करदाता द्वारा किये गये उच्चमूल्य लेनदेन पर नजर रखने के लिये, आयकर कानून में वार्षिक सूचना विवरणी (ए आ आर) की अवधारणा को बनाया। ए आ आर की सहायता के साथ वर्ष के दौरान एक व्यक्ति द्वारा किये गये कुछ निर्धारित उच्च मूल्य लेन देन पर कर अधिकारी सूचना एकत्रित करते है। इस भाग में आप ए आइ आर से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

वित्तीय लेनदेन के विवरण (एसएफटी) को समझना

 

करदाता द्वारा किए गए उच्च मूल्य के लेनदेन पर नजर रखने के लिए आयकर कानून ने वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाता (पहले 'वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर)' के तौर पर प्रसिद्ध) की संकल्पना की गई है। विवरण की मदद से कर प्राधिकरण वर्ष के दौरान व्यक्ति द्वारा किए गए कुछ निर्धारित उच्च मूल्य के लेनदेन पर सूचना एकत्रित करेगा। वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का विवरण कुछ निर्धारित कंपनी (बाद में चर्चा की जाएगी) द्वारा दाखिल किया जाना है तथा ऐसे विवरण में उनको वर्ष के दौरान उनके द्वारा पंजीकृत/रिकॉर्डिड/अनुरक्षित (बाद में चर्चा की जाएगी) किसी रिर्पोटयोग्य खाते अथवा निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन का विवरण प्रस्तुत करना आपेक्षित है। इसलिए वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण में कुछ निर्धारित उद्यमों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर आयकर विभाग वर्ष के दौरान व्यक्ति द्वारा किए जा रहे निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन की जानकारी रखता है। इस भाग में आप वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण से संबंधित विभिन्न प्रावधानों पर जानकारी प्राप्त करेगें।

मूल प्रावधान

आयकर अधिनियम, 1961 (वित्त अधिनियम, 2014 द्वारा 1-4-2015 से लागू आदेशानुसार) की धारा 285खक के अनुसार निर्दिष्ट कंपनियों (दाखिलकर्ता) को आयकर प्राधिकरण अथवा ऐसी अन्य निर्दिष्ट प्राधिकरण हेतु वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा पंजीकृत/रिकॉर्डिड/अनुरक्षित किसी रिर्पोटयोग्य खाते अथवा निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन के संबंध में विवरण को प्रस्तुत करना आपेक्षित है।

* वित्तीय लेनदेन तथा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण को दाखिल करने के लिए नियम अभी अधिसूचित किए जाने हैं

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण को दाखिल करने के लिए व्यक्ति

निम्नलिखित व्यक्तियों को वित्तीय वर्ष के दौरान उनके द्वारा पंजीकृत अथवा रिकॉर्डिड अथवा अनुरक्षित वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य लेखा को निर्धारित प्राधिकरण को प्रस्तुत करना होगा:

(क) एक निर्धारिती

(ख) सरकारी कार्यालय की स्थिति में निर्धारित व्यक्ति

(ग) एक स्थानीय प्राधिकरण अथवा अन्य कोई सार्वजनिक निकाय अथवा एसोसिएशन

(घ) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 का 1908) की धारा 6 के अंतर्गत नियुक्त पंजीयक अथवा उप-पंजीयक

(ड) मोटर व्हीकल अधिनियम, 1988 (59 का 1988) के अध्याय IV के अंतर्गत पंजीकृत मोटर व्हीकल हेतु अधिकार प्राप्त पंजीकरण प्राधिकरण

(च) भारतीय डाक कार्यालय अधिनियम, 1898 (6 का 1898) की धारा 2 के वाक्यांश (ञ) हेतु संदर्भितानुसार महाडाकपाल

(छ) भूमि अधिग्रहण, पुर्नवास तथा स्थानांतरगमन अधिनियम, 2013 (30 का 2013) में पारदर्शिता तथा उचित मुआवजे के अधिकार की धारा 3 के वाक्यांश (छ) में संदर्भित संग्राहक

(ज) प्रतिभूति अनुबंध (नियामक) अधिनियम, 1956 (42 का 1956) की धारा 2 के वाक्यांश (च) में संदर्भितानुसार प्राधिकृत शेयर बाजार (स्टॉक एक्सचेंज)

(झ) भारतीय रिजर्व बैंक का एक अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (2 का 1934) की धारा 3 के अंतर्गत संस्थापित

(ञ) डिपाजिटरी अधिनियम, 1966 (22 का 1996) की धारा 2 की उप-धारा (1) के वाक्यांश (ड) में संदर्भित एक डिपाजिटरी

