किसी नि:शक्त व्यक्ति की दशा में कटौती
90[घ.–अन्य कटौतियां
91[किसी नि:शक्त व्यक्ति की दशा में कटौती
80प. (1) किसी ऐसे व्यष्टि की, जो निवासी है और जिसे पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा नि:शक्त व्यक्ति प्रमाणित किया गया है, कुल आय की संगणना करने में पचास हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परंतु जहां ऐसा व्यष्टि गंभीर रूप से नि:शक्त व्यक्ति है वहां इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पचास हजार रुपये" शब्दों के स्थान पर "पचहत्तर हजार रुपये" शब्द रखे गए हों :
91क[परन्तु यह और कि 1 अप्रैल, 2010 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्षों के लिए, पहले परन्तुक के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो ''पचहत्तर हजार रुपए'' शब्दों के स्थान पर ''एक लाख रुपए'' शब्द रखे गए हों।]
(2) इस धारा के अधीन किसी कटौती का दावा करने वाला प्रत्येक व्यष्टि, ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए92, चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्र की एक प्रति उस निर्धारण वर्ष की बाबत, जिसके लिए कटौती का दावा किया गया है, धारा 139 के अधीन आयकर की विवरणी के साथ प्रस्तुत करेगा :
परंतु जहां नि:शक्तता की स्थिति का पूर्वोक्त प्रमाणपत्र में नियत अवधि के पश्चात् पुनर्निर्धारण अपेक्षित हो, वहां उस पूर्ववर्ष की, जिसके दौरान नि:शक्तता का पूर्वोक्त प्रमाणपत्र समाप्त हुआ था समाप्ति के पश्चात् आरंभ होने वाले किसी पूर्ववर्ष से संबंधित किसी निर्धारण वर्ष के लिए, इस धारा के अधीन कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि चिकित्सा अधिकारी से, ऐसे प्ररूप और रीति में, जो विहित की जाए, नया प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं किया जाता है और धारा 139 के अधीन आय-कर की विवरणी के साथ उसकी एक प्रति नहीं दे दी जाती है।
93[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,--
(क) "नि:शक्तता" का वही अर्थ है जो उसका नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 94के खंड (झ) में है और इसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्ता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 94क के खंड (क), खंड (ग) और खंड (ज) में उल्लिखित "स्वपरायणता", "प्रमस्तिष्क घात" और "बहु-नि:शक्तता" भी है;
(ख) "चिकित्सा प्राधिकारी" से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 94ख के खंड (त) में निर्दिष्ट चिकित्सा प्राधिकारी या ऐसा अन्य चिकित्सा प्राधिकारी अभिप्रेत है, जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 94ग के खंड (क), खंड (ग), खंड (ज), खंड ( ञ ) और खंड (ण) में उल्लिखित "स्वपरायणता", "प्रमस्तिष्क घात", "बहु-नि:शक्तता", "नि:शक्त व्यक्ति", और "गंभीर नि:शक्तता" को प्रमाणित करने के लिए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए;
(ग) "नि:शक्त व्यक्ति" से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 94घ के खंड (न) में या राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 94ग के खंड ( ञ ) में निर्दिष्ट व्यक्ति अभिप्रेत है;
(घ) "गंभीर रूप से नि:शक्त व्यक्ति" से--
(i) नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 56 की उपधारा (4)94घ में उल्लिखित नि:शक्तताओं में से किसी एक या अधिक नि:शक्ताओं के अस्सी या अधिक प्रतिशत नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति; या
(ii) राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 94ग के खंड (ण) में उल्लिखित गंभीर रूप से नि:शक्त व्यक्ति,
अभिप्रेत है।]
90. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से अंत:स्थापित।
91. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, धारा 80प, जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से प्रतिस्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से संशोधित की गर्इ थी, इस प्रकार थी:
'80प. स्थायी शारीरिक नि:शक्तता (जिसके अंतर्गत अंधापन भी है) के संबंध में कटौती.–किसी ऐसे व्यष्टि की, जो निवासी है और पूर्ववर्ष के अंत में, किसी ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से (जिसके अंतर्गत अंधापन भी है) पीड़ित है या ऐसी मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो बोर्ड द्वारा इस संबंध में बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट स्थायी शारीरिक नि:शक्तता या मानसिक मंदता है, जिसे किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र रोग विशेषज्ञ या मन:चिकित्सक ने प्रमाणित किया है और जिसका प्रभाव यह है कि सामान्य कार्य की या अभिलाभ पूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यष्टि की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है, कुल आय की संगणना करने में चालीस हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु यह तब जबकि ऐसा व्यष्टि, उस प्रथम निर्धारण वर्ष के संबंध में, जिसके लिए वह इस धारा के अंतर्गत कटौती का दावा करता है, निर्धारण अधिकारी के समक्ष पूर्वोक्त प्रमाणपत्र पेश करता है :
परन्तु यह और कि किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र रोग विशेषज्ञ या मन:चिकित्सक से पूर्वोक्त प्रमाणपत्र पेश करने की अपेक्षा ऐसे व्यष्टि को लागू नहीं होगी जिसने इस धारा के उपबंधों के अधीन जैसे कि वे 1 अप्रैल, 1992 के ठीक पूर्व थे, प्रमाणपत्र निर्धारण अधिकारी के समक्ष पहले ही पेश कर दिया है।
स्पष्टीकरण.– इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''सरकारी अस्पताल'' पद का वही अर्थ है जो उसका धारा 80घघ के स्पष्टीकरण में है।'
इससे पूर्व धारा 80प कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से संशोधित की गर्इ थी।
91क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से अंत:स्थापित।
92. नियम 11क देखिए। विहित प्ररूप के लिए देखिए टैक्समैन्स इंकम टैक्स रूल्स।
93. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व स्पष्टीकरण निम्न प्रकार था:
"स्पष्टीकरण.--इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "नि:शक्तता" का वही अर्थ है जो उसका नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (झ) में है ;
(ख) "चिकित्सा प्राधिकारी" से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (त) में निर्दिष्ट चिकित्सा प्राधिकारी अभिप्रेत है ;
(ग) "नि:शक्त व्यक्ति" से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (न) में निर्दिष्ट व्यक्ति अभिप्रेत है ;
(घ) "गंभीर रूप से नि:शक्त व्यक्ति" से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 56 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट नि:शक्तताओं में से किसी एक या अधिक नि:शक्तताओं के अस्सी या अधिक प्रतिशत नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति अभिप्रेत है।"
94. नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकर संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2(झ) के पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
94क. राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 की धारा 2 के सुसंगत पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
94ख. नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 और धारा 56(4) के सुसंगत पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
94ग. राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 की धारा 2 के सुसंगत पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
94घ. नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 की धारा 2 और धारा 56(4) के सुसंगत पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

