आदि वेतन, बकाया राशि में या अग्रिम में भुगतान किया जाता है राहत जब
ख.--आय-कर राहत]
उस दशा में राहत जिसमें वेतन आदि का भुगतान बकाया या अग्रिम के रूप में किया जाता है
5189. (1) जहां निर्धारिती की आय उस उच्च दर पर जिस पर वह अन्यथा निर्धारित की जाती इस कारण निर्धारिती की जाती है कि उसके वेतन का कोर्इ भाग बकाया या अग्रिम के रूप में दिया जाता है या इस कारण कि उसने एक वित्तीय वर्ष में बारह मास से अधिक के लिए वेतन या ऐसा भुगतान प्राप्त किया है जो धारा 17 के खंड (3) के उपबंधों के अधीन वेतन के बदले में लाभ है, वहां 52[53[निर्धारण] अधिकारी उसे उस निमित्त किए गए आवेदन पर ऐसी राहत दे सकेगा जो विहित54 की जाए]।
(2) 55[* * *]
51. देखिए परिपत्र सं. 331, तारीख 22.3.1982 और परिपत्र सं. 431, तारीख 12.9.1985। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
52. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, "निर्धारिती द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर आयुक्त ऐसी राहत दे सकेगा जो वह समुचित समझे" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
53. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
54. राहत की संगणना करने के नियमों के लिए देखिये नियम 21क। धारा 89(1) के अधीन राहत का दावा करने के लिए विहित विवरण के लिए नियम 21कक और प्ररूप सं. 10ड. देखिये। नियम 21क के विश्लेषण के लिए परिशिष्ट दो भी देखिये।
55. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। लोप पूर्व उपधारा (2) निम्न प्रकार थी :
"(2) जहां प्रतिभूतियों पर ब्याज से आय का कोर्इ भाग बकाया के रूप में प्राप्त किए जाने के कारण निर्धारिती की कुल आय उससे ऊंची दर पर निर्धारित की जाए जिस पर वह अन्यथा निर्धारित की गर्इ होती, वहां निर्धारण अधिकारी इस निमित्त आवेदन किए जाने पर, ऐसी राहत दे सकेगा जो वह विहित करे।"
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

