आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 9

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी गई आय

धारा

धारा संख्या

9

अध्याय शीर्षक

अध्याय II - कार्यभार के आधार

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी गई आय

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी गई आय

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी गई आय

9. (1) निम्नलिखित आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी जाएगी—

(i) भारत में किसी कारबार सम्पर्क द्वारा या उससे, भारत में किसी संपत्ति के द्वारा या उससे या भारत में किसी आस्ति या आय के स्रोत के द्वारा या उससे या भारत में स्थित पूंजी आस्ति के अंतरण द्वारा, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली आय।

स्पष्टीकरण 1.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() ऐसे कारबार की दशा में 5कक[महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति के कारण भारत में कारबारी संपर्क रखने वाले कारबार से भिन्न] जिसकी सब संक्रियाएं भारत में नहीं की जाती हैं, कारबार की ऐसी आय, जिसके बारे में इस खंड के अधीन यह समझा जाता है कि वह भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई है, उस कारबार की आय का केवल उतना भाग होगी जितना कि भारत में की गई संक्रियाओं से हुआ युक्तियुक्त रूप में माना जा सकता है;

() अनिवासी की दशा में, उसे ऐसी संक्रियाओं के द्वारा या उनसे, जो निर्यात के प्रयोजन के लिए भारत में माल के क्रय तक सीमित हैं, कोई आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी;

() अनिवासी की दशा में, जो ऐसा व्यक्ति है जो समाचार एजेंसी चलाने के या समाचार पत्र, मैगजीन या पत्रिकाओं के प्रकाशन के कारबार में लगा हुआ है, उसे ऐसे क्रियाकलापों के द्वारा या उनसे, जो भारत से बाहर पारेषण के लिए भारत में समाचार और विचार एकत्र करने तक सीमित हैं, कोई आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी;

() अनिवासी की दशा में जो—

(1) ऐसा व्यष्टि है जो भारत का नागरिक नहीं है; या

(2) ऐसी फर्म है जिसका कोई भागीदार भारत का नागरिक या भारत में निवासी नहीं है; या

(3) ऐसी कंपनी है जिसका कोई शेयरधारक भारत का नागरिक या भारत में निवासी नहीं है,

ऐसे व्यष्टि, फर्म या कंपनी की ऐसी संक्रियाओं के द्वारा या उनसे, जो भारत में किसी चलचित्र फिल्म की शूटिंग तक सीमित हैं, कोई आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी।

() हीरों के खनन के कारबार में लगी किसी विदेशी कंपनी की दशा में कोई आय ऐसे क्रियाकलापों के माध्यम से या क्रियाकलापों से जो केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित किसी विशेष जोन में बिना कटे और बिना छंटे हीरे के प्रदर्शन तक सीमित हैं, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी।

स्पष्टीकरण 2.—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि "कारबार सम्पर्क" के अंतर्गत ऐसा कोई कारबारी क्रियाकलाप सम्मिलित होगा जो अनिवासी की ओर से कार्य करते हुए किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है,—

5ख[(क) भारत में संविदाओं को अंतिम रूप देने का प्राधिकार है और वह अभ्यासत: उसका प्रयोग करता है या अभ्यासत: संविदाओं को अंतिम रूप देता है या अनिवासी द्वारा संविदाओं को अंतिम रूप देने में अभ्यासत: मुख्य भूमिका का निर्वाह करता है और ये संविदाएं—

(i) अनिवासी के नाम से है; या

(ii) उस अनिवासी के स्वामित्वाधीन संपत्ति के अंतरण के लिए या संपत्ति में उस अनिवासी के उपयोग के अधिकार को अनुदत्त करने के लिए हैं; या

(iii) अनिवासी द्वारा सेवाओं का उपबंध करने के लिए हैं; या]

() जिसे ऐसा कोई प्राधिकार नहीं है, किन्तु वह माल या वाणिज्या का भारत में अभ्यासत: स्टाक रखता है जिसमें से वह अनिवासी की ओर से माल या वाणिज्या नियमित रूप से परिदान करता है ; या

