग करता है, तो उसे अपने सर्वोत्तम ज्ञान के अनुसार मूल्यांकन को लाने के लिए आगे बढ़ाना होगा।
• यदि सबसे अच्छा निर्णय मूल्यांकन के मानदण्ड सन्तुष्ट है तो सभी सम्बन्धित सामग्री खाते में लाने के बाद जो कि आकलन अधिकारी ने एकत्रित की है, और कर दाता को कठिनाई का एक अवसर देने के बाद, आकलन अधिकारी कुल आय का मूल्यांकन या नुकसान उसके निर्णय के सबसे अच्छे के लिये बनायेगा और इस प्रकार के आकलन के आधार पर कर दाता द्वारा देय राशि का निर्धारण करेगा।
समय सीमा
धारा 153 के अनुसार, धारा 144 के तहत मूल्यांकन करने के लिए समय सीमा है:
1) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 21 महीनों के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2017-18 को या उससे पहले के लिए)
2) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 18 महीनें के अंदर(मूल्यांकन वर्ष 2018-19 के लिए)
3) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 12 महीनें के अंदर(मूल्यांकन वर्ष 2019-20 के लिए लागू)
4) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 18 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2020-21 के लिए लागू)
5) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 9 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2021-22 के लिए लागू)
6) निर्धारण वर्ष जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया था, की समाप्ति से 12 महीनें के अंदर (मूल्यांकन वर्ष 2022-23 और उसके बाद के लिए लागू)
टिप्पणी : यदि संदर्भ टीपीओ को किया जाता है तो मूल्यांकन की उपलब्ध अवधि 12 महीनें तक बढ़ाई जाएगी
• यदि विवरणी धारा 139(8क) के तहत प्रस्तुत किया गया है, तो मूल्यांकन का आदेश वित्तीय वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर पारित किया जाएगा जिसमें इस तरह की विवरणी प्रस्तुत की गई थी।
धारा 147 के तहत मूल्यांकन
वित्त अधिनियम, 2021 ने मौजूदा धारा 147, 148, 149 और 151 को प्रतिस्थापित किया है और एक नई धारा 148ए भी सम्मिलित की है, जो मूल्यांकन से बचने वाली आय और खोज-संबंधी मामलों से संबंधित मूल्यांकन कार्यवाही में पूर्ण परिवर्तन करती है। पुनर्मूल्यांकन से संबंधित नए प्रावधान इस प्रकार हैं:
यदि किसी निर्धारिती की कोई आय किसी निर्धारण वर्ष के लिए मूल्यांकन से छूट गई है, तो मूल्यांकन अधिकारी, धारा 148 से 153 के नए प्रावधानों के अधीन, ऐसी आय का आकलन या पुनर्मूल्यांकन कर सकता है और साथ ही कोई अन्य आय जो मूल्यांकन से बच गई है और जो उसके ध्यान में आती है बाद में कार्यवाही के दौरान, या इस तरह के निर्धारण वर्ष के लिए नुकसान या मूल्यह्रास भत्ता या किसी अन्य भत्ते की पुनर्गणना करें, जैसा भी मामला हो
यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि एक बार मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना शुरू हो जाने के बाद, मूल्यांकन अधिकारी को उस आय का आकलन या पुनर्मूल्यांकन करने का अधिकार है जो मूल्यांकन से बच गया है और जो इस प्रक्रिया के तहत कार्यवाही के दौरान बाद में उसके ध्यान में आता है, इसके बावजूद ऐसी आय के लिए नोटिस जारी करने से पहले नई धारा 148ए में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था
नोटिस जारी करना
निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को धारा 148क के खंड (घ) के तहत पारित आदेश की एक प्रति के साथ धारा 148 के तहत एक नोटिस भेजेगा, जिसमें उसे अपनी आय या किसी अन्य व्यक्ति की आय की रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता होगी, जिसके संबंध में वह प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अनुरूप पिछले वर्ष के दौरान इस अधिनियम के तहत मूल्यांकन योग्य है। विवरणी उस महीने के अंत से 3 महीने के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा जिसमें ऐसा नोटिस जारी किया गया है। 3 महीने की इस अवधि को एओ द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
