आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 80ड़ड़

आवासीय गृह संपत्ति के लिए, लिए गए ऋण पर ब्याज की बाबत कटौती

धारा

धारा संख्या

80ड़ड़

अध्याय शीर्षक

अध्याय VIक - कुल आय की गणना में की जाने वाली कटौतियाँ

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2013

आवासीय गृह संपत्ति के लिए, लिए गए ऋण पर ब्याज की बाबत कटौती

आवासीय गृह संपत्ति के लिए, लिए गए ऋण पर ब्याज की बाबत कटौती

वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2014 से धारा 80ड़ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 80ड़ड़ अंत:स्थापित की जाएगी :

आवासीय गृह संपत्ति के लिए, लिए गए ऋण पर ब्याज की बाबत कटौती

80ड़ड़. (1) किसी निर्धारिती की, जो कोर्इ व्यष्टि हो, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, उसके द्वारा किसी आवासीय गृह संपित्त़ के अर्जन के प्रयोजन के लिए किसी वित्तीय संस्था से लिए गए ऋण पर संदेय ब्याज की कटौती की जाएगी।

(2) उपधारा (1) के अधीन कटौती एक लाख रुपए से अधिक की नहीं होगी और व्यष्टि की 1 अप्रैल, 2014 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी और ऐसे किसी मामले में, जहां उक्त निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए संदेय ब्याज एक लाख रुपए से कम है तो अतिशेष रकम 1 अप्रैल, 2015 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष में अनुज्ञात की जाएगी।

(3) उपधारा (1) के अधीन कटौती निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगी, अर्थात्:–

(i) ऋण वित्तीय संस्था द्वारा 1 अप्रैल, 2013 को आरंभ और 31 मार्च, 2014 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान मंजूर किया गया है;

(ii) आवासीय गृह संपत्ति के अर्जन के लिए मंजूर की गर्इ ऋण की रकम पच्चीस लाख रुपए से अधिक नहीं है;

(iii) आवासीय गृह संपत्ति का मूल्य चालीस लाख रुपए से अधिक नहीं है;

(iv) निर्धारिती के स्वामित्व में ऋण मंजूर किए जाने की तारीख को कोर्इ आवासीय गृह संपत्ति नहीं है।

(4) जहां इस धारा के अधीन उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी ब्याज के लिए कटौती अनुज्ञात की जाती है, वहां उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन ऐसे ब्याज की बाबत कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

(क) 'वित्तीय संस्था' से ऐसी कोर्इ बैंककारी कंपनी अभिप्रेत है जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है, जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था या कोर्इ आवासीय वित्त कंपनी भी है;

(ख) 'आवासीय वित्त कंपनी' से भारत में आवासीय प्रयोजनों के लिए मकानों के सन्निर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करने के मुख्य उद्देश्य से भारत में बनार्इ गर्इ या रजिस्ट्रीकृत ऐसी कोर्इ पब्लिक कंपनी अभिप्रेत है।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट