आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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हस्ताक्षर तिथि

2019

लागू होना

30/10/2019

संश्लेषित विषय

आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण (एमएलआर्इ) को रोकने के लिए

कर संधि संबधी उपायों को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते का

संश्लेषित विषय

और

आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए

भारतीय गणतांत्रिक सरकार

और

सिंगापुर गणतांत्रिक सरकार के बीच

समझौता

 

संश्लेषित विषय दस्तावेज पर सामान्य अस्वीकरण

यह दस्तावेज 24 जनवरी, 1994 को हस्ताक्षरित आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणतांत्रिक सरकार और सिंगापुर गणतांत्रिक सरकार के बीच समझौते को लागू करने के लिए संश्लेषित विषय को प्रस्तुत करता है जिसे क्रमश: 29 जून, 2005, 24 जुन, 2011 और 30 दिसंबर, 2016 को हस्ताक्षरित प्रोटोकॉल द्वारा संशोधित किया गया (तत्पश्चात् "समझौते" के तौर पर संदर्भित) जिसे भारत और सिंगापुर द्वारा हस्ताक्षर किए गए आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण को रोकने के उपायों से संबंधित कर संधि को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते द्वारा 7 जून 2017 ("एमएलआर्इ") को संशोधित किया गया था

दस्तावेज को 25 जून, 2019 को संशोधन पर निक्षेपागार (आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के महासचिव) को जमा किए गए भारत की एमएलआर्इ स्थिति और 21 दिसंबर, 2018 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा सिंगापुर की एमएलआर्इ स्थिति के आधार पर तैयार किया गया था। इन एमएलआर्इ में दिए गए संशोधनों के अनुसार है जैसा एमएलआर्इ में बताया गया है। एमएलआर्इ स्थितियों हेतु किए गए संशोधन इस समझौते पर एमएलआर्इ के प्रभावों को संशोधित कर सकते हैं।

इस दस्तावेज का एकमात्र उद्देश्य समझौते के लिए एमएलआर्इ को लागू करने की समझ को सुविधाजनक बनाना है और दस्तावेज कानून के स्रोत का अंश नहीं है। समझौते और एमएलआर्इ के प्रमाणिक कानूनी विषय अग्रणी होंगे ओर लागू होने वाले कानूनी विषय है।

एमएलआर्इ के प्रावधान जो समझौते के प्रावधानों के संबंध में लागू होते हैं वह समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के संदर्भ में इस दस्तावेज के संपूर्ण विषय में बॉक्स में शामिल हैं। एमएलआर्इ के प्रावधानों वाले बॉक्स को ओर्इसीडी मॉडल कर समझौते के प्रावधानों के आदेश के अनुसार सामान्य रूप से शामिल किया जा चुका है।

एमएलआर्इ के प्रावधानों के विषय में परिवर्तन एमएलआर्इ के प्रावधानों की समझ को सुविधाजनक बनाने के लिए समझौते (जैसे "अंतर्निहित कर समझौता" से समझौता और "समझौते", "संविदाकारी क्षेत्राधिकार" से "संविदाकारी राष्ट्र") में प्रयोग की गर्इ शब्दावली हेतु एमएलआर्इ में प्रयोग शब्दावली के अनुरूप बनार्इ गर्इ है। शब्दावली में परिवर्तन का मकसद दस्तावेज की पठनीयता को बढ़ाना है नाकि एमएलआर्इ के प्रावधानों के अर्थ को परिवर्तित करना। इसी प्रकार, एमएलआर्इ के प्रावधानों के अंशों में भी परिवर्तन किए गए है जो समझौते के मौजूदा प्रावधानों का वर्णन करते हैं जैसे वर्णनात्मक भाषा को पठनीयता को सुविधाजनक बनाने के मौजूदा प्रावधानों के कानूनी संदर्भ द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है। यह परिवर्तन दस्तावेज की पठनीयता को बेहतर करने के लिए है और ना कि एमएलआर्इ के प्रावधानों के अर्थ को परिवर्तित करने के लिए।

जबतक संदर्भ द्वारा अन्यथा आवश्यक न हो, समझौते के प्रावधान हेतु किए गए संदर्भ को समझौते के प्रावधानों हेतु संदर्भित करने के तौर पर समझा जाएगा जिसे एमएलआर्इ के प्रावधानों द्वारा संशोधित किया गया है।

संदर्भ

एमएलआर्इ के विषय निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है

http://www.oecd.org/tax/treaties/multilateral-convention-to-implement-tax-treaty-related-measures-to-prevent-BEPS.pdf

समझौते के विषय को निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है

https://www.incometaxindia.gov.in/Pages/international-taxation/dtaa.aspx

सिंगापुर गणराज्य के लिए : सिंगापुर कानून की ऑनलाइन वेबसाइट (https://sso.agc.gov.sg) पर

25 जून, 2019 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा किए गए भारत की एमएलआर्इ स्थिति और 21 दिसंबर, 2018 को संशोधन पर निक्षेपागार को जमा सिंगापुर की एमएलआर्इ स्थिति को MLI Depositary (OECD) webpage.पर देखा जा सकता है

एमएलआर्इ के प्रावधानों को प्रभावी करने के लिए अस्वीकरण

एमएलआर्इ के प्रभावी प्रावधान

समझौते हेतु लागू एमएलआर्इ के प्रावधान उसी तिथि को प्रभावी नहीं होंगे जिस दिन समझौते के मूल प्रावधान प्रभावी हुए। एमएलआर्इ के प्रत्येक प्रावधान विभिन्न तिथियों पर प्रभावी हो सकता है जो शामिल करों के प्रकार पर (स्रोत पर कर हटाया गया या अन्य कर लगाए गए) और भारत और सिंगापुर के एमएलआर्इ प्रावधानों में उनके द्वारा की गर्इ विकल्पों पर निर्भर करता है।

संशोधन के साधनों को जमा करने की तिथियां : भारत के लिए 25 जून 2019 और सिंगापुर के लिए 21 दिसंबर, 2018 हैं।

एमएलआर्इ के प्रारंभ होने की तिथि : भारत के लिए 01 अक्टूबर 2019 और सिंगापुर के लिए 01 अप्रैल, 2019

एमएलआर्इ के प्रावधान समझौते के संबंध में प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी होंगे

क) भारत में

  (i) अनिवासियों को दी गर्इ या जमा की गर्इ राशि पर स्रोत पर प्रारंभिक करों के संबंध में जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 अप्रैल 2020 को या उसके बाद होती हो

 (ii) 1 अप्रैल 2020 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाली करयोग्य अवधियों के संबंध में भारत द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संबंध में

सिंगापुर में :

  (i) अनिवासियों को दी गर्इ या जमा की गर्इ राशि पर स्रोत पर प्रारंभिक करों के संबंध में जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 जनवरी 2020 को या उसके बाद होती हो

  (ii) 1 अप्रैल 2020 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाली करयोग्य अवधियों के संबंध में सिंगापुर द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संबंध में

भारतीय गणतांत्रिक सरकार और सिंगापुर गणतांत्रिक सरकार दोहरे कराधान से बचने के लिए और आय पर करों के संबंध में वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए एक समझौता करने की इच्छुक है

एमएलआर्इ के अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 1 में वर्णित निम्नलिखित प्रस्तावना विषय को समझौते की प्रस्तावना में शामिल किया गया है

एम एल आई का अनुच्छेद 6 - एक अंतर्निहित कर समझौते का उद्देश्य

कर परिहार या अपवंचन (तीसरे क्षेत्राधिकार के निवासी के प्रत्यक्ष लाभ के लिए समझौते में मुहैया कराए गए राहत को प्राप्त के उद्देश्य से ट्रीटी-शॉपिंग व्यवस्था के माध्यम सहित) के माध्यम से कम किए गए कर या गैर-कराधान के लिए अवसर बनाए बिना समझौते द्वारा अंनर्निहित करों के संबंध में दोहरे कराधान को समाप्त

करने के लिए सहमह हुए हैं :

 

अनुच्छेद 1

यह समझौता उन व्यक्तियों पर लागू होगा जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के निवासी हैं

 

अनुच्छेद 2

सम्मिलित कर

1. कर जिस पर यह समझौता लागू होगा :

(क) भारत में :

आयकर जिसमें उसपर लगने वाला कोर्इ अधिभार शामिल हो

(तत्पश्चात् "भारतीय कर" के तौर पर संदर्भित)

(ख) सिंगापुर में :

आयकर (तत्पश्चात् "सिंगापुर कर" के तौर पर संदर्भित)

2. यह समझौता किसी समान या वास्तविक करों के लिए भी लागू होगा जिसको इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 में संदर्भित करों के अतिरिक्त, या के स्थान पर वर्तमान समझौते के हस्ताक्षर की तिथि के बाद किसी भी संविदाकारी राष्ट्र द्वारा अधिरोपित किया जाता है। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी अपने संबंधित कराधान कानून में किए गए किसी वास्तविक परिवर्तनों को एक-दूसरे को अधिसूचित करेंगे।

 

अनुच्छेद 3

सामान्य परिभाषा

1. इस समझौते में, जबतक संदर्भ अन्यथा आवश्यक न हो

(क) शब्द "भारत" का अर्थ भारत का क्षेत्र है जिसमें प्रादेशिक समुद्र और उसके ऊपर हवाई क्षेत्र शामिल हैं, साथ ही कोर्इ अन्य समुद्री सीमा जिसमें भारत का संप्रभु अधिकार है, और क्षेत्राधिकार है, अंतर्राष्ट्रीय कानून और भारतीय कानून के अनुसार

(ख) शब्द "सिंगापुर" का अर्थ सिंगापुर गणतंत्र है

(ग) शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र" का अर्थ भारत और सिंगापुर है जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक हो

(घ) शब्द "कंपनी" का अर्थ कोर्इ निकाय निगमित या कोर्इ उद्यम जिसको संबंधित संविदाकारी राष्ट्र के कराधान कानूनों के अंतर्गत एक कंपनी या निगमित निकाय के तौर पर समझा जाता है

(ड़) शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम" का अर्थ क्रमश: एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा संचालित एक उद्यम से है

(च) शब्द "वित्त वर्ष" का अर्थ

   (i) भारत के मामले में, "पिछला वर्ष" जैसा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 3 के अंतर्गत परिभाषित है

  (ii) सिंगापुर के मामले में, कैलेंडर वर्ष

(ज) शब्द "अंतर्राष्ट्रीय यातायात" का अर्थ एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा संचालित एक जहाज या वायुयान द्वारा कोर्इ स्थानांतरण जब जहाज या वायुयान अन्य संविदाकारी राष्ट्र में के बीच ही संचालित होता हो

(झ) शब्द "राष्ट्रीय" का अर्थ एक व्यक्ति जिसके पास एक संविदाकारी राष्ट्र की राष्ट्रीयता हो और कोर्इ कानूनी व्यक्ति, सांझेदारी या संघ ऐसी स्थिति को संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानूनों से प्राप्त करता हो

 (ञ) शब्द "व्यक्ति" जिसमें एक व्यक्ति, एक कंपनी, एक व्यक्तियों की निकाय शामिल है जिसको संबंधित कराधान राष्ट्रों में प्रभावी काराधान कानूनों के अंतर्गत करयोग्य यूनिट के तौर पर समझा जाता है

(ट) शब्द "कर" का अर्थ भारतीय कर या सिंगापुर कर, जो भी संदर्भ द्वारा आवश्यक हो, लेकिन वह राशि शामिल नहीं होगी जो करों जिस पर समझौते लागू होते हैं या उन करों के संबंध में अधिरोपित जुर्माने को प्रस्तुत करता है, के संबंध में किसी चूक या गलती के संदर्भ में देययोग्य है

2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा इस समझौते को लागू करने के संबंध में कोर्इ शब्द उसमें परिभाषित न हो तो जबतक संदर्भ अन्यथा आपेक्षित न हो, उसका अर्थ वही रहेगा जैसाकि करों के विषय में उस संविदाकारी राष्ट्र के कानून के अंतर्गत है जिस पर समझौता लागू होता है।

 

अनुच्छेद 4

निवासी

1. इस समझौते के लिए, शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी" का अर्थ कोर्इ व्यक्ति जो उस राष्ट्र के कराधान कानूनों के अनुसार एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है

2. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारणों द्वारा एक व्यक्ति दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है तो उसकी स्थिति निम्नानुसार निर्धारित होगी :

  क) उसक केवल उस राष्ट्र में ही निवासी होना समझा जाएगा जिसमें उसके लिए स्थार्इ आवास उपलब्ध है, यदि उसको दोनों राष्ट्रों में उसके लिए स्थार्इ गृह हों, उसे उसी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर समझा जाएगा जिसके साथ उसके निजी और आर्थिक संबंध घनिष्ठ हैं (महत्पूर्ण हितों का केंद्र)

  ख) यदि राष्ट्र जिसमें उसके महत्वपूर्ण हितों का केंद्र निर्धारित न किया जा सके या उसके पास किसी भी राष्ट्र में कोर्इ स्थार्इ आवास उपलब्ध न हो तो उसी राष्ट्र में निवासी के तौर पर समझा जाएगा जिसका वह आदतन निवासी है

  ग) यदि वह आदतन दोनों राष्ट्रों में रहता हो या दोनों में से किसी में न रहता हो तो उसे उसी राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जिसका वह नागरिक है

  घ) यदि वह दोनों राष्ट्रों का नागरिक है या किसी का नागरिक नहीं है तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी सहमति द्वारा विवाद का निपटारा करेंगे

3. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण द्वारा एक व्यक्ति को छोड़कर एक आदमी दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है तो उसे केवल उस राष्ट्र में ही निवासी के तौर पर समझा जाएगा जिसमें उसके प्रभावी प्रबंधन का स्थान स्थित है।

 

अनुच्छेद 5

स्थायी प्रतिष्ठान

1. इस समझौते के लिए, शब्द "स्थायी स्थापना" का अर्थ एक व्यापार जिसके माध्यम से एक उद्यम का व्यापार आंशिक या पूर्ण रूप से चलता है, का एक निश्चित स्थान है।

2. शब्द "स्थायी स्थापना" में विशेष रूप से शामिल हैं:

(क) प्रबंधन का एक स्थान

(ख) एक शाखा

(ग) एक कार्यालय

(घ) एक फैक्ट्री

(ड़) एक कार्यशाला;

(च) एक खान, एक तेल या गैस का कुंआ से, एक खदान या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए अन्य कोर्इ जगह

(छ) दूसरों के लिए भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने के एक व्यक्ति के संबंध में एक गोदाम और

(ज) एक खेत, वृक्षारोपण या अन्य जगह जहां कृषि, वानिकी, वृक्षारोपण या संबंधित गतिविधियों पर किया जाता है,

(झ) आदेशों को प्राप्त करने और मांग के लिए या बिक्री आउटलेट के तौर पर प्रयोग किया गया परिसर

 (ञ) प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण या शोषण के लिए प्रयोग एक अधिष्ठापन या ढ़ांचा लेकिन तभी यदि इसे किसी वित्त वर्ष में 120 दिनों से अधिक की अवधि के लिए प्रयोग किया गया हो

3. एक निर्माण स्थल या एक निर्माण, अधिष्ठापन या असेंबली परियोजना एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन का अभिन्न अंग है केवल तभी यदि किसी वित्त वर्ष में 183 दिनों से अधिक के लिए जारी रहता है

4. एक उद्यम को एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन होने के तौर पर और उस स्थार्इ प्रतिष्ठापन के माध्यम से व्यापार करने के तौर पर समझा जाएगा यदि यह निर्माण स्थल या एक निर्माण, अधिष्ठापन या असेंबली परियोजना के संबंध में छह महीनों से अधिक के लिए उस संविदाकारी राष्ट्र में पर्यवेक्षी गतिविधियों को करता है जिसे उस संविदाकारी राष्ट्र में किया जा रहा है।

5. पैराग्राफ 3 और 4 के प्रावधान होते हुए भी एक उद्यम को एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन होने के तौर पर और उस स्थार्इ प्रतिष्ठापन के माध्यम से व्यापार करने के तौर पर समझा जाएगा यदि यह उस संविदाकारी राष्ट्र में खनिज तेल के अन्वेषण, दोहन या निष्कर्षण के संबंध में छह महीनों से अधिक के लिए उस संविदाकारी राष्ट्र में सेवाएं या सुविधाएं मुहैया कराता है।

6. एक उद्यम को एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन होने के तौर पर समझा जाएगा यदि यह इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 4 और 5 में संदर्भित सेवाओं को छोड़कर सेवाएं प्रस्तुत करता है और कर्मचारियों या अन्य कर्मियों के माध्यम से एक संविदाकारी राष्ट्र के अंदर अनुच्छेद 12 में परिभाषित तकनीकी सेवाओं को प्रस्तुत करता है

(क) किसी वित्त वर्ष में कुल 90 दिनों से अधिक की कुल अवधि या अवधियों के लिए उस संविदाकारी राष्ट्र के अंदर गतिविधियां जारी रहती हो या

(ख) किसी वित्त वर्ष में कुल 30 दिनों से अधिक की कुल अवधि या अवधियों के लिए संबंधित उद्यम (इस समझौते के अनुच्छेद 9 के अर्थ के अंतर्गत) के लिए गतिविधियां करता हो

7. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के होते हुए भी शब्द "स्थार्इ संस्थापन" निम्न को शामिल न करने के लिए समझा जाएगा

(क) सुविधा का प्रयोग केवल उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल के भंडारण, प्रस्तुति या कभी-कभार की सुपुर्दगी के लिए ही है

(ख) उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल के भंडार का रखरखाव केवल भंडारण, प्रदर्शन या कभी-कभार की सुपुर्दगी के लिए ही है

(ग) अन्य उद्यम द्वारा प्रसंस्करण के एकमात्र उद्देश्य के लिए ही उद्यम से संबंधित उत्पाद या व्यापारिक माल का रखरखाव

(घ) उद्यम के लिए सूचना को एकत्रित करने के या उत्पाद या व्यापारिक माल की खरीद के एकमात्र उद्देश्य के लिए व्यापार के निश्चित स्थान का अनुरक्षण

(ड़) विज्ञापन के लिए, सूचना देने के लिए, वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए या इसी प्रकार की गतिविधियों के लिए जो उद्यम के लिए प्रारंभिक या सहायक प्रकार की है, के लिए ही व्यापार के निश्चित स्थान का अनुरक्षण

हालांकि, उप-पैराग्राफ (क) से (ड़) के प्रावधान वहां लागू नहीं होगे जहां उद्यम उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार का कोर्इ अन्य निश्चित स्थान रखता हो जहां उद्यम का व्यापार पूर्णता या आंशिक तौर पर किया जाता हो

8. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों के न होते हुए भी, जहां एक व्यक्ति - एक स्वतंत्र स्थिति के एजेंट को छोड़कर जिस पर पैराग्राफ 9 लागू होता है - अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम की ओर से एक संविदाकारी राष्ट्र में कार्य करता है तो उस उद्यम को प्रथम-निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन होने के तौर पर समझा जाता है यदि—

(क) उद्यम की ओर से अनुबंध को अंतिम रूप देने के लिए उस संविदाकारी राष्ट्र में अधिकार हो या आदतन कार्य करता हो जबतक उसकी गतिविधियां उद्यम के लिए उत्पाद या वस्तुओं की खरीद सीमित

(ख) ऐसा कोर्इ प्राधिकारी न हो लेकिन आदतन उत्पाद या कारोबारी माल जिससे वह उद्यम की ओर से उत्पाद या कारोबारी माल की नियमित तौर पर सुपुर्दगी करता हो, के भंडार को प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में सुरक्षित रखता हो

(ग) वह आदतन प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में आदेश को सुरक्षित रखता हो, स्वयं उद्यम के लिए या उद्यम के लिए और अन्य नियंत्रित उद्यमों के लिए पूर्ण या लगभग पूर्ण रूप से, जिसे उस उद्यम द्वारा नियंत्रित किया जाता हो या उसी उद्यम के उसी सामान्य नियंत्रण के अनुसार नियंत्रित किया जाता हो

