आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80झक

अवसंरचना विकास आदि में लगे हुए औद्योगिक उपक्रमों या उद्यमों से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80झक

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2009

अवसंरचना विकास आदि में लगे हुए औद्योगिक उपक्रमों या उद्यमों से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती

अवसंरचना विकास आदि में लगे हुए औद्योगिक उपक्रमों या उद्यमों से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती

74[अवसंरचना विकास आदि में लगे हुए औद्योगिक उपक्रमों या उद्यमों से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती75

80झक. 76[(1) जहां निर्धारिती की सकल कुल आय में कोर्इ ऐसे लाभ या अभिलाभ सम्मिलित हैं जो उपधारा (4) में निर्दिष्ट किसी कारबार से (ऐसे कारबार को इसमें आगे पात्र कारबार कहा गया है) किसी उपक्रम या उद्यम को व्युत्पन्न हुए हैं, वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में, ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ के शतप्रतिशत के बराबर की रकम की कटौती दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए अनुज्ञात की जाएगी।]

(2) उपधारा (1) में उल्लिखित कटौती का, निर्धारिती के विकल्प पर, उस वर्ष से, जिसमें उपक्रम या उद्यम कोर्इ अवसंरचना सुविधा विकसित करता है या उसका प्रचालन आरंभ करता है या दूर-संचार सेवा देना प्रारंभ करता है या औद्योगिक पार्क का विकास करता है 77[या उपधारा (4) के खंड (iii) में निर्दिष्ट किसी विशेष आर्थिक जोन का विकास करता है 78[* * *]] या विद्युत पैदा करता है या विद्युत का पारेषण या वितरण प्रारंभ करता है, 79[या विद्यमान पारेषण या वितरण लाइनों का पर्याप्त नवीकरण और आधुनिकीकरण करता है] 80[80क[या कोर्इ क्रास कंट्री प्राकृतिक गैस वितरण नेटवर्क बिछाता है और उसका प्रचालन आरंभ करता है]] प्रारंभ होने वाले पंद्रह वर्षों में से किसी दस क्रमवर्ती वर्षों के लिए दावा किया जा सकेगा :

81[परन्तु जहां निर्धारिती उपधारा (4) के खंड (i) के स्पष्टीकरण के खंड () या खंड () या खंड () में निर्दिष्ट किसी अवसंरचना सुविधा का विकास या प्रचालन और अनुरक्षण या विकास, प्रचालन तथा अनुरक्षण करता है, वहां इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "पंद्रह वर्ष" शब्दों के स्थान "बीस वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।]

82[(2क) उपधारा (1) या उपधारा (2) में की किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे उपक्रम की, जो उपधारा (4) के खंड (ii) में उल्लिखित दूर-संचार सेवाओं को उपलब्ध कराता है, कुल आय की संगणना करने में कटौती, उपधारा (2) में उल्लिखित अवधियों के दौरान किसी समय प्रारंभ होने वाले पहले पांच निर्धारण वर्षों के लिए पात्र कारबार के लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत और उसके बाद पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे लाभों और अभिलाभों का तीस प्रतिशत होगी।]

(3) यह धारा 83[उपधारा (4) के 79[खंड (ii) या] खंड (iv) 80[83क[या खंड (vi)]] में निर्दिष्ट किसी ऐसे 84[उपक्रम]] को लागू होती हैं जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–

(i) वह पहले से विद्यमान किसी कारबार को खंडित या पुनर्गठित करके नहीं बना है :

परन्तु यह शर्त किसी ऐसे 84[उपक्रम] के संबंध में लागू नहीं होगी जो निर्धारिती द्वारा किसी ऐसे 84[उपक्रम] के कारबार के, जो धारा 33ख में निर्दिष्ट है, इस धारा में उल्लिखित परिस्थितियों में और अवधि के भीतर पुन:स्थापन, पुनर्गठन या पुन:चालन के फलस्वरूप बना है;

(ii) वह किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार को अंतरण करके नहीं बना है :

85[परंतु इस उपधारा की कोर्इ बात, विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36) की धारा 2 के खंड (7) में उल्लिखित किसी राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा पूर्व में प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र के अंतरण, चाहे वह पूर्णत: हो या भागत:, की दशा में लागू नहीं होगी, चाहे ऐसा अंतरण उस अधिनियम के भाग 13 के अधीन बोर्ड के विभाजन या पुनर्निर्माण या पुनर्गठन के अनुसरण में है या नहीं।]

स्पष्टीकरण 1.–खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए, ऐसी मशीनरी या संयंत्र को, जो निर्धारिती से भिन्न, किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर प्रयुक्त किया गया था, किसी प्रयोजन के लिए, तत्पूर्व प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र नहीं समझा जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :–

() ऐसी मशीनरी या संयंत्र का निर्धारिती द्वारा प्रतिष्ठापित किए जाने की तारीख से पहले किसी समय भारत में प्रयोग नहीं किया गया था;

() ऐसी मशीनरी या संयंत्र का भारत के बाहर किसी देश से भारत में आयात किया गया है; और

() निर्धारिती द्वारा मशीनरी या संयंत्र प्रतिष्ठापित किए जाने की तारीख से पहले किसी अवधि के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय की संगणना करने में उस मशीनरी या संयंत्र के संबंध में इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अवक्षयण के कारण कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की गर्इ है या अनुज्ञेय नहीं है।

स्पष्टीकरण 2.–जहां किसी 86[उपक्रम] की दशा में, किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त कोर्इ मशीनरी या संयंत्र या उसका कोर्इ भाग किसी नए कारबार को अंतरित किया जाता है और इस प्रकार अंतरित मशीनरी या संयंत्र या उसके भाग का कुल मूल्य उस कारबार में प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं है, वहां इस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि उसमें विनिर्दिष्ट शर्त का अनुपालन हो गया है।

(4) यह धारा–

(i) किसी अवसंरचना सुविधा 87[का (i) विकास करने, (ii) अनुरक्षण और प्रचालन करने, या (iii) विकास, अनुरक्षण और प्रचालन करने] का कारबार करने वाले ऐसे उद्यम को लागू होती है, जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–

() वह भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी या ऐसी कंपनियों के किसी संघ 88[या किसी केंद्रीय या राज्य अधिनियम के अधीन स्थापित या गठित किए गए किसी प्राधिकरण या किसी बोर्ड या किसी निगम या किसी अन्य निकाय] के स्वामित्वाधीन है;

89[() उसने केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी अन्य कानूनी निकाय के साथ किसी नर्इ अवसंरचना सुविधा का (i) विकास करने, या (ii) प्रचालन और अनुरक्षण करने, या (iii) विकास, प्रचालन और अनुरक्षण के लिए करार किया है;]

() उसने 1 अप्रैल, 1995 को या उसके पश्चात् अवसंरचना सुविधा का प्रचालन और अनुरक्षण करना आरंभ कर दिया है :

परन्तु जहां किसी ऐसे उद्यम द्वारा, (जिसे इस धारा में इसमें आगे अंतरक उद्यम कहा गया है) जिसने ऐसी अवसंरचना सुविधा का विकास किया है किसी अन्य उद्यम को (जिसे इस धारा में इसमें आगे अंतरिती उद्यम कहा गया है), केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारी या कानूनी निकाय के साथ हुए करार के अनुसार, उसकी ओर से अवसंरचना सुविधा प्रचालित और अनुरक्षित करने के प्रयोजन के लिए 1 अप्रैल, 1999 को या उसके बाद अवसंरचना सुविधा का अंतरण किया जाता है, वहां इस धारा के उपबंध अंतरिती उद्यम को ऐसे लागू होंगे मानो वह ऐसा उद्यम हो जिसको यह खंड लागू होता है और लाभ तथा अभिलाभ से कटौती ऐसी अपर्यवेसित अवधि के लिए ऐसे अंतरक उद्यम को उपलब्ध होगी जिसके दौरान अंतरक उद्यम कटौती के लिए तब हकदार होता जब अंतरण न हुआ होता।

