अग्रिम मूल्यांकन करार को प्रभावी रूप देना
अग्रिम मूल्यांकन करार को प्रभावी रूप देना
92गघ. (1) धारा 139 में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यक्ति ने कोर्इ करार किया है और करार करने की तारीख के पूर्व, पूर्ववर्ती वर्ष से सुसंगत ऐसे किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, जिसे ऐसा करार लागू होता है, धारा 139 के उपबंधों के अधीन आय की कोर्इ विवरणी प्रस्तुत की गर्इ है, वहां ऐसा व्यक्ति उस मास के, जिसमें उक्त करार किया गया था, अंत में तीन मास की अवधि के भीतर करार के अनुसार और उस तक सीमित एक उपांतरित विवरणी प्रस्तुत करेगा।
(2) इस धारा में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के सभी अन्य उपबंध तदनुसार इस प्रकार लागू होंगे मानो उपांतरित विवरणी धारा 139 के अधीन प्रस्तुत की गर्इ विवरणी है।
(3) यदि किसी पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए, जिसे करार लागू होता है, निर्धारण या पुनर्निर्धारण संबंधी कार्यवाहियां उपधारा (1) के अधीन उपांतरित विवरणी प्रस्तुत करने के लिए अनुज्ञात अवधि के समाप्त होने से पहले पूरी हो चुकी हैं, तो निर्धारण अधिकारी, ऐसे किसी मामले में जहां उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार उपांतरित विवरणी फाइल की जाती है, करार को ध्यान में रखते हुए और उसके अनुसार 9ड़[यथास्थिति, ऐसे निर्धारण या पुन:निर्धारण में अवधारित सुसंगत निर्धारण वर्ष की कुल आय को उपांतरित करते हुए आदेश पारित करेगा]।
(4) जहां उस पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए, जिसे करार लागू होता है, निर्धारण या पुनर्निर्धारण संबंधी कार्यवाहियां, उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार उपांतरित विवरणी फाइल करने की तारीख को लंबित हैं, वहां निर्धारण अधिकारी इस प्रकार प्रस्तुत की गर्इ उपांतरित विवरणी पर विचार करते हुए करार के अनुसार निर्धारण या पुनर्निर्धारण की कार्यवाहियों को पूरा करने की कार्यवाही करेगा।
(5) धारा 153 या धारा 153ख या धारा 144ग में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,—
(क) उपधारा (3) के अधीन 9च[***] आदेश उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें उपधारा (1) के अधीन उपांतरित विवरणी प्रस्तुत की जाती है, अंत से एक वर्ष की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा;
(ख) उपधारा (4) में निर्दिष्ट निर्धारण या पुनर्निर्धारण संबंधी लंबित कार्यवाहियों को पूरा करने के लिए धारा 153 या धारा 153ख या धारा 144ग में यथाउपबंधित परिसीमा काल को बारह मास की अवधि तक बढ़ाया जाएगा।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "करार" से धारा 92गग की उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार अभिप्रेत है;
(ii) किसी निर्धारण वर्ष से संबंधित निर्धारण या पुनर्निर्धारण की कार्यवाहियां उस दशा में पूरी हो गर्इ समझी जाएंगी, जहां—
(क) निर्धारण या पुनर्निर्धारण का कोर्इ आदेश परित किया गया है; या
(ख) उक्त धारा के अधीन उपबंधित परिसीमा काल की समाप्ति तक धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन कोर्इ सूचना जारी नहीं की गर्इ है।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

