आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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हस्ताक्षर तिथि

2015

लागू होना

31/08/2015

अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन में सुधार तथा एफएटीसीए के क्रियान्वयन के लिए भारत गणराज्य की सरकार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच करार

वित्त मंत्रालय

(राजस्व विभाग)

अधिसूचना

नर्इ दिल्ली, 30 सितम्बर, 2015

(आयकर)

का.आ. 2676 (अ). - चूंकि भारत गणराज्य की सरकार और संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन को सुधारने और संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम के कार्यांवयन के लिए नर्इ दिल्ली में 9 जुलार्इ, 2015 को एक अंतर-सरकारी करार और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे (जिसे इसके बाद कथित करार कहा गया है तथा अनुबंध के रूप में संलग्न है);

और चूंकि, उक्त करार के प्रवृत्त होने की तारीख 31 अगस्त, 2015 है, जो कि करार के अनुच्छेद 10 के पैराग्राफ 1 के उपबंधों के अनुसार, करार को लागू करने के लिए संबंधित कानूनों द्वारा यथा अपेक्षित आवश्यक अंतरिम प्रक्रियाएं पूरी करने की अधिसूचनाओं की तारीख है;

इसलिए, अब आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 90 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा अधिसूचित करती है कि भारत गणराज्य की सरकार और संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच करों के संबंध में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए उक्त करार के सभी उपबंध भारत संघ में दिनांक 31 अगस्त, 2015, जो उपर्युक्त करार के प्रवृत्त होने की तारीख है, से लागू होंगे।

(अधिसूचना सं. 77/2015/फा.सं. 500/137/2011-एफटीडी-I)

अखिलेश रंजन, संयुक्त सचिव

अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन में सुधार तथा एफएटीसीए के क्रियान्वयन के लिए भारत गणराज्य की सरकार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच करार

जबकि, भारत गणराज्य की सरकार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार (प्रत्येक एक ''पार्टी'' तथा एक साथ ''पार्टियां'') सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के लिए प्रभावी अवसंरचना पर आधारित कर मामलों में परस्पर सहायता के जरिए अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन को सुधारने के लिए करार को अंतिम रूप देने की इच्छुक हैं;

जबकि 12 सितम्बर, 1989 को नर्इ दिल्ली में भारत गणराज्य की सरकार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच आय पर करों के बारे में दोहरे कराधान के परिहार तथा वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए किए गए अभिसमय (''अभिसमय'') का अनुच्छेद 28 कर प्रयोजनों के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान को प्राधिकृत करता है, जिसमें स्वत: आधार भी सम्मिलित है;

जबकि, संयुक्त राज्य अमेरिका ने सामान्यत: विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (फटका) के रूप में ज्ञात अधिनियम के उपबंधों को अधिनियमित किया, जो कुछ खातों के बारे में वित्तीय संस्थानों के लिए प्रतिवेदन क्षेत्र की शुरूआत करता है;

जबकि, भारत सरकार कर अनुपालन सुधारने के लिए फटका के नीतिगत उद्देश्य के रेखांकन की समर्थक है;

जबकि, फटका ने अनेक मुद्दे उठाए हैं जिनमें घरेलू कानूनी अड़चनों के कारण फटका के कुछ पहलुओं पर भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा अनुपालन करने में सक्षम नहीं होना शामिल है;

जबकि, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार भारत के निवासियों द्वारा धारित यू.एस. वित्तीय संस्थानों द्वारा रखे गए कुछ खातों के बारे में सूचनाएं एकत्र करती है और भारत सरकार के साथ ऐसी सूचनाओं का आदान-प्रदान करने तथा आदान-प्रदान के समान स्तरों पर अनुपालन करने के लिए वचनबद्ध हैं;

जबकि, पार्टियां सामान्य प्रतिवेदन प्राप्त करने की दिशा में लंबी अवधि तक साथ कार्य करने और वित्तीय संस्थानों हेतु समुचित कर्मठता मानकों के लिए वचनबद्ध हैं;

जबकि, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार दोहरे प्रतिवेदन से बचने के लिए भारतीय वित्तीय संस्थानों की अन्य यू.एस. कर प्रतिवेदन दायित्वों के साथ फटका के तहत प्रतिवेदन दायित्वों को समन्वित करने की जरूरत को स्वीकार करती है;

जबकि, फटका के क्रियान्वयन के लिए एक अन्त: सरकारी दृष्टिकोण कानूनी अड़चनों का पता लगाएगा और भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए बोझ कम करेगा;

जबकि, पार्टियां अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन में सुधार करने तथा अभिसमय के अनुसार घरेलू प्रतिवेदन तथा पारस्परिक स्वत: आदान-प्रदान पर आधारित फटका के क्रियान्वयन की व्यवस्था करने और उसमें दी गयी गोपनीयता तथा अन्य संरक्षणों की शर्त के अधीन, जिसमें अभिसमय के अन्तर्गत आदान-प्रदान की गर्इ सूचनाओं के प्रयोग को सीमित करने के प्रावधान सम्मिलित हैं, एक करार निष्पन्न करने की इच्छुक हैं;

इसलिए, अब, पार्टियां निम्नानुसार सहमत हुर्इ हैं:

अनुच्छेद 1

परिभाषाएं

1. इस करार के प्रयोजनार्थ तथा इसके किसी अनुबंध (''करार'') के लिए निम्नलिखित पदों का अर्थ नीचे दिए गए अनुसार होगा;

(क) पद ''संयुक्त राज्य'' का अर्थ संयुक्त राज्य अमेरिका से है जिसमें उसके राज्य शामिल हैंं, और जब भौगोलिक संदर्भ में प्रयोग किया जाता है तो इसका अर्थ संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रदेश से होता है जिसमें भूमिगत जल, वायु स्थान, उनका प्रादेशिक समुद्र तथा उस प्रादेशिक क्षेत्र से परे कोर्इ तटवर्ती क्षेत्र जिसके भीतर संयुक्त राज्य अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सार्वभौमिक अधिकारों अथवा क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है; तथापि, इसमें यू.एस. राज्यक्षेत्र शामिल नहीं हैं। यूनाइटेड स्टेट के ''स्टेट'' के किसी संदर्भ में कोलंबिया जिला शामिल होता है।

(ख) ''यू.एस.राज्यक्षेत्र'' पद का अर्थ अमेरिकी समोआ, उत्तरी मैरियाना आर्इलैंड का कामनवेल्थ, गुआम, पुअर्टों रिको का कामनवेल्थ अथवा यू.एस. वर्जिन आर्इलैंड से है।

(ग) ''आर्इआरएस'' पद का अर्थ यू.एस. आन्तरिक राजस्व सेवा से है।

(घ) ''भारत'' शब्द का अर्थ है - भारत गणराज्य तथा भौगोलिक अर्थ में प्रयोग किए जाने पर, इसका अर्थ भारत का भूभाग है और इसमें भूभागीय समुद्र और उसके ऊपर के वायुमंडलीय क्षेत्र के अतिरिक्त कोर्इ भी अन्य समुद्री क्षेत्र शामिल है जिनमें समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संघ के अभिसमय सहित भारतीय कानून तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार भारत के प्रभुसत्ता सम्पन्न अधिकार, अन्य अधिकार तथा क्षेत्राधिकार है।

(ड.) ''सहभागी क्षेत्राधिकार'' पद का अर्थ उस क्षेत्राधिकार से है जिसके पास फटका के क्रियान्वयन को सुगम बनाने के लिए संयुक्त राज्य के साथ कोर्इ प्रभावी करार है। आर्इआरएस सभी सहभागी क्षेत्राधिकारों की पहचान करने वाली एक सूची प्रकाशित करेगा।

(च) ''सक्षम प्राधिकारी'' शब्द का अर्थ है:

(1) संयुक्त राज्य के मामले में राजकोष का सचिव अथवा उसका प्रतिनिधि; और

(2) भारत के मामले में, वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग), भारत सरकार अथवा उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि।

(छ) ''वित्तीय संस्थान'' पद का कोर्इ अभिरक्षक संस्थान, डिपॉजिटरी संस्थान, किसी निवेश सत्ता अथवा किसी निर्दिष्ट बीमा कंपनी से है।

(ज) ''अभिरक्षक संस्थान'' पद का अर्थ किसी ऐसी सत्ता से है, जो अपने कारोबार के सारभूत हिस्से के रूप में, वित्तीय परिसंपत्ति को दूसरों के खाते के लिए रखता है। कोर्इ सत्ता अपने कारोबार के सारभूत हिस्से के रूप में दूसरों के खाते के लिए वित्तीय परिसंपत्ति रखती है यदि सत्ता की सकल आय वित्तीय परिसंपत्तियों और संबद्ध वित्तीय सेवाओं के कारण (i) उस वर्ष से पूर्व तीन वर्ष की अवधि जो 31 दिसम्बर को समाप्त होती है (अथवा अकाउटिंग अवधि के गैर-कैलेण्डर वर्ष के अंतिम दिन) जिसमें निर्धारण किया जा रहा है अथवा (ii) वह अवधि जिसमें सत्ता अस्तित्व में रही है, कम अवधि के दौरान सत्ता की सकल आय के 20 प्रतिशत के बराबर अथवा इससे अधिक है।

(झ) ''डिपॉजिटरी संस्थान'' पद का अर्थ किसी ऐसी सत्ता से है जो बैंकिग अथवा इसी तरह के व्यवसाय के साधारण कार्य के दौरान जमाओं को स्वीकार करता है।

(ञ) पद ''निवेश सत्ता'' का अर्थ ऐसी सत्ता से है जो ग्राहक के लिए अथवा ग्राहक की ओर से निम्नलिखित कार्यकलापों अथवा प्रचालनों में से एक अथवा एक से ज्यादा को कारोबार के रूप में (या किसी सत्ता द्वारा प्रबंधन किया जाता है जो कारोबार को चलाता है) चलाता है:

(1) धन बाजार लिखतों में ट्रेडिंग (चेक, बिल, जमा के प्रमाणपत्र; व्युत्पन्न आदि); विदेशी मुद्रा, ब्याज दर तथा सूचकांक लिखत; हस्तांतरणीय प्रतिभूति अथवा वस्तु वायदे के सौदे की ट्रेडिंग;

(2) वैयक्तिक तथा सामूहिक पोर्टफोलियो प्रबंधन; अथवा

(3) अन्यथा दूसरे व्यक्तियों की ओर से निधियों अथवा धन का निवेश करना, प्रशासन करना अथवा प्रबंधन करना।

इस उप पैराग्राफ 1 (ञ) की वित्तीय कार्य कृत्यक बल सिफारिशों में ''वित्तीय संस्थान'' की परिभाषा में दी गर्इ इसी प्रकार की भाषा के संगत तरीके में व्याख्या की जाएगी।

(ट) ''विनिर्दिष्ट बीमा कंपनी'' पद का अर्थ ऐसी सत्ता से है, जो एक बीमा कंपनी (अथवा बीमा कंपनी की एक धारक कंपनी है) है जो नकद मूल्य बीमा संविदा अथवा वार्षिकी संविदा के संबंध में भुगतान जारी करती है अथवा करने को बाध्य होती है।

(ठ) पद ''भारतीय वित्तीय संस्थान'' का अर्थ (i) भारत में निवासी वित्तीय संस्थान परन्तु ऐसे वित्तीय संस्थान की किसी शाखा के अलावा जो भारत के बाहर स्थित है, और (ii) वित्तीय संस्थान की कोर्इ शाखा जो भारत में निवासी नहीं है, यदि ऐसी शाखा भारत में स्थित है।

(ड) ''सहभागी क्षेत्राधिकार वित्तीय संस्थान'' पद का अर्थ (i) सहभागी क्षेत्राधिकार में स्थित कोर्इ वित्तीय संस्थान परन्तु ऐसे वित्तीय संस्थान की ऐसी किसी शाखा को छोड़कर जो सहभागी क्षेत्राधिकार से बाहर स्थित है, और (ii) सहभागी क्षेत्राधिकार में स्थापित न की गर्इ वित्तीय संस्थान की कोर्इ शाखा यदि ऐसी शाखा सहभागी क्षेत्राधिकार में स्थित है।

(ढ) पद ''प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान'' का अर्थ एक प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान अथवा एक प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान, जैसा भी संदर्भ हो, से है।

(ण) ''प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान'' पद का अर्थ किसी ऐसे भारतीय वित्तीय संस्थान से है, जो गैर-प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान नहीं है।

(त) पद ''प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान'' का अर्थ है (i) कोर्इ वित्तीय संस्थापन जो संयुक्त राज्य में निवासी है परंतु ऐसे वित्तीय संस्थान की ऐसी किसी शाखा को छोड़कर जो संयुक्त राज्य के बाहर स्थित है और (ii) संयुक्त राज्य की निवासी न होने वाली वित्तीय संस्थान की कोर्इ शाखा, यदि ऐसी शाखा संयुक्त राज्य में स्थित है, बशर्ते वित्तीय संस्थान अथवा शाखा उस आय के बारे में नियंत्रण, प्राप्ति तथा अधिपत्य रखती है जिसके लिए इस कारार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2 (ख) के अंतर्गत सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाना अपेक्षित है।

(थ) पद ''गैर प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान'' का अर्थ किसी भारतीय वित्तीय संस्थान अथवा भारत में निवासी ऐसी दूसरी सत्ता से है, जिसका गैर-रिपार्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थान के रूप में अनुबंध-II में उल्लेख किया गया है अथवा अन्यथा माने गए अनुपालक एफएफआर्इ अथवा इस करार के हस्ताक्षर होने की तारीख को प्रभावी संगत यू.एस.राजकोष विनियमों के तहत छूट प्राप्त लाभ प्राप्त स्वामी के रूप में अहर्ता प्राप्त है।

(द) ''गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान'' पद का अर्थ किसी गैर-प्रतिभागी एफएफआर्इ से है जैसा कि वह पद संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में परिभाषित है परंतु इसमें भारतीय वित्तीय संस्थान अथवा इस करार के अनुच्छेद 5 के उप पैराग्राफ 2(ख) के अनुसरण में गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में माने गए वित्तीय संस्थान के अलावा अन्य सहभागी क्षेत्राधिकार वित्तीय संस्थान अथवा संयुक्त राज्य तथा सहभागी क्षेत्राधिकार के बीच करार में तदनुरूप उपबंध को शामिल नहीं करता है।

(ध) ''वित्तीय खाता'' पद का अर्थ वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित किसी खाते से है और इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

(1) उस सत्ता के मामले में जो केवल इसलिए एक वित्तीय संस्थान है क्योंकि यह वित्तीय संस्थान में एक निवेश सत्ता है, कोर्इ इक्विटी अथवा ऋण ब्याज है (उन ब्याजों के अलावा जिनका स्थापित बाजार प्रतिभूतियों पर नियमित रूप से व्यापार किया जाता है);

(2) इस अनुच्छेद के उप पैराग्राफ 1(ध)(1) में उल्लेख न किए गए वित्तीय संस्थान के मामले में, वित्तीय संस्थान में कोर्इ इक्विटी अथवा ऋण ब्याज (उस ब्याज के अलावा जिस पर स्थापित प्रतिभूति बाजार में नियमित रूप से व्यापार किया जाता है) यदि (i) ऋण अथवा इक्विटी ब्याज प्रत्यक्षत: अथवा अप्रत्यक्षत: परिसंपत्तियों के संदर्भ द्वारा प्राथमिक रूप से निर्धारित किया जाता है तो यह यू.एस. स्रोत रोकने योग्य भुगतानों में बढ़ोत्तरी करता है तथा (ii) ब्याज का वर्ग इस करार के अनुसरण में प्रतिवेदन से बचने के प्रयोजनार्थ स्थापित किया गया था; और

(3) गैर निवेश संबंधी, अहस्तांतरणीय तुरंत जीवन वार्षिकी को छोड़कर कोर्इ नकद मूल्य बीमा संविदा तथा कोर्इ वार्षिकी संविदा जो किसी व्यक्ति को जारी किया जाता है तथा एक खाते के अंतर्गत प्रदान की गर्इ पेंशन अथवा अपंगता लाभ को मुद्रा के रूप में चलाता है जिसे अनुबंध-II में वित्तीय खाते से अलग किया जाता है।

उपरोक्त के होते हुए भी पद ''वित्तीय खाता'' किसी ऐसे खाते को शामिल नहीं करता जिसे अनुबंध-II में वित्तीय खाते की परिभाषा से अलग किया गया है। इस करार के प्रयोजनार्थ, ब्याज का ''नियमित रूप से व्यापार'' किया जाता है यदि सतत् आधार पर ब्याज के बारे में व्यापार की अर्थपूर्ण मात्रा है और ''स्थापित प्रतिभूति बाजार'' का अर्थ किसी आदान-प्रदान केंद्र से है जिसे सरकारी प्राधिकारी द्वारा अधिकारिक रूप से मान्यता दी जाती है और पर्यवेक्षित किया जाता है जिसमें बाजार स्थित है और विनियम पर व्यापार किए गए शेयरों का अर्थपूर्ण वार्षिक मूल्य है। इस उप पैराग्राफ 1 (ध) के प्रयोजनार्थ संस्थान में ब्याज का ''नियमित रूप से ब्यापार'' नहीं किया जाता है और वित्तीय खाते के रूप में माना जाएगा, यदि ब्याज का धारक (मध्यवर्ती के रूप में कार्य करने वाले वित्तीय संस्थान को छोड़कर) ऐसे वित्तीय संस्थान की पुस्तकों पर पंजीकृत है। पूर्ववर्ती वाक्य 01 जुलार्इ, 2014 से पूर्व ऐसे वित्तीय संस्थान के पुस्तकों पर पहली बार पंजीकृत ब्याज पर लागू नहीं होगा और 01 जुलार्इ, 2014 को अथवा इसके बाद ऐसे वित्तीय संस्थान के पुस्तकों पर पहली बार पंजीकृत ब्याज के संबंध में एक वित्तीय संस्थान को 01 जनवरी, 2016 से पूर्व पूर्ववर्ती वाक्य पर लागू करना अपेक्षित नहीं है।

(न) पद ''डिपॉजिटरी खाता'' में कोर्इ वाणिज्यिक, चेकिंग, बचत, समय अथवा मितव्यय खाता अथवा कोर्इ खाता शामिल है जिसका जमा के प्रमाणपत्र, मितव्यय प्रमाणपत्र, निवेश प्रमाणपत्र, ऋणग्रस्तता का प्रमाणपत्र अथवा दूसरे इसी तरह के लिखत के रूप में प्रमाण दिया जाता है जिनका बैंकिंग के सामान्य कार्य में अथवा इसी तरह के कारोबार में वित्तीय संस्थान द्वारा रखरखाव किया जाता है। डिपॉजिटरी खाता में गारंटेड निवेश संविदा अथवा उन पर क्रेडिट ब्याज का भुगतान करने के लिए इसी तरह के करार के अनुसरण में किसी बीमा कंपनी द्वारा रखी गर्इ राशि भी शामिल है।

(प) पद ''अभिरक्षक खाता'' का अर्थ दूसरे व्यक्ति के लाभार्थ किसी खाते (बीमा संविदा अथवा वार्षिकी संविदा को छोड़कर) से है, जो किसी वित्तीय लिखत अथवा निवेश के लिए रखी गर्इ संविदा रखता है (जिसमें किसी कार्पोरेशन में शेयर अथवा स्टॉक, कोर्इ नोट, बॉड, डिबेंचर अथवा ऋग्रस्तता के दूसरे साक्ष्य, कोर्इ मुद्रा अथवा वस्तु कारोबार, कोर्इ क्रेडिट चूककर्ता स्वेप गैर वित्तीय सूचकांक पर कोर्इ स्वेप आधार, मामूली प्रधान संविदा, कोर्इ बीमा संविदा अथवा वार्षिकी संविदा तथा कोर्इ वैकल्पिक अथवा व्युत्पन्न यंत्र सहित शामिल है, परंतु यहीं तक सीमित नहीं है।

(फ) पद ''इक्विटी ब्याज'' का अर्थ किसी भागीदारी के मामले में, जो एक वित्तीय संस्थान है, या तो भागीदारी में पूंजी अथवा लाभ ब्याज है। किसी ट्रस्ट के मामले में जो कोर्इ वित्तीय संस्थान है, इक्विटी ब्याज को ट्रस्ट के सभी अवस्थापक अथवा लाभग्राहियों अथवा किसी हिस्से के रूप में माने गए किसी व्यक्ति द्वारा अथवा ट्रस्ट के ऊपर अंतिम प्रभाव का उपयोग करने वाले किसी अन्य प्राकृतिक व्यक्ति द्वारा धारित माना जाता है। किसी विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति को विदेशी ट्रस्ट का लाभग्राही माना जाएगा यदि ऐसे विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति के पास प्रत्यक्षत: अथवा अप्रत्यक्षत: कोर्इ बाध्यकारी संवितरण प्राप्त करने का अधिकार है (उदाहरण के लिए नामिति के माध्यम से) अथवा जो ट्रस्ट से विवेकाधीन संवितरण को प्रत्यक्षत: अथवा अप्रत्यक्षत: प्राप्त कर सकता है।

(ब) पद ''बीमा संविदा'' का अर्थ किसी ऐसी संविदा (वार्षिकी संविदा को छोड़कर) से है, जिसके अंतर्गत निर्गमकर्ता विनिर्दिष्ट संभाव्यता के घटित होने पर कोर्इ राशि अदा करने पर सहमत होता है जिसमें घातकता, रूग्णता, दुर्घटना, देनदारी अथवा संपदा जोखिम सम्मिलित है।

(भ) पद ''वार्षिकी संविदा'' का अर्थ किसी संविदा से है जिसके तहत निर्गमकर्ता एक अथवा एकाधिक व्यक्तियों के जीवन अनुमान के संदर्भ में पूर्णत: अथवा आंशिक रूप से निर्धारित की गर्इ समयावधि के लिए भुगतान करने के लिए सहमत होता है। इस पद में वह संविदा भी सम्मिलित है जिसे उस क्षेत्राधिकार के कानून, विनियम अथवा पद्धति के अनुसार वार्षिकी संविदा माना जाता है जिसमें संविदा को जारी किया गया था और जिसके तहत निर्गमकर्ता नियत वर्षों के लिए भुगतान करने पर सहमत होता है।

(म) पद ''नकद मूल्य बीमा संविदा'' का अर्थ किसी बीमा संविदा (दो बीमा कंपनियों के बीच क्षतिपूर्ति पुन: बीमा संविदा के अलावा) से है, जिसके पास 50,000/- डालर से अधिक का नकद मूल्य है।

(य) पद ''नकद मूल्य'' का अर्थ (i) वह राशि जिसे पॉलिसी धारक संविदा के वापस हो जाने अथवा समाप्त हो जाने पर (किसी वापसी प्रभार अथवा पॉलिसी ऋण के लिए कमी के बिना निर्धारित) प्राप्त करने हेतु पात्र है; तथा (ii) वह राशि जिसे पॉलिसी धारक संविदा के अंतर्गत अथवा इसके संदर्भ में उधार ले सकता है, से ज्यादा राशि से है। उपरोक्त के होते हुए पद ''नकद मूल्य'' में बीमा संविदा के तहत देय राशि को शामिल नहीं किया जाता, जैसे:

 (1) बीमाकृत घटना के विरूद्ध घटित होने पर उपगत आर्थिक हानि की क्षतिपूर्ति प्रदान करने वाली वैयक्तिक क्षति अथवा रूगणता लाभ अथवा अन्य लाभ;

 (2) कोर्इ पॉलिसी रद्द हो जाने अथवा समाप्त हो जाने पर बीमा संविदा की प्रभावी अवधि के दौरान अथवा पोस्टिंग में शुद्धि अथवा इसी तरह की त्रुटि के कारण प्रीमियम के पुन: निर्धारण से होने वाले जोखिम प्रदर्शन में कमी होने के कारण बीमा संविदा (जीवन बीमा संविदा के तहत के अलावा) के अंतर्गत पूर्व में अदा किए गए प्रीमियम का पॉलिसी धारक को रिफण्ड; या

 (3) संविदा अथवा शामिल समूह के बीमा दायित्व उठाने के अनुभव पर आधारित पॉलिसी धारक का लाभांश।

(कक) पद ''प्रतिवेद्य खाता' का अर्थ किसी यू.एस. प्रतिवेद्य खाता अथवा भारतीय प्रतिवेद्य खाता, जैसा भी संदर्भ अपेक्षित हो, से है।