90[स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "अवसंरचना सुविधा" का अर्थ है,–

() कोर्इ सड़क, जिसके अंतर्गत चुंगी सड़क, कोर्इ पुल या कोर्इ रेल प्रणाली सम्मिलित है;

() कोर्इ राजमार्ग परियोजना, जिसके अंतर्गत ऐसे आवासन या अन्य क्रियाकलाप सम्मिलित हैं, जो राजमार्ग परियोजना के अभिन्न भाग हैं;

() कोर्इ जल प्रदाय परियोजना, जल उपचार प्रणाली, सिंचार्इ परियोजना, स्वच्छता और मल वहन प्रणाली या ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली;

() पत्तन91, विमान पत्तन, अंतर्देशीय जल मार्ग 92[, अंतर्देशीय पत्तन या समुद्र में नौचालन चैनल;]]

93[(ii) किसी ऐसे उपक्रम को लागू होती है, जिसने दूरसंचार सेवाएं, चाहे बेसिक हों या सेलुलर, जिनके अंतर्गत रेडियो पेजिंग, घरेलू उपग्रह सेवा, या ट्रंक नेटवर्क, ब्राडबैंड नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी हैं, 1 अप्रैल, 1995 को या उसके पश्चात् किंतु 31 मार्च, 94[2005] को या उसके पूर्व प्रदान करना आरंभ कर दिया है या वह आरंभ करता है।]

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "घरेलू उपग्रह" से दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के लिए किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्वाधीन या उसके द्वारा प्रचालित कोर्इ उपग्रह है।]

(iii) किसी ऐसे उपक्रम को लागू होती है, जो 1 अप्रैल, 1997 को आरंभ होने वाली और 31 मार्च, 95[2006] को समाप्त होने वाली अवधि के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा बनार्इ गर्इ और अधिसूचित96 स्कीम के अनुसार, केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित97 किसी औद्योगिक पार्क 98[या विशेष आर्थिक जोन] का विकास करता है, विकास और प्रचालन करता है या अनुरक्षण और प्रचालन करता है :

99[परन्तु ऐसी किसी दशा में जहां कोर्इ उपक्रम, 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् औद्योगिक पार्क का या 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात् किसी विशेष आर्थिक जोन का विकास करता है और, यथास्थिति, ऐसे औद्योगिक पार्क या विशेष आर्थिक जोन का प्रचालन और अनुरक्षण किसी अन्य उपक्रम को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् अंतरिती उपक्रम कहा गया है) अंतरित करता है वहां उपधारा (1) के अधीन कटौती ऐसे अंतरिती उपक्रम को दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों में शेष अवधि के लिए अनुज्ञात की जाएगी मानो प्रचालन और अनुरक्षण ऐसे अंतरिती उपक्रम को इस प्रकार अंतरित न किया गया हो :]

1[परंतु यह और कि ऐसे किसी उपक्रम की दशा में, जो किसी औद्योगिक पार्क का विकास करता है, विकास और प्रचालन करता है या अनुरक्षण और प्रचालन करता है, इस खंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "31 मार्च, 2006", अंकों और शब्द के स्थान पर "31 मार्च, 1क[2011]" अंक और शब्द रख दिए गए हों;]

(iv) ऐसे किसी 2[उपक्रम] को लागू होती है, जो,–

() विद्युत के उत्पादन या उत्पादन और वितरण के लिए भारत के किसी भाग में स्थापित किया जाता है, यदि वह 1 अप्रैल, 1993 को आरंभ होने वाली और 31 मार्च, 3-4[2011] को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय विद्युत का उत्पादन प्रारंभ करता है;

() 1 अप्रैल, 1999 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 3-4[2011] को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय नर्इ पारेषण या वितरण लाइनों के नेटवर्क बिछाकर पारेषण या वितरण प्रारंभ करता है :

परन्तु उपखंड () के अधीन किसी 5[उपक्रम] को इस धारा के अंतर्गत कटौती पारेषण या वितरण के लिए केवल नर्इ लाइनों का ऐसा नेटवर्क बिछाने से व्युत्पन्न लाभों के संबंध में अनुज्ञात की जाएगी;

6[() 1 अप्रैल, 2004 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 7[2011] को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय पारेषण या वितरण लाइनों के विद्यमान नेटवर्क का पर्याप्त नवीकरण और आधुनिकीकरण प्रारंभ करता है।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, "पर्याप्त नवीकरण और आधुनिकीकरण" से पारेषण या वितरण लाइनों के नेटवर्क में, के संयंत्र और मशीनरी में 1 अप्रैल, 2004 को ऐसे संयंत्र और मशीनरी के बही मूल्य के कम से कम पचास प्रतिशत तक की वृद्धि अभिप्रेत है;]

8[(v) किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्वाधीन और किसी विद्युत उत्पादन संयंत्र की पुनर्संरचना या पुनसज्जीवन के लिए स्थापित किसी उपक्रम को लागू होती है, यदि–

() ऐसी भारतीय कंपनी 30 नवंबर, 2005 के पूर्व बनार्इ गर्इ है और जिसमें पब्लिक सेक्टर कंपनियों की, विद्युत उत्पादन संयंत्र की स्वामी कंपनी को उधार देने वालों के प्रतिभूति हित को प्रवृत्त करने के प्रयोजनों के लिए बहुमत में साधारण शेयर सहभागिता है और ऐसी भारतीय कंपनी इस खंड के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा 31 दिसंबर, 2005 से पूर्व अधिसूचित9 की जाती है;

() ऐसा उपक्रम 31 मार्च, 10[2011] से पूर्व विद्युत का उत्पादन या पारेषण या वितरण करना प्रारंभ करता है;]

10क[10ख[(vi) देश के आर-पार प्राकृतिक गैस वितरण नेटवर्क, जिसके अंतर्गत पाइप लाइनें और भंडारण सुविधाएं ऐसे नेटवर्क का अभिन्न भाग हैं, बिछाने और उसके प्रचालन का कारबार करने वाला कोर्इ उपक्रम, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–

(क) वह भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी या ऐसी कंपनियों के किसी कन्सोरटियम या किसी केन्द्रीय या राज्य अधिनियम के अधीन स्थापित या गठित किसी प्राधिकरण या किसी बोर्ड या किसी निगम के स्वामित्वाधीन है;

(ख) उसे पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 (2006 का 19) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड द्वारा अनुमोदित किया गया है और केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया गया है;

(ग) उसकी कुल पाइपलाइन क्षमता का एक-तिहार्इ निर्धारिती से भिन्न किसी व्यक्ति या किसी सहयुक्त व्यक्ति द्वारा सामान्य वाहक आधार पर उपयोग करने के लिए उपलब्ध है;

(घ) उसने 1 अप्रैल, 2007 को या उसके पश्चात् प्रचालन करना आरंभ कर दिया है या करता है; और

(ड़) कोर्इ अन्य शर्त, जो विहित की जाए।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती के संबंध में, किसी "सहयुक्त व्यक्ति" से ऐसा कोर्इ व्यक्ति अभिप्रेत है–

(i) जो निर्धारिती के प्रबंधन या नियंत्रण या पूंजी में प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से या एक या अधिक मध्यवर्तियों के माध्यम से भाग लेता है;

(ii) जो निर्धारिती में प्रत्यक्ष रूप से या अप्रत्यक्ष रूप से छब्बीस प्रतिशत से अन्यून मतदान की शक्ति वाले शेयरों को धारित करता है;

(iii) जो निर्धारिती के शासी बोर्ड के आधे से अधिक बोर्ड निदेशकों या सदस्यों की अथवा बोर्ड के एक या अधिक कार्यकारी निदेशकों या कार्यकारी सदस्यों की नियुक्ति करता है; या

(iv) जो निर्धारिती के कुल उधारों के दस प्रतिशत से अन्यून की गारंटी देता है।]]

(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, प्रारंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक उत्तरवर्ती निर्धारण वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए उस उपधारा के अधीन कटौती की मात्रा का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए, उस पात्र कारबार के, जिसको उपधारा (1) के उपबंध लागू होते हैं, लाभ और अभिलाभ की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो प्रारंभिक निर्धारण वर्ष से और जिसके लिए अवधारण किया जाना है उस निर्धारण वर्ष तक और उसके सहित प्रत्येक पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान ऐसा पात्र कारबार निर्धारिती की आय का एकमात्र स्रोत हो।

(6) उपधारा (4) में दी गर्इ किसी बात के होते हुए भी, जहां आवासन या अन्य क्रियाकलाप राजमार्ग परियोजना का अभिन्न भाग है और जिसके लाभों की संगणना ऐसे आधार और रीति से की जाती है, जो विहित11 की जाए, वहां ऐसा लाभ कर के लिए दायी नहीं होगा जहां लाभ किसी विशेष आरक्षित खाते में अंतरित कर दिया गया है और जिसका वास्तव में राजमार्ग परियोजना के लिए जिसके अंतर्गत आवासन और अन्य क्रियाकलाप नहीं हैं उस वर्ष के बाद, जिसमें ऐसी रकम आरक्षित खाते में अंतरित की गर्इ थी, तीन वर्ष की समाप्ति के पूर्व उपयोग किया जा रहा है और वह रकम, जो अप्रयुक्त रह गर्इ है, उस वर्ष की आय के रूप में, जिसमें आरक्षित लेखा में अंतरण होता है, आय के रूप में कर के लिए प्रभार्य होगी।

(7) किसी 12[उपक्रम] से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभों से उपधारा (1) के अंतर्गत 13[कटौती] तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक जिस निर्धारण वर्ष के लिए कटौती का दावा किया गया हो उस निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए उस 12[उपक्रम] के लेखे धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापाल द्वारा संपरीक्षा कर दी गर्इ है और निर्धारिती अपनी आय की विवरणी के साथ सम्यक्त: हस्ताक्षरित और सत्यापित ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट विहित फार्म14 में नहीं दे देता है।

(8) जहां किसी पात्र कारबार के प्रयोजनों के लिए धारित कोर्इ माल 15[या सेवाएं] निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले किसी अन्य कारबार को अंतरित की जाती हैं या जहां निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले किसी अन्य कारबार के प्रयोजनों के लिए धारित कोर्इ माल 15[या सेवाएं] पात्र कारबार को अंतरित की जाती हैं और दोनों दशाओं में, उस पात्र कारबार के लेखाओं में ऐसे अंतरण के लिए अभिलिखित प्रतिफल, यदि कोर्इ हो, अंतरण की तारीख को उस माल 15[या सेवाओं] के बाजार मूल्य के बराबर नहीं है, वहां इस धारा के अंतर्गत कटौती के प्रयोजनों के लिए, उस पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो अंतरण, दोनों दशाओं में, उस तारीख को उस माल 15[या सेवाओं] के बाजार मूल्य पर किया गया हो :

परन्तु जहां निर्धारण अधिकारी की राय में, इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रीति से पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने में असाधारण कठिनार्इ होती है वहां निर्धारण अधिकारी लाभ या अभिलाभ की संगणना ऐसे उचित आधार पर करेगा जो वह ठीक समझे।

16[स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए किसी माल या सेवाओं के संबंध में, "बाजार मूल्य" से वह कीमत अभिप्रेत है जो ऐसे माल या सेवाओं से खुले बाजार में साधारणतया प्राप्त होगी।]

(9) जहां किसी निर्धारिती की दशा में, किसी 17[उपक्रम] या उद्यम के लाभ और अभिलाभ की किसी रकम का किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस धारा के अंतर्गत दावा किया जाता है और वह अनुज्ञात किया जाता है, वहां ऐसे लाभ और अभिलाभ के परिमाण तक कटौती "ग - कतिपय आय के संबंध में कटौतियां" शीर्ष के अंतर्गत इस अध्याय के किसी अन्य उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी और किसी भी दशा में, यथास्थिति, 17[उपक्रम] या उद्यम के ऐसे पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ से अधिक नहीं होगी;

(10) जहां किसी निर्धारण अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि उस पात्र कारबार को, जिसको यह धारा लागू होती है, चलाने वाले निर्धारिती और किसी अन्य व्यक्ति के बीच निकट संबंध होने के कारण या किसी अन्य कारण से, उनके बीच कारबार को ऐसे सामान्य लाभ से, जिसकी पात्र कारबार में उत्पन्न होने की आशा की जाती है, अधिक लाभ होता है, वहां निर्धारण अधिकारी इस धारा के अंतर्गत कटौती के प्रयोजनों के लिए उस पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने में लाभ की उतनी रकम लेगा जो उससे उचित रूप से व्युत्पन्न हुर्इ समझी जा सकती है।

(11) केन्द्रीय सरकार ऐसी जांच करने के बाद, जो वह ठीक समझे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस धारा द्वारा दी गर्इ छूट औद्योगिक उपक्रमों के किसी वर्ग को उस तारीख से लागू नहीं होगी जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे।

(12) जहां भारतीय कंपनी का कोर्इ उपक्रम, जो इस धारा के अंतर्गत कटौती के लिए हकदार है, इस धारा में उल्लिखित अवधि की समाप्ति से पूर्व समामेलन या अविलयित की किसी स्कीम में किसी अन्य भारतीय कंपनी को अंतरित किया जाता है, वहां–

() उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन या अविलियन हो, समामेलक या अविलयित कंपनी को इस धारा के अंतर्गत कोर्इ कटौती अनुज्ञेय नहीं होगी; तथा

() इस धारा के उपबंध, जहां तक हो सके, समामेलित या परिणामी कंपनी को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे समामेलक या अविलयित कंपनी को तब लागू होते जब समामेलन या अविलयन न हुआ होता।

17क[(12क) उपधारा (12) में अंतर्विष्ट कोर्इ बात ऐसे किसी उद्यम या उपक्रम को लागू नहीं होगी जो 1 अप्रैल, 2007 को या उसके पश्चात् समामेलन या अविलयन की किसी स्कीम में अंतरित किया जाता है।]

18[(13) इस धारा में की कोर्इ बात, उपधारा (4) के खंड () के उपखंड (iii) में निर्दिष्ट स्कीम के अनुसार, 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् अधिसूचित किसी विशेष आर्थिक जोन को लागू नहीं होगी।]

19[स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए, इसके द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस धारा की कोर्इ बात उपधारा (4) में निर्दिष्ट ऐसे कारबार के संबंध में लागू नहीं होगी जो किसी व्यक्ति द्वारा (जिसमें केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार भी है) दी गर्इ संकर्म संविदा की प्रकृति का है, और जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट उपक्रम या उद्यम द्वारा निष्पादित किया जाता है।]

 

74. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से धारा 80झक और धारा 80झख, धारा झक के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 80झक, जिसे वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित किया गया था और बाद में वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से, वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1994 से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994/1.4.1995 से, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1996/भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1998 से, आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1995/भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1998 से या वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1998/भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.1999 से संशोधित किया गया था, निम्नलिखित रूप में थीं :

