आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 80छ

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80छ

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

91कुछ निधियों, पूर्त संस्थाओं आदि को दान की बाबत कटौती

9280छ. 93[(1) किसी निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में94 इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए निम्नलिखित की कटौती की जाएगी, अर्थात् :–

95[(i) उस दशा में जिसमें धारा (2) में विनिर्दिष्ट राशियों के योग में उसके खंड () के 96[उपखंड (i) या] 97[उपखंड (iiiक) 98[या उपखंड (iiiकक) 99[या उपखंड (iiiकख)] 1[या उपखंड (iiiड़)] 2[या उपखंड (iiiच)] 3[या उपखंड (iiiछ)] 4[या उपखंड (iiiछक)] 5[या उपखंड (iiiज)] 6[या उपखंड (iiiजक) या उपखंड (iiiजख) या उपखंड (iiiजग)] 7[या उपखंड (iiiजघ)] 8[या उपखंड (iiiजड़)] 9[या उपखंड (iiiजच)] 10[या उपखंड (iiiजछ) या उपखंड (iiiजज)] 11[या उपखंड (iiiजझ)] 12[या उपखंड (iiiजञ)] या खंड () के उपखंड (vii) में 13[या खंड ()] 14[या खंड ()] में विनिर्दिष्ट कोर्इ राशि या राशियां सम्मिलित हैं, यथास्थिति, ऐसी संपूर्ण राशि के या ऐसी प्रकृति की राशियों के बराबर रकम धन ऐसे योग के अतिशेष का पचास प्रतिशत; और]

(ii) किसी अन्य दशा में, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट राशियों के योग के पचास प्रतिशत के बराबर रकम।]

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट राशियां निम्नलिखित होंगी, अर्थात् :–

() ऐसी कोर्इ राशियां,15 जो पूर्ववर्ष में निर्धारिती द्वारा निम्नलिखित को दान के रूप में संदत्त की गर्इ15 हैं,–

(i) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय रक्षा कोष; या

(ii) राष्ट्रीय समिति द्वारा 17 अगस्त, 1964 को हुए अपने अधिवेशन में अंगीकृत न्यास घोषणा विलेख में निर्दिष्ट जवाहरलाल नेहरू स्मारक निधि; या

(iii) प्रधानमंत्री का सूखा सहायता कोष; या

16[(iiiक) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष; या]

17[(iiiकक) प्रधानमंत्री आर्मेनिया भूकंप सहायता कोष; या]

18[(iiiकख) अफ्रीका (लोक अभिदाय-भारत) निधि; या]

19[(iiiख) राष्ट्रीय बाल निधि; या]

20[(iiiग) इंदिरा गांधी स्मारक न्यास जिसकी बाबत घोषणा विलेख नर्इ दिल्ली में 21 फरवरी, 1985 को रजिस्टर किया गया था; या]

21[(iiiघ) राजीव गांधी फाउंडेशन, जिसकी बाबत घोषणा विलेख 21 जून, 1991 को नर्इ दिल्ली में रजिस्टर किया गया था; या]

22[(iiiड़) राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान; या]

23[(iiiच) राष्ट्रीय महत्त्व का कोर्इ विद्यालय या कोर्इ शिक्षा संस्था, जो इस निमित्त विहित प्राधिकारी24 द्वारा अनुमोदित25 की जाए; या]

26[(iiiछ) 1 अक्तूबर, 1993 को आरम्भ होने वाली और 6 अक्तूबर, 1993 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान महाराष्ट्र मुख्यमंत्री सहायता कोष अथवा मुख्यमंत्री भूकंप सहायता कोष, महाराष्ट्र; या]

27[(iiiछक) गुजरात में भूकंप पीड़ितों को अनन्य रूप से राहत पहुंचाने के लिए गुजरात की राज्य सरकार द्वारा स्थापित कोर्इ कोष; या]

28[(iiiज) साक्षरता और साक्षरता के बाद के क्रियाकलापों और जिले के ग्रामों तथा कस्बों में प्राथमिक शिक्षा के संवर्धन के प्रयोजनों के लिए उस जिले के कलक्टर की अध्यक्षता के अधीन जिले में गठित जिला साक्षरता समिति।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''कस्बा'' से ऐसा कस्बा अभिप्रेत है जिसकी जनसंख्या उस पूर्व जनगणना के अनुसार एक लाख से अधिक न हो जिसके सुसंगत आंकड़े पूर्ववर्ष के प्रथम दिवस के पूर्व प्रकाशित हो गए हों; या]