() जो भारत में अभ्यासत: अनिवासी के लिए या उस अनिवासी और अन्य अनिवासियों के लिए, जो उसी प्रकार नियंत्रण करते हैं या उसी प्रकार नियंत्रित होते हैं या उसी समान नियंत्रण के अधीन हैं जैसे कि वह अनिवासी है, मुख्य रूप से या पूर्ण रूप से आदेश प्राप्त करता है :

परंतु यह कि ऐसे कारबारी संपर्क में किसी दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या ऐसे किसी अन्य अभिकर्ता द्वारा, जिसकी अपनी अलग प्रास्थिति है, किया जाने वाला कोई कारबार क्रियाकलाप नहीं आएगा यदि ऐसा दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या कोई अन्य अभिकर्ता, जिसकी अपनी अलग प्रास्थिति है, उसके कारबार के साधारण अनुक्रम में कार्य कर रहा है :

परन्तु यह और कि जहां ऐसा दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या कोई अन्य अभिकर्ता मुख्य रूप से या पूर्ण रूप से किसी अनिवासी की ओर से (जिसे इस परन्तुक में इसके पश्चात् प्रधान अनिवासी कहा गया है) या ऐसे अनिवासी और अन्य अनिवासियों की ओर से, जो प्रधान अनिवासी द्वारा नियंत्रित हैं या प्रधान अनिवासी में नियंत्रणकारी हित रखते हैं या प्रधान अनिवासी के रूप में एक जैसा समान नियंत्रण के अध्यधीन हैं, कार्य करता है वहां वह दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या अलग प्रास्थिति वाला अभिकर्ता नहीं समझा जाएगा।

5खक[ स्पष्टीकरण 2क [***]

वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2022 से धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (i) के स्पष्टीकरण 2क को अंतःस्थापित किया जायगा

स्पष्टीकरण 2क—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि भारत में अनिवासी की महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति, भारत में ''कारबारी संपर्क'' गठित करेगी और इस प्रयोजन के लिए ''महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति'' से निम्नलिखित अभिप्रेत होगा—

() भारत में किसी अनिवासी द्वारा किसी माल, सेवाएं या संपत्ति के संबंध में किसी व्यक्ति के साथ किया गया कोई संव्यवहार जिसके अंतर्गत भारत में डाटा या साफ्टवेयर को डाउनलोड करने की व्यवस्था भी है, यदि, पूर्ववर्ष के दौरान ऐसे संव्यवहार या संव्यवहारों से उत्पन्न कुल संदाय ऐसी रकम से अधिक है, जो विहित की जाए; या

() भारत में कारबार क्रियाकलापों का क्रमबद्ध और निरंतर निवेदन करना या उपभोक्ताओं की ऐसी संख्या के साथ इंटरएक्शन करवाना, जो विहित की जाए:

परंतु, संव्यवहार या क्रियाकलाप भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति गठित करेंगे, चाहे—

(i) ऐसे संव्यवहारों या क्रियाकलापों के लिए करार भारत में किया गया है, अथवा नहीं, या

(ii) अनिवासी के पास भारत में कोई निवास-स्थान या कारबार का स्थान है अथवा नहीं; या

(iii) अनिवासी भारत में सेवाएं प्रदान करता है अथवा नहीं:

परंतु यह और कि केवल ऐसी आय का उतना भाग जितना खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट संव्यवहारों या क्रियाकलापों से हुआ माना जा सकता है, भारत में प्रोदभूत या उदभूत हुआ समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण 3.—जहां कोई कारबार स्पष्टीकरण 2 के खंड () या खंड () या खंड () में निर्दिष्ट व्यक्ति के माèयम से भारत में किया जाता है, वहां केवल उतनी आय, जो भारत में की गई संक्रियाओं से संबंधित हो, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत आय समझी जाएगी।

5ग[स्पष्टीकरण 3क—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि, स्पष्टीकरण 1 में यथानिर्दिष्ट भारत में की गई संक्रियाओं से हुई मानी जा सकने वाली आय में, निम्नलिखित आय सम्मिलित होगी—

(i) ऐसे विज्ञापन से आय, जिसका लक्ष्य ऐसा ग्राहक है, जो भारत में निवास करता है या ऐसा ग्राहक है जिसकी भारत में अवस्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल पते के माध्यम से विज्ञापन तक पहुंच है;