'80झक. कतिपय दशाओं में औद्योगिक उपक्रमों आदि से लाभों और अभिलाभों की बाबत कटौती–(1) जहां निर्धारिती की सकल कुल आय में कोर्इ ऐसे लाभ और अभिलाभ सम्मिलित हैं जो किसी औद्योगिक उपक्रम या होटल या पोत के प्रचालन या कोर्इ अवसंरचना प्रसुविधा विकसित करने, अनुरक्षण और प्रचालन करने अथवा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान और विकास तथा रेडियो पेजिंग, घरेलू उपग्रह सेवा या ट्रंकिंग नेटवर्क और इलैक्ट्रोनिक डेटा इंटरचेंज सेवाओं सहित बेसिक या सैलुलर दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने अथवा आवास परियोजनाओं का सन्निर्माण और विकास अथवा औद्योगिक पार्क का प्रचालन या वाणिज्यिक उत्पादन अथवा पूर्वोत्तर क्षेत्र या भारत के किसी भाग में खनिज तेल का परिष्करण करने के कारबार से (ऐसे कारबार को इसमें इसके पश्चात् पात्र कारबार कहा गया है), जिसे यह धारा लागू होती है, 1 अप्रैल, 1997 को या इसके पश्चात् व्युत्पन्न हो, वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में, ऐसे लाभ और अभिलाभ में से, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट प्रतिशत के बराबर रकम की और उतने निर्धारण वर्षों के लिए जितने उपधारा (6) में विनिर्दिष्ट किए जाएं, कटौती अनुज्ञात की जाएगी।

(2) यह धारा किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम को लागू होती है जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–

(i) वह पहले से विद्यमान किसी कारबार को खंडित या पुनर्गठित करके नहीं बना है :

परन्तु यह शर्त ऐसे किसी औद्योगिक उपक्रम की बाबत लागू नहीं होगी जो निर्धारिती द्वारा किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम के कारबार के, जो धारा 33ख में निर्दिष्ट है, उस धारा में उल्लिखित परिस्थितियों में और अवधि के भीतर पुन:स्थापन, पुनर्गठन या पुन:चालन के फलस्वरूप बना है;

(ii) वह किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार को अंतरण करके नहीं बना है;

(iii) वह भारत के किसी भाग में ऐसी वस्तु या चीज का विनिर्माण या उत्पादन करता है जो ग्यारहवीं अनुसूची की सूची में उल्लिखित वस्तु या चीज नहीं है, या भारत के किसी भाग में एक या अधिक शीतागार संयंत्र या संयंत्रों का प्रचालन करता है :

परन्तु किसी लघु औद्योगिक उपक्रम या खंड (iv) के उपखंड () में निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रम, जो 1 अप्रैल, 1993 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 2000 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी वस्तु या चीज का विनिर्माण या उत्पादन आरंभ करता है, के संबंध में इस खंड की शर्त इस प्रकार लागू होगी मानो "जो ग्यारहवीं अनुसूची की सूची में विनिर्दिष्ट वस्तु या चीज नहीं है" शब्दों का लोप कर दिया गया हो;

(iv) () किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो उपखंड () या उपखंड () में उल्लिखित नहीं है और जो 1 अप्रैल, 1991 को आरंभ होने वाली और 31 मार्च, 1995 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान या ऐसी अतिरिक्त अवधि के दौरान, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा किसी विशिष्ट औद्योगिक उपक्रम के प्रति निर्देश से विनिर्दिष्ट करे, किसी समय वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन या ऐसे संयंत्र या संयंत्रों का प्रचालन आरंभ करता है;

() किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो आठवीं अनुसूची में उल्लिखित किसी भी औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्य में अवस्थित है या शक्ति के उत्पादन या उत्पादन तथा वितरण के लिए भारत के किसी भाग में स्थापित किया गया है और जो 1 अप्रैल, 1993 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 2000 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन अथवा अपने शीतागार संयंत्र या संयंत्रों का प्रचालन अथवा शक्ति का उत्पादन प्रारंभ करता है :

परन्तु यह कि किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो भारत के किसी भी भाग में शक्ति के उत्पादन या उत्पादन और वितरण के लिए स्थापित है, समाप्त होने वाली अवधि का वही प्रभाव होगा मानो "1998" अंकों के स्थान पर "2003" अंक प्रतिस्थापित किए गए हों;

() किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो किसी ऐसे औद्योगिक रूप से पिछड़े जिले में अवस्थित है, जिसे केन्द्रीय सरकार, विहित मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में 'क' प्रवर्ग का औद्योगिक रूप से पिछड़ा जिला या 'ख' प्रवर्ग का औद्योगिक रूप से पिछड़ा जिला विनिर्दिष्ट करे, और, वह 1 अक्तूबर, 1994 को आरंभ होने वाली और 31 मार्च, 2000 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान प्रवर्ग के औद्योगिक रूप से पिछड़े जिले या प्रवर्ग 'ख' के औद्योगिक रूप से पिछड़े जिले के बीच में किसी समय वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन अथवा अपने शीतागार संयंत्र या संयंत्रों का प्रचालन आरंभ करता है;

() किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो लघु औद्योगिक उपक्रम है, उपखंड (ख) या उपखंड (ग) में उल्लिखित नहीं है, और जो 1 अप्रैल, 1995 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 2000 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन अथवा अपने शीतागार संयंत्र का प्रचालन आरंभ करता है;

(v) उस दशा में, जहां औद्योगिक उपक्रम, वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन करता है, वहां वह उपक्रम शक्ति की सहायता से चलार्इ जाने वाली विनिर्माण प्रक्रिया में दस या अधिक कर्मकार नियोजित करता है अथवा शक्ति की सहायता के बिना चलार्इ जाने वाली विनिर्माण प्रक्रिया में बीस या अधिक कर्मकार नियोजित करता है।

स्पष्टीकरण 1.–इस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए ऐसी मशीनरी या संयंत्र को, जो निर्धारिती से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर प्रयुक्त किया गया था, किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र नहीं समझा जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :

() ऐसी मशीनरी या संयंत्र का निर्धारिती द्वारा प्रतिष्ठापित किए जाने की तारीख को पहले किसी समय भारत में प्रयोग नहीं किया गया था;

() ऐसी मशीनरी या संयंत्र का भारत के बाहर किसी देश से भारत में आयात किया गया है; और

() निर्धारिती द्वारा मशीनरी या संयंत्र प्रतिष्ठापित किए जाने की तारीख से पहले किसी अवधि के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय की संगणना करने में उस मशीनरी या संयंत्र के संबंध में उस अधिनियम के उपबंधों के अंतर्गत अवक्षयण के कारण कर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की गर्इ है या अनुज्ञेय नहीं है।

स्पष्टीकरण 2.–जहां किसी औद्योगिक उपक्रम की दशा में, किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त कोर्इ मशीनरी या संयंत्र या उसका कोर्इ भाग किसी नए कारबार को अंतरित किया जाता है और इस प्रकार अंतरित मशीनरी या संयंत्र या उसके भाग का कुल मूल्य उस कारबार में प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं है, वहां इस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए यह समझा जाएगा कि उसमें उल्लिखित शर्त का अनुपालन हो गया है।

(3) यह धारा किसी पोत को उस दशा में लागू होती है जिसमें निम्नलिखित सभी शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात् :–

(i) वह किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्वाधीन है और उसका प्रयोग पूरी तरह से उस कंपनी द्वारा किए जा रहे कारबार के प्रयोजनों के लिए किया जाता है;

(ii) वह भारतीय कंपनी द्वारा उसके अर्जन की तारीख के पूर्व भारत में निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन नहीं था या उसने उसका प्रयोग भारत के राज्यक्षेत्रीय सागर खंड में नहीं किया है; तथा

(iii) वह 1 अप्रैल, 1991 को आंरभ होने वाली तथा 31 मार्च, 1995 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय भारतीय कंपनी द्वारा प्रयोग में लाया जाता है;

(4) यह धारा किसी होटल के कारबार को उस दशा में, लागू होती है जिसमें–

(i) शर्त (i), (ii) और (v); और

(ii) शर्त (iii) या (iv) में से कोर्इ; या

(iii) शर्त (iiiक) या (ivक) में से कोर्इ,

पूरी हो जाती है, अर्थात् :–

(i) होटल का कारबार पहले से विद्यमान किसी कारबार को खंडित या पुनर्गठित करके अथवा होटल के रूप में तत्पूर्व किसी भवन का या किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार को अंतरण करके नहीं बना है;