29[(iiiजक) राष्ट्रीय रुधिर आधान परिषद या कोर्इ राज्य रुधिर आधान परिषद जिसका एकमात्र उद्देश्य भारत में आपरेशन और रक्त बैंकों की आवश्यकता से संबंधित सेवाओं का नियंत्रण, पर्यवेक्षण, विनियमन करना या उन्हें प्रोत्साहन प्रदान करना हो।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए,–

() ''राष्ट्रीय रुधिर आधान परिषद'' से ऐसी सोसाइटी अभिप्रेत है जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत हो और जिसका अध्यक्ष के रूप में अधिकारी, चाहे उसका कोर्इ भी पदनाम हो, भारत सरकार के अपर सचिव से कम पंक्ति का न हो और एड्स नियंत्रण परियोजना से संबंधित हो;

() ''राज्य रुधिर आधान परिषद'' से राष्ट्रीय रुधिर आधान परिषद के साथ परामर्श से सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन या भारत के किसी भी भाग में प्रवृत्त उस अधिनियम की तत्समान विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभिप्रेत है और जिसका अध्यक्ष के रूप में अधिकारी, चाहे उसका कोर्इ भी पदनाम हो, उस राज्य के सचिव से कम पंक्ति का न हो और वह स्वास्थ्य विभाग से संबंधित हो; या

(iiiजख) निर्धनों को चिकित्सीय सहायता प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्थापित कोर्इ कोष; या

(iiiजग) रक्षा बलों के वर्तमान और भूतपूर्व सदस्यों या उनके आश्रितों के कल्याण के लिए संघ के सशस्त्र बलों द्वारा स्थापित सेना केन्द्रीय कल्याण कोष या भारतीय नौसेना हितकारी कोष या वायुसेना केन्द्रीय कल्याण कोष; या]

30[(iiiजघ) आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री तूफान राहत कोष, 1996; या]

31[(iiiजड़) राष्ट्रीय रुग्णता सहायता कोष; या]

32[(iiiजच) यथास्थिति, किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की बाबत मुख्यमंत्री राहत कोष या उपराज्यपाल राहत कोष:

परन्तु यह कि ऐसा कोष,–

() यथास्थिति, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में स्थापित अपनी किस्म का एकमात्र कोष हो;

() यथास्थिति, राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के मुख्य सचिव या वित्त विभाग के समग्र नियंत्रण में हो;

() ऐसी रीति में प्रशासित हो जैसा कि, यथास्थिति, राज्य सरकार या उपराज्यपाल विनिर्दिष्ट करे; या]

33[(iiiजछ) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय खेलकूद कोष; या

(iiiजज) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय संस्कृति कोष; या]

34[(iiiजझ) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित प्रौद्योगिकी विकास और उपयोजन कोष, या]

35[(iiiजञ) राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तताग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तताग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास; या]

(iv) कोर्इ अन्य निधि या कोर्इ संस्था जिसे यह धारा लागू होती है; या

(v) सरकार को या किसी स्थानीय प्राधिकारी को किसी 36[परिवार नियोजन को प्रोन्नत करने के प्रयोजन से भिन्न] किसी पूर्त प्रयोजन के लिए उपयोगार्थ; 36[या]

37[38[(vi) आवास सुविधा की आवश्यकता के संबंध में कार्रवार्इ करने और उसे पूरा करने के प्रयोजनार्थ या शहरों, नगरों और गांवों की योजना बनाने, विकास या सुधार करने के प्रयोजनार्थ या दोनों के प्रयोजनार्थ अधिनियमित किसी विधि द्वारा या उसके अधीन भारत में गठित कोर्इ प्राधिकरण;]

39[(viक) धारा 10 के खंड (26खख) में निर्दिष्ट कोर्इ निगम; या]

(vii) सरकार को या किसी ऐसे स्थानीय प्राधिकारी, संस्था या संगम को, जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अनुमोदित करे, परिवार नियोजन को प्रोन्नत करने के प्रयोजन के लिए;]

() किसी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, गिरजाघर या ऐसे अन्य स्थान के, जिसका ऐतिहासिक, पुरातत्वीय या कलात्मक महत्त्व का होना अथवा किसी राज्य या राज्यों के सर्वत्र विख्यात लोक पूजा का स्थान होना केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित40 किया गया है, नवीकरण या मरम्मत के लिए दान के रूप में पूर्ववर्ष में निर्धारिती द्वारा भुगतान की गर्इ राशियां।