9 एक उद्यम केवल इसलिए ही एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ संस्थापन होने के तौर पर नहीं समझा जाएगा क्योंकि ब्रोकर, साधारण कमीशन एजेंट या अन्य किसी स्वतंत्र स्वरूप के अन्य एजेंट के माध्यम से उस राष्ट्र में व्यापार करता है बशर्ते कि ऐसा व्यक्ति अपना साधारण व्यापार करता हो। हालांकि ऐसा एक एजेंट उद्यम की ओर से पूर्णता या लगभग पूर्ण रूप से की गतिविधियां करता हो तो उसे इस पैराग्राफ के अर्थ के अंतर्गत एक स्वतंत्र एजेंट के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

10. तथ्य है कि एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है जो नियंत्रण करती है या एक कंपनी द्वारा नियंत्रित होती है जो अन्य संविदाकारी राष्ट की एक घरेलू कपंनी है या जो उस अन्य राष्ट्र (या तो स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से या अन्यथा) में व्यापार करती है तो कोर्इ कंपनी अपनी ओर से वह अन्य स्थार्इ प्रतिष्ठान गठित नहीं करेगी

 

अनुच्छेद 6

अचल संपत्ति से आय

1. अन्य संविदकारी राष्ट्र में स्थित (कृषि वानिकी से आय सहित) अचल संपत्ति से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त आय अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।

2. शब्द "अचल संपत्ति" का अर्थ वही होगा जैसा संविदाकारी राष्ट्र जिसमें संपत्ति का सवाल मौजूद है, के कानून के अंतर्गत है। शब्द किसी भी मामले में अचल संपत्ति, पशुधन और कृषि और वानिकी में प्रयोग उपकरण हेतु सहायक संपत्ति, अधिकार जिसके लिए संबंधित भूमि-संपत्ति के सामान्य कानून के प्रावधान लागू होते हैं, अचल संपत्ति का उपभोग और परिवर्तनशील या निश्चित भुगतान के अधिकार जिसे खनिज निक्षेप, स्रोत और अन्य प्राकृतिक संसाधन, समुद्री जहाज, नाव और वायुयान के कार्य करने या कार्य करने के अधिकार को अचल संपत्ति के तौर पर नहीं समझा जाएगा, को शामिल करेगा।

3. पैराग्राफ 1 के प्रावधान अचल संपत्ति के प्रत्यक्ष प्रयोग, या भाड़े पर देने या किसी अन्य रूप में प्रयोग करने से प्राप्त आय के तौर पर भी लागू होंगे।

4. पैराग्राफ 1 और 3 के प्रावधान भी एक उद्यम की अचल संपत्ति से आय और स्वतंत्र निजी सेवायें देने के लिए प्रयोग की गर्इ अचल संपत्ति से आय के लिए लागू होंगे।

 

अनुच्छेद 7

व्यापार के लाभ

1. एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होंगे जबतक उद्यम उसमें स्थित स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है। यदि उद्यम उक्तकथितानुसार व्यापार करता है तो उद्यम का लाभ अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है लेकिन केवल उतना जो उस स्थार्इ प्रतिष्ठान से संबंधित हो।

2. पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के अनुसार, जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उसमें स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है तो उस स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभ प्रत्येक संविदकारी राष्ट्र में होगा जिसे प्राप्त किए जाने की संभावना है यदि यह अलग होता और अलग उद्यम उसी या उसी प्रकार की शर्तों के अंतर्गत उसी या उसी प्रकार की गतिवधियों में संलग्न होता और उस उद्यम के साथ पूर्ण रूप से स्वतंत्र होने के तौर पर व्यवहार करता जिसका वह एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन है। किसी मामले में, जहां एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु निर्दिष्ट लाभ की सही राशि निर्धारण के अयोग्य हो या उसके निर्धारण असाधारण कठिनार्इयों को प्रस्तुत करता है तो स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु निर्दिष्ट लाभ एक उपयुक्त आधार पर अनुमानित की जा सकती है।

3. एक स्थायी प्रतिष्ठान के मुनाफे का निर्धारण करने में, कटौती खर्च के रूप में वहाँ की अनुमति दी जाएगी जो स्थायी प्रतिष्ठान के व्यापार के लिए व्यय हुए, जिसमें ऐसे किए गए कार्यपालिका और सामान्य प्रशासनिक व्यय शामिल है, चाहे यह उस राज्य में किए गए हो जहां स्थार्इ प्रतिष्ठापन स्थित है या कही और, उस राष्ट्र के कराधान कानूनों के प्रावधानों और की सीमाओं के अनुसार

4. जहां तक कि उद्यम के विभिन्न भागों हेतु उद्यम के कुल लाभ के विभाजन के आधार पर एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभ को निर्धारित करने के लिए एक संविदाकारी राष्ट्र में इसे प्रथागत किया गया है पैराग्राफ 2 में कुछ भी ऐसे एक विभाजन, जिसे प्रथागत किया जा सकता है, द्वारा करारोपित किए जाने वाला लाभ को निर्धारित करने से उस संविदाकारी राष्ट्र को नही रोक सकेगा, हालांकि विभाजन की विधि ऐसी हो कि परिणाम इस अनुच्छेद में शामिल सिद्धांतों के अनुसार होगा।

5. कोई लाभ उद्यम के लिए उत्पाद या व्यापारिक माल उसे स्थायी प्रतिष्ठान द्वारा मात्र खरीद की वजह से एक स्थायी स्थापना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा.।

6. पूर्ववर्ती पैराग्राफ के लिए, स्थार्इ प्रतिष्ठान हेतु रोप्य लाभों को वर्ष दर वर्ष उसी विधि द्वारा निर्धारित किया जाएगा जबतक विरोध करने का कोर्इ सही या उचित कारण न हो ।

7. जहां लाभ की आय मद में शामिल हो जो इस समझौते के अन्य अनुच्छेद में पृथक रूप से व्यवहारित होती है तो इस अनुच्छेदों के प्रावधान इस अनुच्छेद के प्रावधानों द्वारा प्रभावित नहीं होंगे।

8. पैराग्राफ 1 के लिए, शब्द "स्थार्इ प्रतिष्ठापन हेतु प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्दिष्ट" में उस लेनदेन से प्राप्त लाभ शामिल है जिसमें स्थार्इ प्रतिष्ठापन शामिल रहा है और ऐसे लाभों को उन लेनदेनों में स्थार्इ प्रतिष्ठापन द्वारा निभाए गए उपयुक्त हिस्से की सीमा तक स्थार्इ प्रतिष्ठापन हेतु निर्दिष्ट समझा जाएगा भले ही वह लेनदेन स्थार्इ प्रतिष्ठापन को छोड़कर उद्यम के विदेशी मुख्यालय के साथ प्रत्यक्ष रूप से लेनदेन किए गए या स्थापित किए गए हो।

 

अनुच्छेद 8

शिपिंग और हवार्इ परिवहन

 

1. अंतर्राष्ट्रीय यातायात में जहाजों या विमान के संचालन से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा प्राप्त लाभ केवल उस राज्य में कर योग्य होगा।

2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान एक पूल में भागीदारी से लाभ, एक संयुक्त व्यापार या समुद्री जहाजों या हवार्इ जहाज के संचालन करने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय संचालन एजेंसी के लिए भी लागू होंगे

3. अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाजों या हवार्इ जहाज के संचालन से संबंधित कोष पर ब्याज को ऐसे समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन से प्राप्त लाभ के तौर पर समझा जाएगा और अनुच्छेद 11 के प्रावधान ऐसे ब्याज के संबंध में लागू नहीं होंगे

4. इस अनुच्छेद के लिए, अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन से लाभ का अर्थ समुद्री जहाज या वायुयान के मालिकों या पट्टेदारों या चार्टररों द्वारा यात्री, डाक, पशुधन या उत्पाद के समुद्र या हवार्इ मार्ग द्वारा परिवहन से प्राप्त लाभ है जिसमें निम्न से लाभ शामिल होगा

(क) अन्य उद्यम की ओर से ऐसे परिवहन के लिए टिकट की बिक्री

(ख) ऐसे परिवहन में प्रयोग किए गए समुद्री जहाज या वायुयान का अकस्मिक पट्टा

(ग) ऐसे परिवहन के संबंध में कंटेनरों का प्रयोग, अनुरक्षण या किराया (जिसमें कंटेनरों का परिवहन के लिए ट्रेलर और संबंधित उपकरण शामिल है)

(घ) ऐसे परिवहन के संबंध में अन्य कोर्इ प्रत्यक्ष गतिविधि

 

अनुच्छेद 9

संबंधित उद्यम

जहां -

(क) एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम प्रबंधन, नियंत्रण या अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेता है, या

(ख) एक ही व्यक्ति, प्रबंधन, नियंत्रण या एक संविदकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाग लेते हैं

और किसी भी मामले में शर्ते बनार्इ गर्इ हो या उनके वाणिज्यिक या वित्तीय संबंधों में दो उद्यमों के बीच अधिरोपित होती हो जो उनसे अलग है जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच बनार्इ गर्इ हो तो कोर्इ लाभ जो, लेकिन उन शर्तों के लिए, एक उद्यमों हेतु उपार्जित हो जाता लेकिन उन शर्तों की वजह से उपार्जित नहीं हो सका, उसे उस उद्यम के लाभ में शामिल किया जा सकता है और तद्नुसार करारोपित हो सकती है

2. जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उस राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ में शामिल हो और तद्नुसार कर - लाभ जिस पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम को उस अन्य राष्ट्र में कर देना पड़ा हो और ऐसा शामिल लाभ वह लाभ हो जो प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र के उद्यम हेतु प्राप्त किया गया होता यदि दोनों उद्यमों के बीच की गर्इ शर्तें वह थी जिनको निजी उद्यमों के बीच किया गया होता तो अन्य राष्ट्र उन लाभों पर उसमें लगाए गए करों की राशि का उपयुक्त समायोजन करेगा। ऐसे समायोजन को निर्धारित करने के लिए इस समझौते के अन्य प्रावधानों हेतु यथोचित संबंध होना चाहिए था और संविदाकारी राष्ट्र यदि आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे।

 

अनुच्छेद 10

लाभांश

1 एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की निवासी है द्वारा अन्य संविदाकारी राष्ट्र को दिया गया लाभांश उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।

