को पूंजीसम्पत्ति करदाता द्वारा इसके हस्तांतरण की तिथि से तुरंत ठीक पहले 36 माह से कम की एक अवधि के लिये धारण की गयी है, एक अल्पकालिक पूंजी सम्पत्ति के रूप में मानी जायेगी। दीर्घकालिक पूंजी सम्पत्ति के हस्तांतरण पर उत्पन्न लाभ दीर्घकालिक पूंजीलाभ कहलाता है। इस भाग में आप अल्पकालिक पूंजीगत लाभों पर कर से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर कर

परिचय

पूंजीगत लाभ के स्थानांतरण पर उत्पन्न होने वाला लाभ ''पूंजीगत लाभ'' शीर्षक के अंतर्गत कर हेतु वसूलनीय है। पूंजीगत लाभ से आय को ''अल्पकालिक पूंजीगत लाभ'' और ''दीर्घ कालिक'' पूंजीगत लाभ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इस भाग में आप अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर कर सम्बंधित प्रावधानों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं

पूंजीगत लाभ का अर्थ

एक पूंजी परिसम्पति के हस्तांतरण पर उत्पन्न होने वाले लाभ अथवा प्राप्ति को "पूंजीगत लाभ" कहा जाता है तथा ''पूंजीगत लाभ'' के के शीर्ष के तहत कर हेतु प्राभार्य है।

पूंजी सम्पत्ति का अर्थ

पूंजी संपति में शामिल है:

(क) एक करदाता द्वारा धारण की जाने वाली किसी प्रकार की परिसम्पत्ति चाहे उसके पेशे या व्यवसाय से सम्बंध रखता हो अथवा नही रहती है

(ख) एफआई आई द्वारा धारित किसी प्रकार की प्रतिभूति जिसे सेबी अधिनियम के अनुसार ऐसी प्रतिभूति में निवेश किया गया हो

(ग) श्रेणी I या श्रेणी II एआईएफ द्वारा धारित कोई प्रतिभूति जिसने सेबी या आईएफएससी नियामकों के अनुसार ऐसी प्रतिभूति में निवेश किया है

(घ) कोई यूनिट लिंक्ड बीमा पॉलिसी जिस पर धारा 10(10घ) के अंतर्गत छूट लागू नही होती

बरहाल, निम्नलिखित मदें ''पूंजीगत परिसंपत्ति'' के विषय में शामिल नही है

(i) किसी भी स्टॉक में व्यापार (उक्त (ख) में संदर्भित प्रतिभूति को छोड़कर) उपभोज्य भंडार या अपने व्यवसाय या पेशे के प्रयोजनों के लिए आयोजित कच्चे माल;

(ii) व्यक्तिगत प्रभाव (फर्नीचर और परिधान पहनने सहित) जैसे कि कर दाता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा निजी इस्तेमाल के लिए धारण की जाने वाली चल सम्पत्ति लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नही है।

(क) आभूषण;

(ख) पुरातात्विक संग्रह;

(ग) चित्र

(घ) चित्र कला

(ड़) मूर्तियां; या

(च) अन्य कोई कलाकृति

''आभूषण'' में शामिल है;

(क) सोना, चांदी, प्लेटिनम या किसी अन्य कीमती धातु या एक और अधिक कीमती धातुओं के मिश्रण से बने गहने जिनमें कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर परिधान पर जड़े हुए या सीले हुए हो सकते हैं।

(ख) कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर जो किसी भी फर्नीचर, बर्तन या अन्य किसी वस्तु में परिधान में जड़े/सिले हुए हो सकते है अथवा नही।

(iii) भारत के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि,

(क) नगर निगम के क्षेत्राधिकार, अधिसूचित क्षेत्र समीति, टाउन एरिया समीति, छावनी बोर्ड के अंतर्गत तथा जिसकी जनसंख्या 10,000 से कम न हो

(ख) किसी नगरपालिका अथवा छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमा से मापे गए हवाई मार्ग की निम्नलिखित दूरी के भीतर

(i) 2 किमी. में अधिक नहीं, यदि ऐसे क्षेत्र की जनसंख्या 10,000 से अधिक लेकिन 1 लाख से अधिक न हो

(ii) 6 किसी से अधिक नही, यदि ऐसे क्षेत्र की जनसंख्या 1 लाख से अधिक लेकिन 10 लाख से अधिक न हो अथवा

(iii) 8 किसी से अधिक नही, यदि ऐसे क्षेत्र की जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो

जनसंख्या पर विचार पिछली पूर्ववर्ती जनगणना के अनुसार किया जाएगा जो प्रासंगिक आंकड़ा वर्ष के पहले दिन से पहले प्रकाशित हुआ हो

(iv) 6 1/2 फीसदी सोना बांड, 1977 या 7 फीसदी सोना बांड, 1980 या राष्ट्रीय रक्षा सोना, बांड, 1980 जो केन्द्र सरकार द्वारा जारी किए गए हैं।

(v) विशेष बाहक बांड 1991;

(vi) सोना जमा योजना 1999 के तहत जारी किए गए सोना जमा बांड या स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, 2015 के अंतर्गत जमा प्रमाणपत्र

निम्नलिखित बिंदु ध्यान में रखने चाहिए

• पूंजीगत परिसंगति के रूप में संपत्ति करदाता के व्यापार अथवा पेशे से संबंधित हो सकता हैं अथवा नहीं उदाहरण यात्री वाहन के व्यापार में संलग्न व्यक्ति की यात्री परिवहन व्यापार से प्राप्त आय उसकी पूंजी आय होगी

• विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा धारित किसी प्रकार की प्रतिभूति जिसे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम 1992 के अंतर्गत विनियमन के अनुसार ऐसी प्रतिभूतियों में निवेश किया हो, को सदैव पूंजीगत परिसंगति के तौर पर समझा जाएगा इसलिए ऐसी परिसंगतियों को स्टॉक-इन ट्रेड के तौर पर नही समझा जाएगा।

उदाहरण

श्री कुमार ने जनवरी, 2024 में एक आवासीय घर 90,00,000 में खरीदा। उन्होंने वो घर अप्रैल,2025 में 90,00,000 में बेच दिया। इस मामले में आवासीय घर श्री कुमार के लिए पूंजी परिसमत्ति है, अत: इस विक्री से उत्पन्न 6,00,000 रूपये का लाभ पूंजीलाभ है तथा इस लघु अवधि पूंजीगत लाभ शीर्ष के तहत ''पूंजीगत लाभ'' पर आयकर लगेगा।

उदाहरण

श्री कपूर एक परिसम्पत्ति व्यापारी है। उन्होंने पून: विक्रय के लिए एक फ्लैट खरीदा। फ्लैट जनवरी 2024 में 84,00,000/- रु में खरीदा गया था, तथा अगस्त 2025 में 90,00,000/- रु में बेचा गया। इस प्रकरण में श्री कपूर एक परिसम्पत्ति व्यापारी है, तथा परिसम्पत्ति का व्यापार करना उनका सामान्य व्यवसाय है। दूसरे शब्दों में फ्लैट श्री कपूर के लिए पूंजी परिसम्पत्ति नहीं है, अत: फ्लैट की से उत्पन्न 6,00,000/- रु के लाभ पर कारोबारी आय के रूप में कर देय होगा न कि पूंजीगत लाभ के रूप में।

अल्प-कालिक और दीर्घ-कालिक पूँजी परिसम्पत्ति का अर्थ

कराधान के उद्देश्य के लिए, पूंजीगत परिसंपत्तियों को निम्न दिए गए दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

अल्प-कालिक पूंजीगत संपत्ति दीर्घ-कालिक पूंजीगत संम्पत्ति

करदाता द्वारा आयोजित कोई भी पूंजी परिसंपत्ति जो इसके हस्तांतरण तिथि से 36 माह के अन्दर की अवधि के लिए धारण की गई होअल्प-कालिक पूंजी परिसंपत्ति कहलायी जायगी।

