को पूंजी परिसम्पत्ति इसके हस्तांतरण की तिथि से तुरंत ठीक पहले करदाता द्वारा 36 माह से अधिक की एक अवधि के लिये धारण की गयी, दीर्घकालिक पूंजी परिसम्पत्ति के रूप में मानी जायेगी। दीर्घकालिक पूंजीसम्पत्ति के हस्तांतरण से उत्पन्न लाभ दीर्घकालिक पूंजीलाभ कहलाता है। इस भाग में आप दीर्घकालिक पूंजीगत लाभों पर कर से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

दीर्घावधि पूंजी अभिलाभ पर कर

प्रस्तावना

पूंजीगत परिसंगत्ति के अंतरण पर उत्पन्न लाभ ''पूंजीगत लाभ'' शीर्षक के अंतर्गत कर हेतु देय है। पूंजीगत अभिलाभ से आय को "अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ" और "दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ" के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इस भाग में आप दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ पर कर से संबंधित प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

पूंजीगत अभिलाभ का अर्थ

पूंजीगत परिसम्पत्ति के अंतरण से उत्पन्न होने वाले किसी भी लाभ या अभिलाभ पर "पूंजीगत अभिलाभ" मद के तहत कर प्रभारित किया जायेगा।

पूंजीगत परिसंगत्ति का अर्थ

पूंजीगत परिसंगत्ति निम्न शामिल करने के लिए परिभाषित की गई हैं

(क) निर्धारिती द्वारा धारित किसी भी प्रकार की संगत्ति, चाहे निर्धारिती के व्यापार अथवा पेशे से संबाधित हो या नही

(ख) एफआईआई द्वारा धारित कोई प्रतिभूति जिसे सेबी अधिनियम, 1992 के अंतर्गत विनियमन के अनुसार ऐसी प्रतिभूति में निवेश किया गया हो

बहरहाल इसमें निम्न मंदे ''पूंजीगत परिसंगत्ति'' की परिभाषा में शामिल नहीं हैं—

(i) अपने व्यवसाय या पेशे के प्रयोजनों के लिए धारित कोई भी विक्रेय माल, (उक्त ख में प्रतिभूतियों को छोड़कर) उपभोज्य भंडार या कच्चा माल;

(ii) व्यक्तिगत प्रभाव, अर्थात करदाता या उस पर निर्भर उसके परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा निजी इस्तेमाल के लिए धारित (परिधान पहनावा और फर्नीचर सहित) चल संपत्ति, परंतु निम्नलिखित के अलावा—

(क) आभूषण;

(ख) पुरातात्विक संग्रह;

(ग) आरेख;

(घ) चित्र;

(ड़) मूर्ति; या

(च) कोई भी कलाकृति।

''आभूषण" में शामिल हैं-

(क) सोने, चांदी, प्लेटिनम या किसी भी अन्य कीमती धातु या ऐसी कीमती धातुओं में से एक या अधिक युक्त मिश्र धातु से बने गहने, चाहे उसमें कोई कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर हों अथवा नहीं और किसी भी पहनने वाले परिधान में काम किये हुये अथवा सिले हुए हो अथवा नहीं;

(ख) किसी भी फर्नीचर, बर्तन या अन्य वस्तु में लगाये गये या काम किये गये या किसी भी पहनने वाले परिधान में काम किये गये अथवा सिले गये कीमती या अर्द्ध कीमती पत्थर।

(iii) भारत में ग्रामीण क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि;

(क) नगर निगम के क्षेत्राधिकार, अधिसूचित क्षेत्र समीति, टाउन एरिया समीति, छावनी बोर्ड के अंतर्गत तथा जिसकी जनसंख्या 10,000 से कम न हो

(ख) किसी नगरपालिका अथवा छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमा से मापे गए हवाई मार्ग की निम्नलिखित दूरी के भीतर

(i) 2 किमी. में अधिक नहीं, यदि ऐसे क्षेत्र की जनसंख्या 10,000 से अधिक लेकिन 1 लाख से अधिक न हो

(ii) 6 किसी से अध्सिक नही, यदि ऐसे क्षेत्र की जनसंख्या 1 लाख से अधिक लेकिन 10 लाख से अधिक न हो

(iii) 8 किसी से अधिक नही, यदी एसे क्षेत्र की जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो

जनसंख्या पिछली उत्तरगामी जनगणना के आंकड़ों के अनुसार विचारनीय है जिसके प्रासंगिक आंकड़े वर्ष के पहले दिन से पहले प्रकाशित किए गए हों

जनसंख्या पर विचार पिछली पूर्ववर्ती जनगणना के अनुसार किया जाएगा जो प्रासंगिक आंकड़ा वर्ष के पहले दिन से पहले प्रकाशित हुआ हो

(iv) केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए 61/2 फीसदी गोल्ड बांड, 1977 या 7 फीसदी गोल्ड बांड, 1980 या राष्ट्रीय रक्षा गोल्ड बांड, 1980;

(v) विशेष धारक बांड, 1991;

(vi) स्वर्ण जमा योजना, 1999 के तहत जारी स्वर्ण जमा बॉन्ड या स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, 2015 के अंतर्गत जारी जमा प्रमाणपत्र।

निम्नलिखित बिंदु ध्यान में रखने चाहिए

• पूंजीगत परिसंगति के रूप में संपत्ति करदाता के व्यापार अथवा पेशे से संबंधित हो सकता हैं अथवा नहीं उदाहरण यात्री वाहन के व्यापार में संलग्न व्यक्ति की यात्री परिवहन व्यापार से प्राप्त आय उसकी आय होगी

• विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा धारित किसी प्रकार की प्रतिभूति जिसे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम के अंतर्गत विनियमन के अनुसार ऐसी प्रतिभूतियों में निवेश किया हो, को सदैव पूंजीगत परिसंगति के तौर पर समझा जाएगा इसलिए ऐसी परिसंगतियों को स्टॉक-इन ट्रेड के तौर पर नही समझा जाएगा।

उदाहरण

मि. कुमार ने जनवरी, 2020 में 84,00,000 रुपये में एक आवासीय घर खरीदा। उन्होंने, वह घर अप्रैल, 2023 में 90,00,000 रुपये में बेच दिया। इस मामले में, आवासीय घर मि. कुमार की एक पूंजी परिसंपत्ति है और, इसलिए, आवासीय घर की बिक्री से उत्पन्न होने वाले 6,00,000 रुपये के लाभ पर "पूंजीगत अभिलाभ" मद के तहत कर प्रभारित किया जायेगा।

उदाहरण

मि. कपूर एक प्रॉपर्टी डीलर हैं। उन्होंने पुनर्विक्रय के लिए एक फ्लैट खरीदा है। फ्लैट, जनवरी, 2020 में 84,00,000 रुपये में खरीदा गया था तथा अप्रैल, 2023 में 90,00,000 रुपये में बेच दिया गया। इस मामले में, मि. कपूर एक प्रॉपर्टी डीलर है और, इसलिए, सम्पत्ति में व्यवसाय करना उनका पेशा है। दूसरे शब्दों में, मि. कपूर के लिये फ्लैट, एक पूंजी परिसंपत्ति नहीं है और, इसलिए, फ्लैट की बिक्री से उत्पन्न होने वाले 6,00,000 रुपये के लाभ पर कारोबारी आय के रूप में कर प्रभारित किया जायेगा न कि पूंजीगत अभिलाभ के रूप में।

दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति और अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति का अर्थ

कराधान के प्रयोजन हेतु, नीचे दिये गये के अनुसार पूंजीगत परिसंपत्तियों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति   दीर्धावधि पूंजी परिसंपत्ति

इसके हस्तांतरण की तिथि से ठीक पहले करदाता द्वारा 36 माह से अनधिक की अवधि के लिए धारित किसी भी पूंजी परिसंपत्ति को अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति माना जाएगा।

हालांकि शेयर, (इक्विटी अथवा वरीयता) जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचैंज में सूचीबद्ध है (शेयरों की सूचीकरण अनिवार्य नही है यदि ऐसे शेयरों का स्थांनातरण 10 जुलाई 2014 को अथवा इससे पूर्व किया गया हो), इक्विटी यूनिट उन्मुख म्यूचुअल फंड जैसे कुछ परिसंपत्ति, ऋणपत्र तथा सरकारी प्रतिभूति जैसी सूचीबद्ध प्रतिभूति, यूटीआई की ईकाईयों तथा जीरो कूपन बांड जैवी कुछ परिसंपत्तियों के संबंध में अधिकार की अवधि को 36 महीने के स्थान पर 12 महीने के तौर पर समझा जाएगा।

टिप्पणी :

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से, अधिग्रहण की अवधि कंपनी के असूचीबद्ध शेयरों की स्थिति में 36 महीनों के स्थान पर 24 महीनों के तौर पर समझी जानी है।

 

इसके हस्तांतरण की तिथि से ठीक पहले करदाता द्वारा 36 माह से अधिक की अवधि के लिए धारित किसी भी पूंजी परिसंपत्ति को दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति माना जाएगा।

हालांकि शेयर, (इक्विटी अथवा वरीयता) जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचैंज में सूचीबद्ध है (शेयरों की सूचीकरण अनिवार्य नही है यदि ऐसे शेयरों का स्थांनतरण 10 जुलाई 2014 को अथवा इससे पूर्व किया गया हो), इक्विटी यूनिट उन्मुख म्यूचुअल फंड जैसे कुछ परिसंपत्ति, ऋणपत्र तथा सरकारी प्रतिभूति जैसी सूचीबद्ध प्रतिभूति, यूटीआई की ईकाईयों तथा जीरो कूपन बांड जैवी कुछ परिसंपत्तियों के संबंध में अधिकार की अवधि को 36 महीने के स्थान पर 12 महीने के तौर पर समझा जाएगा।

टिप्पणी :

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से, अधिग्रहण की अवधि कंपनी के असूचीबद्ध शेयरों की स्थिति में 36 महीनों के स्थान पर 24 महीनों के तौर पर समझी जानी है।

2) प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 से, भूमि या भवन दोनों होने के तौर पर अचल संपत्ति की स्थिति में धारण अवधि को 36 महीनें के स्थान पर 24 महीने समझा जाएगा   2) प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 से, भूमि या भवन दोनों होने के तौर पर अचल संपत्ति की स्थिति में धारण अवधि को 36 महीनें के स्थान पर 24 महीने समझा जाएगा

उदाहरण

मि. कुमार एक वेतनभोगी कर्मचारी है। उन्होंने अप्रैल, 2015 के महीने में एक जमीन खरीदी और दिसंबर, 2023 में उसे बेच दिया। इस मामले में, जमीन, मि. कुमार के लिए एक पूंजी परिसंपत्ति है। उन्होंने अप्रैल, 2014 में जमीन खरीदी और दिसंबर 2023 में अर्थात 24 महीने से अधिक की अवधि के लिए धारित करने के बाद उसे बेच दिया। इसलिए, जमीन को दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति के रूप में माना जाएगा।

उदाहरण

मि. राज एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। उन्होंने अप्रैल, 2022 के महीने में एक जमीन खरीदी और दिसंबर, 2023 में उसे बेच दिया। इस मामले में जमीन मि. राज की एक पूंजी परिसंपत्ति है। उन्होंने अप्रैल, 2022 में जमीन खरीदी और दिसंबर 2023 में, अर्थात, 36 महीने से कम अवधि के लिए धारित करने के बाद उसे बेच दिया।इसलिए, जमीन को अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति के रूप में माना जाएगा।

श्री विपुल एक वेतनभोगी कर्मचारी है। जुलाई, 2018 महीनें में, उसने भूमि का टुकड़ा खरीदा और उसे जनवरी 2024 मे बेच दिया। इस मामले में श्री विपुल के लिए भूमि एक पूंजी परिसंपत्ति है और उसे निर्धारण वर्ष 2024-25 में बेचा गया। उसने जुलाई, 2018 में भूमि खरीदी और जनवरी 2023 में बेच दिया (जैसा वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित है) यानी अधिक से अधिक 24 महीनों की अवधि के लिए रखने के बाद। इसलिए भूमि को दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति के तौर पर समझा जाएगा।

उदाहरण

मि. राज एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। अप्रैल, 2022 के महीने में उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया लिमिटेड के शेयर (बीएससी में सूचीबद्ध) खरीदे और दिसंबर 2023 में उसे बेच दिया। इस मामले में शेयर मि. राज की पूंजी संपत्ति हैं। उन्होंने अप्रैल, 2022 में शेयर खरीदे और दिसंबर, 2023 में अर्थात 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए धारित करने के बाद, उन्हें बेच दिया।इसलिए, शेयर को दीर्घावधि पूंजीगत परिसंपत्ति के रूप में माना जाएगा।

उदाहरण

श्री कुमार वेतनभोगी कर्मचारी है। अप्रैल, 2023 के महीने में उसने एबीसी लि. (बीएसई में सूचीबद्ध) के इक्विटी शेयर खरीदे और उसे जनवरी 2024 में बेच दिया। इस मामले में, श्री कुमार के लिए शेयर पूंजीगत परिसंपत्ति है। उसने अप्रैल 2022 में उनको खरीदा और जनवरी, 2024 में बेच दिया अर्थात् 12 महीनों की अवधि से कम के लिए रखने के बाद। इसलिए, शेयर अल्प अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझे जाऐंगे।

उदाहरण

श्री कुमार वेतनभोगी कर्मचारी है। अप्रैल, 2022 के महीने में उसने एक्सवाईजेड लि. के असूचीबद्ध शेयर खरीदे और उसे जनवरी 2024 में बेच दिया। इस मामले में, श्री कुमार के लिए शेयर पूंजीगत परिसंपत्ति है और पूंजीगत प्राप्ति के रूप को निर्धारित करने के लिए, संघटन की अवधि को 24 महीनों के तौर पर समझा जाएगा चूंकि शेयर असूचीबद्ध है। उसने अप्रैल 2022 में उनको खरीदा और जनवरी, 2024 में बेच दिया अर्थात् 24 महीनों की अवधि से कम के लिए रखने के बाद। इसलिए, शेयर अल्प अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझे जाऐंगे।