(खख) पद ''भारतीय प्रतिवेद्य खाता'' का अर्थ किसी प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान द्वारा रखे गए वित्तीय खाते से है यदि: (i) डिपॉजिटरी खाते के मामले में, खाता भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा धारित होता है और 10 अमेरिकी डालर से ज्यादा ब्याज किसी दिए गए कलेंडर वर्ष में ऐसे खाते में अदा किया जाता है अथवा (ii) डिपॉजिटरी खाते से भिन्न वित्तीय खाते के मामले में, खाताधारक किसी सत्ता सहित भारत का निवासी है जो प्रमाणित करता है कि यह उन कर प्रयोजनों के लिए भारत में निवासी है जिनके बारे में यू.एस. स्रोत आय जो यू.एस. आंतरिक कोड के उपशीर्षक क के अध्याय - 3 अथवा उपशीर्षक च के अध्याय-61 के अंतर्गत प्रतिवेदन के अधीन है और इसे अदा किया जाता है अथवा क्रेडिट किया जाता है।

(गग) पद ''यू.एस. प्रतिवेद्य खाता'' का अर्थ किसी प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित वित्तीय खाते से है और एक या इससे अधिक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्तियों द्वारा अथवा एक अथवा अधिक नियंत्रक व्यक्तियों सहित गैर-यू.एस. सत्ता द्वारा रखा जाता है जो विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है। पूर्ववर्ती के होते हुए भी, किसी खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता नहीं माना जाएगा यदि ऐसा खाते की अनुबंध-I में नियत परिश्रम प्रक्रियाओं के अनुप्रयोग के बाद यू.एस. प्रतिवेद्य खाता के रूप में पहचान नहीं की गयी है।

(घघ): पद ''खाताधारक'' का अर्थ उस वित्तीय संस्थान द्वारा वित्तीय खाता के धारक के रूप में सूचीबद्ध अथवा पहचाने गए व्यक्ति से है जो खाते का अनुरक्षण करता है। एजेंट, अविभावक, नामिती, हस्ताक्षरकर्ता, निवेश सलाहकार अथवा मध्यवर्ती के रूप में दसरे व्यक्ति के लाभ अथवा खाते के लिए वित्तीय खाता रखने वाले वित्तीय संस्थान से भिन्न किसी व्यक्ति को इस करार के प्रयोजनार्थ खाताधारक के रूप में नहीं माना जाएगा और ऐसे दूसरे व्यक्ति को खाताधारक के रूप में माना जाता है। तत्काल पूर्व वाक्य के प्रयोजन के लिए ''वित्तीय संस्थान'' पद में यू.एस. राज्यक्षेत्र में संगठित अथवा सम्मिलित वित्तीय संस्थान को शामिल नहीं किया जाता। नकद मूल्य बीमा संविदा अथवा वार्षिकी संविदा के मामले में, खाताधारक कोर्इ व्यक्ति है जो संविदा में नकद मूल्य तक पहुंचने अथवा लाभार्थियों में परिवर्तन करने का पात्र है। यदि कोर्इ व्यक्ति नकद मूल्य अथवा लाभार्थियों में परिवर्तन नहीं कर सकता, तो खाताधारक वह व्यक्ति होता है जो संविदा के मालिक के रूप में तथा संविदा की शर्त के तहत भुगतान पाने की पात्रता अधिकार सहित नामित है। नकद मूल्य बीमा संविदा अथवा वार्षिकी संविदा पूरी हो जाने पर संविदा के अंतर्गत भुगतान प्राप्त करने के पात्र प्रत्येक व्यक्ति को खाताधारक के रूप में माना जाएगा।

(ड.ड.): ''यू एस. व्यक्ति'' पद का अर्थ संयुक्त राज्य अथवा इसके किसी राज्य के कानून के तहत यू.एस. नागरिक, अथवा निवासी व्यक्ति, यू.एस. में संगठित किसी भागीदारी, अथवा निगम, किसी ट्रस्ट से है यदि (i) संयुक्त राज्य के अंदर कोर्इ न्यायालय ट्रस्ट के प्रशासन से संबंधित सारभूत रूप से सभी मामलों से संबंधित आदेशों अथवा निर्णय देने के लागू कानून के तहत अधिकार रखेगा तथा (ii) एक अथवा एक से ज्यादा यू.एस. व्यक्तियों को ट्रस्ट अथवा मृतक की संपदा के सभी सारभूत निर्णयों को नियंत्रित करने का अधिकार है जो संयुक्त राज्य का कोर्इ नागरिक अथवा निवासी है। इस उप पैराग्राफ 1(ड.ड.) की यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड के अनुसार व्याख्या की जाएगी।

(चच): ''विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति'' पद का अर्थ निम्नलिखित के अलावा किसी यू.एस. व्यक्ति से है: (i) कोर्इ कार्पोशन जिसके स्टॉक का एक अथवा एक से अधिक स्थापित प्रतिभूति बाजारों में नियमित रूप से व्यापार किया जाता है; (ii) कोर्इ कार्पोशन जो उसी विस्तारित सहायता प्राप्त समूह का कोर्इ सदस्य है जैसा यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 (ड.) (2) में खण्ड (i) में उल्लिखित किसी निगम के रूप में परिभाषित है; (iii) संयुक्त राज्य अथवा कोर्इ पूर्ण स्वामित्व वाला एजेंसी अथवा उनके सहायक लिखत; (iv) संयुक्त राज्य का कोर्इ स्टेट, कोर्इ यू.एस. राज्यक्षेत्र, पूर्वोक्त में से किसी का कोर्इ राजनैतिक उप प्रभाग अथवा कोर्इ पूर्व स्वामित्व वाली एजेंसी अथवा पूर्वोक्त में से किसी एक अथवा ज्यादा का सहायक लिखत; (v) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 501 (क) के तहत कराधान से छूट प्राप्त कोर्इ संगठन अथवा वैयक्तिक सेवानिवृति योजना जैसा यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 7701 (क) (37) में परिभाषित है; (vi) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 581 के तहत यथा परिभाषित कोर्इ बैंक; (vii) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 856 में यथा परिभाषित कोर्इ अचल संपत्ति निवेश ट्रस्ट; (viii) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 851 में यथा परिभाषित कोर्इ विनियमित निवेश कंपनी अथवा 1940 का इंवेस्टमेंट कंपनी अधिनियम (15 यू.एस. सी 80क-64) के तहत यू.एस. प्रतिभूति एवं विनियम कमीशन के पास पंजीकृत कोर्इ सत्ता; (ix) यू.एस. आंतरिक कोड की धारा 584 (क) में यथा परिभाषित कोर्इ सामान्य ट्रस्ट कोष; (x) ट्रस्ट जिसे यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 664 (ग) के अंतर्गत कर से छूट प्राप्त है अथवा जिसका यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 4947 (क) (1) में उल्लेख किया गया है; (xi) प्रतिभूतियों, आवश्यक वस्तुओं तथा व्युत्पन्न वित्तीय लिखतों (काल्पनिक प्रधान संविदाओं, वायदे के सौदे, उन्नत तथा विकल्पों सहित) में डीलर जिसे संयुक्त राज्य अथवा किसी स्टेट के नियमों के अंतर्गत इस प्रकार पंजीकृत किया गया है; (xii) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 6045 (ग) में यथा परिभाषित किसी ब्रोकर; अथवा (xiii) किसी योजना के तहत कोर्इ कर छूट प्राप्त ट्रस्ट जिसका यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 403 (ख) अथवा धारा 457 (छ) में उल्लेख किया गया है।

(छछ) ''सत्ता'' पद का अर्थ किसी कानूनी व्यक्ति अथवा ट्रस्ट जैसे कानूनी प्रबंधन से है।

(जज) ''गैर यू.एस. सत्ता'' पद का अर्थ किसी ऐसी सत्ता से है जो कोर्इ यू.एस. व्यक्ति नहीं है।

(झझ) ''यू.एस. स्रोत रोके रखने योग्य भुगतान'' पद का अर्थ ब्याज (किसी मूल मुद्दे छूट सहित), लाभांश, किराया, वेतन, मजदूरी, प्रीमियम, वार्षिकियों क्षतिपूर्तियों, परिश्रमिकों, उपलब्धियों तथा वार्षिक और आवधिक प्राप्तियों, लाभों तथा आय के दूसरे स्थिर अथवा निर्धारण योग्य किसी भुगतान से है, यदि ऐसे भुगतान संयुक्त राज्य के स्रोतों से हों। पूर्ववर्ती के होते हुए भी किसी यू.एस. स्रोत रोक रखने योग्य भुगतान में कोर्इ ऐसा भुगतान शामिल नहीं किया जाता, जिसे संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में रोके रखने योग्य भुगतान के रूप में नहीं माना जाता।

(ञञ) कोर्इ सत्ता दूसरी सत्ता की ''सबंद्ध सत्ता'' है यदि कोर्इ भी सत्ता दूसरी सत्ता को नियंत्रित करती है अथवा दोनों सत्ताएं सामान्य नियंत्रणाधीन हैं। इस प्रयोजनार्थ नियंत्रण में सत्ता में मत अथवा मूल्य का 50 प्रतिशत से अधिक प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष स्वामित्व शामिल होता है। पूर्ववर्ती के होते हुए भी, भारत किसी सत्ता को दूसरी सत्ता की संबद्ध सत्ता नहीं होना मान सकता यदि दो सत्ताएं उसी विस्तारित संबद्ध समूह के सदस्य नहीं है जैसा यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471(ड.)(2) में परिभाषित किया गया है।

 (टट) ''यू.एस. टिन'' पद का अर्थ यू.एस. फेडरल करदाता पहचानकर्ता संख्या है।

 (ठठ) ''भारतीय टिन'' पद का अर्थ कोर्इ भारतीय करदाता पहचानकर्ता संख्या है।

  (डड) ''नियंत्रक व्यक्ति'' पद का अर्थ प्राकृतिक व्यक्तियों से है जो किसी सत्ता पर नियंत्रण का प्रयोग करते हैं। ट्रस्ट के मामले में, ऐसे पद का अर्थ अवस्थापक, न्यासियों, संरक्षक (यदि कोर्इ हो) लाभकारी अथवा लाभकारियों के वर्ग तथा किसी अन्य प्राकृतिक व्यक्ति से है, जो ट्रस्ट के ऊपर अंतिम प्रभावी नियंत्रण का प्रयोग करता है तथा ट्रस्ट से भिन्न कानूनी प्रबंधन के मामले में ऐसे पद का अर्थ समतुल्य अथवा समान स्थितियों के व्यक्तियों से है। ''नियंत्रक व्यक्ति'' पद की ऐसे व्याख्या की जाएगी, जो वित्तीय कार्रवार्इ कार्यबल की सिफारिशों से संगत हो।

2. कोर्इ पद, जिसे इस करार में अन्यथा परिभाषित नहीं किया गया है, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो अथवा सक्षम प्राधिकारी सामान्य अर्थ (जैसा कि घरेलू कानून द्वारा अनुमत) पर सहमत होते हों, का अर्थ होगा कि जो इसका इस करार को लागू करने वाली पार्टी के कानून के तहत उस समय है, उस पार्टी के लागू कर कानूनों के अंतर्गत कोर्इ अर्थ उस पार्टी के दूसरे कानूनों के अंतर्गत उस पद को दिए गए अर्थ पर अभिभावी होगा।

 

अनुच्छेद 2

प्रतिवेद्य खाते के संबंध में सूचनाएं प्राप्त करने तथा आदान-प्रदान करने के दायित्व

1. इस करार के अनुच्छेद 3 के उपबंधों के अधीन प्रत्येक पार्टी प्रतिवेद्य खाते के संबंध में इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 2 में विनिर्दिष्ट सूचनाएं प्राप्त करेगा तथा अभिसमय के अनुच्छेद 28 के उपबंधों के अनुसरण में स्वत: आधार पर दूसरी पार्टी से इन सूचनाओं का हर वर्ष आदान-प्रदान करेगा।

2. निम्नलिखित सूचनाओं को इस प्रकार प्राप्त एवं आदान-प्रदान किया जाना है:

(क) भारत के मामले में प्रत्येक प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के प्रत्येक यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के बारे में:

 (1) नाम, पता तथा प्रत्येक विनिर्दिष्ट व्यक्ति का यू.एस. टिन जो ऐसे खाते का खाताधारक है और गैर यू.एस. सत्ता के मामले में कि अनुबंध-1 में स्थापित नियत परिश्रमिक प्रक्रियाओं के अनुप्रयोग के बाद एक अथवा एक से अधिक नियंत्रक व्यक्तियों को रखने के रूप में पहचान की गर्इ है जो कोई विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है, ऐसी सत्ता तथा ऐसे विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति का नाम, पता तथा यू.एस.टिन (यदि कोर्इ हो);

 (2) खाता संख्या (अथवा खाता संख्या की अनुपस्थिति में कार्यशील समतुल्य);

 (3) प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान का नाम तथा पहचानकारी संख्या;

 (4) संगत कैलेंडर वर्ष की समाप्ति अथवा दूसरी समुचित प्रतिवेदन अवधि को खाता शेष अथवा मूल्य (नकद मूल्य बीमा संविदा अथवा वार्षिकी संविदा, नकद मूल्य अथवा अभ्यर्पित मूल्य सहित) यदि खाते को ऐसे वर्ष के दौरान बन्द किया गया था तो बन्द होने के तुरंत पूर्व;

 (5) किसी अभिरक्षक खाते के मामले में:

(क) कैलेंडर वर्ष के दौरान अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान खाते में अदा की गर्इ अथवा क्रेडिट की गर्इ (अथवा खाते के बारे में) प्रत्येक मामले में खाते में धारित परिसंपत्तियों के बारे में सृजित ब्याज की कुल सकल राशि, लाभांश की कुल सकल राशि तथा अन्य आय की कुल सकल राशि; तथा

(ख) कैलेंडर वर्ष अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान खाते में अदा की गर्इ अथवा क्रेडिट की गर्इ संपत्ति की बिक्री अथवा पुन: प्राप्ति से कुल सकल आय जिसके संबंध में प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के ग्राहक, ब्रोकर, नामिति के रूप में अन्यथा खाताधारक के लिए एक एजेंट के रूप में किया गया;

 (6) किसी डिपॉजिटरी खाते के मामले में, कैलेंडर वर्ष अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान खाते में अदा किया गया अथवा क्रेडिट की गयी ब्याज की कुल सकल राशि; तथा

 (7) इस अनुच्छेद के उप पैराग्राफ 2(क)(5) अथवा 2(क)(6) में न उल्लिखित किसी खाते के मामले में कैलेंडर वर्ष अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान खाते के संबंध में खाताधारक को अदा की गर्इ अथवा क्रेडिट की गर्इ कुल सकल राशि, जिसके संबंध में प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान आभारी अथवा ऋणी है जिसमें कैलेंडर वर्ष अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान खाताधारक को किए गए किसी पुन: प्राप्ति भुगतान की समस्त राशि शामिल है।

(ख) संयुक्त राज्य के मामले में प्रत्येक प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान के प्रत्येक प्रतिवेद्य भारतीय खाते के संबंध में:

 (1) किसी व्यक्ति का नाम, पता तथा भारतीय टिन जो भारत का एक निवासी है और खाते का खाताधारक है;

 (2) खाता संख्या (अथवा खाता संख्या की अनुपस्थिति में कार्यशील समतुल्य);

 (3) प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान का नाम तथा पहचानकारी संख्या;

 (4) डिपॉजिटरी खाता पर अदा की गर्इ ब्याज की सकल राशि;

 (5) खाते में अदा किए गए अथवा क्रेडिट किए गए यू.एस. स्रोत लाभांश की सकल राशि; और

 (6) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड के उपशीर्षक ''क'' के अध्याय-3; अथवा उपशीर्षक ''च'' के अध्याय 61 के अंतर्गत प्रतिवेदन के अधीन सीमा तक खाते में अदा की गर्इ अथवा क्रेडिट की गर्इ अन्य यू.एस. आय स्रोत की सकल राशि।

 

अनुच्छेद 3

सूचनाओं के आदान-प्रदान का समय तथा पद्धति

1. इस करार के अनुच्छेद 2 में विनिमय दायित्व के प्रयोजन के लिए यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के बारे में किए गए भुगतान की राशि तथा चरित्र चित्रण भारत के कर कानूनों के सिद्धांतों के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है और भारतीय प्रतिवेद्य खाते के बारे में किए गए भुगतान की राशि तथा चरित्र चित्रण यू.एस. फेडरल आयकर कानून के सिद्धांतों के अनुसार निर्धारित किया जा सकता है।

2. इस करार के अनुच्छेद 2 में विनिमय दायित्व के प्रयोजन के लिए आदान-प्रदान की गर्इ सूचनाएं मुद्रा की पहचान करेगी जिसमें प्रत्येक संगत राशि का नामकरण किया जाएगा।

3. इस करार के अनुच्छेद 2 के पैराग्राफ 2 के संबंध में वर्ष 2014 तक तथा सभी बाद के वर्षों के बारे में सूचनाएं प्राप्त की जानी है तथा आदान-प्रदान की जानी है; सिवाय निम्नलिखित के:

(क) भारत के मामले में:

  (1) वर्ष 2014 के संबंध में प्राप्त की जाने वाली तथा आदान-प्रदान की जाने वाली सूचनाएं केवल इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(क) से लेकर 2(क) तक में उल्लिखित सूचनाएं हैं;

  (2) इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(क) (5) (ख) में उल्लिखित सकल आय के अलावा वर्ष 2015 के बारे में प्राप्त की जाने वाली तथा आदान-प्रदान की जाने वाली सूचनाएं इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(क) (1) से लेकर 2(क)(7) तक में उल्लिखित सूचनाएं हैं; और

  (3) वर्ष 2016 तथा इसके बाद के वर्षों के बारे में प्राप्त की जाने वाली तथा आदान-प्रदान की जाने वाली सूचनाएं इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(क) (1) से लेकर 2(क) (7) तक में उल्लिखित सूचनाएं हैं।

(ख) संयुक्त राज्य के मामले में, वर्ष 2014 तथा बाद के वर्षों में प्राप्त की जाने वाली तथा आदान-प्रदान की जाने वाली सूचनाएं वह सभी सूचनाएं हैं, जिन्हें इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(ख) में पहचाना किया गया है।

4. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 के बावजूद, प्रत्येक प्रतिवेद्य खाते के बारे में जिसे 30 जून, 2014 को प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित किया जाता है और इस करार के अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 4 के अधीन पार्टियों को किसी संगत व्यक्ति का भारतीय टिन या यू.एस. टिन को आदान-प्रदान की गर्इ सूचनाएं प्राप्त करना तथा शामिल करना अपेक्षित नहीं है, जैसा लागू हो, यदि ऐसे करदाता की पहचानकारी संख्या प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान के अभिलेखों में नहीं है। ऐसे मामले में पार्टियां आदान-प्रदान की गर्इ सूचनाओं में संगत व्यक्ति की जन्मतिथि को प्राप्त तथा शामिल करेंगी, यदि प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान के पास अपने अभिलेखों में ऐसी जन्मतिथि है।

5. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 तथा 4 की शर्त के अधीन इस करार के अनुच्छेद 2 में उल्लिखित सूचनाएं उस कैलेंडर वर्ष की समाप्ति के बाद नौ माह के भीतर आदान-प्रदान की जाएंगी जिस वर्ष से सूचनाएं संबंधित हैं।

6. भारत के सक्षम प्राधिकारी तथा संयुक्त राज्य इस अभिसमय के अनुच्छेद 27 में दिए गए परस्पर करार प्रक्रिया के तहत करार अथवा प्रबंधन करेंगे जिसमें:

(क) इस करार के अनुच्छेद 2 में उल्लिखित स्वत: आदान-प्रदान दायित्वों के लिए प्रक्रियाओं को स्थापित करेगा;

(ख) इस करार के अनुच्छेद 5 को क्रियान्वित करने के लिए नियमों तथा प्रक्रियाओं को यथा अपेक्षित निर्धारित करेगा; तथा

(ग) इस करार के अनुच्छेद 4 के उप पैराग्राफ 1(ख) के अंतर्गत रिपोर्ट की गयी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए यथा अपेक्षित प्रक्रियाओं की स्थापना करेगा।

7. आदान-प्रदान की गर्इ सभी सूचनाएं आदान-प्रदान की सूचनाओं के प्रयोग को सीमित करने वाले प्रावधानों सहित अभिसमय के लिए प्रदान की गयी गोपनीयता तथा अन्य संरक्षणों के अधीन होगी।

8. इस करार के लागू होने के बाद, प्रत्येक सक्षम प्राधिकारी दूसरे सक्षम प्राधिकारी को लिखित अधिसूचना प्रदान करेगा जब वह संतुष्ट हो कि दूसरे सक्षम प्राधिकारी का क्षेत्राधिकार इनमें लागू है (i) यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित सुरक्षोपाय कि इस करार के अनुसरण में प्राप्त की गर्इ सूचनाएं गोपनीय रहेंगी और केवल कर प्रयोजनार्थ प्रयोग की जाएंगी; (ii) प्रभावी आदान-प्रदान के संबंध में अवसंरचना विकास (समयबद्ध, सही तथा गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावी एवं विश्वसनीय संप्रेषण तथा प्रदर्शित क्षमताएं सुनिश्चित करने के लिए स्थापित प्रक्रियाओं सहित ताकि आदान-प्रदान तथा आदान-प्रदान के लिए अनुरोध के बारे में प्रश्नों तथा चिंताओं का त्वरित समाधान हो सके और इस करार के अनुच्छेद 5 के उपबंधों को प्रशासित किया जा सके।) सक्षम प्राधिकारी यह स्थापित करने के लिए सितंबर, 2015 से पूर्व सदाशयता से मिलने का प्रयास करेंगे कि प्रत्येक क्षेत्राधिकार के पास ऐसे सुरक्षोपाय तथा अवसरंचना सुविधाएं मौजूद हैं।

9. इस करार के अनुच्छेद 2 के तहत सूचनाएं प्राप्त करने तथा आदान-प्रदान करने के लिए पार्टियों का दायित्व इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 8 में उल्लिखित बाद वाले की लिखित अधिसूचना की तारीख से प्रभाव में आएगा।

10. यह करार 30 सितंबर, 2015 को समाप्त हो जाएगा यदि इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 9 के अनुसरण में इस करार का अनुच्छेद 2 उस तिथि तक प्रभावी नहीं हुआ है।

 

अनुच्छेद 4

भारतीय वित्तीय संस्थानों पर फटका का लागू होना

1. प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थानों के साथ संव्यवहार। प्रत्येक भारतीय वित्तीय संस्थान को यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के तहत अनुपालक के रूप में माना जाएगा और रोकने की शर्त के अधीन नहीं, यदि यह ऐसे प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के बारे में इस करार के अनुच्छेद 2 तथा 3 के अंतर्गत अपने दायित्वों का अनुपालन करता है, तथा प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान:

(क) इस करार के अनुच्छेद 3 में उल्लिखित समय तथा तरीके से इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(क) में रिपोर्ट दिए जाने के लिए हर वर्ष यू.एस. प्रतिवेद्य खातों तथा रिपोर्टों की पहचान करता है और अपेक्षित सूचनाएं भारतीय सक्षम प्राधिकाररियों को देता है;

(ख) वर्ष 2015 तथा 2016 प्रत्येक वर्ष के लिए भारतीय सक्षम प्राधिकारी को ऐसे गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के नाम की तथा ऐसे भुगतानों की समुच्चय राशि की हर वर्ष रिपोर्ट करता है, जिसे ऐसे भुगतान किए हैं;

(ग) आर्इआरएस फटका पंजीकरण वेबसाइट पर लागू पंजीकरण जरूरतों का अनुपालन करता है;

(घ) इस सीमा तक कि कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान: (i) अहर्ताप्राप्त मध्यवर्ती के रूप में कार्य करता है जिसने (यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1441 के प्रयोजनार्थ) यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड के उपशीर्षक के अध्याय 3 के अंतर्गत प्राथमिक रोक की जिम्मेदारी लेने का चयन किया है। (ii) कोर्इ विदेशी भागीदार जिसने रोकने वाले विदेशी भागीदार के रूप में (यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1441 तथा 1471 दोनों के प्रयोजनार्थ) चयन किया अथवा (iii) कोर्इ विदेशी ट्रस्ट जिसने धारक विदेशी ट्रस्ट के रूप में कार्य करने का चयन किया है (यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1441 तथा 1471 दोनों के प्रयोजनार्थ) जो किसी गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के किसी यू.एस. स्रोत रोकने योग्य भुगतान का 30 प्रतिशत रोक कर रखता है; और