41[() निर्धारिती द्वारा जो कोर्इ कंपनी है, पूर्ववर्ष में दान के रूप में भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन या 42[भारत में स्थापित किसी अन्य एसोसिएशन या संस्था को, जिसे केन्द्रीय सरकार विहित मार्गदर्शक43 सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना44 द्वारा विनिर्दिष्ट करे] निम्नलिखित के लिए दी गर्इ कोर्इ राशियां,–

(i) भारत में क्रीड़ा और खेलकूद के संबंध में अवसंरचना के विकास के लिए; या

(ii) भारत में क्रीड़ा और खेलकूद के प्रयोजन के लिए;]

45[() निर्धारिती द्वारा 26 जनवरी, 2001 को प्रारम्भ और 30 सितंबर, 2001 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान गुजरात में भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए किसी ऐसे ट्रस्ट, संस्था या कोष में संदत्त कोर्इ राशियां, जिसे यह धारा लागू होती हो।]

(3) 46[वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से लोप किया गया।]

47[(4) जहां उपधारा (1) के खंड () के उपखंड (iv), उपखंड (v), उपखंड (vi), 48[उपखंड (viक)] और उपखंड (vii) में और 49[खंड () और खंड ()] में निर्दिष्ट राशियों का योग सकल कुल आय के (जिसमें से उसका वह भाग घटा दिया जाएगा जिस पर आय-कर इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन भुगतान योग्य नहीं है, और वह रकम भी घटा दी जाएगी जिसकी बाबत निर्धारिती इस अध्याय के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती का हकदार है) दस प्रतिशत से अधिक है तो वह रकम, जो सकल कुल आय के दस प्रतिशत से अधिक है, उन राशियों के योग की संगणना करने के प्रयोजन के लिए छोड़ दी जाएगी जिनकी बाबत उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात की जानी है।]

(5) यह धारा उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (iv) में निर्दिष्ट किसी संस्था को या निधि को दिए दान को केवल तभी लागू होती है जबकि वह किसी पूर्त प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित है और वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, अर्थात् :–

50[(i) जहां संस्था या निधि को कोर्इ आय होती है, वहां ऐसी आय धारा 11 और 12 या धारा 10 के 51[* * *] 52[53[* * *]] 54[या खंड (23कक)] 55[या खंड (23)] के उपबंधों के अधीन उसकी कुल आय में सम्मिलित नहीं की जा सकेगी :

56[परन्तु जहां किसी संस्था या निधि को होने वाली कोर्इ ऐसी आय है, जो कारबार का लाभ और अभिलाभ है, वहां यह शर्त कि ऐसी आय धारा 11 के उपबंधों के अधीन उसकी कुल आय में सम्मिलित नहीं की जा सकेगी, ऐसी आय के संबंध में तब लागू होगी जब,–

() वह संस्था या निधि ऐसे कारबार की बाबत पृथक लेखा बहियां रखती है;

() उस संस्था या निधि को किए गए दान का ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए उसके द्वारा प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: प्रयोग नहीं किया जाता है; और

() वह संस्था या निधि दान करने वाले व्यक्ति को इस आशय का प्रमाणपत्र जारी करती है कि वह ऐसे कारबार की बाबत पृथक लेखाबहियां रखती है और उसके द्वारा प्राप्त किए गए दान का ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: प्रयोग नहीं किया जाएगा;]

(ii) उस लिखत में, जिसके अधीन संस्था या निधि गठित की गर्इ है या संस्था अथवा निधि को शासित करने वाले नियमों में कोर्इ ऐसा उपबंध उल्लिखित नहीं है जो उस संस्था या निधि की संपूर्ण आय या आस्ति या उसके किसी भाग का किसी भी समय अंतरण या उपयोजन पूर्त प्रयोजन से भिन्न किसी भी प्रयोजन के लिए करने के लिए हो;

(iii) उस संस्था या निधि का, किसी विशिष्ट धार्मिक समुदाय या जाति के फायदे के लिए होना स्पष्ट नहीं है;

(iv) वह संस्था या निधि अपनी प्राप्तियों और व्यय के नियमित लेखे रखती है; 57[* * *]

(v) वह संस्था या निधि, जो लोक पूर्त न्यास के रूप में गठित हैं या सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन अथवा उक्त अधिनियम के समान किसी ऐसी विधि के अधीन जो भारत के किसी भाग में प्रवृत्त हो, या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 2558 के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या विधि द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय है या कोर्इ अन्य शिक्षा संस्था है जो सरकार से अथवा विधि द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय से मान्यताप्राप्त है, या विधि द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है 59[60[* * *]] या ऐसी संस्था है जो सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा पूर्णत: या भागत: वित्त पोषित है; 61[* * *]

