संयुक्त अरब अमीरात : संश्लेषित पाठ
हस्ताक्षर तिथि
2019
लागू होना
11/09/2019
आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण (एमएलआर्इ) को रोकने के लिए
कर संधि संबधी उपायों को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते का
संश्लेषित विषय
और
आय और पूंजी पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए
भारतीय गणतांत्रिक सरकार
और
संयुक्त अरब अमीरात
के बीच
समझौता
संश्लेषित विषय दस्तावेज पर सामान्य अस्वीकरण
यह दस्तावेज 29 अप्रैल, 1992 को हस्ताक्षरित आय और पूंजी पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतंत्र सरकार और संयुक्त अरब अमीरात की सरकार के बीच समझौते को लागू करने के लिए संश्लेषित विषय को प्रस्तुत करता है जिसे क्रमश: 26 मार्च, 2007 और 16 अप्रैल, 2012 (तत्पश्चात् "समझौते" के तौर पर संदर्भित) को हस्ताक्षरित प्रोटोकॉल द्वारा संशोधित किया गया जिसे दुबारा भारतीय द्वारा 7 जून, 2017 को और संयुक्त अरब अमीरात को 27 जून, 2018 (एमएलआर्इ) द्वारा हस्ताक्षरित आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण को रोकने के उपायों से संबंधित कर संधि को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते द्वारा संशोधित किया गया था। इस दस्तावेज को भारत और संयुक्त अरब अमीरात के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया था और एमएलआर्इ द्वारा समझौते के लिए किए गए संशोधनों की अपनी सांझा समझ को दर्शाता है। दस्तावेज को 25 जून 2019 को संशोधन करने पर निक्षेपागार (आर्थिक समन्वय एवं विकास संगठन के महासचिव) को जमा भारत की एमएलआर्इ स्थिति और 29 मर्इ, 2019 को संशोधन करने पर निक्षेपागार को जमा संयुक्त अरब अमीरात की एमएलआर्इ स्थिति के आधार पर तैयार किया गया था। यह एमएलआर्इ स्थितियां संशोधनों का विषय हैं जिसे एमएलआर्इ में मुहैया कराया गया है। एमएलआर्इ स्थितियों हेतु किए गए संशोधन समझौते पर एमएलआर्इ के प्रभावों को संशोधित कर सकते हैं। इस दस्तावेज का एकमात्र उद्देश्य समझौते के लिए एमएलआर्इ को लागू करने की समझ को सुविधाजनक बनाना है और दस्तावेज कानून के स्रोत का अंश नहीं है। समझौते और एमएलआर्इ के प्रमाणिक कानूनी विषय अग्रणी होगे ओर लागू होने वाले कानूनी विषय हैं। एमएलआर्इ के प्रावधान जो समझौते के प्रावधानों के संबंध में लागू होते है वह समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के संदर्भ में इस दस्तावेज के संपूर्ण बॉक्स में शामिल हैं। एमएलआर्इ के प्रावधानों के विषय में परिवर्तन एमएलआर्इ के प्रावधानों की समझ को सुविधाजनक बनाने के लिए समझौत (जैसे "अंतर्निहित कर समझौता" को "समझौते" से और "संविदाकारी क्षेत्राधिकार" से "संविदाकारी राष्ट्र") में प्रयोग शब्दावली को पुष्ट करने के लिए किया गया है। इसी प्रकार, एमएलआर्इ के प्रावधानों के अंशों में भी परिवर्तन किए गए है जो समझौते के मौजूदा प्रावधानों का वर्णन करते हैं जैसे वर्णनात्मक भाषा को पठनीयता को सुविधाजनक बनाने के मौजूदा प्रावधानों के कानूनी संदर्भ द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। यह परिवर्तन दस्तावेज की पठनीयता को बेहतर करने के लिए है और ना कि एमएलआर्इ के प्रावधानों के अर्थ को परिवर्तित करने के लिए। जबतक संदर्भ द्वारा अन्यथा आवश्यक न हो, समझौते के प्रावधान हेतु किए गए संदर्भ को समझौते के प्रावधानों हेतु संदर्भित करने के तौर पर समझा जाएगा जिसे एमएलआर्इ के प्रावधानों द्वारा संशोधित किया गया है। संदर्भ एमएलआर्इ का प्रमाणिक कानूनी विषय एमएलआर्इ निक्षेपागार (ओर्इसीडी) वेबपेज पर मिल सकता है : https://www.oecd.org/tax/treaties/multilateral-convention-to-implement-tax-treaty-related-measures-to-prevent-BEPS.pdf; समझौते (अंग्रेजी में) का प्रमाणिक कानूनी विषय निम्नलिखित लिंक पर मिल सकता है : https://www.incometaxindia.gov.in/pages/international-taxation/data.aspx 25 जून 2019 को संशोधन करने पर निक्षेपागार को जमा भारत की एमएलआर्इ स्थिति और 29 मर्इ, 2019 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा संयुक्त अरब अमीरात की एमएलआर्इ स्थिति एमएलआर्इ निक्षेपागार (ओर्इसीडी) वेबपेज पर मिल सकती है। |
एमएलआर्इ के प्रावधानों को प्रभावी करने हेतु प्रविष्टि का अस्वीकरण एमएलआर्इ के प्रभावी प्रावधान समझौते हेतु लागू एमएलआर्इ के प्रावधान उसी तिथि को प्रभावी नहीं होगे जिस दिन समझौते के मूल प्रावधान प्रभावी हुए। एमएलआर्इ के प्रत्येक प्रावधान विभिन्न तिथियों पर प्रभावी हो सकता है जो शामिल करों के प्रकार पर (स्रोत पर कर हटाया गया या अन्य कर लगाए गए) और भारत और संयुक्त अरब अमीरात के एमएलआर्इ प्रावधानों में उनके द्वारा की गर्इ विकल्पों पर निर्भर करता है। संशोधन के साधनों को जमा करने की तिथि : भारत के लिए 25 जून 2019 और संयुक्त अरब अमीरात के लिए 01 सिंतबर, 2019 एमएलआर्इ के प्रारंभ होने की तिथि : भारत के लिए 01 अक्टूबर 2019 और संयुक्त अरब अमीरात के लिए 01 सिंतबर, 2019 एमएलआर्इ के प्रावधान समझौते के संबंध में प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी रहेगा क) भारत में (i) अनिवासी को दी गर्इ या जमा की गर्इ राशि पर स्रोत पर करों पर कटौती लगाने के लिए, जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 अप्रैल 2020 को या उसके बाद होती हो (ii) भारत द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संबंध में, 1 अप्रैल, 2020 को या उसके बाद प्रारंभ हुर्इ करयोग्य अवधि के संबंध में ख) संयुक्त अरब अमीरात में (i) अनिवासी को दी गर्इ या जमा की गर्इ राशि पर स्रोत पर कर कटौती लगाने के लिए, जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 अप्रैल 2020 को या उसके बाद होती हो (ii) 1 अप्रैल, 2020 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाली करयोग्य अवधि के संबंध में लगाए गए करों के लिए संयुक्त अरब अमीरात द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संबंध में |
भारतीय गणतांत्रिक सरकार और संयुक्त अरब अमीरात की सरकार आय और पूंजी पर करों के संबंध में वित्तीय अपवंचन की रोकथाम और दोहरे कराधान के परिहार के समझौते को अंतिम रूप देकर आपसी आर्थिक संबंधों को प्रोत्साहित करने के इच्छुक है जिस पर वह निम्नानुसार सहमत हुए हैं
एमएलआर्इ के अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 1 में वर्णित निम्नलिखित प्रस्तावना विषय को समझौते की प्रस्तावना में शामिल किया गया है एमएलआर्इ का अनुच्छेद 6 - एक अंतर्निहित कर समझौते का उद्देश्य कर परिहार या अपवंचन (तीसरे क्षेत्राधिकार के निवासी के अप्रत्यक्ष लाभ के लिए समझौते में मुहैया कराए गए राहत को प्राप्त के उद्देश्य से ट्रीटी-शॉपिंग व्यवस्था के माध्यम सहित) के माध्यम से कम किए गए कर या गैर-कराधान के लिए अवसर बनाए बिना समझौते द्वारा अंनर्निहित करों के संबंध में दोहरे कराधान को समाप्त |
अनुच्छेद 1
व्यक्तिगत क्षेत्र
यह समझौता उन व्यक्तियों पर लागू होगा जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के निवासी हैं
अनुच्छेद 2
सम्मिलित कर
1. आय और पूंजी पर कर समझा जाएगा चल या अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति साथ ही पूंजी अभिमूल्यन पर कर सहित, कुल पूंजी पर या आय या पूंजी के घटक पर, कुल आय पर अधिरोपित सभी कर माना जाएगा।
2. मौजूदा कर जिस पर समझौता लागू होता है :
(क) संयुक्त अरब अमीरात में
(i) आयकर
(ii) निगमित कर
(iii) संपत्ति कर
(तत्पश्चात् "यू.ए.र्इ. कर" के तौर पर संदर्भित)
(ख) भारत में
(i) आयकर उसपर अधिभार सहित
(ii) अधिकर
(iii) संपत्ति कर
(तत्पश्चात् "भारतीय कर" के तौर पर संदर्भित)
3. यह समझौता आय या पूंजी पर किसी समान या वास्तव करों के लिए लागू होगा जिसको इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 2 में संदर्भित करों के अतिरिक्त, या के स्थान पर किसी भी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा फैडरल या राज्य स्तर पर अधिरोपित किया जाता है। संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी किसी वास्तविक परिवर्तनों जिनको उनके संबंधित कराधान कानूनों में किया गया है, को एक दूसरे को अधिसूचित करेंगे ।
अनुच्छेद 3
सामान्य परिभाषा
1. इस समझौते में, जबतक संदर्भ अन्यथा आवश्यक न हो
(क) शब्द "भारत" का अर्थ भारत का क्षेत्र है जिसमें प्रादेशिक समुद्र और उसके ऊपर हवाई क्षेत्र शामिल है, साथ ही कोर्इ अन्य समुद्री सीमा जिसमें भारत का संप्रभु अधिकार है, अन्य अधिकार और क्षेत्राधिकार है, अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार और भारतीय कानून के अनुसार
