कतिपय व्यष्टियों की दशा में आय-कर का रिबेट
कतिपय व्यष्टियों की दशा में आय-कर का रिबेट
87क. ऐसा कोई निर्धारिती, जो भारत में निवासी कोई व्यष्टि है, जिसकी कुल आय 6[पांच लाख] रूपए से अधिक नहीं है (जैसी इस अध्याय के अधीन कटौतियां अनुज्ञात करने से पूर्व संगणित की गई हैं), अपनी उस कुल आय पर, जिसके लिए वह किसी निर्धारण वर्ष के लिए प्रभार्य है, आय-कर की रकम से ऐसे आय-कर के शत-प्रतिशत के बराबर रकम की या 7[बारह हजार सौ] रुपए की रकम की, इनमें से जो भी कम हो, कटौती का हकदार होगा।
वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 87क में पंरतुक अंतस्थापित किया जाएगा
परंतु जहां निर्धारिती की कुल आय धारा 115खकग की उपधारा (1क) के अधीन कर से प्रभार्य है, और कुल आय—
(क) सात लाख रुपए से अधिक नहीं है, तो निर्धारिती (इस अध्याय के अधीन कटौतियों के लिए अनुज्ञात करने के पूर्व यथासंगणित) उसकी कुल आय पर आय-कर की रकम से कटौती का हकदार होगा जिसके लिए वह किसी निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे आय-कर के सौ प्रतिशत के बराबर रकम या पच्चीस हजार रुपए की रकम, जो भी कम हों, से प्रभार्य है ;
(ख) सात लाख रुपए से अधिक है तथा ऐसी कुल आय पर संदेय आय-कर ऐसी रकम से अधिक है जिसके द्वारा कुल आय सात लाख रुपए से अधिक है, तो निर्धारिती (इस अध्याय के अधीन कटौतियों के लिए अनुज्ञात करने के पूर्व यथासंगणित) उसकी कुल आय पर उस रकम के बराबर रकम पर कटौती का हकदार होगा जिसके द्वारा ऐसी कुल आय पर संदेय आय-कर उस रकम से अधिक है जिसके द्वारा कुल आय सात लाख रुपए से अधिक होती है ।
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

