अपतट बैंककारी यूनिटों और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की कतिपय आय की बाबत कटौतियां
76[अपतट बैंककारी यूनिटों और अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की कतिपय आय की बाबत कटौतियां
80ठक. (1) जहां किसी निर्धारिती की,–
(i) जो कोर्इ अनुसूचित बैंक, या, भारत के बाहर किसी देश की विधि द्वारा या उसके अधीन निगमित कोर्इ बैंक है, और जिसकी विशेष आर्थिक जोन में कोर्इ अपतट बैंककारी यूनिट है; या
(ii) जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की कोर्इ यूनिट है,
सकल कुल आय में उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोर्इ आय, सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए ऐसी आय में से–
(क) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुज्ञा या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन या किसी अन्य सुसंगत विधि के अधीन अनुज्ञा अभिप्राप्य की गर्इ थी या रजिस्ट्रीकरण किया गया था, सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के शत प्रतिशत के बराबर और उसके पश्चात्;
(ख) पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के पचास प्रतिशत के बराबर, रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय–
(क) किसी विशेष आर्थिक जोन में अपतट बैंककारी यूनिट से; या
(ख) किसी विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित उपक्रम या किसी अन्य उपक्रम से, जो किसी विशेष आर्थिक जोन का विकास करता है, विकास और प्रचालन करता है या विकास, प्रचालन और अनुरक्षण करता है, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार से; या
(ग) किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की किसी यूनिट से उसके ऐसे कारबार से, जिसके लिए विशेष आर्थिक जोन का ऐसे केन्द्र में स्थापित करने का अनुमोदन किया गया है, प्राप्त आय होगी।
(3) इस धारा के अधीन और कटौती तब तक अनुज्ञात की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ–
(i) धारा 80ठक की उपधारा (2) के खंड (i) के अधीन, जैसी कि वह इस धारा द्वारा उसके प्रतिस्थापन के ठीक पूर्व विद्यमान थी, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट रूप में धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट यह प्रमााणित करते हुए नहीं दे देता कि कटौती का इस धारा के उपबंध के अंतर्गत सही रूप से दावा किया गया है; और
(ii) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अभिप्राप्त अनुज्ञा की प्रति नहीं दे देता।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (थ)77 में उसका है;
(ख) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 के खंड (ड़)78 में उसका है;
(ग) "विशेष आर्थिक जोन" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक)77 में उसका है;
(घ) "यूनिट" का वही अर्थ है, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यग) में उसका है।]
76. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा 10.2.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से यथा अंत:स्थापित धारा 80ठ इस प्रकार थी :
'80ठक. अपतट बैंककारी यूनिटों की कतिपय आय की बाबत कटौती–(1) जहां किसी ऐसे निर्धारिती की,–
(i) जो अनुसूचित बैंक (भारत से बाहर के किसी देश की विधि द्वारा या उसके अधीन निगमित बैंक नहीं) है;
(ii) जो किसी विशेष आर्थिक जोन में अपतट बैंककारी यूनिटों का स्वामी है,
सकल कुल आय में उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, ऐसी आय से ऐसी कटौती अनुज्ञात की जाएगी जो,–
(क) उस पूर्व वर्ष से, जिसमें बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुज्ञा अभिप्राप्त की गर्इ थी, सुसंगत निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले तीन क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के शतप्रतिशत के बराबर रकम होगी, और उसके पश्चात्;
(ख) दो क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए ऐसी आय के पचास प्रतिशत के बराबर रकम होगी।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट आय--
(क) किसी विशेष आर्थिक जोन में किसी अपतट बैंककारी यूनिट से;
(ख) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 6 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी कारबार से, जो किसी विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित उपक्रम के साथ या ऐसे किसी अन्य उपक्रम के साथ किया गया हो, जो किसी विशेष आर्थिक जोन का विकास करता है, विकास और प्रचालन करता है या प्रचालन और अनुरक्षण करता है;
(ग) विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) के अधीन बनाए गए विनियमों के अनुसार संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त,
आय होगी।
(3) इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ--
(i) धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट विहित प्ररूप में*, जिसमें यह प्रमाणित किया गया है कि उक्त कटौती का इस धारा के उपबंधों के अनुसार सही रूप से दावा किया गया है; और
(ii) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अभिप्राप्त अनुज्ञा की एक प्रति,
नहीं देता है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,--
(क) "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" का वही अर्थ है जो उसका धारा 80जजग की उपधारा (4ग) के नीेचे स्पष्टीकरण के खंड (क) में है;
(ख) "अपतट बैंककारी यूनिट" से भारत में किसी ऐसे बैंक की शाखा अभिप्रेत है जो किसी विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित हो और जिसने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 23 की उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन अनुज्ञा प्राप्त कर ली है;
(ग) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो उसका भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 2 के खंड (ड़) में है;
(घ) "विशेष आर्थिक जोन" का वही अर्थ है जो उसका धारा 10क के स्पष्टीकरण 2 के खंड (viii) में है।'
*नियम 19कड़ और प्ररूप 10गगच देखिए।
77. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2(घ) तथा 2(यक) के पाठ के लिए परिशिष्ट देखिए।
78. भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 2(ड़) के लिए परिशिष्ट देखिए।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