2. हालांकि, ऐसे लाभांश उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकता है जिसकी लाभांश देने वाली कंपनी एक घरेलू कंपनी है और तद्नुसार उस राष्ट्र के कानून के अनुसार दिए जाते है लेकिन यदि प्राप्तकर्ता लाभांश का लाभार्थी मालिक है तो ऐसा लगाया गया कर लाभांश की कुल राशि निम्न से अधिक नहीं होगी

(क) लाभांश की कुल राशि का 10 प्रतिशत यदि लाभार्थी मालिक एक कंपनी हो जो लाभांश देने वाली कंपनी का कम से कम 25 प्रतिशत शेयर रखता हो

(ख) अन्य सभी मामलों में लाभांश की कुल राशि का 15 प्रतिशत

यह पैराग्राफ उस लाभ के संबंध में कंपनी के काराधान को प्रभावित नहीं करेगा जिसे लाभांश में से दिया गया हो

3. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 2 के प्रावधान होते हुए भी, जब तक सिंगापुर एक कंपनी के लाभ या आय पर वसूलनीय कर के अतिरिक्त लाभांश पर कर अधिरोपित न करता हो, एक कंपनी जो सिंगापुर की घरेलू कंपनी है, द्वारा भारत की घरेलू कंपनी को दिए गए लाभांश सिंगापुर में किसी कर से मुक्त होंगे जो हो सकते हैं कंपनी की आय या लाभ पर देययोग्य कर के अतिरिक्त लाभांश पर देययोग्य हो सकते हैं।

4. शब्द "लाभांश" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग हुआ है का अर्थ शेयर या अन्य अधिकार, ऋण-दावे के तौर पर नहीं, भागीदारी लाभ के साथ ही साथ अन्य निगमित अधिकार से आय जो उसी कराधान उपचार के अनुसार है जैसे राष्ट्र जिसकी वितरण करने वाली कंपनी घरेलू हैं, के कानून द्वारा शेयरों से आय

5. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि लाभांश के लाभार्थी स्वामी, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर, उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसका लाभांश देने वाली कंपनी निवासी है, वहां स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से, या वहां स्थित एक निश्चित आधार से उस अन्य राष्ट्र की स्वतंत्र सेवाओं में निष्पादित करता हो और स्वामित्व जिसके संबंध में दिए गए लाभांश ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित बेस से प्रभावी रूप् से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 और अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधन लागू होंगे।

6. जहां एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है अन्य संविदाकारी राष्ट्र से आय या लाभ प्राप्त करती है तो वह राष्ट्र कंपनी द्वारा दिए गए लाभांश पर कोर्इ कर अधिरोपित नहीं कर सकता, केवल जहां तक ऐसे लाभांश उस अन्य राष्ट्र के निवासी को दिए गए हों या जहां तक घारण जिसके संबंध में दिए गए लाभांश एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन से प्रभावी रूप से संबंधित हो या उस अन्य राष्ट्र में स्थित निश्चित बेस, ना तो कंपनी के अविभाजित लाभ का विषय है ना ही कंपनी के अविभाजित लाभ पर कर का विषय, भले ही लाभांश दिया गया हो या अवितरित लाभ में ऐसे अन्य राष्ट्र में उत्पन्न आय या लाभ के पूर्ण या आंशिक लाभ शामिल हों।

7 (क) लाभांश को भारत में प्राप्त किया गया है समझा जाएगा यदि यह उस कंपनी द्वारा दिए जाते हैं जो भारत की घरेलू कंपनी है

(ख) लाभांश सिंगापुर में प्राप्त किया गया है समझा जाएगा यदि

  (i) यदि वह उस कंपनी द्वारा दिए जाते हैं जो सिंगापुर की घरेलू कंपनी हैं या

 (ii) यदि उस कंपनी द्वारा दिया जाता है जो मलेशिया की घरेलू कपनी है जिसका लाभ सिंगापुर में प्राप्त होता है और 26 दिसंबर, 1968 को हस्ताक्षरित सिंगापुर और मलेशिया के बीच दोहरे कराधान के परिहार के समझौते के अनुच्छेद VII के अंतर्गत सिंगापुर में प्राप्त लाभांश के तौर पर योग्य है

 

अनुच्छेद 11

ब्याज

1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न ब्याज और अन्य संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है

2. हालांकि, ऐसा ब्याज उस संविदाकारी राष्ट्र में भी लग सकता है जिसमें यह उत्पन्न होता है और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार, लेकिन यदि प्राप्तकर्ता ब्याज का लाभार्थी स्वामी है तो ऐसा वसूला गया ब्याज अधिक नहीं होगा :

(क) ब्याज की कुल राशि के 10 प्रतिशत से अधिक यदि ऐसा ब्याज एक वास्तविक बैंकिंग व्यापार या एक समकक्ष वित्तीय संस्थान करने वाले एक बैंक द्वारा दिए गए ऋण पर दिया जाता है (एक बीमा कंपनी सहित)

(ख) अन्य सभी मामलों में ब्याज की कुल राशि का 15 प्रतिशत

3. शब्द "ब्याज" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है का अर्थ है प्रत्येक प्रकार के ऋण दावों से आय, चाहे गिरवी राशि द्वारा सुरक्षित हो या नही और चाहे ऋणी के लाभ में भागीदार होने का अधिकार हो या नहीं और विशेषकर सरकारी प्रतिभूतियों से आय और प्रीमियम सहित बांड या डिबेंचर से आय और ऐसी प्रतिभूतियाँ, बांड या डिबेंचर से संबंधित पुरस्कार। विलंबित भुगतान के लिए जुर्माना शुल्क को इस अनुच्छेद के लिए ब्याज के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

4. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर ब्याज के लाभार्थी मालिक उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसमें वहां स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से ब्याज उत्पन्न होता हो या वहां स्थित एक निश्चित स्थान से उस अन्य राष्ट्र में स्वतंत्र निजी सेवाएं देता हो और ऋण दावा जिसके संबंध में दिया गया ब्याज प्रभावी रूप से ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी मामला हो, के प्रावधान लागू होंगे

5. ब्याज को एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जब अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो जहां हालांकि ब्याज देने वाला व्यक्ति चाहे वह एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो या नहीं, का एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हो या उसके संबंध में निश्चित आधार है जिसके संबंध में ऋणग्रस्तता जिस पर दिया गया ब्याज व्यय किया गया है और ऐसे ब्याज ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान द्वारा वहन किए गए हो और ऐसे ब्याज ऐस स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार द्वारा वहन किए जाते हो तो ऐसे ब्याज उस राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जिसमें स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार स्थित है

6. जहां, अदाता और लाभार्थी मालिक के बीच या दोनों के बीच या कुछ व्यक्तियों के बीच एक विशेष संबंध के कारण ब्याज की राशि, ऋण-दावे जिसके लिए यह दिया जाता है, को ध्यान में रखते हुए ब्याज की राशि के उस राशि से अधिक होने पर, जो ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता और लाभार्थी मालिक द्वारा सहमति हो जाती, इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होंगे। ऐसे मामले में भुगतान का अतिरिक्त हिस्सा प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों को देखते हुए।

 

अनुच्छेद 12

तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी और शुल्क

1. एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टी और शुल्क और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को भुगतान उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करारोपित हो सकता है।

2. हालांकि, तकनीकी सेवाओं के लिए ऐसी रॉयल्टी और शुल्क उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकती हैं जिसमें यह उत्पन्न होती है और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करारोपित हो सकती है लेकिन यदि प्राप्तकर्ता तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या शुल्क का लाभार्थी स्वामी है तो ऐसा वसूला गया कर 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

3. शब्द "रॉयल्टी" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है का अर्थ है निम्न को प्रयोग करने के लिए या प्रयोग के अधिकार के लिए प्रतिफल के तौर पर प्राप्त किसी राशि का भुगतान —

(क) रेडियो या टेलिविजन ब्राडकास्टिंग के लिए प्रयुक्त सिनेमा फिल्म या फिल्त या टेप, कोर्इ पेंटेट, ट्रेडमार्क, डिजाइन या मॉडल, प्लान, गुप्त योजना या प्रक्रिया या प्रयोग के लिए या प्रयोग के अधिकार, औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक उपकरण या औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक प्रयोग संबंधी सूचना के लिए जिसमें किसी ऐसे अधिकार, संपत्ति या सूचना के हस्तांतरण से प्राप्त लाभ शामिल है

(ख) कोर्इ औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक उपकरण के लिए अनुच्छेद 8 के पैराग्राफ 4(ख) या 4(ग) में वर्णित गतिविधियों से एक उद्यम द्वारा प्राप्त भुगतान को छोड़कर

4. शब्द "तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग किया गया है का अर्थ है एक प्रबंधकीय, तकनीकी या परामर्श प्रकार (तकनीकी या अन्य कार्मिक के माध्यम से ऐसी सेवाओं के प्रावधान सहित) की सेवाओं के लिए प्रतिफल में किसी व्यक्ति को किसी प्रकार का भुगतान, यदि ऐसी सेवाएं :

(क) अधिकार, संपत्ति या सूचना जिसके लिए एक भुगतान को पैराग्राफ 3 में वर्णित किया गया है, प्राप्त होती है, के प्रयोग या उपभोग के लिए सहायक और मददगार हो या

(ख) तकनीकी ज्ञान, अनुभव, कौशल, तकनीकी जानकारी या प्रक्रिया के लिए उपलब्ध हो जो व्यक्ति को उसमें शामिल तकनीक को लागू करने के लिए सेवाओं को प्राप्त करने में सक्षम बनाएं

(ग) तकनीकी योजना या तकनीकी डिजाइन को विकसित और स्थानांतरित करना शामिल हो लेकिन वह सेवाएं शामिल न हों जो व्यक्ति को उसमें शामिल तकनीक को लागू करने के लिए सेवाओं को प्राप्त करने में सक्षम न बनाएं ।

उक्त (ख) और (ग) के लिए, सेवा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को ऐसे व्यक्ति के एक एजेंट, नामांकित व्यक्ति या स्थानांतरी को शामिल करने के लिए समझा जायगा

5. पैराग्राफ 4 के होते हुए भी, "तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क" में निम्न भुगतान शामिल न हो