(ख) शब्द "यू.ए.र्इ." का अर्थ है संयुक्त अरब अमीरात जब भौगोलिक संदर्भ में प्रयोग किया जाए तो इसका अर्थ है संयुक्त अरब अमीरात का क्षेत्र जिसमें इसका क्षेत्रीय समुद्र शामिल है जहां यू.ए.र्इ. कर से संबंधित कानून प्रभावी होते है और इसके प्रादेशिक समुद्र से बाहर का क्षेत्र जिसमें उसका समुद्र तल और अधोभूमि जिस पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार यू.ए.र्इ. का क्षेत्राधिकार है जहां यू.ए.र्इ. से संबंधित कानून प्रभावी होते हैं
(ग) शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र", का अर्थ यू.ए.र्इ. या भारत से है, जैसा संदर्भ में आवश्यक है
(घ) शब्द "कर" का अर्थ है "भारतीय कर" या "यू.ए.र्इ. कर" जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक है, लेकिन ऐसी कोर्इ राशि शामिल नहीं होगी जो उन करों के संबंध में किसी चूक या गलती के संबंध में देययोग्य है जिस पर यह समझौता लागू होता है या जो उन करों के संबंध में अधिरोपित जुर्माने को प्रस्तुत करता है
(ड़) शब्द "व्यक्ति" जिसमें एक व्यक्ति, एक कंपनी, एक व्यक्तियों की निकाय शामिल है जिसको संबंधित संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी काराधान कानूनों के अंतर्गत करयोग्य यूनिट के तौर पर समझा जाता है
(च) शब्द "कंपनी" का अर्थ कोर्इ निकाय निगमित या कोर्इ उद्यम जिसको संबंधित संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कराधान कानूनों के अंतर्गत एक कंपनी या निगमित निकाय के तौर पर समझा जाता है
(छ) शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम" का अर्थ क्रमश: एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा संचालित एक उद्यम से है
(ज) शब्द "राष्ट्रीय" का अर्थ :
(i) यू.ए.र्इ. के मामले में सभी व्यक्ति जिनके पास यू.ए.र्इ. के कानूनों के अनुसार यू.ए.र्इ. की राष्ट्रीयता है और अन्य कोर्इ कानूनी व्यक्ति, सहभागी और अन्य निगमित निकाय जो यू.ए.र्इ. कानूनों से ऐसी स्थिति को प्राप्त करते हैं
(ii) भारत के मामले में कोर्इ व्यक्ति जिनके पास भारत की राष्ट्रीयता है और कोर्इ कानूनी व्यक्ति, सहभागी या संघ जो भारत में प्रभावी कानूनों से अपनी स्थिति को प्राप्त करता है
(झ) शब्द "अंतरराष्ट्रीय यातायात" का अर्थ एक उद्यम द्वारा संचालित एक जहाज या वायुयान द्वारा कोर्इ परिवहन जिसके पास एक संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी प्रबंधन का स्थान हो लेकिन तब छोड़कर जब जहाज या वायुयान अन्य संविदाकारी राष्ट्र में के बीच ही संचालित होता हो
(ञ) शब्द "सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ है:
(i) यू.ए.र्इ. की स्थिति में वित्त एवं उद्योग मंत्री व उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि
(ii) भारत के मामले में, केंद्रीय वित्त मंत्रालय में सरकार (राजस्व विभाग) या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि
2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा समझौते को लाग करने के संबंध में उसमें निर्दिष्ट न हुआ कोर्इ शब्द, जबतक संदर्भ अन्यथा आवश्यक न हो, का अर्थ होगा जो करों जिस पर समझौते लागू होते हैं, से संबंधित उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत है
अनुच्छेद 4
निवासी
1. इस समझौते के लिए शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी" का अर्थ है :
(क) भारत के मामले में , कोर्इ भी व्यक्ति जो भारतीय कानून के अंतर्गत अपने निवास, अधिवास, निवास, प्रबंधन की जगह या इसी प्रकार के अन्य मापदंड के कारण द्वारा उसमें कर देने के लिए उत्तरदायी है। इस शब्द में हालांकि वह व्यक्ति शामिल नहीं है जो भारत में स्रोत से आय के संबंध में ही भारत में कर के लिए उत्तरदायी है और
(ख) संयुक्त अरब अमीरात के मामले में एक व्यक्ति जो संबंधित कैलेंडर वर्ष में कम से कम 183 दिनों की कुल अवधि या अवधियों के लिए यू.ए.र्इ. में मौजूद हो और एक कंपनी जो यू.ए.र्इ. में निगमित हो और जो यू.ए.र्इ. में पूरी तरीके से प्रबंधित और नियंत्रित हो
2. पैराग्राफ 1 के उद्देश्य के लिए :
(क) भारतीय गणतंत्र में, इसके राजनीतिक उप-संभाग या उसके स्थानीय प्राधिकारी को भारतीय गणतंत्र के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा
(ख) संयुक्त अरब अमीरात और इसके राजनीतिक उप-संभाग या स्थानीय सरकार को संयुक्त अरब अमीरात के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा
(ग) सरकारी संस्थानों को संबद्धीकरण के अनुसार भारतीय गणतंत्र या संयुक्त अरब अमीरात के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा। किसी संस्थान को सरकारी संस्थान होने के तौर पर समझा जाएगा जिसको किसी भी संविदाकारी राष्ट्र की सरकार या इसके राजनीतिक उप-संभाग या स्थानीय प्राधिकारी/सरकारों द्वारा बनाया गया हो, जो संविदाकारी राष्ट्र की सरकार या राजनीतिक उप-संभाग या स्थानीय प्राधिकारी/सरकारों द्वारा पूर्णता स्वामित्व वाली कंपनी हो और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित होती हेा जिनको संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों के आपसी समझौतों द्वारा प्राधिकृत किया गया हो।
(घ) इस अनुच्छेद के लिए, अबू धाबी निवेश प्राधिकारी को संयुक्त अरब अमीरात के निवासी के तौर पर समझा गया है।
3. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारणों द्वारा एक व्यक्ति दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है तो उसकी स्थिति निम्नानुसार निर्धारित होगी :
(क) उसके केवल उस राष्ट्र में ही निवासी होना समझा जाएगा जिसमें उसके लिए स्थार्इ आवास उपलब्ध है, यदि उसको दोनों राष्ट्रों में उसके लिए स्थार्इ गृह हो, उसे उसी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा जिसके साथ उसके निजी और आर्थिक संबंध घनिष्ठ है (महत्पूर्ण हितों का केंद्र)
(ख) यदि राष्ट्र जिसमें उसके महत्वपूर्ण हितों का केंद्र निर्धारित न किया जा सके या उसके पास किसी भी राष्ट्र में कोर्इ स्थार्इ आवास उपलब्ध न हो तो उसी राष्ट्र में निवासी के तौर पर समझा जाएगा जिसका वह आदतन निवासी है
(ग) यदि वह आदतन दोनों राष्ट्रों में रहता हो या दोनों में से किसी में न रहता हो तो उसे उसी राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जिसका वह नागरिक है
(घ) यदि वह दोनों राष्ट्रों का नागरिक है या किसी का नागरिक नहीं है तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी सहमति द्वारा विवाद का निपटारा करेंगे
4. जहां पैराग्राफ (1) के प्रावधानों के कारण एक व्यक्ति को छोड़कर एक इंसान दोनों संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो तो इसे उस राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा जिसमें इसके प्रभावी प्रबंधन का स्थान स्थित है।
अनुच्छेद 5
स्थायी प्रतिष्ठान
1. इस समझौते के लिए, शब्द "स्थायी स्थापना" का अर्थ एक व्यापार जिसके माध्यम से एक उद्यम का व्यापार आंशिक या पूर्ण रूप से चलता है, का एक निश्चित स्थान है।
2. शब्द "स्थायी स्थापना" में विशेष रूप से शामिल हैं:
(क) प्रबंधन का एक स्थान
(ख) एक शाखा
(ग) एक कार्यालय
(घ) एक फैक्ट्री
(ड़) एक कार्यशाला;
(च) एक खान, एक तेल या गैस का कुआं से, एक खदान या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए अन्य कोर्इ जगह
(छ) एक कृषि भूमि या वृक्षारोपण
(ज) एक निर्माण स्थल या कंस्ट्रक्शन या असेंबली परियोजना या उससे संबंधित पर्यवेक्षी गतिविधियां लेकिन केवल वहीं जहां ऐसी साइट, परियोजना या गतिविधि 9 महीनों से अधिक अवधि के लिए जारी रहती है
(झ) अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर्मचारियों या अन्य कर्मियों के माध्यम से एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा परार्मश सेवाओं सहित सेवाएं देना बशर्ते कि ऐसी गतिविधियां किसी बारह महीने की अवधि के अंदर 9 महीनों से कुल अवधि या अवधियों के लिए उसी परियोजना या संबंधित परियोजना के लिए ऐसी गतिविधियां जारी रहती है।
3. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के होते हुए भी शब्द "स्थार्इ संस्थापन" निम्न को शामिल न करने के लिए समझा जाएगा
(क) सुविधा का प्रयोग केवल उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल के भंडारण, प्रस्तुति या कभी-कभार की सुपुर्दगी के लिए ही है
(ख) उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल के भंडार का रखरखाव केवल भंडारण, प्रदर्शन या कभी-कभार की सुपुर्दगी के लिए ही है
(ग) अन्य उद्यम द्वारा प्रसंस्करण के एकमात्र उद्देश्य के लिए ही उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल का रखरखाव
(घ) उद्यम के लिए सूचना को एकत्रित करने के या उत्पाद या व्यापारिक माल की खरीद के एकमात्र उद्देश्य के लिए व्यापार के निश्चित स्थान का अनुरक्षण
(ड़) एक प्रारंभिक या सहायक स्वरूप की अन्य कोर्इ गतिविधि करने के एकमात्र उद्देश्य, उद्यम हेतु, के लिए ही व्यापार का एक निश्चित स्थान
