स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के संबंध में कटौती
64[चिकित्सीय उपचार आदि की बाबत कटौती
80घघख. जहां किसी निर्धारिती ने जो भारत में निवासी है, बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों65 में विनिर्दिष्ट रोग या व्याधि के इलाज के संबंध में पूर्ववर्ष के दौरान कोर्इ व्यय,–
(क) यदि निर्धारिती व्यष्टि है तो स्वयं या आश्रित नातेदार के लिए; या
(ख) यदि निर्धारिती हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है तो हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के किसी सदस्य के लिए,
66[वस्तुत:] उपगत किया है, वहां निर्धारिती को उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें ऐसा व्यय उपगत हुआ 67[चालीस] हजार रुपए की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु ऐसी कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती ऐसे प्राधिकारी से ऐसे फार्म68 में प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं करता, जो विहित किया जाए69 :
70[परन्तु यह और कि इस धारा के अधीन कटौती में से उतनी राशि, यदि कोर्इ हो, जो खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्ति के चिकित्सीय उपचार के लिए किसी बीमाकर्ता से किसी बीमा के अधीन प्राप्त की जाती है, कम कर दी जाएगी:
परन्तु यह भी कि जहां उपगत व्यय निर्धारिती या उसके आश्रित नातेदार या निर्धारिती के हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के किसी सदस्य जो वरिष्ठ नागरिक हो, के संबंध में है, वहां इस धारा के उपबंधों का इस प्रकार प्रभाव होगा मानो "चालीस हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर "साठ हजार रुपए" रखे गए हों।]
71[स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "आश्रित" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो अपने रखरखाव या भरण-पोषण के लिए निर्धारिती से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति पर आश्रित नहीं है;
(ii) "बीमाकर्ता" का वही अर्थ है जो उसका बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 2 के खंड (9)72 में है;
(iii) "वरिष्ठ नागरिक" से भारत में निवासी ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसकी आयु सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय पैंसठ वर्ष या उससे अधिक है।]]
वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से विद्यमान धारा 80घघख के स्थान पर निम्नलिखित धारा 80घघख प्रतिस्थापित की जाएगी:
चिकित्सीय उपचार आदि की बाबत कटौती
80घघख. जहां किसी निर्धारिती ने, जो भारत में निवासी है, ऐसे रोग या व्याधि के, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट की जाए, चिकित्सीय उपचार के लिए पूर्ववर्ष के दौरान किसी रकम का–
(क) अपने लिए या किसी आश्रित के लिए, यदि निर्धारिती कोर्इ व्यष्टि है; या
(ख) किसी हिंदु अविभक्त कुटुंब के किसी सदस्य के लिए, यदि निर्धारिती कोर्इ हिंदू अविभक्त कुटुंब है,
वास्तव में भुगतान किया है वहां निर्धारिती को उस पूर्ववर्ष की बाबत, जिसमें ऐसी रकम का भुगतान किया गया था, वास्तव में भुगतान की गर्इ रकम की या चालीस हजार रुपए की राशि की, इनमें से जो भी कम हो, कटौती अनुज्ञात की जाएगी:
परन्तु ऐसी कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती आय-कर की विवरणी के साथ ऐसे प्रारूप में, जो विहित किया जाए, किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत किसी तंत्रिका विज्ञानी, किसी अर्बुद विज्ञानी, किसी मूत्ररोग विज्ञानी, किसी रुधिर विज्ञानी, किसी प्रतिरक्षा विज्ञानी या ऐसे अन्य विशेषज्ञ का, जो विहित किया जाए, प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं कर देता है:
परन्तु यह और कि इस धारा के अधीन कटौती में से उतनी राशि, यदि कोर्इ हो जो खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्ति के चिकित्सीय उपचार के लिए किसी बीमाकर्ता से किसी बीमा के अधीन प्राप्त की जाती है या जिसकी किसी नियोक्ता द्वारा प्रतिपूर्ति की जाती है, कम कर दी जाएगी:
परन्तु यह भी कि जहां रकम का वास्तव में निर्धारिती या उसके आश्रित या निर्धारिती के किसी हिंदू अविभक्त कुटुंब के किसी सदस्य की बाबत, जो एक वरिष्ठ नागरिक है, भुगतान किया गया है, वहां इस धारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "चालीस हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर "साठ हजार रुपए" शब्द रखे गए हों।
स्पष्टीकरण,– इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "आश्रित" से अभिप्रेत है,–
(क) किसी व्यष्टि की दशा में, व्यष्टि की पत्नी या का पति, बच्चे, माता-पिता, भार्इ और बहनें या उनमें से कोर्इ;
(ख) हिंदू अविभक्त कुटुंब की दशा में, हिन्दू अविभक्त कुटुंब का कोर्इ सदस्य,
जो अपनी सहायता और भरण-पोषण के लिए ऐसे व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब पर पूर्णत: या मुख्यत: आश्रित है;
(ii) "सरकारी अस्पताल" के अंतर्गत सरकारी सेवकों के किसी वर्ग या वर्गों और उनके कुटुंब के सदस्यों की चिकित्सीय परिचर्या और उपचार के लिए सरकार के किसी विभाग द्वारा स्थापित और चलाया जा रहा पूर्णकालिक या अंशकालिक कोर्इ विभागीय औषधालय, किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुरक्षित कोर्इ अस्पताल और ऐसा कोर्इ अन्य अस्पताल, जिसमें सरकारी सेवकों के उपचार के लिए सरकार द्वारा प्रबंध किया गया है, आता है;
(iii) "बीमाकर्ता" का वही अर्थ है जो उसका बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 2 के खंड (9) में है ;
(iv) "वरिष्ठ नागरिक" से भारत में निवासी ऐसा व्यष्टि अभिप्रेत है जो सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय पैंसठ वर्ष या अधिक आयु का है।
64. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
65. विनिर्दिष्ट रोगों के लिए नियम 11घघ देखें।
66. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
67. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से "पंद्रह" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
68. फार्म 10झ देखिए।
69. विहित प्राधिकारी है : 'इंडियन मैडिकल एसोसिएशन से स्नातकोत्तर अर्हताओं के साथ रजिस्ट्रीकृत कोर्इ डॉक्टर'।
70. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
71. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण निम्नानुसार था :
"स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "आश्रित" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो अपने रखरखाव और भरणपोषण के लिए निर्धारिती से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति पर आश्रित नहीं है।"
72. बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 2(9) के अधीन "बीमाकर्ता" की परिभाषा के लिए देखिए परिशिष्ट एक।
[वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा संशोधित रूप में]

