आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 90क

दोहरे कराधन राहत के लिए विनिद्रिष्ट संगमों के बीच हुए करारों का केंद्रीय सरकार द्वारा अंगीकार किया जाना

धारा

धारा संख्या

90क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IX - दोहरे कराधान से राहत

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2016

दोहरे कराधन राहत के लिए विनिद्रिष्ट संगमों के बीच हुए करारों का केंद्रीय सरकार द्वारा अंगीकार किया जाना

दोहरे कराधन राहत के लिए विनिद्रिष्ट संगमों के बीच हुए करारों का केंद्रीय सरकार द्वारा अंगीकार किया जाना

64[दोहरे कराधन राहत के लिए विनिद्रिष्ट संगमों के बीच हुए करारों का केंद्रीय सरकार द्वारा अंगीकार किया जाना

90क. (1) भारत में कोर्इ विनिद्रिष्ट संगम भारत के बाहर विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में किसी विनिद्रिष्ट संगम के साथ करार कर सकेगा और केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,–

() निम्नलिखित की बाबत राहत प्रदान करने के लिए,–

(i) ऐसी आय की बाबत, जिस पर इस अधिनियम के अधीन आय-कर और भारत के बाहर किसी विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में आय-कर, दोनों का संदाय कर दिया गया है; या

(ii) पारस्परिक आर्थिक संबंधों, व्यापार और विनिधान के प्रोन्नयन के लिए इस अधिनियम के अधीन और भारत के बाहर उस विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर की बाबत, या

() इस अधिनियम के अधीन और भारत के बाहर उस विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन आय के दोहरे कराधान के परिवर्जन के लिए, या

() इस अधिनियम के अधीन या भारत के बाहर उस विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर के अपवंचन या परिवर्जन को रोकने के लिए या ऐसे अपवंचन या परिवर्जन के मामलों के अन्वेषण के लिए सूचना के आदान-प्रदान के लिए, या

() इस अधिनियम के अधीन और भारत के बाहर उस विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन आय-कर की वसूली के लिए,

ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो ऐसे करार को अंगीकार करने और कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों।

(2) जहां भारत में विनिद्रिष्ट किसी संगम ने उपधारा (1) के अधीन भारत के बाहर किसी विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र के विनिर्दिष्ट किसी संगम के साथ कोर्इ करार किया है और ऐसा करार, यथास्थिति, कर की राहत प्रदान करने या दोहरे कराधान के परिवर्जन के लिए उस उपधारा के अधीन अधिसूचित कर दिया गया है, तो वहां ऐसे निर्धारिती के संबंध में, जिसे ऐसा करार लागू होता है, इस अधिनियम के उपबंध उस सीमा तक लागू होंगे, जहां तक वे उस निर्धारिती के लिए अधिक फायदेमंद हों।

65[(2क) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, अधिनियम के अध्याय 10क के उपबंध निर्धारिती को लागू होंगे, चाहे ऐसे उपबंध उसके लिए फायदाप्रद नहीें है।]

(3) ऐसे किसी पद का, जिसे इस अधिनियम या उपधारा (1) में निद्रिष्ट करार में प्रयुक्त किया गया है किन्तु परिभाषित नहीं किया गया है, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो और जो इस अधिनियम या करार के उपबंधों से असंगत न हो, वही अर्थ होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में जारी अधिसूचना66 में उसका है।

67[(4) ऐसा कोर्इ निर्धारिती, जो निवासी नहीं है, जिसे उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार लागू होता है, ऐसे करार के अंतर्गत तब तक किसी राहत का दावा करने का हकदार नहीं होगा, जब तक उसके द्वारा उसके, भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र के 67क[निवासी होने का प्रमाणपत्र, उस विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र] की सरकार से अभिप्राप्त नहीं कर लिया जाता है।]

67ख[(5) उपधारा (4) में निद्रिष्ट निर्धारिती ऐसे अन्य दस्तावेज और सूचना भी उपलब्ध कराएगा, जो विहित किए जाए।]

स्पष्टीकरण 1–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि भारत के बाहर विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र में निगमित किसी कंपनी की बाबत कर का ऐसी किसी दर से, जिस पर कोर्इ देशी कंपनी प्रभार्य है, उच्चतर दर पर प्रभारण, ऐसी कंपनी की बाबत कम अनुकूल प्रभारण या कर का उद्ग्रहण नहीं समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण 2–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

() "विनिद्रिष्ट संगम" पद से ऐसी कोर्इ संस्था, संगम या निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, अभिप्रेत है, जो भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन या भारत के बाहर विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र की विधियों के अधीन कार्य कर रहा है और जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए उस रूप में अधिसूचित किया जाए;

() "विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र" पद से भारत के बाहर का कोर्इ ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए उस रूप में अधिसूचित किया जाए।]

68[स्पष्टीकरण 3–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां उपधारा (1) के अंतर्गत किए गए किसी करार में किसी पद का प्रयोग किया गया है और वह उक्त करार या अधिनियम के अधीन परिभाषित नहीं है, किन्तु जिसका उपधारा (3) के अधीन जारी की गर्इ अधिसूचना में अर्थ दिया गया है और तदधीन जारी की गर्इ अधिसूचना प्रवृत्त है, वहां उस पद के अर्थ के बारे में यह समझा जाएगा कि वह उस तारीख से प्रभावी है जिसको उक्त करार प्रवृत्त हुआ था।]

 

64. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।

65. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2016 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व विद्यमान उपधारा (2क) वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2013 से उसका लोप किया गया था।

66. देखें सुसंगत अधिसूचना।

67. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।

67क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2013 से "निवासी होने का प्रमाणपत्र, जिसमें ऐसी विशिष्टियां अन्तर्विष्ट हो, जो विहित की जाएं, उस विनिद्रिष्ट राज्यक्षेत्र" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

67ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।

68. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2006 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

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