हालांकि शेयर, (इक्विटी अथवा वरीयता) जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचैंज में सूचीबद्ध है (शेयरों की सूचीकरण अनिवार्य नही है यदि ऐसे शेयरों का स्थांनतरण 10 जुलाई 2014 को अथवा इससे पूर्व किया गया हो), इक्विटी यूनिट उन्मुख म्यूचुअल फंड जैसे कुछ परिसंपत्ति, ऋणपत्र तथा सरकारी प्रतिभूति जैसी सूचीबद्ध प्रतिभूति, यूटीआई की ईकाईयों तथा जीरो कूपन बांड जैसी कुछ परिसंपत्तियों के संबंध में अधिकार की अवधि को 36 महीने के स्थान पर 12 महीने के तौर पर समझा जाएगा।

टिप्पणी: धारण अवधि को भूमि या भवन या दोनों के तौर पर एक कंपनी के असूचीबद्ध शेयर या अचल संपत्ति की स्थिति में 36 महीनों के स्थान पर 24 महीनों के तौर पर समझा जाएगा।

करदाता द्वारा कोई भी संपत्ति, इसके हस्तांतरण तिथि से लेकर 36 माह से ज्यादा के समय के लिए अपने स्वामित्व में रखना दीर्घ-कालिक पूंजी परिसंपत्ति कहलाता है।

हालांकि शेयर, (इक्विटी अथवा वरीयता) जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचैंज में सूचीबद्ध है (शेयरों की सूचीकरण अनिवार्य नही है यदि ऐसे शेयरों का स्थांनतरण 10 जुलाई को अथवा इससे पूर्व किया गया हो), इक्विटी यूनिट उन्मुख म्यूचुअल फंड जैसे कुछ परिसंपत्ति, ऋणपत्र तथा सरकारी प्रतिभूति जैसी सूचीबद्ध प्रतिभूति, यूटीआई की ईकाईयों तथा जीरो कूपन बांड जैसी कुछ परिसंपत्तियों के संबंध में अधिकार की अवधि को 36 महीने के स्थान पर 12 महीने के तौर पर समझा जाएगा।

टिप्पणी: धारण अवधि को भूमि या भवन या दोनों के तौर पर एक कंपनी के असूचीबद्ध शेयर या अचल संपत्ति की स्थिति में 36 महीनों के स्थान पर 24 महीनों के तौर पर समझा जाएगा।

उदाहरण

श्री कुमार एक वेतन भोगी कर्मचारी हैं। उन्होंने अप्रैल 2024 के महीने में सोना खरीदा और दिसंबर 2025 में बेच दिया। इस मामले में सोना श्री कुमार के लिए पूंजी परिसंपत्ति है। उन्होंने अप्रैल 2024 में सोना खरीदकर दिसंबर 2025 में बेच दिया, अर्थात 24 माह से कम अवधि के लिए धारण करने के बाद। अत: सोना अल्प-कालिक पूंजी परिसंपत्ति के रूप में देखा जाएगा।

उदाहरण

श्री राज एक वेतन भोगी कर्मचारी है। उन्होंने अप्रैल 2021 के माह में सोना खरीदा और अगस्त, 2025 में बेच दिया। इस मामले में सोना श्री राज के लिए पूंजी परिसंपत्ति है। उन्होंने अप्रैल 2021 में सोना खरीदकर अगस्त, 2025 में बेच दिया अर्थात् 24 माह में अधिक अवधि के लिए धारण करने के बाद। अत: सोना दीर्घवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझा जाएगा।

उदाहरण

श्री कुमार एक वेतन भोगी कर्मचारी है। उन्होंने अप्रैल 2025 के माह में एस बी आई लि. (बीएसई में सूचीबद्ध) के शेयर खरीदे तथा जनवरी 2026 में उन्हें बेच दिया। इस प्रकरण में शेयर श्री कुमार के पूंजीगत परिसंपत्ति हैं। उन्होंने अप्रैल 2025 में शेयर खरीदकर जनवरी 2026 में बेच दिए अर्थात 12 महीने से कम अवधि के लिए धारण करने के बाद अत: शेयर अल्प-कालिक पूंजी परिसम्पत्ति में रखे जाएंगे।

उदाहरण

श्री राज एक वेतन भोगी कर्मचारी हैं। उन्होंने अप्रैल 2025 में एस बी आई लि. (बीएसई में सूचीबद्ध)के शेयर खरीदे तथा दिसंबर 2026 में बेच दिए। इस प्रकरण में शेयर श्री राज के पूंजीगत परिसंपत्ति हैं। उन्होंने अप्रैल 2025 में शेयर खरीदे तथा दिसंबर 2026 में बेचे अर्थात 12 माह से ज्यादा अवधि के लिए धारण करने के पश्चात। अत: शेयर दीर्घ-कालिक पूंजी परिसंपत्ति में रखे जायेंगे।

उदाहरण

श्री विकास वेतनभोगी कर्मचारी है। सिंतबर, 2022 के महीने में उसने एबीसी लि. के असूचीबद्ध शेयर खरीदे और उसे मई, 2025 में बेच दिया।

इस मामले में, श्री विकास ने सितम्बर 2022 में शेयर खरीदे और उनको मई 2025 में बेच दिया अर्थात् 24 महीनों की अवधि से कम के लिए रखने के बाद। इसलिए, शेयर अल्प अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझे जाऐंगे।

उदाहरण

(6) श्री कुमार एक वेतनभोगी कर्मचारी है। सितंबर, 2022 के महीनें में उसने एक घर खरीदा और मई 2025 में उसे बेच दिया।

श्री विकास ने 24 महीनों से कम की अवधि के बाद घर बेचा इसलिए घर को अल्प अवधि पूंजी परिसंपत्ति के तौर पर समझा जाएगा।

अल्पावधि पूंजी लाभ और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ का अर्थ

अल्पकालिक पूंजी परिसंपत्ति की बिक्री से उत्पन्न पूंजीगत लाभ को अल्पाबधि पूंजी लाभ कहा जाता है और दीर्धकालिक पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण से उत्पन्न पूंजी लाभ को लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कहा जाता है। अपितु इस नियम के भी कुछ अपवाद है। जैसे कि मूल्यह्रास संपत्ति पर हमेशा अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के तहत ही कर लगाया जाता है।

उदाहरण

श्री राजा ने मई 2005 में खरीदी हुई आवासीय संपत्ति को जनवरी 2025 में बेच दिया। इस विक्रय पर उन्हें 8,40,000/- रु का पूंजी लाभ हुआ। इस प्रकरण में घर 24 माह से ज्यादा की अवधि के लिए अधिकार में रखने के बाद बेचा गया, अत: 8,40,000 रु का पूंजी लाभ दीर्घ कालिक पूंजीगत लाभ के तहत कर वसूला जाएगा।

उदाहरण

श्री राहुल ने मई, 2023 में खरीदे हुए आवासीय घर को अप्रैल, 2025 में बेच दिया। इस बिक्री में 8,40,000 रु का पूंजी लाभ उत्पन्न हुआ। इस प्रकरण में आवासीय संपत्ति को 24 माह से कम की अवधि के लिए अधिकार में रखा गया। अत: 8,40,000/- रु के पूंजीगत लाभ पर अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के तहत कर लगेगा।

पूंजीगत लाभ को अल्प और दीर्घकाल में विभाजित करने का कारण

पूंजीगत लाभ की कर देयता लाभ की प्रकृति पर निर्भर करती है, यानी चाहे अल्पकालिक या दीर्घ कालिक अत: कर देयता निर्धारित करने के लिए, पूंजी लाभ को अल्पकालिक और दीर्धकालिक दो श्रेणियों में बांटा गया है। दूसरे शब्दों में, अल्पकालिक और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की कर दरें अलग-अलग हैं।

लघु अवधि के पूंजीगत लाभ की गणना

अल्पकालिक पूंजीगत संपत्ति के हस्तांतरण पर उत्पन्न अल्पकालिक पूंजी लाभ की गणना निम्न प्रकार से की जाती है।

विवरण रु.
विचारधीन का पूरा मूल्य (यानी, परिसंपत्ति का बिक्री मूल्य) xxxxx
घटा: पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण के संबंध में पूर्ण और विशेष रूप से किया गया खर्च (जैसे, दलाली आदि) (xxxxx)
पूर्ण बिक्री xxxxx
घटा: अधिग्रहण की लागत (पूंजी परिसंपत्ति का क्रय मूल्य) (xxxxx)
घटा: सुधार की लागत (पूंजी परीसंपत्ति के सुधार पर, खरीद के उपरांत (खर्च) (xxxxx)
लघु अवधि पूंजीगत लाभ xxxxx

उदाहरण

श्री कौशल एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। उन्होंने दिसंबर, 2024 में 8,40,000/- रु का सोना खरीदा तथा उसे अगस्त, 2025 में 9,00,000/- रु में बेच दिया। सोना बेचते समय उन्होंने 10,000/- रु की दलाली दी। कर योग्य पूंजी लाभ की राशि क्या है?

