उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती
73[उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार के चुकाने की बाबत कटौती
80ड़. (1) किसी ऐसे निर्धारिती की, जो व्यष्टि है, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, अपनी उच्चतर शिक्षा जारी रखने के प्रयोजन के लिए किसी वित्तीय संस्था या अनुमोदित पूर्त संस्था से उसके द्वारा लिए गए उधार या ऐसे उधार पर ब्याज की वापसी के रूप में उसके द्वारा पूर्ववर्ष में किए गए किसी भुगतान की रकम की, कर से प्रभार्य उसकी आय में से कटौती की जाएगी :
परन्तु ऐसी रकम जिसकी इस प्रकार कटौती की जा सकेगी 74[चालीस] हजार रुपए से अधिक नहीं होगी।
(2) उपधारा (1) में उल्लिखित कटौती, आरंभिक निर्धारण वर्ष और ऐसे आरंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के सात निर्धारण वर्षों की बाबत या उपधारा (1) में निर्दिष्ट उधार और साथ ही उस पर ब्याज के निर्धारिती द्वारा पूर्णतया भुगतान किए जाने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) ''अनुमोदित पूर्त संस्था'' से अभिप्रेत है, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23ग) में निर्दिष्ट संस्था या उसके अधीन पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित और केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित संस्था अथवा धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड (क) में उल्लिखित कोर्इ संस्था;
(ख) ''वित्तीय संस्था'' से अभिप्रेत है कोर्इ ऐसी बैंककारी कंपनी जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी शामिल है) या कोर्इ ऐसी अन्य वित्तीय संस्था, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र75 में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त उल्लिखित करे;
(ग) 75''उच्चतर शिक्षा'' से इंजीनियरी, मेडिकल साइंस, प्रबंध में किसी स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए या अनुप्रयुक्त विज्ञान या शुद्ध विज्ञान में, जिसमें गणित और सांख्यिकी सम्मिलित है, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए पूर्णकालिक अध्ययन अभिप्रेत है;
(घ) ''आरम्भिक निर्धारण वर्ष'' से ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जिसमें निर्धारिती उधार या उस पर ब्याज चुकता करना आरम्भ करता है।]
वित्त अधिनियम 2005 द्वारा 1.4.2006 से विद्यमान धारा 80ड़ के स्थान पर निम्नलिखित धारा 80ड़ रखी जाएगी:
उच्चतर शिक्षा हेतु लिए गए उधार पर ब्याज की बाबत कटौती
80ड़. (1) किसी ऐसे निर्धारिती की, जो व्यष्टि है, कुल आय की संगणना करने में, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए अपनी उच्चतर शिक्षा जारी रखने के प्रयोजन के लिए किसी वित्तीय संस्था या किसी अनुमोदित पूर्त संस्था से उसके द्वारा लिए गए उधार पर ब्याज के रूप में पूर्ववर्ष में उसके द्वारा संदत्त किसी रकम की कर से प्रभार्य उसकी आय में से कटौती की जाएगी।
(2) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कटौती आरम्भिक निर्धारण वर्ष और ऐसे आरंभिक निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के सात निर्धारण वर्षों के संबंध में या निर्धारिती द्वारा उपधारा (ं1) में निर्दिष्ट ब्याज के पूर्ण रूप से संदत्त किए जाने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, कुल आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाएगी।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "अनुमोदित पूर्त संस्था" से, यथास्थिति, धारा 10 के खंड (23ग) में विनिर्दिष्ट संस्था या उसके अधीन पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित और केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित संस्था अथवा धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड (क) में निर्दिष्ट कोर्इ संस्था अभिप्रेत है;
(ख) "वित्तीय संस्था" से कोर्इ ऐसी बैंककारी कंपनी, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी सम्मिलित है) या कोर्इ ऐसी अन्य वित्तीय संस्था अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
(ग) "उच्चतर शिक्षा" से इंजीनियरी, मेडिकल साइंस, प्रबंधन में किसी स्नातक या स्नातकोत्तर पाठîक्रम के लिए या प्रयुक्त विज्ञान या शुद्ध विज्ञान में, जिसमें गणित और सांख्यिकी सम्मिलित है, स्नातकोत्तर पाठîक्रम के लिए पूर्णकालिक अध्ययन अभिप्रेत है;
(घ) "आरंभिक निर्धारण वर्ष" से ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है जिसमें निर्धारिती उधार पर ब्याज चुकता करना आरंभ करता है।
73. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व में, ''सेवानिवृत्ति वार्षिकियां प्राप्त करने के लिए संदाय की बाबत कटौती'' शीर्षक के साथ धारा 80ड़ वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। बाद में वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से और वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से तथा बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से धारा 80ड़ का संशोधन किया गया था। यह विषय मूल धारा 80ग से संबंधित है, जिसे वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित किया गया था।
74. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से ''पच्चीस'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
75. परिपत्र सं. 688, तारीख 23.8.1994 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