(क) वह सेवाएं जो सहायक या मददगार हो साथ ही साथ पैराग्राफ 3(क) में वर्णित बिक्री को छोड़कर संपत्ति की बिक्री हेतु अनिवार्य या आवश्यक रूप से संबंधित हो

(ख) वह सेवाएं जो अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन के संबंध में प्रयुक्त समुदी जहाजों, वायुयानों, कंटेनरों या अन्य उपकरण हेतु सहायक या मददगार हो

(ग) शैक्षणिक संस्थानों में या उनके द्वारा शिक्षण के लिए

(घ) भुगतान करने के लिए व्यक्ति या इंसान के निजी प्रयोग के लिए सेवाओं हेतु

(ड़) अनुच्छेद 14 में परिभाषितानुसार पेशेवर सेवाओं के लिए व्यक्तियों (एक कंपनी के अलावा) की फर्म या किसी व्यक्ति को या भुगतान करने वाले व्यक्ति के कर्मचारी को

(च) अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 2(ञ) में संदर्भित प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण या दोहन के लिए प्रयोग स्ट्रक्चर या एक अधिष्ठापन के संबंध में दी गर्इ सेवाएं

(छ) अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 4 और 5 में संदर्भित सेवाओं के लिए

6. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के तौर पर तकनीकी सेवाओं के रॉयल्टी या शुल्क के लाभार्थी मालिक उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसमें वहां स्थित एक स्थार्इ प्रतिष्ठान के माध्यम से तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी और शुल्क उत्पन्न होती हो या वहां स्थित एक निश्चित स्थान से उस अन्य राष्ट्र में स्वतंत्र निजी सेवाएं देता हो और अधिकार, संपत्ति या अनुबंध जिसके संबंध में तकनीकी सेवाओं के लिए दी गर्इ रॉयल्टी या शुल्क प्रभावी रूप से ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी मामला हो, के प्रावधान लागू होंगे

7. रॉयल्टी को एक संविदाकारी राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जब अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो जहां हालांकि रॉयल्टी देने वाला व्यक्ति चाहे वह एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो या नहीं, का एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थार्इ प्रतिष्ठान हो या उसके संबंध में निश्चित आधार है जिसके संबंध में ऋणग्रस्तता जिस पर दी गर्इ रॉयल्टी व्यय की गर्इ है और ऐसे ब्याज ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान द्वारा वहन किए गए हों और ऐसी रॉयल्टी ऐसे स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार द्वारा वहन किए जाते हों तो ऐसी रॉयल्टी उस राष्ट्र में उत्पन्न होना समझा जाएगा जिसमें स्थार्इ प्रतिष्ठान या निश्चित आधार स्थित है।

8. जहां, अदाता और लाभार्थी मालिक के बीच या दोनों के बीच या कुछ व्यक्तियों के बीच एक विशेष संबंध के कारण रॉयल्टी की राशि, प्रयोग, अधिकार या सूचना जिसके लिए इनका भुगतान किया गया, को ध्यान में रखते हुए राशि के उस राशि से अधिक होने पर, जो ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता और लाभार्थी मालिक द्वारा सहमति हो जाती, इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होंगे। ऐसे मामले में भुगतान का अतिरिक्त हिस्सा प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों को देखते हुए।

 

अनुच्छेद 13

पूंजी प्राप्ति

1. अनुच्छेद 6 में संदर्भित और अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति के हस्तांतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्ति उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है

2. एक स्थार्इ प्रतिष्ठान (अकेले या पूर्ण उद्यम सहित) या ऐसे निश्चित बेस के हस्तांतरण से ऐसी प्राप्ति सहित स्वतंत्र निजी सेवाएं देने के लिए अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति एक स्थार्इ प्रतिष्ठान की व्यापारिक संपत्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके एक संविदाकारी राष्ट्र का एक उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में या अन्य संविदाकारी राष्ट्र में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी के लिए उपलब्ध निश्चित बेस से संबंधित अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।

3. अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित समुद्री जहाज या वायुयान या ऐसे समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन से संबंधित चल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति केवल उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगा जिसका संक्राता एक निवासी है

4क. एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है, में 1 अप्रैल 2017 से पहले प्राप्त किए गए शेयरों के हस्तांतरण से प्राप्तियां उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसमें सक्रांता रहता है

4ख एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है, में 1 अप्रैल 2017 को या उसके बाद प्राप्त शेयरों के हस्तांतरण से प्राप्तियां उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है

4ग हालांकि, इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 4ख में संदर्भित प्राप्तियां जो 1 अप्रैल 2017 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च 2019 को समाप्त होने वाली अवधि में उत्पन्न होती है कर की दर पर उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है जहां कंपनी, जिसके शेयर अलग किए जा रहे हैं, एक निवासी है जो उस राष्ट्र में ऐसी प्राप्ति पर लागू होने वाली दर के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं है

5. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1,2,3,4क और 4ख में संदर्भित किसी संपत्ति को छोड़कर हस्तांतरण से प्राप्ति उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसका संक्रता एक निवासी है

 

अनुच्छेद 14

स्वतंत्र निजी सेवाएं

1. एक ही प्रकार की पेशेवर सेवा या अन्य स्वतंत्र गतिविधियां करने से एक व्यक्ति जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है, द्वारा प्राप्त आय केवल उसी राष्ट्र में करयोग्य होगी केवल निम्नलिखित परिस्थितियों को छोड़कर जब ऐसी आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है

(क) यदि उसके पास यह गतिविधियां करने के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके लिए नियमित तौर पर निश्चित बेस हो , उस मामले में, केवल इतनी आय जो उस निश्चित बेस हेतु निश्चित है अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है या

(ख) यदि वह प्रासंगिक वित्त वर्ष में कुल 90 दिनों या उससे अधिक की अवधि या अवधियों के लिए रहता हो उस मामले में केवल आय का अधिकतम जिसे उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसकी द्वारा की गर्इ गतिविधि से प्राप्त किया गया हो, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है

2. शब्द "पेशेवर सेवाओं" में विशेष स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षणिक या शिक्षण गतिविधियां साथ ही साथ चिकित्सक, वकील, इंजीनियर, वास्तुकार, सर्जन, दंत विशेषज्ञ और लेखापाल शामिल है

 

अनुच्छेद 15

आश्रित निजी सेवाएं

1. अनुच्छेद 16, 18, 19, 20 और 21 के प्रावधानों के अनुसार वेतन, पारिश्रमिक और अन्य समकक्ष पारिश्रमिक जो एक रोजगार के संबंध में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त अन्य समकक्ष पारिश्रमिक उस राष्ट्र मैं ही करयोग्य होगा जबतक कि रोजगार अन्य संविदाकारी राष्ट्र में न किया जाए। यदि ऐसा किया गया रोजगार किया जाता है तो ऐसे पारिश्रमिक जिसे वहां से प्राप्त किया जाता है अन्य संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकते हैं।

2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान हेतु हुए भी, अन्य संविदाकारी राष्ट्र में किए गए रोजगार के संबंध में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ही करयोग्य होगा यदि :

(क) प्राप्तकर्ता प्रासंगिक पिछले वर्ष के दौरान अधिक से अधिक कुल 183 दिनों की अवधि या अवधियों के लिए उस अन्य राष्ट्र में मौजूद हो

(ख) एक नियोक्ता जो अन्य राष्ट्र का निवासी नहीं है, की ओर से दिया गया पारिश्रमिक

(ग) एक स्थार्इ प्रतिष्ठान या एक निश्चित बेस जिसका नियोक्ता अन्य संविदाकारी राष्ट्र में हो, द्वारा वहन न किया गया पारिश्रमिक

3. एक प्राप्तकर्ता, जो पैराग्राफ 2 के उप-पैराग्राफ (क), (ख) और (ग) के अंतर्गत सभी शर्तों को पूरा करता है, की स्थिति में यदि उसका पारिश्रमिक उसके नियोक्ता द्वारा प्राप्त तकनीकी सेवाओं (अनुच्छेद 12 के अंतर्गत व्यवहारित) के लिए शुल्क के समक्ष व्यय के तौर पर कटौतीपूर्ण होती है और नियोक्ता ने अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थार्इ प्रतिष्ठापन न हो तो पैराग्राफ 2 के प्रावधान होते हुए भी उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है। ऐसे मामले में, वसूला गया ऐसा कर पारिश्रमिक की कुल राशि के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

4. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित विदेश जाने वाले जहाज या वायुयान उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा

 

अनुच्छेद 16

निदेशक शुल्क

निदेशकों के शुल्क एक कंपनी के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा लिया गया इसी तरह की अन्य भुगतानों कि अन्य राज्य में लगाया जा सकता है जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो

 

अनुच्छेद 17

कलाकार और खेलकर्मी

1. अनुच्छेद 14 और 15 के प्रावधानों के होते हुए भी एक कलाकार जैसे थियेटर, मोशन पिक्चर, रेडियो और टेलीविजन कलाकार या एक संगीतकार या खेलकर्मी के तौर पर, निजी गतिविधियों से जैसे अन्य संविदाकारी राष्ट्र में की गर्इ होती के तौर पर एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त आय, उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है

2. जहां एक कलाकार या खेलकर्मी की क्षमता में उनके द्वारा किए गए निजी कार्य के संबंध में या संदर्भ में आय जैसे कि कलाकार या खेलकर्मी अपने लिए उपार्जित नहीं करता लेकिन दूसरे व्यक्ति के लिए करता है तो अनुच्छेद 7, 14 और 15 के प्रावधान होते हुए भी वह आय उस संविदाकारी राष्ट्र में करारोपित हो सकती है जिसमें कलाकार या खेलकर्मी गतिविधियां करता है

3. पैराग्राफ 1 के प्रावधान होते हुए भी एक कलाकार या एक खेलकर्मी जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है, द्वारा अपनी निजी गतिविधियों से प्राप्त आय जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र में की जाती है, प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि गतिविधियां अन्य संविदाकारी राष्ट्र में गतिविधियां प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र जिसमें इसके राजनीतिक उप-प्रभाग, स्थानीय प्राधिकारी या सांविधिक निकाय शामिल है, के सार्वजनिक कोष से पूर्ण या वास्तविक तौर पर समर्थित है।

4. पैराग्राफ 2 और अनुच्छेद 7, 14 और 15 के प्रावधान होते हुए भी जहां अपनी योग्यता के अनुसार मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी द्वारा एक संविदाकारी राष्ट्र में की गर्इ निजी गतिविधियों के संदर्भ में आय जैसे कि एक संविदाकारी राष्ट्र में खुद मनोरंजनकर्ता या खेलकर्मी अपने लिए उपार्जित नहीं करता लेकिन उस दूसरे व्यक्ति के लिए उपार्जित करता है तो वह आय अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि वह अन्य व्यक्ति उस अन्य राष्ट्र, जिसमें उसका राजनीतिक उप-संभाग या स्थानीय प्राधिकारी शामिल हो, के सार्वजनिक कोष से पूर्णता या वस्तुत वित्तपोषित हो

 

अनुच्छेद 18

सरकारी सेवा के संबंध में पारिश्रमिक और पेंशन

1. (क) एक संविदाकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या एक उसके स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उस राष्ट्र या उपसंभाग या प्राधिकारी, को दी गर्इ सेवा के संबंध में एक व्यक्ति को पारिश्रमिक, एक पेंशन को छोड़कर, उस राष्ट्र में करयोग्य होगी।

(ख) हालांकि, ऐसा पारिश्रमिक अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगा यदि सेवा उस राष्ट्र में दी जाती है और व्यक्ति उस राष्ट्र का निवासी हो जो :

  (i) उस राष्ट्र का निवासी हो; या

 (ii) सेवाएं देने के लिए ही उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी न बना हो

2 (क) उस राष्ट्र या उपसंभाग या प्राधिकारी को दी गर्इ सेवाओं के संदर्भ में एक व्यक्ति को एक संविदाकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या उसके एक स्थानीय प्राधिकारी द्वारा बनाए गए कोष में से दी गर्इ कोर्इ पेंशन उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगी

(ख) हालांकि, ऐसी पेंशन केवल अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि व्यक्ति उस अन्य राष्ट्र का निवासी और एक नागरिक हो

3. अनुच्छेद 15, 16 और 19 के प्रावधान एक संविदाकारी राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या उसके एक स्थानीय प्राधिकारी द्वारा किए गए व्यापार के संबंध में दी गर्इ सेवाओं के संबंध में पारिश्रमिक और पेंशन के लिए ही लागू होगा।

 

अनुच्छेद 19

गैर-सरकारी पेंशन और वार्षिकी

1. कोर्इ पेंशन, अनुच्छेद 18 में संदर्भित पेंशन को छोड़कर या अन्य संविदाकारी राष्ट्र के अंतर्गत स्रोत से एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त कोर्इ वार्षिकी प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में ही करारोपित हो सकती है

2. शब्द "पेंशन" का अर्थ है आवधिक भुगतान जिनको सेवा देने की अवधि के दौरान हुर्इ क्षति के लिए मुआवजे के रूप या पिछले सेवा के प्रतिफल में किया गया हो

3. शब्द "वार्षिकी" का अर्थ पूर्ण या उपयुक्त प्रतिफल राशि या राशि की कीमत के बदले भुगतान करने के लिए बाध्यता के अंतर्गत निर्दिष्ट या अनिर्दिष्ट अवधि के दौरान किसी भी निर्दिष्ट समय पर आवधिक देययोग्य राशि है।

 

अनुच्छेद 20

विद्यार्थी और प्रशिक्षु

1. एक व्यक्ति जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र जाने से तुरंत पहले एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है या था और केवल निम्न कारणों के लिए अस्थार्इ रूप से अन्य राष्ट्र में मौजूद है :-

(क) उस अन्य राष्ट्र में एक मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय या अन्य समकक्ष प्राधिकृत शैक्षणिक संस्थान का विद्यार्थी हो

(ख) व्यापारिक या तकनीकी प्रशिक्षु के तौर पर; या

(ग) किसी भी राष्ट्र की सरकार द्वारा शिक्षण, अनुसंधान या प्रशिक्षण के या वैज्ञानिक, शैक्षणिक, धार्मिक या धर्मांर्थ संगठन या किसी भी राष्ट्र की सरकार द्वारा किए गए तकनीकी सहायता कार्यक्रम के प्राथमिक उद्देश्य से अनुदान, भत्ते या पुरस्कार के प्राप्तकर्ता के तौर पर

निम्न पर उस अन्य राष्ट्र में कर से मुक्त होगा

  (i) अपने अनुरक्षण, शिक्षण, अध्ययन, अनुसंधान या प्रशिक्षण के लिए विदेश से सभी प्रेषण

 (ii) ऐसे अनुदान, भत्ते या पुरस्कार की राशि और

(iii) अन्य सविदाकारी राष्ट्र में दी गर्इ सेवाओं के लिए कोर्इ भी पारिश्रमिक जोकि 500 अमेरिकी डॉलर प्रति माह या स्थानीय मुद्रा में इसके बराबर से अधिक न हो बशर्ते ऐसी सेवाएं अपने शिक्षण, अनुसंधान या प्रशिक्षण या अपने अनुरक्षण के लिए दी गर्इ हो

2. इस अनुच्छेद के लाभ ऐसी समयावधि तक दिए जाऐंगे जिसे दी गर्इ शिक्षा या प्रशिक्षण को पूरा करने के लिए उपयुक्त या प्रथानुसार आवश्यक हो सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में किसी भी व्यक्ति को उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके पहले आने की तिथि से अधिक से अधिक पांच वर्षों के लिए इस अनुच्छेद के लाभ नहीं मिलेंगे।

 

अनुच्छेद 21

अध्यापक और अनुसंधानकर्ता

1. एक व्यक्ति जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र में जाने से तुरंत पहले एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है या था और जो, किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, विद्यालय या अन्य समकक्ष शैक्षणिक संस्थान, ऐसे शैक्षणिक संस्थान में शिक्षण या अनुसंधान या दोनों के लिए ही अधिक से अधिक दो वर्षों की अवधि के लिए उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में जाता है तो वह ऐसे प्रशिक्षण या अनुसंधान के लिए उसके पारिश्रमिक पर उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर से छूट मिलेगी।

2. यह अनुच्छेद अनुसंधान से आय के लिए लागू नहीं होगा यदि ऐसा अनुसंधान निर्दिष्ट व्यक्ति या व्यक्तियों के निजी लाभ के लिए प्राथमिक तौर पर किया जाता हो

 

अनुच्छेद 22

सरकार की आय

 

1. एक संविदाकारी राष्ट्र की सरकार अन्य राष्ट्र के अंदर स्रोत से उस सरकार द्वारा प्राप्त आय के संदर्भ में अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर से मुक्त होगा

2. आय के प्रकार जिस पर पैराग्राफ 1 लागू होते हैं :-

(क) अनुच्छेद 10 के अंतर्गत लाभांश

(ख) अनुच्छेद 11 के अंतर्गत ब्याज और

(ग) लेनदेन से अन्य कोर्इ आय या लेनदेन से प्राप्ति जो वाणिज्यिक गतिविधियों के आचरण के अनुसार नहीं है

3. पैराग्राफ 1 के लिए, शब्द 'सरकार' -

(क) सिंगापुर के मामले में इसका अर्थ सिंगापुर की सरकार से है और जिसमें निम्नलिखित शामिल होगा :

   (i) सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण और बोर्ड ऑफ कमीशनर्स ऑफ करंसी

  (ii) गर्वेमेंट ऑफ सिंगापुर इनवेस्टमेंट कार्पोरेशन पीटीर्इ लि. इस सीमा तक कि जो वाणिज्यिक गतिविधियां करने में संलग्न न हो

 (iii) वाणिज्यिक गतिविधियां न करने वाली एक सांविधिक निकाय

 (iv) अन्य कोर्इ संस्थान या निकाय जिसको संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों के बीच समय-समय पर सहमत किया जा सकता है

(ख) भारत के मामले में इसका अर्थ भारत सरकार से है और जिसमें निम्नलिखित शामिल होगा :

   (i) भारत की राज्य सरकारें और संघ शासित सरकारें

  (ii) भारतीय रिजर्व बैक या इसके कोर्इ सहायक बैंक जो वाणिज्यिक गतिविधियां नहीं करते

 (iii) एक सांविधिक निकाय जो वाणिज्यिक गतिवधियां नहीं करती

 (iv) कोर्इ अन्य संस्थान या निकाय जिसको संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारियों के बीच समय-समय पर सहमत किया जा सकता है

 

अनुच्छेद 23

आय जो स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं है

आय की मदें जिनको इस समझौते के पूर्वगामी अनुच्छेदों में स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट नहीं किया गया है वह संबंधित संविदाकारी राष्ट्रों के काराधान कानूनों के अनुसार करारोपित नहीं हो सकते

 

अनुच्छेद 24

राहत की सीमितता

1. जहां यह समझौता बताता हो (अन्य शर्तों के साथ या उसके बिना) कि एक संविदाकारी राष्ट्र में स्रोत से आय कर से मुक्त होगी या उस संविदाकारी राष्ट्र में कम दर से मुक्त होगी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानूनों के अंतर्गत वह कथित आय उसकी आय के संदर्भ द्वारा कर का विषय है जो उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में प्रेषित या प्राप्त होती है और नाकि उसकी पूर्ण राशि के संदर्भ द्वारा तो प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में इस समझौते के अंतर्गत स्वीकृत किए जाने के लिए कर की छूट या कमी इतनी आय तक लागू होगा जिसे उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में प्रेषित या प्राप्त किया जाता है

2. हालांकि, इस सीमितता एक संविदाकारी राष्ट्र की सरकार द्वारा या इस पैराग्राफ के लिए उस राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त आय पर लागू नहीं होता। शब्द "सरकार" में इसकी एजेंसियां और संविधिक निकाय शामिल है

 

अनुच्छेद 24क

1. एक संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4क या पैराग्राफ 4ग के लाभ का हकदार नहीं होगा यदि इसके मामले इस समझौते के कथित पैराग्राफ 4क या पैराग्राफ 4ग, जो भी मामला हो, में लाभ लेने के प्राथमिक उद्देश्य से व्यवस्थित किए गए थे।

