आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 97

ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना

धारा

धारा संख्या

97

अध्याय शीर्षक

अध्याय X क - सामान्य परिवर्जनरोधी नियम

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना

ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना

ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना

97. (1) किसी ठहराव के बारे में यह समझा जाएगा कि उसमें वाणिज्यिक सारतत्व नहीं हैं, यदि–

(क) ठहराव का संपूर्ण सारतत्व या प्रभाव उसके पृथक्-पृथक् उपायों या उनके किसी भाग से असंगत है या उससे महत्वपूर्ण रूप से भिन्न है; या

(ख) उसमें निम्नलिखित सम्मिलित या उसके अंतर्गत हैं–

(i) राउंड ट्रिप वित्तपोषण;

(ii) कोर्इ अनुकूलक पक्षकार;

(iii) ऐसे तत्व, जिनका प्रभाव एक-दूसरे को मुजरार्इ करने या रद्द करने का है; या

(iv) ऐसा संव्यवहार, जो एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जाता है और ऐसी निधियों के, जो ऐसे संव्यवहार की विषय-वस्तु है, मूल्य, अवस्थान, स्रोत, स्वामित्व या नियंत्रण के बारे में भ्रम होता है; या

(ग) उसमें ऐसी किसी आस्ति या किसी संव्यवहार का अवस्थान या किसी पक्षकार का निवास-स्थान अंतर्वलित है, जिसमें किसी पक्षकार के लिए कर फायदा अभिप्राप्त करने से भिन्न (इस अध्याय के उपबंधों के लागू न होने पर भी) कोर्इ महत्वपूर्ण वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं है।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, राउंड ट्रिप वित्तपोषण के अंतर्गत ऐसा कोर्इ ठहराव भी है, जिसमें,–

(ए) इस बात पर कि क्या राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियों का ठहराव के संबंध में किसी पक्षकार को अंतरित या उसके द्वारा प्राप्त किन्हीं निधियों से पता लगाया जा सकता है या नहीं;

(बी) उस समय या क्रम पर, जिसमें राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियां अंतरित या प्राप्त की जाती हैं; या

(सी) उस साधन पर, जिसके द्वारा या रीति पर, जिसमें या ढंग पर, जिसके माध्यम से राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियां अंतरित या प्राप्त की जाती हैं,

कोर्इ ध्यान दिए बिना, संव्यवहारों की श्रृंखला द्वारा–

(क) निधियां, ठहराव के पक्षकारों के बीच अंतरित की जाती हैं; और

(ख) ऐसे संव्यवहारों का कर फायदा अभिप्राप्त करने से भिन्न (इस अध्याय के उपबंधों के लागू न होने पर भी) कोर्इ महत्वपूर्ण वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं है।

(3) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, ठहराव का कोर्इ पक्षकार अनुकूलक पक्षकार होगा, यदि संपूर्ण ठहराव या उसके भाग में उस पक्षकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहभागिता का मुख्य प्रयोजन निर्धारिती के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोर्इ कर फायदा (इस अध्याय के उपबंधों के लागू न होने पर भी) अभिप्राप्त करने का है, चाहे पक्षकार ठहराव के किसी पक्षकार के संबंध में कोर्इ संबंधित व्यक्ति है या नहीं।

(4) यह अवधारित करते समय कि क्या किसी ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व है या नहीं, निम्नलिखित को हिसाब में नहीं लिया जाएगा, अर्थात् :–

(i) वह अवधि या समय, जिसके लिए ठहराव (जिसके अंतर्गत उसमें प्रचालन भी है) विद्यमान रहता है;

(ii) ठहराव के अधीन, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करों के संदाय का तथ्य;

(iii) यह तथ्य कि ठहराव द्वारा कोर्इ निर्गम माध्यम (जिसके अंतर्गत किसी क्रियाकलाप या कारबार या प्रचालनों का अंतरण भी है) उपलब्ध कराया जाता है।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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