(ii) ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में निवास करता है या ऐसे व्यक्ति से जो भारत में अवस्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल पते का उपयोग करता है, एकत्रित डाटा के विक्रय से आय; और

(iii) ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में निवास करता है या ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में अवस्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल पते का उपयोग करता है, एकत्रित डाटा का उपयोग करते हुए माल या सेवाओं के विक्रय से आय।;]

वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2022 से धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (i) के स्पष्टीकरण 3क के पश्चात् परन्तुक अंतःस्थापित किया जायगा

परंतु इस स्पष्टीकरण में अंतर्विष्ट उपबंध स्पष्टीकरण 2क में निर्दिष्ट संव्यवहारों या क्रियाकलापों से हुई मानी जा सकने वाली आय को भी लागू होंगे।;

स्पष्टीकरण 4.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "के द्वारा" अभिव्यक्ति से, "के साधनों द्वारा", "के परिणामस्वरूप" या "के कारण" अभिप्रेत है और ये उसमें सम्मिलित हैं तथा उसके बारे में यह समझा जाएगा कि वे सदैव से अभिप्रेत हैं और उसके अंतर्गत सम्मिलित हैं।

स्पष्टीकरण 5.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि भारत के बाहर रजिस्ट्रीकृत या निगमित किसी कंपनी या एकक में की किसी आस्ति या पूंजी आस्ति के बारे में, जो कोई शेयर या हित है, यह समझा जाएगा और सदैव से यह समझा जाएगा कि वह भारत में स्थित है, यदि वे शेयर या हित अपना मूल्य प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से सारवान् रूप से भारत में अवस्थित आस्तियों से व्युत्पन्न कर लेता है:

6[परंतु इस स्पष्टीकरण में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसी आस्ति या पूंजी आस्ति को लागू नहीं होगी, जो किसी अनिवासी द्वारा 1 अप्रैल, 2012 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 अप्रैल, 2015 से पहले प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 115कघ के स्पष्टीकरण के खंड () में यथानिर्दिष्ट किसी विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता में प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: विनिधान के रूप में धारित की गई है:]

7[परंतु यह और कि इस स्पष्टीकरण में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसी आस्ति या पूंजी आस्ति को लागू नहीं होगी, जो किसी अनिवासी द्वारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता) विनिमय, 2014 के 7क[निरसन से पूर्व इसके] अधीन प्रवर्ग-I या प्रवर्ग-II विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता में प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: विनिधान के रूप में धारित की गई है।]

7कक[परंतु यह भी कि इस स्पष्टीकण में अंतविष्ट कोई बात किसी ऐसी आस्ति या पूंजी आस्ति को लागू नहीं होगी जो किसी अनिवासी द्वारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता) विनियम, 2019 के अधीन प्रवर्ग 1 के अधीन विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता में प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: विनिधान के रूप में धरित की गई है।;]

स्पष्टीकरण 6.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह घोषित किया जाता है कि,—

() स्पष्टीकरण 5 में निर्दिष्ट शेयर या हित का, भारत में अवस्थित आस्तियों से (चाहे मूर्त हो या अमूर्त) अपना मूल्य सारत: प्राप्त करना समझा जाएगा यदि विनिर्दिष्ट तारीख को ऐसी आस्तियों का मूल्य,—

(i) दस करोड़ रुपए की रकम से अधिक हो जाता है; और

(ii) यथास्थिति, कंपनी या सत्ता के स्वामित्वाधीन सभी आस्तियों के मूल्य का कम से कम पचास प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती है;

() किसी आस्ति का उचित बाजार मूल्य आस्ति के संबंध में दायित्वों को, यदि कोई हों, घटाए बिना ऐसी आस्ति का विनिर्दिष्ट तारीख को ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अवधारित उचित बाजार मूल्य होगा;

() "लेखा कालावधि" से 31 मार्च को समाप्त होने वाले बारह मास की प्रत्येक अवधि अभिप्रेत है:

परंतु जहां स्पष्टीकरण 5 में निर्दिष्ट कोई कंपनी या सत्ता निम्नलिखित प्रयोजन के लिए नियमित रूप से 31 मार्च से भिन्न किसी अन्य दिवस को समाप्त होने वाली बारह मास की अवधि अपनाती हैं,

(i) उस राज्यक्षेत्र की कर विधियों के उपबंधों के अनुपालन में, जिसका वह कर प्रयोजनों के लिए निवासी है; या

(ii) शेयर या हित धारण करने वाले व्यक्तियों को रिपोर्ट करने के लिए,

अन्य दिवस को समाप्त होने वाली बारह मास की अवधि, यथास्थिति, कंपनी या सत्ता की लेखा कालावधि होगी :

परंतु यह और कि, यथास्थिति, कंपनी या सत्ता की प्रथम लेखा कालावधि इसके रजिस्ट्रीकरण या निगमन की तारीख से प्रारंभ होगी और ऐसे रजिस्ट्रीकरण या निगमन की तारीख के पश्चात्, यथास्थिति, 31 मार्च या किसी अन्य दिवस को समाप्त होगी, और बाद वाली लेखा कालावधि बारह मास की आनुक्रमिक अवधियां होंगी:

परंतु यह भी कि यदि कंपनी या अस्तित्व, उपरोक्तानुसार, लेखा कालावधि के समाप्त होने के पूर्व अस्तित्व में न रहे तो लेखा कालावधि, यथास्थिति, कंपनी या सत्ता के अस्तित्व में न रहने के तुरंत पूर्व समाप्त हो जाएगी।

() "विनिर्दिष्ट तारीख" से,—

(i) ऐसी तारीख अभिप्रेत है, जिसको, यथास्थिति, कंपनी या सत्ता की लेखा कालावधि किसी शेयर या हित के अंतरण की तारीख के पूर्व समाप्त होती है; या

(ii) अंतरण की तारीख अभिप्रेत है, यदि, अंतरण की तारीख को, यथास्थिति, कंपनी या सत्ता का बही मूल्य उपखंड (i) में निर्दिष्ट तारीख को आस्तियों के बही मूल्य से पन्द्रह प्रतिशत से अधिक हो जाता है:

स्पष्टीकरण 7.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() कोई आय, स्पष्टीकरण 5 में निर्दिष्ट भारत के बाहर रजिस्ट्रीकृत या निगमित किसी कंपनी या सत्ता के किसी शेयर या उसमें किसी हित से भारत के बाहर अंतरण से किसी अनिवासी को प्रोद्भूत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी,—

(i) यदि भारत में स्थित आस्तियां प्रत्यक्षत: ऐसी कंपनी या सत्ता के स्वामित्वाधीन हैं और अंतरक (चाहे व्यष्टिक रूप से या अपने सहयुक्त उद्यमों के साथ), अंतरण की तारीख से पूर्व बारह मास में किसी भी समय, यथास्थिति, ऐसी कंपनी या सत्ता के संबंध में, न तो प्रबंध या नियंत्रण का अधिकार धारित करता है और न ही ऐसी कंपनी या सत्ता की कुल मतदान शक्ति या कुल शेयर पूंजी या कुल हित के पांच प्रतिशत से अधिक मतदान शक्ति या शेयर पूंजी या हित धारित करता है; या

(ii) यदि भारत में स्थित आस्तियां अप्रत्यक्षत: ऐसी कंपनी या अस्तित्व के स्वामित्व में हैं और अंतरक (चाहे व्यष्टिक रूप से या अपने सहयुक्त उद्यम के साथ) अंतरण की तारीख से पूर्व बारह मास में किसी भी समय, यथास्थिति, ऐसी कंपनी या सत्ता के संबंध में न तो प्रबंध या नियंत्रण का अधिकार धारित करता है और न ही ऐसी कंपनी या सत्ता में या उनके संबध में कोई ऐसा अधिकार धारित करता है जो उसे ऐसी कंपनी या सत्ता में प्रबंध या नियंत्रण के अधिकार का हकदार बनाएगी जिसकी भारत में स्थित आस्तियां प्रत्यक्षत: उसके स्वामित्व में हों और न ही ऐसी कंपनी या सत्ता में मतदान शक्ति या शेयर पूंजी या हित की ऐसी प्रतिशतता धारित करता हो जिसका परिणाम, यथास्थिति, उस कंपनी या सत्ता की कुल मतदान शक्ति या कुल शेयर पूंजी या कुल हित के पांच प्रतिशत से अधिक मतदान शक्ति या शेयर पूंजी या हित धारित करता है जो प्रत्यक्षत: भारत में स्थित आस्तियों की स्वामी हो।

