आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 9

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी गर्इ आय

धारा

धारा संख्या

9

अध्याय शीर्षक

अध्याय II - कार्यभार के आधार

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2010

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी गर्इ आय

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी गर्इ आय

भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी गर्इ आय

519. 52(1) निम्नलिखित आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी जाएगी53

54(i) भारत में किसी कारबार सम्पर्क55 द्वारा या उससे, भारत में किसी संपत्ति55 के द्वारा या उससे या भारत में किसी आस्ति या आय के स्रोत के द्वारा या उससे 56[***] या भारत में स्थित पूंजी आस्ति के अंतरण द्वारा, चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली आय।

57[स्पष्टीकरण 1]इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() ऐसे कारबार की दशा में जिसकी सब संक्रियाएं58 भारत में नहीं की जाती हैं, कारबार की ऐसी आय, जिसके बारे में इस खंड के अधीन यह समझा जाता है कि वह भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ है, उस कारबार की आय का केवल उतना भाग होगी जितना कि भारत में की गर्इ संक्रियाओं58 से हुआ युक्तियुक्त रूप में माना जा सकता है;

() अनिवासी की दशा में, उसे ऐसी संक्रियाओं के द्वारा या उनसे, जो निर्यात के प्रयोजन के लिए भारत में माल के क्रय तक सीमित हैं, कोर्इ आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ नहीं समझी जाएगी;

59[* * *]

60[() अनिवासी की दशा में, जो ऐसा व्यक्ति है जो समाचार एजेंसी चलाने के या समाचार पत्र, मैगजीन या पत्रिकाओं के प्रकाशन के कारबार में लगा हुआ है, उसे ऐसे क्रियाकलापों के द्वारा या उनसे, जो भारत से बाहर पारेषण के लिए भारत में समाचार और विचार एकत्र करने तक सीमित हैं, कोर्इ आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ नहीं समझी जाएगी;]

61[() अनिवासी की दशा में जो–

(1) ऐसा व्यष्टि है जो भारत का नागरिक नहीं है; या

(2) ऐसी फर्म है जिसका कोर्इ भागीदार भारत का नागरिक या भारत में निवासी नहीं है; या

(3) ऐसी कंपनी है जिसका कोर्इ शेयरधारक भारत का नागरिक या भारत में निवासी नहीं है,

ऐसे व्यष्टि, फर्म या कंपनी की ऐसी संक्रियाओं62 के द्वारा या उनसे, जो भारत में किसी चलचित्र फिल्म की शूटिंग तक सीमित हैं, कोर्इ आय भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ नहीं समझी जाएगी।]

63[स्पष्टीकरण 2–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि "कारबार सम्पर्क" के अंतर्गत ऐसा कोर्इ कारबारी क्रियाकलाप सम्मिलित होगा जो अनिवासी की ओर से कार्य करते हुए किसी व्यक्ति द्वारा किया जाता है,–

() जिसे अनिवासी की ओर से संविदाओं को अंतिम रूप देने का प्राधिकार प्राप्त है और भारत में अभ्यासत: उसका प्रयोग करता है जब तक कि उसके क्रियाकलाप अनिवासी के लिए माल या वाणिज्या के क्रय तक सीमित न हों; या

() जिसे ऐसा कोर्इ प्राधिकार नहीं है, किन्तु वह माल या वाणिज्या का भारत में अभ्यासत: स्टाक रखता है जिसमें से वह अनिवासी की ओर से माल या वाणिज्या नियमित रूप से परिदान करता है ; या

() जो भारत में अभ्यासत: अनिवासी के लिए या उस अनिवासी और अन्य अनिवासियों के लिए, जो उसी प्रकार नियंत्रण करते हैं या उसी प्रकार नियंत्रित होते हैं या उसी समान नियंत्रण के अधीन हैं जैसे कि वह अनिवासी है, मुख्य रूप से या पूर्ण रूप से आदेश प्राप्त करता है :

परंतु यह कि ऐसे कारबारी संपर्क में किसी दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या ऐसे किसी अन्य अभिकर्ता द्वारा, जिसकी अपनी अलग प्रास्थिति है, किया जाने वाला कोर्इ कारबार क्रियाकलाप नहीं आएगा यदि ऐसा दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या कोर्इ अन्य अभिकर्ता, जिसकी अपनी अलग प्रास्थिति है, उसके कारबार के साधारण अनुक्रम में कार्य कर रहा है :