नोटिस निर्धारित प्रपत्र में जारी किया जाएगा और निर्धारित तरीके से सत्यापित किया जाएगा और इस तरह के अन्य विवरण निर्धारित किए जा सकते हैं; और आयकर अधिनियम के प्रावधान, जहां तक हो सके, तदनुसार लागू होंगे जैसे कि ऐसी विवरणी धारा 139 के तहत प्रस्तुत किए जाने के लिए आवश्यक विवरणी थी।
किन परिस्थितियों में नोटिस जारी किया जा सकता है
नोटिस तभी जारी किया जाना आवश्यक है जब निर्धारण अधिकारी के पास सूचना से पता चलता है कि कर के लिए देय आय निर्धारण से बच गई है। निर्धारण अधिकारी द्वारा इस तरह का नोटिस जारी करने से पहले निर्दिष्ट प्राधिकारी का पूर्व अनुमोदन भी प्राप्त करना आवश्यक है।
हालांकि, ऐसी किसी पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है यदि मूल्यांकन अधिकारी ने धारा 148ए(डी) के तहत निर्दिष्ट प्राधिकरण की पूर्व स्वीकृति के साथ एक आदेश पारित किया है जिसमें कहा गया है कि आय मूल्यांकन से बच रही है।
यह कब माना जाएगा कि आय निर्धारण से बच गई है?
खोज, सर्वेक्षण या माँग के अलावा अन्य मामलों में
(क) यह सुझाव देने वाली जानकारी कि कर के लिए प्रभार्य आय मूल्यांकन से बच गई है, का अर्थ है समय-समय पर सीबीडीटी द्वारा तैयार की गई 'जोखिम प्रबंधन रणनीति' के अनुसार प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती के मामले में चिह्नित की गई कोई भी जानकारी;
(ख) संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती के मामले में मूल्यांकन आयकर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नहीं किया गया है, इस आशय की कोई लेखापरीक्षा आपत्ति;
(ग) धारा 90 या धारा 90ए में संदर्भित समझौते के तहत प्राप्त कोई भी जानकारी;
(घ) धारा 135ए के तहत अधिसूचित योजना के तहत मूल्यांकन अधिकारी को उपलब्ध कराई गई कोई भी जानकारी; या
(ङ) ऐसी कोई भी सूचना जिसके लिए न्यायाधिकरण या न्यायालय के आदेश के परिणामस्वरूप कार्रवाई की आवश्यकता हो।
खोज, सर्वेक्षण या माँग मामलों में
1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद शुरू किए गए या किए गए या किए गए खोज, सर्वेक्षण या मांग मामलों में, यह माना जाएगा कि मूल्यांकन अधिकारी के पास ऐसी जानकारी है जो बताती है कि कर के लिए देय आय 3 के लिए निर्धारिती के मामले में मूल्यांकन से बच गई है। निम्नलिखित मामलों में पिछले वर्ष के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष से ठीक पहले के निर्धारण वर्ष:
(क) धारा 132 के तहत एक खोज शुरू की जाती है या खाते की किताबें, अन्य दस्तावेज या धारा 132 ए के तहत किसी भी संपत्ति की मांग 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद निर्धारिती के मामले में की जाती है;
(ख) निर्धारिती के मामले में धारा 133ए के तहत एक सर्वेक्षण किया जाता है;
(ग) निर्धारण अधिकारी पी सीआईटी या सीआईटी के पूर्व अनुमोदन से संतुष्ट है कि अप्रैल के पहले दिन या उसके बाद किसी अन्य व्यक्ति के मामले में कोई पैसा, बुलियन, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज जब्त या मांगी गई है। 2021, निर्धारिती का है; या
(घ) निर्धारण अधिकारी, पी सीआईटी या सीआईटी के पूर्व अनुमोदन से संतुष्ट है, कि 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद किसी अन्य व्यक्ति के मामले में खाते या दस्तावेजों की कोई भी किताब, जब्त या मांगी गई, संबंधित है या संबंधित है , या उसमें निहित कोई भी जानकारी निर्धारिती से संबंधित है।
नोटिस जारी करने से पहले की प्रक्रिया
निर्धारण अधिकारी को खोज, सर्वेक्षण या मांग के अलावा अन्य मामलों में नई धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने से पहले धारा 148क में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
• पूछताछ करना