(ii) होटल का कारबार भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी के, जिसकी समादत्त पूंजी पांच लाख रुपए से अन्यून है, स्वामित्वाधीन है और उसके द्वारा चलाया जाता है;

(iii) किसी पहाड़ी क्षेत्र या ग्रामीण क्षेत्र या तीर्थ स्थान या ऐसे अन्य स्थान में, जो केन्द्रीय सरकार, किसी स्थान में पर्यटन के लिए अवसंरचना के विकास की आवश्यकता को और ऐसी अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, इस खंड के प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट करे, अवस्थित होटल का कारबार 1 अप्रैल, 1990 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 1994 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय आरंभ होता है;

(iiiक) किसी पहाड़ी क्षेत्र या ग्रामीण क्षेत्र या तीर्थ स्थान या ऐसे अन्य स्थान में, जो केन्द्रीय सरकार, किसी स्थान में पर्यटन के लिए अवसंरचना के विकास की आवश्यकता को और ऐसी अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, इस खंड के प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट करे, अवस्थित होटल का कारबार 1 अप्रैल, 1997 को आरंभ होने वाली और 31 मार्च, 2001 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय आरंभ होता है :

परन्तु इस खंड की कोर्इ बात कोलकाता, चेन्नर्इ, दिल्ली और मुंबर्इ की नगरपालिका की (चाहे वह नगरपालिका, नगर निगम, अधिसूचित क्षेत्र समिति, शहरी क्षेत्र समिति या छावनी बोर्ड या अन्य किसी भी नाम से ज्ञात हो) अधिकारिता के भीतर किसी स्थान में अवस्थित किसी होटल को लागू नहीं होगी;

(iv) किसी ऐसे होटल का कारबार जो–

(1) किसी स्थान में अवस्थित है, या

(2) इस उपधारा के खंड (iii) में निर्दिष्ट स्थान से भिन्न स्थान में अवस्थित है;

1 अप्रैल, 1991 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 1995 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय आरंभ होता है;

(ivक) इस उपधारा के खंड (iiiक) में निर्दिष्ट स्थान से भिन्न किसी स्थान में अवस्थित ऐसे होटल के कारबार, जो कोलकाता, चेन्नर्इ, दिल्ली और मुंबर्इ की नगरपालिका की (चाहे वह नगरपालिका, नगर निगम, अधिसूचित क्षेत्र समिति, शहरी क्षेत्र समिति या छावनी बोर्ड या अन्य किसी भी नाम से ज्ञात हो) अधिकारिता के भीतर स्थान में अवस्थित नहीं है, 1 अप्रैल, 1997 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 2001 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किसी समय आरंभ होता है;

(v) होटल विहित प्राधिकारी द्वारा तत्समय अनुमोदित है।

(4क) यह धारा किसी अवसंरचना प्रसुविधा के विकास, अनुरक्षण और प्रचालन का कारबार करने वाले किसी ऐसे उद्यम को लागू होती है जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–

(i) उद्यम, भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी कंपनी या ऐसी कंपनियों के किसी संघ के स्वामित्व में है;

(ii) उद्यम ने केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी अन्य कानूनी निकाय के साथ नर्इ अवसंरचना प्रसुविधा विकसित करने, अनुरक्षण और प्रचालन करने के लिए इस शर्त के अध्यधीन करार किया है कि यह अवसंरचना प्रसुविधा करार में दी गर्इ अवधि के भीतर, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारी या ऐसे अन्य कानूनी निकाय को अंतरित कर दी जाएगी;

(iii) उद्यम, 1 अप्रैल, 1995 को या उसके बाद अवसंरचना प्रसुविधा का प्रचालन और अनुरक्षण आरंभ करता है।

(4ख) यह धारा भारत में रजिस्ट्रीकृत किसी ऐसी कंपनी को लागू होती है जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान और विकास कर रही है और जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करती है, अर्थात् :–

(i) कंपनी का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान और विकास करना है;

(ii) कंपनी तत्समय विहित प्राधिकारी द्वारा 1 अप्रैल, 1999 से पूर्व किसी समय अनुमोदित की जाती है।

(4ग) यह धारा किसी ऐसे उपक्रम को लागू होती है जो 1 अप्रैल, 1995 को या उसके पश्चात् किसी समय किंतु 31 मार्च, 2000 के पूर्व रेडियो पेजिंग, धरेलू उपग्रह सेवा या ट्रंकिंग नेटवर्क और इलैक्ट्रोनिक डाटा इंटरचेंज सेवाओं सहित बेसिक या सेलुलर दूरसंचार सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ करता है।

(4घ) यह धारा किसी ऐसे उपक्रम को लागू होती है जो केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी औद्योगिक पार्क का प्रचालन 1 अप्रैल, 1997 को प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 2002 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान ऐसी स्कीम के अनुसार, जो उस सरकार द्वारा बनार्इ और अधिसूचित की जाए, प्रारंभ करता है;

(4ड़) यह धारा ऐसे किसी उपक्रम को लागू होती है जो तारीख 1 अपै्रल, 1997 को या उसके पश्चात् पूर्वोत्तर क्षेत्र में या भारत के किसी भाग में खनिज तेल का वाणिज्यिक उत्पादन या परिष्करण प्रारंभ करता है :

परन्तु यह और कि इस धारा के उपबंध खनिज तेल के परिष्करण की दशा में वहां लागू होंगे जहां उपक्रम 1 अक्तूबर, 1998 को या इसके पश्चात् परिष्करण प्रारंभ करता है।

(4च) यह धारा किसी ऐसे उपक्रम को लागू होती है जो इस शर्त के अध्यधीन स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित आवास सन्निर्माण परियोजनाओं के विकास में लगा हुआ है कि भूमि के प्लाट का आकार न्यूनतम एक एकड़ है और आवासीय यूनिट के पास एक हजार प्रतिवर्ग फीट से अनधिक निर्मित्त क्षेत्र नहीं है:

परन्तु यह तब जब कि उपक्रम आवास परियोजना का सन्निर्माण और विकास का कार्य 1 अक्तूबर, 1998 को या इसके पश्चात् प्रारंभ करता है और इसे 31 मार्च, 2001 से पूर्व पूरा करता है।

(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम निम्नलिखित होगी, अर्थात् :–

(i) () किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो उपधारा (2) के खंड (iv) के उपखंड (क) या उपखंड () में निर्दिष्ट है, ऐसे औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का पच्चीस प्रतिशत;

() किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की दशा में, जो उपधारा (2) के खंड (iv) के उपखंड () या उपखंड () में निर्दिष्ट है, प्रारंभिक पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत और तत्पश्चात् ऐसे औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का पच्चीस प्रतिशत :

परन्तु जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है, वहां इस खंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पच्चीस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "तीस प्रतिशत" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों :

परन्तु यह और कि प्रवर्ग 'ख' के औद्योगिक रूप से पिछड़े जिले में अवस्थित किसी औद्योगिक उपक्रम की दशा में, इस खंड के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पांच निर्धारण वर्षं" शब्दों के स्थान पर "तीन निर्धारण वर्ष" प्रतिस्थापित किए गए हों;

(iक) उपधारा (4क) में निर्दिष्ट किसी उद्यम की दशा में, प्रारंभिक पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत और उसके पश्चात् ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का तीस प्रतिशत;

(iख) उपधारा (4ख) में निर्दिष्ट किसी कंपनी की दशा में, ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत;

(iग) किसी ऐसे उपक्रम की दशा में, जो उपधारा (4ग) में निर्दिष्ट है, प्रारंभिक पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत और उसके पश्चात् ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का पच्चीस प्रतिशत :

