किसी नि:शक्त व्यक्ति की दशा में कटौती
85[घ.–अन्य कटौतियां
86[स्थायी शारीरिक नि:शक्तता (जिसके अंतर्गत अंधापन भी है) के संबंध में कटौती
8780प. 88किसी ऐसे व्यष्टि की, जो निवासी है और पूर्ववर्ष के अंत में, किसी ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से (जिसके अंतर्गत अंधापन भी है) पीड़ित है या ऐसी मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो बोर्ड द्वारा इस संबंध में बनाए गए नियमों89 में विनिर्दिष्ट स्थायी शारीरिक नि:शक्तता या मानसिक मंदता है, जिसे किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र रोग विशेषज्ञ या मन:चिकित्सक ने प्रमाणित किया है और जिसका प्रभाव यह है कि सामान्य कार्य की या अभिलाभ पूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यष्टि की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है, कुल आय की संगणना करने में 90[चालीस] हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु यह तब जबकि ऐसा व्यष्टि, उस प्रथम निर्धारण वर्ष के संबंध में, जिसके लिए वह इस धारा के अंतर्गत कटौती का दावा करता है, निर्धारण अधिकारी के समक्ष पूर्वोक्त प्रमाणपत्र पेश करता है :
परन्तु यह और कि किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र रोग विशेषज्ञ या मन:चिकित्सक से पूर्वोक्त प्रमाणपत्र पेश करने की अपेक्षा ऐसे व्यष्टि को लागू नहीं होगी जिसने इस धारा के उपबंधों के अधीन जैसे कि वे 1 अप्रैल, 1992 के ठीक पूर्व थे, प्रमाणपत्र निर्धारण अधिकारी के समक्ष पहले ही पेश कर दिया है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "सरकारी अस्पताल" पद का वही अर्थ है जो धारा 80घघ के स्पष्टीकरण में उसका है।]
85. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से अंत:स्थापित।
86. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन किए जाने से पूर्व, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से यथासंशोधित धारा 80प निम्नानुसार थी :
"80प. पूर्णत: अंधे या शारीरिक रूप से नि:शक्त निवासी व्यक्ति की दशा में कटौती :–
(1) किसी ऐसे व्यष्टि की, जो निवासी है और पूर्ववर्ष के अंत में,--
(i) पूर्णत: अंधा है, या
(ii) ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से (अंधेपन से भिन्न) जो बोर्ड द्वारा इस निमित बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट स्थायी शारीरिक नि:शक्तता है और जिसका प्रभाव यह है कि अभिलाभपूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यष्टि की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है; या
(iii) ऐसी मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट सीमा तक है और जिसका प्रभाव यह है कि अभिलाभपूर्व नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यष्टि की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है,
कुल आय की संगणना करने में पंद्रह हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु यह तब जबकि ऐसा व्यष्टि उस प्रथम निर्धारण वर्ष की बाबत, जिसके लिए वह इस धारा के अधीन कटौती का दावा करता है, निर्धारण अधिकारी के समक्ष,–
(क) खंड (i) में निर्दिष्ट दशा में, रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी, जो एक नेत्र रोग विशेषज्ञ हो, से पूर्णत: अंधेपन के बारे में एक प्रमाणपत्र पेश करे;
(ख) खंड (ii) में निर्दिष्ट दशा में, रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी से उस खंड में निर्दिष्ट स्थायी शारीरिक नि:शक्तता के बारे में प्रमाणपत्र पेश करे; और
(ग) खंड (iii) में निर्दिष्ट दशा में, सरकारी अस्पताल में कार्यरत मनोविज्ञानी से मानसिक मंदता के बारे में प्रमाणपत्र पेश करे।
(2) बोर्ड उपधारा (1) के, यथास्थिति, खंड (ii) या खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए किसी नि:शक्तता या मानसिक मंदता को विनिर्दिष्ट करने के लिए कोर्इ भी नियम बनाने में इस नि:शक्तता या मानसिक मंदता की प्रकृति और प्रभाव को ध्यान में रखेगा और जिसके प्रभाव से ऐसी नि:शक्तता या मानसिक मंदता जिससे वह ग्रस्त है या पीड़ित है से अभिलाभपूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यक्ति की सामथ्र्य प्रभावित हो सकती है।"
87. परिपत्र सं. 653, तारीख 15.6.1993 भी देखिए। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
88. सुसंगत केस लॉज के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
89. "स्थायी शारीरिक नि:शक्तता" के विनिर्दिष्ट प्रवर्ग के लिए, देखिए नियम 11घ।
90. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से "बीस" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