निर्धारण अधिकारी, यदि आवश्यक हो, निर्दिष्ट प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के साथ, उस सूचना के संबंध में एक जांच करेगा जो बताती है कि कर के लिए प्रभार्य आय निर्धारण से बच गई है।
• सुनवाई का अवसर प्रदान करना
निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को सुनवाई का एक अवसर प्रदान करेगा, नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर कारण बताओ नोटिस की तामील करके, 7 दिन से कम नहीं, लेकिन तारीख से 30 दिन से अधिक नहीं। इस संबंध में एक आवेदन के आधार पर इस तरह का नोटिस जारी किया गया है, या ऐसा समय, जो उसके द्वारा बढ़ाया जा सकता है, कि क्यों न नई धारा 148 के तहत एक नोटिस सूचना के आधार पर जारी किया जाए जो सुझाव देता है कि संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए उसके मामले में कर के लिए प्रभार्य आय निर्धारण से बच गई है और की गई जांच के परिणाम, यदि कोई हो।
• निर्धारिती के उत्तर पर विचार करें
निर्धारण अधिकारी एओ द्वारा जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में निर्धारिती द्वारा दिए गए उत्तर, यदि कोई हो, पर विचार करेगा।
• आदेश पारित करना
निर्धारण अधिकारी निर्धारिती के उत्तर सहित रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर तय करेगा कि क्या यह नई धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने के लिए उपयुक्त मामला है या नहीं, एक आदेश पारित करके, निर्दिष्ट प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के साथ, 1 के भीतर महीने के अंत से महीने जिसमें निर्धारिती का उत्तर उसके द्वारा प्राप्त होता है, या जहां ऐसा कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, उस महीने के अंत से 1 महीने के भीतर जिसमें उत्तर देने के लिए समय या विस्तारित समय समाप्त हो जाता है।
टिप्पणी:
उपरोक्त प्रावधान लागू नहीं होगा यदि मामला जहां:
(क) धारा 132 के तहत एक खोज शुरू की जाती है या खाते की किताबें, अन्य दस्तावेज या धारा 132क के तहत किसी भी संपत्ति की मांग 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद निर्धारिती के मामले में की जाती है;
(ख) निर्धारिती के मामले में धारा 133ए के तहत एक सर्वेक्षण किया जाता है;
(ग ) निर्धारण अधिकारी पीसीआईटी या सीआईटी की पूर्व स्वीकृति से संतुष्ट है कि 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद किसी अन्य व्यक्ति के मामले में कोई पैसा, बुलियन, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज जब्त या मांगी गई है। , निर्धारिती के अंतर्गत आता है;
(घ) निर्धारण अधिकारी पीसीआईटी या सीआईटी की पूर्व स्वीकृति से संतुष्ट है, कि 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद किसी अन्य व्यक्ति के मामले में जब्त या मांगे गए खाते या दस्तावेजों की कोई भी किताब संबंधित है या उससे संबंधित है, या उसमें निहित कोई भी जानकारी निर्धारिती से संबंधित है; या
(ङ) निर्धारण अधिकारी ने निर्धारिती के मामले में किसी निर्धारण वर्ष के लिए कर से बचने के मूल्यांकन हेतु वसूली गई आय से संबंधित धारा 153क के अंतर्गत अधिसूचित योजना के अंतर्गत किसी सूचना को प्राप्त किया हो।
(छ) नोटिस जारी किए जाने से पूर्व की प्रक्रिया
तलाशी, सर्वेक्षण अथवा मांग के मामलों से भिन्न मामलों में, नई धारा 148 के अंतर्गत नोटिस जारी करने से पूर्व निर्धारण अधिकारी को धारा 148क में विनिर्दिष्ट निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना अपेक्षित होगा।
निर्धारण अधिकारी, निर्धारिती को यह कारण बताने का अवसर प्रदान करेगा कि उसके मामले में धारा 148 के अंतर्गत नोटिस क्यों जारी न किया जाए, इसके लिए उसे कारण बताओ नोटिस तामील किया जाएगा।। ऐसी कारण बताओ नोटिस के साथ वह नोटिस भी संलग्न होगा जिससे यह संकेत मिलता हो कि संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए उसके मामले में करारोपणीय आय निर्धारण से बच गई है।
