आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 9ख

विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक की प्राप्ति पर आय

धारा

धारा संख्या

9ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय II - कार्यभार के आधार

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2023

विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक की प्राप्ति पर आय

1[ विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक की प्राप्ति पर आय

9ख. (1) जहां कोई विनिर्दिष्ट व्यक्ति पूर्व वर्ष के दौरान ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व के विघटन या पुनर्गठन के संबंध में विनिर्दिष्ट अस्तित्व से कोई पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों प्राप्त करता है, वहां यह समझा जाएगा कि विनिर्दिष्ट अस्तित्व ने, उस पूर्व वर्ष में, जिसमें ऐसी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए जाते हैं, विनिर्दिष्ट व्यक्ति को, यथास्थिति, ऐसी पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों का अंतरण किया है।

(2) विनिर्दिष्ट अस्तित्व द्वारा, यथास्थिति, पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों के ऐसे समझे गए अंतरण से उद्भूत होने वाला कोई लाभ और अभिलाभ, —

  (i) ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व की उस पूर्व वर्ष, जिसमें ऐसी पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए गए थे, की आय समझी जाएगी; और

 (ii) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार "किसी कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन या "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व की आय के रूप में ऐसी आय, आय-कर से प्रभार्य होगी।

(3) इस धारा के प्रयोजन के लिए, विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों का, इसकी प्राप्ति की तारीख को उचित बाजार मूल्य विनिर्दिष्ट अस्तित्व द्वारा पूंजी आस्ति या व्यापार स्टॉक या दोनों के ऐसे समझे गए अंतरण के परिणमस्वरूप प्राप्त या उद्भूत होने वाले प्रतिफल के पूर्ण मूल्य के रूप में समझा जाएगा।

(4) यदि इस धारा या धारा 45 की उपधारा (4) के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो बोर्ड, केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से कठिनाई को दूर करने के प्रयोजनों के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत जारी कर सकेगा।

(5) उपधारा (4) के अधीन बोर्ड द्वारा जारी प्रत्येक मार्गदर्शी सिद्धांत, इसके जारी किए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा और आय-कर प्राधिकारियों पर और निर्धारिती पर आबद्धकर होगा।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजन के लिए, —

  (i) "विनिर्दिष्ट अस्तित्व का पुनर्गठन" से अभिप्रेत है, जहां, —

(क) ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व के, यथास्थिति, एक या अधिक भागीदार या सदस्य नहीं रह जाते है ; या

(ख) ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व में, यथास्थिति, एक या अधिक नए भागीदार या सदस्य ऐसी परिस्थितियों में सम्मिलित किए जाते हैं, कि एक या अधिक व्यक्ति, जो परिवर्तन से पूर्व विनिर्दिष्ट अस्तित्व के, यथास्थिति, भागीदार या सदस्य थे, परिवर्तन के पश्चात् भागीदार या सदस्य बने रहते है; या

(ग) यथास्थिति, सभी भागीदार या सदस्य, ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व के उनके अपने शेयर या उनमें के कुछ शेयरों में परिवर्तन के साथ बने रहते है;

  (ii) "विनिर्दिष्ट अस्तित्व" से कोई फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम या व्यष्टियों का निकाय (जो एक कंपनी या सहकारी सोसाइटी नहीं है) अभिप्रेत है;

 (iii) "विनिर्दिष्ट व्यक्ति" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो किसी पूर्व वर्ष में किसी फर्म का भागीदार है या व्यक्तियों के अन्य संगम या व्यष्टियों के निकाय (जो एक कंपनी या सहकारी सोसाइटी नहीं है) का सदस्य है।]

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

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