आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80जजग

निर्यात कारबार के लिए प्रतिधारित लाभों की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80जजग

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2002

निर्यात कारबार के लिए प्रतिधारित लाभों की बाबत कटौती

निर्यात कारबार के लिए प्रतिधारित लाभों की बाबत कटौती

4[निर्यात कारबार के लिए प्रतिधारित लाभों की बाबत कटौती

580जजग. 6[(1) जहां कोर्इ निर्धारिती जो भारतीय कंपनी है या (कंपनी से भिन्न) ऐसा व्यक्ति है जो भारत में निवासी है, भारत के बाहर किसी ऐसे माल या वाणिज्या के निर्यात के कारबार में लगा है जिसको यह धारा लागू होती है, वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में ऐसे माल या वाणिज्या के निर्यात से निर्धारिती द्वारा प्राप्त 7[लाभों की उस सीमा तक जो उपधारा (1ख) में निर्दिष्ट है; कटौती] अनुज्ञात की जाएगी :

परन्तु यह कि यदि निर्धारिती, जो निर्यात गृह प्रमाणपत्र या व्यापार गृह प्रमाणपत्र का धारक है (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् यथास्थिति, निर्यात गृह या व्यापार गृह कहा गया है) उपधारा (4क) के खंड () में उल्लिखित यह प्रमाणपत्र देता है कि उसमें विनिर्दिष्ट निर्यात आवर्त की रकम की बाबत इस उपधारा के अन्तर्गत कटौती किसी पृष्ठपोषक विनिर्माता को अनुज्ञात की जाए तो निर्धारिती की दशा में कटौती की रकम में से ऐसी रकम घटा दी जाएगी 8[जिसका निर्धारिती को व्यापार माल के निर्यात से व्युत्पन्न कुल लाभ से वही अनुपात है जो उक्त प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट निर्यात-आवर्त की रकम का ऐसे व्यापार माल की बाबत निर्धारिती के कुल निर्यात-आवर्त से है]।

(1क) जहां निर्धारिती ने जो पृष्ठपोषक निर्माता है, पूर्ववर्ष के दौरान किसी निर्यात गृह या व्यापार गृह को किसी माल या वाणिज्या का विक्रय किया है जिसकी बाबत निर्यात गृह या व्यापार गृह ने उपधारा (1) के परन्तुक के अधीन प्रमाणपत्र जारी किया है वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में निर्यात गृह या व्यापार गृह को ऐसे माल या वाणिज्या के, जिसकी बाबत निर्यात गृह या व्यापार गृह ने प्रमाणपत्र दिया है, विक्रय किए जाने से निर्धारिती द्वारा प्राप्त किए गए 9[लाभों की उस सीमा तक, जो उपधारा (1ख) में निर्दिष्ट हैं कटौती] अनुज्ञात की जाएगी।

10[(1ख) उपधारा (1) और (1क) के प्रयोजनों के लिए लाभों की कटौती की सीमा–

(i) 1 अप्रैल, 2001 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके अस्सी प्रतिशत;

10क[(ii) 1 अप्रैल, 2002 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके सत्तर प्रतिशत;

(iii) 1 अप्रैल, 2003 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके पचास प्रतिशत;

(iv) 1 अप्रैल, 2004 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके तीस प्रतिशत;

के बराबर रकम की होगी और 1 अप्रैल, 2005 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]]

(2)(क) यह धारा खंड () में उल्लिखित माल या वाणिज्या से भिन्न सभी माल या वाणिज्या को लागू होती है, यदि भारत के बाहर निर्यात किए गए ऐसे माल या वाणिज्या के विक्रय आगम निर्धारिती 11[(पृष्ठपोषक विनिर्माता से भिन्न)] द्वारा संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में 12[पूर्ववर्ष की समाप्ति से छह मास की अवधि के भीतर या 13[ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो सक्षम प्राधिकारी इस संबंध में अनुज्ञात करे]] 14[भारत में प्राप्त किए जाते हैं या लाए जाते हैं]।