परन्तु जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है, वहां इस खंड के उपबंधों का प्रभाव इस प्रकार होगा मानो "पच्चीस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "तीस प्रतिशत" प्रतिस्थापित किए गए हों;

(iघ) किसी ऐसे औद्योगिक पार्क की दशा में, जो उपधारा (4घ) में निर्दिष्ट है, प्रारंभिक पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत और उसके बाद ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का पच्चीस प्रतिशत :

परन्तु जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है, वहां इस खंड के उपबंधों का प्रभाव इस प्रकार होगा मानो "पच्चीस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "तीस प्रतिशत" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।

(ii) उपधारा (4) के खंड (iii) में निर्दिष्ट होटल की दशा में, ऐसे होटल के कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का पचास प्रतिशत :

परन्तु यह तब जब कि उक्त होटल, इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार, इस खंड के प्रयोजन के लिए विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित है :

परन्तु यह और कि विहित प्राधिकारी द्वारा 31 मार्च, 1992 से पूर्व अनुमोदित उक्त होटल 1 अप्रैल, 1991 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के संबंध में इस धारा के प्रयोजनों के लिए विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित समझा जाएगा;

(iiक) उपधारा (4) के खंड (iiiक) में निर्दिष्ट होटल की दशा में, ऐसे होटल के कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का पचास प्रतिशत :

परन्तु यह कि उक्त होटल इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार इस खंड के प्रयोजनों के लिए विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित है;

(iii) उपधारा (4) के खंड (iv) या (ivक) में निर्दिष्ट होटल की दशा में, ऐसे होटल के कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का तीस प्रतिशत;

(iv) पोत की दशा में, ऐसे पोत से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का तीस प्रतिशत;

(v) उपधारा (4ड़) में निर्दिष्ट उपक्रम की दशा में, प्रारंभिक सात निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत;

(vi) उपधारा (4च) में निर्दिष्ट आवास परियोजना की दशा में, प्रारंभिक सात निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत।

(6) उपधारा (1) में निर्दिष्ट निर्धारण वर्षों की संख्या, जिनमें आरंभिक निर्धारण वर्ष भी सम्मिलित है, निम्न- लिखित होगी–

(i) ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो सहकारी सोसाइटी है, और जिसे किसी औद्योगिक उपक्रम से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, बारह;

(ii) ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो सहकारी सोसाइटी नहीं है, जिसे उपधारा (2) के खंड (iv) के उपखंड () या उपखंड () या उपखंड () में विनिर्दिष्ट किसी औद्योगिक उपक्रम से या उस उपधारा के खंड (iv) के उपखंड () में विनिर्दिष्ट प्रवर्ग 'क' के औद्योगिक रूप से पिछड़े जिले में अवस्थित औद्योगिक उपक्रम से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, दस;

(iiक) ऐसे निर्धारिती की दशा में, जिसे उपधारा (2) के खंड (iv) के उपखंड () में विनिर्दिष्ट 'ख' प्रवर्ग के औद्योगिक रूप से पिछड़े जिले में अवस्थित किसी उपक्रम और जो ऐसा इस उपधारा के खंड (i) और (ii) में नहीं आता है, से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, आठ;

(iii) किसी अन्य निर्धारिती की दशा में, जिसे पोत से या होटल के कारबार से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, दस;

(iv) ऐसे निर्धारण वर्षों, जिनमें निर्धारिती अवसंरचना प्रसुविधा का प्रचालन और अनुरक्षण प्रारंभ करता है, से आरंभ होने वाले बारह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले कोर्इ भी दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्ष :

परन्तु यह कि जहां निर्धारिती, उपधारा (12) के खंड (गक) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट किसी अवसरंचना प्रसुविधा का प्रचालन और अनुरक्षण प्रारंभ करता है, वहां इस खंड के उपबंध उसी प्रकार प्रभावी होंगे मानो "बारह" शब्द के स्थान पर "बीस" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों;

(v) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में जो उपधारा (4ख) में निर्दिष्ट कोर्इ कंपनी है, जिसे वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान और विकास से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, पांच;

(vi) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो उपधारा (4ग) में निर्दिष्ट कोर्इ उपक्रम है, जिसे रेडियो पेजिंग और घरेलू उपग्रह सेवा सहित दूर संचार सेवाओं से, चाहे बेसिक हों या सेलुलर, लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, दस;

(vii) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो उपधारा (4घ) में निर्दिष्ट कोर्इ उपक्रम है, जिसे किसी औद्योगिक पार्क के प्रचालन से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, दस;

(viii) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो उपधारा (4ड़) में निर्दिष्ट कोर्इ उपक्रम है, जिसे 1 अप्रैल, 1997 को या इसके पश्चात् जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र या देश के अन्य भागों में खनिज तेल के वाणिज्यिक उत्पादन या परिष्करण से लाभ और अभिलाभ व्युत्पन्न हो रहे हैं, सात।

(7) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, आरंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक उत्तरवर्ती निर्धारण वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए उपधारा (5) के अंतर्गत कटौती की मात्रा का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए, उस पात्र कारबार के, जिसे उपधारा (1) के उपबंध लागू होते हैं, लाभ और अभिलाभ की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो प्रारंभिक निर्धारण वर्ष से और जिसके लिए अवधारण किया जाना है उस निर्धारण वर्ष तक और उसके सहित प्रत्येक पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान ऐसा पात्र कारबार निर्धारिती की आय का एकमात्र स्रोत है।

(7क) उपधारा (4क) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां आवास और अन्य क्रियाकलाप राजमार्ग परियोजना और ऐसे लाभ के, जो ऐसे आधार तथा रीति पर, जो विहित की जा सकेगी, संगठित किए जाते हैं, एकीकृत भाग हैं, वहां ऐसा लाभ कर के लिए दायी नहीं होगा जहां लाभ विशेष आरक्षित खाते के लिए अंतरित किया गया हो और उसका उस वर्ष जिसमें ऐसी रकम आरक्षित खाते में अंतरित की गर्इ के आगामी तीन वर्षों, की समाप्ति से पूर्व राजमार्ग परियोजना; जिसमें आवास और अन्य क्रियाकलाप नहीं हैं, के लिए वास्तविक रूप में उपयोग किया जाता है; और शेष अनुपयोगी रकम उस वर्ष की आय के रूप में कर के लिए प्रभार्य होगी जिस वर्ष में आरक्षित खाते के लिए अंतरण हुआ।

(8) जहां निर्धारिती कंपनी या सहकारी सोसाइटी से भिन्न व्यक्ति है, वहां किसी औद्योगिक उपक्रम से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभों से उपधारा (1) के अंतर्गत कटौती तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक जिस निर्धारण वर्ष के लिए कटौती का दावा किया गया हो उस निर्धारण वर्ष के सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए उस औद्योगिक उपक्रम के खाते धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापाल द्वारा संपरीक्षित नहीं किए गए हैं और निर्धारिती अपनी आय की विवरणी के साथ ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक्त: हस्ताक्षरित और सत्यापित ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट विहित प्ररूप में नहीं दे देता है।

(9) जहां किसी पात्र कारबार के प्रयोजनों के लिए धारित कोर्इ माल निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले किसी अन्य कारबार को अंतरित किया जाता है या जहां निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले किसी अन्य कारबार के प्रयोजनों के लिए धारित कोर्इ माल पात्र कारबार को अंतरित किया जाता है और दोनों दशाओं में उस पात्र कारबार के खातों में ऐसे अंतरण के लिए अभिलिखित प्रतिफल, यदि कोर्इ हो, अंतरण की तारीख को उस माल के बाजार मूल्य के बराबर नहीं है, वहां इस धारा के अधीन कटौती के प्रयोजनों के लिए, उस पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो अंतरण प्रत्येक दशा में उस तारीख को उस माल के बाजार मूल्य पर किया गया हो :