नोटिस प्राप्त होने पर, निर्धारिती नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत कर सकता है। तत्पश्चात निर्धारण अधिकारी, रिका्ड पर उपलब्ध सामग्री तथा निर्धारिती के उत्तर पर विचार करते हुए, विनिर्दिष्ट प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति से यह निर्धारित करते हुए आदेश पारित करेगा कि धारा 148 के अंतर्गत नोटिस जारी किया जाना उपयुक्त मामला है अथवा नहीं।
हालांकि, यह प्रक्रिया किसी ऐसे निर्धारिती के मामले में किसी निर्धारण वर्ष हेतु निर्धारण से बची हुई करारोपणीय आय पर लागू नहीं होगी, जहाँ निर्धारण अधिकारी को धारा 135क के अंतर्गत अधिसूचित योजना के अंतर्गत नोटिस प्राप्त हुई हो।
धारा 148 तथा 148क के प्रयोजनों के लिए निर्धारण अधिकारी
वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा धारा 147क को शामिल किया गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि पुनर्निर्धारण हेतु नोटिस जारी करने के लिए निर्धारण अधिकारी से अभिप्राय ऐसे निर्धारण अधिकारी से होगा जो एनएफएसी अथवा किसी निर्धारण इकाई से भिन्न हो। यह संशोधन 01-04-2021 से प्रभावी है।
खोज, सर्वेक्षण और माँग मामलों में उच्च अधिकारियों का अनुमोदन प्राप्त करना
वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा प्रभावी निर्धारण वर्ष 2022-23 से एक नई धारा 148ख शामिल की गई है, जिसके अनुसार इस अधिनियम के अंतर्गत कोई निर्धारण, पुनर्निर्धारण अथवा पुनर्गणना आदेश ऐसे निर्धारण अधिकारी द्वारा, जो संयुक्त आयुक्त के पद से निम्न श्रेणी का हो, उस निर्धारण वर्ष के संबंध में पारित नहीं किया जाएगा जिस पर धारा 148 के स्पष्टीकरण 2 के खंड (i) अथवा खंड (ii) अथवा खंड (iii) अथवा खंड (iv) लागू होते हों, जब तक कि अपर आयुक्त अथवा अपर निदेशक अथवा संयुक्त आयुक्त अथवा संयुक्त निदेशक की पूर्व स्वीकृति प्राप्त न कर ली गई हो। उपर्युक्त धारा 148 के स्पष्टीकरण 2 के चारों खंड अनुमानित सूचना के मामलों का उपबंध करते हैं। यदि इन चारों खंडों में वर्णित परिस्थितियाँ, दशाएँ अथवा कार्यवाही विद्यमान हों, तो वह अनुमानित सूचना का मामला माना जाएगा, और निर्धारण अधिकारी धारा 148 के अंतर्गत नोटिस जारी करने हेतु अधिकारिता प्राप्त कर सकेगा।
नोटिस जारी करने की समय सीमा
आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने की समय सीमा:
जो मूल्यांकन राशि से बच गया है या 50 लाख या अधिक रुपये की राशि होने की संभावना है।
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विवरण |
समय सीमा |
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धारा 148 के अंतर्गत नोटिस जारी करना : (01-04-2024 से 31-08-2024 तक लागू) यदि निर्धारण से बची हुई आय की राशि — (i) ₹50,00,000 से कम है। (ii) ₹50,00,000 या उससे अधिक है |
प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अंत से 3 वर्ष के अंदर। |
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धारा 148 के अंतर्गत नोटिस जारी करना : (01-09-2024 से लागू)यदि निर्धारण से बची हुई आय की राशि — (i) ₹50,00,000 से कम है। (ii) ₹50,00,000 या उससे अधिक है |
प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अंत से 5 वर्ष और 3 महीनों के अंदर। |
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धारा 148क के अंतर्गत नोटिस जारी करना : (01-09-2024 से लागू)यदि निर्धारण से बची हुई आय की राशि — (i) ₹50,00,000 से कम है। (ii) ₹50,00,000 या उससे अधिक है |
प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अंत से 5 वर्ष के अंदर। |
मूल्यांकन से बचाई जाने वाली आय के संबंध में चेहरारहित मूल्यांकन [धारा 151क]
