आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 89

आदि वेतन, बकाया राशि में या अग्रिम में भुगतान किया जाता है राहत जब

धारा

धारा संख्या

89

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIII - छूट और राहत

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2005

आदि वेतन, बकाया राशि में या अग्रिम में भुगतान किया जाता है राहत जब

आदि वेतन, बकाया राशि में या अग्रिम में भुगतान किया जाता है राहत जब

ख.–आय-कर राहत

12[उस दशा में राहत जिसमें वेतन आदि का भुगतान बकाया या अग्रिम के रूप में किया जाता है

89. जहां कोर्इ निर्धारित वेतन के रूप में ऐसी कोर्इ राशि प्राप्त करता है, जिसका संदाय बकाया या अग्रिम के रूप में किया जाता है, या किसी एक वित्तीय वर्ष में बारह मास से अधिक के लिए वेतन या ऐसा संदाय प्राप्त करता है, जो धारा 17 के खंड (3) के उपबंधों के अधीन वेतन के बदले में लाभ है या धारा 57 के खंड (iiक) के स्पष्टीकरण में परिभाषित कुटुंब पेंशन के रूप में कोर्इ राशि प्राप्त करता है, जिसका संदाय बकाया के रूप में किया जाता है, जिसके कारण उसकी कुल आय उस दर से उच्चतर दर पर निर्धारित की जाती है, जिससे वह अन्यथा निर्धारित की जाती, वहां निर्धारण अधिकारी, उसे इस निमित्त किए गए आवेदन पर ऐसी राहत दे सकेगा, जो विहित की जाए13।]

 

12. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.1996 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से यथासंशोधित धारा 89 से इस प्रकार थी :

''89. उस दशा में राहत जिसमें वेतन आदि का भुगतान बकाया या अग्रिम के रूप में किया जाता है–(1) जहां निर्धारिती की आय उस उच्च दर पर जिस पर वह अन्यथा निर्धारित की जाती है इस कारण निर्धारित की जाती है कि उसके वेतन का कोर्इ भाग बकाया या अग्रिम के रूप में दिया जाता है या इस कारण कि उसने एक वित्तीय वर्ष में बारह मास से अधिक के लिए वेतन या ऐसा भुगतान प्राप्त किया है जो धारा 17 के खंड (3) के उपबंधों के अधीन वेतन के बदले से लाभ है, वहां निर्धारण अधिकारी उसे उस निमित्त किए गए आवेदन पर ऐसी राहत दे सकेगा जो विहित की जाए।

(2) [***]''

13. राहत की संगणना के नियमों के लिए नियम 21क देखिए। धारा 89(1) के अधीन राहत का दावा करने संबंधी विहित विशिष्टयों के लिए नियम 21कक तथा फार्म सं. 10ड़ देखिए। नियम 21क के विश्लेषण के लिए परिशिष्ट दो भी देखिए।

देखिए परिपत्र सं. 331, तारीख 22.3.1982 और परिपत्र सं. 431, तारीख 12.9.1985। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

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