परन्तु यह और कि जहां ऐसा दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या कोर्इ अन्य अभिकर्ता मुख्य रूप से या पूर्ण रूप से किसी अनिवासी की ओर से (जिसे इस परन्तुक में इसके पश्चात् प्रधान अनिवासी कहा गया है) या ऐसे अनिवासी और अन्य अनिवासियों की ओर से, जो प्रधान अनिवासी द्वारा नियंत्रित हैं या प्रधान अनिवासी में नियंत्रणकारी हित रखते हैं या प्रधान अनिवासी के रूप में एक जैसा समान नियंत्रण के अध्यधीन हैं, कार्य करता है वहां वह दलाल, साधारण कमीशन अभिकर्ता या अलग प्रास्थिति वाला अभिकर्ता नहीं समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण 3जहां कोर्इ कारबार स्पष्टीकरण 2 के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) में निर्दिष्ट व्यक्ति के माध्यम से भारत में किया जाता है, वहां केवल उतनी आय, जो भारत में की गर्इ संक्रियाओं से संबंधित हो, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत आय समझी जाएगी।]

(ii) ऐसी आय जो "वेतन" शीर्ष के अधीन आती है, यदि वह भारत में उपार्जित64 की जाती है।

65[स्पष्टीकरण.शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस खंड में निर्दिष्ट प्रकृति की आय–

() जो भारत में की गर्इ सेवा के लिए संदेय हो; और

() जो भारत में की गर्इ सेवा की पूर्ववर्ती या पश्चात्वर्ती विश्राम अवधि या छुट्टी अवधि जो नियोजन की सेवा संविदा का भाग हो, के लिए संदेय हो,

भारत में उपार्जित आय समझी जाएगी;]

(iii) "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य ऐसी आय जो भारत के बाहर सेवा के लिए भारत के किसी नागरिक को सरकार द्वारा संदेय हो;

(iv) ऐसा लाभांश जिसका किसी भारतीय कंपनी द्वारा भारत के बाहर भुगतान किया गया हो;

66[(v) निम्नलिखित द्वारा भुगतान योग्य ब्याज के रूप में आय, अर्थात् :–

() सरकार द्वारा; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो निवासी है, उस दशा के सिवाय जब ब्याज ऐसे ऋण या ऐसे धन की बाबत भुगतान योग्य है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए या भारत के बाहर किसी स्रोत से कोर्इ आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए उपगत किया गया है या उधार लिया गया और उपयोग किया गया है; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो अनिवासी है, उस दशा में जब ब्याज, ऐसे ऋण या ऐसे धन की बाबत भुगतान योग्य है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत में चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए उपगत किया गया है, या उधार लिया गया है और उपयोग किया गया है ;

(vi) निम्नलिखित द्वारा संदेय स्वामिस्व67 के रूप में आय–

() सरकार द्वारा; या

() ऐसे व्यक्ति द्वारा जो निवासी है उस दशा के सिवाय जब स्वामिस्व ऐसे अधिकार, संपत्ति या प्रयुक्त जानकारी या उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए है या भारत से बाहर किसी स्रोत से कोर्इ आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए है; या

() ऐसे व्यक्ति द्वारा व्यक्ति जो अनिवासी है, उस दशा में जब स्वामिस्व किसी ऐसे अधिकार, संपत्ति या प्रयुक्त जानकारी या उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है जो ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत में चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए है या भारत में किसी स्रोत से कोर्इ आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए है:

परन्तु इस खंड की कोर्इ बात स्वामिस्व के रूप में आय के उतने भाग के संबंध में जो किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति के बारे में किसी डाटा, दस्तावेजीकरण, रेखांकन या विनिर्देश के भारत के बाहर अन्तरण के लिए या उनके संबंध में भारत के बाहर कोर्इ जानकारी देने के लिए एकमुश्त प्रतिफल के रूप में है, उस दशा में लागू नहीं होगी जिसमें ऐसी आय 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किए गए किसी करार के अनुसरण में भुगतान योग्य है और ऐसे करार का केन्द्रीय सरकार ने अनुमोदन कर दिया है:

68[परन्तु यह और कि इस खंड की कोर्इ बात स्वामिस्व के रूप में आय के उतने भाग के संबंध में लागू नहीं होगी जो भारत सरकार की कंप्यूटर प्रक्रिया सामग्री निर्यात, प्रक्रिया सामग्री विकास और प्रशिक्षण नीति, 1986 के अधीन अनुमोदित किसी स्कीम के अधीन कंप्यूटर या कंप्यूटर आधारित उपस्कर के साथ किसी अनिवासी विनिर्माता द्वारा दी गर्इ कंप्यूटर प्रक्रिया सामग्री की बाबत सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अन्तर्गत अनुज्ञप्ति देना है) अंतरण के लिए किसी व्यक्ति द्वारा, जो निवासी है, एकमुश्त संदाय के रूप में है।]