01-11-2020 से प्रभावी, कराधान और अन्य कानून (कुछ प्रावधानों में छूट और संशोधन) अधिनियम, 2020 ने एक धारा 151क को शामिल किया है ताकि केंद्र सरकार को निम्नलिखित कार्यों को चेहरारहित तरीके से करने के लिए एक योजना बनाने के लिए सशक्त बनाया जा सकेः
(क) धारा 147 ('पुनर्मूल्यांकन') के तहत मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना;
(ख) पुनर्मूल्यांकन करने के लिए धारा 148 के तहत नोटिस जारी करना; या
(ग) पुनर्मूल्यांकन करने के लिए धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने के लिए धारा 151 के तहत स्वीकृति।
अधिक दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रदान करने के लिए इस तरह की योजना बनाई जानी हैः
(क) तकनीकी रूप से व्यवहार्य सीमा तक आयकर प्राधिकरण और निर्धारिती या किसी अन्य व्यक्ति के बीच इंटरफेस को खत्म करना;
(ख) पैमाने और कार्यात्मक विशेषज्ञता की अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से संसाधनों का इष्टतम उपयोग; और
(ग)गतिशील अधिकारिता के साथ टीम-आधारित निर्धारण, पुनर्निर्धारण, पुनर्गणना अथवा नोटिस जारी करने या उसकी स्वीकृति की व्यवस्था का प्रारंभ
प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22 से, वित्त अधिनियम 2021 ने धारा 151 में संशोधन किया ताकि यह प्रदान किया जा सके कि नई धारा 148ए (नई धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने से पहले) के तहत पूछताछ करना या कारण बताओ नोटिस जारी करना या आदेश पारित करना फेसलेस तरीके से बाद में अधिसूचित किया जाएगा।
आयकर कानून के अंतर्गत विभिन्न मूल्यांकन पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. आय के रिटर्न को दाखिल करने से पूर्व करदाता द्वारा आय के रिटर्न की जांच मूल्यांकन कहलाता है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
एक बार करदाता द्वारा आय का रिटर्न भरे जाने पर अगला कदम आयकर विभाग द्वारा आय के रिटर्न को प्रसंस्करित करना है। आयकर विभाग अपने सुधार के लिए आय के रिटर्न की जांच करता है। आयकर विभाग द्वारा आय के रिटर्न की जांच की प्रक्रिया "मूल्यांकन" कहलाती है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 2. धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन समीक्षा मूल्यांकन के तौर पर जाना जाता है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन आय के रिटर्न का प्रारंभिक जांच है। इस स्तर पर आय के रिटर्न की ब्यौरेवार समीक्षा नही की जाती। यह मूल्यांकन निर्धारिती को बुलाए बिना संक्षिप्त मूल्यांकन के तौर पर जाना जाता हैं
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 3. धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन सर्वोत्तम धारणा मूल्यांकन के तौर पर जाना जाता है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन सर्वोत्तम धारणा मूल्यांकन के तौर पर जाना जाता है। यह मूल्यांकन निर्धारण अधिकारी के सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार की जाती है। यह मूल्यांकन उन मामलों में किया जाता है जहां करदाता धारा 144 में निर्दिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार विफल रहता है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 4. धारा 143 (1) के अंतर्गत आय के रिटर्न के प्रसंस्करण के दौरान निम्न में से कौन से संशोधन किए जा सकते है
(क) रिटर्न में किसी प्रकार की अंकगणितीय त्रुटि (ख) आय के रिटर्न में कोई त्रुटि
(ग) आय के रिटर्न में कोई गलती (घ) करदाता द्वारा कोई दावा जो कानून के विरूद्ध हो
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन आय के रिटर्न की प्रारंभिक जांच की तरह हैं। इस स्तर पर आय की रिटर्न की ब्यौरेवार समीक्षा नहीं की जाती। इस स्तर पर कुल आय अथवा हानि की गणना निम्नलिखित समायोजन (यदि कोई हो) करने के पश्चात् की जाएगी जिनका नाम है :-
(i) रिटर्न में किसी प्रकार की अंकगणितीय त्रुटि अथवा