सोना दिसंवर, 2024 में खरीदा गया था और अगस्त 2025 में बेचा गया, यानी उसे 24 महीने से कम अवधि के लिए इसे धारण करने के बाद अत: लाभ अल्पकालिक पूंजीगत लाभ है। लाभ की गणना इस प्रकार की गई:

विवरण रु.
विचार का पूर्ण मूल्य (परिसंपत्ति का बिक्री मूल्य) 9,00,000
घटा: पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण के सम्बंघ में पूर्ण और विशेष रूप से किया गया खर्च (दलाली) (10,000)
पूर्ण बिक्री मूल्यांकन 8,90,000
घटा: अधिग्रहण की लागत (पूंजी परिसंपत्ति का क्रय मूल्य) (8,40,000)
घटा: सुधार की लागत (पूंजी परिसंपत्ति के सुधार पर लागत, खरीद के उपरांत) शून्य
लधु अवधि पूंजीगत लाभ 50,000

किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज इक्विटी ओरिएंटेड म्यूच्यूअल फण्ड की यूनिट और व्यापारिक न्यास अदि की यूनिट अर्थात एसटीसीजी में सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों की बिक्री से उत्पन्न लघु अवधि पूंजीगत लाभ अनुभाग 111क के अन्तर्गत है।

अनुभाग 111 उन मामलों में लागू होता है जहां एस टी सी जी शेयरों के, या इक्विटी ओरिएंटड म्युच्युल फंड (*) की इकाइयों अथवा व्यापारिक ब्याज की इकाई जो प्राधिकृत शेयर बाजार के माध्यम से 1-10-2004 को अथवा उसके पश्चात् स्थानांतरित है तथा यह सब लेन-देन प्रति भूति लेनदेन के लिए (एस टी टी) उत्तरदायी हैं।

(*) इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड अर्थात धारा 10 (23घ) के तहत निवेश योग्य म्युचुअल फंड कुल प्राप्तियों में से इसकी निवेशगत कोष का 65% निवेश घरेलू उद्योगों के शेयर खरीदने में किया जाता है।

यदि अनुभाग 111क की ऊपर दी गई शर्ते पूरी होती हैं, तो एस टी सी जी को अनुभाग 111क के अन्तर्गत माना जाता है। इस प्रकार के लाभ पर 20% की दर से कर लगाया जाता है ।

टिप्पणी 1 : 23.07.2024 से पहले हुए किसी भी स्थानांतरण के लिए धारा 111क के अंतर्गत एसटीसीजी शामिल है जो 15 प्रतिशत की दर पर वसूला जाएगा

टिप्पणी 2 : 20 प्रतिशत की रियायती कर की दर का लाभ वहां भी उपलब्ध होगा जहां एसटीटी न दिया गया हो बशर्तें कि

- किसी अंतर्राष्ट्रीय सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर किया गया हो तथा

- प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया अथवा देययोग्य हो

उदाहरण

श्री जनक एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। दिसंबर, 2024 में उन्होंने बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज से 1400/- रु की प्रति शेयर दर पर x लिमिटेड के 100 शेयर ख़रीदे अगस्त, 2025 में यह शेयर बी एस ई में 2000/- रु प्रति शेयर की कीमत पर बेचे गए (विक्री के समय प्रतिभूति लेनदेन) कर का भुगतान किया गया था)। इस मामले में पूंजीगत लाभ की प्रकृति क्या है?

**

शेयर दिसंबर, 2024 में खरीदे गए थे तथा अगस्त, 2025 में बेचे गए यानी उन्हें 12 महीने से कम की अवधि के लिए अधिकार में रखा गया अत: यह लाभ अल्पकालिक पूंजीगत लाभ है। सूचीबद्ध शेयरों की बिक्री के मामले में एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान अनुभाग 111क का प्रावधान है। अनुभाग 111क उन मामलों पर लागू होता है जहां एस टी सी जी शेयरों के या इक्विटी ओरिएंटड म्युच्यल फंडों को इकाइयों का हस्तांतरण 1-10-2004 या उसके बाद हुआ है, यह सब लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन के लिए उत्तरदायी हैं।

यदि अनुभाग 111क को सभी शर्ते पूरी होती हैं तो एस टी सी जी को अनुभाग 111क के अन्तर्गत माना जाता है। इस प्रकार के लाभ पर 20% की दर से कर देय होगा (लागू अधिभार और उपकर)

दिए गए मामले में 12 महीने से कम समय तक उन्हें रखने के बाद शेयर बेचे गए थे, शेयरों को एक मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से बेचा गया था और लेनदेन एसटीटी के लिए उत्तरदायी था, इसलिए, एसटीसीजी को धारा 111क के तहत कवर किए गए एसटीसीजी के रूप में कहा जा सकता है। इसके अलावा, हस्तांतरण अगस्त 2025 में किया गया है, इस प्रकार, एसटीसीजी को 20% (साथ ही अधिभार और उपकर लागू होने के रूप में कर) पर कर लगाया जाएगा।

उदाहरण

श्री सौरभ एक वेतन भोगी कर्मचारी हैं। दिसंबर, 2024 में उन्होंने ए बी सी म्युचुअल फंड की 100 इकाईया 100/- प्रति इकाई की दर से खरीदी। म्युचुअल फंड एक इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड है। ये इकाईयां अगस्त, 2025 में बी एस ई में 125/- रु प्रति ईकाई की दर से बेची गई (बिक्री के समय प्रतिभूति कर का भुगतान कर दिया गया था)। इस पूंजी लाभ की प्रकृति क्या है?

इकाईयां दिसंवर, 2024 में खरीदकर अगस्त, 2025 में बेच दी गई, जो कि 12 महीने से कम की अवधि के लिए ही अधिग्रहण में थी। अत: यह पूंजी लाभ लधु कालीन पूंजीगत लाभ है। धारा 111 क ईक्विटी शेयर अथवा ईक्विटी उन्मुख म्यूचल फंड अथवा व्यापार ट्रस्ट की ईकाई पर उत्पन्न एसटी सीजी की स्थिति में लागू होगी जो 1-10-2004 को अथवा पश्चात् स्थांनातरित हुई हो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से तथा स्थांतरण प्रतिभूति लेन-देन कर हेतु देय योग्य था।

यदि धारा 111 क की शर्त पूरी होती है तो एसटीसीजी, एसटीसीजी के तौर पर होगा जो धारा 111क के अंतर्गत आएगा। ऐसा लाभ @ 20% की दर से कर लगेगा (साथ ही अधिभार और अधिकार जैसा लागू हो)

दिए गए प्रकरण में म्युचुअल फंड एक इक्विटी आधारित म्युचुअलफंड है, जिसकी ईकाईयां 12 माह से कम के लिए अधिकार में रखी गई थी। इकाईयां एक मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में बेची गई अत: यह लेनदेन एस टी टी के लिए उत्तरदायी है। एस टी सी जी अनुभाग 111क के तहत एस टी सी जी कहा जा सकता है। आगे, स्थानांतरण अगस्त 2025 में हुआ, ऐसा एस टी सी जी 20% की दर पर कर देय होगा (लागू अधिभार और उपकर अतिरिक्त)।

उदाहरण

श्री पोद्दार वेतनभोगी कर्मचारी है। दिसंबर 2024 महीने में उन्होंने 70 यूएस डॉलर प्रति शेयर की दर से एबीसी लि. के 100 ईक्विटी शेयर खरीदे। इन शेयरों को 85 यूएस डॉलर प्रति शेयर की दर पर अगस्त 2025 में बेचा गया था। कोई प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) शेयरों के स्थानांतरण पर देययोग्य नहीं था चूंकि कहीं न कही एक अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र में प्राधिकृत शेयर बाजार में सूचीबद्ध थे।