स्पष्टीकरण 1.69[पहले] परन्तुक के प्रयोजनों के लिए 1 अप्रैल, 1976 को या उसके पश्चात् किया गया कोर्इ करार उस तारीख के पूर्व केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित प्रस्थापनों के अनुसार किया गया है; किन्तु जहां स्वामिस्व के रूप में आय का प्राप्तिकर्ता कोर्इ विदेशी कंपनी है वहां वह करार तब तक उस तारीख के पूर्व किया गया नहीं समझा जाएगा जब तक कि 1 अप्रैल, 1977 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसके संबंध में ऐसी आय इस अधिनियम के अधीन पहली बार कर योग्य होती है, इनमें जो भी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है, आय की विवरणी देने के लिए धारा 139 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अनुज्ञात समय की (चाहे वह मूलत: या बढ़ाकर नियत किया गया हो) समाप्ति के पूर्व, ऐसी कंपनी 70[निर्धारण] अधिकारी को लिखित रूप में यह घोषणा प्रस्तुत करके विकल्प का (ऐसा विकल्प उस निर्धारण वर्ष और प्रत्येक पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए अंतिम होगा) प्रयोग नहीं करता है कि ऐसा करार 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया करार समझा जाए।

स्पष्टीकरण 2.इस खंड के प्रयोजनों के लिए "स्वामिस्व" से निम्नलिखित ऐसा प्रतिफल अभिप्रेत है (जिसके अंतर्गत एकमुश्त प्रतिफल भी है किंतु वह प्रतिफल नहीं है जो प्राप्तिकर्ता को "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय हो), अर्थात् :–

(i) किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया, या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति के संबंध में सब या किन्हीं अधिकारों का अंतरण (जिसके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना भी है);

(ii) किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति के कार्यकरण या उपयोग के संबंध में कोर्इ जानकारी देना;

(iii) किसी पेटेंट, आविष्कार, प्रतिमान, डिजाइन, गुप्त सूत्र या प्रक्रिया या व्यापार चिन्ह या समरूप संपत्ति का उपयोग;

(iv) तकनीकी, औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक ज्ञान, अनुभव या कौशल के संबंध में कोर्इ जानकारी देना;

71[(ivक) किसी औद्योगिक, वाणिज्यिक या वैज्ञानिक उपस्कर का उपयोग या उपयोग करने का अधिकार किंतु इसमें धारा 44खख में निर्दिष्ट राशियां सम्मिलित नहीं हैं;]

(v) किसी प्रतिलिप्याधिकार, साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक कृति के, जिसके अन्तर्गत दूरदर्शन से संबंधित उपयोग के लिए फिल्म, वीडियो टेप अथवा रेडियो प्रसारण से संबंधित उपयोग के लिए टेप भी है, के संबंध में सब या किन्हीं अधिकारों का अंतरण (जिसके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना भी है) किंतु जिसके अंतर्गत सिनेमा फिल्मों के विक्रय, वितरण या प्रदर्शन के लिए प्रतिफल नहीं है; या

(vi) उपखंड (i) से 72[(iv), (ivक) और] उपखंड (v) तक में उल्लिखित क्रियाकलापों के संबंध में कोर्इ सेवाएं करना।

73[स्पष्टीकरण 3.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "कम्प्यूटर साफ्टवेयर" से किसी डिस्क, टेप, छिद्रित माध्यम या अन्य सूचना संग्रह युक्ति पर रिकार्ड किया गया कोर्इ कंप्यूटर कार्यक्रम, जिसके अंतर्गत कोर्इ ऐसा कार्यक्रम या कोर्इ ग्राहक अपेक्षित इलैक्ट्रोनिक डाटा भी है, अभिप्रेत है;]

(vii) निम्नलिखित द्वारा तकनीकी सेवाओं के लिए संदेय फीस74 के रूप में आय, अर्थात्:–

() सरकार द्वारा; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो निवासी है, उस दशा के सिवाय जब फीस ऐसे व्यक्तियों द्वारा भारत से बाहर चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति में भारत से बाहर किसी स्रोत से आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है; या

() ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा जो अनिवासी है, उस दशा में जब फीस ऐसे व्यक्ति द्वारा भारत में चलाए जाने वाले किसी कारबार या वृत्ति में या भारत में किसी स्रोत से आय पैदा करने या उपार्जित करने के प्रयोजनों के लिए उपयोजित सेवाओं की बाबत संदेय है:

75[परन्तु इस खंड की कोर्इ बात 1 अप्रैल, 1976 के पहले किए गए और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार के अनुसरण में संदेय तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय के संबंध में लागू नहीं होगी।]

76[स्पष्टीकरण 1.–पूर्वगामी परन्तुक के प्रयोजनों के लिए 1 अप्रैल, 1976 को या उसके पश्चात् किया गया कोर्इ करार उस तारीख के पहले किया गया करार समझा जाएगा यदि करार ऐसी प्रस्थापनाओं के अनुसरण में किया जाता है जिनका केन्द्रीय सरकार ने उस तारीख के पहले अनुमोदन कर दिया है।]