() उस दशा में, जहां स्पष्टीकरण 5 में निर्दिष्ट, यथास्थिति, कंपनी या सत्ता के प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: स्वामित्वाधीन सभी आस्तियां भारत में स्थित न हों, इस खंड के अधीन ऐसी कंपनी या सत्ता के भारत के बाहर किसी शेयर या उसमें के हित के अंतरण से भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत समझी गई अनिवासी अंतरक की आय का केवल ऐसा भाग आय होगी जो भारत में अवस्थित आस्तियों का होना युक्तियुक्त रूप से मानी जा सकती हो और ऐसी रीति से अवधारित की जाएगी जो विहित की जाए;

() "सहयुक्त उद्यम" का वही अर्थ होगा जो धारा 92क में उसका है;

(ii) ऐसी आय जो "वेतन" शीर्ष के अधीन आती है, यदि वह भारत में उपार्जित की जाती है।

स्पष्टीकरण.शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस खंड में निर्दिष्ट प्रकृति की आय—

() जो भारत में की गई सेवा के लिए संदेय हो; और

() जो भारत में की गई सेवा की पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती विश्राम अवधि या छुट्टी अवधि जो नियोजन की सेवा संविदा का भाग हो, के लिए संदेय हो,

भारत में उपार्जित आय समझी जाएगी;

(iii) "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य ऐसी आय जो भारत के बाहर सेवा के लिए भारत के किसी नागरिक को सरकार द्वारा संदेय हो;

(iv) ऐसा लाभांश जिसका किसी भारतीय कंपनी द्वारा भारत के बाहर भुगतान किया गया हो;

(v) निम्नलिखित द्वारा भुगतान योग्य ब्याज के रूप में आय, अर्थात् :—

() सरकार द्वारा; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो निवासी है, उस दशा के सिवाय जब ब्याज ऐसे ऋण या ऐसे धन की बाबत भुगतान योग्य है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए या भारत के बाहर किसी स्रोत से कोई आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए उपगत किया गया है या उधार लिया गया और उपयोग किया गया है; या

(ग) ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो अनिवासी है, उस दशा में जब ब्याज, ऐसे ऋण या ऐसे धन की बाबत भुगतान योग्य है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत में चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए उपगत किया गया है, या उधार लिया गया है और उपयोग किया गया है ;

स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() यह घोषित किया जाता है कि किसी अनिवासी की दशा में, जो बैंककारी कारबार में लगा कोई व्यक्ति है, ऐसे अनिवासी के भारत में के स्थायी स्थापन द्वारा ऐसे अनिवासी के भारत के बाहर के प्रधान कार्यालय या उसके किसी स्थायी स्थापन या किसी अन्य भाग को संदेय कोई ब्याज भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुआ समझा जाएगा और वह भारत में के स्थायी स्थापन को हुई मानी जा सकने वाली किसी आय के अतिरिक्त कर से प्रभार्य होगी और भारत में के स्थायी स्थापन को उस अनिवासी व्यक्ति से पृथक् और स्वतंत्र व्यक्ति समझा जाएगा जिसका कि वह स्थायी स्थापन है और तद्नुसार कुल आय की संगणना, कर के अवधारण और संग्रहण तथा वसूली से संबंधित अधिनियम के उपबंध लागू होंगे;

() "स्थायी स्थापन" का वही अर्थ होगा जो धारा 92च के खंड (iiiक) में उसका है;

(vi) निम्नलिखित द्वारा संदेय स्वामिस्व के रूप में आय—

() सरकार द्वारा; या

() ऐसे व्यक्ति द्वारा जो निवासी है उस दशा के सिवाय जब स्वामिस्व ऐसे अधिकार, संपत्ति या प्रयुक्त जानकारी या उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए है या भारत से बाहर किसी स्रोत से कोई आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए है; या

