सामान्य परिवर्जनरोधी नियम का लागू होना
1ख[अध्याय 10क
सामान्य परिवर्जनरोधी नियम
सामान्य परिवर्जनरोधी नियम का लागू होना
95. 1ग[(1)] इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारिती द्वारा किए गए किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव के रूप में घोषित किया जा सकेगा और उससे उद्भूत होने वाले कर संबंधित परिणाम का अवधारण इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए किया जा सकेगा।
1ग[(2) यह अध्याय, 1 अप्रैल, 2018 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष की बाबत लागू होगा।]
स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस अध्याय के उपबंध ठहराव में के किसी उपाय को या उसके किसी भाग को उसी प्रकार लागू किए जा सकेंगे, जैसे वे ठहराव के संबंध में लागू होते हैं।
1ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2016 से अध्याय 10क, जिसमे धारा 95 से धारा 102 तक की धाराए है अंत:स्थापित। अंत:स्थापन से पूर्व अध्याय 10क जिसमे धारा 95 से 102 है। वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2014 से अंत:स्थापित बाद में वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2014 से लोप कि गयी जा निम्न प्रकार थी।
'अध्याय 10क
सामान्य परिवर्जन-रोधी नियम
95. सामान्य परिवर्जन-रोधी नियम का लागू होना.-अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारिती द्वारा किए गए किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किया जा सकेगा और उससे उद्भूत होने वाले कर संबंधी परिणाम का अवधारण इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए किया जा सकेगा।
स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस अध्याय के उपबंध ठहराव या उसके किसी भाग के किसी भी उपाय को उसी प्रकार लागू किए जा सकेंगे, जैसे वे ठहराव के संबंध में लागू होते हैं।
96. अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव.-(1) किसी अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव से ऐसा ठहराव अभिप्रेत है, जिसका मुख्य प्रयोजन या मुख्य प्रयोजनों में एक प्रयोजन कर फायदा अभिप्राप्त करने का है और,-
(क) इससे ऐसे अधिकारों या बाध्यताओं का सृजन होता है, जो सामान्यतया असन्निकट संबद्ध व्यक्तियों के बीच सृजित नहीं होती हैं;
(ख) उसके परिणामस्वरूप इस अधिनियम के उपबंधों का, प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से, गलत उपयोग या दुरुपयोग होता है;
(ग) इसमें धारा 97 के अधीन, संपूर्णत: या भागत:, वाणिज्यिक सारतत्व नहीं है या उसके बारे में यह समझा जाता है कि उसमें वाणिज्यिक सारतत्व नहीं है; या
(घ) वह ऐसे साधनों द्वारा या ऐसी रीति में किया जाता है या कार्यान्वित किया जाता है, जो सामान्यतया सद्भावी प्रयोजनों के लिए अपनार्इ नहीं जाती है।
(2) ऐसे ठहराव के बारे में इस तथ्य के होते हुए भी कि संपूर्ण ठहराव का मुख्य प्रयोजन कर फायदा अभिप्राप्त करना नहीं है, यह उपधारणा की जाएगी कि वह कोर्इ कर फायदा अभिप्राप्त करने के मुख्य प्रयोजन के लिए किया गया है या कार्यान्वित किया गया है, यदि ठहराव या उसके किसी भाग को करने के किसी भी उपाय का मुख्य प्रयोजन कर फायदा अभिप्राप्त करने का है।
97. ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व का न होना.-(1) किसी ठहराव के बारे में यह समझा जाएगा कि उसमें वाणिज्यिक सारतत्व नहीं हैं, यदि-
(क) ठहराव का संपूर्ण सारतत्व या प्रभाव उसके पृथक्-पृथक् उपायों या उनके किसी भाग से असंगत है या उससे महत्वपूर्ण रूप से भिन्न है; या
(ख) उसमें निम्नलिखित सम्मिलित या उसके अंतर्गत हैं-
