दोहरे कराधन राहत के लिए विनिर्दिष्ट संगमों के बीच हुए करारों का केंद्रीय सरकार द्वारा अंगीकार किया जाना
62-67[दोहरे कराधन राहत के लिए विनिर्दिष्ट संगमों के बीच हुए करारों का केंद्रीय सरकार द्वारा अंगीकार किया जाना
90क. (1) भारत में कोर्इ विनिर्दिष्ट संगम भारत के बाहर विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में किसी विनिर्दिष्ट संगम के साथ करार कर सकेगा और केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा,–
(क) निम्नलिखित की बाबत राहत प्रदान करने के लिए,–
(i) ऐसी आय की बाबत, जिस पर इस अधिनियम के अधीन आय-कर और भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में आय-कर, दोनों का संदाय कर दिया गया है; या
(ii) पारस्परिक आर्थिक संबंधों, व्यापार और विनिधान के प्रोन्नयन के लिए इस अधिनियम के अधीन और भारत के बाहर उस विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर की बाबत, या
(ख) इस अधिनियम के अधीन और भारत के बाहर उस विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन आय के दोहरे कराधान के परिवर्जन के लिए, या
(ग) इस अधिनियम के अधीन या भारत के बाहर उस विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर के अपवंचन या परिवर्जन को रोकने के लिए या ऐसे अपवंचन या परिवर्जन के मामलों के अन्वेषण के लिए सूचना के आदान-प्रदान के लिए, या
(घ) इस अधिनियम के अधीन और भारत के बाहर उस विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त तत्स्थानी विधि के अधीन आय-कर की वसूली के लिए,
ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो ऐसे करार को अंगीकार करने और कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हों।
(2) जहां भारत में विनिर्दिष्ट किसी संगम ने उपधारा (1) के अधीन भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र के विनिर्दिष्ट किसी संगम के साथ कोर्इ करार किया है और ऐसा करार, यथास्थिति, कर की राहत प्रदान करने या दोहरे कराधान के परिवर्जन के लिए उस उपधारा के अधीन अधिसूचित कर दिया गया है, तो वहां ऐसे निर्धारिती के संबंध में, जिसे ऐसा करार लागू होता है, इस अधिनियम के उपबंध उस सीमा तक लागू होंगे, जहां तक वे उस निर्धारिती के लिए अधिक फायदेमंद हों।
(3) ऐसे किसी पद का, जिसे इस अधिनियम या उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार में प्रयुक्त किया गया है किन्तु परिभाषित नहीं किया गया है, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो और जो इस अधिनियम या करार के उपबंधों से असंगत न हो, वही अर्थ होगा जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में जारी अधिसूचना68 में उसका है।
स्पष्टीकरण 1.–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि भारत के बाहर विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में निगमित किसी कंपनी की बाबत कर का ऐसी किसी दर से, जिस पर कोर्इ देशी कंपनी प्रभार्य है, उच्चतर दर पर प्रभारण, ऐसी कंपनी की बाबत कम अनुकूल प्रभारण या कर का उद्ग्रहण नहीं समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "विनिर्दिष्ट संगम" पद से ऐसी कोर्इ संस्था, संगम या निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, अभिप्रेत है, जो भारत में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन या भारत के बाहर विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र की विधियों के अधीन कार्य कर रहा है और जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए उस रूप में अधिसूचित किया जाए;
(ख) "विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र" पद से भारत के बाहर का कोर्इ ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस धारा के प्रयोजनों के लिए उस रूप में अधिसूचित किया जाए।]
62-67. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
68. सुसंगत अधिसूचना के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

