ऐसे किसी आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, चिकित्सीय उपचार सहित भरण-पोषण की बाबत कटौती
ऐसे किसी आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, चिकित्सीय उपचार सहित भरण-पोषण की बाबत कटौती
80घघ. (1) जहां किसी निर्धारिती ने, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है और भारत में निवासी है, पूर्ववर्ष के दौरान,–
(क) कोई व्यय किसी आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, चिकित्सीय उपचार (जिसके अंतर्गत परिचर्या भी है), प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए किया है; या
(ख) जीवन बीमा निगम या किसी अन्य बीमाकर्ता या प्रशासक या विनिर्दिष्ट कंपनी द्वारा उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन रहते हुए आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, भरण-पोषण के लिए इस निमित्त बनाई गई और बोर्ड द्वारा अनुमोदित किसी स्कीम के अधीन कोई रकम संदत्त या जमा की है,
वहां निर्धारिती को इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, पूर्ववर्ष की बाबत उसकी सकल कुल आय से पचहत्तर हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परंतु जहां ऐसा आश्रित गंभीर नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति है वहां इस उपधारा के उपबंधों का प्रभाव इस प्रकार होगा मानों ''पचहत्तर हजार रुपए'' शब्दों के स्थान पर ''एक लाख पच्चीस हजार'' रखे गए हों।
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन कटौती केवल तभी अनुज्ञात की जाएगी यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी जाती हैं, अर्थात्:–
(क) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट स्कीम में ऐसे किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब के सदस्य की, जिसके नाम में स्कीम में अभिदाय किया गया है, मृत्यु की दशा में किसी आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, फायदे के लिए वार्षिकी या एकमुश्त राशि के संदाय का उपबंध है;
वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा 1.4.2023 से धारा 80घघ की उपधारा (2) के खंड (क) के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जाएगा।
(क) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट स्कीम आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, फायदे के लिए वार्षिकी या एकमुश्त रकम के संदाय का उपबंध करती हैं-
(i) किसी व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब के किसी सदस्य की मृत्यु की दशा में, जिसके नाम पर स्कीम में अभिदाय किया गया है; या
(ii) ऐसे व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब के सदस्य की साठ वर्ष या उससे अधिक की आयु होने पर तथा ऐसी स्कीम में संदाय या निक्षेप बंद कर दिया गया है।
(ख) निर्धारिती ऐसे आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, फायदे के लिए आश्रित का, जो नि:शक्त व्यक्ति है, अथवा उसकी ओर से संदाय प्राप्त करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या किसी न्यास को नामनिर्देशित करता है।
(3) यदि आश्रित की, जो नि:शक्त व्यक्ति है, उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यष्टि या हिन्दु अविभक्त कुटुंब के सदस्य से पहले मृत्यु हो जाती है तो उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन संदत्त या जमा की गई रकम के बराबर रकम को उस पूर्ववर्ष में, जिसमें ऐसी रकम निर्धारिती द्वारा प्राप्त की जाती है, निर्धारिती की आय समझा जाएगा और तदनुसार वह उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर से प्रभार्य होगी।
वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा 1.4.2023 से धारा 80घघ की उपधारा (3) के पश्चात् उपधारा (3क) अंत:स्थापित कि जाएगी।
(3क) उपधारा (3) के उपबंध आश्रित द्वारा, जो नि:शक्त व्यक्ति है, उसकी मृत्यु के पूर्व, उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट शर्तों को लागू करके वार्षिकी या एकमुश्त के माध्यम से प्राप्त रकम को लागू नही होंगे।
(4) निर्धारिती, जो इस धारा के अधीन कटौती का दावा करता है, उस निर्धारण वर्ष की बाबत, जिसके लिए कटौती का दावा किया गया है, धारा 139 के अधीन आय की विवरणी के साथ चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा विहित प्ररूप और रीति में जारी प्रमाणपत्र की प्रति भी देगा:
परंतु जहां नि:शक्तता की स्थिति का, पूर्वोक्त प्रमाणपत्र में नियत अवधि के पश्चात् पुनर्निर्धारण अपेक्षित हो, वहां उस पूर्ववर्ष की, जिसके दौरान नि:शक्तता का पूर्वोक्त प्रमाणपत्र समाप्त हुआ था, समाप्ति के पश्चात् आरम्भ होने वाले किसी पूर्ववर्ष से संबंधित किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस धारा के अधीन कोई कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि चिकित्सा प्राधिकारी से, ऐसे प्रारूप और रीति में, जो विहित की जाए, नया प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं किया जाता है और आय की विवरणी के साथ उसकी एक प्रति नहीं दे दी जाती है।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) ''प्रशासक से भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड (क) में निर्दिष्ट प्रशासक अभिप्रेत है;
(ख) ''आश्रित'' से अभिप्रेत है,–
(i) किसी व्यष्टि की दशा में, व्यष्टि का पति/की पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई और बहनें या उनमें से कोई;
(ii) किसी हिन्दू अविभक्त कुटुंब की दशा में, हिन्दू अविभक्त कुटुंब का कोई सदस्य,
जो अपनी सहायता और भरण-पोषण के लिए ऐसे व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब पर पूर्णत: या मुख्यत: आश्रित है और जिसने पूर्ववर्ष से संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए अपनी कुल आय की संगणना करने में धारा 80प के अधीन किसी कटौती का दावा नहीं किया है;
(ग) ''नि:शक्तता'' का वही अर्थ है जो उसका नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (झ) में है और इसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 के खंड (क), खंड (ग) और खंड (ज) में उल्लिखित "स्वपरायणता", "प्रमस्तिष्क घात" और "बहु-नि:शक्तता" भी है।
(घ) ''जीवन बीमा निगम'' का वही अर्थ है जो धारा 88 की उपधारा (8) के खंड (iii) में है;
(ड़) ''चिकित्सा प्राधिकारी'' से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (त) में निर्दिष्ट चिकित्सा प्राधिकारी अभिप्रेत है या ऐसा अन्य चिकित्सा प्राधिकारी अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 के खंड (क), खंड (ग), खंड (ज), खंड (ञ) और खंड (ण) में उल्लिखित 'स्वपरायणता', 'प्रमस्तिष्क घात', 'बहु-नि:शक्तता', 'नि:शक्त व्यक्ति' और 'गंभीर नि:शक्तता' को प्रमाणित करने के लिए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए;
(च) ''नि:शक्त व्यक्ति'' से नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 2 के खंड (न) में या राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 के खंड (ञ) में निर्दिष्ट व्यक्ति अभिप्रेत है;
(छ) "गंभीर रूप से नि:शक्त व्यक्ति" से,–
(i) नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (1996 का 1) की धारा 56 की उपधारा (4) में उल्लिखित नि:शक्तताओं में से किसी एक या अधिक नि:शक्तताओं के अस्सी या अधिक प्रतिशत नि:शक्तता से ग्रस्त व्यक्ति; या
(ii) राष्ट्रीय स्वपरायणता, प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-नि:शक्तता ग्रस्त व्यक्ति कल्याण न्यास अधिनियम, 1999 (1999 का 44) की धारा 2 के उपखंड (ण) में उल्लिखित गंभीर रूप से नि:शक्त व्यक्ति,
अभिप्रेत है;
(ज) ''विनिर्दिष्ट कंपनी'' से भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रमों का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड (ज) में निर्दिष्ट कंपनी अभिप्रेत है।
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