**

धारा 111क प्राधिकृत शेयर बाजार के माध्यम से ईक्विटी शेयरों के स्थानांतरण पर उत्पन्न एसटीसीजी की स्थिति में लागू है तथा लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर हेतु उत्तरदायी है। धारा 111के अंतर्गत आने वाला एसटीसीजी 20 प्रतिशत की दर पर कर हेतु वसूलनीय है (साथ ही अधिभार तथा उपकर जो भी लागू हो)

20 प्रतिशत की दर पर रियायती कर की दर उपलब्ध होगी जहां एसटीटी उपलब्ध न दिया गया हो, बशर्ते कि

- लेनदेन किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर किया गया हो तथा

- प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया अथवा देययोग्य हो

दिए गए मामले में, श्री पोद्दार ने एबीसी लि. के शेयर बेचे है जो अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र (आईएफएससी) में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार में सूचीबद्ध थे। आगे, प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया जाता है।

शेयर दिसंबर 2024 में खरीदे गए थे तथा अगस्त 2025 में बेचे गए अर्थात् उनको 12 महीनों से कम की अवधि के लिए रखा गया। इसलिए, प्राप्ति अल्प अवधि पूंजीगत प्राप्ति होगी। चूंकि शेयरों को आईएफएससी में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार के माध्यम से बेचा गया था तथा प्रतिफल विदेशी मुद्रा (अर्थात् यूएस डॉलर) में दिया गया था। इसलिए, एसटीसीजी को धारा 111क के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी के तौर पर समझा जा सकता है भले ही बिक्री का लेनदेन एसटीटी हेतु वसूलनीय नहीं था। ऐसा एसटीसीजी 20 प्रतिशत की दर पर वसूलनीय होगा (साथ ही अधिभार तथा उपकर जो भी लागू हो)

उदाहरण

श्री राजा एक वेतन भोगी कर्मचारी है। दिसंवर, 2024 में उन्होंने ए बी सी लिमिटेड के 100 वरीयता शेयर 100/- प्रति शेयर की दर पर खरीदे। इन शेयरों को अगस्त, 2025 में बेच दिया गया प्रति शेयर 125/- रु क्या यह पूंजीगत लाभ एस टी सी जी अनुभाग 111क के तहत कहलाया जाएगा?

धारा 111क ईक्विटी शेयर अथवा ईक्विटी उन्मुख म्यूचल फंड अथवा व्यापार ट्रस्ट की इकाई पर उत्पन्न एसटी सीजी की स्थिति में लागू होगी अन्य शब्दों में, पसंदीदा शेयरों की बिक्री पर एसटीसीजी को धारा 111क के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी के तौर पर नहीं समझा जा सकता ।

इस प्रकरण में एस टी सी जी सामान्य है, अत: श्री राजा की आमदनी के अनुसार इस पर सामान्य कर देय होगा।

उदाहरण

श्री राहुल एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। दिसंबर, 2024 में उन्होंने डेब्ट ओरिऐंटड म्युचुअल फंड की 100 इकाईयां 100/- प्रति इकाई की दर से खरीदा। इन इकाईयों को अगस्त, 2025 में 125/- प्रति इकाई की दर से बेच दिया गया। क्या पूंजी लाभ को एस टी सी जी अनुभाग 111क के अन्तर्गत कहा जा सकता है?

**

धारा 111 क इक्विटी शेयर अथवा इक्विटी उन्मुख फंड अथवा व्यापार ट्रस्ट की इकाई के स्थानांतरण पर उत्पन्न एसटी सीजी की स्थिति में लागू होगी जो 1-10-2004 को अथवा पश्चात् स्थानांतरित हुई हो किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से तथा स्थानांतरण प्रतिभूति लेन-देन कर हेतु देय योग्य था

इस दिए गए प्रकरण में म्युचुअल फंड डेब्ट ओरिऐंटड फंड हैं, (अर्थात् ईक्विटी उन्मुखी म्यूचल फंड नही) तथा इस पर अनुभाग 111क का प्रावधान लागू नहीं होगा। तथा ऐसे लाभ को सामान्य एसटीसीजी के तौर पर समझा जाएगा। अन्य शब्दों में गैर ईक्विटी उन्मुखी म्यूचल फंड की इकाई की बिक्री पर एसटीसीजी धारा 111क के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी के तौर पर माना जाएगा।

इस प्रकरण में एस टी सी जी सामान्य है अत: श्री राहुल की आय के अनुसार सामान्य कर देय होगा।

उदाहरण

श्री जय एक वेतन भोगी कर्मचारी हैं। उन्होंने अगस्त, 2024 में ए बी सी लि. के 100 शेयर 100/- प्रति शेयर की दर से खरीदे। अगस्त, 2025 में में शेयर 125/- प्रति शेयर की दर से उन्होंने अपने मित्र को हस्तांतरित कर दिये। ये शेयर किसी भी मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं है। क्या धारा 111 क के अंतर्गत यह पूंजी लाभ एस टी सी जी के तौर पर आ सकते हैं?

धारा 111क इक्विटी शेयर अथवा इक्विटी ओरिएंटेड म्यूच्यूअल फंड की इकाइयों अथवा ब्यापारिक न्यास की इकाइयों के स्थानांतरण पर उत्पन्न एसटीसीजी की स्थिति में लागू है, जिसे प्राधिकृत शेयर बाजार के माध्यम से 1-1-2004 की अथवा पश्चात स्थानांतरित किया गया था तथा ऐसे लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर हेतु भी उत्तरदायी है

दिये गये मामले में शेयर मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूंचीबद्ध नहीं है, और, अत: धारा 111क उनके प्रावधान लागू नहीं है और इस प्रकार के लाभ को सामान्य एस टी सी जी के रूप में माना जायेगा। दूसरे शब्दों में बिना सूचीबद्ध शेयरों की बिक्री पर एस टी सी जी को धारा 111क के तहत अंतर्निहित एस टी सी जी के रूप में परिभाषित नही किया जा सकता।

इस मामले में, एस टी सी जी सामान्य है और, अत: श्री जय की कुल आय पर निर्भर करते हुये सामान्य कर की दर से लगाया जायेगा।

अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर कर

कर दर के निर्धारण के उद्देश्य के लिए, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ निम्न प्रकार वर्गीकृत है:

• अल्पकालिक पूंजीगत लाभ धारा 111क के तहत अन्तर्निहित है।

• अल्पकालिक पूंजीगत लाभ धारा 111क के तहत अन्तर्निहित के अलावा है।

उदाहरण: एस टी सी जी धारा 111 के तहत अंतर्निहित

धारा 111क के तहत अंतर्निहित एस टी सी जी के उदाहरण:

• एक मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज में बेचे गये इक्विटी शेयरों की बिक्री से उत्पन्न एस टी सी जी, जो कि एस टी टी हेतु वसूलनीय है।

• एक मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज में बेंचे गये म्यूचुअल फंड आधारित शेयरों की इकाइयों की बिक्री से उत्पन्न एस टी सी जी जो कि एस टी टी हेतु वसूलनीय है।

एक व्यापारिक न्यास की ईकाईयों की बिक्री पर उत्पन्न एसटीसीजी

इक्विटी शेयर, इक्विटी ओरिएंटिड म्युचूअल फंड की यूनिट अथवा व्यापारिक न्यास के यूनिट पर उत्पन्न एसटीसीजी किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार में स्थित है तथा प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया अथवा देययोग्य होता है भले ही बिक्री का लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) हेतु वसूलनीय न हो

उदाहरण: धारा 111क के तहत अंतर्निहित एस टी सी जी के अलावा

धारा 111 क के अंतर्गत न आनेवाले एसटीसीजी के उदाहरण

• मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के द्वारा को छोड़कर इक्विटी शेयर की बिक्री पर उत्पन्न एसटी सीजी

• इक्विटी शेयरों के अलावा शेयरों की बिक्री पर उत्पन्न एस टी सी जी

• गैर-इक्विटी की उन्मुखी म्यूच्यूअल फण्ड इकाइयों की बिक्री पर उत्पन्न एस टी सी जी (कर्ज उन्मुखी म्यूचुअल फंड)

• ऋणपत्रों, बंधो और सरकारी प्रतिभूतियों पर एस टी सी जी

• शेयरों के अलावा सम्पत्ति। इकाइयों अचल सम्पत्ति की बिक्री पर एस टी सी जी, सोना, चांदी, इत्यादि की बिक्री पर एस टी सी जी।

एस टी सी जी की कर दरें

धारा 111 के तहत अंतर्निहित एस टी सी जी 20% की दर पर कर को प्रभार्य है।

टिप्पणी : टिप्पणी : यह ऐसी किसी स्थानांतरण के लिए 15 प्रतिशत की दर पर कर हेतु वसूलनीय है यदि ऐसा स्थानांतरण 23.07.2024 से पहले होता है

सामान्य एस टी सी जी, अर्थात, धारा 111 के तहत अन्र्तनिहति के अलावा एस टी सी जी सामान्य दरों पर कर को प्रभार्य है जो कि कर दाता की कुल कर योग्य आय आधार पर निर्धारित है

उदाहरण: धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एस टी सी जी की कर दर

श्री कुमार ने बाम्बे स्टॉफ एक्सचेंज में एस बी आई लिमिटेड के इक्विटी शेयरों को 8 माह की एक अवधि के लिए उन्हें धारण करने के बाद बेच दिया। एस टी सी जी पर लागू कर दर क्या होगी?