उदाहरण

श्री राज वेतनभोगी कर्मचारी है। अप्रैल, 2014 के महीने में उसने एक्सवाईजेड लि. के असूचीबद्ध शेयर खरीदे और उसे दिसंबर 2023 में बेच दिया। इस मामले में, श्री राज के लिए शेयर पूंजीगत परिसंपत्ति है और पूंजीगत प्राप्ति के रूप को निर्धारित करने के लिए, संघटन की अवधि को 24 महीनों के तौर पर समझा जाएगा चूंकि शेयर असूचीबद्ध है। उसने अप्रैल 2014 में उनको खरीदा और दिसंबर, 2023 में बेच दिया अर्थात् 24 महीनों की अवधि से कम के लिए रखने के बाद। इसलिए, शेयर दीर्घ अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझे जाऐंगे।

उदाहरण

श्री विकास वेतनभोगी कर्मचारी है। सितम्बर, 2018 के महीने में उसने एबीसी लि. के असूचीबद्ध शेयर खरीदे और उसे मई 2019 2023 में बेच दिया। इस मामले में, शेयर निर्धारण वर्ष 2024-25 में बेचे गए। इसलिए, असूचीबद्ध शेयरों को रखने की अवधि 36 महीनो के स्थान पर 24 महीने समझी जानी है।

श्री विकास ने सितम्बर 2018 में शेयर खरीदे और उनको मई 2023 में बेच दिया अर्थात् 24 महीनों की अवधि या उससे अधिक के लिए रखने के बाद। इसलिए, शेयर दीर्घ अवधि पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझे जाऐंगे।

दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ और अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ का अर्थ

अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण पर उत्पन्न होने वाले अभिलाभ को अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ और दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण पर उत्पन्न होने वाले अभिलाभ को दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ कहा जाता है। हालांकि, इस नियम के कुछ अपवाद हैं जैसे कि मूल्य्रासित परिसंपत्तियों पर होने वाले अभिलाभ पर हमेशा अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ के रूप में कर प्रभारित किया जाता है।

उदाहरण

अप्रैल 2023 में, मि. राजा ने अपनी आवासीय गृह की संपत्ति को बेच दिया जो मई, 2003 में खरीदी गयी थी। इस तरह बिक्री पर पूंजीगत अभिलाभ 8,40,000 रुपये था। इस मामले में गृह संपत्ति एक दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति है और, इसलिए, 8,40,000 रुपये के अभिलाभ पर दीर्घावधि के पूंजीगत अभिलाभ के रूप में कर प्रभारित किया जायेगा।

उदाहरण

अप्रैल 2023 में मि. राहुल अपनी आवासीय गृह संपत्ति को बेच दिया जो मई, 2021 में खरीदी गयी थी। इस तरह बिक्री पर पूंजीगत अभिलाभ 8,40,000 रुपये था। इस मामले में गृह संपत्ति एक अल्पावधि पूंजी परिसंपत्ति है और, इसलिए, 8,40,000 रुपये के अभिलाभ पर अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ के रूप में कर प्रभारित किया जायेगा।

पूंजीगत अभिलाभ को दीर्घावधि और अल्पावधि अभिलाभ में वर्गीकृत किये जाने का कारण: -

पूंजीगत अभिलाभ की कर देयता लाभ की प्रकृति पर निर्भर करती है, अर्थात, अल्पावधि या दीर्घावधि। इसलिए, कर देयता निर्धारित करने के लिए पूंजीगत अभिलाभ को अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ और दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ में वर्गीकृत किया जाता है। दूसरे शब्दों में, दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ और अल्पावधि पूंजीगत अभिलाभ के लिए कर की दरें अलग-अलग होंगी।

दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की गणना

दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण के कारण उत्पन्न होने वाले दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की गणना निम्न प्रकार की जाएगी:

विवरण रु.
प्रतिफल का पूर्ण मूल्य (अर्थात, परिसंपत्ति का बिक्री प्रतिफल) XXXXX
घटा: पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण के संबंध में पूर्ण और विशेष रूप से किया गया व्यय (जैसे, दलाली, कमीशन, विज्ञापन खर्च, आदि) (XXXXX)
निवल बिक्री प्रतिफल XXXXX
घटा: अधिग्रहण की सूचीबद्ध लागत (*) (XXXXX)
घटा: सुधार की सूचीबद्ध लागत यदि कोई हो (*) (XXXXX)
दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ XXXXX

(*) सूचीकरण एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा अधिग्रहण की लागत को परिसंपत्ति के मूल्य में मुद्रास्फीति वृद्धि के विरूद्ध समायोजित किया जाता है। इस प्रयोजन हेतु केन्द्र सरकार ने लागत मुद्रास्फीति सूचकांक अधिसूचित किया है। सूचीकरण का लाभ केवल दीर्घावधि पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिए उपलब्ध है। अधिग्रहण की सूचीबद्ध लागत की गणना के लिए निम्न कारकों पर विचार किया जाता है:

• अधिग्रहण/सुधार का वर्ष

• स्थानांतरण का वर्ष

• अधिग्रहण/सुधार के वर्ष का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक

• हस्तांतरण के वर्ष का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक

अधिग्रहण की अनुक्रमित लागत की गणना निम्नलिखित सूत्र की मदद से की जाएगी

अधिग्रहण की लागत × पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के वर्ष का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक
अधिग्रहण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूचकांक

= अल्प अवधि में नहीं

अनुक्रमित सुधार की लागत की गणना निम्नलिखित सूत्र की मदद से की जाएगी

सुधार लागत × पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची = अल्प अवधि में नहीं
सुधार के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

केंद्र सरकार ने निम्नलिखित लागत को मुद्रास्फीति सूची अधिसूचित किया है।

क्रम.सं. वित्तीय वर्ष लागत मुद्रास्फीति सूचकांक
(1) (2) (3)
1 2001-02 100
2 2002-03 105
3 2003-04 109
4 2004-05 113
5 2005-06 117
6 2006-07 122
7 2007-08 129
8 2008-09 137
9 2009-10 148
10 2010-11 167
11 2011-12 184
12 2012-13 200
13 2013-14 220
14 2014-15 240
15 2015-16 254
16 2016-17 264
17 2017-18 272
18 2018-19 280
19 2019-20 289
20 2020-21 301
21 2021-22 317
22 2022-23 331
23 2023-24 (अनंतिम) 348

उदाहरण

मि. राजा ने मई, 2006 में 84,000 रुपये में एक जमीन खरीदी और अप्रैल, 2022 में उसे 10,10,000 रुपये में बेच दिया (10,000 रुपये दलाली)। मि. राजा के हाथों में कर योग्य पूंजीगत अभिलाभ क्या होगा?