62[(vi) 31 मार्च, 1992 के पश्चात् किए गए दानों के संबंध में, वह संस्था या निधि, उस निमित्त बनाए गए नियमों63 के अनुसार आयुक्त द्वारा तत्समय अनुमोदित है; 64[और]

64क[* * *]]

64ख[(vii) जहां किसी संस्था या निधि का 1 अप्रैल, 2007 से आरंभ होने वाले और 31 मार्च, 2008 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ष के लिए खंड (vi) के अधीन अनुमोदन किया गया था, वहां इस धारा के प्रयोजनों के लिए और धारा 2 के खंड (15) के परंतुक में किसी बात के होते हुए भी ऐसी संस्था या निधि—

() 1 अप्रैल, 2008 को आरंभ होने वाले और 31 मार्च, 2009 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ष के लिए पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित; और

() 1 अप्रैल, 2008 को आरंभ होने वाले और 31 मार्च, 2009 को समाप्त होने वाले पूर्ववर्ष के लिए उक्त खंड (vi) के अधीन अनुमोदित,

की गर्इ समझी जाएगी।]

65[(5क) जहां उपधारा (2) में उल्लिखित किसी राशि की बाबत किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस धारा के अधीन किसी कटौती का दावा किया जाता है और वह अनुज्ञात की जाती है वहां वह राशि जिसकी बाबत इस प्रकार कटौती अनुज्ञात की गर्इ है, उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के लिए अर्ह नहीं होगी।]

66[(5ख) उपधारा (5) के खंड (ii) और स्पष्टीकरण 3 में किसी बात के होते हुए भी, किसी पूर्ववर्ष में ऐसा खर्च उपगत करने वाली कोर्इ संस्था या निधि, जो धार्मिक प्रकृति की है, जो पूर्ववर्ष में उसकी कुल आय के पांच प्रतिशत से अधिक रकम की न हो, ऐसी संस्था या निधि समझी जाएगी जिसे इस धारा के उपबंध लागू होते हैं।]

67[(5ग) 68[यह धारा] उपधारा (2) के खंड () में निर्दिष्ट रकमों की बाबत केवल तब लागू होती है यदि न्यास या संस्था या निधि भारत में किसी पूर्त प्रयोजन के लिए स्थापित की गर्इ हो और निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हो, अर्थात् :–

(i) यह उपधारा (5) के खंड (vi) के निबंधनों के अनुसार अनुमोदित है;

(ii) यह गुजरात में भूकंप पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए आय और व्यय के पृथक् खाते रखती है;

(iii) न्यास या संस्था या निधि को दिए गए दानों का उपयोग केवल गुजरात के भूकंप पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए 31 मार्च, 69[2004] को या उसके पूर्व किया गया हो;

70[(iv) 31 मार्च, 69[2004] को संदाय की अनुपयोगित शेष रकम 31 मार्च, 69[2004] को या उसके पूर्व प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष में अंतरित कर दी गर्इ हो;]

(v) इसने अपनी आय और व्यय का हिसाब-किताब ऐसे प्राधिकारी के समक्ष और ऐसी रीति में 30 जून, 69[2004] को या उसके पूर्व प्रस्तुत किया हो, जो विहित किए जाएं।]

वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से धारा 80छ की उपधारा (5ग) के पश्चात्, निम्नलिखित उपधारा (5घ) अंत:स्थापित की जाएगी :

(5घ) इस धारा के अधीन दस हजार रुपए से अधिक की किसी राशि के दान के संबंध में कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी, जब तक ऐसी राशि का संदाय नकद से भिन्न किसी ढंग से नहीं किया जाता है।

स्पष्टीकरण 1अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जनजातियों के या स्त्रियों अथवा बच्चों के फायदे के लिए स्थापित किसी संस्था या निधि को ऐसी संस्था या निधि नहीं समझा जाएगा, जिसका कि उपधारा (5) के खंड (iii) के अर्थ में किसी धार्मिक समुदाय या जाति के फायदे के लिए होना अभिव्यक्त है।

71[स्पष्टीकरण 2शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि किसी कटौती से, जिसके लिए निर्धारिती किसी ऐसी संस्था या निधि को, जिसे उपधारा (5) लागू होती है, दिए गए किसी दान की बाबत हकदार है, निम्नलिखित में से किसी एक अथवा दोनों कारणों से ही इन्कार नहीं किया जाएगा, अर्थात्:–