(ii) असत्य दावा, यदि ऐसा असत्य दावा रिटर्न में किसी सूचना के आने पर किया जाता है
इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 5. धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन वित्त वर्ष जिसमें आय का रिटर्न दाखिल किया गया था की समाप्ति से ................ वर्ष की अवधि के भीतर किया जाना चाहिए
(क) चार (ख) तीन
(ग) दो (घ) एक
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 143(1) के अंतर्गत मूल्यांकन वित्त वर्ष जिसमें आय का रिटर्न दाखिल किया गया था की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर किया जाना चाहिए
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
प्रश्न 6. धारा 143(2) के अंतर्गत सूचना (अर्थात् समीक्षा मूल्यांकन की सूचना) वित्त वर्ष जिसमें रिटर्न दाखिल किया गया है की समाप्ति से ..................... की अवधि के भीतर दिया जाना चाहिए
(क) छह माह (ख) एक वर्ष
(ग) दो वर्ष (घ) अठारह माह
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 143(3) के अंतर्गत मूल्यांकन करने के लिए, मूल्यांकन अधिकारी को धारा 143(2) के अंतर्गत सूचना देनी चाहिए। धारा 143(2) के अंतर्गत सूचना वित्त वर्ष जिसमें रिटर्न दाखिल किया गया है की समाप्ति से छह महीनों की अवधि के भीतर दिया जाना चाहिए
इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 7. निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए धारा 143(3) के अंतर्गत मूल्यांकन प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष की समाप्ति से .............. महीनों के भीतर किया जाना चाहिए
(क) 24 महीने (ख) 36 महीने
(ग) 12 महीने (घ) 18 महीने
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 153 के निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए धारा 143(3) के अंतर्गत मूल्यांकन प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों के भीतर किया जाना चाहिए
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 8. निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष की समाप्ति से .............. महीनों के भीतर किया जाना चाहिए
(क) 24 महीने (ख) 36 महीने
(ग) 12 महीने (घ) 18 महीने
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 153 के अनुसार, निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए धारा 144 के अंतर्गत मूल्यांकन प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों के भीतर किया जाना चाहिए
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 9. धारा 147 के अंतर्गत मूल्यांकन करने का उद्देश्य किसी प्रकार की राशि, सोन-चांदी, आभूषण, बेशकीमती वस्तु आदि जो अघोषित हैं को टैक्स नेट के अंतर्गत लाना है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 147 के अंतर्गत मूल्यांकन करने का उद्देश्य किसी प्रकार की राशि जिसे वास्तविक मूल्यांकन में बचाए गए आंकलन को टैक्स नेट के अंतर्गत लाना है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 10. धारा 147 के अंतर्गत मूल्यांकन वित्त वर्ष जिसमें धारा 148 के अंतर्गत नोटिस करदाता को दिया गया हो की समाप्ति से दो वर्ष की अवधि के भीतर किया जाएगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 153 के अनुसार, धारा 147 के अंतर्गत मूल्यांकन करने की समय सीमा है
1) वित्त वर्ष जिसमें नोटिस धारा 148 के अंतर्गत जारी किया गया, की समाप्ति से 9 महीनों के अंदर (यदि नोटिस 01.04.2019 से पहले तामील किया जाता है)
2) वित्त वर्ष जिसमें नोटिस धारा 148 के अंतर्गत जारी किया गया, की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर (यदि नोटिस 01.04.2019 से पहले तामील किया जाता है)
टिप्पणी : यदि संदर्भ टीपीओ को किया जाता है तो मूल्यांकन की उपलब्ध अवधि 12 महीनों तक बढ़ाई जाएगी।
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