स्पष्टीकरण 77[2].–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" से कोर्इ प्रबंधकीय, तकनीकी, या परामर्श सेवाएं करने के लिए (जिसके अंतर्गत तकनीकी या परामर्श सेवाओं की व्यवस्था भी है) प्रतिफल अभिप्रेत है, जिसमें एकमुश्त प्रतिफल भी है किंतु इसमें किसी सन्निर्माण78, समुच्चय, खनन या इसी प्रकार की किसी परियोजना के लिए प्रतिफल नहीं है जिसके लिए प्राप्तिकर्ता द्वारा वचनबद्ध किया गया है या वह प्रतिफल भी नहीं है जो "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य प्राप्तिकर्ता की आय हो।]

(2) उपधारा (1) में की किसी बात के होते हुए भी, ऐसी पेंशन जो भारत के बाहर स्थायी रूप से निवास करने वाले किसी व्यक्ति को भारत के बाहर भुगतान योग्य हो, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ नहीं समझी जाएगी यदि ऐसी पेंशन संविधान के अनुच्छेद 314 में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को दी जानी हो या ऐसे व्यक्ति को दी जानी हो जो भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अर्थ में फेडरल न्यायालय का या किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश 15 अगस्त, 1947 के पूर्व नियुक्त किया गया था और संविधान के प्रारम्भ होने पर या उसके पश्चात् भारत में न्यायाधीश के रूप में सेवा करता रहा है।

79[स्पष्टीकरण - शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी अनिवासी की आय उपधारा (1) के खंड (v) या खंड (vi) या खंड (vii) के अधीन भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी जाएगी और ऐसे अनिवासी की कुल आय में शामिल की जाएगी, चाहे,–

(i) उस अनिवासी का भारत में कोर्इ निवास या कारबार का स्थान या कारोबार संपर्क हो अथवा नहीं; या

(ii) उस अनिवासी ने भारत में सेवाएं प्रदान की हों अथवा नहीं।]

 

51. तारीख 23.7.1969 का परिपत्र सं. 23, तारीख 29.5.1975 का परिपत्र सं. 163, तारीख 3.9.1956 से संबंधित वर्ष 1956 का परिपत्र सं. 35 (XXXIII-7), तारीख 20.2.1969 का परिपत्र सं. 4, तारीख 4.5.1984 का परिपत्र सं. 382, तारीख 2.1.2004 का परिपत्र सं. 1/2004 और तारीख 28.9.2004 का परिपत्र सं. 5/2004 भी देखें। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

52. सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

53. "समझी जाएगी" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

54. कुछ मामलों में अनिवासियों की आय की संगणना करने की रीति के लिए नियम 10 देखें।

55. "कारबार संपर्क" और "संपत्ति" पदों/शब्दों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

56. "या ब्याज पर उधार दिए गए और नकद या वस्तु के रूप में भारत में लाए गए किसी धन द्वारा या से" शब्दों का वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से लोप किया गया।

57. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से विद्यमान स्पष्टीकरण को स्पष्टीकरण 1 के रूप में पुनर्संख्यांकित किया गया।

58. "संक्रिया" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

59. वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से परंतुक का लोप किया गया।

60. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

61. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1982 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

62. "संक्रियाओं" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

63. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।

64. "उपार्जित" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरैक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

65. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापित किए जाने के पूर्व वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा भूतलक्षी रूप से 1.4.1979 से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण निम्नानुसार था :

"स्पष्टीकरण.शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस खंड में निर्दिष्ट प्रकृति की आय जो भारत में की गर्इ सेवा के लिए संदेय है, भारत में उपार्जित आय समझी जाएगी।"

66. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से खंड (v), (vi) और (vii) अंत:स्थापित।

67. "स्वामिस्व" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

68. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।

69. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से "पूर्वगामी" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

70. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

71. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

72. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

73. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। इसके पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण 3 निम्नानुसार था :–

'स्पष्टीकरण 3.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "कम्प्यूटर साफ्टवेयर" पद का वही अर्थ है जो धारा 80जजड़ के स्पष्टीकरण के खंड () में है।'

74. "तकनीकी  सेवाओं के लिए संदेय  फीस" पद  के अर्थ के लिए  देखिए  टैक्समैन्स  डायरेक्ट  टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

75. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित।

76. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

77. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित।

78. "सन्निर्माण" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

79. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.6.1976 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 2007 से 1.6.1976 से भूतलक्षी प्रभाव से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण इस प्रकार था:

"स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, जहां आय उपधारा (1) के खंड (v), (vi) और (vii) के अधीन भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत हुर्इ समझी जाती है वहां ऐसी आय को अनिवासी की कुल आय में सम्मिलित किया जाएगा, चाहे अनिवासी का भारत में कोर्इ निवास-स्थान या कारबार का स्थान या कारोबारी संबंध हो अथवा नहीं।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा संशोधित रूप में]

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