(ड.) उस प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान जिसका इस अनुच्छेद के उप पैराग्राफ 1 (घ) में उल्लेख नहीं किया गया है तथा जो किसी गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान को यू.एस. स्रोत रोकने योग्य भुगतान के बारे में मध्यवर्ती के रूप में भुगतान करता है अथवा कार्य करता है, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान किसी तत्काल भुगतान अथवा ऐसे यू.एस. स्रोत रोकने योग्य भुगतान की व्यवस्था करता है तो ऐसे भुगतान के बारे में रोकने अथवा प्रतिवेदन के लिए अपेक्षित सूचनाएं मिलती हैं।

पूर्ववर्ती के होते हुए भी, कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान जिसके बारे में इस पैराग्राफ की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के अंतर्गत जब तक रोकने की शर्त के अधीन नहीं होगी तब तक ऐसे प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को आर्इआरएस द्वारा इस करार के अनुच्छेद 5 के उप पैराग्राफ 2(ख) के अनुसरण में गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में माना जाता है।

2. उद्दण्ड खातों से संबंधित नियमों का निलंबन। संयुक्त राज्य को उद्दण्ड खाताधारक द्वारा धारित खाते के बारे में यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 अथवा 1472 के अंतर्गत कर रोकने (यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 (घ)(6) में यथा परिभाषित) अथवा ऐसे खाते को बंद करने में प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान की जरूरत नहीं होगी, यदि यू.एस. के सक्षम प्राधिकारी ऐसे खाते के बारे में इस करार के अनुच्छेद 3 के उपबंधों की शर्त के अधीन इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2(क) में घोषित सूचनाएं प्राप्त करते हैं।

3. भारतीय सेवानिवृत्ति योजना का विशिष्ट संव्यवहार। संयुक्त राज्य, अनुबंध-II में उल्लिखित भारतीय सेवानिवृत्ति योजना को यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 तथा 1472 के प्रयोजनार्थ मानद अनुपालक एलएफआर्इ अथवा छूट प्राप्त लाभग्राही मालिक, जैसा उपयुक्त हो, के रूप में मानेगा। इस प्रयोजनार्थ, किसी भारतीय सेवनिवृत्ति योजना में भारत में स्थित या स्थापित अथवा भारत द्वारा विनियमित कोर्इ सत्ता अथवा पूर्व निर्धारित संविदात्मक अथवा विधायी प्रबंधन शामिल हैं, जो ऐसे लाभ प्रदान करने के लिए पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने अथवा आय प्राप्त करने के लिए भारत के कानूनों के अंतर्गत संचालित हैं, जो अंशदान, वितरण, प्रतिवेदन प्रायोजन तथा कराधान के संदर्भ में विनियमित होती हैं।

4. अन्य मानद अनुपालक एफएफआर्इ तथा छूट प्राप्त लाभग्राही मालिकों की पहचान तथा संव्यवहार। संयुक्त राज्य यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के प्रयोजनार्थ प्रत्येक गैर-प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को एक मानक अनुपालक एफएफआर्इ के रूप में अथवा छूट प्राप्त लाभग्राही मालिक के रूप में, जैसा भी उपयुक्त हो, मानेगा।

5. संबंधित सत्ताओं तथा शाखाओं के बारे में विशेष नियम जो गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान हैं। यदि भारतीय वित्तीय संस्थान, जो अन्यथा इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 में उल्लिखित जरूरतों को पूरा करता है अथवा इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 3 अथवा 4 में उल्लिखित हैं, के पास कोर्इ सत्ता अथवा शाखा है जो किसी क्षेत्राधिकार में संचालित है जो ऐसी सत्ता अथवा शाखा को भागीदारी एफएफआर्इ अथवा मानद अनुपालक एफएफआर्इ को यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के प्रयोजनार्थ जरूरतों को पूरा करने से रोकती है अथवा जिसके पास संबंधित सत्ता अथवा शाखा है जिसे संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के तहत सीमित एफएफआर्इ अथवा सीमित शाखाओं के लिए केवल परिवर्ती नियम के समाप्त हो जाने के कारण गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में माना जाता है, तो ऐसे भारतीय वित्तीय संस्थान इस करार की शर्तों के साथ अनुपालन में होना जरूरी रखेंगे और उनका मानद अनुपालक एफएफआर्इ अथवा छूट प्राप्त लाभग्राही मालिक होना, जैसा भी उपयुक्त हो, यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के प्रयोजनार्थ जारी रखा जाएगा बशर्ते:

(क) भारतीय वित्तीय संस्थान प्रत्येक ऐसी संबंधित सत्ता अथवा शाखा को एक अलग गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में सभी प्रतिवेदन तथा इस करार की रोक लगाने वाली जरूरतों के प्रयोजनार्थ मानती है और प्रत्येक ऐसी संबंधित सत्ता अथवा शाखा स्वयं की गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में रोक लगाने वाले एजेंट के रूप में पहचान करती है;

(ख) प्रत्येक ऐसी संबंधित सत्ता अथवा शाखा अपने यू.एस. खातों की पहचान करती है और उन खातों के बारे में संबंधित सत्ता अथवा शाखा से संबंधित संगत कानूनों के तहत अनुमत सीमा तक यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के तहत यथा अपेक्षित सूचनाओं की रिपोर्ट देती है; और

(ग) ऐसी संबंधित सत्ता अथवा शाखा उन व्यक्तियों द्वारा धारित यू.एस. खातों की विशेष रूप से मांग नहीं करती है जो उस क्षेत्राधिकार में निवासी नहीं है जहां ऐसी संबंधित सत्ता अथवा शाखा स्थित है अथवा गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थानों द्वारा धारित खाता जो उस क्षेत्र में स्थित है अथवा गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थानों द्वारा धारित खाता जो उस क्षेत्र में स्थित नहीं है जहां ऐसे संबंधित सत्ता अथवा शाखा स्थित हैं और ऐसे संबंधित खाता अथवा शाखा का प्रयोग भारतीय वित्तीय संस्थानों अथवा किसी अन्य संबंधित सत्ता इस करार के तहत अथवा यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के तहत, जैसा भी उपयुक्त हो, दायित्वों को रोकने के लिए प्रयोग नहीं किया गया है।

6. समय का समन्वय। इस करार के अनुच्छेद 3 के पैराग्राफ 3 तथा 5 के होते हुए भी

(क) भारत किसी कैलेंडर वर्ष के बारे में सूचनाएं प्राप्त करने तथा आदान-प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं होगा अर्थात उस कैलेंडर वर्ष से पूर्व जिसके संबंध में इसी प्रकार की सूचनाएं संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के अनुसरण में भागीदारी एफएफआर्इ द्वारा आर्इआरएस को रिपोर्ट दी जानी अपेक्षित होती है।

(ख) भारत उस तिथि से पूर्व सूचनाओं के आदान-प्रदान करने की शुरूआत करने के लिए बाध्य नहीं होगा, जिस तारीख तक संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के तहत आर्इआरएस को इसी प्रकार की सूचनाओं की रिपोर्ट भागीदारी एफएफआर्इ द्वारा दी जानी अपेक्षित होती है।

(ग) संयुक्त राज्य एक कैलेंडर वर्ष के बारे में सूचनाएं प्राप्त करने तथा आदान-प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं होगा, अर्थात् प्रथम कैलेंडर वर्ष से पूर्व जिसके बारे में भारत को सूचनाएं प्राप्त करना तथा आदान-प्रदान करना अपेक्षित है।

(घ) संयुक्त राज्य उस तिथि से पूर्व सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की शुरूआत करने के लिए बाध्य नहीं होगा, जिस तारीख तक भारत को सूचनाओं के आदान-प्रदान करने की शुरूआत करना अपेक्षित है।

7. यू.एस. राजकोष विनियमों के साथ परिभाषाओं का समन्वय। इस करार के अनुच्छेद 1 तथा करार के अनुबंध में दी गर्इ परिभाषाओं के बावजूद, भारत इस करार के क्रियान्वयन में भारतीय वित्तीय संस्थानों को इस करार में तदनुरूपी परिभाषाओं के स्थान पर संगत यू.एस. राजकोष विनियमों की किसी परिभाषा का प्रयोग कर सकता है अथवा प्रयोग करने की अनुमति दे सकता है बशर्ते ऐसा प्रयोग इस करार के प्रयोजन को व्यर्थ नहीं करेगा।

अनुच्छेद 5

अनुपालन तथा प्रवर्तन संबंधी सहयोग

1. लघु तथा प्रशासनिक त्रुटियां। एक सक्षम प्राधिकारी दूसरी पार्टी के सक्षम प्राधिकारी को अधिसूचित करेगा जब प्रथमोल्लिखित सक्षम प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि प्रशासनिक त्रुटियों अथवा अन्य छोटी त्रुटियों ने अनुचित अथवा अधूरी सूचना प्रतिवेदन को बढ़ावा दिया है अथवा इसका परिणाम इस करार के अन्य उल्लंघन के रूप में हुआ है। ऐसी दूसरी पार्टी का सक्षम प्राधिकारी संशोधित तथा/अथवा पूर्ण सूचनाएं प्राप्त करने अथवा इस करार के अन्य उल्लंघन का समाधान करने के लिए अपने घरेलू कानून (लागू अर्थदण्ड सहित) को लागू करेगा।

2. उल्लेखनीय गैर-अनुपालन।

(क) एक सक्षम प्राधिकारी दूसरी पार्टी के सक्षम प्राधिकारी को अधिसूचित करेगा जब प्रथमोलिखित सक्षम प्राधिकारी ने निर्धारित कर लिया हो कि दूसरे क्षेत्राधिकार में प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान के बारे में इस करार के अंतर्गत दायित्वों के साथ उल्लेखनीय अनुपालन नहीं हुआ है। ऐसी दूसरी पार्टी का सक्षम प्राधिकारी नोटिस में उल्लिखित उल्लेखनीय गैर-अनुपालन के समाधान के लिए अपने घरेलू कानून (लागू अर्थदण्ड सहित) लागू करेगा।

(ख) प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के मामले में यदि ऐसी प्रवर्तन कार्रवाई से उल्लेखनीय पहले दी गर्इ गैर-अनुपालन की अधिसूचना के बाद 18 माह की अवधि के भीतर गैर-अनुपालन की समस्या का समाधान नहीं होता, तो संयुक्त राज्य प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को इस उप पैराग्राफ 2 (ख) के अनुसार गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में मानेगा।

3. तृतीय पक्षकार के सेवा प्रदाताओं संबंधी विश्वास। प्रत्येक पार्टी प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान को एक पार्टी द्वारा ऐसे प्रतिवेदक वित्तीय संस्थानों पर लगाए गए दायित्वों को पूरा करने के लिए तृतीय पक्षकार के सेवा प्रदाता का प्रयोग करने की इस करार में यथा अपेक्षित अनुमति दे सकता है, परंतु ये बाध्यताएं प्रतिवेदक वित्तीय संस्थानों का उत्तरदायित्व बनी रहेंगी।

4. परिहार की रोकथाम। सभी पक्ष इस करार के तहत वांछित प्रतिवेदन को वित्तीय संस्थानों द्वारा नाकाम करने की चाहत की प्रथाएं अपनाने से रोकने हेतु यथा अनिवार्य आवश्यकताएं लागू करेंगे।

अनुच्छेद 6

सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं पारदर्शिता की प्रभाविता को बढ़ाना जारी रखने हेतु पारस्परिक प्रतिबद्धता

1. अन्योन्यता। संयुक्त राज्य की सरकार, भारत के साथ पारस्परिक स्वचालित सूचनाओं के आदान-प्रदान का समान स्तर होने की आवश्यकता स्वीकारती है। संयुक्त राज्य की सरकार, पारस्परिक स्वचालित सूचनाओं के आदान-प्रदान के ऐसे समान स्तर की प्राप्ति के लिए संगत कानून का समर्थन एवं हिमायत करते हुए और अधिनियम अपनाने को ध्येय बनाकर भारत के साथ आदान-प्रदान का संबंध बढ़ाने और पारदर्शिता में और अधिक सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

2. स्वीकृत भुगतान एवं सकल आगम के साथ सलूक। सभी पक्ष विदेश स्वीकृत भुगतान तथा सकल आगम रोक जो भार को न्यूनतम बनाती है, के नीतिगत उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए एक व्यावहारिक तथा प्रभावी वैकल्पिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए, भागीदार के कार्यक्षेत्रों सहित, एक साथ कार्य करने को प्रतिबद्ध हैं।

3. सामूहिक प्रतिवेदन एवं आदान-प्रदान मॉडल का विकास। सभी पक्ष, प्रतिवेदन के विकास एवं वित्तीय संस्थाओं के यथोचित अध्यवसाय मानकों सहित, सूचनाओं के स्वचालित आदान-प्रदान के सामूहिक मॉडल पर संयुक्त राज्य तथा भागीदार कार्यक्षेत्रों के बीच अन्य करारों और इस करार के निबंधनों को अपनाने के लिए भागदारी कार्यक्षेत्रों तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के साथ कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

4. दिनांक 30 जून, 2014 को अनुरक्षित खातों का प्रलेखन। दिनांक 30 जून, 2014 को प्रतिवेदक वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित प्रतिवेद्य खातों के संबंध में:

(क) संयुक्त राज्य 01 जनवरी, 2017 तक, वर्ष 2017 तथा आगामी वर्षों के संबंध में सूचनाएं देने के लिए ऐसी नियमावली स्थापित करने को प्रतिबद्ध है, जिसके तहत प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थानों द्वारा इस करार के अनुच्छेद 2 के उप-पैरा 2 (ख) (1) के अनुसरण में यथा वांछित भारतीय प्रतिवेद्य खाते के प्रत्येक लेखाधारक का भारतीय टीआर्इएन प्राप्त कर उसे सूचित करना आवश्यक हो; और

(ख) भारत 01 जनवरी, 2017 तक, वर्ष 2017 तथा आगामी वर्षों के संबंध में सूचनाएं देने के लिए ऐसी नियमावली स्थापित करने को प्रतिबद्ध है, जिसके तहत प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा इस करार के अनुच्छेद 2 के उप पैरा 2(क)(1) के अनुसरण में यथा वांछित प्रत्येक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति का यू.एस. टीआर्इएन प्राप्त करना आवश्यक हो।

अनुच्छेद 7

प्रतिभागी क्षेत्राधिकारों के साथ एफएटीसीए के इस्तेमाल में सामंजस्य

1. भारतीय वित्तीय संस्थानों के साथ एफएटीसीए के इस्तेमाल के संबंध में इस करार के अनुबंध-I अथवा अनुच्छेद-4 के तहत हस्ताक्षरित द्विपक्षीय करार के अंतर्गत अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र को प्रदत्त किन्हीं और अनुकूल निबंधन का लाभ भारत को दिया जाएगा, जिसके अनुसरण में अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र उन्हीं दायित्वों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनका भारत ने इस करार के अनुच्छेद 2 तथा 3 में वर्णन किया है तथा ये उन्हीं निबंधन एवं शर्तों के अधीन होंगी, जो उनमें तथा इस करार के अनुच्छेद 5 से लेकर 9 तक में उल्लिखित हैं।

2. संयुक्त राज्य, भारत को ऐसी ही किन्हीं और अनुकूल निबंधनों के बारे में अधिसूचित करेगा और इस करार के तहत ऐसी और अनुकूल निबंधनें स्वत: लागू होंगी मानो ऐसे निबंधन इस करार में वर्णित हों तथा अनुकूल निबंधन जोड़ने वाले करार के हस्ताक्षर की तिथि को ही प्रभावी हुए हों, जब तक कि भारत लिखित रूप् से उसे लागू करने से मना न कर दे।

 

अनुच्छेद 8

परामर्श एवं संशोधन

1. इस करार को लागू करने में यदि कोर्इ कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं तो इस करार की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपाय विकसित करने के लिए कोर्इ भी पक्ष परामर्श का अनुरोध कर सकता है।

2. इस करार को सभी पक्षों के लिखित पारस्परिक समझौते के द्वारा संशोधित किया जा सकता है। जब तक अन्यथा सहमति न हुर्इ हो, ऐसा संशोधन उसी प्रक्रिया के माध्यम से लागू होगा जो इस करार के अनुच्छेद 10 के पैरा 1 में निर्धारित है।

अनुच्छेद 9

अनुबंध

ये अनुबंध इस करार के अभिन्न अंग हैं।

अनुच्छेद 10

करार की समय सीमा

1. यह करार भारत द्वारा संयुक्त राज्य को यह लिखित अधिसूचना देने की तिथि से लागू होगा कि भारत ने इस करार को लागू करने के लिए अपनी आवश्यक आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।

2. कोर्इ भी पक्ष दूसरे पक्ष को समाप्त करने की लिखित नोटिस देकर इस करार को समाप्त कर सकता है। ऐसी समाप्ति, समाप्त करने की नोटिस की तिथि के 12 महीने की अवधि पूरी होने के बाद, अगले माह के प्रथम दिन से प्रभावी होगी।

3. 31 दिसंबर, 2016 से पूर्व दोनों पक्ष इस करार के अनुच्छेद 6 में की गर्इ प्रतिबद्धताओं पर प्रगति दर्शाने के लिए इस करार को आवश्यकतानुसार संशोधित करने हेतु सदाशयता से विचार-विमर्श करेंगे।

जिसके साक्ष्य में, अपनी संबंधित सरकारों द्वारा इसके लिए विधिवत रूप से प्राधिकृत होकर, अधोहस्ताक्षरी ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

भारत गणराज्य की सरकार के वित्त मंत्रालय, नॉर्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, भारत में, जुलार्इ 2015 के 9वें दिन, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषाओं में दो-दो प्रतियों में निष्पन्न किया गया, दोनों पाठ समान रूप से प्रामाणिक हैं। दोनों पाठों में भिन्नता की स्थिति में, अंग्रेजी पाठ प्रभावी माना जाएगा।

भारत गणराज्य की सरकार के लिए: संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के लिए:
शक्तिकान्त दास रिचर्ड आर. वर्मा
राजस्व सचिव राजदूत

 

अनुबंध-I

यू.एस. प्रतिवेद्य खातों की पहचान एवं प्रतिवेदन तथा कुछ गैर-भागीदार वित्तीय संस्थाओं के लिए भुगतान पर यथोचित अध्यवसाय दायित्व

1. सामान्य।

 क. यू.एस. प्रतिवेद्य खातों तथा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थाओं द्वारा धारित खातों की पहचान हेतु भारत मांग करेगा कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थाएं इस अनुबंध-I में उल्लिखित समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं अपनाएं।

 ख. इस करार के प्रयोजनों से,

  1. सभी डॉलर राशियां, यू.एस. डॉलर हैं तथा अन्य मुद्राओं में इसके समकक्ष समावेश पाठ्य होगा।

  2. यहां अन्यथा दिए हुए को छोड़कर, बकाया अथवा किसी खाते का मूल्य कैलेंडर वर्ष के अंतिम दिन अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि को निर्धारित की जाएगी।

  3. जहां इस अनुबंध-I के अंतर्गत बकाया अथवा मूल्य दहलीज 30 जून, 2014 को निर्धारित की जानी है, संगत बकाया अथवा मूल्य उसी दिन अथवा 30 जून, 2014 से तुरंत पहले समाप्त होने वाली प्रतिवेदन अवधि के अंतिम दिन निर्धारित की जाएगी और जहां बकाया अथवा मूल्य दहलीज इस अनुबंध-I के अंतर्गत कैलेंडर वर्ष के अंतिम दिन निर्धारित की जानी है, संगत बकाया अथवा मूल्य कैलेंडर वर्ष के अंतिम दिन अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि निर्धारित की जाएगी।

  4. इस अनुबंध-I की धारा-II के उप पैरा र्इ(1) के अधीन, खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना जाएगा जो इस अनुबंध-I में समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाओं के अनुसरण में ऐसी पहचान किए जाने वाली तारीख को प्रारंभ हो रहा हो।

  5. जब तक कि अन्यथा न दिया गया हो, यू.एस. प्रतिवेद्य खाते संबंधी सूचना प्रत्येक वर्ष, जिस वर्ष से यह सूचना संबंधित है उसके अगले कैलेंडर वर्ष में, सूचित की जाएगी।

II. पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाते। व्यक्तियों द्वारा धारित पूर्ववर्ती खातों (''पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाते'') में से यू.एस. प्रतिवेद्य खातों की पहचान के उद्देश्य से निम्नलिखित नियम एवं प्रक्रियाएं लागू होगी।

 क. खाते जिनके बारे में समीक्षा, पहचान अथवा रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं है। जब तक कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान अन्यथा न चुने, या तो सभी पूर्ववर्ती वैयक्तिक खातों के संबंध में या अलग से, ऐसे खातों के स्पष्टत: पहचाने गए किसी समूह के संबंध में, जहां भारत में कार्यान्वयन नियमों में ऐसे चुनाव का प्रावधान हो, निम्नलिखित पूर्ववर्ती वैयक्तिक खातों की समीक्षा, पहचान अथवा यू.एस. प्रतिवेद्य खातों के सूचित किए जाने की आवश्यकता नहीं है:

   1. इस धारा के उप-पैरा र्इ(2) के अधीन कोर्इ पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता जिसमें 30 जून, 2014 को बकाया अथवा मूल्य 50,000 डॉलर से अधिक न हो।

   2. इस धारा के उप-पैरा र्इ(2) के अधीन कोर्इ पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता जोकि कोर्इ रोकड़ मूल्य बीमा अनुबंध है अथवा 30 जून, 2014 को 250,000 डॉलर या इससे कम मूल्य अथवा बकाया वाला वार्षिकी अनुबंध है।

   3. कोर्इ पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता जो कि रोकड़ मूल्य बीमा अनुबंध अथवा वार्षिकी अनुबंध है, बशर्ते कि भारत अथवा संयुक्त राज्य के कानून अथवा नियम ऐसे रोकड़ मूल्य बीमा अनुबंध या वार्षिकी अनुबंध की यू.एस. निवासियों को बिक्री पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगाते हों (अर्थात् यदि संगत वित्तीय संस्थान यू.एस. कानून के अंतर्गत यथा वांछित पंजीकृत नहीं है तथा भारतीय कानून के अनुसार भारत के निवासियों द्वारा धारित बीमा उत्पादों के संबंध में प्रतिवेदन अथवा रोक आवश्यक है)।

   4. 50,000 डॉलर अथवा इससे कम बकाया वाला डिपॉजिटरी खाता

 ख. दिनांक 30 जून, 2014 को 50,000 डॉलर से अधिक (रोकड़ मूल्य बीमा अनुबंध अथवा वार्षिकी अनुबंध के लिए 250,000 डॉलर) लेकिन 1,000,000 डॉलर से कम (''कम मूल्य खाते'') मूल्य अथवा बकाया वाले पूर्ववर्ती वैयक्तिक खातों के लिए समीक्षा प्रक्रियाएं।

  1. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सर्च। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को निम्नलिखित यू.एस. इंडीसिया में से किसी के लिए प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक रूप से खोज्य डेटा की समीक्षा करनी चाहिए।

(क) खाता धारक की यू.एस. नागरिक अथवा निवासी के रूप में पहचान;

(ख) यू.एस. जन्म स्थान का असंदिग्ध संकेत;

(ग) वर्तमान यू.एस. डाक अथवा निवास पता (यू.एस. पोस्ट ऑफिस बॉक्स सहित);

(घ) वर्तमान यू.एस. दूरभाष संख्या;

(ड) संयुक्त राज्य में अनुरक्षित खाते में निधि स्थानांतरित करने के लिए स्थार्इ अनुदेश;

(च) यू.एस पते वाले किसी व्यक्ति को दिया गया फिलहाल प्रभावी मुख्तारनामा अथवा हस्ताक्षरी प्राधिकार; अथवा

(छ) ''की देख-रेख में'' अथवा ''डाक पकड़ें'' पता जो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के पास मिसिल में खाता धारक का एक मात्र पता है। पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता जो कि कम मूल्य खाता है, के मामले में संयुक्त राज्य से बाहर ''की देख-रेख में'' पता अथवा ''डाक पकड़ें'' पता यू.एस. इंडीसिया नहीं समझा जाएगा।

   2. यदि इस धारा के उप-पैरा ख(1) में सूचीबद्ध यू.एस. इंडीसिया में से किसी का भी इलेक्ट्रॉनिक खोज में पता नहीं लगता है तो किसी आगामी कार्यवाही की जरूरत नहीं है जब तक कि परिस्थितियों में परिवर्तन न हो जिसके फलस्वरूप एक या अधिक यू.एस. इंडीसिया खातों से जुड़े हों, अथवा खाता इस धारा के पैरा घ में उल्लिखित उच्च मूल्य खाता न बन जाता हो।