(ट) एक निर्धारित रिपोर्टिंग वित्तीय संस्थान

(ठ) एक व्यक्ति, वाक्यांश (क) से (ट) जिसे संदर्भित किया जा सके में संदर्भित व्यक्तियों को छोड़कर

टिप्पणी : बोर्ड ऐसे लेनदेन के प्रकार से संबंधित विभिन्न व्यक्तियों के संबंध में विभिन्न लेनदेन के लिए विभिन्न राशि को निर्धारित कर सकता है। हालांकि वित्त वर्ष के दौरान ऐसे लेनदेन की कुल राशि रू. 50,000 से कम नही होगी

* नियम लेनदेन के प्रकार तथा वित्तीय लेनदेन के विवरण को भरने के लिए अपनी मूल्य को निर्धारित करता है तथा रिर्पोटयोग्य लेखा को अभी अधिसूचित किया जाना है।

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण की प्रस्तुति की अवधि तथा नियत तिथि

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का विवरण ऐसे समय के भीतर तथा निर्धारितानुसार किसी रूप में के भीतर ऐसी अवधि के लिए प्रस्तुत किया जाएगा*

हालांकि धारा 285खक(5) कर प्राधिकारी को अधिकार देती है कि वह उस व्यक्ति को नोटिस जारी कर सके जिसने निर्धारित समय के भीतर विवरण को दाखिल नही किया था। ऐसी स्थिति में कर प्राधिकारी ऐसे नोटिस को तामील करने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के भीतर विवरण को प्रस्तुत करने के लिए ऐसे व्यक्ति को नोटिस दे सकते है तथा ऐसी स्थिति में व्यक्ति को नोटिस में निर्दिष्टानुसार समय के भीतर विवरण को प्रस्तुत करना होगा।

* वित्तीय लेनदेन के विवरण तथा रिर्पोटयोग्य लेखा को को भरने के लिए नियम अभी अधिसूचित किए जाने हैं।

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण को प्रस्तुत न करने के नतीजे

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का विवरण की गैर-प्रस्तुति धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माना आकर्षित करेगा। डिफाल्ट की स्थिति में रू. 100 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जा सकता है

हालांकि धारा 285खक(पूर्व चर्चितानुसार) कर प्राधिकारियों को नोटिस जारी करने का अधिकार देता है जो व्यक्ति को ऐसे नोटिस के तामील होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर विवरण को जमा करने का निर्देश देता है तथा ऐसी स्थिति में व्यक्ति नोटिस में निर्दिष्ट तिथि के भीतर विवरण को प्रस्तुत करेगा। यदि व्यक्ति निर्दिष्ट समय के भीतर विवरण जमा करने में असफल रहता है तो रू. 500 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना दिन जो विवरण को प्रस्तुत करने के लिए ऐसे नोटिस मे निर्दिष्ट तिथि समाप्त होती हो, के तुरंत आगमी दिन से वसूला जाएगा

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का असत्य अथवा दोषयुक्त विवरण

यदि कोई व्यक्ति, विवरण भरने के पश्चात्, विवरण में उपलब्घ कराई गई जानकारी में किसी प्रकार की त्रुटि पाता अथवा जानता है तो उसे ऐसी असत्यता निर्धारित आयकर प्राधिकरण को दस दिन की अवधि के भीतर प्रस्तुत करेगा तथा निर्धारितानुसार ऐसी प्रणाली में सही जानकारी प्रस्तुत करेगा

दूसरी ओर निर्धारित आयकर प्राधिकरण व्यक्ति को त्रुटि की जानकारी दे सकता है तथा ऐसी सूचना की तिथि से अथवा आयकर प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत की जा सकने वाली ऐसी विस्तारित अवधि से तीस दिनों की अवधि के भीतर त्रुटि को संशोधित करने का अवसर दे सकते हैं।

यदि व्यक्ति कथित अवधि के भीतर त्रुटि को संशोधित करने में असफल रहता है तो ऐसे विवरण को अवैध विवरण के तौर पर समझा जाएगा तथा इस अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे जैसे कि ऐसा व्यक्ति विवरण को प्रस्तुत करने में विफल हुआ था

हालांकि, प्रभावी 1 सितंबर, 2019 से, यदि एक व्यक्ति विवरण में मिली किसी गलती को संबोधित करने में विफल रहता है तो इसे ऐसे व्यक्ति के तौर पर समझा जायगा जैसे उसने विवरण में गलत विवरण प्रस्तुत किया हो

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के असत्य अथवा दोषयुक्त विवरण को प्रस्तुत करने के नतीजे

आयकर अधिनियम की धारा 271चकक के अनुसार यदिधारा 285खक(1)(थ)b>थ) हेतु संदर्भित निर्धारित रिर्पोटयोग्य वित्तीय संस्थान, जिसे वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खातों को प्रस्तुत करना आपेक्षित है, विवरण में असत्य सूचना उपलब्ध कराता है तथा जहां :

(क) असत्यता धारा 285खक (7) के अंतर्गत निर्धारित * देय परिश्रमशीलता अनिवार्यता के अनुसार विफलता हेतु देय है अथवा उस व्यक्ति के भाग पर संकल्पित है

(ख) व्यक्ति विवरण की प्रस्तुति के समय असत्यता के बारे में जानता हो लेकिन निर्धारित आयकर प्राधिकारी अथवा ऐसे अन्य प्राधिकारी अथवा ऐजेंसी को सूचित न किया हो

(ग) विवरण के प्रस्तुति के पश्चात् असत्यता को पाता हो तथा धारा 285खक (6) के अंतर्गत निर्दिष्टानुसार 10 दिनों की अवधि के भीतर सही सूचना की जानकारी देने में विफल होता हो

तब, निर्धारित आयकर प्राधिकरण ऐसे व्यक्ति को जुर्माने के रूप में पचास हजार रूपए वसूलने का निर्देश दे सकते हैं

इसके अलावा, निर्धारण वर्ष 2023-24 से, यदि एसएफटी में कोई अशुद्धि है और ऐसी अशुद्धि रिपोर्ट करने योग्य खातों के धारक द्वारा प्रस्तुत झूठी या गलत जानकारी के कारण है, तो रिपोर्ट करने वाले वित्तीय संस्थान पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रतिवेदी वित्तीय संस्थान प्रतिवेदी खाते के धारक से ऐसी दंड राशि की वसूली भी कर सकता है।

पंजीकरण

तालिका (उपरोक्त) के कॉलम 3 में उल्लिखित प्रत्येक रिपोर्टिंग व्यक्ति प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) को नामित निदेशक और प्रधान अधिकारी का नाम, पदनाम, पता और टेलीफोन नंबर सूचित करेगा और एक पंजीकरण संख्या प्राप्त करेगा।

"नामित निदेशक" का अर्थ रिपोर्टिंग व्यक्ति द्वारा धारा 285खक और नियम 114ख से 114ङ के तहत लगाए गए दायित्वों के समग्र अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए नामित व्यक्ति है और इसमें शामिल हैंः

(i) यदि रिपोर्ट करने वाला व्यक्ति एक कंपनी है तो प्रबंध निदेशक या निदेशक मंडल द्वारा विधिवत अधिकृत एक पूर्णकालिक निदेशक;

(ii) प्रबंध भागीदार यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति एक साझेदारी फर्म है;

(ii) यदि रिपोर्ट करने वाला व्यक्ति एक स्वामित्व प्रतिष्ठान है तो स्वामी;

(iv) प्रबंध न्यासी यदि रिपोर्ट करने वाला व्यक्ति एक न्यास है;

(v) एक व्यक्ति या व्यक्ति, जो रिपोर्टिंग इकाई के मामलों को नियंत्रित और प्रबंधित करता है यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति एक अनिगमित संघ या, व्यक्तियों का निकाय या कोई अन्य व्यक्ति है।

विहित प्रतिवेदी वित्तीय संस्था द्वारा वित्तीय लेन-देन और प्रतिवेदी खाते का विवरण प्रस्तुत करना

निवासी और अनिवासी के संबंध में सूचना के प्रभावी आदान-प्रदान की सुविधा के लिए, धारा 285खक निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन या रिपोर्ट योग्य खाते के संबंध में निर्धारित रिपोर्टिंग वित्तीय संस्थान द्वारा विवरण प्रस्तुत करने के लिए भी प्रदान करता है। विवरण प्रत्येक कैलेंडर वर्ष के लिए अगले वर्ष के 31 मई को या उससे पहले प्रपत्र संख्या 61ख में प्रस्तुत किया जाएगा। [अधिक जानकारी के लिए, आयकर नियम, 1962 के नियम 114च, 114झ और 114ज देखें]

वार्षिक सूचना विवरणी को समझने पर एमसीक्यू

प्रश्न 1. ...................की मदद से कर प्राधिकरण वर्ष के दौरान व्यक्ति द्वारा उत्तरदायित्व लेनेदेन की कुछ निर्धारित उच्च राशि पर सूचना एकत्रित करता है।