15[स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''सक्षम प्राधिकारी'' पद से भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी अभिप्रेत है जो विदेशी मुद्रा में संदायों और व्यवहारों को विनियमित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अंतर्गत प्राधिकृत है।]

(ख) यह धारा निम्नलिखित माल या वाणिज्या को लागू नहीं होती है, अर्थात् :–

(i) खनिज तेल; और

(ii) खनिज15क और अयस्क 16[(बारहवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट प्रसंस्कृत खनिजों और अयस्कों से भिन्न)]।

17[स्पष्टीकरण 1.–खंड () में उल्लिखित विक्रय आगम भारत में प्राप्त किए गए तब समझे जाएंगे जब ऐसे विक्रय आगम भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से भारत के बाहर किसी बैंक में निर्धारिती द्वारा उस प्रयोजन के लिए रखे गए पृथक् खाते में जमा किए जाते हैं।

स्पष्टीकरण 2.–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जहां किसी माल या वाणिज्या का किसी निर्धारिती द्वारा भारत के बाहर स्थित अपने किसी शाखा कार्यालय, भांडागार या किसी अन्य स्थापन को अंतरण किया जाता है और ऐसा माल या वाणिज्या ऐसे शाखा कार्यालय, भांडागार या स्थापन से विक्रय की जाती है वहां ऐसा अंतरण ऐसे माल और वाणिज्या का भारत के बाहर निर्यात समझा जाएगा और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 5018 की उपधारा (1) में उल्लिखित पोत पत्र या निर्यात पत्र में घोषित ऐसे माल या वाणिज्या का मूल्य इस धारा के प्रयोजनों के लिए उसके विक्रय आगम समझे जाएंगे।]

19[(3) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए,–

() जहां निर्धारिती द्वारा विनििर्र्मत 20[या प्रसंस्कृत] माल या वाणिज्या का भारत के बाहर निर्यात किया जाता है वहां ऐसे निर्यात से प्राप्त लाभ वह रकम होगी जिसका कारबार के लाभों से वही अनुपात है जो निर्यात-आवर्त का निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले कारबार के कुल आवर्त से है;

() जहां व्यापार माल का भारत के बाहर निर्यात किया जाता है वहां ऐसे निर्यात से प्राप्त लाभ ऐसे व्यापार माल के संबंध में वे निर्यात आवर्त होंगे जैसे वे ऐसे निर्यात से संबंधित प्रत्यक्ष लागत और अप्रत्यक्ष लागत को घटाकर आए;

() जहां निर्धारिती द्वारा विनिर्मित 21[या प्रसंस्कृत] माल या वाणिज्या का और व्यापार माल का भारत के बाहर निर्यात किया जाता है वहां ऐसे निर्यात से प्राप्त लाभ–

(i) निर्धारिती द्वारा विनिर्मित 21[या प्रसंस्कृत] माल या वाणिज्या के संबंध में वह रकम होगी जिसका कारबार के समायोजित लाभों से वही अनुपात है जो ऐसे माल के संबंध में समायोजित निर्यात-आवर्त का निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले कारबार के समायोजित कुल आवर्त से है; और

(ii) व्यापार माल की बाबत ऐसे व्यापार माल की बाबत वे निर्यात-आवर्त होंगे जैसे कि वे ऐसे व्यापार माल के निर्यात से संबंधित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागत को घटाकर आएं :

परन्तु इस उपधारा के खंड () या खंड () या खं () के अंतर्गत संगणित लाभ में ऐसी रकम और बढ़ा दी जाएगी जिसका धारा 28 के खंड (iiiक) में उल्लिखित राशि के (जो किसी अन्य व्यक्ति से अर्जित किसी अनुज्ञप्ति के विक्रय से लाभ नहीं है) और खंड (iiiख) और खंड (iiiग) में उल्लिखित राशि के नब्बे प्रतिशत से वही अनुपात है जो निर्यात-आवर्त का निर्धारिती द्वारा चलाए जाने वाले कारबार के कुल आवर्त से है।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,–