72[(i) कि धारा 11, 73[धारा 12 या धारा 12क] के उपबंधों में से किसी के अननुपालन के कारण संस्था अथवा निधि की आय का कोर्इ भाग दान के बाद कर से प्रभार्य हो गया है;]

(ii) कि संस्था या निधि को धारा 13 की उपधारा (2) के खंड () में अंकित किसी विनिधान से प्राप्त होने वाली किसी आय के संबंध में धारा 11 74[या धारा 12] के अधीन दी जाने वाली छूट से धारा 13 की उपधारा (3) के खंड () के अधीन उस दशा में इन्कार किया जाता है जब उसके द्वारा उक्त खंड () में निर्दिष्ट किसी समुत्थान में विनिहित निधियों का योग उस समुत्थान की पूंजी के पांच प्रतिशत से अधिक न हो।]

स्पष्टीकरण 3.–इस धारा में ''पूर्त प्रयोजन'' के अंतर्गत ऐसा कोर्इ प्रयोजन नहीं है जो पूर्ण रूप से या पर्याप्तत: पूर्ण रूप से धार्मिक स्वरूप का है।

75[स्पष्टीकरण 4.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसा कोर्इ संगम या संस्था, जिसका उद्देश्य भारत में ऐसे खेलों या क्रीड़ाओं का, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, नियंत्रण, अधीक्षण, विनियमन या प्रोत्साहन करना है, भारत में पूर्त प्रयोजन के लिए स्थापित संस्था मानी जाएगी।]

76[स्पष्टीकरण 5.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के अधीन किसी दान की बाबत कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसा दान धन के रूप में नहीं है।]

(6) 77[* * *]

 

91. यह धारा, धारा 88 के स्थान पर, जिसका वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से लोप किया गया था, अंत:स्थापित की गर्इ थी। अब धारा 80ग का स्थान धारा 88 ने ले लिया है।

92. देखिये पत्र [फा.सं. 45/313/66-आर्इ.टी.जे.(61)], तारीख 2.12.1966, परिपत्र सं. 416, तारीख 11.4.1985, पत्र [फा.सं. 81/60/62-आर्इ.टी.], तारीख 11.12.1962, पत्र [फा.सं. 69/94/62-आर्इ.टी.], तारीख 14.1.1963, पत्र [फा.सं. 16/5/67-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 5.4.1967, परिपत्र सं. 178, तारीख 23.9.1975, पत्र [फा.सं. 69/22/63-आर्इ.टी.], तारीख 28.9.1963, पत्र [फा.सं. 69/13/62-आर्इ.टी.], तारीख 20.7.1962, पत्र [फा.सं. 69/34/62-आर्इ.टी.], तारीख 11.7.1962, पत्र सं. डब्ल्यू 110421/1/77सी एंड जी (एफ.पी.), तारीख 11.1.1977, परिपत्र सं. 678, तारीख 10.2.1994, परिपत्र सं. 752, तारीख 26.3.1997, परिपत्र सं. 777, तारीख 1.7.1999, परिपत्र सं. 782, तारीख 13.11.1999, परिपत्र सं. 4/2001, तारीख 12.2.2001, परिपत्र सं. 7/2001, तारीख 21.3.2001 और परिपत्र सं. 2/2005, तारीख 12.1.2005 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

93. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से प्रतिस्थापित। इससे पहले, इसे कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से प्रतिस्थापित किया गया था।

94. 'किसी निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में' पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

95. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से प्रतिस्थापित।

96. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

97. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से मूल स्थिति में पुन:स्थापित। इससे पूर्व, इसे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से प्रतिस्थापित किया गया था।

98. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 24.1.1989 से अंत:स्थापित।

99. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।

1. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।

2. यथोक्त द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित।

3. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित।

4. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

5. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से अंत:स्थापित।

6. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।

7. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1996 द्वारा 14.11.1996 से अंत:स्थापित।

8. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।

9. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।

10. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।

11. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

12. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

13. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।

14. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

15. "कोर्इ राशि ................. संदत्त की गर्इ" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

16. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा 9.9.1975 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

17. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 24.1.1989 से अंत:स्थापित।

18. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।

19. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित।

20. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।

21. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

22. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित। इससे पहले उपखंड (iiiड़) का प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया था और इसके पूर्व प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से उसे अंत:स्थापित किया गया था।

23. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित।

24. नियम 18ककक के अधीन विहित प्राधिकारी निम्नानुसार है : किसी विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय महत्त्व की किसी गैर-तकनीकी संस्था के लिए–महानिदेशक (आय-कर छूट), सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सहमति से; राष्ट्रीय महत्त्व के किसी अन्य तकनीकी संस्था के लिए–महानिदेशक (आय-कर छूट), सचिव, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की सहमति से।

25. अधिसूचित शैक्षिक संस्था के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

26. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित।

27. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

28. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से अंत:स्थापित।

29. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।

30. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1996 द्वारा 14.11.1996 से अंत:स्थापित।

31. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।

32. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।

33. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से उपखंड (iiiजछ) और (iiiजज) अंत:स्थापित।

34. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

35. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।

36. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित।

37. यथोक्त द्वारा खंड (vi) और (vii) अंत:स्थापित।

38. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपखंड (vi) इस प्रकार था:

"(vi) धारा 10 के खंड (20) में निर्दिष्ट कोर्इ प्राधिकारी; या"

39. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

40. इस खंड के अधीन अधिसूचित सार्वजनिक पूजा के स्थानों आदि के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ सरकुलर्स।

41. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।

42. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 10 के खंड (23) के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य एसोसिएशन या संस्था को" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

43. देखिये नियम 18ककककक।

44. अधिसूचित खेल संगमों/संस्थाओं के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इंकम टैक्स एक्ट।

45. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

46. लोप किए जाने के पूर्व उपधारा (3) निम्नानुसार थी :

"(3) उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी, यदि उपधारा (2) में निर्दिष्ट राशियों का योग दो सौ पचास रुपए से कम है।"

47. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पूर्व उपधारा (4) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1968 से भूतलक्षी प्रभाव से और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1978 से यथासंशोधित और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से यथाप्रतिस्थापित की गयी थी।

48. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

49. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से "खंड ()" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

50. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अपनी मूल उपबंध के रूप में पुन:स्थापित। इससे पूर्व, इसे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से प्रतिस्थापित किया गया था।

51. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से "या खंड (22) या खंड (22)" शब्दों का लोप किया गया। इससे पूर्व, "या खंड (22)" वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित किया गया था।

52. वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1974 से अंत:स्थापित।

53. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "या खंड (23)" शब्दों का लोप किया गया।

54. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।

55. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।

56. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।

57. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से "और" शब्द का लोप किया गया।

58. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट।

59. वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1974 से अंत:स्थापित। प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से इसकी मूल स्थिति में पुन:स्थापित। इससे पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से इसका लोप किया गया था।

60. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "या कोर्इ ऐसी संस्था है जो धारा 10 के खंड (23) के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है" शब्दों का लोप किया गया।

61. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से "और" शब्द का लोप किया गया। इससे पूर्व, यह वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित।

62. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से अंत:स्थापित।

63. नियम 11कक और प्ररूप सं. 10छ देखिए।

64. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से अंत:स्थापित।

64क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से परन्तुक का लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से यथा संशोधित परन्तुक इस प्रकार था:

"परन्तु ऐसा कोर्इ अनुमोदन पांच निर्धारण वर्षों से अनधिक ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए प्रभावी होगा जो अनुमोदन में उल्लिखित किए जाएं।"

64ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से अंत:स्थापित।

65. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

66. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

67. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2001 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

68. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से "यह उपधारा" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

69. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से "2003" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 3.2.2001 से "2002" के स्थान पर "2003" प्रतिस्थापित किया गया था।

70. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 3.2.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, खंड (iv) इस प्रकार था :

"(iv) दान की 31 मार्च, 2002 को शेष अप्रयुक्त रकम 31 मार्च, 2002 को या इसके पूर्व प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में अंतरित कर दी गर्इ हो;"

71. वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से प्रतिस्थापित।

72. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से इसकी मूल स्थिति में पुन:स्थापित। इससे पूर्व, खंड (i) और (ii) प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से प्रतिस्थापित किए गए थे।

73. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1973 से अंत:स्थापित।

74. वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1973 से अंत:स्थापित।

75. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, स्पष्टीकरण जो वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1974 से अंत:स्थापित किया गया था, जिसका बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया था तथा जिसे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से इसकी मूल स्थिति में पुन:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था:

"स्पष्टीकरण 4.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 10 के खंड (23) के प्रयोजनार्थ केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित संगम को भी संस्था समझा जाएगा और उक्त खंड के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित प्रत्येक संगम या संस्था पूर्त प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित संस्था समझी जाएगी।"

76. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।

77. वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से लोप किया गया।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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