पूंजी प्राप्ति की गणना निम्नानुसार होगी :

विवरण रु.
प्रतिफल का पूर्ण मूल्य (अर्थात, परिसंपत्ति का बिक्री प्रतिफल) 10,10,000
घटा: पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण के संबंध में पूर्ण और विशेष रूप से किया गया व्यय (दलाली) 10,000
निवल बिक्री प्रतिफल 10,00,000
घटा: अधिग्रहण की सूचीबद्ध लागत (*)

2,27,902

घटा: सुधार की सूचीबद्ध लागत, यदि कोई हो शून्य
दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 7,72,098

(*) वर्ष 2006-07 के लिए अधिसूचित लागत मुद्रास्फीति सूची 122 है तथा वर्ष 2022-23 के लिए 280 है। अधिग्रहण की सूचीगत लागत अर्थात् अधिग्रहण की मुद्रास्फीति लागत निम्नानुसार आंकी जाएगी

अधिग्रहण की लागत × पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के वर्ष का लागत मुद्रास्फीति सूचकांक
अधिग्रहण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूचकांक
रु. 84,000 × 331 = रु. 2,27,902
122

किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों की बिक्री के कारण उत्पन्न होने वाला दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ अर्थात, धारा 10(38) के तहत कर मुक्त दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ ।

धारा 10(38) के अनुसार, निम्न शर्तों के संतुष्ट होने पर, इक्विटी शेयर या इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड (*) की इकाइयों अथवा व्यापार व्यास ईकाई किसी भी व्यक्ति के हाथों कर प्रभार्य नहीं है:

• हस्तांतरण अर्थात् इक्विटी शेयर या इक्विटी ओरिएंटेड म्युचुअल फंड की यूनिट अथवा व्यापार ट्रस्ट की ईकाई का हस्तांतरण प्रतिभूति लेनदेन कर के लिए आदेय होना चाहिए।

• ऐसी शेयर/ईकाई एक दीर्घावधि पूंजी परिसंपत्ति होनी चाहिए।

• हस्तांतरण 1 अक्टूबर, 2004 को या उसके बाद किया गया होना चाहिए।

(*) इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से अभिप्रेत धारा 10(23घ) के तहत निर्दिष्ट एक म्यूचुअल फंड से है और उसकी कुल प्राप्तियों में से निवेश योग्य धन का 65% एक घरेलू कंपनी के इक्विटी शेयरों में निवेश किया गया हो।

दूसरे शब्दों में, यदि दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ धारा 10(38) के तहत शामिल किया जाता है, तो वह कर से मुक्त होगा।

धारा 10(38) के अंतर्गत दीर्घावधि पूंजीगत प्राप्ति से छूट प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2017 से उपलब्ध होगा भले ही एसटीटी का भुगतान न किया गया हो बशर्ते कि

- लेनदेन किसी अंतर्राष्ट्रीय सेवा केंद्र में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर किया गया हो तथा

- प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया अथवा देययोग्य हो

धारा 10(38) हेतु संदर्भितानुसार सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्तियों के लिए छूट को प्रभावी निर्धारण वर्ष 2019-20 से वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा वापस ले लिया गया है और आयकर अधिनियम में एक नई धारा 112क को प्रारंभ किया गया है।

धारा 112क के अनुसार, एक ईक्विटी शेयर के स्थानांतरण, या एक ईक्विटी ओरिएंटिड फंड की ईकाई या एक व्यापारिक न्यास की ईकाई से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति ऐसी पूंजी प्राप्तियों के 10 प्रतिशत (कराधान के बिना) पर कररोपित होगी। पूंजी प्राप्तियों पर कर रू. 1 लाख के अतिरिक्त पर लगाया जाएगा।

दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति पर कर

सामान्य रूप से, दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां 20 प्रतिशत (लागू होने वाले अधिभार और अधिकर सहित) की दर पर कर हेतु वसूली जाती है, लेकिन कुछ विशेष मामलों में, प्राप्ति 10 प्रतिशत (करदाता के विकल्प पर) की दर पर वसले जाते है (लागू होने वाले अधिभार और अधिकर सहित)। दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति को वसूले जाने का लाभ 10 प्रतिशत पर केवल निम्नलिखित मामलों में ही उपलब्ध है :

1) सूचीबद्ध प्रतिभूतियों की बिक्री से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां और यह रू. 1,00,000 से अधिक हो (धारा 112क)

2) किसी भी निम्नलिखित परिसंपत्ति के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां

क) किसी प्रतिभूति (*) जो भारत में एक प्राधिकृत शेयर बाजार में सूचीबद्ध है

ख) यूटीआई की कोई एक ईकाई या म्युचुयल फंड (चाहे सूचित हो या नहीं) ($) और

ग) जीरो कूपन बांड

(*) इस उद्देश्य के लिए प्रतिभूति का अर्थ "प्रतिभूति" है जैसा प्रतिभूति अनुबंध (नियामक) अधिनियम, 1956 की धारा 2(ज) में परिभाषित है। इस परिभाषा में सामान्य रूप से शेयर, स्क्रिप, स्टॉक, बांड, डिबेंचर, डिबेंचर स्टॉक या अन्य बिक्री योग्य प्रतिभूतियां जैसे किसी निगमति कंपनी या अन्य निकाय कार्पोरेट, सरकारी प्रतिभूतियां, ऐसे अन्य साधानों के रूप में जिसे प्रतिभूति होने के लिए केद्र सरकार द्वारा घोषित किया जा सके और प्रतिभूतियों में अधिकार या ब्याज

($) यह विकल्प 10-07-2014 को या उससे पहले बेची गई यूनिट के संदर्भ में ही उपलब्ध है

सूचीबद्ध प्रतिभूतियों की बिक्री से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां

नई धारा 112क के अनुसार एक कंपनी या एक ईक्विटी ओरिएंटिड फंड की ईकाई या व्यापारिक न्यास की ईकाई में एक ईक्विटी शेयर के तौर पर दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण से पूंजी प्राप्तियोंं को रू. 1,00,000 से अधिक की ऐसी पूंजी प्राप्तियों के 10 प्रतिशत की दर पर करारोपित किया जाएगा।

यह 10 प्रतिशत की रियायती दर तभी लागू होगी यदि :

क) एक कंपनी में ईक्विटी शेयर की स्थिति में, प्रतिभूति लेनदेन कर को ऐसी पूंजी परिसंपत्ति के दोनों अधिग्रहण और स्थानांतरण पर दिया गया है और

ख) एक ईक्विटी ओरिएंटिड फंड या एक व्यापारिक न्यास की ईकाई की स्थिति में, एसटीटी पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण पर दिया गया है।

1 फरवरी, 2018 से पहले करदाता द्वारा प्राप्त सूचीबद्ध ईक्विटी शेयर के अधिग्रहण की लागत निम्नलिखित का अधिकतम होगी :

क) ऐसी परिसंपत्ति के अधिग्रहण की वास्तविक लागत या

ख) निम्नलिखित का कम से कम

(i) 31 जनवरी 2018 के अनुसार ऐसे शेयरों की उचित बाजार कीमत या

(ii) इसके स्थानांतरण पर उपार्जित वास्तविक बिक्री प्रतिफल

सूचबीद्ध ईक्विटी शेयर की उचित बाजार कीमत का अर्थ 31 जनवरी, 2018 के अनुसार शेयर बाजार पर उद्धृत इसका उच्चतम मूल्य होगा। हालांकि, यदि 31 जनवरी, 2018 को ऐसे शेयरों का कोई कारोबार नहीं होता, तो 31 जनवरी 2018 जिस पर उस शेयर में व्यापार हुआ, के तुरंत बाद की तिथि के अनुसार ऐसे शेयर का अधिकमत मूल्य इसकी उचित बाजार कीमत के तौर पर समझा जाएगा।