(i) राउंड ट्रिप वित्तपोषण;
(ii) कोर्इ अनुकूलक पक्षकार;
(iii) ऐसे तत्व, जिनका प्रभाव एक-दूसरे को मुजरार्इ करने या रद्द करने का है; या
(iv) ऐसा संव्यवहार, जो एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जाता है और ऐसी निधियों के, जो ऐसे संव्यवहार की विषय-वस्तु है, मूल्य, अवस्थान, स्रोत, स्वामित्व या नियंत्रण के बारे में भ्रम होता है; या
(ग) उसमें ऐसी किसी आस्ति या किसी संव्यवहार का अवस्थान या किसी पक्षकार का निवास-स्थान अंतर्वलित है, जिसमें किसी पक्षकार के लिए कर फायदा अभिप्राप्त करने से भिन्न (इस अध्याय के उपबंधों के लागू न होने पर भी) कोर्इ महत्वपूर्ण वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं है।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, राउंड ट्रिप वित्तपोषण के अंतर्गत ऐसा कोर्इ ठहराव भी है, जिसमें,-
(ए) इस बात पर कि क्या राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियों का ठहराव के संबंध में किसी पक्षकार को अंतरित या उसके द्वारा प्राप्त किन्हीं निधियों से पता लगाया जा सकता है या नहीं;
(बी) उस समय या क्रम पर, जिसमें राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियां अंतरित या प्राप्त की जाती हैं; या
(सी) उस साधन पर, जिसके द्वारा या रीति पर, जिसमें या ढंग पर, जिसके माध्यम से राउंड ट्रिप वित्तपोषण में अंतर्वलित निधियां अंतरित या प्राप्त की जाती हैं,
कोर्इ ध्यान दिए बिना, संव्यवहारों की श्रृंखला द्वारा-
(क) निधियां, ठहराव के पक्षकारों के बीच अंतरित की जाती हैं; और
(ख) ऐसे संव्यवहारों का कर फायदा अभिप्राप्त करने से भिन्न (इस अध्याय के उपबंधों के लागू न होने पर भी) कोर्इ महत्वपूर्ण वाणिज्यिक प्रयोजन नहीं है।
(3) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, ठहराव का कोर्इ पक्षकार अनुकूलक पक्षकार होगा, यदि संपूर्ण ठहराव या उसके भाग में उस पक्षकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहभागिता का मुख्य प्रयोजन निर्धारिती के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोर्इ कर फायदा (इस अध्याय के उपबंधों के लागू न होने पर भी) अभिप्राप्त करने का है, चाहे पक्षकार ठहराव के किसी पक्षकार के संबंध में कोर्इ संबंधित व्यक्ति है या नहीं।
(4) यह अवधारित करते समय कि क्या किसी ठहराव में वाणिज्यिक सारतत्व है या नहीं, निम्नलिखित को हिसाब में नहीं लिया जाएगा, अर्थात् :-
(i) वह अवधि या समय, जिसके लिए ठहराव (जिसके अंतर्गत उसमें प्रचालन भी है) विद्यमान रहता है;
(ii) ठहराव के अधीन, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से करों के संदाय का तथ्य;
(iii) यह तथ्य कि ठहराव द्वारा कोर्इ निर्गम माध्यम (जिसके अंतर्गत किसी क्रियाकलाप या कारबार या प्रचालनों का अंतरण भी है) उपलब्ध कराया जाता है।
98. अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव का परिणाम.-(1) यदि किसी ठहराव को कोर्इ अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किया जाता है तो ठहराव के कर संबंधी परिणामों का, जिनके अंतर्गत किसी कर संधि के अधीन कर फायदे या किसी फायदे से इंकार किया जाना भी है, ऐसी रीति में, जैसी मामले की परिस्थितियों में उपयुक्त समझी जाती है, तथा निम्नलिखित रूप में, किन्तु जो उन तक सीमित न हो, अवधारण किया जाएगा, अर्थात् :-
(क) भागत: या संपूर्णत: अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव में किसी उपाय पर ध्यान न देना, उन्हें संयोजित या पुन:विशेषित करना;
(ख) अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव को इस प्रकार मानना, मानो उसे किया अथवा क्रियान्वित ही नहीं किया गया था;