() ''समायोजित निर्यात-आावर्त'' से ऐसा निर्यात-आवर्त अभिप्रेत है जैसा कि वह व्यापार माल की बाबत निर्यात-आवर्त को घटाकर आए;

() ''कारबार के समायोजित लाभ'' से कारबार के ऐसे लाभ अभिप्रेत हैं जैसे कि वे व्यापार माल के भारत के बाहर निर्यात के कारबार से प्राप्त हुए लाभों को, जो उपधारा (3) के खंड () में उपबंधित रीति से संगणित किए जाएं, घटा कर आएं;

() ''समायोजित कुल आवर्त'' से कारबार का ऐसा कुल आवर्त अभिप्रेत है जैसा कि वह व्यापार माल की बाबत निर्यात-आवर्त को घटाकर आए;

() ''प्रत्यक्ष लागत'' से भारत के बाहर निर्यातित व्यापार माल से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित लागत अभिप्रेत है जिसके अंतर्गत ऐसे माल की क्रय कीमत भी है;

() ''अप्रत्यक्ष लागत'' से व्यापार माल के संबंध में निर्यात-आवर्त के उस अनुपात में, जो उसका कुल आवर्त से है, आबंटित लागत अभिप्रेत है जो प्रत्यक्ष लागत नहीं है;

() ''व्यापार माल'' से ऐसा माल अभिप्रेत है जो निर्धारिती द्वारा विनिर्मित 22[या प्रसंस्कृत] नहीं किया जाता है।]

23[(3क) उपधारा (1क) के प्रयोजनों के लिए, माल या वाणिज्या के विक्रयों से समर्थनकारी विनिर्माता द्वारा प्राप्त लाभ–

() उस दशा में जहां पृष्ठपोषक विनिर्माता द्वारा चलाए जा रहे कारबार में अनन्यत: एक या अधिक निर्यात गृहों और व्यापार गृहों को माल या वाणिज्या का विक्रय आता है वहां 24[* * *] कारबार के लाभ होंगे;

() उस दशा में जहां पृष्ठपोषक विनिर्माता द्वारा चलाए जा रहे कारबार में, अनन्यत: एक या अधिक निर्यात गृहों, व्यापार गृहों को माल या वाणिज्या का विक्रय नहीं आता है वहां वह रकम होगी जिसका 25[* * *] कारबार के लाभ से वही अनुपात है जो संबंधित निर्यात गृह या व्यापार गृह के विक्रय के बारे में आवर्त का निर्धारिती द्वारा किए जाने वाले कारबार के कुल आवर्त से है।]

26[(4) उपधारा (1) के अधीन कटौती तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट विहित फार्म27 में यह प्रमाणित करते हुए नहीं दे देता कि 28[इस धारा के उपबंधों के अनुसार] कटौती का सही दावा किया गया है।]

29[(4क) उपधारा (1क) के अंतर्गत कटौती तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक कि पृष्ठपोषक विनिर्माता अपनी आय की विवरणी के साथ विहित प्ररूप में निम्नलिखित नहीं दे देता, अर्थात्:–

30() धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि निर्यात गृह या व्यापार गृह को उसके माल या वाणिज्या के विक्रय के संबंध में पृष्ठपोषक निर्माता 31[के लाभों] के आधार पर कटौती का सही दावा किया गया है; और

() निर्यात गृह या व्यापार गृह से एक प्रमाणपत्र जिसमें ऐसी विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी जो विहित की जाएं और विहित रीति32 से यह सत्यापित होगा कि प्रमाणपत्र में उल्लिखित निर्यात-आवर्त के संबंध में निर्यात गृह या व्यापार गृह ने इस धारा के अंतर्गत कटौती का दावा नहीं किया है:

परन्तु खंड () में उल्लिखित प्रमाणपत्र इस अधिनियम के उपबंधों के अंतर्गत या किसी अन्य विधि के अंतर्गत निर्यात-गृह या व्यापार गृह के लेखाओं की संपरीक्षा करने वाले संपरीक्षक द्वारा विधिवत रूप से प्रमाणित किया जाएगा।]