4. पैराग्राफ (1) और (3) के प्रावधान होते हुए भी जहां एक व्यक्ति - एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के एजेंट को छोड़कर जिस पर पैराग्राफ (5) लागू होते हो - एक उद्यम की ओर से कार्यरत हो और उद्यम की ओर से समझौतों को अंतिम रूप देने के लिए एक संविदाकारी राष्ट्र में आदतन कार्य करता हो तो उस उद्यम को किसी गतिविधियों के संबंध में उस राष्ट्र में स्थार्इ प्रतिष्ठान होने के तौर पर समझा जाएगा जो व्यक्ति उद्यम के लिए करता है, जबतक ऐसे व्यक्ति की गतिविधियां उद्यम के लिए उत्पाद या कारोबारी माल की खरीद तक सीमित न हो।
5. एक उद्यम केवल इसलिए ही एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ संस्थापन होने के तौर पर नहीं समझा जाएगा क्योंकि ब्रोकर, साधारण कमीशन एजेंट या अन्य किसी स्वतंत्र स्वरूप के अन्य एजेंट के माध्यम से उस राष्ट्र में व्यापार करता है बशर्ते कि ऐसा व्यक्ति अपना साधारण व्यापार करता हो। हालांकि ऐसा एक एजेंट उद्यम की ओर से पूर्णता या लगभग पूर्ण रूप से की गतिविधियां करता हो तो उसे इस पैराग्राफ के अर्थ के अंतर्गत एक स्वतंत्र एजेंट के तौर पर नहीं समझा जाएगा।
अनुच्छेद 6
अचल संपत्ति से आय
1. अन्य संविदकारी राष्ट्र में स्थित (कृषि वानिकी से आय सहित) अचल संपत्ति से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त आय अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।
2. शब्द "अचल संपत्ति" का अर्थ वही होगा जैसा संविदाकारी राष्ट्र जिसमें संपत्ति का सवाल मौजूद है, के कानून के अंतर्गत है। शब्द किसी भी मामले में अचल संपत्ति, पशुधन और कृषि और वानिकी में प्रयोग उपकरण हेतु सहायक संपत्ति, अधिकार जिसके लिए संबंधित भूमि-संपत्ति के सामान्य कानून के प्रावधान लागू होते हैं, अचल संपत्ति का उपभोग और परिवर्तनशील या निश्चित भुगतान के अधिकार जिसे खनिज निक्षेप, स्रोत और अन्य प्राकृतिक संसाधन, समुद्री जहाज, नाव और वायुयान के कार्य करने या कार्य करने के अधिकार को अचल संपत्ति के तोर पर नहीं समझा जाएगा, को शामिल करेगा।
3. पैराग्राफ (1) के प्रावधान अचल संपत्ति के प्रत्यक्ष प्रयोग, या भाड़े पर देने या किसी अन्य रूप में प्रयोग करने से प्राप्त आय के तौर पर लागू नहीं होंगे।
4. पैराग्राफ 1 और 3 के प्रावधान भी एक उद्यम की अचल संपत्ति से आय और स्वतंत्र निजी सेवाएं देने के लिए प्रयोग की गर्इ अचल संपत्ति से आय के लिए लागू होंगे।
अनुच्छेद 7
व्यापार के लाभ
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होंगे जबतक उद्यम उसमें स्थित स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है। यदि उद्यम उक्त कथितानुसार व्यापार करता है तो उद्यम का लाभ अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है लेकिन केवल उतना जो उस स्थार्इ प्रतिष्ठान से संबंधित हो।
2. पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के अनुसार, जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उसमें स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है तो उस स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभ प्रत्येक संविदकारी राष्ट्र में होगा जिसे प्राप्त किए जाने की संभावना है यदि यह अलग होता और अलग उद्यम उसी या उसी प्रकार की शर्तों के अंतर्गत उसी या उसी प्रकार की गतिवधियों में संलग्न होता और उस उद्यम के साथ पूर्ण रूप से स्वतंत्र होने के तौर पर व्यवहार करता जिसका वह एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन है।
3. एक स्थायी प्रतिष्ठान के मुनाफे का निर्धारण करने में,कटौती खर्च के रूप में वहाँ की अनुमति दी जाएगी जो स्थायी प्रतिष्ठान के व्यापार के लिए व्यय हुए, जिसमें ऐसे किए गए कार्यपालिका और सामान्य प्रशासनिक व्यय शामिल है, चाहे यह उस राज्य में किए गए हो जहां स्थार्इ प्रतिष्ठापन स्थित है या कही और, उस राष्ट्र के कर कानून की सीमाओं के अनुसार और के मुताबिक।
4. जहां तक कि उद्यम के विभिन्न भागों हेतु उद्यम के कुल लाभ के विभाजन के आधार पर एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभ को निर्धारित करने के लिए एक संविदाकारी राष्ट्र में इसे प्रथागत किया गया है पैराग्राफ 2 में कुछ भी ऐसे एक विभाजन, जिसे प्रथागत किया जा सकता है, द्वारा करारोपित किए जाने वाला लाभ को निर्धारित करने से उस संविदाकारी राष्ट्र को नही रोक सकेगा, हालांकि विभाजन की विधि ऐसी हो कि परिणाम इस अनुच्छेद में शामिल सिद्धांतों के अनुसार होगा।
5. कोई लाभ उद्यम के लिए उत्पाद या व्यापारिक माल उसे स्थायी प्रतिष्ठान द्वारा मात्र खरीद की वजह से एक स्थायी स्थापना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा.।
6. पूर्ववर्ती पैराग्राफ के लिए, स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभों को वर्ष दर वर्ष उसी विधि द्वारा निर्धारित किया जाएगा जबतक विरोध करने का कोर्इ सही या उचित कारण न हो ।
7. जहां लाभ में आय की मद शामिल हो जो इस समझौते के अन्य अनुच्छेद में पृथक रूप से व्यवहारित होती है तो इन अनुच्छेदों के प्रावधान इस अनुच्छेद के प्रावधानों द्वारा प्रभावित नहीं होंगे।
अनुच्छेद 8
शिपिंग
1. अंतरराष्ट्रीय यातायात में उस उद्यम द्वारा जहाज के संचालन से एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्राप्त लाभ केवल उस राज्य में कर योग्य होगा।
2. इस अनुच्छेद के लिए, अंतर्राष्ट्रीय यातायात में जहाजों या विमानों से लाभ का अर्थ यात्रियों, उत्पाद, मेल या पशुधन के समुद्र या वायुयान द्वारा स्थानांतरण से पैराग्राफ 1 में संदर्भित उद्यम द्वारा प्राप्त लाभ में शामिल होगा।
(क) ऐसे परिवहन हेतु प्रासंगिक चार्टर या किराये के जहाज
(ख) अंतर्राष्ट्रीय यातायात में जहाजों के संचालन के संबंध में प्रयुक्त कटेंनरों और संबंधित उपकरणों का किराया
(ग) जहाज, कंटेनर और संबंधित स्वामित्व वाले उपकरणों के हस्तांतरण से प्राप्त प्राप्ति और अंतर्राष्ट्रीय यातायात में उद्यम द्वारा संचालन
3. इस अनुच्छेद के लिए, अंतर्राष्ट्रीय यातायात में जहाजों के संचालन से संबधित कोष पर ब्याज को ऐसे जहाजों के संचालन से प्राप्त लाभ के तौर पर समझा जाएगा और ऐसे ब्याज के संबंध में अनुच्छेद 11 के प्रावधान लागू नहीं होगे।
4. पैराग्राफ (1), (2) और (3) के प्रावधान एक पूल, एक संयुक्त व्यापार या एक अंतर्राष्ट्रीय संचालन एजेंसी में भागीदारी से लाभ हेतु लागू होंगे।
अनुच्छेद 9
संबंद्ध उद्यम
जहां :
(क) एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम प्रबंधन, नियंत्रण या अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेता है, या
(ख) एक ही व्यक्ति, प्रबंधन, नियंत्रण या एक संविदकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाग लेते हैं
और किसी भी मामले में शर्तें बनार्इ गर्इ हों या उनके वाणिज्यिक या वित्तीय संबंधों में दो उद्यमों के बीच अधिरोपित होती हो जो उनसे अलग है जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच बनार्इ गर्इ हो तो कोर्इ लाभ जो, लेकिन उन शर्तों के लिए, एक उद्यमों हेतु उपार्जित हो जाता लेकिन उन शर्तों की वजह से उपार्जित नही हो सका, उसे उस उद्यम के लाभ में शामिल किया जा सकता है और तद्नुसार करारोपित हो सकती है
एमएलआर्इ के अनुच्छेद 17 का निम्नलिखित पैराग्राफ 1 इस समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन एवं लागू करता है : एमएलआर्इ का अनुच्छेद 17 - अनुरूप समायोजन जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उस राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ में शामिल हो - और तद्नुसार कर - लाभ जिस पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम को उस अन्य राष्ट्र में कर देना पड़ा हो और ऐसा शामिल लाभ वह लाभ हो जो प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र के उद्यम हेतु प्राप्त किया गया होता यदि दोनों उद्यमों के बीच की गर्इ शर्ते वह थी जिनको निजी उद्यमों के बीच किया गया होता तो अन्य राष्ट्र उन लाभों पर उसमें लगाए गए करों की राशि का उपयुक्त समायोजन करेगा। ऐसे समायोजन को निर्धारित करने के लिए इस समझौते के अन्य प्रावधानों हेतु यथोचित संबंध होना चाहिए था और संविदाकारी राष्ट्र यदि आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे। |
अनुच्छेद 10
लाभांश
1. एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है द्वारा अन्य संविदाकारी राष्ट्र को दिया गया लाभांश उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।
2. हालांकि, ऐसे लाभांश तद्नुसार उस राष्ट्र के कानून के अनुसार उस एक संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकता है जिसकी लाभांश देने वाली कंपनी एक घरेलू कंपनी है लेकिन यदि प्राप्तकर्ता लाभांश का लाभार्थी मालिक है तो ऐसा लगाया गया कर 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा
3. शब्द "लाभांश" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग हुआ है का अर्थ शेयर या अन्य अधिकार, ऋण-दावे के तौर पर नहीं, भागीदारी लाभ साथ ही साथ अन्य निगमित अधिकार से आय जो उसी कराधान उपचार के अनुसार है जैसे राष्ट्र जिसकी वितरण करने वाली कंपनी घरेलू हैं, के कानून द्वारा शेयरों से आय
4. पैराग्राफ (1) और (2) के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि लाभांश के लाभार्थी स्वामी, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर, उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसका लाभांश देने वाली कंपनी निवासी है, वहां स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से, या वहां स्थित एक निश्चित आधार से उस अन्य राष्ट्र की स्वतंत्र सेवाओं में निष्पादित करता हो और स्वामित्व जिसके संबंध में दिए गए लाभांश ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित बेस से प्रभावी रूप से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 और अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधन लागू होंगे।
5. जहां एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है अन्य संविदाकारी राष्ट्र से आय या लाभ प्राप्त करता है तो वह राष्ट्र कंपनी द्वारा दिए गए लाभांश पर कोर्इ कर अधिरोपित नहीं कर सकता, केवल जहां तक ऐसे लाभांश उस अन्य राष्ट्र के निवासी को दिए गए हो या जहां तक घारण जिसके संबंध में दिए गए लाभांश एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन से प्रभावी रूप से संबंधित हो या उस अन्य राष्ट्र में स्थित निश्चित बेस, ना तो कंपनी के अविभाजित लाभ का विषय है ना ही कंपनी के अविभाजित लाभ पर कर का विषय, भले ही लाभांश दिया गया हो या अवितरित लाभ में ऐसे अन्य राष्ट्र में उत्पन्न आय या लाभ के पूर्ण या आंशिक लाभ शामिल हो।
अनुच्छेद 11
ब्याज
1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न ब्याज और अन्य संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है
2. हालांकि, ऐसा ब्याज उस संविदाकारी राष्ट्र में भी लग सकता है जिसमें यह उत्पन्न होता है और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार, लेकिन यदि प्राप्तकर्ता ब्याज का लाभार्थी स्वामी है तो ऐसा वसूला गया ब्याज अधिक नहीं होगा :
(क) ब्याज की कुल राशि के 5 प्रतिशत से अधिक यदि ऐसा ब्याज एक वास्तविक बैंकिंग व्यापार या एक समकक्ष वित्तीय संस्थान करने वाले एक बैंक द्वारा दिए गए ऋण पर दिया जाता है; और
(ख) अन्य सभी मामलों में ब्याज की कुल राशि का 12.5 प्रतिशत
3. पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदकारी राष्ट्र में उत्पन्न ब्याज उस राष्ट्र में कर से छूट है बशर्ते कि यह निम्न द्वारा प्राप्त किया गया हो और इसके लाभकारी रूप से मिला हो
(i) अन्य संविदाकारी राष्ट्र की सरकार, एक राजनीतिक उपसंभाग या एक स्थानीय प्राधिकारी या
(ii) अन्य संविदाकारी राष्ट्र के सेंट्रल बैंक
4. शब्द "ब्याज" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है का अर्थ है प्रत्येक प्रकार के ऋण दावों से आय, चाहे गिरवी राशि द्वारा सुरक्षित हो या नही और चाहे ऋणी के लाभ में भागीदार होने का अधिकार हो या नहीं और विशेषकर सरकारी प्रतिभूतियों से आय और प्रीमियम सहित बांड या डिबेंचर से आय और ऐसी प्रतिभूतियों, बांड या डिबेंचर से संबंधित पुरस्कार। विलंबित भुगतान के लिए जुर्माना शुल्क को इस अनुच्छेद के लिए ब्याज के तौर पर नहीं समझा जाएगा।
5. पैराग्राफ (1) और (2) के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर ब्याज के लाभार्थी मालिक उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसमें वहां स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से ब्याज उत्पन्न होता हो या वहां स्थित एक निश्चित स्थान से उस अन्य राष्ट्र में स्वतंत्र निजी सेवाएं देता हो और ऋण दावा जिसके संबंध में दिया गया ब्याज प्रभावी रूप से ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी मामला हो, के प्रावधान लागू होंगे
6. ब्याज को एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जब अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो जहां हालांकि ब्याज देने वाला व्यक्ति चाहे वह एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो या नहीं, का एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हो या उसके संबंध में निश्चित आधार है जिसके संबंध में ऋणग्रस्तता जिस पर दिया गया ब्याज व्यय किया गया है और ऐसे ब्याज ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान द्वारा वहन किए गए हो और ऐसे ब्याज ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार द्वारा वहन किए जाते हो तो ऐसे ब्याज उस राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जिसमें स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार स्थित है
7. जहां, अदाता और लाभार्थी मालिक के बीच या दोनों के बीच या कुछ व्यक्तियों के बीच एक विशेष संबंध के कारण ब्याज की राशि, ऋण-दावे जिसके लिए यह दिया जाता है, को ध्यान में रखते हुए ब्याज की राशि के उस राशि से अधिक होने पर, जो ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता और लाभार्थी मालिक द्वारा सहमति हो जाती, इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होंगे। ऐसे मामले में भुगतान का अतिरिक्त हिस्सा प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों को देखते हुए।
अनुच्छेद 12
रॉयल्टी
1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न रायल्टी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को भुगतान उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है
2. हालांकि, ऐसी रॉयल्टी उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकती हैं जिसमें यह उत्पन्न होती है और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करारोपित हो सकती है लेकिन यदि रॉयल्टी का लाभार्थी स्वामी अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो, ऐसा वसूला गया कर रॉयल्टी की कुल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
3. शब्द "रॉयल्टी" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है का अर्थ है रेडियो या टेलिविजन ब्राडकास्टिंग के लिए प्रयुक्त सिनेमा फिल्म या फिल्त या टेप, कोर्इ पेंटेट, ट्रेडमार्क, डिजाइन या मॉडल, प्लान, गुप्त योजना या प्रक्रिया या प्रयोग के लिए या प्रयोग के अधिकार, औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक उपकरण या औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक प्रयोग संबंधी सूचना सहित साहित्यिक या वैज्ञानिक कार्य के प्रयोग के लिए या प्रयोग के अधिकार के लिए प्रतिफल के तौर पर प्राप्त किसी भी प्रकार का भुगतान है लेकिन पेट्रोलियम या अन्य प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण या खदान या खान के संचालन के संबंध में रॉयल्टी या अन्य भुगतान शामिल नहीं है
4. पैराग्राफ (1) और (2) के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर रॉयल्टी के लाभार्थी मालिक उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसमें वहां स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से रॉयल्टी उत्पन्न होती हो या वहां स्थित एक निश्चित स्थान से उस अन्य राष्ट्र में स्वतंत्र निजी सेवाएं देता हो और ऋण दावा जिसके संबंध में दी गर्इ रॉयल्टी प्रभावी रूप से ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी मामला हो, के प्रावधान लागू होंगे
5. रॉयल्टी को एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जब अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो जहां हालांकि रॉयल्टी देने वाला व्यक्ति चाहे वह एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो या नहीं, का एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हो या उसके संबंध में निश्चित आधार है जिसके संबंध में ऋणग्रस्तता जिस पर दी गर्इ रॉयल्टी व्यय की गर्इ है और ऐसे ब्याज ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान द्वारा वहन किए गए हो और ऐसी रॉयल्टी ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार द्वारा वहन किए जाते हो तो ऐसी रॉयल्टी उस राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जिसमें स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार स्थित है।
6. जहां, अदाता और लाभार्थी मालिक के बीच या दोनों के बीच या कुछ व्यक्तियों के बीच एक विशेष संबंध के कारण रॉयल्टी की राशि, प्रयोग, अधिकार या सूचना जिसके लिए इनका भुगतान किया गया, को ध्यान में रखते हुए राशि के उस राशि से अधिक होने पर, जो ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता और लाभार्थी मालिक द्वारा सहमति हो जाती, इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होंगे। ऐसे मामले में भुगतान का अतिरिक्त हिस्सा प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों को देखते हुए।