परन्तु जहां निर्धारण अधिकारी की राय में, इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रीति से पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने में असाधारण कठिनार्इ है, वहां निर्धारण अधिकारी लाभ और अभिलाभ की संगणना ऐसे उचित आधार पर करेगा जो वह ठीक समझे।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में, किसी माल के संबंध में "बाजार मूल्य" से वह कीमत अभिप्रेत है जो माल का खुले बाजार में विक्रय करने पर सामान्यतया प्राप्त होगी।

(9क) जहां किसी ऐसे निर्धारिती की दशा मे; जो कोर्इ औद्योगिक उपक्रम या कोर्इ होटल है के किसी लाभों और अभिलाभों की रकम का किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस धारा के अधीन दावा किया जाता है और इसे अनुज्ञात किया जाता है, वहां इन लाभों और अभिलाभों की सीमा तक कटौती इस अघ्याय के "ग-कतिपय आय के संबंध में कटौती" शीर्षक के किसी अन्य उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं होगी और यह किसी भी दशा में, यथास्थिति, उपक्रम या होटल के लाभों और अभिलाभों से अधिक नहीं होगी।

(10) जहां निर्धारण अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि उस पात्र कारबार को, जिसको यह धारा लागू होती है, चलाने वाले निर्धारिती और किसी अन्य व्यक्ति के बीच निकट संबंध होने के कारण या किसी अन्य कारण से, उनके बीच कारबार की इस प्रकार व्यवस्था की गर्इ है कि उनके बीच किए गए कारबार से निर्धारिती को ऐसे

सामान्य लाभ से, जिसकी उस पात्र कारबार में उत्पन्न होने की आशा की जा सकती है, अधिक लाभ होता है, वहां निर्धारण अधिकारी इस धारा के अंतर्गत कटौती के प्रयोजनों के लिए उस पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने में, लाभ की उतनी रकम लेगा जो उससे उचित (युक्तियुक्त) रूप से व्युत्पन्न हुर्इ समझी जा सकती है।

(11) केन्द्रीय सरकार ऐसी जांच करने के पश्चात्, जो वह ठीक समझे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह निदेश दे सकेगी कि इस धारा द्वारा दी गर्इ छूट औद्योगिक उपक्रमों के किसी वर्ग को उस तारीख से लागू नहीं होगी जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे।

(12) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(क) "घरेलू उपग्रह" से दूर संचार सेवाएं प्रदान करने के लिए किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्वाधीन या उसके द्वारा प्रचालित कोर्इ उपग्रह है;

(कक) "पहाड़ी क्षेत्र" से समुद्र तल से ऊपर एक हजार मीटर या उससे अधिक ऊंचार्इ में अवस्थित कोर्इ क्षेत्र है;

() "औद्योगिक उपक्रम" का वही अर्थ होगा जो धारा 33ख के स्पष्टीकरण में है;

() "प्रारंभिक निर्धारण वर्ष" से–

(1) किसी औद्योगिक उपक्रम के शीतागार संयंत्र या पोत या होटल की दशा में, उस पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जहां औद्योगिक उपक्रम किसी वस्तु या चीज का विनिर्माण या उत्पादन आरंभ करता है या शीतागार संयंत्र या संयंत्रों को प्रचालित करता है या पोत पहली बार प्रयोग में लाया जाता है या होटल का कारबार आरंभ किया जाता है;

(2) किसी अवसंरचना प्रसुविधा के विकास, प्रचालन और अनुरक्षण के कारबार में लगे किसी उद्यम की दशा में, निर्धारण वर्ष से निर्धारिती द्वारा अपने विकल्प पर विनिर्दिष्ट किया जाने वाला आरंभिक वर्ष अभिप्रेत है जो उस पूर्ववर्ष से आरंभ होने वाले बारह निर्धारण वर्षों के बाद नहीं आता हो जिस वर्ष में उद्यम अवसंरचना सुविधा का प्रचालन और अनुरक्षण आरंभ करता है;

(3) वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान और विकास करने वाली किसी कंपनी की दशा में, ऐसा निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जो उस पूर्ववर्ष के सुसंगत है जिसमें कंपनी उपधारा (4ख) के प्रयोजनों के लिए विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित की जाती है;

(4) किसी ऐसे उपक्रम की दशा में, जो उपधारा (4ग) में निर्दिष्ट है उस पूर्ववर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है, जिसमें उपक्रम रेडियो पेजिंग और घरेलू उपग्रह सेवा सहित दूरसंचार सेवाएं, चाहे बेसिक हों या सेलुलर उपलब्ध कराना प्रारंभ करता है;

(5) किसी ऐसे उपक्रम की दशा में, जो उपधारा (4घ) के अधीन निर्दिष्ट किसी औद्योगिक पार्क का प्रचालन कर रहा है, ऐसा निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जो उस पूर्ववर्ष के सुसंगत है जिसमें उपक्रम उक्त उपधारा के प्रयोजनों के लिए अधिसूचित ऐसे औद्योगिक पार्क का प्रचालन प्रारंभ करता है, सुसंगत है।

(6) उपधारा (4ड़) के अधीन निर्दिष्ट खनिज तेल के वाणिज्यिक उत्पादन या परिष्करण के कारबार में लगे किसी उपक्रम की दशा में, ऐसा निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जो उस पूर्व के सुसंगत है जिसमें खनिज तेल या वाणिज्यिक उत्पादन आरंभ करता है;

(गक) "अवसंरचना प्रसुविधा" का अर्थ है,–

(i) ऐसी कोर्इ सड़क, राजमार्ग, पुल, विमानपत्तन, पत्तन, रेल प्रणाली अथवा उसी प्रकार की कोर्इ अन्य लोक प्रसुविधा, जो बोर्ड द्वारा इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचित की जाए;

(ii) राजमार्ग परियोजना का एकीकृत भाग होने के कारण राजमार्ग परियोजना जिसमें आवास या अन्य क्रियाकलाप भी सम्मिलित है; और

(iii) कोर्इ जल प्रदाय परियोजना, सिंचार्इ परियोजना, स्वच्छता और मल व्ययन प्रणाली;

() "तीर्थ स्थान" से ऐसा स्थान अभिप्रेत है जहां कोर्इ मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरिजाघर या किसी राज्य या राज्यों में सर्वत्र विख्यात अन्य लोक उपासना स्थल अवस्थित है;

() "ग्रामीण क्षेत्र" से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जो–

(i) ऐसे क्षेत्र से भिन्न है जो किसी नगरपालिका की (चाहे वह नगरपालिका, नगर निगम, अधिसूचित क्षेत्र समिति, शहरी क्षेत्र समिति या किसी अन्य नाम से ज्ञात हो) या किसी छावनी बोर्ड की अधिकारिता के भीतर आता है और जिसकी जनसंख्या उस पूर्ववर्ती जनगणना के अनुसार, जिसके सुसंगत आंकड़े पूर्ववर्ष के प्रथम दिन से पूर्व प्रकाशित हो गए हैं, दस हजार से कम नहीं हैं; या

(ii) ऐसे क्षेत्र से भिन्न है जो उपखंड (i) में निर्दिष्ट नगरपालिका या छावनी बोर्ड की स्थानीय सीमाओं से इतनी दूरी के भीतर है जो पंद्रह किलोमीटर से अधिक नहीं है, केन्द्रीय सरकार, ऐसे क्षेत्र के विकास के प्रक्रम को (जिसके अंतर्गत ऐसे क्षेत्र के नगरीकरण का विस्तार और उसकी संभावनाएं भी सम्मिलित हैं) और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे;

() "लघु औद्योगिक उपक्रम" से वह औद्योगिक उपक्रम अभिप्रेत है जो पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को, उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 11ख के अंतर्गत लघु औद्योगिक उपक्रम समझा जाता है।

() "पूर्वोत्तर क्षेत्र" से अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों को समाविष्ट करने वाला क्षेत्र अभिप्रेत है।'