   3. यदि इस धारा के उप-पैरा ख (1) में सूचीबद्ध यू.एस. इंडीसिया में से किसी का भी इलेक्ट्रॉनिक खोज में पता चला जाता है, अथवा यदि परिस्थितियों में कोर्इ परिवर्तन है जिसके परिणामस्वरूप एक अथवा अधिक यू.एस. इंडीसिया खाते से जुड़ जाते हैं, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को उस खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता समझना चाहिए जब तक कि यह इस धारा के उप पैरा ख (4) को लागू करना न चुने और ऐसे उप पैरा में अपवादों में से एक उस खाते के संबंध में लागू न होता हो।

   4. इस धारा के उप पैरा ख (1) के अंतर्गत यू.एस. इंडीसिया के किसी जांच-परिणाम के होते हुए भी प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता समझा जाना जरूरी नहीं है यदि:

(क) जहां खाता धारक सूचना में स्पष्टत: यू.एस. जन्म स्थान दर्शाया गया है, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान इनकी निम्नलिखित प्राप्त करता है, अथवा इसने पहले ही इनकी समीक्षा कर ली है तथा इनके अभिलेख रखता है:

 (1) एक स्व-प्रमाणन कि कर उद्देश्यों के लिए खाता धारक न तो यू.एस. नागरिक है और न ही यू.एस. निवासी है (जो आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 अथवा अन्य सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है);

 (2) गैर-यू.एस. पासपोर्ट अथवा सरकार द्वारा जारी अन्य पहचान जो खाता धारक की संयुक्त राज्य के अलावा किसी अन्य देश की राष्ट्रीयता अथवा नागरिकता का साक्ष्य दे; और

 (3) खाता धारक के संयुक्त राज्य की राष्ट्रीयता खोने संबंधी प्रमाण-पत्र की एक प्रति अथवा निम्नलिखित का यथोचित स्पष्टीकरण:

(क) खाता धारक के पास यू.एस. की नागरिकता त्यागने के बाद भी ऐसा प्रमाण-पत्र न होने का कारण; अथवा

(ख) खाता धारक द्वारा जन्म के समय यू.एस. की नागरिकता न लेने का कारण

(ख) जहां खाता धारक सूचना में यू.एस. में डाक अथवा निवास का वर्तमान पता हो, अथवा एक या अधिक यू.एस. की दूरभाष संख्या हों जो खातों से संबंधित एकमात्र टेलीफोन संख्या हों, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान निम्नलिखित प्राप्त करता है, अथवा इसने पहले ही इनकी समीक्षा कर ली है तथा इनके अभिलेख रखता है:

 (1) एक स्व-प्रमाणन कि कर उद्देश्यों के लिए खाता धारक न तो यू.एस. नागरिक है और न ही यू.एस. निवासी है (जो आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 अथवा अन्य सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है); और

 (2) इस अनुबंध-I की धारा-VI के पैरा घ में वर्णित दस्तावेजी साक्ष्य जो लेखा धारक की गैर-यू.एस. स्थिति को स्थापित करता है।

(ग) जहां खाता धारक सूचना में संयुक्त राज्य में अनुरक्षित खाते में निधि स्थानांतरित करने के लिए स्थार्इ अनुदेश दिए गए हों, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान निम्नलिखित प्राप्त करता है, अथवा इसने पहले ही इनकी समीक्षा कर ली है तथा इनके अभिलेख रखता है:

 (1) एक स्व-प्रमाणन कि कर उद्देश्यों के लिए खाता धारक न तो यू.एस. नागरिक है और न ही यू.एस. निवासी है (जो आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 अथवा अन्य सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है); और

 (2) इस अनुबंध-I की धारा-VI के पैरा घ में वर्णित दस्तावेजी साक्ष्य जो लेखा धारक की गैर-यू.एस. स्थिति को स्थापित करता है।

(घ) जहां खाता धारक सूचना में यू.एस. पते वाले किसी व्यक्ति को दिया गया फिलहाल प्रभावी मुख्तारनामा अथवा हस्ताक्षरी प्राधिकार दिया गया हो, ''की देख-रेख में'' पता अथवा ''डाक पकड़ें'' पता हो जो खाता धारक का एकमात्र ज्ञात पता है, अथवा यू.एस. की एक अथवा अधिक दूरभाष संख्या हो (यदि गैर-यू.एस. दूरभाष संख्या भी खाते से संबंधित हो), प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान निम्नलिखित प्राप्त करता है, अथवा इसने पहले ही इनकी समीक्षा कर ली है अथवा इनके अभिलेख रखता है:

 (1) एक स्व-प्रमाणन कि कर उद्देश्यों के लिए खाता धारक न तो यू.एस. नागरिक है और न ही यू.एस. निवासी है (जो आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 अथवा अन्य सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है); और

 (2) इस अनुबंध-I की धारा-VI के पैरा घ में वर्णित दस्तावेजी साक्ष्य जो लेखा धारक की गैर-यू.एस. स्थिति को स्थापित करता है।

 ग. पूर्ववर्ती वैयक्तिक खातों, जो कम मूल्य खाते हैं, पर लागू अतिरिक्त प्रक्रियाएं।

   1. यू.एस. इंडीसिया के पूर्ववर्ती वैयक्तिक खातों, जो कम मूल्य खाते हैं, की समीक्षा 30 जून, 2016 तक पूरी कर ली जानी चाहिए।

   2. यदि पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता, जो एक कम मूल्य खाता है, से संबंधित परिस्थितियों में परिवर्तन है जिसके फलस्वरूप इस धारा के उप पैरा ख (1) में उल्लिखित एक अथवा अधिक यू.एस. इंडीसिया खाते से जुड़ जाते हैं तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को उस खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता समझना चाहिए जब तक कि इस धारा का उप पैरा ख (4) लागू नहीं होता।

   3. इस धारा के उप पैरा क(4) में उल्लिखित डिपॉजिटरी खातों के अलावा, कोर्इ भी पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता जो इस धारा के अंतर्गत एक यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के रूप में ज्ञात हो, सभी आगामी वर्षों में यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के तौर पर समझा जाएगा जब तक कि खाता धारक एक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति बने रहना बंद न हो जाए।

  घ. 30 जून, 2014 अथवा 31 दिसम्बर, 2015 अथवा किसी आगामी वर्ष में 1,000,000 डॉलर से अधिक बकाया अथवा मूल्य वाले पूर्ववर्ती वैयक्तिक खातों की वर्धित समीक्षा प्रक्रियाएं (''उच्च मूल्य खाते'')।

  1. इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सर्च। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा इस धारा के उप पैरा ख (1) में उल्लिखित किसी भी यू.एस. इंडीसिया के प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक ढंग से खोज्य डेटा की समीक्षा की जानी चाहिए।

  2. कागजी अभिलेख खोज। यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक खोज्य डेटा बेस में इस धारा के उप पैरा घ (3) में उल्लिखित सूचनाओं के फील्ड शामिल हों तथा उन सभी को कैप्चर करता हो, तो इसके आगे किसी कागजी अभिलेख सर्च की जरूरत नहीं है। यदि इलेक्ट्रॉनिक डेटा बेस ये सभी सूचनाएं कैप्चर नहीं करते, तो उच्च मूल्य खातों के संबंध में प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को चालू मास्टर फाइल तथा चालू मास्टर फाइल में अनुपलब्ध निम्नलिखित दस्तावेजों, जो खाते से संबंधित हों तथा इस धारा के उप पैरा ख (1) में उल्लिखित किसी भी यू.एस.इंडीसिया के लिए विगत पांच वर्षों में प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा प्राप्त हों, की भी समीक्षा करनी चाहिए:

(क) खाते संबंधी संग्रहित अत्यन्त हाल का दस्तावेजी साक्ष्य;

(ख) अत्यन्त हाल का खाता खोलने संबंधी अनुबंध प्रलेखन;

(ग) प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाओं के मुताबिक अथवा अन्य विनियामक प्रयोजनों हेतु प्राप्त अत्यंत हाल के प्रलेखन;

(घ) फिलहाल प्रभावी कोर्इ मुख्तारनामा अथवा हस्ताक्षरी प्राधिकार के फॉर्म; और

(ड) फिलहाल प्रभावी निधियों के स्थानांतरण हेतु कोर्इ स्थार्इ अनुदेश।

   3. सिवाय उसके जहां डेटाबेस में पर्याप्त सूचनाएं उपलब्ध हैं। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को इस धारा के उप पैरा घ (2) में उल्लिखित कागजी अभिलेख सर्च का कार्य करने की आवश्यकता नहीं है यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान की इलेक्ट्रॉनिक रूप से खोज्य सूचनाओं में निम्नलिखित शामिल हों:

(क) खाता धारक की राष्ट्रीयता अथवा निवास की स्थिति;

(ख) प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान की फाइलों में फिलहाल खाता धारक के निवास का पता तथा डाक पता

(ग) प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान की फाइल में फिलहाल खाता धारक की टेलीफोन संख्या (एं), यदि कोर्इ हो;

(घ) क्या खाते से अन्य खाते में निधियां स्थानांतरित करने के स्थार्इ अनुदेश हैं (प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान की अन्य शाखा अथवा अन्य वित्तीय संस्थान के खाते सहित);

(ड.) क्या खाता धारक का वर्तमान में ''की देख-रेख में'' पता अथवा ''डाक पकड़ें'' पता है; और

(च) क्या खाते के लिए कोर्इ मुख्तारनामा अथवा हस्ताक्षरी प्राधिकार है।

   4. वास्तविक जानकारी हेतु संपर्क प्रबंधक पूछताछ। ऊपर उल्लिखित इलेक्ट्रॉनिक एवं कागजी अभिलेख खोजों के अलावा प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा संपर्क प्रबंधक को नियत किसी उच्च मूल्य खाते (ऐसे उच्च मूल्य खाते के साथ समुचित किन्हीं वित्तीय खातों सहित) को यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के तौर पर माना जाना चाहिए यदि संपर्क प्रबंधक को वास्तविक जानकारी है कि खाता धारक एक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है।

   5. यू.एस. इंडीसिया खोज का प्रभाव।

(क) यदि इस धारा के उप पैरा ख(1) में सूचीबद्ध यू.एस. इंडीसिया में से कोर्इ भी ऊपर उल्लिखित उच्च मूल्य खातों की वर्धित समीक्षा में नहीं मिलते हैं, तथा खाता इस धारा के उप पैरा घ(4) में विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति द्वारा धारित नहीं पाया जाता है, तो किसी अग्रिम कार्रवार्इ की आवश्यकता नहीं है जब तक कि परिस्थितियों में परिवर्तन न हो जिसके फलस्वरूप एक अथवा अधिक यू.एस. इंडीसिया खाते से जुड़ जाते हों।

(ख) यदि इस धारा के उप पैरा ख(1) में सूचीबद्ध यू.एस. इंडीसिया में से किसी का भी ऊपर उल्लिखित उच्च मूल्य खातों की वर्धित समीक्षा में पता चल जाता है, अथवा यदि परिस्थितियों में उत्तरगामी परिवर्तन है जिसके परिणामस्वरूप एक अथवा अधिक यू.एस. इंडीसिया खाते से जुड़ जाते हैं, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को उस खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता समझना चाहिए जब तक कि यह इस धारा के उप पैरा ख(4) को लागू करना न चुनें और ऐसे उप पैरा में अपवादों में से एक उस खाते के संबंध में लागू न होता हो।

(ग) इस धारा के उप पैरा क(4) में उल्लिखित डिपॉजिटरी खातों के अलावा, कोर्इ भी पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता जो इस धारा के अंतर्गत एक यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के रूप में ज्ञात हो, सभी आगामी वर्षों में यू.एस़ प्रतिवेद्य खाते के तौर पर समझा जाएगा जब तक कि खाता धारक का एक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति बने रहना बंद न हो जाए।

  ड. उच्च मूल्य खातों पर लागू अतिरिक्त प्रक्रियाएं।

  1. यदि पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता दिनांक 30 जून, 2014 को उच्च मूल्य खाता है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा ऐसे खाते के संबंध में इस धारा के पैरा घ में उल्लिखित वर्धित समीक्षा प्रक्रियाएं 30 जून, 2015 तक पूरी की जानी चाहिए। यदि इस समीक्षा के आधार पर ऐसे खाते की 31 दिसंबर, 2014 तक यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के रूप में पहचान की गर्इ है तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान ऐसे खाते के बारे में 2014 के संबंध में वांछित सूचनाएं पहली लेखा रिपोर्ट में तथा उसके बाद वार्षिक आधार पर देगा। यदि ऐसे खाते की 31 दिसंबर, 2014 के बाद और 30 जून, 2015 को या उससे पहले यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के रूप में पहचान की गर्इ है तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को ऐसे खाते के बारे में 2014 के संबंध में सूचनाओं की रिपोर्ट देने की जरूरत नहीं है, लेकिन खाते के बारे में उसके बाद वार्षिक आधार पर सूचनाओं की रिपोर्ट जरूर देगा।

   2. यदि पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाता दिनांक 30 जून, 2014 को उच्च मूल्य खाता नहीं है परंतु वर्ष 2015 के अंतिम दिन अथवा आगामी कैलेंडर वर्ष में उच्च मूल्य खाता बन जाता है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा ऐसे खाते के संबंध में इस धारा के पैरा घ में उल्लिखित वर्धित समीक्षा प्रक्रियाएं उस कैलेंडर वर्ष, जिसमें खाता उच्च मूल्य खाता बनता है, के अंतिम दिन के बाद छ: माह के भीतर पूरी की जानी चाहिए। यदि इस समीक्षा के अधार पर ऐसे खाते की यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के रूप में पहचान की गर्इ है तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को उस वर्ष के संबंध में जिसमें इसे यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना गया है एवं आगामी वर्षों के लिए वार्षिक आधार पर, ऐसे खाते से संबंधित वांछित सूचनाएं सूचित करनी चाहिए जब तक कि खाता धारक का विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति बने रहना बंद नहीं हो जाता।

  3. जब प्रतिवेदक, भारतीय वित्तीय संस्थान इस धारा के पैरा घ में उल्लिखित वर्धित समीक्षा प्रक्रियाओं को उच्च मूल्य खाते पर लागू करता है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा, इस धारा के उप पैरा घ(4) में उल्लिखित संपर्क प्रबंधक पूछताछ को छोड़कर, किसी भी आगामी वर्ष में सदृश उच्च मूल्य खाते के लिए ऐसी प्रक्रियाओं को पुन: लागू करने की आवश्यकता नहीं है।

   4. यदि उच्च मूल्य खाते से संबंधित परिस्थितियों में बदलाव है जिसके फलस्वरूप इस धारा के उप पैरा ख (1) में उल्लिखित एक अथवा अधिक यू.एस इंडीसिया खाते से जुड़ जाते हैं, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा उस खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता समझा जाना चाहिए जब तक कि यह इस धारा के उप पैरा ख(4) को लागू करना न चुनें और ऐसे उप पैरा के अपवादों में से एक उस खाते के संबंध में लागू न होता हो।

  5. प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कि संपर्क प्रबंधक खाते की परिस्थितियों में किसी परिवर्तन को पहचान सके, प्रक्रियाओं को लागू करना चाहिए। उदाहरणार्थ, यदि संपर्क प्रबंधक अधिसूचित है कि संयुक्त राज्य में खाता धारक का नया डाक पता है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा नए पते को परिस्थितियों में परिवर्तन के रूप में मानना होगा और यदि वह इस धारा के उप पैरा ख(4) को लागू करना चुनता है, तो उसे खाता धारक से समुचित प्रलेखन प्राप्त करना जरूरी है।

  च. पूर्ववर्ती वैयक्तिक खाते जिनका कुछ अन्य प्रयोजनों हेतु प्रलेखन किया गया है। कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान जिसने अर्हता प्राप्त मध्यस्थ के अधीन अपने दायित्वों की पूर्ति हेतु खाता धारक से खाता धारक की न तो यू.एस. नागरिक और न ही यू.एस. निवासी के तौर पर स्थिति स्थापित करने संबंधी प्रलेख पहले ही प्राप्त कर लिए हैं, तो रोकने वाली विदेशी भागीदारी, अथवा आर्इआरएस के साथ रोकने वाले विदेशी न्यास समझौते, अथवा युनाइटेड स्टेट्स कोड की टाइटल 26 के अध्याय 61 के अंतर्गत अपने दायित्वों को पूर्ति हेतु, उसे कम मूल्य खातों से संबंधित इस धारा के उप पैरा ख(1) अथवा उच्च मूल्य खातों के संबंध में इस धारा के उप पैरा घ(1) से घ(3) में वर्णित प्रक्रियाओं को पूरा करने की आवश्यकता नहीं है।

III. नए वैयक्तिक खाते। व्यक्तियों द्वारा धारित तथा 01 जुलार्इ, 2014 को अथवा इसके बाद खोले गए वित्तीय खातों में यू.एस. प्रतिवेद्य खातों की पहचान के उद्देश्य से निम्नलिखित नियम तथा प्रक्रियाएं लागू होते हैं (''नए वैयक्तिक खाते'')।

 क. खाते जिनके बारे में समीक्षा, पहचान अथवा रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं है। जब तक कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान, या तो नए वैयक्तिक खातों के संबंध में अथवा, पृथकत: ऐसे खातों के स्पष्टत: पहचाने गए किसी समूह के संबंध में जहां भारतीय कार्यान्वयन नियमों में ऐसे चुनाव का प्रावधान है, अन्यथा न चुने, निम्नलिखित नए वैयक्तिक खातों की यू.एस. प्रतिवेद्य खातों के तौर पर समीक्षा, पहचान अथवा रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं है:

  1. डिपॉजिटरी खाता जब तक कि कैलेंडर वर्ष के अंत में अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि में खाता बकाया 50,000 डॉलर से अधिक नहीं हो जाता।

  2. रोकड़ मूल्य बीमा अनुबंध जब तक कि कलैंडर वर्ष के अंत में अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि में रोकड़ मूल्य 50,000 डॉलर से अधिक नहीं हो जाता।

 ख. अन्य नए वैयक्तिक खाते। इस धारा के पैराग्राफ क में उल्लिखित न किए गए वैयक्तिक खातों के संबंध में, खाता खोलने पर (अथवा उस कैलेंडर वर्ष की समाप्ति के बाद, जिसमें खाता का इस धारा के पैरा क में वर्णन बंद हो गया हो, 90 दिनों के भीतर), प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा स्व-प्रमाणन लिया जाना चाहिए जो कि खाता खोलने संबंधी दस्तावेजों का हिस्सा हो सकता है जिससे प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को निर्धारित करने की स्वीकृति मिलती है कि खाता धारक कर उद्देश्यों के लिए संयुक्त राज्य का निवासी है या नहीं (इस उद्देश्य हेतु किसी यू.एस. नागरिक को कर उद्देश्यों के लिए संयुक्त राज्य का निवासी माना जाता है, चाहे खाता धारक अन्य कार्यक्षेत्र का कर निवासी भी हो) तथा खाता खोलने के संबंध में एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाओं के मुताबिक संग्रहित किसी प्रलेख सहित प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ऐसे स्व-प्रमाणन की युक्तियुक्तता की पुष्टि होती है।

   1. यदि स्व-प्रमाणन से यह स्थापित होता है कि खाता धारक कर उद्देश्यों के लिए संयुक्त राज्य का निवासी है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के तौर पर समझा जाना चाहिए एवं स्व-प्रमाणन प्राप्त करना चाहिए जिसमें खाता धारक का यू.एस. टीआर्इएन शामिल हो (जो कि आर्इआरएस फार्म डब्ल्यू-9 अथवा अन्य सदृश सहमत फॉर्म हो सकता है)।

  2. यदि नए वैयक्तिक खाते संबंधी परिस्थितियों में परिवर्तन है, जिसके कारण प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को पता चलता है, अथवा पता करने का कोर्इ कारण है, कि मूल स्व-प्रमाणन गलत अथवा अविश्वसनीय है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान मूल स्व-प्रमाणन पर निर्भर नहीं रह सकता और उसे एक वैध स्व-प्रमाणन लेना चाहिए जो यह स्थापित करे कि खाता धारक एक यू.एस नागरिक अथवा यू.एस. कर उद्देश्यों के लिए एक निवासी है। यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान एक वैध स्व-प्रमाणन पाने में असमर्थ है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के तौर पर मानना चाहिए।

IV. पूर्ववर्ती सत्ता खाते। सत्ताओं द्वारा धारित पूर्ववर्ती खातों (''पूर्ववर्ती सत्ता खाते'') में से यू.एस. प्रतिवेद्य खाते तथा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थानों द्वारा धारित खातों की पहचान के उद्देश्य हेतु निम्नलिखित नियम एवं प्रक्रियाएं लागू होती हैं।

 क. सत्ता खाते जिनकी समीक्षा, पहचान अथवा प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है। जब तक कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान या तो सभी पूर्ववर्ती सत्ता खातों के संबंध में या, पृथक्त: ऐसे खातों के स्पष्टत: पहचाने गए किसी समूह के संबंध में जहां भारतीय कार्यान्वयन नियमों में ऐसे चुनाव का प्रावधान है, अन्यथा न चुनें, कोर्इ पूर्ववर्ती सत्ता खाता जिसका खाता बकाया अथवा मूल्य 30 जून, 2014 को 250,000 डॉलर से अधिक नहीं है उसकी समीक्षा, पहचान अथवा यू.एस. प्रतिवेद्य खाते के रूप में प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है जब तक कि खाता बकाया अथवा मूल्य 1,000,000 डॉलर से अधिक नहीं होती।

 ख. समीक्षाधीन सत्ता खाते। कोर्इ पूर्ववर्ती सत्ता खाता जिसका खाता बकाया अथवा मूल्य 30 जून, 2014 को 250,000 डॉलर से अधिक है एवं एक पूर्ववर्ती सत्ता खाता जो 30 जून, 2014 को 250,000 डॉलर से अधिक नहीं है परंतु जिसका खाता बकाया अथवा मूल्य वर्ष 2015 के अंतिम दिन अथवा किसी आगामी कलैंडर वर्ष को 1,000,000 डॉलर से अधिक है, इसकी उस धारा के पैरा घ में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार समीक्षा की जानी चाहिए।

 ग. सत्ता खाते जिनके संबंध में प्रतिवेदन आवश्यक है। इस धारा के पैरा ख में उल्लिखित पूर्ववर्ती सत्ता खातों के संबंध में, केवल उन खातों को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना जाएगा जो एक अथवा अधिक सत्ताओं द्वारा धारित हों जोकि विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है, अथवा निष्क्रिय एनएफएफर्इ द्वारा धारित हो जिसके एक या अधिक नियंत्रक व्यक्ति हों जो यू.एस. नागरिक अथवा निवासी हों। इसके अतिरिक्त गैर-भागीदार वित्तीय संस्थानों के द्वारा धारित खातों को वह खाता माना जाएगा जिनके लिए इस करार के अनुच्छेद 4 के उप पैरा 1(ख) में उल्लेख किए अनुसार कुल भुगतान भारतीय सक्षम प्राधिकारी को सूचित किया जाता है।

 घ. ऐसे सत्ता खातों को पहचानने के लिए समीक्षा प्रक्रियाएं जिनके संबंध में प्रतिवेदन आवश्यक है। इस धारा के पैरा ख में उल्लिखित पूर्ववर्ती सत्ता खातों के लिए प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा यह निर्धारित करने के लिए कि खाता एक या अधिक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्तियों द्वारा अथवा निष्क्रिय एनएफएफर्इ जिनके एक या अधिक नियंत्रक व्यक्ति हों जो यू.एस. नागरिक या निवासी हों, अथवा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थानों द्वारा धारित हैं, निम्नलिखित समीक्षा प्रक्रियाएं लागू की जानी चाहिए:

   1. निर्धारित करें कि क्या सत्ता कोर्इ विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है।

(क) नियामक अथवा ग्राहक संपर्क उद्देश्यों (एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाओं के मुताबिक संग्रहित सूचनाओं सहित) के लिए अनुरक्षित सूचनाओं की, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या ये सूचनाएं इंगित करती हैं कि खाता धारक एक यू.एस. व्यक्ति है, समीक्षा करें। इस प्रयोजनार्थ, यह इंगित करने वाली कि खाता धारक एक यू.एस. व्यक्ति है, सूचनाओं में संस्थापन या संगठन का यू.एस. स्थल अथवा यू.एस. का पता शामिल होता है।

(ख) यदि सूचनाएं इंगित करती हैं कि खाता धारक कोर्इ यू.एस. व्यक्ति है, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना जाना चाहिए जब तक वह खाता धारक से स्व-प्रमाणन प्राप्त नहीं कर लेता (जो कि आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 या डब्ल्यू-9 अथवा सदृश सम्मत फार्म में हो सकता है), अथवा उसके पास या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर यथोचित रूप में निर्धारित करें कि खाता धारक कोर्इ विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति नहीं है।