**

इस मामले में एस टी सी जी धारा 111 के तहत अन्तर्निहित है और, अत: 15% की दर से (अधिकार और लागू उपकर को जोड़ते हुये) कर को प्रभार्य होगा।

उदाहरण: धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एस टी सी जी की कर दर

श्री कुमार ने म्यूचुअल-फंड आधारित एक इक्विटी की इकाइयों को बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में उन्हें 8 माह की एक अवधि के लिए धारण करने के बाद बेच दिया। एस टी सी डी पर लागू कर की दर क्या होगी?

**

इस मामले में एक टी सी जी धारा 111 के तहत अन्तर्निहित है और, अत: 15% की दर से (अधिभार और लागू उपकर को जोड़ते हुये) कर को प्रार्भाय होगी।

उदाहरण: धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एसटीसीजी के अलावा एस टी सी जी की कर दर

श्री कुमार ने ऋणफंड की इकाइयों को 8 माह की एक अवधि के लिए उन्हें धारण करने के बाद बेंच दिया। एस टी सी जी पर लागू कर दर क्या होगी।

**

इस मामले में लाभ धारा 111 के तहत अन्तर्निहित नहीं है और सामान्य एस टी सी जी है और, अत: श्री कुमार को प्रभारित सामान्य कर दर लागू होगी। श्री कुमार को लागू सामान्य दर उसकी कुल आय के आधार पर निर्धारित होगी।

उदाहरण: धारा 111क के तहत अन्तर्निहित के अलावा एस टी सी जी की कर दर

श्री कमल ने उसका आवासीय मकान इसे 18 माह की एक अवधि के लिये धारण करने के बाद बेंचा। एस टी सी जी पर लागू कर दर क्या होगी?

**

इस मामले में लाभ धारा 111 के तहत अंतर्निहित नहीं है और, अत: श्री कमल को सामान्य दर पर लागू कर को प्राभार्य होगा। श्री कमल को लागू सामान्य दर उसकी कुल आय के आधार पर निर्धारित होगी।

उदाहरण: एस टी सी जी पर कर

श्री रमेश (निवासी और 56 वर्षीय) एस एम लिमिटेड में एक वार्षिक वेतन रु 8,40,000 (मानक कटौती के बाद) पर कार्यरत वेतन भोगी कर्मचारी है। दिसम्बर, 2024 में उसने रु 100 प्रति शेयर की दर से एक लिमिटेड के 10,000 शेयरों को खरीदा और इन्हें रु 125 प्रति शेयर की दर से (दलाली रु 1 प्रति शेयर) अप्रैल, 2025 में बेचा शेयरों को बाम्बे स्टाक एक्सचेंज के माध्यम से बेंचा गया और प्रतिभूति लेनदेन कर का भुगतान कर दिया गया था।

श्री रमेश की कर देयता क्या होगी (मान लीजिए कि वह धारा 115खकग के अंतर्गत डिफाल्ट कर व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प चुनते हैं)?

**

पहले हमें श्री रमेश की कर योग्य आय की गणना करनी होगी और तब हम कर दायित्व की गणना करेंगे। कर योग्य आय की गणना निम्न प्रकार होगी।

विवरण रुपये
वेतन आय 8,40,000
अल्पकालिक पूंजीगत लाभों (*) 2,40,000
सकल कुल आय 10,80,000
घटा: धारा 80ग से 80प के तहत कटौती शून्य
कुल आय या कर योग्य आय 10,80,000
कुल आय पर कर ** 1,28,500
जोड़े: 4% की दर से स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 5,140
वर्ष के लिए कुल कर देयता 1,33,640

(*) एस टी सी जी की गणना:

विवरण रुपये
प्रतिफल का पूरा मूल्य (अर्थात बिक्री निर्धारण, अर्थात रु 125 x 10,000 शेयर) 12,50,000
घटा: पूंजी सम्पत्ति के हस्तांतरण के सम्बंध में पूर्ण और विशेष रूप से किये गये व्यय (अर्थात, दलाली) (10,000)
शुद्ध बिक्री निर्धारण 12,40,000
घटा: अधिग्रहण की कीमत (अर्थात, क्रय मूल्य, अर्थात 100 x 10,000 शेयर) (10,00,000)
घटा: सुधार की लागत (अर्थात, पूंजी सम्पत्ति के सुधार पर बाद में क्रय पूंजीगत व्यय शून्य
अल्पकालिक पूंजीगत लाभ 2,40,000

**एस टी सी जी धारा 111क के तहत अंतर्निहित है और, अत: 15% की दर से कर को प्राभार्य होगा। सामान्य आय होते हुये वेतन आप सामान्य दर पर कर को प्राभार्य होगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 60 वर्षो की उम्र से नीचे के एक व्यक्ति पर लागू सामान्य कर दरें निम्नानुसार है:

• रु 2,50,000 तक की आय पर शून्य

• रु 2,50,000 से अधिक लेकिन रु 5,00,000 तक आय के लिए 5%

• रु 5,00,000 से अधिक लेकिन रु 10,00,000 तक आय के लिए 20%

• रु 10,00,000 से अधिक आय के लिए 30% उपरोक्त के अलावा, 4% की दर से स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर कर की राशि पर लगाया जायेगा।

उपरोक्त सामान्य कर दरों को लागू करते हुये, वेतन आय पर कर रु 80,500 आयेगा और एस टी सी जी पर 15% की दर से कर रु 36,000 (2,40,000 का 15%) आयेगा। कुल कर रु 1,16,500 आयेगा। स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4% की दर से लागू होगा।

उदाहरण: एस टी सी जी पर कर

श्री कुमार (निवासी और 40 वर्षीय) रु 8,40,000 की एक वार्षिक वेतन पर एस एम लिमिटेड में कार्यरत एक वेतन भोगी कर्मचारी है। दिसम्बर 2024 में, उसने रु 10,00,000 की भूमि का एक भूखण्ड खरीदा और इसे रु 12,10,000 (दलाली रु 10,000) के लिए अगस्त 2025 में बेच दिया। श्री कुमार की कर देयता क्या होगी (मान लीजिए श्री कुमार धारा 115खकग के अंतर्गत डिफाल्ट कर व्यवस्था से बाहर रहने का विकल्प चुनते हैं)??