यदि वह ईकाईयां जो प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचीबद्ध नहीं है तो 31 जनवरी, 2018 के अनुसार ऐसी ईकाईयों की निविल परिसंपत्ति राशि को इसकी एफएमवी होने के तौर पर समझा जाएगा।

यदि जहां पूंजी परिसंपत्ति एक कंपनी जो 31.01.2018 के अनुसार प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचीबद्ध नहीं है, में एक ईक्विटी शेयर है लेकिन स्थानांतरण की तिथि पर सूचीबद्ध है तो वित्त वर्ष 2017-18 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूंचकांक द्वारा असूचीबद्ध शेयरों की लागत को इसकी एफएमवी होने के तौर पर समझा जाएगा।

निर्दिष्ट परिसंपत्ति के स्थानांतरण से उत्पन्न दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां

एक करदाता जिसने किसी सूचित प्रतिभूति या यूटीआई की किसी ईकाई या म्युचुयल फंड (चाहे सूचीबद्ध हो या नहीं), धारा 112के अंतर्गत कवर नहीं, और जीरो कूपनी बांड के स्थानांतरण से दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति को अर्जित किया हो उसके पास निम्नलिखित दो विकल्प होंगे :

क. सूचीकरण के लाभ का फायदा, ऐसे आंकी गई पूंजी प्राप्ति 20 प्रतिशत की सामान्य दर पर कर हेतु वसलूनीय होगी (साथ ही अधिभार और अधिकर भी जैसा लागू हो)

ख. सूचीकरण के लाभ का फायदा न लें, ऐसा आंकी गई पूंजी प्राप्ति 10 प्रतिशत की दर पर वसूली जाती है (अधिभार और अधिकर सहित जैसा लागू हो)। विकल्प का चयन दोनों विकल्प के अंतर्गत कर देयता की गणना द्वारा पूरा किया जाना है और निम्न कर देयता का विकल्प चुना जाना है

उदाहरण

मि. जनक एक वेतनभोगी कर्मचारी है। उन्होंने जनवरी, 2015 के महीने में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज से @1,400 रुपये प्रति शेयर की दर से एक्स लिमिटेड के 100 शेयर खरीदे। इन शेयरों को अप्रैल, 2023 में बीएसई में @2600 रुपया प्रति शेयर की दर से बेच दिया गया 31 जनवरी, 2018 को शेयर बाजार पर उद्धत शेयर एक्स लिमिटेड का अधिकतम मूल्य प्रति शेयर रु. 1,800 था। इस मामले में पूंजी प्राप्ति का रूप क्या होगा?

शेयर जनवरी, 2016 में खरीदे गए थे और अप्रैल, 2023 में बेचे गए थे, अर्थात्, उन्हें 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए धारित करने के बाद बेचा गया, शेयर प्राधिकृत शेयर बाजार के माध्यम में बेचे और लेनदेन एसटीटी हेतु उत्तरदायी है। इसलिए इस मामले में धारा 112क लागू होता है

दिए गए मामले में, शेयर को 12 महीनों से अधिक की अवधि के लिए रखने के बाद बेचा गया है, शेयरों को मान्यता प्राप्त शेयर बाजार के माध्यम से बेचा जाता है औश्र लेनदेन एसटीटी हेतु उत्तरदायी है। इसलिए, इस मामले में धारा 112क लागू होती है।

एक्स लिमिटेड शेयरों के अधिग्रहण की लागत निम्न का अधिकतम होगी

क) अधिग्रहण की लागत यानी 1,40,000 (1400 × 100)

ख) निम्न का कम से कम

क. 31.01.2018 के अनुसार उद्धृत उच्चतम राशि यानी 1,80,000 (1800 × 100)

ख. बिक्री प्रतिफल यानी 2,60,000 (2,600 × 100)

इसलिए, शेयरों के अधिग्रहण की लागत रू. 1,80,000 होगी। तद्नुसार, श्री जनक के हाथों दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति रू. 80,000 (यानी रू. 2,60,00 - 1,80,000) होगी। चूंकि दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां रू. 1,00,000 से अधिक नहीं है इसलिए श्री जनक के हाथों कुछ भी करयोग्य नहीं है।

उदाहरण

श्री सौरभ एक वेतनभोगी कर्मचारी है। जुलाई, 2017 महीने में उसने बॉम्बे शेयर बाजार से रू. 2,000 प्रति शेयर की दर पर एक्सवाईजेड के 100 शेयर खरीदे। इन शेयरों को रू. 4,900 प्रति शेयर की दर पर जून 2023 में एनएससी के माध्यम से बेच दिया गया। 31 जनवरी, 2018 को शेयर बाजार पर उद्धृत एक्सवाईजेड लि का सबसे अधिकतम मूल्य रू. 3800 प्रति शेयर था। इस मामले में पूंजी प्राप्ति का रूप क्या होगा ?

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इकाइयां जुलाई, 2017 में खरीदी गई थीं और जून, 2023 में बेची गई थीं, अर्थात्, उन्हें 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए धारित करने के बाद बेचा गया, इसलिए, अभिलाभ दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ होगा।

दिए गये मामले में, शेयर 12 महीने से अधिक की अवधि के लिए रखने के बाद बेचा गया था। इन इकाइयों को मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में बेचा गया था और लेन-देन पर एसटीटी आदेय था इसलिए, इस मामले में धारा 112क लागू होती है।

एक्स लिमिटेड शेयरों के अधिग्रहण की लागत निम्न का अधिकतम होगी

क) अधिग्रहण की लागत यानी 2,00,000 (2000 × 100)

ख) निम्न का कम से कम

(i) 31.01.2018 के अनुसार उद्धृत उच्चतम राशि यानी 3,80,000 (3800 × 100)

(ii) बिक्री प्रतिफल यानी 4,90,000 (4900 × 100)

इसलिए उक्त से, शेयरों के अधिग्रहण की लागत रू. 3,80,000 होगी। तद्नुसार, श्री सौरभ के हाथों दीर्घकालीन पूंजी प्राप्ति रू. 1,10,,000 (यानी रू. 4,90,00 - 3,80,000) होगी। चूंकि दीर्घकालीन पूंजी प्राप्तियां रू. 1,00,000 से अधिक नहीं है इसलिए श्री धारा 112क के अंतर्गत कवर होगी। श्री, सौरभ रू. 10,000 पर 10 प्रतिशत की दर पर कर देने के लिए उत्तरदायी होगा यानी रू. 1,00,000 से अधिक की प्राप्ति

उदाहरण

मि. कुमार (एक अनिवासी) ने दिसंबर 1995 में श्यामल लिमिटेड (सूचीबद्ध) के 28,100 रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे। इन शेयरों को अप्रैल 2018 में (मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज से बाहर) 5,00,000 रुपये में बेचा जाता है। भारत में उनकी कोई अन्य कर योग्य आय नहीं है। उनकी कर देयता क्या होगी?