   2. यह निर्धारित करें कि क्या कोर्इ गैर-यू.एस. सत्ता एक वित्तीय संस्थान है।

(क) नियामक अथवा ग्राहक संपर्क उद्देश्यों (एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाओं के मुताबिक संग्रहित सूचनाओं सहित) के लिए अनुरक्षित सूचनाओं की, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या ये सूचनाएं इंगित करती हैं कि खाता धारक एक वित्तीय संस्थान है, समीक्षा करें।

(ख) यदि सूचनाएं यह इंगित करती हैं कि खाता धारक कोर्इ वित्तीय संस्थान है, अथवा प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान प्रकाशित आर्इआरएस एफएफआर्इ सूची में खाता धारक की वैश्विक मध्यस्थ पहचान संख्या को सत्यापित करता है, तो खाता एक यू.एस. प्रतिवेद्य खाता नहीं है।

   3. यह निर्धारित करें कि क्या वित्तीय संस्थान गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान है जिसमें किए गए भुगतान इस करार के अनुच्छेद 4 के उप पैरा 1(ख) के अंतर्गत संयुक्त प्रतिवेदन के अधीन हैं।

(क) इस धारा के उप पैरा घ (3) (ख) के अधीन, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान यह निर्धारित कर सकता है कि खाता धारक एक भारतीय वित्तीय संस्थान है अथवा अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान यथोचित रूप से निर्धारित करता है कि खाता धारक की ऐसी स्थिति प्रकाशित आर्इआरएस एफएफआर्इ सूची में खाता धारक की वैश्विक मध्यस्थ पहचान संख्या अथवा सार्वजनिक रूप से या प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के पास, यथा लागू, उपलब्ध अन्य सूचनाओं के आधार पर है। ऐसे मामले में, खाते के संबंध में किसी और समीक्षा, पहचान अथवा प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है।

(ख) यदि खाता धारक भारतीय वित्तीय संस्थान अथवा अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान है जिसे आर्इआरएस द्वारा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान के रूप में माना गया है, तो खाता यू.एस. प्रतिवेद्य खाता नहीं है, परंतु खाता धारक को किए गए भुगतान करार के अनुच्छेद 4 के उप पैरा 1(ख) में यथा अपेक्षित सूचित किए जाने चाहिए।

(ग) यदि खाता धारक भारतीय वित्तीय संस्थान अथवा अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान नहीं है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाता धारक को गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान के तौर पर माना जाना चाहिए जिनको किए गए भुगतान करार के अनुच्छेद 4 के उप पैरा 1(ख) के अंतर्गत प्रतिवेद्य हैं, जब तक कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान:

 (1) खाता धारक से इस आशय का स्व-प्रमाणन (जो कि आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 अथवा सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है) लेता है कि वह प्रमाणित अनुपालक समझा जाने वाला एफएफआर्इ है, अथवा एक छूट प्राप्त लाभकारी स्वामी है, जैसे कि ये शब्द संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में परिभाषित है; अथवा

 (2) भागीदार एफएफआर्इ अथवा पंजीकृत अनुपालक माने जाने वाले एफएफआर्इ के मामले में प्रकाशित आर्इआरएस एफएफआर्इ सूची में खाता धारक की वैश्विक मध्यस्थ पहचान संख्या का सत्यापन करता है।

   4. यह निर्धारित करें कि क्या एनएफएफर्इ द्वारा धारित खाता एक यू.एस. प्रतिवेद्य खाता है। पूर्ववर्ती सत्ता खाते के खाता धारक, जिसे एक यू.एस. व्यक्ति अथवा वित्तीय संस्थान के तौर पर नहीं पहचाना गया है, के संबंध में प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा पहचान की जानी चाहिए कि (i) क्या खाता धारक के नियंत्रक व्यक्ति हैं (ii) क्या खाता धारक एक निष्क्रिय एनएफएफर्इ है; और (iii) क्या खाता धारक के नियंत्रक व्यक्तियों में से कोर्इ व्यक्ति यू.एस. का नागरिक अथवा निवासी है। ये निर्धारण करते समय प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को इस धारा के उप पैरा घ(4) से घ(4) (घ) में मार्गदर्शन का पालन परिस्थितियों के तहत सर्वोपयुक्त क्रम में करना चाहिए।

(क) खाता धारक के नियंत्रक व्यक्तियों को निर्धारित करने के उद्देश्य से प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान एएमएल/केबार्इसी प्रक्रियाओं के मुताबिक संग्रहित एवं अनुरक्षित सूचनाओं पर निर्भर रह सकता है।

(ख) यह निर्धारित करने के उद्देश्य से कि क्या खाता धारक एक निष्क्रिय एनएफएफर्इ है, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाता धारक से अपनी स्थिति स्थापित करने के लिए स्व-प्रमाणन (जो कि आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 या डब्ल्यू-9 अथवा सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है) प्राप्त किया जाना जरूरी है जब तक कि उसके पास अथवा सार्वजनिक रूप् से उपलब्ध वे सूचनाएं न हों जिनके आधार पर यह यथोचित रूप से निर्धारित कर सके कि खाता धारक एक सक्रिय एनएफएफर्इ है।

(ग) यह निर्धारित करने के उद्देश्य से कि क्या किसी निष्क्रिय एनएफएफर्इ का नियंत्रक व्यक्ति कोर्इ यू.एस. नागरिक अथवा कर उद्देश्यों हेतु निवासी है, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान इन पर निर्भर रह सकता है:

 (1) खाता बकाया अथवा मूल्य जो 1,000,000 डॉलर से अधिक न हो, वाले एक अथवा अधिक एनएफएफर्इ द्वारा धारित पूर्ववर्ती सत्ता खाते के मामले में एएफएल/केवार्इसी प्रक्रियाओं के मुताबिक संग्रहित एवं अनुरक्षित सूचनाएं; अथवा

 (2) खाता बकाया अथवा मूल्य जो 1,000,000 डॉलर से अधिक हो, वाले एक अथवा अधिक एनएफएफआर्इ द्वारा धारित पूर्ववर्ती सत्ता खाते के मामले में ऐसे नियंत्रक व्यक्ति अथवा खाता धारक से एक स्व-प्रमाणन (जो आर्इआरएस फॉर्म डब्ल्यू-8 या डब्ल्यू-9 अथवा सदृश सम्मत फॉर्म में हो सकता है)।

(घ) यदि निष्क्रिय एनएफएफर्इ का नियंत्रक व्यक्ति यू.एस. नागरिक अथवा निवासी है, तो खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना जाएगा।

  ड. पूर्ववर्ती सत्ता खातों पर लागू समीक्षा एवं अतिरिक्त प्रक्रियाओं का समय।

   1. दिनांक 30 जून, 2014 को खाता बकाया अथवा मूल्य जो 250,000 डॉलर से अधिक हो, वाले पूर्ववर्ती सत्ता खातों की समीक्षा 30 जून, 2016 तक पूरी की जानी चाहिए।

   2. दिनांक 30 जून, 2014 को खाता बकाया अथवा मूल्य जो 250,000 डॉलर से अधिक न हो परंतु 31 दिसंबर, 2015 को या किसी आगामी वर्ष में 1,000,000 डॉलर से अधिक हो, वाले पूर्ववर्ती सत्ता खातों की समीक्षा उस कलैंडर वर्ष के अंतिम दिन के बाद छ: माह के भीतर पूरी की जानी चाहिए जिसमें खाता बकाया अथवा मूल्य 1,000,000 डॉलर से अधिक होती हो।

  3. यदि पूर्ववर्ती सत्ता खाते संबंधी परिस्थितियों में परिवर्तन है जिसके कारण प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को पता चलता है, अथवा पता करने का कोर्इ कारण है कि मूल स्व-प्रमाणन अथवा खाते से संबंधित अन्य प्रलेख गलत या अविश्वसनीय है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा इस धारा के पैरा घ में उल्लिखित प्रक्रियाओं के अनुसार खाते की स्थिति पुनर्निर्धारित की जानी चाहिए।

V. नए सत्ता खाते। सत्ताओं द्वारा धारित वित्तीय खातों और 1 जुलार्इ, 2014 के बाद खोले गए (''नए सत्ता खाते'') में से यू.एस. प्रतिवेद्य खाते तथा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थानों द्वारा धारित खातों की पहचान के उद्देश्य हेतु निम्नलिखित नियम एवं प्रक्रियाएं लागू होती हैं।

 क. सत्ता खाते जिनकी समीक्षा, पहचान अथवा प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है। जब तक कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान या तो सभी नए सत्ता खाते के संबंध में या पृथकत: ऐसे खातों के स्पष्टत: पहचाने गए किसी समूह के संबंध में जहां भारतीय कार्यान्वयन नियमों में ऐसे चुनाव का प्रावधान है, अन्यथा न चुने, क्रेडिट कार्ड खाता या परिक्रमी क्रेडिट सुविधा जिसे नया सत्ता खाता माना जाता है की समीक्षा, पहचान अथवा प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते ऐसे खाते को अनुरक्षित करने वाला प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान खाता धारक को बकाया 50,000 डॉलर से अधिक खाता बकाया को रोकने हेतु नीतियों एवं प्रक्रियाओं को लागू करता हो।

 ख. अन्य नए सत्ता खाते। इस धारा के पैरा क में उल्लिखित न किए गए नए सत्ता खातों के संबंध में, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान को निर्धारित करना चाहिए कि क्या खाता धारक कोर्इ: (i) विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति; (ii) भारतीय वित्तीय संस्थान या अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान, (iii) भागीदार एफएफआर्इ, अनुपालक माना गया एफएफआर्इ, या छूट प्राप्त लाभकारी स्वामी, जैसे कि वे शब्द संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में परिभाषित है; अथवा (iv) सक्रिय एनएफएफर्इ या सक्रिय एनएफएफर्इ है।

   1. इस धारा के उप पैरा ख(2) के अनुसार, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान यह निर्धारित कर सकता है कि खाता धारक कोर्इ सक्रिय एनएफएफर्इ, भारतीय वित्तीय संस्थान, या अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान है यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान यथोचित रूप में यह निर्धारित करता है कि खाता धारक की ऐसी स्थिति खाता धारक की वैश्विक मध्यस्थ पहचान संख्या अथवा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध या प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के पास, यथा लागू, अन्य सूचनाओं के आधार पर है।

  2. यदि खाता धारक भारतीय वित्तीय संस्थान है अथवा अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान जिसे आर्इआरएस द्वारा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान के रूप् में माना गया है, तो खाता यू.एस. प्रतिवेद्य खाता नहीं है, परंतु खाता धारक को किए गए भुगतान करार के अनुच्छेद 4 के उप पैरा 1(ख) में यथा अपेक्षित सूचित किए जाने चाहिए।

   3. अन्य सभी मामलों में, प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाता धारक की स्थिति स्थापित करने के लिए खाता धारक से स्व-प्रमाणन लिया जाना जरूरी है। स्व-प्रमाणन के आधार पर निम्नलिखित नियम लागू होते हैं:

(क) यदि खाता धारक एक विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाते को एक यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना जाना चाहिए।

(ख) यदि खाता धारक कोर्इ निष्क्रिय एनएफएफर्इ है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान के द्वारा एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाओं के अंतर्गत निर्धारित किए अनुसार नियंत्रक व्यक्ति की पहचान की जानी चाहिए, तथा उसे खाता धारक अथवा ऐसे व्यक्ति से स्व-प्रमाणन के आधार पर यह निर्धारित करना चाहिए कि क्या ऐसा कोर्इ व्यक्ति यू.एस. नागरिक अथवा निवासी है। यदि ऐसा कोर्इ व्यक्ति यू.एस. नागरिक अथवा निवासी है, तो प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा खाते को यू.एस. प्रतिवेद्य खाता माना जाना चाहिए।

(ग) यदि खाता धारक कोर्इ: (i) यू.एस. व्यक्ति है जो विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति नहीं है; (ii) इस धारा के उप पैरा ख(3)(घ) के अनुसार कोर्इ भारतीय वित्तीय संस्थान या अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान;(iii) कोर्इ भागीदार एफएफआर्इ, कोर्इ अनुपालक माना गया एफएफआर्इ, या कोर्इ छूट प्राप्त लाभकारी स्वामी, वे शब्द संगत यू. एस. राजकोष विनियमों में परिभाषित अनुसार;(iv) कोर्इ सक्रिय एनएफएफर्इ; अथवा (v) कोर्इ निष्क्रिय एनएफएफर्इ जिसके नियंत्रक व्यक्तियों में से कोर्इ भी यू.एस. नागरिक अथवा निवासी नहीं हैं, तो खाता कोर्इ यू.एस. प्रतिवेद्य खाता नहीं है, तथा खाते के संबंध में किसी प्रतिवेदन की आवश्यकता नहीं है।

(घ) यदि खाता धारक गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान है (भारतीय वित्तीय संस्थान या अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र वित्तीय संस्थान जिसे आर्इआरएस द्वारा एक गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान माना गया हो, सहित), तो खाता कोर्इ यू.एस. प्रतिवेद्य खाता नहीं है, परंतु खाता धारक को किए गए भुगतानों की सूचना करार के अनुच्छेद 4 के उप पैरा 1(ख) में यथा अपेक्षित दी जानी चाहिए।

VI. विशेष नियम एवं परिभाषाएं। उपरोक्त समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं लागू करने में निम्नलिखित अतिरिक्त नियम एवं परिभाषाएं लागू होती हैं:

 क. स्व-प्रमाणन एवं दस्तावेजी साक्ष्य पर निर्भरता। कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान स्व-प्रमाणन अथवा दस्तावेजी साक्ष्य पर निर्भर नहीं रक सकता यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान यह जानता है अथवा उसके पास जानने का कारण है कि स्व-प्रमाणन अथवा दस्तावेजी साक्ष्य गलत अथवा अविश्वसनीय है।

 ख. परिभाषाएं। इस अनुबंध-I के प्रयोजनार्थ निम्नलिखित परिभाषाएं लागू होती हैं।

  1. एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाएं। ''एएमएल/केवार्इसी प्रक्रियाएं'' से आशय है, भारत की धन शोधन-रोधी तथा सदृश आवश्यकताओं, जिसे ऐसा प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान संबंधित है, के मुताबिक प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान की ग्राहक समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं हैं।

  2. एनएफएफर्इ। कोर्इ ''एनएफएफर्इ'' से आशय है, कोर्इ गैर-यू.एस. सत्ता जो कि संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में परिभाषा अनुसार कोर्इ एफएफआर्इ नहीं है अथवा इस धारा के उप पैरा ख(4)(ञ) में उल्लिखित सत्ता है, और इसमें कोर्इ भी गैर-यू.एस. सत्ता शामिल हैं जो भारत अथवा अन्य प्रतिभागी कार्यक्षेत्र में स्थापित है व वह कोर्इ वित्तीय संस्थान नहीं हो।

  3. निष्क्रिय एनएफएफर्इ। कोर्इ ''निष्क्रिय एनएफएफर्इ'' से आशय है, कोर्इ एनएफएफर्इ जो (i) सक्रिय एनएफएफर्इ, या (ii) संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के मुताबिक रोकने वाला विदेशी भागीदार अथवा रोकने वाला विदेशी न्यास नहीं है।

   4. सक्रिय एनएफएफर्इ। कोर्इ ''सक्रिय एनएफएफर्इ'' से आशय है, कोर्इ एनएफएफर्इ जो निम्नलिखित में से किसी भी कसौटी पर खरी उतरही हो:

(क) गत कलैंडर वर्ष अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान एनएफएफर्इ की सकल आय का 50 प्रतिशत से कम निष्क्रिय आय हो तथा गत कलैंडर वर्ष अथवा अन्य समुचित प्रतिवेदन अवधि के दौरान एनएफएफर्इ द्वारा धारित परिसम्पतियों का 50 प्रतिशत से कम वे परिसम्पत्तियां हों, जो उत्पादन करती हों अथवा निष्क्रिय आय उत्पन्न करने हेतु रखी गर्इ हों।

(ख) एनएफएफर्इ के स्टॉक का स्थापित प्रतिभूति मार्किट में नियमित तौर पर व्यापार किया जाता हो अथवा एनएफएफर्इ उस सत्ता की संबंधित सत्ता हो जिसके स्टॉक का नियमित तौर पर स्थापित प्रतिभूति मार्किट में व्यापार होता हो।

(ग) एनएफएफर्इ का गठन यू.एस. राज्यक्षेत्र में हो एवं अदाकर्ता के सभी स्वामी उस यू.एस. राज्यक्षेत्र के असली निवासी हो।

(घ) एनएफएफर्इ कोर्इ सरकार (यू.एस. सरकार को छोड़कर), ऐसी सरकार का कोर्इ राजनैतिक उप खण्ड (जिसमें, संदेह से बचने के लिए, कोर्इ राज्य, प्रांत, जिला, अथवा नगरपालिका शामिल हैं) अथवा ऐसी सरकार का कार्य निष्पादन करने वाला सार्वजनिक निकाय अथवा उसका राजनैतिक उप खण्ड, यू.एस. राज्य क्षेत्र की सरकार, कोर्इ अंतरराष्ट्रीय संगठन, गैर-यू.एस. सेन्ट्रल बैंक ऑफ इश्यू अथवा कोर्इ सत्ता जो उपरोक्त में से एक या अधिक से स्वामित्व वाली हो, है।

(ड.) एनएफएफर्इ के सभी कार्यकलापों में यथेष्ट रूप से बकाया स्टॉक की धारित सामग्री (समग्र या भाग में) होती है, या एक या अधिक सहायक कम्पनियां जो वित्तीय संस्था के कारोबार के अलावा किसी ट्रेड या कारोबार में शामिल होती हैं, को वित्तीयन और सेवाएं मुहैया कराती है, सिवाय इसके जहां कोर्इ सत्ता एनएफएफर्इ स्थिति के लिए अर्हक नहीं होगी, यदि कोर्इ संस्था निवेश निधि, जैसे प्राइवेट इक्विटी निधि, उद्यम, पूंजीगत निधि, लीवरेज निधि, या किसी निवेश साधन के रूप में कार्य करती है जिसका उद्देश्य कम्पनियों का अर्जन या निधियन करना है और फिर निवेश उद्देश्यों के लिए पूंजीगत परिसंपत्तियों के रूप में इन कंपनियों में हित धारित करना है।

(च) एनएफएफर्इ अभी कारोबार परिचालित नहीं कर रही है और इसका कोर्इ पूर्व इतिहास भी नहीं है लेकिन परिसंपत्तियों में पूंजी निवेश कर रही है जिसका आशय वित्तीय संस्था के अलावा कारोबार को परिचालित करना है बशर्ते एनएफएफर्इ तारीख के बाद जो कि एनएफएफर्इ के प्रारंभिक संगठन की तारीख के बाद 24 माह है, इस अपवाद के लिए अर्हक नहीं होगी।

(छ) एनएफएफर्इ गत 5 वर्षों में वित्तीय संस्था नहीं थी और अपनी परिसंपत्तियों को परिसमापन या पुन: संगठित करने की प्रक्रिया में है जिसका आशय वित्तीय संस्था के अलावा किसी कारोबार में प्रचालनों को जारी या पुन: शुरू करना है।

(ज) एनएफएफर्इ प्रारंभिक रूप से संबद्ध सत्ताएं जो कि वित्तीय संस्थाएं नहीं हैं, के साथ या के लिए संव्यवहारों के वित्तपोषण और प्रतिरक्षा में शामिल हैं, और किसी ऐसी सत्ता को जो कि सम्बद्ध सत्ता नहीं है, को वित्तपोषण या बचाव सेवाएं प्रदान नहीं करती, बशर्ते ऐसे किसी सम्बद्ध सत्ताओं का समूह किसी वित्तीय संस्था के अलावा कारोबार में प्राथमिक रूप से शामिल हो।

(झ) एनएफएफर्इ संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में यथावर्णित ''औपवादिक एनएफएफर्इ'' है; या

(ञ) एनएफएफर्इ सभी निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूरा करती है:

   i. यह अनन्य रूप से धार्मिक, धर्मार्थ, वैज्ञानिक, कलात्मक, सांस्कृतिक, ऐथलेटिक या शैक्षिक उद्देश्यों के लिए निवासी के क्षेत्राधिकार में स्थापित और प्रचालित है; यह अपने निवासी क्षेत्राधिकार में स्थापित और प्रचालित है और यह समाज कल्याण के प्रोत्साहन के लिए अनन्य रूप से प्रचालित व्यावसायिक संगठन, कारोबार लीग, वाणिज्य मंडल, श्रम संगठन, कृषीय या बागवानी संगठन, नागरिक संघ या कोर्इ संगठन है।

   ii. इसे अपने निवासी के क्षेत्राधिकार में आयकर से छूट प्राप्त है;

  iii. इसका कोर्इ शेयर होल्डर या सदस्य नहीं है जिसका इसकी आय या परिसंपत्तियों में कोर्इ साम्पित्तक या लाभकारी हित हों।

  iv. एनएफएफर्इ निवासी क्षेत्राधिकार को लागू कानून या एनएफएफर्इ संघटन दस्तावेज एनएफएफर्इ की आय या परिसंपत्तियों को एनएफएफर्इ धर्मार्थ कार्यकलापों को करने, या दी गर्इ सेवाओं की उचित क्षतिपूर्ति भुगतान, या संपत्ति जो कि एनएफएफर्इ ने क्रय की है, के उचित बाजार मूल्य को इंगित करते भुगतान के रूप में अनुवर्ती के अलावा किसी निजी व्यक्ति या गैर-धर्मार्थ सत्ता के लाभ के लिए संवितरित या लागू करने की अनुमति नहीं है; और

   v. एनएफएफर्इ निवासी के क्षेत्राधिकार के लागू कानून या एनएफएफर्इ संघटन दस्तावेजों में अपेक्षा है कि इसके परिसमापन या विघटन होने पर, इसकी सभी परिसंपत्तियों को किसी सरकारी सत्ता या अन्य गैर-लाभकारी संगठन या एनएफएफर्इ निवासी के क्षेत्राधिकार की सरकारी राजगत संपत्ति या तत्संबंधी किसी राजनैतिक उपमंडल को संवितरित किया जाए।

  5. पूर्व विद्यमान लेखा। 'पूर्व विद्यमान लेखा' का अर्थ 30 जून, 2014 की स्थिति के अनुसार किसी प्रतिवेदक वित्तीय संस्था द्वारा अनुरक्षित वित्तीय लेखा से है।

  ग. लेखा शेष समूहन और मुद्रा स्थनांतरण नियम।

   1. वैयक्तिक लेखाओं का समूहन। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को किसी वैयक्तिक द्वारा धारित वित्तीय खातों के समूहन शेष या मूल्य को निर्धारित करने के उद्देश्य के लिए प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था या किसी संबंद्ध सत्ता द्वारा अनुरक्षित सभी वित्तीय खातों का समूहन करना अपेक्षित है, लेकिन यह केवल उस सीमा तक है कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था कम्प्यूटरीकृत सिस्टम ग्राहक संख्या या करदाता पहचान संख्या जैसे डेटा ज्ञान के संदर्भ द्वारा वित्तीय खातों को संबद्ध करें। संयुक्त रूप से धारित वित्तीय लेखा का प्रत्येक धारक इस पैराग्राफ 1 में वर्णित समूहन अपेक्षाओं को लागू करने के उद्देश्यों के लिए संयुक्त रूप से धारित वित्तीय लेखा के समग्र शेष या मूल्य के लिए आरोप्य होगा।

  2. सत्ता लेखाओं का समूहन। किसी प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को किसी सत्ता द्वारा धारित समूहन शेष या वित्तीय लेखाओं के मूल्य को निर्धारित करने के उद्देश्यों के लिए उन सभी वित्तीय लेखाओं को हिसाब में लेना अपेक्षित है जिनका किसी प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था या किसी सम्बद्ध सत्ता द्वारा रखरखाव किए जाते हैं, लेकिन यह केवल उस सीमा तक है कि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था कम्प्यूटरीकृत सिस्टम ग्राहक संख्या या करदाता पहचान संख्या जैसे डेटा ज्ञान के संदर्भ द्वारा वित्तीय खातों को सम्बद्ध करें।

   3. संबंध प्रबंधकों को लागू विशेष समूहन नियम। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को यह पता करने के लिए कि क्या कोर्इ वित्तीय लेखा उच्च मूल्य लेखा है, किसी व्यक्ति द्वारा धारित समूहन शेष या वित्तीय लेखाओं के मूल्य को निर्धारित करने के उद्देश्यों के लिए किन्हीं वित्तीय लेखाओं के मामले में यह भी अपेक्षित है कि संबंध प्रबंधक को ऐसे सभी लेखाओं के समूहन करने के लिए उसी व्यक्ति के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से स्वामित्व, नियंत्रित या स्थापित (न्यासीय क्षमता के अलावा) लेखाओं की जानकारी हों या जानकारी करने के कारण हों।