अनुच्छेद 13
पूंजी प्राप्ति
1. अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ (2) में संदर्भित और अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति के हस्तांतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्ति उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है
2. एक स्थार्इ प्रतिष्ठान (अकेले या पूर्ण उद्यम सहित) या ऐसे निश्चित बेस के हस्तांतरण से ऐसी प्राप्ति सहित स्वतंत्र निजी सेवाएं देने के लिए अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति एक स्थार्इ प्रतिष्ठान की व्यापारिक संपत्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके एक संविदाकारी राष्ट्र का एक उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में या अन्य संविदाकारी राष्ट्र में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के लिए उपलब्ध निश्चित बेस से संबंधित अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।
3. एक कंपनी के पूंजी स्टॉक के शेयर के हस्तांतरण से प्राप्ति संपत्ति एक संविदाकारी राष्ट्र में स्थित संपत्ति का अधिकतम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शामिल है, उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है
4. शेयर, उनको छोड़कर जो एक कंपनी,जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है, के पैराग्राफ 3 में निर्दिष्ट है, के हस्तांतरण से प्राप्ति उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।
5. संपत्ति, उनको छोड़कर जो पैराग्राफ 1,2,3 उक्त 4 में निर्दिष्ट है, के हस्तांतरण से प्राप्ति उसी संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसका संक्राता एक निवासी है
अनुच्छेद 14
स्वतंत्र निजी सेवाएं
1. एक ही प्रकार की पेशेवर सेवाओं या अन्य स्वतंत्र गतिविधियों के संबंध में एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त आय केवल उसी राष्ट्र में करयोग्य होगी केवल निम्नलिखित परिस्थितियों को छोड़कर जब ऐसी आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है
(क) यदि उसके पास यह गतिविधियां करने के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके लिए नियमित तौर पर निश्चित बेस हो , उस मामले में, केवल इतनी आय जो उस निश्चित बेस हेतु निश्चित है अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है या
(ख) यदि वह अन्य संविदाकारी राष्ट्र में प्रासंगिक "वित्त वर्ष" या "आय के वर्ष", जो भी मामला हो, में कुल 183 दिनों या उससे अधिक की अवधि या अवधियों के लिए रहता हो उस मामले में केवल आय का अधिकतम जिसे उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसकी द्वारा की गर्इ गतिविधि से प्राप्त किया गया हो, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है
2. शब्द "पेशेवर सेवाओं" में विशेष स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षणिक या शिक्षण गतिविधियां साथ ही साथ चिकित्सक, वकील, इंजीनियर, वास्तुकार, सर्जन, दंत विशेषज्ञ और लेखापाल शामिल है
अनुच्छेद 15
आश्रित निजी सेवाएं
1. अनुच्छेद 16, 17, 18, 19, 20 और 21 के प्रावधानों के अनुसार वेतन, पारिश्रमिक और अन्य समकक्ष पारिश्रमिक जो एक रोजगार के संबंध में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त अन्य समकक्ष पारिश्रमिक उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा जबतक कि रोजगार अन्य संविदाकारी राष्ट्र में न किया जाए। यदि ऐसा किया गया रोजगार किया जाता है तो ऐसे पारिश्रमिक जिसे वहां से प्राप्त किया जाता है अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकते हैं।
2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान हेतु हुए भी, अन्य संविदाकारी राष्ट्र में किए गए रोजगार के संबंध में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ही करयोग्य होगा यदि :
(क) प्राप्तकर्ता प्रासगिक "पिछले वर्ष" या "आय के वर्ष" जो भी स्थिति हो, के दौरान अधिक से अधिक कुल 183 दिनों की अवधि या अवधियों के लिए उस अन्य राष्ट्र में मौजूद हो
(ख) एक नियोक्ता जो अन्य राष्ट्र का निवासी नहीं है, की ओर से दिया गया पारिश्रमिक
(ग) एक स्थार्इ प्रतिष्ठान या एक निश्चित बेस जिसका नियोक्ता अन्य संविदाकारी राष्ट्र में हो, द्वारा वहन न किया गया पारिश्रमिक
3. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित विदेश जाने वाले जहाज या वायुयान उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा
अनुच्छेद 16
निदेशक शुल्क
निदेशकों के शुल्क एक कंपनी, जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी हो, के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा लिया गया इसी तरह की अन्य भुगतानों पर अन्य राज्य में लगाया जा सकता है
अनुच्छेद 17
मनोरंजनकर्ता और खेलकर्मियों द्वारा प्राप्त आय
1. अनुच्छेद 14 और 15 के प्रावधानों के होते हुए भी एक मनोरंजनकर्ता जैसे थियेटर, मोशन पिक्चर, रेडियो और टेलीविजन कलाकार या एक संगीतकार या खेलकर्मी के तौर पर, निजी गतिविधियों से जैसे अन्य संविदाकारी राष्ट्र में की गर्इ होती के तौर पर एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त आय, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है
2. जहां किसी मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी की क्षमता में उनके द्वारा किए गए निजी कार्य के संबंध में आय जैसे कि मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी अपने लिए उपार्जित नहीं करता लेकिन दूसरे व्यक्ति के लिए करता है तो अनुच्छेद 7, 14 और 15 के प्रावधान होते हुए भी वह आय उस संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है जिसमें मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी गतिविधियां करता है
3. पैराग्राफ (1) के प्रावधान होते हुए भी एक उद्यमी या एक खिलाडी जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ऐसे की गर्इ अपनी निजी गतिविधियों से आय प्राप्त करता है केवल प्रथम-निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि अन्य संविदाकारी राष्ट्र में गतिविधियां प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र जिसमें उसके राजनीतिक उप-प्रभाग या स्थानीय प्राधिकारी शामिल है, के सार्वजनिक कोष से पूर्णता या वास्तविक तौर पर वित्तपोषित हो।
4. पैराग्राफ (2) और अनुच्छेद 7, 14 और 15 के प्रावधान होते हुए भी जहां अपनी योग्यता के अनुसार मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी द्वारा एक संविदाकारी राष्ट्र में की गर्इ निजी गतिविधियों के संदर्भ में आय जैसे कि एक संविदाकारी राष्ट्र में खुद मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी अपने लिए उपार्जित नहीं करता लेकिन उस दूसरे व्यक्ति के लिए उपार्जित करता है तो वह आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि वह अन्य व्यक्ति उस अन्य राष्ट्र, जिसमें उसका राजनीतिक उप-संभाग या स्थानीय प्राधिकारी शामिल हो, के सार्वजनिक कोष से पूर्णता या वस्तुत वित्तपोषित हो
अनुच्छेद 18
सरकारी सेवा के संबंध में पारिश्रमिक और पेंशन
1. (क) एक संविदाकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या एक उसके स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उस राष्ट्र या उपसंभाग या प्राधिकारी, को दी गर्इ सेवा के संबंध में एक व्यक्ति को पारिश्रमिक, एक पेंशन को छोड़कर, उस राष्ट्र में करयोग्य होगी।
(ख) हालांकि, ऐसा पारिश्रमिक अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगा यदि सेवा उस राष्ट्र में दी जाती है और व्यक्ति उस राष्ट्र का निवासी हो जो :
(i) उस राष्ट्र का निवासी हो या
(ii) सेवाएं देने के लिए ही उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी न बना हो
2. (क) उस राष्ट्र या उपसंभाग या प्राधिकारी को दी गर्इ सेवाओं के संदर्भ में एक व्यक्ति को एक संविदाकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या उसके एक स्थानीय प्राधिकारी द्वारा बनाए गए कोष में से दी गर्इ कोर्इ पेंशन उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगी
(ख) हालांकि, ऐसी पेंशन केवल अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि व्यक्ति उस अन्य राष्ट्र का निवासी और एक नागरिक हो
3. अनुच्छेद 15, 16, 17 और 18 के प्रावधान एक संविदाकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या उसके एक स्थानीय प्राधिकारी द्वारा किए गए व्यापार के संबंध में दी गर्इ सेवाओं के संबंध में पारिश्रमिक और पेंशन के लिए ही लागू होगा।
अनुच्छेद 19
गैर-सरकारी पेंशन और वार्षिकी