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इस स्थिति में, मि. कुमार के पास दो विकल्प निम्नलिखित हैं:

विवरण विकल्प 1 (सूचीकरण का लाभ) विकल्प 2 (सूचीकरण का लाभ नहीं)
प्रतिफल का पूर्ण मूल्य 5,00,000 5,00,000
कम : अधिग्रहण की सूचीबद्ध लागत (रु.28,100 × 331 /100) 93,011 ------
कम : अधिग्रहण की लागत _______ 28,100
कर योग्य अभिलाभ 4,06,989 4,71,900
4,06,989 रुपए पर 20% की दर से कर 81398 _______
4,71,900 रुपए पर 10% की दर से कर   47,190

उपरोक्त परिकलन से, यह स्पष्ट है कि मि. कुमार को विकल्प 2 चुनना चाहिये चूंकि इस स्थिति में कर देयता (जैसा लागू हो उपकर को छोड़कर) 47,190 रुपए आती है जोकि विकल्प 1 के अंतर्गत कर देयता से कम है यानि रु. 84,264.

उदाहरण

मि. कुमार (एक अनिवासी) ने दिसंबर, 2006 में एक जमीन 28,100 रुपये में खरीदी और अप्रैल, 2022 में, उसे 5,00,000 रुपये में बेच दिया। क्या वह सूचीकरण का लाभ न उठाने के विकल्प और पूंजीगत अभिलाभ पर 10% की दर से कर का भुगतान करने का दावा कर सकते हैं?

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इस मामले में, हस्तांतरित संपत्ति भूमि है और इसलिए पूर्ववर्ती उदाहरणों में चर्चित विकल्प उपलब्ध नहीं हैं और अभिलाभ की गणना सूचीकरण का लाभ उठाने के बाद की जाएगी और परिणामस्वरूप होने वाले अभिलाभ पर 20% की दर से कर (जमा अधिभार और उपकर जैसा लागू हो) प्रभारित किया जायेगा। इस मामले में गणना निम्न प्रकार की जायेगी:

विवरण (रु.)
प्रतिफल का पूर्ण मूल्य 5,00,000
कम : अधिग्रहण की सूचीबद्ध लागत (रु.28,100 × 331/117) 76,239
कम : सुधार की सूचीबद्ध लागत शून्य
दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 4,23,761
4,23,761 रुपए पर 20% की दर से कर 84752
जमा: स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर 4% 3390
कुल देय कर 88142

बुनियादी छूट सीमा के विरूद्ध दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ का समायोजन

बुनियादी छूट सीमा से अभिप्रेत आय के उस स्तर से है जहां तक किसी व्यक्ति को किसी भी कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होती है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए एक व्यक्ति के मामले में लागू बुनियादी छूट की सीमा निम्नानुसार है:

• 80 वर्ष या उससे अधिक की उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 5,00,000 रुपये है।

• 60 वर्ष या ऊपर परंतु 80 से वर्ष से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 3,00,000 रुपये है।

• 60 वर्ष से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 2,50,000 रुपये है।

• अनिवासी व्यक्ति के लिए, चाहे व्यक्ति की उम्र कुछ भी हो, छूट की सीमा 2,50,000 रुपये है।

• एचयूएफ के लिए, छूट की सीमा 2,500,000 रुपये है।

उदाहरण: बुनियादी छूट सीमा

मि. कपूर (निवासी और उम्र 25 वर्ष) 1,84,000 रुपये की प्रति वर्ष की दर से वेतन कमाने वाले एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। वेतन के अलावा आय से, उन्होंने 6000 रुपये की सावधि जमा पर ब्याज अर्जित किया है। उनकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

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60 वर्ष से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 2,50,000 रुपये है। इस मामले में मि. कपूर की कर योग्य आय 1,90,000 रुपये है (रु. 1,84,000 + रु. 6000), जो कि 2,50,000 रुपये की बुनियादी छूट सीमा से कम है। इसलिए, उनका कर दायित्व शून्य होगा।

उदाहरण: बुनियादी छूट सीमा

मि. वीरेन (निवासी और उम्र 62 वर्ष) एक व्यापारी हैं। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर योग्य आय 2,25,200 रुपये है। उनकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

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60 वर्ष या ऊपर परंतु 80 से वर्ष से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 3,00,000 रुपये है। इस मामले में, मि. वीरेन की कर योग्य आय 2,25,200 रुपये है, जो 3,00,000 रुपये की बुनियादी छूट सीमा से कम है। इसलिए, उनका कर दायित्व शून्य होगा।

उदाहरण: बुनियादी छूट सीमा

श्रीमती राजा (निवासी और उम्र 82 वर्ष) एक डॉक्टर हैं। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर योग्य आय 4,84,000 रुपये है। उनकी कोई अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

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80 वर्ष या उससे अधिक की उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 5,00,000 रुपये है। इस मामले में, श्रीमती राजा की कर योग्य आय 4,84,000 रुपये है जो 5,00,000 रुपये की बुनियादी छूट सीमा से कम है। अत: उनकी कर देयता शून्य होगी।

उदाहरण: बुनियादी छूट सीमा

मि. राज (एक अनिवासी और उम्र 82 वर्ष) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हैं। वह कनाडा में रह रहे हैं। वह मुंबई में एक घर के मालिक हैं जो किराए पर दिया जाता है। वर्ष 2017-18 के लिए किराये से कर योग्य आय 1,84,000 रुपये के बराबर है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

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अनिवासी व्यक्ति के लिए, चाहे व्यक्ति की उम्र कुछ भी हो, छूट की सीमा 2,50,000 रुपये है। इस मामले में मि. राज की कर योग्य आय 1,84,000 रुपये है जो 2,50,000 रुपये की बुनियादी छूट सीमा से कम है। इसलिए, उनकी कर देयता शून्य होगी।

बुनियादी छूट सीमा के विरूद्ध दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ का समायोजन

पूर्ववर्ती उदाहरणों में हमने देखा कि बुनियादी छूट सीमा से कम आय होने पर, कोई कर देयता नहीं होगी। अब एक प्रश्न यह उठता है कि क्या कोई व्यक्ति दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध बुनियादी छूट की सीमा को समायोजित कर सकता है? उत्तर व्यक्ति की आवासीय स्थिति (अर्थात, निवासी या अनिवासी) पर निर्भर करेगा।इस संबंध में प्रावधान निम्नानुसार हैं:

केवल एक निवासी व्यक्ति ही दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध छूट की सीमा को समायोजित कर सकता है। इस प्रकार, एक अनिवासी व्यक्ति दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध छूट की सीमा को समायोजित नहीं कर सकता है।

एक निवासी व्यक्ति दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ को समायोजित कर सकता है, लेकिन इस तरह का समायोजन केवल अन्य आय को समायोजित करने के बाद ही संभव है। दूसरे शब्दों में, पहले दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ से भिन्न आय को छूट की सीमा में समायोजित किया जाना है और फिर शेष सीमा (यदि हो तो) को दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध समायोजित किया जा सकता है।

उदाहरण

मि. कपूर (उम्र 67 वर्ष और निवासी) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हैं। उन्होंने दिसंबर, 2012 में एक जमीन खरीदी और अप्रैल, 2019 में उसे बेच दिया। इस बिक्री से प्राप्त दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की राशि 1,84,000 रुपये थी। भूमि की बिक्री से लाभ के अलावा, उनकी कोई भी अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