   4. मुद्रा स्थानान्तरण नियम। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को यू.एस. डॉलर के अलावा करेंसी में मूल्य विनिर्दिष्ट वित्तीय लेखाओं के शेष या मूल्य को निर्धारित करने के उद्देश्यों के लिए इस अनुबंध-I में वर्णित यू.एस. डॉलर अवसीमा राशियों को प्रकाशित स्पॉट दर जो कि कैलेंडर वर्ष के अंतिम दिन व पूर्व वर्ष जिसमें प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था शेष या मूल्य को निर्धारित कर रही है, की स्थिति के अनुसार निर्धारित, का प्रयोग करते हुए ऐसी मुद्रा में परिवर्तित करना चाहिए।

 घ. दस्तावेजी साक्ष्य। स्वीकार्य दस्तावेजी साक्ष्य में इस अनुबंध-I के उद्देश्यों के लिए निम्नलिखित में से कोर्इ भी शामिल है:-

   1. किसी प्राधिकृत सरकारी निकाय द्वारा क्षेत्राधिकार (उदाहरणार्थ कोर्इ सरकारी या तत्संबंधी एजेंसी, या नगरपालिका) जिसमें प्रापक निवासी होने का दावा करता है, द्वारा जारी निवास प्रमाणपत्र।

   2. किसी प्राधिकृत सरकारी निकाय (उदाहरणार्थ कोर्इ सरकारी या तत्संबंधी एजेंसी, या नगरपालिका) द्वारा व्यक्ति के संबंध में कोर्इ वैध पहचान, जिसमें व्यक्ति का नाम शामिल हो और विशेष रूप से पहचान उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त होता हो।

   3. किसी प्राधिकृत सरकारी निकाय (उदाहरणार्थ कोर्इ सरकारी या तत्संबंधी एजेंसी, या नगरपालिका) द्वारा किसी सत्ता के संबंध में जारी किया गया कोर्इ शासकीय प्रलेखन जिसमें सत्ता का नाम शामिल हो या उस क्षेत्राधिकार (या यू.एस. राज्यक्षेत्र) में प्रधान कार्यालय का पता जिसमें निवासी होने का दावा है या क्षेत्राधिकार (या यू.एस. राज्यक्षेत्र) जिसमें सत्ता निगमित या संगठित की गर्इ थी, से संबंधित हों।

  4. धनशोधन-रोधी नियम जिन्हें आर्इआरएस द्वारा क्यूआर्इ सहमति (जैसाकि संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में वर्णित है) के संबंध में अनुमोदित किया गया है, के साथ क्षेत्राधिकार में अनुरक्षित वित्तीय लेखा के संबंध में फार्म डब्ल्यू-8 या डब्ल्यू-9 के अलावा कोर्इ भी दस्तावेज, जोकि व्यक्तियों या सत्ताओं को अभिज्ञात करने के लिए क्यूआर्इ सहमति के क्षेत्राधिकार संलग्न में संदर्भित हो।

  5. कोर्इ वित्तीय विवरण, तृतीय पक्ष क्रेडिट रिपोर्ट, दिवालियापन फाइलिंग या यू.एस. प्रतिभूति और विनिमय आयोग रिपोर्ट।

 ड. नकद मूल्य बीमा संविदा के वैयक्तिक लाभार्थियों द्वारा धारित वित्तीय लेखाओं के लिए वैकल्पिक प्रक्रिया। कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था यह मान सकती है कि मृत्यु लाभ प्राप्त करने संबंधी नकद मूल्य बीमा संविदा का कोर्इ वैयक्तिक लाभग्राही (मालिक के अलावा) विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति नहीं है और यू.एस. प्रतिवेद्य लेखा के अलावा ऐसे वित्तीय लेखा को माना जा सकता है यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को वास्तविक जानकारी या जानने के कारण नहीं हों कि लाभग्राही कोर्इ विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है। प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को यह जानने के कारण हों कि नकद मूल्य बीमा संविदा का कोर्इ लाभग्राही कोर्इ विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है यदि प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था और लाभग्राही से सम्बद्ध, संग्रहित सूचना में यू.एस. इंडीसिया शामिल होती है, जैसाकि इस अनुबंध-I की धारा-II के उप पैराग्राफ ख(1) में वर्णित है। यदि किसी प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था के पास वास्तविक जानकारी हो, या जानने के कारण हो कि लाभग्राही कोर्इ विनिर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति है, तब प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्था को इस संलग्न की धारा-II के उप पैराग्राफ बी(3) में निर्दिष्ट प्रक्रियाओं का अनुपालन करना चाहिए।

 च. तृतीय पक्षों पर विश्वास। भारत, इस संलग्नक I की धारा-I के पैराग्राफ ग के तहत चाहे चुनाव हुआ हो या नहीं, तृतीय पक्षों द्वारा निष्पादित समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाओं पर विश्वास करने के लिए प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थाओं को अनुमति दे सकता है, जोकि संगत यू.एस. राजकोष विनियमों में प्रदत्त सीमा तक है।

छ.  इस करार के लागू होने से पूर्व खोले गए खातों के लिए वैकल्पिक प्रक्रियाएं।

  1. प्रयोज्यता। यदि भारत ने 01 जुलार्इ, 2014 को यह अनुबंध लागू होने से पूर्व संयुक्त राज्य को लिखित सूचना दी है कि सूचना की तिथि पर प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थानों को अपेक्षित निम्नलिखित के संबंध में बाध्य करने के लिए भारत के पास कानूनी प्राधिकार नहीं है: (i) नए व्यक्तिगत खातों के खाता धारक द्वारा इस अनुबंध-I की धारा-III में उल्लिखित स्वप्रमाणन उपलब्ध करवाने के लिए अथवा (ii) इस अनुबंध-I की धारा-V में उल्लिखित नए सत्ता खातों से संबंधित सभी समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं करने के लिए, तब रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थान इस अनुबंध-I के अंतर्गत अन्यथा वांछित प्रक्रियाओं के बदले ऐसे खातों पर, यथा लागू, इस खंड के उप-पैरा (छ) 2 में उल्लिखित वैकल्पिक प्रक्रियाएं लागू कर सकते हैं। इस खंड के उप-पैरा (छ)२ में उल्लिखित वैकल्पिक प्रक्रियाएं (i) उस तिथि से जब भारत इस अनुबंध-I की धारा-V या धारा-III में उल्लिखित समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाओं का अनुपालन करने के लिए रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थानों को बाध्य करने में सक्षम हो, यथा लागू, भारत जिस तिथि की सूचना संयुक्त राज्य को लिखित रूप से इस अनुबंध के लागू होने की तारीख तक देगा, अथवा (ii) इस अनुबंध के लागू होने की तिथि को खेले गए उन नए व्यक्तिगत खातों या नए सत्ता खातों के लिए उपलब्ध होंगी। इस धारा के पैराग्राफ ज में वर्णित 1 जुलार्इ, 2014 को या बाद में और 1 जनवरी, 2015 से पहले खोले गए नए सत्ता लेखाओं के लिए वैकल्पिक प्रक्रियाओं को अगर सभी सत्ता लेखाओं या ऐसे लेखाओं के स्पष्ट ज्ञात समूह के संबंध में लागू किया जाता है, तो इस पैराग्राफ छ में वर्णित वैकल्पिक प्रक्रियाएं ऐसे नए सत्ता लेखाओं के संबंध में लागू नहीं हो सकती। सभी अन्य नए खातों के लिए, रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थानों द्वारा यह निर्धारित करने के लिए कि खाता एक यू.एस. प्रतिवेद्य खाता है अथवा किसी गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान द्वारा धारित खाता है, इस अनुबंध की धारा-V अथवा धारा-III में उल्लिखित समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं लागू की जानी चाहिए।

  2.  वैकल्पिक प्रक्रियाएं।

(क) इस करार के लागू होने से एक साल के भीतर रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थान को: (i) इस धारा के उप-पैराग्राफ छ(1) में उल्लिखित नए व्यक्तिगत खाते के संबंध में इस अनुबंध-I की धारा-III में विनिर्दिष्ट स्व-प्रमाणन का अनुरोध करना चाहिए एवं इस अनुबंध-I की धारा-III में उल्लिखित प्रक्रियाओं के अनुसार ऐसे स्व-प्रमाणन की युक्तियुक्तता की पुष्टि करनी चाहिए, तथा (ii) इस धारा के उप-पैराग्राफ छ(1) में उल्लिखित नए सत्ता खाते के संबंध में इस अनुबंध-I की धारा-V में विनिर्दिष्ट समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं करनी चाहिए तथा इस अनुबंध-I की धारा-v द्वारा वांछित खाते के लिए दस्तावेजी आवश्यकता संबंधी सूचना, किसी भी स्व-प्रमाणन सहित, के लिए अनुरोध करना चाहिए।

(ख) भारत द्वारा किसी भी नए खाते के बारे में जिसकी इस धारा के उप-पैराग्राफ छ(2)(क) के अनुसरण में यू.एस. प्रतिवेद्य खाता अथवा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू, द्वारा धारित खाते के रूप में पहचान की गर्इ हो: (i) खाते की यू.एस. प्रतिवेद्य खाते अथवा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू द्वारा धारित खाते के रूप में पहचान की गर्इ तिथि के तुरंत बाद के 30 सितम्बर अथवा (ii) खाते के यू.एस प्रतिवेद्य खाते या गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू, द्वारा धारित खाते के तौर पर पहचान के 90 दिनों के बाद, दोनों में से बाद की तिथि तक सूचना दी जानी चाहिए। ऐसे नए खाते के संबंध में रिपोर्ट की जाने वाली सूचना वह सूचना है, जो करार के अंतर्गत प्रतिवेद्य होती यदि खाता खोले जाने वाली तारीख को नए खाते की यू.एस. प्रतिवेद्य खाते अथवा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू, द्वारा धारित खाते के तौर पर पहचान की गर्इ होती।

(ग) रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थान को, इस अनुबंध के लागू होने के एक वर्ष बाद ही तिथि तक, किसी भी ऐसे नए खाते को जिसका इस खंड के उप-पैरा छ(1) में वर्णन है, बंद कर देना चाहिए जिसके बारे में वह इस खंड के उप-पैरा छ(2)(क) में उल्लिखित प्रक्रियाओं के अनुसरण में वांछित स्व-प्रमाणन अथवा अन्य दस्तावेज एकत्र करने में असमर्थ रहा हो। इसके अतिरिक्त, इस अनुबंध के लागू होने के एक वर्ष बाद की तिथि तक, रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थान द्वारा: (i) ऐसे बंद किए गए खाते जो कि ऐसे बंद किए जाने से पहले नए व्यक्तिगत खाते थे (इस पर ध्यान दिए बिना कि क्या ऐसे खाते उच्च मूल्य खाते थे), के संबंध में इस अनुबंध-I की धारा-II के पैरा 'घ' में विनिर्दिष्ट समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं पूरी की जानी चाहिए अथवा (ii) ऐसे बंद किए गए खाते जो ऐसे बंद किए जाने से पहले नए सत्ता खाते थे, के संबंध में इस अनुबंध-I की धारा-IV में विनिर्दिष्ट समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाएं पूरी की जानी चाहिए।

(घ) भारत द्वारा किसी भी ऐसे बंद खाते के बारे में जिसकी इस धारा के उप-पैराग्राफ छ(2)(ग) के अनुसरण में यू.एस. प्रतिवेद्य खाता अथवा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू, द्वारा धारित खाते के रूप में पहचान की गर्इ हो: (i) खाते की यू.एस. प्रतिवेद्य खाते अथवा गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू, द्वारा धारित खाते के रूप में पहचान की गर्इ तिथि के तुरंत बाद के 30 सितंबर अथवा (ii) खाते के यू. एस. प्रतिवेद्य खाते या गैर-भागीदार वित्तीय संस्थान, यथा लागू, द्वारा धारित खाते के तौर पर पहचान के 90 दिनों के बाद, दोनों में से बाद की तिथि तक सूचना दी जानी चाहिए। ऐसे बंद खाते के संबंध में रिपोर्ट की जाने वाली सूचना वह सूचना है, जो करार के अंतर्गत प्रतिवेद्य होती यदि खाता खोले जाने वाली तारीख को खाते की यू.एस. प्रतिवेद्य खाते अथवा गैर भागीदार एफएफआर्इ द्वारा धारित खाते के तौर पर पहचान की गर्इ होती।

 ज. 01 जुलार्इ, 2014 के बाद तथा 1 जनवरी, 2015 के पहले खोले गए नए सत्ता खातों के लिए वैकल्पिक प्रक्रियाएं। 1 जुलार्इ, 2014 को या उसके बाद और 1 जनवरी, 2015 से पहले खोले गए नए सत्ता लेखाओं के संबंध में, सभी नए सत्ता लेखाओं या अलग रूप से ऐसे लेखाओं के स्पष्ट रूप से ज्ञात समूह के संबंध में, भारत ऐसे लेखाओं को पूर्व विद्यमान सत्ता लेखाओं के रूप में मानने की रिपोर्टिंग भारतीय वित्तीय संस्थानों को अनुमति दे सकता है और इस अनुबंध-I की धारा-V में निर्दिष्ट समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाओं के बदले में इस अनुबंध-I की धारा-IV में निर्दिष्ट पूर्व विद्यमान सत्ता लेखाओं से संबंधित समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाओं को लागू कर सकता है। इस मामले में, इस अनुबंध-I की धारा-IV की समुचित अध्यवसाय प्रक्रियाओं को इस अनुबंध-I की धारा-IV, पैराग्राफ क में विनिर्दिष्ट लेखा शेष या मूल्य अवसीमा पर ध्यान दिए बगैर लागू किया जाना चाहिए।

 

अनुबंध-II

निम्नलिखित सत्ताओं को छूट-प्राप्त लाभग्राही स्वामियों या मानद-अनुपालक एफएफआर्इ, जैसा भी मामला हो, के रूप में माना जाएगा और निम्नलिखित लेखाओं को वित्तीय लेखाओं की परिभाषा से अपवर्जित किया जाता है।

इस अनुबंध-II को भारत और यूनाटेड स्टेट्स के सक्षम प्राधिकारों के बीच निविष्ट किए गए पारस्परिक लिखित निर्णय द्वारा आशोधित किया जा सकता है (1) अतिरिक्त सत्ताओं और लेखाओं को जिनकी करार पर हस्ताक्षर की तारीख को इस अनुबंध-II में वर्णित सत्ताओं और लेखाओं के सदृश विशेषताएं हैं, और जो यू.एस. कर का अपवंचन करने के लिए यू.एस. व्यक्तियों द्वारा प्रयुक्त किये जाने का कम जोखिम प्रस्तुत करती हैं, को शामिल करने के लिए; या (2) परिस्थितियों में बदलाव के कारण उन सत्ताओं और लेखाओं को हटाने के लिए जो यू.एस. कर का अपवंचन करने के लिए यू.एस. व्यक्तियों द्वारा प्रयुक्त किये जाने का अब कम जोखिम प्रस्तुत नहीं करतीं। इस तरह का योगज या निष्कासन पारस्परिक निर्णय के हस्ताक्षर की तारीख पर प्रभावी होगा, जब तक इसमें अन्यथा उपबंधित न हो। ऐसे पारस्परिक निर्णय पर पहुंचने की कार्यरीतियों को करार के अनुच्छेद 3 के पैराग्राफ 6 में वर्णित पारस्परिक सहमति या प्रबंधन में शामिल किया जा सकता है।

 1. निधियों के अलावा छूट-प्राप्त हितग्राही मालिक। निम्नलिखित सत्ताओं को गैर-प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय सत्ताओं और यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा-1471 और 1472 के उद्देश्यों के लिए छूट-प्राप्त हितकर स्वामियों के रूप में माना जाएगा, उस भुगतान को छोड़कर जिसे विनिर्दिष्ट बीमा कंपनी, अभिरक्षक संस्था या डिपॉजिटरी संस्था द्वारा धारित दायित्व जनित किसी वाणिज्यिक वित्तीय कार्यकलाप के संबंध में किया है।

  क. सरकारी सत्ता। भारत सरकार, भारत का कोर्इ भी राजनैतिक उपखंड (जिसमें संदेह को दूर करने के लिए राज्य, प्रांत, या नगरपालिका शामिल है), या भारत की कोर्इ पूर्णत: स्वामित्व एजेंसी या सहायता, बोर्ड या निगम, प्राधिकरण या अन्य कोर्इ निकाय जो भारत सरकार या इसके राजनैतिक उपखण्ड (उप प्रभाग) या एक या अधिक पूर्वोक्त (प्रत्येक किसी 'भारतीय सरकारी सत्ता') के अधिनियम के तहत स्थापित या गठित की गर्इ हो। इस श्रेणी में भारत के अभिन्न भाग, नियंत्रित सत्ताएं और राजनैतिक उप प्रभाग समाविष्ट होते हैं।

  1. भारत के अभिन्न भाग से अर्थ किसी व्यक्ति, संगठन, एजेंसी, ब्यूरो, निधि सहायता या अन्य निकाय, तथापि जो चाहे जैसे निर्दिष्ट हो, से है, जिसमें भारत का शासी प्राधिकरण समाविष्ट है। शासी प्राधिकारी के शुद्ध अर्जन को किसी निजी व्यक्ति के लाभ के लागू होने वाले अंश के बिना इसके अपने खाते या भारत के अन्य खातों में क्रेडिट किया जाना चाहिए। अभिन्न भाग में ऐसा कोर्इ व्यक्ति जोकि संप्रभु, शासकीय या निजी या व्यक्तिगत क्षमता में कार्यरत प्रशासक है शामिल नहीं है।

  2. किसी नियंत्रित सत्ता से अर्थ किसी ऐसी सत्ता से है जो कि भारत से प्रकार में अलग है या अन्यथा अलग न्यायिक सत्ता संघटित करती है, बशर्ते:

(क) सत्ता एक या अधिक भारतीय सरकारी सत्ताओं द्वारा सीधे या एक या अधिक नियंत्रित सत्ताओं के द्वारा समग्रत: स्वामित्व और नियंत्रित होती है।

(ख) सत्ता के शुद्ध अर्जन को इसके अपने खाते या एक या अधिक भारतीय सरकारी सत्ताओं के खातों में क्रेडिट किया जाता है, व इसकी आय का कोर्इ भाग किसी निजी व्यक्ति के हित के लिए लागू नहीं होता है; और

(ग) सत्ता की परिसम्पत्ति का विलयन होने पर एक या अधिक भारतीय सरकारी सत्ताओं में निहित होती है।

  3. आय निजी व्यक्तियों को लाभ के लिए लागू नहीं होते यदि ऐसे व्यक्ति किसी सरकारी कार्यक्रम के आशयित लाभार्थी हैं, और कार्यक्रम कार्यकलाप सामान्य कल्याण के संबंध में आम जन के लिए निष्पादित हैं या सरकार के कुछ पहलुओं के प्रशासन से संबंधित हैं। तथापि पूर्ववर्ती के होते हुए भी आय को निजी व्यक्तियों के लाभ को लागू होना विचारित है, यदि आय, वाणिज्यिक कारोबार, जैसे वाणिज्यिक बैंकिंग कारोबार, जो निजी व्यक्तियों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है, को करने के लिए सरकारी सत्ता के प्रयोग से प्राप्त होती है।

 ख. अन्तरराष्ट्रीय संगठन। कोर्इ अंतरराष्ट्रीय संगठन या पूर्णत: स्वामित्व एजेन्सी या तत्संबंधी सहायक। इस श्रेणी में अन्तर-सरकारी संगठन (अधिराष्ट्रीय संगठन सहित) शामिल हैं (1) जिसमें प्राथमिक रूप से गैर-यू.एस. सरकारें शामिल हैं; (2) जिसका भारत के साथ वस्तुत: मुख्यालय करार है; और (3) जिसकी आय निजी व्यक्तियों के लाभ के लिए लागू नहीं होती।

 ग. केन्द्रीय बैंक। कोर्इ संस्थान जो कि विधि या सरकार द्वारा, भारत सरकार के अलावा, करेंसी के रूप में परिचालित हेतु आशयित निर्गम दस्तावेज, संबंधी कार्य प्रधान प्राधिकार को अनुमत करता है। ऐसी किसी संस्था में कोर्इ सहायक संस्था शामिल हो सकती है जोकि भारत सरकार से, जोकि भारत के पूर्णत: या अंशत: स्वामित्व में चाहे हों या न हों, से अलग हो।

 II. निधियां जो छूट प्राप्त हितकारी स्वामियों के रूप में अर्हता प्राप्त करती हैं। निम्नलिखित सत्ताओं को गैर-प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थाओं और यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 और 1472 के उद्देश्यों के लिए छूट प्राप्त हितकारी स्वामियों के रूप में माना जाएगा।

  क. संधि-अर्हता प्राप्त सेवानिवृत्ति निधि। भारत में स्थापित निधि, बशर्ते कि निधि भारत और यूनाटेड स्टेट्स के बीच आय कर संधि के तहत लाभों के लिए अधिकृत हों जोकि आय के संबंध में हो जोकि यह भारत के निवासी के रूप में यूनाटेड स्टेट्स के भीतर स्रोतों से व्युत्पन्न करता है (यदि ऐसी किसी आय से प्राप्त किया गया हो, तब ऐसे लाभों के लिए अधिकृत है) व लागू परिसीमा या हित अपेक्षाएं पूरी होती हैं, व पेंशन या सेवानिवृत्ति लाभों को संचालित या प्रदान करने के लिए मुख्यतया प्रचालित की जाती है।

 ख. व्यापक प्रतिभागिता सेवानिवृत्ति निधि। की गर्इ सेवाओं को ध्यान में रखते हुए, एक या अधिक नियोक्ताओं के वर्तमान या पूर्व कर्मचारी या (ऐसे कार्मिकों द्वारा निर्दिष्ट व्यक्तियों) लाभग्राहियों को सेवानिवृत्ति, विकलांगता या मृत्यु लाभ, या तत्संबंधी संयोजन प्रदान करने के लिए भारत में स्थापित कोर्इ निधि, बशर्ते निधि:

  1. निधि परिसम्पत्तियों के पांच प्रतिशत से अधिक का अधिकार एक लाभग्राही के पास नहीं हो।

  2. सरकारी विनियम के अधीन है और अपने लाभग्राहियों के बारे में वार्षिक सूचना प्रतिवेदन भारत में संगत कर प्राधिकारियों को प्रदान करें; और

  3. निम्नलिखित अपेक्षाओं में से कम से कम एक अपेक्षा पूरी होती हो:

(क) वह निधि सेवानिवृत्ति या पेंशन प्लान के रूप में परिस्थिति के कारण भारत के कानूनों के तहत निवेश आय पर भारत में कर से सामान्यतया छूट प्राप्त है;

(ख) वह निधि अपने कुल अंशदानों का कम से कम 50 प्रतिशत (इस धारा के पैराग्राफ क से घ में वर्णित अन्य योजनाओं से परिसम्पत्तियों के अंतरण के अलावा या इस अनुबंध-II की धारा-V के उप पैराग्राफ क(1) में वर्णित सेवानिवृत्ति और पेंशन खाते) प्रायोजित नियोक्ताओं से प्राप्त करती है;

(ग) उस निधि से संवितरण या आहरण सेवानिवृत्ति, विकलांगता या मृत्यु से संबंधित निर्दिष्ट घटनाओं के होने पर ही अनुमत की जाती है (इस धारा के पैराग्राफ क से घर में वर्णित अन्य सेवानिवृत्ति निधियों को रोल ओवर संवितरण या इस अनुबंध की धारा-V के उप पैराग्राफ क (1) में वर्णित सेवानिवृत्ति और पेंशन खाते के सिवाय) या शास्तियां ऐसी निर्दिष्ट घटनाओं से पहले किए गए संवितरण या आहरण पर लागू होती है; या

 घ. कर्मचारियों द्वारा निधियों में अंशदान (कतिपय अनुमति प्राप्त मेकअप अंशदानों के अलावा) कर्मचारी की सृजित आय के संदर्भ द्वारा परिसीमित है या खाता समुच्चय और मुद्रा अंतरण के लिए अनुबंध-I में वर्णित नियमों को लागू करते हुए 50,000 डॉलर प्रतिवर्ष से अधिक नहीं हो सकती।