() ऐसे व्यक्ति द्वारा व्यक्ति जो अनिवासी है, उस दशा में जब स्वामिस्व किसी ऐसे अधिकार, संपत्ति या प्रयुक्त जानकारी या उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत में चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए है या भारत में किसी स्रोत से कोई आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए है:

परन्तु इस खंड की कोई बात स्वामिस्व के रूप में आय के उतने भाग के संबंध में जो किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति के बारे में किसी डाटा, दस्तावेजीकरण, रेखांकन या विनिर्देश के भारत के बाहर अन्तरण के लिए या उनके संबंध में भारत के बाहर कोई जानकारी देने के लिए एकमुश्त प्रतिफल के रूप में है, उस दशा में लागू नहीं होगी जिसमें ऐसी आय 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किए गए किसी करार के अनुसरण में भुगतान योग्य है और ऐसे करार का केन्द्रीय सरकार ने अनुमोदन कर दिया है:

परन्तु यह और कि इस खंड की कोई बात स्वामिस्व के रूप में आय के उतने भाग के संबंध में लागू नहीं होगी जो भारत सरकार की कंप्यूटर प्रक्रिया सामग्री निर्यात, प्रक्रिया सामग्री विकास और प्रशिक्षण नीति, 1986 के अधीन अनुमोदित किसी स्कीम के अधीन कंप्यूटर या कंप्यूटर आधारित उपस्कर के साथ किसी अनिवासी विनिर्माता द्वारा दी गई कंप्यूटर प्रक्रिया सामग्री की बाबत सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अन्तर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के लिए किसी व्यक्ति द्वारा, जो निवासी है, एकमुश्त संदाय के रूप में है।

स्पष्टीकरण 1.पहले परन्तुक के प्रयोजनों के लिए 1 अप्रैल, 1976 को या उसके पश्चात् किया गया कोई करार उस तारीख के पूर्व केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित प्रस्थापनों के अनुसार किया गया है; किन्तु जहां स्वामिस्व के रूप में आय का प्राप्तिकर्ता कोई विदेशी कंपनी है वहां वह करार तब तक उस तारीख के पूर्व किया गया नहीं समझा जाएगा जब तक कि 1 अप्रैल, 1977 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसके संबंध में ऐसी आय इस अधिनियम के अधीन पहली बार कर योग्य होती है, इनमें जो भी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है, आय की विवरणी देने के लिए धारा 139 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञात समय की (चाहे वह मूलत: या बढ़ाकर नियत किया गया हो) समाप्ति के पूर्व, ऐसी कंपनी निर्धारण अधिकारी को लिखित रूप में यह घोषणा प्रस्तुत करके विकल्प का (ऐसा विकल्प उस निर्धारण वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए अंतिम होगा) प्रयोग नहीं करता है कि ऐसा करार 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया करार समझा जाए।

स्पष्टीकरण 2.इस खंड के प्रयोजनों के लिए "स्वामिस्व" से निम्नलिखित ऐसा प्रतिफल अभिप्रेत है (जिसके अंतर्गत एकमुश्त प्रतिफल भी है किंतु वह प्रतिफल नहीं है जो प्राप्तिकर्ता को "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय हो), अर्थात् :—

(i) किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया, या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति के संबंध में सब या किन्हीं अधिकारों का अंतरण (जिसके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना भी है);

(ii) किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति के कार्यकरण या उपयोग के संबंध में कोई जानकारी देना;

(iii) किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति का उपयोग;

(iv) तकनीकी, औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक ज्ञान, अनुभव या कौशल के संबंध में कोई जानकारी देना;

(ivक) किसी औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक उपस्कर का उपयोग या उपयोग करने का अधिकार किंतु इसमें धारा 44खख में निर्दिष्ट राशियां सम्मिलित नहीं हैं;

(v) किसी प्रतिलिप्याधिकार, साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक कृति के, जिसके अन्तर्गत दूरदर्शन से संबंधित उपयोग के लिए फिल्म, वीडियो टेप अथवा रेडियो प्रसारण से संबंधित उपयोग के लिए टेप भी है, के संबंध में सब या किन्हीं अधिकारों का अंतरण (जिसके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना भी है) 7ख[***]; या