33[(4ख) उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अंतर्गत कुल आय की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए इस अधिनियम के अधीन कर से प्रभारित न की गर्इ किसी आय को सम्मिलित नहीं किया जाएगा।]

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() ''संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा'' से अभिप्रेत है ऐसी विदेशी मुद्रा जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के प्रयोजनों के लिए तत्समय संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा मानी गर्इ है;

34[(कक) ''भारत के बाहर निर्यात'' के अंतर्गत भारत में स्थित किसी दुकान35, एम्पोरियम या किसी अन्य स्थापन में विक्रय के रूप में या अन्यथा कोर्इ ऐसा संव्यवहार नहीं आएगा जिसमें सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में परिभाषित किसी सीमा शुल्क स्टेशन36 पर निकासी अन्तर्वलित नहीं है;]

() ''निर्यात-आवर्त'' से ऐसे माल या वाणिज्या के, जिसको यह धारा लागू होती है और जिसका भारत के बाहर निर्यात किया जाता है, 37[उपधारा (2) के खंड () के अनुसार] निर्धारिती द्वारा संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में 38[भारत में प्राप्त किए गए या भारत में लाए गए] विक्रय आगम अभिप्रेत हैं किन्तु इसके अंतर्गत ऐसा भाड़ा या बीमा नहीं है, जो सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में परिभाषित सीमा शुल्क स्टेशन38क से परे माल या वाणिज्या के परिवहन के कारण हुआ माना जा सकता है;]

39[(खक) ''कुल आवर्त'' के अन्तर्गत ऐसा भाड़ा या बीमा नहीं आएगा जो सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में परिभाषित सीमा शुल्क स्टेशन38क से परे किसी माल या वाणिज्या के परिवहन के कारण हुआ माना जा सकता है :

परन्तु 1 अप्रैल, 1991 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में ''कुल आवर्त'' पद इस प्रकार प्रभावी होगा मानो इसके अंतर्गत धारा 28 के खंड (iiiक), खंड (iiiख) और खंड (iiiग) में उल्लिखित कोर्इ राशि न हो;]

40[(खकक) ''कारबार के लाभ'' से अभिप्रेत है ''कारबार या वृति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अंतर्गत संगणित कारबार के लाभ, जैसे कि वे निम्नलिखित को घटाकर आएं, अर्थात् :–

(1) धारा 28 के खंड (iiiक), (iiiख) और (iiiग) में उल्लिखित किसी राशि का अथवा दलाली, कमीशन, ब्याज, किराया, प्रभार या वैसी ही प्रकृति की किसी अन्य प्राप्ति के रूप में किन्हीं प्राप्तियों का, जो ऐसे लाभों में सम्मिलित हैं, नब्बे प्रतिशत; और

(2) भारत के बाहर स्थित निर्धारिती के किसी शाखा कार्यालय, भांडागार या किसी अन्य स्थापन के लाभ;]

41[* * *]

42[* * *]

43[44[()] ''निर्यात गृह प्रमाणपत्र'' या ''व्यापार गृह प्रमाणपत्र'' से भारत सरकार के मुख्य आयात निर्यात नियंत्रक द्वारा दिया गया, यथास्थिति, कोर्इ विधिमान्य निर्यात गृह प्रमाणपत्र या व्यापार गृह प्रमाणपत्र अभिप्रेत है;

44[()] ''पृष्ठपोषक विनिर्माता'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो भारतीय कंपनी या (कंपनी से भिन्न) भारत में निवासी कोर्इ व्यक्ति हो, जो 45[माल या वाणिज्या का विनिर्माण (जिसके अंतर्गत प्रसंस्करण भी है)] करता है और ऐसे माल या वाणिज्या का किसी निर्यात गृह या व्यापार गृह को निर्यात के प्रयोजन के लिए विक्रय करता है।]

 

4. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से प्रतिस्थापित। वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से यथा अंत:स्थापित मूल धारा निम्नलिखित रूप में थी :

'80जजग. निर्यात-आवर्त की बाबत कटौती–(1) जहां कोर्इ निर्धारिती, जो भारतीय कंपनी है या (कंपनी से भिन्न) भारत के निवासी कोर्इ व्यक्ति है, किसी निर्धारण वर्ष के सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान भारत के बाहर किसी ऐसे माल या वाणिज्या का निर्यात करता है जिसको यह धारा लागू होती वहां इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में निम्नलिखित कटौतियां अनुज्ञात की जाएंगी, अर्थात् :–

() पूर्ववर्ष के दौरान ऐसे माल या वाणिज्या के निर्यात-आवर्त के एक प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती; और

() उस रकम के पांच प्रतिशत के बराबर रकम की कटौती जिस तक पूर्ववर्ष के दौरान ऐसे माल या वाणिज्या का निर्यात-आवर्त ठीक पूर्ववर्ती पूर्ववर्ष के दौरान ऐसे माल या वाणिज्या के निर्यात-आवर्त से अधिक है;

(2)() यह धारा सभी माल या वाणिज्या को [उनको छोड़कर जो खंड (ख) में विनिर्दिष्ट हैं] लागू होती है, यदि भारत से बाहर निर्यात किए गए ऐसे माल या वाणिज्या के विक्रय आगम संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में निर्धारिती द्वारा प्राप्य हैं।

() खंड () में निर्दिष्ट माल और वाणिज्या निम्नलिखित हैं, अर्थात् :–

(i) कृषि संबंधी प्राथमिक वस्तुएं, जो बागान उत्पाद नहीं है;

(ii) खनिज तेल;

(iii) खनिज और अयस्क; और

(iv) ऐसे अन्य माल या वाणिज्या जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे।

(3) उपधारा (1) के खंड () के अधीन कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती ने, ठीक पूर्ववर्ती पूर्ववर्ष के दौरान भारत से बाहर ऐसा माल या वाणिज्या जिसको यह धारा लागू होती है निर्यात न किया हो।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जो तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) और तद्धीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तनीय मुद्रा मानी जाती है;

(ख) निर्यात-आवर्त से भारत से बाहर निर्यात किए गए कोर्इ माल या वाणिज्या के विक्रय आगम अभिप्रेत हैं किंतु इसके अंतर्गत सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में यथा परिभाषित सीमा शुल्क केन्द्र से आगे माल या वाणिज्या के परिवहन के लिए भाड़ा या बीमा नहीं है।'

5. पत्र [फा. सं. 178/206/83-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 22.5.1984, परिपत्र सं. 466, तारीख 14.8.1986, परिपत्र सं. 562, तारीख 23.5.1990, परिपत्र सं. 564, तारीख 5.7.1990, परिपत्र सं. 571, तारीख 1.8.1990, परिपत्र सं. 575, तारीख 31.8.1990, परिपत्र सं. 600, तारीख 23.4.1991, परिपत्र सं. 624, तारीख 23.1.1992, परिपत्र सं. 693, तारीख 17.11.1994, परिपत्र सं. 729, तारीख 1.11.1995 और परिपत्र सं. 1/2001, तारीख 17.1.2001 भी देखें। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

6. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, उपधारा (1) कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से संशोधित की गर्इ थी।

7. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से "लाभों की कटौती" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किया गया भाग प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से संशोधित किया गया था।

8. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से "जिसका निर्धारिती को निर्यात कारबार के कुुल लाभ से वही अनुपात है जो उक्त प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट निर्यात-आवर्त की रकम का निर्धारिती के कुल निर्यात-आवर्त से है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

9. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से "लाभों की कटौती" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व कोट किया गया भाग प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से संशोधित किया गया था।

10. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।

10क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। उनके प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (ii), (iii) और (iv) इस प्रकार थे :

"(ii) 1 अप्रैल, 2002 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके साठ प्रतिशत;