 ग. सीमित प्रतिभागिता सेवानिवृत्ति निधि। लाभग्राहियों जोकि वर्तमान या पूर्व कर्मचारी हैं (या ऐसे कर्मचारियों द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति) जोकि दी गर्इ सेवाओं के लिए एक या अधिक नियोक्ताओं के हैं, को ध्यान में रखते हुए, उन्हें सेवानिवृत्ति, विकलांगता, या मृत्यु लाभों को प्रदान करने के लिए भारत में स्थापित निधि, बशर्ते:

  1. उस निधि के प्रतिभागी 50 से कम है;

  2. उस निधि को एक या अधिक नियोक्ताओं जोकि निवेश सत्ताएं या निष्क्रिय एनएफएफर्इ नहीं है, द्वारा प्रायोजित किया जाता है।

  3. निधि को कर्मचारी और नियोक्ता अंशदान (इस धारा के पैराग्राफ क में वर्णित संधि-अर्हता-प्राप्त सेवानिवृत्ति निधियों से परिसंपत्तियों के अंतरण या इस अनुबंध-II की धारा-V के उप पैराग्राफ क(1) में वर्णित सेवानिवृत्ति और पेंशन खाता के अलावा) कर्मचारी की सृजित आय और क्षतिपूर्ति क्रमश: के संदर्भ द्वारा परिसीमित है;

  4. वे प्रतिभागी, जोकि भारत के निवासी नहीं है, निधि परिसम्पत्तियों के 20 प्रतिशत से अधिक के लिए अधिकृत नहीं हैं; और

  5. वह निधि सरकारी विनियम के अधीन है और भारत में संगत कर प्राधिकारियों को लाभग्राहियों के बारे में वार्षिक सूचना प्रतिवेदन प्रदान करती है।

  घ. छूट-प्राप्त हितकारी स्वामी की पेंशन निधि। छूट-प्राप्त हितकारी स्वामी द्वारा लाभग्राहियों या प्रतिभागियों जोकि छूट-प्राप्त हितकारी स्वामी (या ऐसे कर्मचारियों द्वारा निर्दिष्ट व्यक्ति) के वर्तमान या पूर्व कर्मचारी हैं, या जो वर्तमान या पूर्व कर्मचारी नहीं हैं, यदि ऐसे लाभग्राहियों या प्रतिभागियों लाभ छूट प्राप्त हितकारी स्वामी के लिए निष्पादित वैयक्तिक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए हैं, को सेवानिवृत्ति, विकलांगता या मृत्यु लाभों को प्रदान करने के लिए भारत में स्थापित निधि।

  ड. छूट-प्राप्त हितकारी स्वामियों द्वारा पूर्णत: स्वामित्व की निवेश सत्ता। सत्ता जोकि मात्र एक भारतीय वित्तीय संस्था है क्योंकि यह एक निवेश सत्ता है, बशर्ते सत्ता में सत्ता हित का प्रत्येक प्रत्यक्ष धारक छूट-प्राप्त हितकारी स्वामी है, और ऐसी सत्ता में ऋण हित का प्रत्येक प्रत्यक्ष धारक या तो डिपॉजिटरी संस्था (ऐसी सत्ता को किए गए ऋण के संबंध में) है या छूट-प्राप्त हितकारी स्वामी है।

  च. सशस्त्र बलों की रेजिमेंटल निधि या गैर-सार्वजनिक निधि। भारत संघ की सशस्त्र सेना द्वारा सशस्त्र सेना के कार्यरत तथा भूतपूर्व सदस्यों तथा जिनकी आय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-10 (23 कक) के अंतर्गत कर मुक्त हैं, के कल्याण के लिए सैन्य दल संबंधी निधि अथवा गैर सरकारी निधि के रूप में भारत में स्थापित निधि।

  छ. कर्मचारी राज्य बीमा निधि। भारत में कम आय वाले कारखाना श्रमिकों के चिकित्सा संबंधी व्यय के प्रावधान हेतु 1948 के कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के उपबंधों के अंतर्गत कर्मचारियों की राज्य बीमा निधि के तौर पर भारत में स्थापित निधि।

  ज. ग्रेच्यूटी निधियां। सन् 1972 के उपादान भुगतान अधिनियम में विनिर्दिष्ट भारतीय नियोक्ता के कुछ विशेष प्रकार के कर्मचारियों (उदाहरणार्थ कारखाना एवं खनन श्रमिक) को उपादान के भुगतान संबंधी प्रावधान हेतु 1972 के उपादान भुगतान अधिनियम के अंतर्गत भारत में स्थापित निधि।

  झ. भविष्य निधि। प्रतिपादित सेवाओं के लिए भारतीय नियोक्ताओं के कार्यरत तथा भूतपूर्व कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ के प्रावधान हेतु 1952 के भविष्य निधि अधिनियम अथवा कर्मचारी भविष्य निधि एवं विभिन्न अधिनियम, 1952 के अंतर्गत भारत में स्थापित निधि, बशर्ते कि वह निधि:

  1. निधि परिसंपत्तियों के पांच प्रतिशत से अधिक का अधिकार किसी अकेले लाभग्राही के पास न हो;

  2. सरकारी विनियम के अधीन है और अपने लाभग्राहियों के बारे में वार्षिक सूचना प्रतिवेदन भारत में संगत कर प्राधिकारियों को प्रदान करती है;

  3. वह निधि भविष्य निधि के रूप में परिस्थिति के कारण भारत के कानूनों के तहत निवेश आय पर भारत में कर से सामान्यतया छूट प्राप्त है; और

  4. कर्मचारियों द्वारा निधियों में अंशदान (कतिपय अनुमति प्राप्त मेकअप अंशदानों के अलावा) कर्मचारी की सृजित आय के संदर्भ द्वारा परिसीमित है या खाता समुच्चय और मुद्रा अन्तरण के लिए अनुबंध-I में वर्णित नियमों को लागू करते हुए 50,000 डॉलर प्रतिवर्ष से अधिक नहीं हो सकती।

III. छोटे या सीमित स्कोप के वित्तीय संस्थान जो मानद-अनुपालक एफएफआर्इ के रूप में अर्हक होते हैं। निम्नलिखित वित्तीय संस्थान गैर-प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान हैं जिन्हें यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा-1471 के उद्देश्यों के लिए मानद-अनुपालक एफएफआर्इ के रूप में माना जाएगा।

  क. स्थानीय ग्राहक आधार के साथ वित्तीय संस्था। निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूरा करते वित्तीय संस्थान

  1. वित्तीय संस्थान को अनुज्ञात किया जाना चाहिए और भारत के कानूनों के तहत वित्तीय संस्थान के रूप में विनियमित किया जाना चाहिए।

  2. वित्तीय संस्था की भारत के बाहर कारोबार का कोर्इ निश्चित स्थान नहीं हो। कारोबार के निश्चित स्थान में इस उद्देश्य के लिए वह स्थान शामिल नहीं है जोकि पब्लिक को विज्ञापित नहीं है और जिससे वित्तीय संस्था मात्र प्रशासनिक सहायता कार्य ही निष्पादित करती है।

  3. वित्तीय संस्थान को भारत के बाहर ग्राहकों या खाता धारकों से अनुरोध नहीं करना चाहिए। किसी वित्तीय संस्थान को इस उद्देश्य के लिए भारत केवल इस आधार पर ग्राहकों या खाता धारकों से निवेदित करना नहीं माना जाएगा क्योंकि वित्तीय संस्थान (क) वेबसाइट प्रचालित करती है, बशर्ते वेबसाइट विशिष्ट रूप से यह इंगित नहीं करती कि वित्तीय संस्थान अनिवासियों को वित्तीय खाते या सेवाएं मुहैया कराती हैं और इसके अन्यथा यू.एस. ग्राहकों या खाता धारकों को लक्षित या निवेदित नहीं करती, या (ख) प्रिंट मीडिया या रेडियों या टेलीविजन स्टेशन में विज्ञापित करना जिसे मुख्यत: भारत के भीतर संवितरित या प्रसारित किया जाता है लेकिन संयोग से अन्य देशों में भी संवितरित या प्रसारित किया जाता है, बशर्ते विज्ञापन में विशिष्ट रूप से यह इंगित नहीं हो कि वित्तीय संस्थान अनिवासियों को वित्तीय खाते या सेवाएं मुहैया कराता है और अन्यथा यू.एस. ग्राहकों या खाता धारकों को लक्षित या निवेदित नहीं करता।

  4. वित्तीय संस्थान को भारत के कानूनों के तहत सूचना प्रतिवेदन के उद्देश्यों के लिए या निवासियों द्वारा धारित वित्तीय खातों के संबंध में कर को रोक लेने या भारतीय एएमएल की अपेक्षित उद्यम अपेक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्यों के लिए निवासी खाताधारियों की पहचान करना अपेक्षित होना चाहिए;

  5. भारत के निवासियों (निवासी जोकि सत्ताएं है, सहित) द्वारा वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित मूल्य द्वारा वित्तीय खातों का कम से कम 98 प्रतिशत धारित किया जाना चाहिए।

  6. वित्तीय संस्थान को 1 जुलार्इ, 2014 कीे शुरूआत में या पहले अनुबंध-I में वर्णित तथ्यों के साथ संगत नीतियां और कार्यरीतियां होनी चाहिए, ताकि किसी गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान को वित्तीय खाता मुहैया कराने से वित्तीय संस्थान को रोका जा सके और यह भी निगरानी हो कि क्या वित्तीय संस्थान किसी निर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति जोकि भारत का निवासी नहीं है (यू.एस. व्यक्ति सहित जोकि भारत का निवासी था जब वित्तीय खाता खोला गया था लेकिन बाद में भारत का निवासी होना समाप्त हुआ) या नियंत्रण व्यक्ति जो यू.एस. निवासी हैं के साथ कोर्इ निष्क्रिय एनएफएफर्इ या यू.एस. नागरिक जोकि भारत के निवासी नहीं हैं, के साथ कोर्इ निष्क्रिय एनएफएफर्इ या यू.एस. नागरिक जोकि भारत के निवासी नहीं है, के लिए वित्तीय खाते को खोलता है या रखरखाव करता है।

  7. ऐसी नीतियों और कार्यरीतियों में यह प्रावधान होना चाहिए कि किसी निर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति, जोकि भारत का निवासी नहीं है, द्वारा धारित कोर्इ वित्तीय खाता या नियंत्रण व्यक्तियों के साथ निष्क्रिय एनएफएफर्इ जोकि यू.एस. निवासी का यू.एस. नागरिक हैं व भारत के निवासी नहीं है, ज्ञात होते हैं, तब वित्तीय संस्थान को ऐसे वित्तीय खाते को रिपोर्ट करना चाहिए जैसाकि अपेक्षित होगा यदि वित्तीय संस्थान प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान हो (आर्इआरएस एफएटीसीए रजिस्ट्रेशन वेबसाइट पर लागू रजिस्ट्रेशन अपेक्षाओं की अनुपालन को शामिल करते हुए) या ऐसे वित्तीय खाते को बंद करता हो।

  8. वित्तीय संस्थान को किसी व्यक्ति जोकि भारत का निवासी नहीं है या सत्ता द्वारा धारित पूर्व विद्यमान खाते के संबंध में, ऐसे पूर्व विद्यमान खातों को लागू अनुबंध-I में वर्णित कार्यरीतियों के अनुसार ऐसे पूर्व विद्यमान खातों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि किसी यू.एस. प्रतिवेद्य खाते या गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान द्वारा धारित वित्तीय खाते को अभिज्ञात किया जा सके और ऐसे वित्तीय खाते को रिपोर्ट किया जाना चाहिए जैसाकि अपेक्षित होगा यदि वित्तीय संस्थान प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान हो (आर्इआरएस एफएटीसीए रजिस्ट्रेशन वेबसाइट पर लागू रजिस्ट्रेशन अपेक्षाओं की अपुनालन को शामिल करते हुए) या ऐसे वित्तीय खाते को बंद करता हो।

  9. वित्तीय संस्थान की प्रत्येक सम्बद्ध सत्ता जोकि वित्तीय संस्थान है, को सम्बद्ध सत्ता जोकि इस अनुबंध-II की धारा-II के पैराग्राफ क से घ में वर्णित सेवानिवृत्ति निधि है, के अपवाद के साथ भारत में निगमित या संगठित की जानी चाहिए, तथा इस पैराग्राफ क से घ में वर्णित अपेक्षाओं को पूरा करना चाहिए; और

10. वित्तीय संस्थान की ऐसी नीतियां और पद्धतियां नहीं होनी चाहिए जो व्यक्तियों जोकि निर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति और भारत के निवासी हैं, के लिए वित्तीय खातों को खोलने या रखरखाव करने के विरूद्ध पक्षपात करती हों।

  ख. स्थानीय बैंक। निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूरा करते वित्तीय संस्थान-

 1. वित्तीय संस्थान (अनुज्ञप्त और भारत के कानूनों के तहत विनियमित है) (क) बैंक या (ख) क्रेडिट यूनियन या सदृश सहकारी क्रेडिट संगठन जोकि लाभ के बिना प्रचालित होती है, के रूप में मात्र प्रचालित है।

  2. वित्तीय संस्थान कारोबार में मुख्यत: बैंक के संबंध में जमाओं प्राप्ति और ऋणों को करने क्रेडिट यूनियन या सदृश सहकारी क्रेडिट संगठन सदस्यों के संबंध में, असम्बद्ध खुदरा ग्राहक समाविष्ट हैं, बशर्ते किसी सदस्य के पास ऐसी क्रेडिट यूनियन या सहकारी क्रेडिट संगठन में पांच प्रतिशत से अधिक कोर्इ हित नहीं हो।

  3. वित्तीय संस्थान इस धारा के उप पैराग्राफ क(2) और क(3) में वर्णित अपेक्षाओं को पूरा करती है, बशर्ते इस धारा के उप पैराग्राफ क(3) में वर्णित वेबसाइट संबंधी परिसीमाओं के अतिरिक्त, वेबसाइट की किसी वित्तीय खाते को खोलने की अनुमति नहीं है।

  4. वित्तीय संस्थान के पास तुलन-पत्र में परिसम्पत्तियों में 175 मिलयन डॉलर से अधिक नहीं हैं और वित्तीय संस्थान के साथ किन्हीं सम्बद्ध सत्ताओं के पास कुल परिसम्पत्तियों या इनकी समेकित या संयुक्त तुलन पत्रों में 500 मिलयन डॉलर से अधिक नहीं हैं; और

  5. किसी सम्बद्ध सत्ता को भारत में निगमित या संगठित किया जाना चाहिए और ऐसी कोर्इ संबद्ध सत्ता जोकि वित्तीय संस्थान है, किसी सम्बद्ध सत्ता के अपवाद के साथ जोकि इस अनुबंध-II की धारा-II पैराग्राफ क से घ में वर्णित सेवानिवृत्ति निधि है या इस धारा के पैराग्राफ ग में वर्णित सिर्फ न्यून-मूल्य खातों का वित्तीय संस्थान है, को इस पैराग्राफ ख में वर्णित अपेक्षाओं को पूरा करना चाहिए।

  ग. केवल निम्न-मूल्य खातों वाले वित्तीय संस्थान। निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूरा करने वाले भारतीय वित्तीय संस्थान;

  1. वित्तीय संस्थान कोर्इ निवेश सत्ता नहीं है;

  2. वित्तीय संस्थान द्वारा अनुरक्षित वित्तीय खाता या किसी सम्बद्ध सत्ता का खाता समूहन और करेंसी अंतरण के लिए अनुबंध-I में वर्णित नियमों को लागू करते हुए 50,000 डॉलर से अधिक के शेष या मूल्य का नहीं है; और

  3. वित्तीय संस्थान का तुलन पत्र पर परिसम्पत्तियों में 50 मिलयन डॉलर से अधिक नहीं हो, और वित्तीय संस्थान के साथ संबद्ध सत्ताओं का उनके समेकित या संयुक्त तुलन-पत्रों पर कुल परिसम्पत्तियों में 50 मिलयन डॉलर से अधिक नहीं हो।

 घ. अर्हता प्राप्त क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता। निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूरा करते हुए भारतीय वित्तीय संस्थान:

  1. वित्तीय संस्थान सिर्फ एक वित्तीय संस्थान है क्योंकि यह क्रेडिट कार्डों का जारीकर्ता है व केवल तभी जमा स्वीकार करता है जब कोर्इ ग्राहक कार्ड के संबंध में देय शेष से अधिक भुगतान करता है और अधिक भुगतान को तत्काल ग्राहक को वापस नहीं किया जाता; और

  2. वित्तीय संस्थान 1 जुलार्इ, 2014 की शुरूआत में या पहले 50,000 डॉलर से अधिक ग्राहक-जमा को रोकने के लिए नीतियां और कार्यरीतियां कार्यान्वित करता है या यह सुनिश्चित करना होता है कि कोर्इ ग्राहक खाता समूहन और करेंसी अंतरण के लिए अनुबंध-I में वर्णित नियमों को लागू करते हुए प्रत्येक मामले में 50,000 डालर से अधिक की जमा, ग्राहक को 60 दिनों के भीतर रिफन्ड कर दी जाए। ग्राहक के जमा में उस उद्देश्य के लिए विवादित प्रभारों की सीमा तक क्रेडिट शेषों का संदर्भ नहीं है लेकिन पण्य वापसियों के परिणामस्वरूप क्रेडिट शेष शामिल है।

IV. निवेश सत्ताएं जोकि मानद - अनुपालक एफएफआर्इ और अन्य विशेष नियमों के रूप में अर्हक होती हैं। इस धारा के 'क' से लेकर 'ड' तक पैराग्राफों में वर्णित वित्तीय संस्थान गैर-प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान है जिन्हें यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 के उद्देश्यों के लिए मानद - अनुपालक एफएफआर्इ के रूप में माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस धारा के पैराग्राफ एफ में निवेश सत्ता को लागू विशेष नियमों का प्रावधान है।

 क. न्यासी-प्रलेखी न्यास। भारत की विधि के तहत इस सीमा तक स्थापित न्यास कि न्यास का न्यासी प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान, प्रतिवेदक मॉडल 1 एफएफआर्इ या प्रतिभागी एफएफआर्इ या प्रतिभागी एफएफआर्इ है और न्यास के सभी प्रतिवेद्य खातों के संबंध में करार के अनुसार रिपोर्ट की जाने संबंधी अपेक्षित सभी सूचना की रिपोर्ट करता है।

 ख. प्रायोजित निवेश सत्ता और नियंत्रित विदेशी निगम। प्रायोजित सत्ता के साथ इस धारा के उप पैराग्राफ ख(1) या ख(2) में वर्णित वित्तीय संस्थान जो इस धारा के उप पैराग्राफ ख(3) की अपेक्षाओं का अनुपालन करता है।

  1. वित्तीय संस्थान कोर्इ प्रायोजित निवेश सत्ता है यदि (क) यह भारत में स्थापित निवेश सत्ता है जोकि कोर्इ अर्हता प्राप्त मध्यस्थ, संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के अनुसार रोक रखने वाली विदेशी साझेदारी, या रोक रखने वाला विदेशी न्यास नहीं हैं; और (ख) सत्ता ने वित्तीय संस्थान के लिए प्रायोजित सत्ता के रूप में कार्य करने के लिए वित्तीय संस्थान के साथ सहमति दी है।

  2. वित्तीय संस्थान कोर्इ प्रायोजित नियंत्रित विदेशी निगम है यदि (क) वित्तीय संस्थान भारत के कानूनों के तहत नियंत्रित विदेशी निगम1 है जोकि कोर्इ अर्हता प्राप्त मध्यस्थ, संगत यू.एस.राजकोष विनियमों के अनुसार रोक रखने वाली विदेशी साझेदारी, या रोक रखने वाला विदेशी न्यास नहीं है; और; (ख) वित्तीय संस्थान प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान द्वारा पूर्णत: स्वामित्व, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष है जोकि वित्तीय संस्थान के लिए प्रायोजित सत्ता के रूप में कार्य करने के लिए संबंधन अपेक्षित है; और (ग) वित्तीय संस्थान प्रायोजित सत्ता के साथ सामान्य इलेक्ट्रॉनिक खाता सिस्टम को साझा करता है व प्रायोजित सत्ता को सभी खाता धारकों और वित्तीय संस्थान के प्रापकों को ज्ञात करने में सहायक होता है और वित्तीय संस्थान सहित इसके द्वारा रखरखाव किए सभी खाता और ग्राहक सूचना को पहुंच करने में समर्थित करता है; लेकिन यह ग्राहक पहचान सूचना, ग्राहक प्रलेखन, खाता शेष और खाता धारक या प्रापक को किए सभी भुगतानों तक सीमित नहीं है।1

  3. प्रायोजित सत्ता निम्नलिखित अपेक्षाओं की अनुपालन करती है:

(क) प्रायोजित सत्ता आर्इआरएस एफटीसीए पंजीकरण वेबसाइट पर लागू पंजीकरण अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए वित्तीय संस्थान (जैसे निधि प्रबंधक, न्यासी, कारपोरेट निदेशक या प्रबंध पार्टनर) की ओर से कार्य करने के लिए अधिकृत है।

(ख) प्रायोजित सत्ता ने आर्इआरएस एसएटीसीए पंजीकरण वेबसाइट पर आर्इआरएस के साथ प्रायोजित सत्ता के रूप में पंजीकृत किया है।

(ग) यदि प्रायोजित सत्ता वित्तीय संस्थान के संबंध में किसी यू.एस. प्रतिवेद्य खातों को ज्ञात करता है, प्रायोजित सत्ता 31 दिसंबर, 2015 को या पहले और तारीख जोकि ऐसी यू.एस. प्रतिवेद्य खाते को पहली बार ज्ञात करने के 90 दिन बाद है, आर्इआरएस एफएटीसीए पंजीकरण वेबसाइट पर लागू रजिस्ट्रेशन अपेक्षाओं के अनुसार वित्तीय संस्थान को पंजीकृत करता है।

  घ. प्रायोजित सत्ता वित्तीय संस्थान की ओर से पूर्ण अपेक्षित उद्यम के साथ रोक, प्रतिवेदन तथा अन्य अपेक्षाएं निष्पादित करने के लिए सहमत होता है जोकि वित्तीय संस्थान से अपेक्षित होतीं यदि वह कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान होता।

  ड. प्रायोजित सत्ता वित्तीय संस्थान की पहचान करता है और वित्तीय संस्थान की ओर से पूरा किए गए सभी प्रतिवेदन में वित्तीय संस्थान की पहचान संख्या शामिल करता है (आर्इआरएस एफएटीसीए रजिस्ट्रेशन वेबसाइट पर लागू रजिस्ट्रेशन अपेक्षाओं की अनुपालन द्वारा प्राप्त); और

  च. प्रायोजित सत्ता की रद्द प्रायोजक के रूप में परिस्थिति नहीं है।

  ग. प्रायोजित, घनिष्ठता से धारित निवेश उपाय। निम्नलिखित अपेक्षाओं को पूरा करते हुए भारतीय वित्तीय संस्थान:

  1. वित्तीय संस्थान एक वित्तीय संस्थान है मात्र इसलिए क्योंकि यह कोर्इ निवेश सत्ता है और अर्हता-प्राप्त मध्यस्थ, रोक रखने वाली विदेशी साझेदारी, या संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के अनुसार रोक रखने वाला विदेशी न्यास नहीं है।

  2. प्रायोजित सत्ता प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान, प्रतिवेदक मॉडल 1 एफएफआर्इ या प्रतिभागी एफएफआर्इ व वित्तीय संस्थान (जैसे व्यावसायिक प्रबंधक, न्यासी या प्रबंध भागीदार) की ओर से कार्य करने के लिए प्राधिकृत है व वित्तीय संस्थान की ओर से अपेक्षित सभी उद्यम, रोक रखने, प्रतिवेदन और अन्य अपेक्षाओं को, जोकि वित्तीय संस्थान को निष्पादित करने के लिए अपेक्षित हुर्इ होतीं यदि यह प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान होता, निष्पादित करने को सहमत है।

  3. वित्तीय संस्थान असंबंधित पक्षों के लिए निवेश उपाय के रूप में अपने आपको धारित नहीं करता।

  4. बीस या कम व्यक्ति वित्तीय संस्थान, में सभी ऋण हित और इक्विटी हितों का स्वामित्व रखते हैं (प्रतिभागी एफएफआर्इ और मानद - अनुपालक एफएफआर्इ और सत्ता द्वारा स्वामित्व इक्विटी हितों के बगैर - यदि सत्ता वित्तीय संस्थान में शत प्रतिशत इक्विटी हितों का स्वामित्व रखती है और स्वयं में इस पैराग्राफ ग में वर्णित प्रायोजित वित्तीय संस्थान है); और

  5. प्रायोजित सत्ता निम्नलिखित अपेक्षाओं की अनुपालन करती है:

