बचत खाते में निक्षेपों पर ब्याज की बाबत कटौती
89क[गक–अन्य आय की बाबत कटौतियां
बचत खाते में निक्षेपों पर ब्याज की बाबत कटौती
80ननक. (1) जहां किसी निर्धारिती की, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, सकल कुल आय में,
(क) ऐसी किसी बैंककारी कंपनी में, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी है);
(ख) बैंककारी का कारबार करने में लगी किसी सहकारी सोसाइटी में (जिसके अंतर्गत कोर्इ सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक भी है); या
(ग) भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1898 का 6) की धारा 2 के खंड (ट) में यथापरिभाषित किसी डाकघर में,
बचत खाते में निक्षेपों पर (जो सावधिक निक्षेप नहीं हैं) ब्याज के रूप में कोर्इ आय सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में इसमें इसके नीचे विनिर्दिष्ट कटौती अनुज्ञात की जाएगी, अर्थात् :–
(i) ऐसे मामले में, जहां ऐसी आय की रकम कुल मिलाकर दस हजार रुपए से अधिक नहीं होती है, संपूर्ण ऐसी रकम; और
(ii) किसी अन्य मामले में, दस हजार रुपए।
(2) जहां इस धारा में निर्दिष्ट आय किसी फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय द्वारा या उसकी ओर से धारण किए हुए किसी बचत खाते में किसी निक्षेप से होती है, वहां इस धारा के अधीन फर्म के किसी भागीदार या संगम के किसी सदस्य या निकाय के किसी व्यष्टि की कुल आय की संगणना करने में ऐसी आय के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "सावधिक निक्षेप" से नियत अवधि की समाप्ति पर प्रतिसंदेय निक्षेप अभिप्रेत है।]
89क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