**

पहले हमें श्री कुमार की कर योग्य आय की गणना करनी होगी और तब हम कर देयता की गणना करेंगे। कर योग्य आय की गणना निम्न प्रकार होगी:

विवरण रुपये
वेतन आय 8,40,000
अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (*) 2,00,000
सकल कुल आय 10,40,000
घटा: धारा 80ग से 80प के तहत कटौती शून्य
कुल आय या कर योग्य 10,40,000
कुल आय पर कर ** 1,24,500
जोड़े: 4% की दर से स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4,980
वर्ष के लिए कुल कर देयता 1,29,480

(*) एस.टी.सी.जी. की गणना:

विवरण रुपये
प्रतिफल का पूरा मूल्य (अर्थात् बिक्री निर्धारण) 12,10,000
घटा: पूंजीगत परिसम्पत्ति के हस्तांतरण के सम्बन्ध में पूरी तरह से और विशेष रूप से किये गये व्यय (अर्थात् दलाली) (10,000)
शुद्ध बिक्री निर्धारण 12,00,000
घटा: सुधार की कीमत (अर्थात, बिक्री मूल्य) (10,00,000)
घटा: सुधार की कीमत (अर्थात पूंजीगत परिसम्पत्ति के सुधार पर बाद में किये गये व्यय) शून्य
अल्पकालिक पूंजीगत लाभ 2,00,000

**एस.टी.सी.जी. सामान्य है, अर्थात् धारा 111क के तहत अंतर्निहित नहीं है, अत: रु. 2,00,000 का एस.टी.सी.जी. वेतन आय में जुड़ेगा और सामान्य दरों पर कर को प्रभार्य होगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 60 वर्षों की उम्र से नीचे के एक व्यक्ति पर लागू सामान्य कर दरें निम्नानुसार है:

• रु. 2,50,000 तक की आय पर शून्य

• रु. 2,50,000 से ऊपर लेकिन रु. 5,00,000 तक आय के लिए 10 %

• रु. 5,00,000 से ऊपर लेकिन रु. 10,00,000 तक आय के लिए 20%

• रु. 10,00,000 से ऊपर आय के लिए 30% उपरोक्त के अलावा, स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4% की दर से कर की राशि पर लगाया जायेगा।

उपरोक्त सामान्य दरों को लागू करते हुए रु. 10,40,000 की कुल आय पर कर रु. 1,24,500 आयेगी स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4% की दर से कर की राशि पर लगाया जायेगा, को जोड़ते हुए और कुल कर देयता रु. 1,29,480 आयेगी।

बुनियादी छूट सीमा के विरुद्ध एस.टी.सी.जी. का समायोजन

बुनियादी छूट सीमा से तात्पर्य है आय का स्तर जिस तक एक व्यक्ति को कोई कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के एक व्यक्ति पर लागू के मामले में, बुनियादी छूट सीमा निम्नानुसार है:

• 80 वर्ष या ऊपर की उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट सीमा रु. 5,00,000 है।

• 60 वर्ष या ऊपर लेकिन 80 वर्षों से कम की उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट सीमा रु. 3,00,000 है।

• 60 वर्ष के नीचे की उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट सीमा रु. 2,50,000 है।

• व्यक्ति की उम्र की परवाह किये बगैर गैर-निवासी व्यक्ति के लिए, छूट सीमा रु. 2,50,000 है।

उदाहरण: बुनियादी छूट सीमा

श्री कपूर (निवासी, उम्र 25 वर्ष) रू. 1,84,000 प्रति वर्ष की कर योग्य कमाई करने वाले एक वेतन भोगी कर्मचारी हैं। वेतन आय के अलावा उसने रु. 6,000 के मियादी जमा पर ब्याज कमाया। उसकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2025-26 के लिए उसकी कर देयता क्या होगी?

**

60 वर्षों से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, बुनियादी छूट सीमा छूट सीमा रु. 2,50,000 है। इस मामले मैं, श्री कपूर की कर योग्य आय रु. 1,90,000 (रु. 1,84,000 + रु. 6,000) है, जो कि रु. 2,50,000 की बुनियादी सीमा छूट से थोड़ा नीचे है, अत: उसकी कर देयता शून्य होगी। हालांकि, यदि श्री कपूर धारा 115खकग के अंतर्गत डिफाल्ट चूक व्यवस्था को चुनती है तो मूल छूट सीमा रू. 4,00,000 होगी।

उदाहरण:

श्री विरेन (निवासी और आयु 62 वर्ष) एक व्यवसायी है। वर्ष 2025-26 के लिये उसकी कर योग्य आय रु. 2,75,200 है। उसकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2025-26 के लिये उसकी कर देयता क्या होगी?

**

60 वर्ष से अधिक लेकिन 80 वर्ष के नीचे निवासी व्यक्ति के लिये, बुनियादी छूट सीमा रु. 3,00,000 है। इस मामले में श्री विरेन की कर योग्य आय 2,75,200 है, जो कि बुनियादी छूट सीमा रु. 3,00,000 से नीचे है अत: उसकी कर देयता शून्य होगी।

उदाहरण:

श्रीमति राजा (निवासी और उम्र 82 वर्ष) एक डाक्टर हैं। वर्ष 2025-26 के लिए उसकी कर योग्य आय रु. 4,84,000 है। उसकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2025-26 के लिए उसकी कर देयता क्या होगी?

**

80 वर्ष और ऊपर के निवासी व्यक्ति के लिये, बुनियादी छूट सीमा रु. 5,00,000 है। इस मामले में, श्रीमती राजा की कर योग्य आय रु. 4,84,000 है, जो रु. 5,00,000 की बुनियादी छूट सीमा से नीचे है, अत: उसकी कर देयता शून्य होगी। हालांकि, यदि श्री राज धारा 115खकग के अंतर्गत डिफाल्ट चूक व्यवस्था को चुनती है तो मूल छूट सीमा रू. 4,00,000 होगी।

उदाहरण:

श्री राज (एक गैर निवासी और उम्र 82 वर्ष) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति है। यह कनाडा में रह रहे हैं। वह मुंम्बई में एक मकान के स्वामी है जो कि किराये पर दिया गया और वर्ष के लिए कर योग्य किराया आय रु. 1,84,000 है। वर्ष 2025-26 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

**

गैर निवासी व्यक्ति के लिये, उम्र की परवाह किये बगैर बुनियादी छूट सीमा रु. 2,50,000 है। इस मामले में, श्री राज की कर योग्य आय रु. 1,84,000 है, जो रु. 2,50,000 की बुनियादी छूट सीमा से नीचे है, अत: उसकी कर देयता शून्य होगी। हालांकि, यदि श्री राज धारा 115खकग के अंतर्गत डिफाल्ट चूक व्यवस्था को चुनती है तो मूल छूट सीमा रू. 4,00,000 होगी।

बुनियादी छूट सीमा के विरुद्ध एस.टी.सी.जी. का समायोजन

पूर्ववर्ती उदाहरण में हमने देखा की यदि कर दाता की आय बुनियादी छूट सीमा से नीचे है तो कोई कर देयता नहीं होगी। अब एक सवाल उठता है, क्या करदाता अल्पकालिक पूंजीगत लाभ के विरुद्ध बुनियादी छूट सीमा का समायोजन कर सकता है? इस सम्बन्ध में प्रावधान निम्न प्रकार है।

धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एस.टी.सी.जी.

केवल एक निवासी व्यक्ति और घरेलू एचयूएफ ही धारा 111 के तहत अंतर्निहित एस.टी.सी.जी. के विरुद्ध छूट सीमा का समायोजन कर सकता है। इसलिए एक गैर-आवासीय व्यक्ति/एचयूएफ धारा 111 क के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी के समझ छूट सीमा का समायोजन नही कर सकता

एक निवासी व्यक्ति/एचयूएफ आधारभूत छूट के समक्ष धारा 111 क के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी को समायोजित कर सकता है लेकिन ऐसा समायोजन अन्य आय का समायोजन करने के बाद संभव है। अन्य शब्दों में धारा 111 क के अंतर्गत आने वाली एसटीसीजी को छोड़कर प्रथम आय छूट सीमा के समक्ष समायोजित की जाती है तथा उसके बांड शेष सीमा (यदि हो) धारा 111 क के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी के समक्ष समायोजित की जा सकती है।

उदाहरण

श्री कपूर (उम्र 67 वर्ष और निवासी) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति है। उसने मार्च 2025 में, एस.बी.आई. लिमिटेड के शेयर खरीदे और इन्हें मई, 2025 में बेंच दिया (बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने बेंचे और एस.टी.टी. लगाया जाता है) 1. कर योग्य एस.टी.सी.जी. राशि रु. 1,20,000/-। शेयरों की बिक्री पर लाभ के अलावा उनकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2025-26 को उसकी कर देयता क्या होगी?

