प्राचार्यों, शिक्षकों आदि की दशा में, कुछ विदेशी स्रोतों से पारिश्रमिक के संबंध में कटौती
प्राचार्यों, शिक्षकों आदि की दशा में, कुछ विदेशी स्रोतों से पारिश्रमिक के संबंध में कटौती
80द. जहां किसी व्यष्टि की, जो भारत का नागरिक है, सकल कुल आय में कोर्इ ऐसा पारिश्रमिक सम्मिलित है जो उसके द्वारा, भारत के बाहर स्थापित किसी विश्वविद्यालय या अन्य शिक्षा संस्था या भारत के बाहर स्थापित किसी अन्य संगम या निकाय से ऐसे विश्वविद्यालय, संस्था, संगम या निकाय में प्राचार्य, शिक्षक या अनुसंधान कार्यकर्ता की हैसियत से भारत के बाहर वास के दौरान अपने द्वारा की गर्इ किसी सेवा के लिए भारत से बाहर प्राप्त किया गया है, वहां उस व्यष्टि की कुल आय की संगणना करते समय ऐसे पारिश्रमिक में से, जो निर्धारिती द्वारा या उसकी ओर से संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में उस पूर्ववर्ष की समाप्ति की छह मास की अवधि के भीतर या ऐसी अवधि के भीतर, जो सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त अनुज्ञात करे, भारत में लाया जाता है,–
(i) 1 अप्रैल, 2001 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के साठ प्रतिशत;
(ii) 1 अप्रैल, 2002 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के पैंतालीस प्रतिशत;
(iii) 1 अप्रैल, 2003 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के तीस प्रतिशत;
(iv) 1 अप्रैल, 2004 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे पारिश्रमिक के पंद्रह प्रतिशत,
के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी और 1 अप्रैल, 2005 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष तथा किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी :
परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ विहित प्ररूप में एक प्रमाणपत्र यह प्रमाणित करते हुए प्रस्तुत न कर दे कि इस धारा के उपबंधों के अनुसार कटौती का दावा ठीक प्रकार से किया जा चुका है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''सक्षम प्राधिकारी'' से भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी अभिप्रेत है जो संदायों को विनियमित करने और विदेशी मुद्रा में संव्यवहार करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत है।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

