विदेशी देशों के साथ समझौते
अध्याय 9
दोहरे कराधान से राहत
14[विदेशों से करार
1590. 16[(1)] केन्द्रीय सरकार, भारत से बाहर किसी देश की सरकार से–
(क) ऐसी आय की बाबत राहत के लिए जिस पर इस अधिनियम के अधीन आय-कर और इस देश में आय-कर, दोनों अदा किए जा चुके हैं, या,
वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से धारा 90 की उपधारा (1) के खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएगा :
(क) (i) ऐसी आय की बाबत, जिस पर इस अधिनियम के अधीन आय-कर और उस देश में आय-कर, दोनों का संदाय किया जा चुका है ; या
(ii) पारस्परिक आर्थिक संबंधों, व्यापार और विनिधान के संवर्धन के लिए इस अधिनियम के अधीन और उस देश में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर की बाबत,
राहत के लिए या ;
(ख) इस अधिनियम के अधीन और उस देश में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन आय के दोहरे कराधान से बचने के लिए, या
(ग) इस अधिनियम के अधीन या उस देश में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन प्रभार्य आय-कर के अपवंचन या उससे बचने को रोकने के लिए जानकारी के आदान-प्रदान या ऐसे अपवंचन या कर से बचने के मामलों के अन्वेषण के लिए, या
(घ) इस अधिनियम के अधीन और उस देश में प्रवृत्त तत्समान विधि के अधीन कर की वसूली के लिए,
करार कर सकती है और, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसा उपबंध कर सकती है जो ऐसे करार को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक हो।]
17[(2) जहां केंद्रीय सरकार ने उपधारा (1) के अधीन भारत के बाहर किसी देश की सरकार से, यथास्थिति, कर की राहत देने के लिए या दोहरे कराधान से बचने के लिए करार किया है वहां ऐसे निर्धारिती के संबंध में जिसे ऐसा करार लागू होता है, इस अधिनियम के उपबंध उस सीमा तक लागू होंगे जिस तक वे उस निर्धारिती के लिए अधिक फायदाप्रद है।]
वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से धारा 90 की उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा (3) अंत:स्थापित की जाएगी :
(3) इस अधिनियम या उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार में प्रयुक्त किन्तु परिभाषित न किए गए किसी पद का, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो और जो इस अधिनियम या करार के उपबंधों से ंअसंगत न हो, वही अर्थ होगा जो उसका केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में जारी की गर्इ अधिसूचना में है।
18[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी विदेशी कंपनी की बाबत कर का, उस दर से अधिक दर पर जिस पर कोर्इ देशी कंपनी प्रभार्य है, प्रभार ऐसी विदेशी कंपनी की बाबत कर का कम अनुकूल प्रभार या उद्ग्रहण नहीं समझा जाएगा जहां ऐसी विदेशी कंपनी ने लाभांशों की (जिनके अंतर्गत अधिमानी शेयरों पर लाभांश भी है) जो भारत में उसकी आय में से संदेय है, भारत में घोषणा और भुगतान के लिए विहित व्यवस्था नहीं की है।]
14. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से प्रतिस्थापित।
15. दोहरे कराधान के परिवर्जन के अधिसूचित करारों के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज सरकुलर्स।
परिपत्र सं. 333, तारीख 2.4.1982, परिपत्र सं. 638, तारीख 28.10.1992, परिपत्र सं. 659, तारीख 8.9.1993, परिपत्र सं. 682, तारीख 30.3.1994, परिपत्र सं. 734, तारीख 24.1.1996, परिपत्र सं. 789, तारीख 13.4.2000 और परिपत्र सं. 1/2003, तारीख 10.2.2003 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
देखिये नियम 44छ और 44ज और फार्म 34च.
16. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से पुन: संख्यांकित।
17. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
18. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा संशोधित रूप में]