(vi) उपखंड (i) से (iv), (ivक) और उपखंड (v) तक में उल्लिखित क्रियाकलापों के संबंध में कोई सेवाएं करना।

स्पष्टीकरण 3.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए "कम्प्यूटर साफ्टवेयर" से किसी डिस्क, टेप, छिद्रित माध्यम या अन्य सूचना संग्रह युक्ति पर रिकार्ड किया गया कोई कंप्यूटर कार्यक्रम, जिसके अंतर्गत कोई ऐसा कार्यक्रम या कोई ग्राहक अपेक्षित इलैक्ट्रोनिक डाटा भी है, अभिप्रेत है;

स्पष्टीकरण 4.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि किसी अधिकार, संपत्ति या जानकारी के बारे में सभी या किन्हीं अधिकारों के अंतरण के अंतर्गत उपयोग संबंधी सभी या किसी अधिकार या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के उपयोग के (जिसके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना भी है) अधिकार का अंतरण, उस माध्यम पर विचार किए बिना जिसके माध्यम से ऐसा अधिकार अंतरित किया जाता है, सम्मिलित है और सदैव से सम्मिलित है।

स्पष्टीकरण 5.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि स्वामिस्व के अंतर्गत किसी ऐसे अधिकार, संपत्ति या जानकारी की बाबत प्रतिफल सम्मिलित है और सदैव से सम्मिलित है, चाहे—

() ऐसे अधिकार, संपत्ति या जानकारी का कब्जा या नियंत्रण संदायकर्ता के पास है या नहीं;

() ऐसे अधिकार, संपत्ति या जानकारी का संदायकर्ता द्वारा प्रत्यक्षत: प्रयोग किया जाता है या नहीं;

() ऐसे अधिकार, संपत्ति या जानकारी का अवस्थान भारत में है या नहीं।

स्पष्टीकरण 6.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "प्रक्रिया" पद के अंतर्गत सेटेलाइट (जिसके अंतर्गत किसी सिग्नल की डाउनलिंकिंग के लिए अपलिंकिंग, एमप्लिफिकेशन, संपरिवर्तन भी है), केबल, आप्टिक फाइबर द्वारा या किसी अन्य वैसी ही प्रौद्योगिकी द्वारा पारेषण सम्मिलित है और सदैव से सम्मिलित समझा जाएगा, चाहे ऐसी प्रक्रिया गोपनीय हो या नहीं;

(vii) निम्नलिखित द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस के रूप में आय, अर्थात्:—

() सरकार द्वारा; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो निवासी है, उस दशा के सिवाय जब फीस ऐसे व्यक्तियों द्वारा भारत से बाहर चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति में भारत से बाहर किसी स्रोत से आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो अनिवासी है, उस दशा में जब फीस ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत में चलाए जाने वाले किसी कारबार या वृत्ति में या भारत में किसी स्रोत से आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है:

परन्तु इस खंड की कोई बात 1 अप्रैल, 1976 के पहले किए गए और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार के अनुसरण में संदेय तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय के संबंध में लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण 1.—पूर्वगामी परन्तुक के प्रयोजनों के लिए 1 अप्रैल, 1976 को या उसके पश्चात् किया गया कोई करार उस तारीख के पहले किया गया करार समझा जाएगा यदि करार ऐसी प्रस्थापनाओं के अनुसरण में किया जाता है जिनका केन्द्रीय सरकार ने उस तारीख के पहले अनुमोदन कर दिया है।

स्पष्टीकरण 2.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" से कोई प्रबंधकीय, तकनीकी, या परामर्श सेवाएं करने के लिए (जिसके अंतर्गत तकनीकी या परामर्श सेवाओं की व्यवस्था भी है) प्रतिफल अभिप्रेत है, जिसमें एकमुश्त प्रतिफल भी है किंतु इसमें किसी सन्निर्माण, समुच्चय, खनन या इसी प्रकार की किसी परियोजना के लिए प्रतिफल नहीं है जिसके लिए प्राप्तिकर्ता द्वारा वचनबद्ध किया गया है या वह प्रतिफल भी नहीं है जो "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य प्राप्तिकर्ता की आय हो।