60 वर्ष और ऊपर लेकिन 80 वर्ष से नीचे की उम्र के निवासी व्यक्ति के लिये, बुनियादी छूट सीमा रु. 3,00,000/- है। आगे, एक निवासी व्यक्ति धारा 111क तहत अन्तर्निहित एस.टी.सी.जी. के विरुद्ध बुनियादी छूट सीमा का समायोजन कर सकता है इस मामले में, रु. 1,20,000/- की एस.टी.सी.जी. धारा 111क के तहत अन्तर्निहित है, तथा इस प्रकार के लाभ का छूट सीमा के विरुद्ध समायोजन की अनुमति केवल 1 निवासी को दी जाती है। इस मामले में, श्री कपूर एक निवासी है, और अत: छूट सीमा के विरुद्ध रु. 1,20,000 की एस.टी.सी.जी. का समायोजन कर सकते हैं।

उपरोक्त चर्चा को ध्यान में रखते हुए, श्री कपूर की कर देयता वर्ष 2025-26 के लिए शून्य होगी।

उदाहरण

श्री कुनाल (उम्र 59 वर्ष और निवासी) रु. 5,000 की मासिक पेंशन कमाने वाले एक सेवानिवृत्त व्यक्ति है। उसने दिसम्बर 2024 में एस.बी.आई. लिमिटेड के शेयर खरीदे और इन्हें अप्रैल 2025 में बेंच दिया (बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बेचे और एस.टी.टी. लगाया जाता है) कर योग्य एस.टी.सी.जी. की राशि रु. 2,20,000 है। पेंशन आय और शेयरों पर बिक्री पर लाभ के अलावा कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2025-26 के लिये इनकी कर देयता क्या होगी?

इस मामले में बुनियादी छूट सीमा रु. 2,50,000/- पर, रु. 2,50,000 की छूट सीमा से रु. 60,000 की पेंशन आय का समायोजन करने के पश्चात् शेष रु. 1,90,000 आयेगा। रु. 1,90,000/- का बकाया एस.टी.सी.जी. के विरुद्ध समायोजित होगा।

शेयरों की बिक्री पर कुल एस.टी.सी.जी. रु. 2,20,000/- है और उपलब्ध छूट सीमा (पेंशन आय के समायोजन के पश्चात रु. 1,90,000/- है अत:, बकाया रु. 1,90,000/- के समायोजन के पश्चात छोड़ी गयी बकाया एस.टी.सी.जी. रु. 30,000 आयेगी। रु. 30,000 का लाभ 20% की दर से (4% उपकर जोड़ते हुए) कर को प्रभार्य होगा इस प्रकार, उपकर से पहले कर देयता रु. 6000 आयेगी चूंकि श्री कुनाल की कुल आय रू. 5,00,000 है वह धारा 87क के अंतर्गत उपलब्ध छूट के योग्य है। छूट देययोग्य कर या रू. 12,500, जो भी कम हो, तक सीमित है।

उदाहरण

श्री गगन (उम्र 59 वर्ष और अनिवासी) एक भारतीय नियोक्ता से रु. 5,000/- की एक मासिक आय कमाने वाले एक सेवानिवृत्ति व्यक्ति है। उसने दिसम्बर 2024 में एस.बी.आई. लिमिटेड के शेयर खरीदे और अप्रैल 2025 में इन्हें बेंच दिया (बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बेचे और एस.टी.टी. लगाया जाता है)। कर योग्य एस.टी.सी.जी. राशि रु. 2,20,000 है। पेंशन आय और शेयरों पर बिक्री के आय के अलावा उसकी कोई अन्य आय नहीं है उसकी कर देयता वर्ष 2025-26 के लिये क्या होगी?

*

उम्र की परवाह किये बगैर अनिवासी व्यक्ति के लिये, बुनियादी छूट सीमा रु. 2,50,000/- है। आगे एक अनिवासी व्यक्ति बुनियादी छूट सीमा का समायोजन धारा 111क तहत अन्तर्निहित एस.टी.सी.जी. के विरुद्ध नहीं कर सकता है। दूसरे शब्दों में, श्री गगन पेंशन आय का बुनियादी छूट सीमा के विरुद्ध समायोजन कर सकता है लेकिन शेष छूट सीमा शेयरों की बिक्री पर एस.टी.सी.जी. के विरुद्ध समायोजित नहीं कर सकता है।

इस मामले में बुनियादी छूट सीमा रु. 2,50,000 है और यह रु. 60,000 की पेंशन आय के विरुद्ध समायोजित होगी रु. 1,90,000 (रु. 2,50,000 से कम 60,000) की बकाया सीमा के धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एस.टी.सी.जी. के विरुद्ध समायोजित नहीं किया जा सकता है। अत: इस मामले, श्री गगन को रु. 2,20,000 की एस.टी.सी.जी. पर 20% की दर से (4% उपकर जोड़ते हुए) कर का भुगतान करना होगा। इस प्रकार कर देयता रु. 45,760 आयेगी।

धारा 80ग से 80प के तहत कटौतियां और एस.टी.सी.जी.

धारा 111क में संदर्भित अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर कोई कटौती की अनुमति धारा 80 से 80प के तहत नहीं है। तथापि इस प्रकार की कटौतियाँ का दावा धारा 111क के तहत अन्तर्निहित के अलावा एस.टी.सी.जी. से किया जा सकता है।

उदाहरण

श्री कपूर (उम्र 57 वर्ष और निवासी) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति है उसने मार्च, 2024 में रु. 8,84,000 की कीमत का एक एक भूमि का टुकड़ा खरीदा और इसे अप्रैल 2025 में रु. 12,84,000/- के लिये बेच दिया। भूमि की बिक्री पर लाभ के अलावा उसकी कोई अन्य आय नहीं है। उसने रु. 1,00,000/- सार्वजनिक भविष्य निधि (पी.पी.एफ.) में तथा एनएससी में 50,000 जमा किये। वह पी.पी.एफ. में जमा रु. 1,50,000 के, खाते पर धारा 80ग के तहत कटौती का दावा करना चाहता है। क्या वह यह कर सकता है?

**

धारा 80ग से 80प के तहत कटौती का दावा धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एस.टी.सी.जी. के अलावा अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर किया जा सकता है। इस मामले में, लाभ भूमि की बिक्री पर है और, अत: धारा 111क के तहत अन्तर्निहित नहीं है। अत:, श्री कपूर रु. 4,00,000 की एस.टी.सी.जी. से रु. 1,50,000 की धारा 80ग के तहत कटौती का दावा कर सकता है। श्री कपूर की कर योग्य आय की गणना निम्न प्रकार हुई:

विवरण रुपये
अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (12,84,000 घटा 8,84,000) 4,00,000
कुल सकल आय 4,00,000
घटा: धारा 80ग से 80प के तहत कटौती (1,50,000)
कुल आय या कर योग्य आय 2,50,000

उदाहरण

श्री कपूर (उम्र 57 वर्ष और निवासी) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति है उसने मार्च, 2025 में एसबीआई लि. के ईक्विटी शेयर खरीदे और इसे अप्रैल 2025 में बेच दिया (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा और एसटीटी लागू हुआ)। करयोग्य एसटीसीजी रू. 2,20,000 है। शेयर की बिक्री पर लाभ के अलावा उसकी कोई अन्य आय नहीं है। उसने रु. 1,50,000/- सार्वजनिक भविष्य निधि (पी.पी.एफ.) में जमा किये। वह पी.पी.एफ. में जमा रु. 1,50,000 के, खाते पर धारा 80ग के तहत कटौती का दावा करना चाहता है। क्या वह यह कर सकता है?