(क) प्रायोजित सत्ता आर्इआरएस एफएफएटीसीए पंजीकरण वेबसाइट पर आर्इआरएस के साथ प्रायोजित सत्ता के रूप में पंजीकृत हुर्इ है।

(ख) प्रायोजित सत्ता वित्तीय संस्थान की ओर से, पूर्ण अपेक्षित उद्यम के साथ, रोक, प्रतिवेदन तथा अन्य अपेक्षाएं निष्पादित करने, जोकि वित्तीय संस्थान से अपेक्षित होतीं यदि वह कोर्इ प्रतिवेदक भारतीय वित्तीय संस्थान होता और छह वर्षों की अवधि के लिए वित्तीय संस्थान के संबंध में संग्रहित प्रलेखन का रखरखाव के लिए सहमत होता है।

(ग) प्रायोजित सत्ता वित्तीय संस्थान पक्ष संबंधी पूरी सभी प्रतिवेदन में वित्तीय संस्थान को ज्ञात करती है।

(घ) प्रायोजित सत्ता की रद्द प्रायोजक के रूप में प्रस्थिति नहीं है।

  घ. निवेश सलाहकार और निवेश प्रबंधक और मान्य स्टॉक विनिमय के स्टॉक ब्रोकर/ट्रेडिंग सदस्य। भारत में स्थापित निवेश सत्ता जोकि मात्र वित्तीय संस्थान है क्योंकि यह (1) निवेश सलाह प्रदान करती है और की ओर से कार्य करती है, या (2) के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधित करती है, और की ओर से कार्य करती है, या (3) निधियों के निवेश, प्रबंध या संचालन के उद्देश्यों के लिए ग्राहक की ओर से ट्रेड निष्पादित करती है या गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के अलावा वित्तीय संस्थान के साथ ग्राहक के नाम में जमा प्रतिभूतियां हैं।

  ड. सामूहिक निवेश उपाय। भारत में स्थापित निवेश सत्ता जोकि एक सामूहिक निवेश उपाय के रूप में विनियमित है, बशर्ते सामूहिक निवेश उपाय के सभी हित (50,000 डालर के अधिक में ऋण हित सहित) धारित होते हैं या ये एक या अधिक छूट प्राप्त हितकारी स्वामियों द्वारा धारित होते हैं, अनुबंध-I की धारा-VI के उप पैराग्राफ ख (4) में वर्णित सक्रिय एनएफएफर्इ जोकि निर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति या वित्तीय संस्थान जोकि गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान नहीं है।

  च. विशेष नियम। निम्नलिखित नियम निवेश सत्ता पर लागू होते हैं:

  1. निवेश सत्ता जोकि इस धारा के पैराग्राफ र्इ में वर्णित सामूहिक निवेश उपाय है, के हितों के संबंध में किसी निवेश सत्ता की प्रतिवेदन बाध्यताएं (वित्तीय संस्थान जिसके द्वारा सामूहिक निवेश उपाय में हितों को धारित किया जाता है, के अलावा) पूरा किया जाना समझा जाएगा।

  2. निम्नलिखित के हितों के संबंध में:

(क) साझेदारी क्षेत्राधिकार में स्थापित निवेश सत्ता जिसे एक सामूहिक निवेश उपाय के रूप में विनियमित किया जाता है, जिसके सभी हित (50,000 डॉलर के अधिक में ऋण हित सहित) एक या अधिक छूट-प्राप्त हितकारी स्वामियों द्वारा धारित किए जाते हैं, अनुबंध-I के धारा-VI के उप पैराग्राफ ख(4) में वर्णित सक्रिय एनएफएफर्इ, यू.एस. व्यक्ति जोकि निर्दिष्ट यू.एस. व्यक्ति या वित्तीय संस्थान जोकि गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान नहीं हैं; या

 ख. निवेश सत्ता जोकि संगत यू.एस. राजकोष विनियमों के तहत अर्हता-प्राप्त सामूहिक निवेश साधन है; किसी निवेश सत्ता जोकि भारतीय वित्तीय संस्थान (वित्तीय संस्थान जिसके द्वारा सामूहिक निवेश साधन में हित धारित होते हैं, के अलावा) है, की प्रतिवेदन बाध्यताओं को पूरा हुआ समझा जाएगा।

  3. भारत में स्थापित निवेश सत्ता जोकि इस धारा के पैराग्राफ र्इ या उप पैराग्राफ एफ(2) में वर्णित नहीं है, के हितों के संबंध में, करार के अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 3 के संगत, ऐसे हितों के संबंध में सभी अन्य निवेश सत्ताओं की प्रतिवेदन बाध्यताओं को पूरा किया हुआ माना जाएगा, यदि ऐसे हितों के संबंध में करार के अनुसार प्रथम वर्णित निवेश सत्ता द्वारा रिपोर्ट की जाने संबंधी अपेक्षित सूचना ऐसी निवेश सत्ता या अन्य व्यक्ति द्वारा रिपोर्ट की जाती है।

  V. वित्तीय खातों से अपवर्जित खाते। निम्नलिखित खातों को वित्तीय खातों की परिभाषा से अपवर्जित किया जाता है और इसलिए यू.एस. प्रतिवेद्य खातों के रूप में माना नहीं जाएगा।

क. कतिपय बचत खाते।

  1. सेवानिवृत्ति एवं पेंशन खाता। भारत में अनुरक्षित सेवानिवृत्ति या पेंशन खाता जोकि भारत की विधि के तहत निम्नलिखित अपेक्षाएं पूरी करता हो।

(क) खाता वैयक्तिक सेवानिवृत्ति खाते के रूप में विनियमन के अधीन है या सेवानिवृत्ति प्रावधान या पेंशन हित (विकलांगता या मृत्यु लाभ सहित) के लिए पंजीकृत या विनियमित सेवानिवृति या पेंशन योजना का भाग है।

(ख) खाता कर-अनुकूल है (अर्थात खाते में अंशदान जोकि भारत की विधि के तहत अन्यथा कर के अधीन होगी, खाता धारक की सकल आय से कटौती योग्य या अपवर्जित की जाती है या घटी दर पर कर लगाया जाता है, या खाते से निवेश आय का कराधान आस्थगित या घटी दर पर कर लगाया जाता है।)

(ग) खाते के संबंध में भारत में कर प्राधिकारियों को वार्षिक सूचना प्रतिवेदन अपेक्षित होता है।

(घ) निर्दिष्ट सेवानिवृत्ति आयु, विकलांगता या मृत्यु पर आहरण अनुकूलित की जाती हैं या ऐसी निर्दिष्ट घटनाओं से पहले की गर्इ आहरण पर शास्ति लगती है।

(ड) या तो (i) वार्षिक अंशदान 50,000 डालर या कम तक सीमित हैं, या (ii) 1,000,000 डालर या कम के खाते तक अधिकतम जीवन काल अंशदान सीमा है, यह प्रत्येक मामले में खाता समूहन और मुद्रा अंतरण के लिए अनुबंध-I में वर्णित नियमों को लागू करके है।

  2. गैर-सेवानिवृत्ति बचत खातें

 क. भारत में रखरखाव किया गया खाता (बीमा या वार्षिकी संविदा के अलावा) जो भारत की विधि के तहत निम्नलिखित अपेक्षाएं पूरी करती हैं।

    i. खाता सेवानिवृति के उद्देश्यों के अलावा बचत साधन के रूप में विनियमन के अधीन है।

   ii. खाता कर-अनुकूल है (अर्थात खाते में अंशदान जोकि भारत की विधि के तहत अन्यथा कर के अधीन होगी, खाता धारक की सकल आय से कटौती योग्य या अपवर्जित की जाती है या घटी दर पर कर लगाया जाता है, या खाते से निवेश आय का कराधान आस्थगित या घटी दर पर कर लगाया जाता है।)

  iii. आहरण बचत खाता के उद्देश्यों से संबंधित निर्दिष्ट मानदंड को पूरा करने पर अनुकूलित की जाती है (उदाहरणार्थ शैक्षिक या चिकित्सा लाभ का प्रावधान), या ऐसे मानदंडों को पूरा करने से पहले की गर्इ आहरण पर शास्ति लागू होती है; और

  iv. वार्षिक अंशदान खाता समूहन और मुद्रा अंतरण के लिए अनुबंध-I में वर्णित नियमों को लागू करते हुए 50,000 या कम डालर तक सीमित हैं।

 ख. भारतीय वरिष्ठ नागरिकों को बचत योजनाएं तथा बचत एवं जमा खाते उपलब्ध कराने के लिए 2004 के वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के तहत भारत में स्थापित कोर्इ खाता।

 ख. कतिपय आवधिक जीवन बीमा संविदाएं। व्याप्ति अवधि के साथ भारत में रखरखाव किया गया जीवन बीमा संविदा जोकि बीमाकृत व्यक्ति के 90 वर्ष की आयु प्राप्त होने से पहले समाप्त होगा, बशर्ते कि संविदा में निम्नलिखित अपेक्षाएं पूरी होती हों:

  1. आवधिक प्रीमीयम, जोकि समयोपरि कम नहीं होती, अवधि के दौरान जिसमें संविदा विद्यमान है या तब तक बीमाकृत 90 वर्ष की आयु प्राप्त करता है, जो भी कम से कम वार्षिक रूप से देय है।

  2. संविदा का ऐसा कोर्इ संविदा मूल्य नहीं है जोकि व्यक्ति संविदा को समाप्त किए बिना (आहरण, ऋण या अन्यथा द्वारा) पहुंच प्राप्त कर सकता है।

  3. संविदा के रद्द या समाप्त होने पर देय राशि (मृत्यु लाभ के अतिरिक्त) संविदा के लिए अदा समूहन प्रीमियम से अधिक नहीं हो सकती, जिसमें से यह संविदा विद्यमान होने की अवधि या अवधियों के लिए मृत्यु दर, रूग्णता और व्यय प्रभारों की राशि (चाहे वास्तविक रूप में अधिरोपित हों या नहीं) और संविदा के रद्द होने या समाप्ति के पूर्व अदा किन्हीं राशियों को घटाया गया हो; और

  4. संविदा अंतरित व्यक्ति द्वारा मूल्य के लिए धारित नहीं हो।

  ग. संपदा द्वारा धारित खाता। भारत में रखरखाव किया गया खाता जोकि सिर्फ संपदा द्वारा धारित होता है यदि ऐसे खाते के लिए प्रलेखन में मृतक वसीयत या मृत्यु प्रमाण-पत्र की प्रति शामिल हो।

  घ. निलम्ब खातें। निम्नलिखित के किसी भी संबंध में स्थापित भारत में रखरखाव किया गया खाता

  1. न्यायालय आदेश या निर्णय,

  2. स्थावर या वैयक्तिक सम्पत्ति का विक्रय, विनिमय या लीज बशर्ते कि खाते की निम्नलिखित अपेक्षाएं पूरी होती हो:

(क) खाता मात्र डाउन पेमेंट, बयाना, संव्यवहार से सीधे संबंधित बाध्यता को प्राप्त करने के लिए उपयुक्त जमा राशि या सदृश भुगतान द्वारा वित्त पोषित होती हो, या यह वित्तीय परिसंपत्ति से वित्त पोषित होती हो जोकि सम्पत्ति के विक्रय, विनिमय या लीज के संबंध में खाते में जमा होती हों।

(ख) खाते को संस्थापित किया जाता है और इसे सम्पत्ति के क्रय मूल्य का भुगतान करने के लिए क्रेता की बाध्यता को प्राप्त करने, विक्रेता को किसी आकस्मिक देयता का भुगतान करने या लीज के तहत यथा सहमत लीज की गर्इ सम्पत्ति से संबंधित किसी क्षति का भुगतान करने के लिए पट्टादाता या पट्टाधारी द्वारा ही प्रयुक्त किया जाता है।

(ग) खाते की परिसम्पत्तियों, तत्संबंधी अर्जित आय सहित का भुगतान किया जाएगा या अन्यथा क्रेता, विक्रेता, पट्टादाता या पट्टाधारी (ऐसे व्यक्ति की बाध्यता को पूरा करते हुए सहित) के हित के लिए संवितरित किया जाएगा, जब सम्पत्ति का क्रय, विनिमय या इसको अभ्यर्पित किया जाता है या लीज समाप्त होती है;

 घ. खाता वित्तीय परिसम्पत्ति के विक्रय या विनिमय के संबंध में स्थापित मार्जिन या सदृश खाता नहीं है।

  ड. खाता क्रेडिट कार्ड खाते के साथ सम्बद्ध नहीं है।

  3. बाद के समय पर स्थावर सम्पत्ति करों या बीमा के भुगतान को मात्र सुकर बनाने के लिए भुगतान के भाग को अलग करने हेतु स्थावर सम्पत्ति द्वारा प्राप्त ऋण से संबंधित वित्तीय संस्थान की बाध्यता

  4. बाद के समय पर करों के भुगतान को मात्र सुकर बनाने के लिए वित्तीय संस्थान की बाध्यता।

  ड. साझेदार क्षेत्राधिकार खाते। भारत में रखरखाव किया गया खाता और यूनाटेड स्टे्टस और दूसरे साझेदार क्षेत्राधिकार के बीच करार के तहत वित्तीय खाते की परिभाषा से अपवर्जित किया गया ताकि एफएटीसीए का कार्यान्वयन सुकर हो, बशर्ते कि ऐसा खाता ऐसे अन्य साझेदार क्षेत्राधिकार जैसे कि अगर ऐसा खाता उस साझेदार क्षेत्राधिकार में स्थापित होता और उस साझेदार क्षेत्राधिकार में साझेदार क्षेत्राधिकार वित्तीय संस्थान द्वारा रखरखाव किया गया होता कि विधि के तहत सदृश अपेक्षाओं और ओवरसाइट के अधीन है।

 VI. परिभाषाएं। निम्नलिखित अतिरिक्त परिभाषाएं उपर्युक्त विवरणों पर लागू होंगी।

 क. प्रतिवेदक मॉडल 1 एफएफआर्इ। शब्द प्रतिवेदक मॉडल 1 एफएफआर्इ से अर्थ वित्तीय संस्थान से है जिसके संबंध में कोर्इ गैर-यू.एस. सरकारी या तत्संबंधी एजेंसी मॉडल 1 आर्इजीए के अनुसार सूचना प्राप्त और आदान-प्रदान करता है, यह मॉडल 1 आर्इजीए के तहत गैर-प्रतिभागी वित्तीय संस्थान के रूप में माने गए वित्तीय संस्थान के अलावा है। शब्द मॉडल 1 आर्इजीए का इस परिभाषा के उद्देश्यों के लिए अर्थ यूनाटेड स्टेट्स या राजकोष विभाग और गैर-यू.एस. विभाग या एक या अधिक तत्संबंधी एजेंसियों के बीच प्रबंध से है ताकि वित्तीय संस्थानों द्वारा ऐसे गैर-यू.एस. सरकारी या तत्संबंधी एजेंसी द्वारा प्रतिवेदन के माध्यम से एफएटीसीए का कार्यान्वयन हो व आर्इआरएस के साथ, ऐसी रिपोर्ट की गर्इ सूचना का ऑटोमेटिक विनिमय का अनुवर्तन हो।

  ख. प्रतिभागी एफएफआर्इ। शब्द प्रतिभागी एफएफआर्इ का अर्थ ऐसे वित्तीय संस्थान से है जोकि एफएफआर्इ सहमति की अपेक्षाओं का अनुपालन करने पर सहमत हुआ है, इसमें मॉडल 2 आर्इजीए में वर्णित ऐसा वित्तीय संस्थान शामिल है जो एफएफआर्इ सहमति की अपेक्षाओं का अनुपालन करने पर सहमत हुआ हो। शब्द प्रतिभागी एफएफआर्इ में प्रतिवेदक यू.एस. वित्तीय संस्थान की अर्हता प्राप्त मध्यस्थ शाखा भी शामिल है जब तक ऐसी शाखा प्रतिवेदक मॉडल 1 एफएफआर्इ नहीं है। शब्द एफएफआर्इ सहमति का अर्थ इस परिभाषा के उद्देश्यों के लिए प्रबंध से है जोकि वित्तीय संस्थान के लिए अपेक्षाओं का वर्णन करती है जिसे यू.एस. आंतरिक राजस्व कोड की धारा 1471 (ख) की अपेक्षाओं के साथ अनुपालन किया जाना समझा जाना है। इसके अतिरिक्त, इस परिभाषा के उद्देश्यों के लिए शब्द मॉडल 2 आर्इजीए का अर्थ यूनाटेड स्टेटस या राजकोष विभाग और गैर-यू.एस.सरकार या एक या अधिक तत्संबंधी एजेंसियों के बीच प्रबंध से है ताकि एफएफआर्इ सहमति की अपेक्षाओं के अनुसार आर्इआरएस को सीधे तौर पर वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रतिवेदन के माध्यम से एफएटीसीए के कार्यान्वयन में सहायता हो व यह ऐसी गैर-यू.एस सरकार या तत्संबंधी एजेंसी और आर्इआरएस के बीच सूचना के आदान-प्रदान का पूरक हो।

अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन में सुधार तथा एफएटीसीए के क्रियान्वयन के लिए भारत गणराज्य की सरकार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच करार के बारे में समझौता ज्ञापन

अंतर्राष्ट्रीय कर अनुपालन में सुधार तथा एफएटीसीए के क्रियान्वयन के लिए भारत गणराज्य की सरकार तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के बीच करार के आज हस्ताक्षर हो जाने पर (इसके प्श्चात ''करार'') भारत गणराज्य तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि निम्नलिखित पर अपनी सहमति की पुष्टि करने के इच्छुक है:

अनुच्छेद 10 (करार की शर्त) के पैराग्राफ 1 के संदर्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार समझती है कि भारत गणराज्य की सरकार करार को 30 सितंबर, 2015 तक लागू करने के उद्देश्य के साथ वर्ष 2015 में संगत विनियमों को तैयार करने तथा क्रियान्वयन के लिए असवश्यक विधान का प्रस्ताव पेश करने की योजना रखती है। इस समझौते पर आधारित, करार पर हस्ताक्षर होने की तारीख से यूनाइटेड स्टेटस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी प्रत्येक भारतीय वित्तीय संस्थान, जैसे कि वह पद करार में परिभाषित है, को ऐसे समय के दौरान यू.एस. आंतरिक रेवेन्यू कोड की धारा 1471 के अंतर्गत अनुपालनकर्ता, और जो रोक रखने के विनियमों के अधीन नहीं है मानना जारी रखने का आशय रखता है, जबकि भारत करार को लागू करने के लिए जरूरी आंतरिक प्रक्रियाओं का पालन कर रहा है। इसके अलावा संयुक्त राज्य समझाता है कि भारत का वित्त मंत्रालय यथा शीघ्र यूनाइटेड स्टेटस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी से संपर्क करने का आशय रखता है यदि उसे यह जानकारी हो कि ऐसा विलंब हो सकता है कि भारत 30 सितंबर, 2015 से पूर्व करार के अनुच्छेद 10 के पैराग्राफ 1 के अंतर्गत अपनी अधिसूचना उपलब्ध कराने में सझम नहीं हो सकेगा।

इस करार के उप पैराग्राफ 1(म) तथा 1(य) के संदर्भ में (नकद मूल्य तथा नकद मूल्य बीमा संविदा की परिभाषाएं), यह समझा जाता है कि एकल प्रीमियम जीवन बीमा संविदा जो संविदा के अभ्यर्पण अथवा समाप्त होने पर अदा की जाने वाली राशि की अनुमति नहीं देता है और जो संविदा के अंतर्गत अथवा इसके साथ उधार ली जाने वाली राशि की अनुमति नहीं देता है, नकद मूल्य बीमा संविदा, जैसे कि ऐसी मद करार में प्रयोग की गर्इ है, का गठन नहीं करता है।

करार (सेंट्रल बैंक) के अनुबंध-II के 1ग के संदर्भ में यह समझा जाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक करार के प्रयोजनार्थ सेंट्रल बैंक है।

करार के अनुबंध-II के 1क (सरकारी सत्ता) के संदर्भ में, यह समझा जाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक/संगठन नियंत्रित सत्ताएं है जो सरकारी सत्ताएं है बशर्ते:

(क) सहायक/संगठन पूर्णत: स्वामित्व वाला है और एक अथवा एक से अधिक भारतीय सत्ताओं (भारतीय रिजर्व बैंक सहित) द्वारा प्रत्यक्षत: अथवा एक अथवा एक से अधिक नियंत्रित सत्ताओं द्वारा नियंत्रित है;

(ख) सत्ता के शुद्ध अर्जन को इसके अपने खाते या एक या अधिक भारतीय सत्ताओं के खातों में क्रेडिट किया जाता है, व इसकी आय का कोर्इ भाग किसी निजी व्यक्ति के हित के लिए लागू नहीं होता है; और

(ग) सत्ता की परिसंपत्तियां विघटन होने पर एक अथवा एक से ज्यादा भारतीय सरकारी सत्ताओं में निहित हैं।

अनुबंध-I के VI ख 4(ञ) के संदर्भ में यह समझा जाता है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10, खण्ड 23 ड. क में यथा संदर्भित निवेशक संरक्षण कोष और आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 खण्ड 23ड. ख में यथा संदर्भित निवेशक संरक्षण कोष तथा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 खण्ड 23ड. में यथा संदर्भित लघु उद्योग हेतु क्रेडिट गारंटी कोष ट्रस्ट, अनुबंध-I के VI ख 4(ञ)(i) द्वारा स्थापित तथा संचालित खण्ड को पूरा करता है तथा इसे करार के प्रयोजनों के लिए सक्रिय एनएफएफर्इ के रूप में माना जाता है यदि VI ख 4(ञ)(ii) से (v) तक भी पूरी की जाती है।

अनुबंध-II के III (ख) के संदर्भ में यह समझा जाता है कि (i) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 (1976 की संख्या 21) के तहत गठित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (ii) संबंधित राज्य सहकारी सोसायटीज अधिनियम अथवा बहु राज्य सहकारी सोसायटीज अधिनियम के तहत गठित शहरी सहकारी बैंक (iii) संबंधित राज्य सहकारी सोसायटीज अधिनियम के अंतर्गत गठित राज्य सहकारी बैंक/जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (iv) बैंकिंग विनियम अधिनियम, 1949 के तहत लाइसेंस दिए गए स्थानीय क्षेत्रीय बैंक तथा कंपनी अधिनियम, 1956 या कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों के रूप में नियमित तथा पंजीकृत को करार के अर्थ के भीतर स्थानीय बैंक के रूप में माना जाता है बशर्ते अनुबंध-II के III ख के पैराग्राफ 4 में परिसंपत्ति जांच पूरी की गर्इ है।

करार के अनुच्छेद 2 के उप पैराग्राफ 2 (ख) के संदर्भ में यह समझा जाता है कि यथोचित कर्मनिष्ठता प्रक्रियाएं, जो विस्तृत रूप से करार के अनुबंध-I में नर्इ खाता प्रक्रियाओं के समान हैं, संयुक्त राज्य के घरेलू कानून के तहत इस करार के तहत रिपोर्टिंग यू.एस. वित्तीय संस्थानों द्वारा सूचना के प्रावधान के लिए अपेक्षित सीमा तक पहले ही प्रभावी है।

भारत गणराज्य की सरकार के वित्त मंत्रालय, नॉर्थ ब्लॉक, नर्इ दिल्ली, भारत में, जुलार्इ 2015 के 9वें दिन, इस पर हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में, दो-दो प्रतियों में हस्ताक्षर किए गए।

भारत गणराज्य की सरकार की ओर से संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की ओर से:
शक्तिकान्त दास रिचर्ड आर. वर्मा
राजस्व सचिव राजदूत

 

 

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  1  किसी ''नियंत्रित विदेशी निगम'' का अर्थ है कोर्इ विदेशी निगम यदि ऐसे निगम के मतदान करने के पात्र सभी वर्ग के स्टॉक की संयुक्त मतदान शक्ति के 50 प्रतिशत से अधिक को मतदान करने का अधिकार है, या ऐसे निगम के स्टॉक का कुल मूल्य ऐसे विदेशी निगम के कर वर्ष के किसी भी दिन ''यूनाटेड स्टेट के शेयर धारकों'' द्वारा धारित है या धारित माना जाता है। ''यूनाटेड स्टेट के शेयर धारक'' शब्द का अर्थ है किसी विदेशी निगम के संदर्भ में, यूनाटेड स्टेट्स का कोर्इ व्यक्ति जिसके पास ऐसे विदेशी निगम के मतदान करने के पात्र सभी वर्ग के स्टॉक की संयुक्त मतदान शक्ति के 10 प्रतिशत या उससे अधिक का स्वामित्व है या स्वामित्व माना जाता है।

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