75. देखिए परिपत्र सं. 7/2002, तारीख 26.8.2002, परिपत्र सं. 10/2005, तारीख 16.12.2005 और परिपत्र सं. 1/2006, तारीख 12.1.2006। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गार्इड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

76. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) इस प्रकार थी :

'(1) जहां निर्धारिती की सकल कुल आय में कोर्इ ऐसे लाभ या अभिलाभ सम्मिलित हैं जो उपधारा (4) में निर्दिष्ट किसी औद्योगिक उपक्रम या उद्यम के किसी कारबार से (जिसे इसमें आगे पात्र कारबार कहा गया है) व्युत्पन्न हुए हैं, वहां निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में ऐसे लाभ और अभिलाभ में से इस धारा के उपबंधों के अनुसार, और उनके अधीन रहते हुए, उपधारा (2) में उल्लिखित अवधियों के दौरान किसी समय प्रारंभ होने वाले पहले पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे कारबार से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ के शतप्रतिशत के बराबर और उसके बाद अतिरिक्त पांच निर्धारण वर्षों के लिए ऐसे लाभ और अभिलाभ के पच्चीस प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :

परन्तु जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है, वहां इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "पच्चीस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "तीस प्रतिशत" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।'

77. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।

78. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2002 से भूतलक्षी प्रभाव से "अथवा विकास और प्रचालन करता है अथवा अनुरक्षण और प्रचालन करता है" शब्दों का लोप किया।

79. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

80. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

80क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से "या कोर्इ क्रास कंट्री प्राकृतिक गैस वितरण नेटवर्क बिछाता है और उसका प्रचालन आरंभ करता है" शब्दों का लोप किया जाएगा।

81. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, परन्तुक इस प्रकार था :

'परन्तु जहां निर्धारिती उपधारा (4) के खंड (i) के स्पष्टीकरण के खंड () में निर्दिष्ट किसी अवसंरचना सुविधा का प्रचालन और अनुरक्षण करना प्रारंभ करता है, वहां इस उपधारा के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "पन्द्रह वर्ष" शब्दों के स्थान पर "बीस वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित किए गए हों।'

82. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।

83. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से "किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

83क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से "या खंड (vi)" शब्दों का लोप किया जाएगा।

84. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "औद्योगिक उपक्रम" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

85. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

86. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "औद्योगिक उपक्रम" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

87. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "का (i) विकास करने (ii) अनुरक्षण और प्रचालन करने, या (iii) विकास, अनुरक्षण और प्रचालन करने" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

88. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

89. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपखंड () इस प्रकार था :

"() उसने केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी या किसी कानूनी निकाय के साथ नर्इ अवसंरचना सुविधा का (i) विकास करने; (ii) अनुरक्षण और प्रचालन करने; या (iii) विकास, अनुरक्षण और प्रचालन करने के लिए इस शर्त के अंतर्गत करार किया है कि ऐसी अवसंरचना सुविधा करार में लिखित अवधि के भीतर, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारी या ऐसे कानूनी निकाय को अंतरित कर दी जाएगी;"

90. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से संशोधित स्पष्टीकरण इस प्रकार था :

'स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "अवसंरचना सुविधा" का अर्थ है–

() ऐसी कोर्इ सड़क, पुल, विमान पत्तन, अंतर्देशीय जल सरणियां, और अंतर्देशीय पत्तन, रेल प्रणाली या उसी प्रकार की कोर्इ अन्य लोक सुविधा, जो बोर्ड द्वारा इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचित की जाए;

() कोर्इ राजमार्ग परियोजना जिसके अंतर्गत ऐसे आवासन या अन्य क्रियाकलाप भी सम्मिलित हैं जो राजमार्ग परियोजना के अभिन्न अंग हैं; और

() कोर्इ जल प्रदाय परियोजना, जल उपचार प्रणाली, सिंचार्इ परियोजना, स्वच्छता और मल वहन प्रणाली या ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली;'

परिपत्र सं. 7/2002, तारीख 26.8.2002 भी देखें। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

91. पत्तन की परिभाषा के लिए, देखिए तारीख 23.6.2000 का परिपत्र सं. 793। ब्यौरे के लिये देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

92. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से "या अंतर्देशीय पत्तन" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

93. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, खंड (ii) निम्नलिखित रूप में था :

"(ii) किसी ऐसे उपक्रम को, जिसने दूरसंचार सेवाएं, चाहे बेसिक हों या सेलुलर, जिनके अंतर्गत रेडियो पेजिंग, घरेलू उपग्रह सेवा या ट्रंक नेटवर्क, इलेक्ट्रानिक डाटा इंटरचेंज सेवाएं भी हैं, 1 अप्रैल, 1995 को या इसके पश्चात् किंतु 31 मार्च, 2000 से पूर्व प्रदान करना आरंभ कर दिया है या वह आरंभ करता है।"

94. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से "2004" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "2004" वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "2003" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

95. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से "2002" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

96. अधिसूचित औद्योगिक पार्क स्कीम 2002 के लिए और विशेष आर्थिक क्षेत्रों के संबंध में अधिसूचित स्कीम के लिए देखिए टैक्समैन्स इन्कम टैक्स रूल्स। अधिसूचित उपक्रमों आदि के लिए देखिए टैक्समेन्स डायरेक्ट टैक्सेज सर्कुलर्स एंड टैक्समैन्स इयरली टैक्स डाइजेस्ट एंड रेफरेंसर।

97. नियम 18ग देखें।

98. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

99. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2002 से भूतलक्षी प्रभाव से परन्तुक के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व परन्तुक इस प्रकार था :

"परन्तु ऐसे किसी दशा में, जहां उपक्रम 1 अप्रैल, 1999 को या उसके बाद औद्योगिक पार्क का विकास करता है और ऐसे औद्योगिक पार्क का प्रचालन और अनुरक्षण किसी अन्य उपक्रम को (जिसे इस धारा में इसके आगे अंतरिती उद्यम कहा गया है) अंतरित करता है, वहां उपधारा (1) के अधीन कटौती दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों में शेष अवधि के लिए ऐसे अंतरिती उपक्रम को ऐसी रीति में अनुज्ञात की जाएगी मानो प्रचालन और अनुरक्षण अंतरिती उपक्रम को इस प्रकार अंतरित न किया गया हो;"

1. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से अंत:स्थापित।

1क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से "2009" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

2. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "औद्योगिक उपक्रम" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3-4. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से "2010" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "2010" वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "2006" के स्थान प्रतिस्थापित किया गया था।

5. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "औद्योगिक उपक्रम" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

6. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

7. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 द्वारा "2010" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "2010" वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से "2006" के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।

8. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

9. अधिसूचित भारतीय कंपनी के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

10. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2008 से "2008" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "2008" वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से "2007" के स्थान पर प्रतिस्थापित किए गए थे।

10क. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

10ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से खंड (vi) का लोप किया जाएगा।

11. नियम 18खखड़ और फार्म सं. 10गगग देखिए।

12. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "औद्योगिक उपक्रम" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

13. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "जहां निर्धारिती, कंपनी या सहकारी सोसायटी से भिन्न व्यक्ति है, वहां" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

14. नियम 18खखख और फार्म सं. 10गगख देखिए।

15. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

16. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व स्पष्टीकरण इस प्रकार था :

"स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए किसी माल के संबंध में बाजार मूल्य" से वह कीमत अभिप्रेत है जो माल का खुले बाजार में विक्रय करने पर सामान्यत: प्राप्त होती है।"

17. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से "औद्योगिक उपक्रम" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

17क. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।

18. विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा 10.2.2006 से अंत:स्थापित।

19. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2000 द्वारा यथा अंत:स्थापित, स्पष्टीकरण इस प्रकार था:

"स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी, जो, यथास्थिति, उपक्रम या उद्यम के साथ की गर्इ संकर्म संविदा को निष्पादित करता है।"

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

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