धारा 44कख तथा धारा 44कघ के अंतर्गत कर अंकेक्षण की प्रारम्भिक सीमा - स्पष्टीकरण सम्बन्धी
रिलीज़ दिनांक
20/06/2016
Document Content
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
प्रेस विज्ञप्ति
नर्इ दिल्ली, 20 जून, 2016
विषय : धारा 44कख तथा धारा 44कघ के अंतर्गत कर अंकेक्षण की प्रारम्भिक सीमा - स्पष्टीकरण सम्बन्धी
आयकर अधिनियम ('द एक्ट') की धारा 44कख व्यापार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए किसी पिछले वर्ष के अपने खाते को अंकेक्षित कराना अनिवार्य बनाती है यदि उसकी कुल बिक्री, कारोबार अथवा कुल प्राप्ति एक करोड़ रूपए से अधिक होती है। हालाँकि, यदि एक पात्र व्यक्ति अधिनियम की धारा 44कघ(1) के अनुसार प्रकल्पित कराधान योजना को चुनता है तो उसे अपने खाते को अंकेक्षित कराने की आवश्यकता नहीं है, यदि प्रासंगिक वर्ष का कुल करोबार अथवा कुल प्राप्ति दो करोड़ से अधिक नहीं होती है। खाते के गैर-अंकेक्षण के लिए उच्च सीमा धारा 44कघ के अंतर्गत प्रकल्पित कराधान योजना का चुनाव करने वाले निर्धारिती को ही दी गर्इ है।
(मीनाक्षी जे गोस्वामी)
आयकर आयुक्त
(मीडिया तथा तकनीकी नीति)
आधिकारिक प्रवक्ता, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