(iii) 1 अप्रैल, 2003 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके चालीस प्रतिशत;

(iv) 1 अप्रैल, 2004 को आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उसके बीस प्रतिशत;

के बराबर रकम की होगी।"

11. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

12. यथोक्त द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।

13. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से "जहां मुख्य आयुक्त" से प्रारम्भ होने वाले और "इस निमित्त अनुज्ञात करे" शब्दों के साथ समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से यथा अंत:स्थापित उक्त भाग निम्नलिखित रूप में था :

"जहां मुख्य आयुक्त या आयुक्त का (ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएं) यह समाधान हो जाता है कि निर्धारिती ऐसे कारणों से, जो उसके नियंत्रण से बाहर हैं, छह मास की उक्त अवधि के भीतर ऐसा करने में असमर्थ है वहां ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो मुख्य आयुक्त इस निमित्त अनुज्ञात करे"।

14. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से "प्राप्य हैं" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

15. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।

15क. "खनिज" पद के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

16. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।

17. यथोक्त द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

18. सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 50 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट एक

19. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से यथा प्रतिस्थापित उपधारा (3) निम्नानुसार थी :–

'(3) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, भारत के बाहर निर्यात किए गए माल या वाणिज्या से प्राप्त लाभ वह रकम होगी जिसका कारबार के लाभों से (जो "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणित की गर्इ हो) वही अनुपात है जो निर्यात आवर्त का निर्धारिती द्वारा चलाए जाने कारबार के कुल आवर्त से है।'

20. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

21. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

22. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

23. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

24. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से "'कारबार या वृति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अंतर्गत यथा संगणित' शब्दों का लोप किया गया।

25. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से '("कारबार या वृति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अंतर्गत यथा संगणित)' का लोप किया गया।

26. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।

27. लेखापाल की रिपोर्ट के फार्म के लिए नियम 18खखक(3) और फार्म सं. 10गगकग देखिए।

28. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से "निर्यात-आवर्त की रकम के आधार पर" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "सुसंगत अवधि के लिए भारत सरकार की आयात और निर्यात नीति के अनुसार यथा अवधारित शुद्ध विदेशी मुद्रा की वसूली" के स्थान पर "निर्यात-आवर्त" शब्द रखे गए थे।

29. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

30. लेखापाल की रिपोर्ट के फार्म के लिए नियम 18खखक(3) और फार्म सं. 10गगकग देखिए।

31. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "की आय" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

32. निर्यात/व्यापार गृह से पृष्ठपोषक विनिर्माता के प्रमाणपत्र के फार्म के लिए नियम 18खखक(2) और फार्म सं. 10गगकख देखिए।

33. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.1992 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

34. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1986 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

35. परिपत्र सं. 624, तारीख 23.1.1992 देखें। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

36. सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 2(13) में "सीमा शुल्क स्टेशन" को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया गया है :

'(13) "सीमा शुल्क स्टेशन" से कोर्इ सीमा शुल्क पत्तन, सीमा शुल्क विमान पत्तन या भू-सीमा शुल्क स्टेशन अभिप्रेत है;'

37. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से अन्त:स्थापित।

38. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से "प्राप्य" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

38क. सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 2(13) में "सीमा शुल्क स्टेशन" को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया गया है :

'(13) "सीमा शुल्क स्टेशन" से कोर्इ सीमा शुल्क पत्तन, सीमा शुल्क विमान पत्तन या, भू-सीमा शुल्क स्टेशन अभिप्रेत है;'

39. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

40. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

41. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से लोप किया। लोप से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से यथा अंत:स्थापित, खंड (खख) निम्नलिखित रूप में था :

'(खख) "कुल आवर्त" में धारा 28 के खंड (iiiक), (iiiख) और (iiiग) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि सम्मिलित नहीं की जाएगी;'

42. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से खंड () का लोप किया गया। मूल खंड () कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित किया गया था।

43. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

44. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से पुन:अक्षरांकित।

45. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से "माल या वाणिज्या का विनिर्माण" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

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