(क) आय का रिटर्न (ख) टीडीएस/टीसीएस विवरण

(ग) रिर्पोटयोग्य खाते अथवा वित्तीय लेनदेन का विवरण (घ) कर अंकेक्षण रिपोर्ट

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

रपोर्टयोग्य खाते अथवा वित्तीय लेनदेन का विवरण की मदद से कर प्राधिकरण वर्ष के दौरान व्यक्ति द्वारा उत्तरदायित्व लेनदेन की कुछ निर्धारित उच्च राशि पर सूचना एकत्रित करता है।

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 2. आयकर नियम, 1962 के नियम 114ड के साथ पठित आयकर अधिनियम, 1961 की धारा .............. के अनुसार कुछ निर्दिष्ट उद्यमों को आयकर प्राधिकरण अथवा ऐसी अन्य निर्दिष्ट प्राधिकरण को वित्त वर्ष के दौरान उनके द्वारा किसी रिर्पोटयोग्य पंजीकृत/रिकॉर्डिड/अनुरक्षित खाते अथवा निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन के विवरण को प्रस्तुत करना आपेक्षित है।

(क) 285ख (ख) 285खक

(ग) 288क (घ) 288ख

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

आयकर नियम, 1962 के नियम 114ड के साथ पठित आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 285खक के अनुसार कुछ निर्दिष्ट उद्यमों (अर्थात् दाखिलकर्ता) को आयकर प्राधिकरण अथवा ऐसी अन्य निर्दिष्ट प्राधिकरण को वित्त वर्ष के दौरान उनके द्वारा किसी रिर्पोटयोग्य पंजीकृत/रिकॉर्डिड/अनुरक्षित खाते अथवा निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन के विवरण को प्रस्तुत करना आपेक्षित है।

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 3. वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का विवरण की गैर-प्रस्तुति धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माने को आकर्षित करेगी।

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का विवरण की गैर-प्रस्तुति धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माने को आकर्षित करेगी। जुर्माना डिफाल्ट की स्थिति में रू. 100 प्रतिदिन के हिसाब से लगाया जाएगा।

हालांकि, धारा 285खक (5) कर प्राधिकरण को अवधि के भीतर विवरण को दाखिल करने के निर्देश देने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी करने का अधिकार देता है अवधि ऐसे नोटिस के तामील की तिथि से 30 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा इस स्थिति में व्यक्ति को नोटिस की निर्धारित समय के भीतर विवरण प्रस्तुत करना होगा। यदि व्यक्ति निर्धारित समय के भीतर विवरण दाखिल करने में असफल होता है तो विवरण समाप्ति की प्रस्तुति के लिए ऐसे नोटिस में निर्दिष्ट समय के तुरंत आगामी तिथि से रू. 500 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 4. वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते के विवरण में असत्य ब्यौरे की प्रस्तुति धारा 271चकक के अंतर्गत आकर्षित करेगा।

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

आयकर अधिनियम की धारा 271चकक के अनुसार यदि धारा 285खक (1)(थ) में संदर्भित निर्धारित रिपोर्टिंग वित्तीय संस्थापन, जिसे वित्तीय लेनदेन अथवा रिर्पोटयोग्य खाते का विवरण प्रस्तुत करना आपेक्षित है, विवरण में असत्य सूचना उपलब्ध कराता है तथा जहां:

(क) असत्यता धारा 285खक (7) के अंतर्गत निर्धारित * देय परिश्रमशीलता अनिवार्यता के अनुसार विफलता हेतु देय है अथवा उस व्यक्ति के भाग पर संकल्पित है

(ख) व्यक्ति विवरण की प्रस्तुति के समय असत्यता के बारे में जानता हो लेकिन निर्धारित आयकर प्राधिकारी अथवा ऐसे अन्य प्राधिकारी अथवा ऐजेंसी को सूचित न किया हो

(ग) विवरण के प्रस्तुति के पश्चात् असत्यता को पाता हो तथा धारा 285खक (6) के अंतर्गत निर्दिष्टानुसार 10 दिनों की अवधि के भीतर सही सूचना की जानकारी देने में विफल होता हो तब, निर्धारित आयकर प्राधिकरण ऐसे व्यक्ति को जुर्माने के रूप में पचास हजार रूपए वसूलने का निर्देश दे सकते हैं।

इसके अलावा, निर्धारण वर्ष 2023-24 से, यदि एसएफटी में कोई अशुद्धि है और ऐसी अशुद्धि रिपोर्ट करने योग्य खातों के धारक द्वारा प्रस्तुत झूठी या गलत जानकारी के कारण है, तो रिपोर्ट करने वाले वित्तीय संस्थान पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। प्रतिवेदी वित्तीय संस्थान प्रतिवेदी खाते के धारक से ऐसी दंड राशि की वसूली भी कर सकता है।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है