(ग) किसी अनुकूलक पक्षकार पर ध्यान न देना या किसी अनुकूलक पक्षकार और किसी अन्य पक्षकार को एक ही पक्षकार के रूप में मानना;
(घ) ऐसे व्यक्तियों को, जो एक-दूसरे के संबंध में संबद्ध व्यक्ति है, किसी रकम के कर निरूपण की अवधारणा करने के प्रयोजनों के लिए एक ही व्यक्ति मानना;
(ड़) ठहराव के पक्षकारों के बीच-
(i) किसी पूंजीगत या राजस्व की प्रकृति के किसी प्रोद्भवन या प्राप्ति; या
(ii) किसी व्यय, कटौती, राहत या रिबेट,
का पुन:विनिधान करना;
(च) (i) ठहराव के किसी पक्षकार के निवास-स्थान को; या
(ii) किसी आस्ति या संव्यवहार की अवस्थिति को,
ठहराव के अधीन यथाउपबंधित निवास-स्थान, किसी आस्ति के अवस्थान या संव्यवहार के अवस्थान से भिन्न स्थान मानना; या
(छ) किसी निगमित ढांचे की अनदेखी करके किसी ठहराव पर विचार करना या उस पर ध्यान देना।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए,-
(i) किसी इक्विटी को ऋण या ऋण को इक्विटी माना जा सकेगा;
(ii) पूंजीगत प्रकृति के किसी प्रोद्भवन या प्राप्ति को राजस्व की प्रकृति का या उसके विपर्येन माना जा सकेगा; या
(iii) किसी व्यय, कटौती, राहत या रिबेट को पुन:विशेषित किया जा सकेगा।
99. संबद्ध व्यक्ति और अनुकूलक पक्षकार के संबंध में व्यवहार.-इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, यह अवधारित करने में कि क्या कोर्इ कर फायदा विद्यमान है,-
(i) ऐसे पक्षकारों को, जो एक-दूसरे के संबंध में संबद्ध पक्षकार हैं, एक ही व्यक्ति माना जा सकेगा;
(ii) किसी अनुकूलक पक्षकार की अनदेखी की जा सकेगी;
(iii) ऐसे अनुकूलक पक्षकार और किसी अन्य पक्षकार को एक ही व्यक्ति माना जा सकेगा;
(iv) ठहराव पर किसी निगमित ढांचे की अनदेखी करके विचार किया जा सकेगा या उस पर ध्यान दिया जा सकेगा।
100. अध्याय का लागू होना.-इस अध्याय के उपबंध कर दायित्व के अवधारण के संबंध में किसी अन्य आधार के अतिरिक्त या उसके स्थान पर लागू किए जाएंगे।
101. दिशा-निर्देशों का विरचित किया जाना.-इस अध्याय के उपबंधों को ऐसे दिशा-निर्देशों के अनुसार और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए और ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, लागू किया जाएगा।
102. परिभाषाएं.-इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(1) "ठहराव" से कोर्इ संपूर्ण संव्यवहार, संक्रिया, स्कीम, करार या समझौते या उसके किसी भाग के संबंध में कोर्इ उपाय अभिप्रेत है, चाहे वह प्रवर्तनीय हो या नहीं और इसके अंतर्गत ऐसे संव्यवहार, संक्रिया, स्कीम, करार या समझौते में किसी संपत्ति का अन्य संक्रामण भी है;
(2) "आस्ति" के अंतर्गत किसी प्रकार की संपत्ति या अधिकार है;
(3) किसी व्यक्ति के संबंध में "सहयोजित व्यक्ति" से निम्नलिखित अभिप्रेत है-
(क) यदि व्यक्ति कोर्इ व्यष्टि है, व्यक्ति का कोर्इ नातेदार;
(ख) यदि व्यक्ति कोर्इ कंपनी है तो कंपनी का कोर्इ निदेशक या ऐसे निदेशक का कोर्इ नातेदार;
(ग) यदि व्यक्ति कोर्इ फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय है तो ऐसी फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय का कोर्इ भागीदार या सदस्य या ऐसे भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार;
(घ) यदि व्यक्ति कोर्इ हिन्दू अविभक्त कुटुंब है तो हिन्दू अविभक्त कुटुंब का कोर्इ सदस्य या ऐसे सदस्य का कोर्इ नातेदार;
(ड़) ऐसा कोर्इ व्यष्टि, जिसका व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है या ऐसे व्यष्टि का कोर्इ नातेदार;