धारा 111क हेतु संदर्भित धारा 80ग से 80प के तहत कोई कटौती की अनुमति अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर नहीं है। इस मामले में, रु. 2,20,000 की एस.टी.सी.जी. शेयरों की बिक्री के खाते पर उत्पन्न धारा 111क के तहत अन्तर्निहित एस.टी.सी.जी. है और, अत:, श्री कपूर इस प्रकार के लाभ से धारा 80ग.सी. 80प. के तहत किसी कटौती का दावा नहीं कर सकता है।

उपरोक्त प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, श्री कपूर रु. 2,20,000 की एस.टी.सी.जी. से धारा 80ग के तहत रु. 1,50,000 की कटौती का दावा नहीं कर सकता है। श्री कपूर की कर योग्य आय की गणना निम्न प्रकार होगी:

वितरण रुपये
अल्पकालिक पूंजीगत लाभ 2,20,000
कुल सकल आय 2,20,000
कम: धारा 80ग से 80प के तहत कटौती शून्य
कुल आय या कर योग्य आय 2,20,000

 

अल्प अवधि पूंजीगत लाभ पर एमसीक्यू

प्रश्न 1. "पूंजीगत परिसंपत्ति" व्यापार अथवा पेशे के उद्देश्य हेतु धारित स्टॉक-इन-ट्रेड को शामिल करता है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

पूंजीगत परिसंपत्ति में शामिल है :

(क) निर्धारिती द्वारा किसी भी प्रकार की संपत्ति, चाहे निर्धारिती के व्यापार अथवा पेशे से संबंधित हो अथवा नही

(ख) एफआईआई द्वारा धारित किसी प्रकार की प्रतिभूति जिसे सेबी अधिनियम, 1992 के अंतर्गत आने वाले विनियमों के अनुसार ऐसी प्रतिभूति में निवेश किया गया हो

बहरहाल, निम्नलिखित मदें "पूंजीगत परिसंपत्ति" के विषय से बाहर हैं

(i) अपने स्टॉक-इन-ट्रेड अथवा पेशे के उद्देश्य के लिए धारित व्यापार, प्रयोज्य भंडारण अथवा कच्ची सामग्री

(ii) व्यक्तिगत प्रभाव (फर्नीचर और परिधान पहनने सहित) जैसा कि करदाता या उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा निजी प्रयोग के लिए धारण की जाने वाली चल संपत्ति निम्न को छोड़कर

क) आभूषण

ख) पुरातात्विक संग्रह

ग) चित्रकला

घ) चित्र

ड) मूर्तियां या

घ) अन्य कोई कलाकृति

(iii) भारत के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि

(iv) 6 प्रतिशत सोना बांड, 1977 या 7 फीसदी सोना बांड, 1980 या राष्ट्रीय रक्षा सोना, बांड 1980 जो केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया हो

(v) विशेष ग्राहक बांड, 1991

(vi) सोना जमा योजना 1999 के तहत अथवा स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, 2015 के अंतर्गत जारी जमा प्रमाणपत्र जारी किए गए सोना जमा बांड

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 2. "पूंजीगत परिसंपत्ति" जैसे इक्विटी शेयर जो भारत में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में निर्दिष्ट है को अल्प अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझा जाएगा यदि वह करदाता द्वारा इसके स्थानांतरण की तुरंत पूर्वगामी तिथि से कम से कम...................महीने की अवधि के लिए करदाता धारित किए गए हो

(क) 12 (ख) 24

(ग) 36 (घ) 48

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

इसके स्थानांतरण की तुरंत पूर्वगामी तिथि से कम से कम 36 महीने की अवधि के लिए करदाता धारित की गई किसी प्रकार की पूंजीगत परिसंपत्ति अल्प अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझी जाएगी। हालांकि कुछ परिसपंत्तियों जैसे शेयर (इक्विटी अथवा वरीयता) जो भारत (शेयरों की सूचीबद्धता अनिवार्य नहीं है यदि ऐसे शेयरों का स्थानांतरण 10 जुलाई 2014 को अथवा इससे पूर्व किया गया हो) मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, इक्विटी उन्मुखी म्यूचुअल फंड इकाई, सूवीबद्ध प्रतिभूति जैसे ऋणपत्र तथा सरकारी प्रतिभूति, यूटीआई की ईकाई, जीरो कूपन बांड के मामले में, धारण की अवधि को 36 महीने के स्थान पर 12 महीने के तौर पर समझा जाएगा।

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 3. ..................... के स्थानांतरण पर उत्पन्न एसटीसीजी की स्थिति में धारा 111 क लागू हैं जो 1.10.2004 को अथवा बाद में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में हैं तथा ऐसा लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) हेतु उत्तरदायी हैं।

(क) वरीयता शेयर (ख) ऋण उन्मुखी म्यूचुअल फंड इकाई

(ग) बिजनेस ट्रस्ट की इकाई (घ) जीरो कूपन बांड

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

इक्विटी शेयर अथवा इक्विटी उन्मुखी म्यूचुअल फंड इकाई अथवा बिजनेस ट्रस्ट की ईकाई के स्थानांतरण पर उत्पन्न एसटीसीजी की स्थिति में धारा 111 क लागू है जो 1.10.2004 को अथवा बाद में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में हैं तथा ऐसा लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) हेतु उत्तरदायी है।

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से, 15 प्रतिशत की दर पर रियायती कर की दर का लाभ उपलब्ध होगा जहां एसटीटी का भुगतान न किया गया हो, बशर्ते कि लेनदेन

- लेनदेन किसी अंतर्राष्ट्रीय सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर किया गया हो तथा

- प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया अथवा देययोग्य हो

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 4. धारा 111 क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ @ 15 प्रतिशत की दर से वसूलनीय हैं (साथ ही उपकर तथा अधिभार जहां लागू हो)

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 111 क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ @ 15 प्रतिशत की दर से वसूलनीय हैं (साथ ही उपकर तथा अधिभार जहां लागू हो)

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 5. मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज से बाहर के इक्विटी शेयर की बिक्री पर उत्पन्न अल्प अवधि पूंजीगत लाभ धारा 111क के अंतर्गत आता है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

इक्विटी शेयर अथवा इक्विटी उन्मुखी म्यूचुअल फंड इकाई अथवा बिजनेस ट्रस्ट की इकाई के स्थानांतरण पर उत्पन्न एसटीसीजी की स्थिति में धारा 111 क लागू है जो 1.10.2004 को अथवा इससे पूर्व मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में है तथा ऐसा लेनदेन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) हेतु उत्तरदायी है। अन्य शब्दों में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज से बाहर के इक्विटी शेयर की बिक्री पर उत्पन्न अल्प अवधि पूंजीगत लाभ धारा 111क के अंतर्गत आता है उन्हें धारा 111 के अंतर्गत आने वाले एसटीसीजी को छोड़कर एसटीसीजी के तौर पर समझा जाएगा

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से, 15 प्रतिशत की रियायती कर की दर पर लाभ उपलब्ध होगा जहां एसटीटी का भुगतान न किया गया हो, बशर्ते कि लेनदेन

- किसी अंतर्राष्ट्रीय सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर किया गया हो तथा

- प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया अथवा देययोग्य हो

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 6. धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ को छोड़कर..................... की दर से कर देय है

(क) 10 प्रतिशत (ख) 15 प्रतिशत

(ग) 20 प्रतिशत

(घ) कर की सामान्य दर जिसे करदाता की कलु करयोग्य आय के आधार पर निर्धारित किया जाता है

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

सामान्य अल्प अवधि पूंजीगत लाभ अर्थात् धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ को छोड़कर कर की सामान्य दर पर वसूला जाएगा जिसे करदाता की कुल देययोग्य आय के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है

प्रश्न 7. एक निवासी साथ ही साथ गैर-निवासी व्यक्ति तथा एचयूएफ धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित कर सकते हैं

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

एक निवासी साथ ही साथ गैर-निवासी व्यक्ति तथा एचयूएफ धारा 111क के अंतर्गत आने वाले को छोड़कर अल्प अवधि पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित कर सकते हैं

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 8. एक निवासी साथ ही साथ गैर-निवासी व्यक्ति तथा एचयूएफ धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित कर सकते हैं

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

केवल एक निवासी साथ ही साथ गैर-निवासी व्यक्ति तथा एचयूएफ धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित कर सकते हैं। इसलिए गैर-निवासी व्यक्ति/एचयूएफ धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प अवधि पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित नही कर सकते हैं

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 9. धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कटौती धारा 111क हेतु संदर्भित अल्प-अवधि पूंजीगत लाभ स्वीकृत हैं

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कोई कटौती धारा 111क हेतु संदर्भित अल्प-अवधि पूंजीगत लाभ द्वारा स्वीकृत नही है

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 10. धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कटौती धारा 111क के अंतर्गत आने वाले अल्प-अवधि पूंजीगत लाभ को छोड़कर अल्प-अवधि पूंजीगत लाभ द्वारा स्वीकृत है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कोई कटौती धारा 111क हेतु संदर्भित अल्प-अवधि पूंजीगत लाभ द्वारा स्वीकृत नही है। हालांकि ऐसी कटौती धारा 111क के अंतर्गत आने वाली को छोडकर अल्प-अवधि पूंजीगत लाभ द्वारा दावा कर सकता है।

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है