60 वर्ष या ऊपर परंतु 80 से वर्ष से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 3,00,000 रुपये है। इसके अलावा, एक निवासी व्यक्ति दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध बुनियादी छूट सीमा को समायोजित कर सकता है। इस मामले में, दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 1,84,000 रुपये है जिसे बुनियादी छूट की सीमा में समायोजित किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, मि. कपूर जमीन की बिक्री पर दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ को बुनियादी छूट सीमा के विरूद्ध समायोजित कर सकते हैं।

उपरोक्त चर्चा के अनुसार, वर्ष 2019-20 के लिए मि. कपूर की कर देयता शून्य होगी।

उदाहरण

मि. कपूर (उम्र 67 वर्ष और अनिवासी) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हैं। उन्होंने दिसंबर, 2012 में एक जमीन खरीदी (दिल्ली में) और अप्रैल, 2019 में उसे बेच दिया। इस बिक्री से प्राप्त दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की राशि 1,84,000 रुपये थी। भूमि की बिक्री से लाभ के अलावा, उनकी कोई भी अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

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अनिवासी व्यक्ति के लिए, चाहे व्यक्ति की उम्र कुछ भी हो, छूट की सीमा 2,50,000 रुपये है। इसके अलावा, एक अनिवासी व्यक्ति दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध बुनियादी छूट सीमा को समायोजित नहीं कर सकता है। इसलिए, इस मामले में 2,50,000 रुपये की छूट सीमा को दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ में समायोजित नहीं किया जा सकता। दूसरे शब्दों में, मि. कपूर जमीन की बिक्री पर दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ बुनियादी छूट सीमा के वरूद्ध समायोजित नहीं कर सकते। इस प्रकार, 1,84,000 रुपए के दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ पर 20% की दर से (जमा स्वास्थ्य व् शिक्षा उपकर @ 4%) कर वसूला जाएगा। इस प्रकार, कर देयता 38,272 रुपए होगी।

उदाहरण

मि. कपूर (उम्र 67 वर्ष और निवासी) 5,000 रुपये मासिक पेंशन कमाने वाले एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हैं। उन्होंने दिसंबर, 2011 में सोना खरीदा और अप्रैल, 2019 में उसे बेच दिया। कर योग्य दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की राशि 3,70,000 रुपये है। पेंशन आय और सोने की बिक्री से लाभ के अलावा उनकी कोई भी अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

60 वर्ष या ऊपर परंतु 80 से वर्ष से कम उम्र के निवासी व्यक्ति के लिए, छूट की सीमा 3,00,000 रुपये है। इसके अलावा, एक निवासी व्यक्ति दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध बुनियादी छूट की सीमा को समायोजित कर सकता है। हालांकि, इस तरह का समायोजन केवल दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के अलावा अन्य आय को समायोजित करने के बाद ही संभव है। इस मामले में, उनकी पेंशन आय 60,000 रुपये (रु. 5000 × 12) और सोने पर दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 3,70,000 रुपये है। इस प्रकार, पहले हमें छूट की सीमा के विरूद्ध पेंशन आय को समायोजित करना होगा और शेष सीमा दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ में समायोजित की जायेगी।

इस मामले में बुनियादी छूट की सीमा 3,00,000 रुपये है, 60,000 रुपये की पेंशन आय को 3,00,000 रुपये की छूट सीमा से समायोजित करने के बाद उपलब्ध शेष सीमा 2,40,000 रुपए होगी। 2,40,000 रुपये के शेष को दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ में समायोजित किया जाएगा।

सोने पर कुल दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 3,70,000 रुपये है और उपलब्ध सीमा 2,40,000 रुपये है। इसलिए, 2,40,000 रुपए के समायोजन के बाद शेष दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 1,30,000 रुपये होगा। 1,30,000 रुपये के अभिलाभ पर 20% की दर से (साथ ही स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर @ 4%) कर से वसूला जाएगा। इस प्रकार, उपकर से पूर्व कर देयता 26,000 रुपए होगी और धारा 87क के तहत 12,500 रुपये की छूट घटाने के बाद, वह 14,040 रुपये के कर (स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर सहित) का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगें।

उदाहरण

मि. गगन (उम्र 67 वर्ष और अनिवासी) एक भारतीय नियोक्ता से 5000 रुपये मासिक पेंशन कमाने वाले एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हैं। उन्होंने दिसंबर, 2011 में दिल्ली में एक जमीन खरीदी और अप्रैल, 2019 में उसे बेच दिया। कर योग्य दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की राशि 2,20,000 रुपये है। पेंशन आय और भूमि की बिक्री से लाभ के अलावा उनकी कोई भी अन्य आय नहीं है। वर्ष 2019-20 के लिए उनकी कर देयता क्या होगी?

अनिवासी व्यक्ति के लिए, चाहे व्यक्ति की उम्र कुछ भी हो, छूट की सीमा 2,50,000 रुपये है। इसके अलावा, एक अनिवासी व्यक्ति धारा 112 के तहत शामिल दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के विरूद्ध बुनियादी छूट सीमा को समायोजित नहीं कर सकता है। दूसरे शब्दों में, मि. गगन पेंशन आय को बुनियादी छूट सीमा के विरूद्ध समायोजित कर सकते हैं, परंतु शेष छूट सीमा में भूमि की बिक्री से प्राप्त दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ में समायोजित नहीं किया जा सकता।

इस मामले में आधारभूत छूटसीमा रु. 2,50,000 है तथा इसे रु. 60,000 की पेंशन आय के समय समायोजित किया जाएगा। रु. 1,90,000 (अर्थात् रु. 2,50,000 घटा रु. 60,000) की शेष सीमा एलटीसीजी के समक्ष समायोजित नही की जाएगी। इसलिए इस मामले में श्री गगन को रु. 2,20,000 की एलटीसीजी पर @ 20% साथ ही 4% की दर पर स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर) पर कर देना होगा। इसलिए कर देयता रु. 760 होगी

धारा 80ग से 80प तथा एलटीसीजी के अंतर्गत कटौती धारा 80ग से 80प के अंतर्गत कोई कटौती दीर्घ कालीन पूंजीगत प्राप्ति द्वारा स्वीकृत नहीं है

उदाहरण

मि. कपूर (उम्र 57 वर्ष और निवासी) एक सेवानिवृत्त व्यक्ति हैं। उन्होंने दिसंबर, 2011 में एक जमीन खरीदी और अप्रैल, 2019 में उसे बेच दिया। इस तरह बिक्री से प्राप्त कर योग्य दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ की राशि 6,00,000 रुपये है। भूमि की बिक्री से लाभ के अलावा, उनकी कोई भी अन्य आय नहीं है। उन्होंने सार्वजनिक भविष्य निधि(पीपीएफ) में 1,00,000 तथा एनएससी में रु. 50,000 रूपये जमा किया है। वह पीपीएफ में 1,50,000 रुपये की जमा के एवज में धारा 80ग के तहत कटौती का दावा करना चाहते हैं। क्या वह ऐसा कर सकते हैं?