(च) कोर्इ कंपनी, फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसका व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है या कंपनी, फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय या कुटुंब का कोर्इ निदेशक, भागीदार या सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार;
(छ) ऐसी कोर्इ कंपनी, फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसके निदेशक, भागीदार या सदस्य का व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कुटुंब या कोर्इ नातेदार;
(ज) ऐसा कोर्इ अन्य व्यक्ति, जो कोर्इ कारबार करता है, यदि,-
(i) उस व्यक्ति का, जो व्यष्टि है या ऐसे व्यक्ति के किसी नातेदार का उस अन्य व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है; या
(ii) उस व्यक्ति का, जो कोर्इ कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है या ऐसी कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय या कुटुंब के किसी निदेशक, भागीदार या सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य के किसी नातेदार का उस अन्य व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है;
(4) "फायदे" के अंतर्गत किसी प्रकार का, चाहे मूर्त रूप में या अमूर्त रूप में, कोर्इ संदाय भी है;
(5) "संबद्ध व्यक्ति" से ऐसा कोर्इ व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी अन्य व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबद्ध है और इसके अंतर्गत सहयोजित व्यक्ति भी है;
(6) "निधि" के अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं-
(क) कोर्इ नकदी;
(ख) नकदी का समतुल्य; और
(ग) नकदी या नकदी का समतुल्य प्राप्त करने या उसका संदाय करने का कोर्इ अधिकार या बाध्यता;
(7) "पक्षकार" से कोर्इ व्यक्ति, जिसके अंतर्गत ऐसा स्थायी स्थापन भी है, अभिप्रेत है, जो किसी ठहराव में हिस्सा या भाग लेता है;
(8) "नातेदार" का वही अर्थ है जो धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण में उसका है;
(9) किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका "कारबार में सारवान् हित" है, यदि-
(क) ऐसे किसी मामले में, जहां कारबार किसी कंपनी द्वारा किया जाता है, ऐसा व्यक्ति, वित्तीय वर्ष के दौरान किसी समय, बीस प्रतिशत या अधिक मतदान शक्ति वाले साधारण शेयरों का फायदाग्राही स्वामी है; या
(ख) किसी अन्य मामले में, ऐसा व्यक्ति, वित्तीय वर्ष के दौरान किसी समय, ऐसे कारबार के लाभों के बीस प्रतिशत या अधिक का फायदाप्रद रूप से हकदार है;
(10) "उपाय" के अंतर्गत कोर्इ उपाय या कोर्इ कार्रवार्इ, विशिष्टतया ठहराव में कोर्इ विशिष्ट चीज या वस्तु का व्यवहार करने या उसे प्राप्त करने की पुष्टि से की गर्इ कोर्इ श्रृंखलाबद्ध कार्रवार्इ भी है;
(11) "कर फायदे" से सुसंगत पूर्ववर्ष या किसी अन्य पूर्ववर्ष में-
(क) इस अधिनियम के अधीन संदेय कर या अन्य रकम में कमी या उसका परिवर्जन या आस्थगन;
(ख) इस अधिनियम के अधीन कर या अन्य रकम के प्रतिदाय में कोर्इ वृद्धि; या
(ग) कर या ऐसी अन्य रकम में कमी या उसका परिवर्जन या आस्थगन, जो किसी कर संधि के परिणामस्वरूप इस अधिनियम के अधीन संदेय होती; या
(घ) कर संधि के परिणामस्वरूप इस अधिनियम के अधीन कर या अन्य रकम के प्रतिदाय में कोर्इ वृद्धि; या
(ड़) कुल आय में कमी, जिसके अंतर्गत हानि में बढ़ौतरी भी है,
अभिप्रेत है;
(12) "कर संधि" से धारा 90 की उपधारा (1) या धारा 90क की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ करार अभिप्रेत है;'
1ग. वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2015 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