7ग[(viii) भारत से बाहर उद्भूत होने वाली कोई आय, जो धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (xviiक) में निर्दिष्ट कोई धनराशि है, जिसे 5 जुलाई, 2019 को या उसके पश्चात् भारत में निवासी किसी व्यक्ति द्वारा किसी अनिवासी को, जो कंपनी या कोई विदेशी कंपनी नहीं है, संदत्त किया गया है।]

(2) उपधारा (1) में की किसी बात के होते हुए भी, ऐसी पेंशन जो भारत के बाहर स्थायी रूप से निवास करने वाले किसी व्यक्ति को भारत के बाहर भुगतान योग्य हो, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई नहीं समझी जाएगी यदि ऐसी पेंशन संविधान के अनुच्छेद 314 में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को दी जानी हो या ऐसे व्यक्ति को दी जानी हो जो भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अर्थ में फेडरल न्यायालय का या किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश 15 अगस्त, 1947 के पूर्व नियुक्त किया गया था और संविधान के प्रारम्भ होने पर या उसके पश्चात् भारत में न्यायाधीश के रूप में सेवा करता रहा है।

स्पष्टीकरण—शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी अनिवासी की आय उपधारा (1) के खंड (v) या खंड (vi) या खंड (vii) के अधीन भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी जाएगी और ऐसे अनिवासी की कुल आय में शामिल की जाएगी, चाहे,—

(i) उस अनिवासी का भारत में कोई निवास या कारबार का स्थान या कारोबार संपर्क हो अथवा नहीं; या

(ii) उस अनिवासी ने भारत में सेवाएं प्रदान की हों अथवा नहीं।

 

5ग. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से अंतःस्थापित।

5कक.  इटैलिक में दिए गए शब्द वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2022 से अंत:स्थापित किया जाएगा ।

5ख. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से प्रतिस्थापित ।

5खक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से लोप किया गया। लोप से पूर्व वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से अंत:स्थापित जो निम्न प्रकार था।

"[स्पष्टीकरण 2क.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि भारत में किसी अनिवासी की महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति, भारत में अनिवासी के "कारबारी संपर्क" सम्मिलित करेगी और इस प्रयोजन के लिए "महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति" से अभिप्रेत है—

() भारत में किसी अनिवासी द्वारा किसी माल, सेवाओं या संपत्ति के संबंध में किया गया कोई संव्यवहार, जिसके अंतर्गत भारत में डाटा या साफ्टवेयर को डाउनलोड करने की व्यवस्था भी है, यदि ऐसे संव्यवहार या पूर्ववर्ष के दौरान संव्यवहारों से उत्पन्न कुल संदाय ऐसी रकम से अधिक हो, जो विहित की जाए; या

() अपने कारबार क्रियाकलापों का क्रमिक और निरंतर निवेदन करना या भारत में उपयोक्ताओं की ऐसी संख्या के साथ डिजीटल साधनों से इंटरएक्शन करवाना, जो विहित की जाए:

परंतु संव्यवहार या क्रियाकलाप भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति दर्शित करेंगे, चाहे,—

(i) ऐसे संव्यवहार या क्रियाकलाप के लिए करार भारत में किया गया है अथवा नहीं; या

(ii) अनिवासी के पास भारत में कोई निवास स्थान या कारबार का स्थान है अथवा नहीं;

(iii) अनिवासी भारत में सेवाएं प्रदान करता है अथवा नहीं:

परंतु यह और कि केवल ऐसी आय, जो खंड () या खंड () में निर्दिष्ट संव्यवहारों या क्रियाकलाप से हुई मानी जा सकती हो, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुई समझी जाएगी।"

6. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2012 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

7. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2015 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

7क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

7कक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1-4-2020 से अंत:स्थापित।

7ख. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से "किंतु जिसके अंतर्गत सिनेमा फिल्मों के विक्रय, वितरण या प्रदर्शन के लिए प्रतिफल नहीं है" शब्दों को लोप किया गया।

7ग. वित्त (स. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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