1. कोर्इ पेंशन, अनुच्छेद 18 में संदर्भित पेंशन को छोड़कर या अन्य संविदाकारी राष्ट्र के अंतर्गत स्रोत से एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त कोर्इ वार्षिकी प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ही करारोपित हो सकती है
2. शब्द "पेंशन" का अर्थ है आवधिक भुगतान जिनको सेवा देने की अवधि के दौरान हुर्इ क्षति के लिए मुआवजे के रूप या पिछले सेवा के प्रतिफल में किया गया हो
3. शब्द "वार्षिकी" का अर्थ पूर्ण या उपयुक्त प्रतिफल राशि या राशि की कीमत के बदले भुगतान करने के लिए बाध्यता के अंतर्गत निर्दिष्ट या अनिर्दिष्ट अवधि के दौरान किसी भी निर्दिष्ट समय पर आवधिक देययोग्य राशि है।
अनुच्छेद 20
विद्यार्थी, प्रशिक्षार्थी और प्रशिक्षु
1. एक व्यक्ति जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है और जो उसके आने के संबंध में उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके पहले आने की तिथि से अधिक से अधिक छह महीनों की अवधि के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में प्राधिकृत विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान में विद्यार्थी या वहां एक व्यापारिक या तकनीकी प्रशिक्षु के तौर पर ही अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अस्थार्इ रूप से मौजूद है उसको निम्न पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर से छूट मिलेगी
(क) अपने रखरखाव, शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र से सभी प्रेषण
(ख) ऐसे उद्देश्यों के लिए उसके पास उपलब्ध संसाधनों को पूरा करने को देखते हुए उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में दी गर्इ निजी सेवाओं के लिए कोर्इ पारिश्रमिक (प्रति वर्ष अधिक से अधिक भारतीय रूपए में 20,000 या यू.ए.र्इ. मुद्रा के बराबर राशिं)
2. एक व्यक्ति जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है और जो किसी भी संविदाकारी राष्ट्रों की सरकार को अनुदान, भत्ते या पारितोषिक के प्राप्तकर्ता के तौर पर केवल शिक्षा, अनुसंधान या प्रशिक्षण के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अस्थार्इ रूप से मौजूद हो या उसके आने के संबंध में उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके पहले आने की तिथि से अधिक से अधिक तीन वर्षों की अवधि के लिए किसी भी संविदाकारी राष्ट्र की सरकार द्वारा किए गए तकनीकी सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत या वैज्ञानिक, शैक्षणिक, धार्मिक या धर्मार्थ संगठनों से अनुदान, भत्ते या पारितोषिक निम्न पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र से कर की छूट मिलेगी
(क) ऐसे अनुदान, भत्ते या पारितोषिक की राशि
(ख) अपने रखरखाव, शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र से सभी प्रेषण और
(ग) उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में दी गर्इ सेवाओं के संबंध में कोर्इ पारिश्रमिक (प्रति वर्ष अधिक से अधिक भारतीय रूपए में 20,000 या यू.ए.र्इ. मुद्रा के बराबर राशिं) यदि सेवा उसकी शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण या वहां आकस्मिक हो, के संबंध में दी गर्इ हो
3. एक व्यक्ति जो उसके आने के संबंध में उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके पहले आने की तिथि से अधिक से अधिक बारह महीनों की अवधि के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है और जो ऐसे उद्यम को छोड़कर एक व्यक्ति से तकनीकी, पेशेवर या व्यापारिक अनुभव को प्राप्त करने के एकमात्र उद्देश्य से प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम के साथ अनुबंध के अंतर्गत है या जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अस्थार्इ तौर पर मौजूद है उसे निम्न पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र से कर की छूट मिलेगी
(क) अपने रखरखाव, शिक्षा या प्रशिक्षण के लिए प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र से सभी प्रेषण
(ख) अन्य संविदाकारी राष्ट्र में दी गर्इ निजी सेवाओं के लिए कोर्इ भी पारिश्रमिक जोकि यह प्रति वर्ष 20,000 भारतीय रूपए या यू.ए.र्इ. मुद्रा में इसके बराबर से अधिक न हो बशर्ते ऐसी राशि ऐसे अनुभव को लेने के संबंध में हो।
4. एक व्यक्ति जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है और जो प्रशिक्षण या शिक्षा के एकमात्र उद्देश्य के लिए उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र की सरकार की व्यवस्था के अंतर्गत अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अस्थार्इ रूप से मौजूद है तो उसे ऐसे प्रशिक्षण या शिक्षा के कारण उसको प्राप्त हुए पारिश्रमिक के संबंध में अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर से छूट मिलेगी।
5. इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 21 के लिए
(क) (i) एक व्यक्ति को भारत का निवासी समझा जाएगा यदि वह "पिछले वर्ष" जिसमें वह यू.ए.र्इ. गया हो या 'पिछले वर्ष' के तुरंत पहले भारत का निवासी हो
(ii) एक व्यक्ति को यू.ए.र्इ. का निवासी समझा जाएगा यदि वह भारत जाने से तुरंत पहले यू.ए.र्इ. का निवासी हो
(ख) एक संविदाकारी राष्ट्र में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान के संबंध में शब्द "प्राधिकृत" का अर्थ संदेह होने की स्थिति में उस राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
अनुच्छेद 21
प्रध्यापक, अध्यापक और अनुसंधानकर्ता
1. एक व्यक्ति जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र में जाने से तुरंत पहले एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो और जो किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय या अन्य समकक्ष शैक्षणिक संस्थान, जो सरकार, एक राजनीतिक उप-संभाग या उस राष्ट्र की स्थानीय या सांविधिक प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत है, की ओर से आमंत्रण पर ऐसे शैक्षणिक संस्थान में शिक्षण या अनुसंधान या दोनों के लिए ही अधिक से अधिक दो वर्षों की अवधि के लिए उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में जाता है तो वह ऐसे प्रशिक्षण या अनुसंधान के लिए उसके पारिश्रमिक पर उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर से छूट मिलेगी।
2. यह अनुच्छेद अनुसंधान से आय के लिए लागू नहीं होगा यदि ऐसा अनुसंधान निर्दिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों के निजी लाभ के लिए प्राथमिक तौर पर किया जाता हो
अनुच्छेद 22
अन्य आय
1. पैराग्राफ (2) के प्रावधानों के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी की आय की मद, जहां भी उत्पन्न हो, जो इस समझौते के पूर्वगामी अनुच्छेदों के साथ स्पष्ट रूप से व्यवहार नहीं करती, उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी।
2. पैराग्राफ (1) के प्रावधान आय पर लागू नहीं होंगे, अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ (2) में परिभाषित अचल संपत्ति से आय को छोड़कर, यदि ऐसी आय का प्राप्तकर्ता, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर, वहां मौजूद एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो या वहां मौजूद एक निश्चित स्थान से स्वतंत्र निजी सेवाओं को उस अन्य राष्ट्र में करता हो और उसके संबंध में अधिकार या संपत्ति हो जिसके संबंध में दी गर्इ आय ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठापन या निश्चित स्थान के संबंध में प्रभावी हो। ऐसे मामलों में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी हो, के प्रावधान लागू होंगे।
अनुच्छेद 23
पूंजी
1. अनुच्छेद 6 में संदर्भित अचल संपत्ति द्वारा प्रस्तुत पूंजी, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के मालिकाना हक और अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।
2. अचल संपत्ति द्वारा प्रस्तुत पूंजी एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन जो एक संविदाकारी राष्ट्र का उद्यम है जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र में है या स्वतंत्र निजी सेवाएं देने के लिए अन्य संविदाकारी में एक संविदाकारी राष्ट्र के लिए उपलब्ध एक निश्चित बेस से संबंधित अचल संपत्ति द्वारा, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है
3. अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित जहाज द्वारा और ऐसे जहाजों के संचालन से संबंधित अचल संपत्ति द्वारा प्राप्त पूंजी उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जहां उद्यम के प्रभावी प्रबंधन का स्थान स्थित है।
अनुच्छेद 24
सरकार और संस्थानों की आय
1. अनुच्छेद 13 के प्रावधान होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र की सरकार उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र से ऐसी सरकार द्वारा प्राप्त किसी आय के संदर्भ में अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर, पूंजी प्राप्ति कर सहित, से करमुक्त होगा।
2. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ (1) के लिए, शब्द "सरकार" का अर्थ
(क) भारत की स्थिति में, भारत की सरकार होगी और इसमें निम्न शामिल होगें :
(i) राजनीतिक उप-प्रभाग, स्थानीय प्राधिकारी, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय सरकार
(ii) भारतीय रिजर्व बैंक
(iii) ऐसा कोर्इ संस्थान या निकाय जिस पर दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के बीच समय-समय पर सहमति की जा सके
(ख) यू.ए.र्इ. के मामले में, इसका अर्थ संयुक्त अरब अमीरात की सरकार है जिसमें निम्न शामिल होगा
(i) राजनीतिक उप-प्रभाग, स्थानीय प्राधिकारी, स्थानीय प्रशासन और स्थानीय सरकार
(ii) संयुक्त अरब अमीरात केंद्रीय बैंक, अबू धाबी निवेश प्राधिकरण एवं अबू धाबी आर्थिक विकास कोष
(iii) ऐसा कोर्इ संस्थान या निकाय जिस पर दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के बीच समय-समय पर सहमति की जा सके
अनुच्छेद 25
दोहरे कराधान का उन्मूलन
1. किसी भी संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानून संबंधित संविदाकारी राष्ट्र में आय के कराधान को नियंत्रित करता रहेगा केवल वहां छोड़कर जहां इसके विपरीत के वर्णित प्रावधान इस समझौते में दिए गए हैं।
2. जहां भारत के निवासी आय या पूंजी को प्राप्त करता है जो, इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार, यू.ए.र्इ. में करारोपित हो सकता है, भारत यू.ए.र्इ. में दिए गए यू.ए.र्इ. कर, चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, पर कर से कटौती के तौर पर स्वीकृति देगा। किसी भी मामले में ऐसी कटौती, हालांकि, आयकर (जो कटौती से पहले आंकने पर दिया जाता है) के उस हिस्से से अधिक नही होगी जो उस आय के लिए निर्दिष्ट हो, जो भी मामला हो, जो यू.ए.र्इ. में करारोपित हो सकती हो। आगे, जहां ऐसा निवासी एक कंपनी हो जिसके द्वारा अधिकर भारत में देययोग्य है, यू.ए.र्इ. में दिए गए आयकर के संबंध में कटौती भारत में कंपनी द्वारा देययोग्य आयकर से पहले उदाहरण में स्वीकृत होगा और भारत में इसके द्वारा देययोग्य अधिकर से शेष, यदि हो, के तौर।
3. यू.ए.र्इ. के कानूनो के अनुसार जहां यू.ए.र्इ. का एक निवासी भारत से आय को प्राप्त करता है जो, इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार भारत में करयोग्य हो सकती है यू.ए.र्इ. भारत में दी गर्इ आय पर कर के बराबर राशि उस व्यक्ति की आय पर कर से कटौती के तौर पर वसूली जाएगी। हालांकि ऐसी कटौती दी गर्इ कटौती से पहले आंके गए आयकर के भाग से अधिक नहीं होगी जो आय हेतु निर्दिष्ट है वह यू.ए.र्इ. में करारोपित हो सकती है।
4. पैराग्राफ (3) के लिए, शब्द "भारत में देय कर" को उस भारतीय कर की राशि को शामिल करने के लिए समझा जाएगा जिसको दिया जाता यदि भारतीय कर आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत विशेष प्रोत्साहन उपायों के अनुसार कम या घटार्इ नहीं गर्इ थी जिसको भारत में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया जो इस समझौते के हस्ताक्षर की तिथि से प्रभावी हुर्इ या जो भारत में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए मौजूदा प्रावधानों के संशोधन, या के अतिरिक्त, में भविष्य में प्रस्तुत किए जा सकते है और ऐसे अन्य प्रोत्साहन उपाय जिस पर संविदाकारी राष्ट्रों द्वारा समय समय पर सहमति हो सकती हो।
5. जहां समझौते के किसी प्रावधान के अनुसार आय प्राप्त होती है या एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा रखी गर्इ पूंजी उस राष्ट में कर से मुक्त होती है तो ऐसा राष्ट्र फिर भी, ऐसे निवासी की पूंजी या शेष आय पर कर की राशि की गणना में, करमुक्त आय या पूंजी पर विचार करेगा।
अनुच्छेद 26
गैर-भेदभाव
1. एक संविदाकारी राष्ट्र के नागरिक किसी कराधान या उससे संबंधित किसी अनिवार्यता के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र का विषय नहीं है, जोकि कराधान और संबंधित अनिवार्यताओं जोकि उसी परिस्थिति और उसी प्रकार की शर्तों के अंतर्गत उस राष्ट्र के निवासी अधीन है या हो सकते हैं, की तुलना में अन्य या और अधिक कष्टदायक है
2. एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन पर कराधान जिसके एक संविदाकारी राष्ट्र का उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में है उसी परिस्थिति में या उन्हीं शर्तों के अंतर्गत वही कार्य करने के लिए उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम पर लगाए गए कराधान की तुलना में उस अन्य राष्ट्र में लगाए गए कम अनुकूल नहीं होगा। इस प्रावधान की व्याख्या ना तो ऐसे की जाएगी चूंकि एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की एक कंपनी उस कर की दर पर प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में वसूल सकती है जो प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र की समकक्ष कंपनी के लाभ पर अधिरोपण से अधिक है, ना ही इस समझौते के अनुच्छेद 7 के पैराग्रॉफ 3 के प्रावधानों के साथ विवाद के तौर पर, के लाभ को वसूलने से संविदाकारी राष्ट्र को रोक सकता है।
3. इस अनुच्छेद के प्रावधान सिविल स्टेटस या पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण कराधान उद्देश्यों के लिए किसी निजी भत्ते, राहत और कटौतियों, जो अपने स्वयं के निवासियों को देता है, को अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को दी जाने वाली एक संविदाकारी राष्ट्र की बाध्यता के तौर पर व्याख्या नहीं की जाएगी
4. एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम, जिसकी पूंजी अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक या एक से अधिक निवासियों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण या आंशिक तौर पर स्वगत या नियंत्रित है, उससे संबंधित किसी कराधान या किसी अनिवार्यता के लिए प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र का विषय नहीं होंगे जो कराधान की तुलना में अधिक कष्दायक है और उससे संबंधित अनिवार्यता जिसके प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र के अन्य वही उद्यम उन्हीं परिस्थितियों में और उन्हीं शर्तों के अंतर्गत विषय है या हो सकते हैं।
5. इस अनुच्छेद में, शब्द "कराधान" का अर्थ कराधान जो इस समझौते का विषय हो सकते हैं।
अनुच्छेद 27
आपसी समझौता प्रक्रिया
1. [इस समझौते के अनुच्छेद 27 के पैराग्राफ 1 के द्वितीय वाक्य को एमएलआर्इ के अनुच्छेद 16 के पैराग्राफ 1 के द्वितीय वाक्य द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है] जहां एक संविदाकारी राष्ट के एक निवासी को लगता है कि एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के कार्य का परिणाम और कराधान हेतु उसका परिणाम इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार नहीं है तो वह उन राष्ट्रों के घरेलू कानून द्वारा मुहैया कराए गए उपायों के बावजूद, उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को अपने मामले प्रस्तुत करेगा जिसका वह निवासी है [इस मामले को कार्यवाही के नोटिस की प्राप्ति की तिथि से दो वर्षों के अंदर प्रस्तुत किया जाना चाहिए जो कराधान को बढ़ावा देते है जो समझौते के अनुसार नहीं है]
एमएलआर्इ के अनुच्छेद 16 के पैराग्राफ 1 के निम्नलिखित द्वितीय वाक्य इस समझौते के अनुच्छेद 27 के पैराग्राफ 1 के द्वितीय वाक्य को प्रतिस्थापित करता है: एमएलआर्इ का अनुच्छेद 16 - आपसी समझौता प्रक्रिया मामले को समझौते के प्रावधानों का अनुसरण न करने वाले कराधान के परिणामस्वरूप कार्यवाही की प्रथम अधिसूचना से तीन वर्षों के अंदर प्रस्तुत किया जाना चाहिए |
2. सक्षम प्राधिकारी, यदि उपस्थित आपत्ति न्यायसंगत हो और यदि यह अपने आप संतोषजनक समाधान पर पहुंच पाने में अक्षम हो, अन्य संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के आपसी समझौते द्वारा कराधान जो समझौते के अनुसार नहीं है, के परिहार को देखते हुए मामले को सुलझाने का प्रयास करेगा। किए गए किसी समझौते को संविदाकारी राष्ट्रों के घरेलू कानून की समय सीमा होते हुए भी कार्यान्वित किया जाएगा।
3. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी समझौते को लागू करने या व्याख्या के कारण उत्पन्न होने वाले संदेहों या किसी परेशानी के लिए आपसी समझौते द्वारा समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। जब समझौता करने के लिए राय के मौखिक आदान-प्रदान करना उचित लगे तो ऐसा आदान-प्रदान संविदाकारी राष्ट्रों के समक्ष प्राधिकारियों के प्रतिनिधित्व वाले एक आयोग के माध्यम से किया जा सकता है। वह दोहरे कराधान को दूर करने के लिए साथ विचार-विमर्श करेंगे यदि समझौते में न दिया गया हो।
4. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी इस समझौते को लागू करने के लिए प्रत्यक्ष तौर पर एक दूसरे के साथ संपर्क कर सकते हैं।
अनुच्छेद 28
सूचना का आदान-प्रदान
1. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना का आदान-प्रदान करेंगे संविदाकारी राष्ट्र या उनके राजनीतिक उपप्रभाग या स्थानीय प्राधिकारी की ओर से लगाए गए निरूपण और प्रत्येक प्रकार के करों से संबंधित घरेलू कानूनों के प्रवर्तन या प्रशासन के लिए जो इस समझौते के प्रावधानों के लिए आवश्यक है जहां तक उसके अंतर्गत कराधान समझौते के विरूद्ध नहीं है।
2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त किसी सूचना को उसी तरीके से गुप्त समझा जाएगा जैसे सूचना उस संविदाकारी राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त की जाती है और इसके निर्धारण या संग्रहण से संबंधित व्यक्तियों या प्राधिकारियों (न्यायालय और प्रशासनिक निकायों सहित) को ही दी जाएगी, पैराग्राफ 1 में संदर्भित करों के संबंध में अपीलों का निर्धारण या अभियोजन, या उक्त की जांच करने वाले को ही दी जाएगी। ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी केवल इस उद्देश्य के लिए ही सूचना का प्रयोग करेंगे। वह सार्वजनिक न्यायालय की कार्यवाहियों या न्यायिक निर्णयों में सूचना को प्रकट कर सकते हैं।
3. किसी भी मामले पैराग्राफ 1 के प्रावधान निर्मित नहीं होंगे ताकि एक संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकार पर निम्न बाध्यताएं अधिरोपित की जा सके :
(क) उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के परिवर्तनशील कानूनों और प्रशासनिक अभ्यास पर प्रशासनिक उपाय
(ख) सूचना की आपूर्ति जो कानून के अंतर्गत या उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के प्रशासन की सामान्य अवधि में प्राप्तनीय नहीं है
(ग) सूचना की आपूर्ति के लिए जो किसी व्यापार, कारोबार, औद्योगिक, वाणिज्यिक या पेशेवर राज या कारोबार प्रक्रिया या सूचना हो उसका प्रकटीकरण लोक नीति (सार्वजनिक अध्यादेश) के विपरीत होगा
4. यदि एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा अनुरोधित सूचना इस अनुच्छेद के अनुसार है तो अन्य संविदाकारी राष्ट्र अनुरोधित सूचना को प्राप्त करने के लिए इसके सूचना एकत्रीकरण उपाय का प्रयोग करेगा भले ही उस अन्य राष्ट्र को अपने कर उद्देश्यों के लिए ऐसी सूचना की जरूरत न हो। पूर्ववर्ती वाक्य में शामिल बाध्यता पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अनुसार है लेकिन किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि उसका ऐसी सूचना में कोर्इ घरेलू हित नहीं है।
5. किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि सूचना बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, नामांकित व्यक्ति या एजेंसी के तौर पर कार्य करने वाले व्यक्ति या जिम्मेदार व्यक्ति के पास है या इसलिए क्योंकि यह एक व्यक्ति में स्वामित्व हितों से संबंधित है।
अनुच्छेद 29
लाभों की सीमितता
[एमएलआर्इ के अनुच्छेद 7 के पैराग्राफ 1 द्वारा प्रतिस्थापन] [एक उद्यम जो एक संविदाकारी राष्ट्र का घरेलू उद्यम है वह इस समझौते के लाभ का हकदार नहीं होगा यदि ऐसी इकाई के सृजन का मुख्य उद्देश्य या एक उद्देश्य इस समझौते के लाभ प्राप्त करना था जो अन्यथा उपलब्ध नहीं होगे। कानूनी उद्यमों के मामले में वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां इस अनुच्छेद द्वारा कवर नहीं होगी]
एमएलआर्इ के अनुच्छेद 7 के निम्नलिखित पैराग्राफ 1 इस समझौते के अनुच्छेद 29 को प्रतिस्थापित करता है एमएलआर्इ के अनुच्छेद 7 - संधि के दुरूपयोग की रोकथाम (प्रमुख उद्देश्य परीक्षण प्रावधान) समझौते के किसी प्रावधान के होते हुए भी, समझौते के अंतर्गत लाभ आय की एक मद के संबंध में नहीं दी जाएगी यदि यह करना उचित हो, सभी प्रासंगिक तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कि वह लाभ प्राप्त करना किसी व्यवस्था या लेनदेन का प्रमुख उद्देश्य था जो उस लाभ का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम था, जबतक यह प्रमाणित न हो कि इन परिस्थितियों में उन लाभों को देना उद्देश्य के अनुसार होगा और समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के लिए होगा। |
अनुच्छेद 30
राजनयिक और कौंसुलर पद
इस समझौते में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के तहत या विशेष समझौतों के प्रावधानों के तहत राजनयिक मिशन या कौंसुलर पदों के सदस्यों की राजकोषीय विशेषाधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा.
अनुच्छेद 31
प्रारंभ होना
1. प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र इस समझौते के प्रारंभ होने के लिए इसके कानून द्वारा आवश्यक प्रक्रियाओं के अन्य समापन को अधिसूचित करेगा। समझौता इन अधिसूचनाओं की तिथि पर प्रारंभ होगा और इसके बाद प्रभावी होगा -
(क) संयुक्त अरब अमीरात में :
कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ, की अगली 1 जनवरी को या उसके बाद प्राप्त आय के संदर्भ में और उस पूंजी के संदर्भ में जिसको अगले आगामी कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ या बादे के वर्षों की समाप्ति पर नियंत्रण हो
(ख) भारत में :
कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ, की अगली 1 अप्रैल को या उसके बाद प्राप्त प्रारंभ किसी 'पिछले वर्ष' में उत्पन्न आय के संदर्भ में और उस पूंजी के संदर्भ में जिसको कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ के बाद के 1 अप्रैल को या उसके बाद के किसी 'पिछले वर्ष' की समाप्ति पर नियंत्रण हो
अनुच्छेद 32
समाप्ति
यह समझौता अनिश्चित काल के लिए प्रभावी रहेगा लेकिन कोर्इ भी संविदाकारी राष्ट्र इसके प्रभावी होने की तिथि से पांच वर्षों की अवधि की समाप्ति के बाद प्रारंभ होने वाले किसी कैलेंडर वर्ष के 13 जून को या उससे पहले अन्य संविदाकारी राष्ट्र को राजनयिक माध्यमों के जरिए समाप्ति का नोटिस दे सकते हैं और ऐसी स्थिति में यह समझौता प्रभावी नहीं रहेगा
(क) संयुक्त अरब अमीरात में :
कैलेंडर वर्ष जिसमें समाप्ति का नोटिस दिया गया, की अगली 1 जनवरी को या उसके बाद प्राप्त आय के संदर्भ में और उस पूंजी के संदर्भ में जिसको अगले आगामी कैलेंडर वर्ष जिसमें समाप्ति का नोटिस दिया गया या बादे के वर्षों की समाप्ति पर नियंत्रण हो
(ख) भारत में :
कैलेंडर वर्ष जिसमें समाप्ति का नोटिस दिया गया, की अगली 1 अप्रैल को या उसके बाद प्राप्त प्रारंभ किसी 'पिछले वर्ष' में उत्पन्न आय के संदर्भ में और उस पूंजी के संदर्भ में जिसको कैलेंडर वर्ष जिसमें समाप्ति का नोटिस दिया गया के बाद के 1 अप्रैल को या उसके बाद के किसी 'पिछले वर्ष' की समाप्ति पर नियंत्रण हो
जिसके भी साक्ष्य में, इसके लिए विधिवत रूप से प्राधिकृत अधोहस्ताक्षरियों ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस बुधवार, 29 अप्रैल 1992 तद्नुसार 27 शवाल 1412 एच को नर्इ दिल्ली में हिंदी, अरबी और अंग्रेजी भाषाओं में दो मूल प्रतियों में हस्ताक्षरित किया गया, सभी विषय समान रूप से प्रमाणिक हैं। व्याख्या में किसी अंतर की स्थिति में अंग्रेजी पाठ को माना जाएगा।
प्रोटोकॉल
आय और पूंजी पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतांत्रिक सरकार और संयुक्त अरब अमीरात की सरकार के बीच आज समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए अधोहस्ताक्षरी निम्नलिखि प्रावधानों पर सहमत हुए हैं जो इस समझौते का अभिन्न अंग होगा।
(i) अनुच्छेद 5 के प्रावधानों के अनुसार, इस समझौते में कुछ भी पेट्रोलियम और प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त आय के कराधान से संबंधित अपने स्वयं को कानूनों को लागू करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की सरकार या इसके राजनीतिक उपसंभाग, स्थानीय प्राधिकारी या स्थानीय सरकार के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा ऐसी गतिविधियां संयुक्त अरब अमीरात के कानूनों के अनुसार करारोपित नहीं होगी
(ii) अनुच्छेद 6 और अनुच्छेद 23 के प्रावधानों के होते हुए भी एक संविदाकारी राष्ट्र के एक नागरिक द्वारा नियंत्रित आवासीय संपत्ति और अन्य संविदाकारी राष्ट्र में अपने रहने के लिए रखी गर्इ संपत्ति इस समझौते द्वारा आने वाले करों से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करमुक्त होगी।
जिसके भी साक्ष्य में, इसके लिए विधिवत रूप से प्राधिकृत अधोहस्ताक्षरियों ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस बुधवार, 29 अप्रैल 1992 तद्नुसार 27 शवाल 1412 एच को नर्इ दिल्ली में हिंदी, अरबी और अंग्रेजी भाषाओं में दो मूल प्रतियों में हस्ताक्षरित किया गया, सभी विषय समान रूप से प्रमाणिक है। व्याख्या में किसी अंतर की स्थिति में अंग्रेजी पाठ को माना जाएगा।