2. एक शैल या वाहक कंपनी जो दावा करती है कि वह एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है वह इस समझौते के पैराग्राफ 4क या पैराग्राफ 4ग के लाभ का हकदार नहीं होगी। एक शैल या वाहक कंपनी कोर्इ कंपनी उद्यम है जो संविदाकारी राष्ट्र में बहुत कम या शून्य व्यापार या किए गए अवास्तविक या निरंतर व्यपारिक गतिविधियो के साथ निवासी की परिभाषा के अंतर्गत आती है।

3. एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी को एक शैल या वाहक कंपनी के तौर पर समझा जाएगा यदि उस संविदाकारी राष्ट्र में संचालन पर इसके वार्षिक व्यय सिंगापुर में 200,000 डॉलर से कम या भारत में रू. 5,000,000, जो भी मामला हो, से कम है।

(क) इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4क के मामले में उस तिथि जिससे प्राप्ति मिलनी आरंभ हुर्इ से 24 महीनों की अवधि के तुरंत पहले की प्रत्येक 12 महीने की अवधि के लिए है

(ख) इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4ग के मामले में उस तिथि जिससे प्राप्ति मिलनी आरंभ हुर्इ से 12 महीनों की अवधि के तुरंत पहले

4. एक संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी शैल या वाहक कंपनी के तौर पर नहीं समझा जाएगा यदि :

(क) यह संविदाकारी राष्ट्र के प्राधिकृत शेयर बाजार पर सूचित हो या

(ख) उस संविदाकारी राष्ट्र में इसका वार्षिक व्यय या संचालन सिंगापुर में 200,000 डॉलर से कम या भारत में रू. 5,000,000, जो भी मामला हो, से कम है।

(क) इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4क के मामले में उस तिथि जिससे प्राप्ति मिलनी आरंभ हुर्इ से 24 महीनों की अवधि के तुरंत पहले की प्रत्येक 12 महीने की अवधि के लिए है

(ख) इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4ग के मामले में उस तिथि जिससे प्राप्ति मिलनी आरंभ हुर्इ से 12 महीनों की अवधि के तुरंत पहले

5. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 4(क) के लिए एक प्राधिकृत शेयर बाजार का अर्थ :

(क) सिंगापुर के मामले में, सिंगापुर विनिमय लिमिटेड द्वारा संचालित प्रतिभूति मार्किट, सिंगापुर विनिमय व्यापार लिमिटेड और केंद्रीय निक्षेपागार (पीटीर्इ) लिमिटेड; और

(ख) भारत के मामले में, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा प्राधिकृत शेयर बाजार

स्पष्टीकरण : कानूनी उद्यमों के मामले जो वास्तविक व्यापारिक गतिविधि वाले नहीं है वह इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1 के अंतर्गत निहित है

 

अनुच्छेद 25

दोहरे कराधान का परिहार

1. किसी भी संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानून संबंधित संविदाकारी राष्ट्र में आय के कराधान को नियंत्रित करता रहेगा केवल वहां छोड़कर जहां इसके विपरीत के वर्णित प्रावधान इस समझौते में दिए गए हैं।

2. जहां भारत का निवासी आय प्राप्त करता है जो, इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार, सिंगापुर में करारोपित हो सकती है, भारत में दिए गए सिंगापुरी कर, चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, के बराबर की राशि उस निवासी की आय पर कर से कटौती के तौर पर वसूलेगा। जहां आय एक लाभांश है जो उस कंपनी द्वारा जो सिंगापुर की घरेलू कंपनी है, द्वारा उस कंपनी को दिया जाता है जो भारत की घरेलू कंपनी है और जो लाभांश देने वाले कंपनी की शेयर पूंजी के कम से कम 25 प्रतिशत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रखता है तो कटौती हेतु उस लाभ जिसमें से लाभांश दिया गया है, के संदर्भ में दिया गया सिंगापुर कर पर विचार किया जाएगा।

किसी भी मामले में ऐसी कटौती, हालांकि, कर (जो कटौती से पहले आंकने पर दिया जाता है) के उस हिस्से से अधिक नहीं होगी जो उस आय के लिए निर्दिष्ट हो जो सिंगापुर में करारोपित हो सकती हो।

3. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 2 के लिए, "दिया गया सिंगापुर कर" को कर की किसी राशि को शामिल करने के तौर पर समझा जाएगा जिसके दिया गया होता लेकिन निम्न के अंतर्गत दिए गए सिंगापुर कर की छूट या कमी के लिए

(क) आर्थिक विस्तार प्रोत्साहन (आयकर से राहत) अधिनियम के प्रावधान और आयकर अधिनियम की धारा 13(1)(न), 13(1)(प), 13(1)(V), 13(2), 13क, 13ख, 13च, 14ख, 14ग, 14ड़, 43क, 43ग, 43घ, 43ड़, 43च, 43छ, 43ज, 43झ, 43ञ और 43ट, जहां तक वह प्रभावी थे और जिनको इस समझौते के हस्ताक्षर की तिथि से संशोधित नहीं किया गया है या सूक्ष्म रूप से संशोधित किया गया है ताकि उनके सामान्य स्वभाव को प्रभावित न किया जा सके

(ख) अन्य कोर्इ प्रावधान जिनको छूट देने या उस कर की कमी के लिए बाद में अधिनियमित किया जा सकता है जिस पर इस पैराग्राफ के उप-पैराग्राफ (क) में संदर्भित किसी प्रावधान के काफी हद तक समकक्ष स्वरूप होने पर संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी सहमत हुए हैं यदि ऐसे प्रावधान उसके बाद संशोधित नहीं हुए हैं या छोटे संशोधनों में ही परिवर्तित किया गया है ताकि इसके सामान्य स्वरूप को प्रभावित न किया जा सके

4. भारत के अंदर स्रोत से आय के संदर्भ में दिए गए सिंगापुर को छोड़कर किसी अन्य देश में दिए गए कर के सिंगापुर कर के समक्ष ऋण के तौर पर भत्ते से संबंधित सिंगापुर के कानूनों के प्रावधानों के अनुसार, दिया गया भारतीय कर, चाहे प्रत्यक्ष तौर पर दिया गया हो या कटौती के तौर पर, उस आय के संदर्भ में देययोग्य सिंगापुर कर के समक्ष ऋण के तौर पर स्वीकृत होंगे। जहां ऐसी आय एक लाभांश है जिसको ऐसी कंपनी जो भारत की घरेलू कंपनी है द्वारा सिंगापुर की घरेलू कंपनी जो लाभांश देने वाली कंपनी के शेयर पूंजी का कम से कम 25 प्रतिशत रखती है, को दिया जाता है तो ऋण पर लाभांश देने वाली कंपनी द्वारा इसके लाभ के संदर्भ में दिए गए भारतीय कर पर विचार किया जाएगा।

5. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 4 के लिए, "दिया गया भारतीय कर" को कर की किसी राशि को शामिल करने के तौर पर समझा जाएगा जिसको भारत में दिया गया होता लेकिन निम्न के अंतर्गत प्रश्न के उस वर्ष के लिए दिए गए कर की कटौती या कए छूट या करयोग्य आय की गणना में स्वीकृति की कटौती के लिए

(क) धारा 10(4), 10(4ख), 10(5ख), 10(15)(iv), 10क, 10ख, 33कख, 80-झक, जहां तक वह प्रभावी थे और जिनको इस समझौते के हस्ताक्षर की तिथि से संशोधित नहीं किया गया है या सूक्ष्म रूप से संशोधित किया गया है ताकि उनके सामान्य स्वभाव को प्रभावित न किया जा सके

(ख) अन्य कोर्इ प्रावधान जिनको छूट देने या उस कर की कमी के लिए बाद में अधिनियमित किया जा सकता है जिस पर इस पैराग्राफ के उप-पैराग्राफ (क) में संदर्भित किसी प्रावधान के काफी हद तक समकक्ष स्वरूप होने पर संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी सहमत हुए हैं यदि ऐसे प्रावधान उसके बाद संशोधित नहीं हुए हैं या छोटे संशोधनों में ही परिवर्तित किया गया है ताकि इसके सामान्य स्वरूप को प्रभावित न किया जा सके

6. आय, जो इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार है, एक संविदाकारी राष्ट्र में कर का विषय नहीं है उसको उस संविदाकारी राष्ट्र में अधिरोपित करने के लिए कर की दर की गणना के लिए विचार किया जा सकता है

 

अनुच्छेद 26

गैर-भेदभाव

1. एक संविदाकारी राष्ट्र के नागरिक किसी कराधान या उससे संबंधित किसी अनिवार्यता के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र का विषय नहीं है, जोकि कराधान और संबंधित अनिवार्यताओं जोकि उसी परिस्थिति और उसी प्रकार की शर्तों के अंतर्गत उस राष्ट्र के निवासी अधीन है या हो सकते हैं, की तुलना में अन्य या और अधिक कष्टदायक है

2. एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन पर कराधान जिसके एक संविदाकारी राष्ट्र का उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में है उसी परिस्थिति में या उन्ही शर्तों के अंतर्गत वही कार्य करने के लिए उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम पर लगाए गए कराधान की तुलना में उस अन्य राष्ट्र में लगाए गए कर अनुकूल नहीं होगा। इस प्रावधान की व्याख्या ना तो ऐसे की जाएगी चूंकि एक स्थार्इ प्रतिष्ठापन जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की एक उद्यम उस कर की दर पर प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में वसूल सकती है जो प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र की समकक्ष कंपनी के लाभ पर अधिरोपण से अधिक है, ना ही इस समझौते के अनुच्छेद 7 के पैराग्रॉफ 3 के प्रावधानों के साथ विवाद के तौर पर, के लाभ को वसूलने से संविदाकारी राष्ट्र को रोक सकता है।

3. एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम, जिसकी पूंजी अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक या एक से अधिक निवासियों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण या आंशिक तौर पर स्वगत या नियंत्रित है, उससे संबंधित किसी कराधान या किसी अनिवार्यता के लिए प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र का विषय नहीं होंगे जो कराधान की तुलना में अधिक कष्दायक है और उससे संबंधित अनिवार्यता जिसके प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र के अन्य वही उद्यम उन्ही परिस्थितियों में और उन्हीं शर्तों के अंतर्गत विषय है या हो सकते हैं।

4. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ 1,2 और 3 में शामिल कुछ भी -

(क) किसी निजी भत्ते, राहत और कटौतियों, जो कानून द्वारा अपने स्वयं के निवासियों के लिए उपलब्ध है, को उस राष्ट्र के अनिवासी को दी जाने वाली एक संविदाकारी राष्ट्र की बाध्यता के तौर पर वर्णित नहीं होगा

(ख) ऐसे अनिवासी व्यक्ति पर कर के अधिरोपण के संबंध में संबंधित संविदाकारी राष्ट्रों के कर कानूनों के किसी प्रावधान को प्रभावित करते हुए

(ग) कर उद्देश्य के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र के नागरिकों को वह निजी भत्ते, राहत, कमियों और कटौतियों की बाध्यता के लिए एक संविदाकारी राष्ट्र की बाध्यता जो वह अपने नागरिकों को देता है जो उस राष्ट्र का निवासी नहीं है या ऐसे व्यक्ति को जिसको उस राष्ट्र के कराधान कानूनों में निर्दिष्ट किया जा सकता है और

(घ) निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्तियों को दिए गए किसी कर रियायत के संबंध में संबंधित संविदाकारी राष्ट्रों के कर कानूनों के किसी प्रावधान को प्रभावित करते हुए

5. इस अनुच्छेद में, शब्द "कराधान" का अर्थ कराधान जो इस समझौते का विषय हो सकते हैं।

 

अनुच्छेद 27

आपसी समझौता प्रक्रिया

 

1. जहां एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी को लगता है कि एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के कार्य का परिणाम या कराधान में उसके परिणाम इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार नहीं है तो वह उन राष्ट्रों के राष्ट्रीय कानून द्वारा मुहैया कराए गए उपायों के बावजूद, उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को अपने मामले प्रस्तुत करेगा जिसका वह निवासी है। यह मामला कार्रवार्इ की सूचना की तिथि से तीन वर्षों के अंदर प्रस्तुत किया जाना चाहिए जो समझौते के अनुसार कराधान को बढ़ाएगा।

2. सक्षम प्राधिकारी, यदि उपस्थित आपत्ति न्यायसंगत हो और यदि यह अपने आप संतोषजनक समाधान पर पहुंच पाने में अक्षम हो, अन्य संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के आपसी समझौते द्वारा कराधान जो समझौते के अनुसार नहीं है, के परिहार को देखते हुए मामले को सुलझाने का प्रयास करेगा। किए गए किसी समझौते को संविदाकारी राष्ट्रों के घरेलू कानून की समय सीमा होते हुए भी कार्यान्वित किया जाएगा।

3. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी समझौते को लागू करने या व्याख्या के कारण उत्पन्न होने वाले संदेहों या किसी परेशानी के लिए आपसी समझौते द्वारा समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। वह दोहरे कराधान को दूर करने के लिए साथ विचार-विमर्श करेंगे यदि समझौते में न दिया गया हो।

4. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी पूर्ववर्ती पैरग्राफ के अर्थ में एक समझौते पर प्रत्यक्ष पहुंचने के लिए एक-दूसरे के साथ संपर्क कर सकता है। जब विचारों के मौखिक आदान-प्रदान करने के लिए समझौते तक पहुंचना उचित लगे तो ऐसा आदान-प्रदान संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों के प्रतिनिधित्व वाले कमीशन के माध्यम से किया जा सकता है।

 

अनुच्छेद 28

सूचना का आदान-प्रदान

1. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना का आदान-प्रदान करेंगे जो इस समझौते के प्रावधानों या संविदाकारी राष्ट्र या उनके राजनीतिक-प्रभाग या स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से अधिरोपित प्रत्येक प्रकार के कर और अंकन के विषय में घरेलू कानूनों के प्रशासन या प्रवर्तन के लिए पहले से प्रासंगिक हो जहां तक इस आधार पर कराधान समझौते के विपरीत नहीं है। सूचना का आदान-प्रदान अनुच्छेद 1 और 2 द्वारा प्रतिबंधित नही है।

2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त किसी सूचना को उसी तरीके से गुप्त समझा जाएगा जैसे सूचना उस संविदाकारी राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त की जाती है और इसके निर्धारण या संग्रहण से संबंधित व्यक्तियों या प्राधिकारियों (न्यायालय और प्रशासनिक निकायों सहित) को ही दी जाएगी, पैराग्राफ 1 में संदर्भित करों के संबंध में अपीलों का निर्धारण या अभियोजन, या उक्त की जांच करने वाले को ही दी जाएगी। ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी केवल इस उद्देश्य के लिए ही सूचना का प्रयोग करेंगे। वह सार्वजनिक न्यायालय की कार्यवाहियों या न्यायिक निर्णयों में सूचना को प्रकट कर सकते हैं।

3. किसी भी मामले पैराग्राफ 1 के प्रावधान निर्मित नहीं होंगे ताकि एक संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकार पर निम्न बाध्यताएं अधिरोपित की जा सके :

(क) उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के परिवर्तनशील कानूनों और प्रशासनिक अभ्यास पर प्रशासनिक उपाय

(ख) सूचना की आपूर्ति जो कानून के अंतर्गत या उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के प्रशासन की सामान्य अवधि में प्राप्तनीय नहीं है

(ग) सूचना की आपूर्ति के लिए जो किसी व्यापार, कारोबार, औद्योगिक, वाणिज्यिक या पेशेवर राज या कारोबार प्रक्रिया या सूचना हो उसका प्रकटीकरण लोक नीति (सार्वजनिक अध्यादेश) के विपरीत होगा

4. यदि एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा अनुरोधित सूचना इस अनुच्छेद के अनुसार है तो अन्य संविदाकारी राष्ट्र अनुरोधित सूचना को प्राप्त करने के लिए इसके सूचना एकत्रीकरण उपाय का प्रयोग करेगा भले ही उस अन्य राष्ट्र को अपने कर उद्देश्यों के लिए ऐसी सूचना की जरूरत न हो। पूर्ववर्ती वाक्य में शामिल बाध्यता पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अनुसार है लेकिन किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि उसका ऐसी सूचना में कोर्इ घरेलू हित नहीं है।

5. किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि सूचना बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, नामांकित व्यक्ति या एजेंसी के तौर पर कार्य करने वाले व्यक्ति या जिम्मेदार व्यक्ति के पास है या इसलिए क्योंकि यह एक व्यक्ति में स्वामित्व हितों से संबंधित है।

 

अनुच्छेद 28क

विविध

 

यह समझौता एक संविदाकारी राष्ट्र को अपने घरेलू कानून और कर परिहार या कर अपवंचन की रोकथाम से संबंधित उपाय को लागू करने से नहीं रोकेगा

 

अनुच्छेद 29

राजनयिक और कौंसुलर अधिकारी

 

इस समझौते में कुछ भी अंतर्राष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के तहत या विशेष समझौतों के प्रावधानों के तहत राजनयिक या कौंसुलर अधिकारियों के राजकोषीय विशेषाधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा.

 

एमएलआर्इ के अनुच्छेद 7 के निम्नलिखित पैराग्राफ 1 इस समझौते के प्रावधानों के लिए लागू होते हैं :

एमएलआर्इ के अनुच्छेद 7 - संधि के दुरूपयोग को रोकना (प्रमुख उद्देश्य के परीक्षण प्रावधान)

समझौते के किसी प्रावधान के होते हुए भी, समझौते के अंतर्गत लाभ आय की एक मद के संबंध में नहीं दी जाएगी यदि यह करना उचित हो, सभी प्रासंगिक तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कि वह लाभ प्राप्त करना किसी व्यवस्था या लेनदेन का प्रमुख उद्देश्य था जो उस लाभ का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम था, जबतक यह प्रमाणित न हो कि इन परिस्थितियों में उन लाभों को देना उद्देश्य के अनुसार होगा और समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के लिए होगा।

 

अनुच्छेद 30

प्रारंभ होना

1. प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र इस समझौते के प्रारंभ होने के लिए इसके कानून द्वारा आवश्यक प्रक्रियाओं के अन्य समापन को अधिसूचित करेगा। समझौता इन अधिसूचनाओं की तिथि पर प्रारंभ होगा और इसके बाद प्रभावी होगा -

(क) भारत में, 1 अप्रैल, 1994 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में उत्पन्न आय के संदर्भ में

(ख) सिंगापुर में, 1 जनवरी, 1994 को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में उत्पन्न आय के संदर्भ में

2. आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन के लिए भारतीय गणतांत्रिक सरकार और सिंगापुर गणतांत्रिक सरकार के बीच समझौते पर 20 अप्रैल 1981 को सिंगापुर में हस्ताक्षर किए गए जो समाप्त होगा और उस तिथि से प्रभावी होगा जिस पर यह समझौता प्रभावी हुआ

 

अनुच्छेद 31

समाप्ति

 

यह समझौता अनिश्चित काल के लिए प्रभावी रहेगा लेकिन कोर्इ भी संविदाकारी राष्ट्र इसके प्रभावी होने की तिथि से पांच वर्षों की अवधि की समाप्ति के बाद प्रारंभ होने वाले किसी कैलेंडरवर्ष के 13 जून को या उससे पहले अन्य संविदाकारी राष्ट्र को राजनायिक माध्यमों के जरिए, समाप्ति के लिखित नोटिस दे सकते हैं और ऐसी स्थिति में यह समझौता प्रभावी नहीं रहेगा

(क) भारत में, 1 अप्रैल को या उसके बाद की अगली तिथि जिस पर सामप्ति का नोटिस दिया गया को प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में उत्पन्न आय के संदर्भ में

(ख) भारत में, 1 जनवरी को या उसके बाद की अगली तिथि जिस पर समाप्ति का नोटिस दिया गया को प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में उत्पन्न आय के संदर्भ में

जिसके साक्ष्य में अधोहस्ताक्षरी ने, वहां उनकी संबंधित सरकारों द्वारा विधितव रूप से प्राधिकृत किया जा रहा है, इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस 24 जनवरी 1994 को भारत में हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रतिरूपण रूप से किया गया, दोनों भाषाएं समान रूप से प्रमाणिक है। व्याख्या में किसी अंतर की स्थिति में अंग्रेजी पाठ को माना जाएगा।

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