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धारा 80ग से 80त के तहत दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ के लिये कटौती का दावा नहीं किया जा सकता है। इसलिए, मि. कपूर धारा 80ग के तहत 4,00,000 रुपये की दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ से 1,50,000 रुपये की कटौती का दावा नहीं कर सकते हैं। मि. कपूर की कर योग्य आय की गणना निम्नानुसार की जाएगी:

विवरण रु.
दीर्घावधि पूंजीगत अभिलाभ 6,00,000
सकल कुल आय 6,00,000
घटा : धारा 80ग से 80प के तहत कटौती शून्य
कुल आय या कर योग्य आय 6,00,000

वह रु. 2,50,000 (आवासीय व्यक्ति के नाते) की छूट का दावा कर सकता है तथा उसे @ 20% ( + शिक्षा उपकर + एसएचईसी) के शेष पर एलटीसी का भुगतान करना पड़ेगा। इसलिए उपकर से पूर्व उसकी कर देयता रु. 70,000 होगी वह रु. 72,800 (4% के उपकर सहित) का कर देने क लिए उत्तरदायी होगा।

 

दीर्घ अवधि पूंजीगत लाभ पर एमसीक्यू

प्रश्न 1. विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा धारित किसी प्रकार की प्रतिभूति जो भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के अंतर्गत किए गए विनिमयों के अनुसार ऐसी प्रतिभूति में निवेश सदैव पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर माना जाएगा। इसलिए ऐसी प्रतिभूति स्टॉक-इन-ट्रेड के तौर पर नहीं समझी जाएगी

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा धारित किसी प्रकार की प्रतिभूति जो भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के अंतर्गत किए गए विनिमयों के अनुसार ऐसी प्रतिभूति में निवेश सदैव पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर माना जाएगा। इसलिए ऐसी प्रतिभूति स्टाक-इन-ट्रेड के तौर पर नहीं समझी जाएगी

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प हैं

प्रश्न 2. सूचीगत इक्विटी शेयर पूंजीगत परिसंपत्ति दीर्घकालीन पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझी जाएगी यदि यह इसके स्थानांतरण की तुरंत पूर्वगामी तिथि से .........से अधिक महीनों की अवधि के लिए करदाता द्वारा धारित की जाती है

(क) 12 (ख) 24

(ग) 36 (घ) 48

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

कोई भी परिसंपत्ति दीर्घकालीन पूंजीगत परिसंपत्ति के तौर पर समझी जाएगी यदि यह इसके स्थानांतरण की तुरंत पूर्वगामी तिथि से 36 महीने से अधिक की अवधि के लिए करदाता द्वारा धारित की जाती है। बहरहाल, शेयर (ईक्विटी अथवा वरीयता) जैसे कुछ पूंजीगत परिसंपत्ति जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक-इन-ट्रेड एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, ईक्विटी उन्मुख म्यूचल फंड की ईकाई, सूचीबद्ध ऋणपत्र, जीरो कूपन बांड तथा सरकारी प्रतिभूति के संबंध में धारण अवधि 36 महीने के स्थान पर 12 महीने मानी जाएगी

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 3. अधिग्रहण की सूचीगत लागत की गणना में............आपेक्षित नही है

(क) अधिग्रहण लागत

(ख) पूंजीगत परिसंपत्ति के उन्न्यन के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

(ग) पूंजीगत परिसंपत्ति के अधिग्रहण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

(घ) पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

अधिग्रहण की सूचीगत लागत की गणना निम्नलिखित सूत्र की मदद से की जाती है

अधिग्रहण की लागत × पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांनरतण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

अधिग्रहण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 4. उन्नयन के सूचीकरण की लागत निम्नलिखित सूत्र की मदद से आंकी जाती है

उन्नयन की लागत × पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांनरतण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

उन्नयन के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

उन्नयन की सूचीगत लागत की गणना निम्नलिखित सूत्र की मदद से की जाती है

उन्नयन की लागत × पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांनरतण के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

उन्नयन के वर्ष की लागत मुद्रास्फीति सूची

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 5. धारा.....................के अनुसार, ईक्विटी शेयर के स्थानांतरण अथवा ईक्विटी ओरिएटिड म्युचूअल फंड की ईकाई अथवा व्यापार ट्रस्ट की ईकाई के स्थानानंतण पर रु. 1 लाख से अधिक उत्पन्न होने वाला दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ किसी व्यक्ति के हाथों कर हेतु 10% की दर पर वसूलनीय नहीं होगा यदि इस संबंध में निर्दिष्ट शर्ते पूरी नही की जाती।

(क) 10 (18) (ख) 112

(ख) 112क (घ) 115

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा. 112क के अनुसार, ईक्विटी शेयर के स्थानांतरण अथवा ईक्विटी ओरिएटिड म्युचूअल फंड की ईकाई अथवा व्यापार ट्रस्ट की ईकाई के स्थानानंतण पर रु. 1 लाख से अधिक उत्पन्न होने वाला दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ किसी व्यक्ति के हाथों कर हेतु 10% की दर पर वसूलनीय नहीं होगा यदि इस संबंध में निर्दिष्ट शर्ते पूरी नही की जाती।

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 6. सामान्य तौर पर दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ @........................... (जमा अधिभार तथा उपकर जहां लागू हो) की दर से कर हेतु वसूला जाता है

(क) 10 प्रतिशत (ख) 15 प्रतिशत

(ग) 20 प्रतिशत (घ) 30 प्रतिशत

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

सामान्य तौर पर दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ @ 20 प्रतिशत (जमा अधिभार तथा उपकर जहां लागू हो) की दर से कर हेतु वसूला जाता है

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है

प्रश्न 7. किसी प्रतिभूति जो भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, के स्थानांतरण पर उत्पन्न होने वाली एलटीसीजी के संबंध में करदाता को @10 प्रतिशत (अधिभार और उपकर, जैसा लागू हो, सहित) की दर से कर भुगतान करना पड़ता हैं तब भी जब उसने सूचीकरण का लाभ उठाया हो

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

किसी प्रतिभूति जो भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं, के स्थानांतरण पर उत्पन्न होने वाली एलटीसीजी के संबंध में करदाता को @10 प्रतिशत (अधिभार और उपकर, जैसा लागू हो, सहित) की दर से कर भुगतान करना पड़ता हैं केवल तब जब उसने सूचीकरण का लाभ न उठाया हो

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 8. निवासी साथ ही साथ गैर-निवासी व्यक्ति तथा एचयूएफ दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित कर सकते हैं

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

केवल निवासी साथ ही साथ गैर-निवासी व्यक्ति तथा एचयूएफ दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित कर सकते है। इसलिए गैर-निवासी व्यक्ति/एचयूएफ दीर्घ कालीन पूंजीगत लाभ के समक्ष छूट सीमा को समायोजित नही कर सकते है

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 9. धारा 80गhref="javascript:ShowMainContent('अधिनियम', 'CMSID', '102520000000139897', '');">80ग से 80 प के अंतर्गत कोई कटौती दीर्घ अवधि पूंजीगत लाभ से स्वीकृत होता है

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 80ग से 80 प के अंतर्गत कोई कटौती दीर्घ अवधि पूंजीगत लाभ से स्वीकृत होता है

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है